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नमिता मुस्कुरा कर: उसकी बुर की तो सेवा कर दी, अपने हथियार की सेवा करवाए की नहीं?
सुधाकर हँसते हुए: हा हा , वह भी हो गयी। उसने बड़े प्यार से मेरा लौड़ा चूसा और पूरा रस पी लिया। इसी लिए तो इतना शांत बैठा हूँ। वैसे साक्षी बहुत अच्छा चूसती है।
नमिता: चलो आपको मज़ा आ गया ये बढ़िया हो गया।
सुधाकर: हाँ सो तो है। तुमने तो बहुत दिन से मेरा लौड़ा नहीं चूसा है अच्छे से?
नमिता: आपको छोटी उम्र की लौंडियाँ तो मिली हुई है, उनसे ही मज़ा लीजिए। अच्छा अब मैं जाती हूँ। अपना काम ख़त्म करके आज भी जल्दी जाऊँगी।
सुधाकर: हाँ हाँ कोई बात नहीं। चली जाना। पर ये तो बताओ आज पैंटी किस रंग की पहनी है?
नमिता: ये क्या बात हुई?
सुधाकर: प्लीज़ बताओ ना।
नमिता: काले रंग की।
सुधाकर: वाह ! गोरे रंग की जाँघों पर काली पैंटी तो ग़ज़ब ढा रही होगी। चलो ना ज़रा साड़ी उठाके दिखा दो एक मिनट के लिए।
नमिता हैरान होकर: क्या बच्चों जैसे बात कर रहे हैं?
सुधाकर: प्लीज़ प्लीज़ एक बार दिखा दो ना।
नमिता: दरवाज़ा खुला है, कोई आ गया तो?
वह: अरे बंद कर दो ना उसको ।’
नमिता ने दरवाज़ा बंद किया और अपनी साड़ी और पेटिकोट उठाकर उसको अपनी पैंटी दिखायी।
सुधाकर उसकी गोरी और गदरायी जाँघों के बीच काली पैंटी देख कर बहुत उत्तेजित हुआ और बोला: आऽऽऽह क्या मस्त माल है । अब ज़रा घूम कर पीछे का भी दिखाओ ना?
नमिता घूम गयी और उसके बड़े बड़े गोल गोल गोरे चूतरों में पैंटी को देखकर वह घायल ही हो गया।
वह बोला: आऽऽहहह क्या गाँड़ है । पर रानी तुम पीछे से सिर्फ़ एक पतली पट्टी वाली सेक्सी सी पैंटी क्यों नहीं पहनती? उसमें तुम्हारे पूरे चूतर नंगे दिखेंगे। इसमें तो आधे आधे छुप ही जाते हैं।
नमिता हँसते हुए बोली: आपने कभी लेकर दी है मुझे ऐसी पैंटी ? और हाँ ,अगर देखना हो गया हो तो साड़ी नीचे कर लूँ?
वह: हाँ नीचे कर लो। मैं तुम्हारे लिए एक से एक पैंटी और ब्रा लाउँगा रानी, पहनोगी ना?
नमिता: आपका काम तो इनको उतारने से होता है तो पहनाना क्यों चाहते हैं?
वह हँसते हुए : हा हा सच कहा। पहले पहनाओ और फिर उतारो।
नमिता ने दरवाज़ा खोला और चलती हूँ कहकर बाहर चली गयी।
नमिता अपने ऑफ़िस का काम निपटायी और बाहर निकली तभी बारिश होने लगी। वह सोची कि अभी राज को आने में एक घंटा है इसलिए वह शांति से खड़ी होकर बारिश के बंद होने का इंतज़ार करने लगी।
तभी एक कार आकर रुकी और उसमें उसकी पड़ोसन का पति बैठा था। वह कभी कभी उसको देखती थी आते जाते। वो राजन था और उसकी पत्नी कभी कभी उसके घर आती थी और वह भी कभी कभी उसके घर जाती थी। उनका एक बेटा भी था जो दसवीं में पढ़ता था जिसके लिए सुषमा याने राजन की बीवी परेशान रहती थी।
राजन: आइए भाभीजी आपको घर छोड़ दूँगा। मैं भी घर खाना खाने जा रहा हूँ।
नमिता थोड़ा संकोच की फिर सोची कि आख़िर पड़ोसी है क्या हर्ज है लिफ़्ट लेने में?
वह आकर उसकी बग़ल वाली सीट में बैठ गयी।
राजन ने कार आगे बढ़ाई।
नमिता ने नोटिस किया कि वह उसकी छातियों को चोरी से देख रहा है बीच बीच में । उसने आह भरी सब मर्द एक जैसे ही होते हैं। उसकी अच्छी ख़ासी बीवी है पर वह है कि उसको लाइन मार रहा है।
नमिता ने साड़ी ठीक को और अपनी छातियाँ पूरी ढक ली।
राजन: राज की पढ़ाई कैसी चल रही है।
नमिता: बहुत अच्छा कर रहा है वह आजकल ।
राजन: हमारा बेटा राजू तो पढ़ता ही नहीं। उसका ध्यान यहाँ वहाँ ही भटकता रहता है।
नमिता: इस उम्र में बच्चे थोड़ा बहक जाते हैं उनका ध्यान रखना पड़ता है।
राजन: हाँ सही कहा भाभीजी आपने।
नमिता: सुषमा उस दिन काफ़ी परेशान थी , उसकी पढ़ाई के लिए।
राजन: वह पढ़ाई में कभी भी बहुत अच्छा नहीं था पर पास तो हो जाता था, आजकल तो वह सभी टेस्ट में फ़ेल हो रहा है।
नमिता: हाँ इस उम्र में मोबाइल है और इंटर्नेट और सोशल मीडिया भी इनको भड़काने का काम करता है। मैंने तो अभी तक राज को मोबाइल दिलाया ही नहीं है।
राजन: अरे ये तो मोबाइल और लैप्टॉप सब लेकर रखा है।
नमिता: फिर तो आपको इसका और ध्यान रखना होगा।
राजन: जी हाँ सही कहा आपने। चलिए घर आ गया ।
नमिता उसको धन्यवाद देकर जाने लगी। तो वह बोला: भाभीजी क्या आपके पास कुछ समय होगा आज?
नमिता: जी क्या हुआ?
राजन: मैं आपको अभी फ़ोन करूँगा और हो सका तो आपके आप सुषमा के साथ आऊँगा ।
नमिता: ओह ठीक है। अभी राज को आने में क़रीब ४० मिनट हैं।
अब वह दोनों अपने अपने घर चले गए।
अभी नमिता फ़्रेश बाई हुई थी कि सुषमा का फ़ोन आ गया।
सुषमा: नमिता, मैं और राजन थोड़ी देर के लिए आ जाएँ क्या?
नमिता: हाँ क्यों नहीं। आ जाओ।
सुषमा: थैंक्स करके फ़ोन काट दी।
पाँच मिनट बाद वो दोनों नमिता के साथ ही बैठे थे।
नमिता: क्या हुआ सुषमा , आप दोनों परेशान लग रहे हो ?
सुषमा: अब क्या बोलूँ? बोलने में भी हिचक हो रही है।
नमिता: ऐसा क्या हो गया? बोलो ना जो भी मन में है।
राजन: असल में क्या है पिछले कुछ दिनों में हमें जो भी हमारे बेटे के बारे में पता चला है उसने हमें हिला दिया है।
नमिता: ऐसा क्या पता चला है आपको?
राजन: हमने नोटिस किया था कि पिछले एक दो महीने से वह ज़्यादा समय लैप्टॉप पर ही लगाता था। वह शाम को भी खेलने नहीं जाता था। मुझे लगा कि कहीं पोर्न साइट पर तो नहीं जाता है इसलिए मैंने उसका लैप्टॉप माँगा और चेक भी किया पर शायद वह हिस्ट्री डिलीट कर देता था इसलिए मैं कुछ ख़ास पता नहीं कर पाया।
फिर भी मैंने उसपर नज़र रखने का सोचा था।
फिर एक हादसा हुआ और हम लोग हैरान रह गए।
सुषमा: असल में तीन चार दिन पहले मैं सीढ़ियों से गिर गयी। राजू उस समय घर पर ही था। वो भाग कर आया और मुझे सहारा देकर बिस्तर पर लेटा दिया और इनको फ़ोन लगाया। ये अभी पास ही थे सो वापस आ गए। इन्होंने कहा है मैं दर्द की क्रीम लाता हूँ और किचन के एक दवाई के बॉक्स में चेक किए। तभी इनको याद आया कि दवाई तो राजू के कमरे में है क्योंकि उसको कुछ दिन पहले चोट लगी थी तब वह लेकर गया था।
राजन: मैं जब उसके कमरे में पहुँचा तो मुझे दवाई मिल गयी। पर उस समय उसका लैप्टॉप चालू था। शायद अपनी माँ के गिरने की आवाज़ सुनकर वह भाग कर बाहर आया था। इसी हड़बड़ी में लैप्टॉप खुला रह गया था।
मैंने लैप्टॉप में सुषमा की एक फ़ोटो देखी जिसमें वह पूरी नंगी थी। मैंने ध्यान से देखा कि सिर तो उसका था पर बदन किसी और का था। मैं तो सन्न रह गया कि आख़िर इस लड़के के दिमाग़ में चल क्या रहा है
नमिता: ओह ये तो बड़ी अजीब हरकत है।
राजन: वही तो, अब मैं थोड़ा सा परेशान हुआ और मैंने कई विडीओ शॉर्ट कट देखे , जब उनको क्लिक किया तो मैं तो पागल ही हो गया।
नमिता: क्या था उन विडीओ में ?
सुषमा: अब क्या बताऊँ उस नालायक ने मेरे नहाते हुए का विडीओ बनाया हुआ था। और तो और हमारे बेडरूम में भी कैमरा लगा कर हमारी सेक्स की भी विडीओ बनाकर रखा हुआ था।
राजन: मेरा तो सिर ही घूम गया कि ये कैसा लड़का है जो अपनी माँ को नंगी नहाते हुए देख रहा है और अपने माँ बाप को सेक्स करते हुए देख रहा है। मेरा ग़ुस्सा सातवें आसमान पर था और मैं नीचे आया तो देखा कि वह अपनी माँ की टाँग की चोट पर बर्फ़ लगा रहा था और इतनी भोली शक्ल बना रखी थी कि कोई सोच भी नहीं सकता कि वह इतना कमीना लड़का है।
नमिता: फिर आपने क्या किया?
राजन: मैंने उसको उठाया और बाथरूम में जाकर एक कैम ढूँढा और फिर बेडरूम में भी एक कैम ढूँढा और उसको एक थप्पड़ लगाकर पूछा कि ये सब क्या है?
वह रोने लगा और बाद में ये पता चला कि उसको इंटर्नेट से ये ख़याल आया कि इस तरह कैम लगाकर अपने माँ बाप की सेक्स विडीओ बनायी जा सकती है।
वह कुछ लड़कों से चैट किया था और वो उसको बताए थे कि वो भी ऐसा करते हैं।
सुषमा: जब इन्होंने मुझे ये सब बताया तो मेरे तो पैर से ज़मीन ही निकल गयी थी। बहुत समय लगा मुझे सामान्य होने में । मैंने तो उससे १० दिन बात ही नहीं की थी।
नमिता: ओह, अब क्या करता है वह दिन भर? स्कूल जाता है या नहीं?
सुषमा: इन्होंने उसका लैप्टॉप छीन लिया है। और वह बस हर समय अपने कमरे में ही रहता है पागल सा हुआ जा रहा है।
नमिता: ओह, मुझे लगता है उसे एक मनोवैज्ञानिक की ज़रूरत है। आप उसको डॉक्टर गुप्ता को दिखाइए । वह ज़रूर कोई हल निकाल देगा।
सुषमा: तुम उनको कैसे जानती हो?
नमिता हकला सी गयी, वह उनको राज के बारे में सब नहीं बताना चाहती थी। वह बोली: वह मेरे परिचित हैं और आप चाहो तो मैं उनसे बात कर सकती हूँ।
सुषमा: हाँ प्लीज़ करो ना।
नमिता उठकर थोड़ी दूर चली गयी क्योंकि उसको पता था कि वह उससे अश्लील बातें भी कर सकता है। उसने फ़ोन लगाया।
गुप्ता: हेलो, जानू कैसी हो?
नमिता: सर अभी मैं अकेली नहीं हूँ। आप मेरी बात ध्यान से सुनिए।
गुप्ता: अरे हम तो तुम्हारी सब बात ध्यान से ही सुनते हैं , तुम ही हो कि हमारा ध्यान नहीं रखती। देखो अब भी लंड सहला रहे है तुमको याद करके।
नमिता: सुनिए तो मैं आपके पास एक केस भेज रही हूँ । फिर वह उसको थोड़ा सा संक्षेप में राजू के बारे में बतायी।
गुप्ता: ओह तो ठीक है उनको बोलो कि वह तीनों कल दस बजे मेरे क्लीनिक में आ जाएँ। और राज कैसा है?
नमिता: वह अब बहुत ठीक है, मैं आपसे बाद में बात करूँगी। बाई।
अब नमिता राजन और सुषमा को बोली: आप तीनो कल १० बजे उनसे मिलो और उनको सब कुछ साफ़ साफ़ बता दो। वह कोई ना कोई हल निकाल देंगे।
अब वो दोनों उसको थैंक्स कहकर चले गए।
नमिता ने देखा कि राज के आने में अब १५ मिनट हो रह गए थे।
वह अपने कमरे में गयी और अपनी साड़ी उतार दी और पैंटी भी उतार दी। फिर उसने ब्लाउस और पेटिकोट मेंख़ुद को देखा और सोचने लगी कि आज ती राज उसकी चूचियों का बुरा हाल ही कर देगा। वह राजू और राज की तुलना करने लगी। उसने सोचा कि आह क्या ज़माना आ गया है?
फिर वह सोचने लगी कि राज आज थोड़ा सा नर्वस दिख रहा था पता नहीं उसका पेपर कैसा हुआ होगा।
उसने सोचा कि अगर थोड़ा कम नम्बर भी आए तो भी वह उसे अपनी चूचियाँ दे ही देगी मज़ा लेने के लिए। उसने सोचा कि कम से कम वह राजू से तो बेहतर है।
आज पता नहीं वह कैसे मूड में होगा और पता नहीं चूचियाँ पीने के बाद वह अपना संयम तो नहीं खो देगा और उसे चोद तो नहीं डालेगा। फिर वह सोची कि उसे राज से आख़िर में चुदवाना तो है ही फिर क्या फ़र्क़ पड़ता है कि आज चुदवाऊँ या कुछ दिन बाद।
यह सोचकर उसकी बुर गरम हो गयी। वह पेटिकोट के ऊपर से बुर खुजाने लगी।
पर वह फिर से सोची कि ये जो वह अपने आप और राज पर बंधन लगा रही है , आख़िर उसकी ही भलाई के लिए है। उसने सोच लिया कि नहीं वह नहीं चुदवायेगी आज किसी भी हालत में। उसे राज को अपना बदन आख़िरी पेपर के बाद ही देना होगा। वरना वह हर समय बस उसे चोदने की फ़िराक़ में ही रहेगा और पढ़ाई नहीं कर पाएगा।
उसने अपने मन को मनाया और उसके आने का इंतज़ार करने लगी।
तभी दरवाज़ा खुला और राज अंदर आया---------------
सुधाकर हँसते हुए: हा हा , वह भी हो गयी। उसने बड़े प्यार से मेरा लौड़ा चूसा और पूरा रस पी लिया। इसी लिए तो इतना शांत बैठा हूँ। वैसे साक्षी बहुत अच्छा चूसती है।
नमिता: चलो आपको मज़ा आ गया ये बढ़िया हो गया।
सुधाकर: हाँ सो तो है। तुमने तो बहुत दिन से मेरा लौड़ा नहीं चूसा है अच्छे से?
नमिता: आपको छोटी उम्र की लौंडियाँ तो मिली हुई है, उनसे ही मज़ा लीजिए। अच्छा अब मैं जाती हूँ। अपना काम ख़त्म करके आज भी जल्दी जाऊँगी।
सुधाकर: हाँ हाँ कोई बात नहीं। चली जाना। पर ये तो बताओ आज पैंटी किस रंग की पहनी है?
नमिता: ये क्या बात हुई?
सुधाकर: प्लीज़ बताओ ना।
नमिता: काले रंग की।
सुधाकर: वाह ! गोरे रंग की जाँघों पर काली पैंटी तो ग़ज़ब ढा रही होगी। चलो ना ज़रा साड़ी उठाके दिखा दो एक मिनट के लिए।
नमिता हैरान होकर: क्या बच्चों जैसे बात कर रहे हैं?
सुधाकर: प्लीज़ प्लीज़ एक बार दिखा दो ना।
नमिता: दरवाज़ा खुला है, कोई आ गया तो?
वह: अरे बंद कर दो ना उसको ।’
नमिता ने दरवाज़ा बंद किया और अपनी साड़ी और पेटिकोट उठाकर उसको अपनी पैंटी दिखायी।
सुधाकर उसकी गोरी और गदरायी जाँघों के बीच काली पैंटी देख कर बहुत उत्तेजित हुआ और बोला: आऽऽऽह क्या मस्त माल है । अब ज़रा घूम कर पीछे का भी दिखाओ ना?
नमिता घूम गयी और उसके बड़े बड़े गोल गोल गोरे चूतरों में पैंटी को देखकर वह घायल ही हो गया।
वह बोला: आऽऽहहह क्या गाँड़ है । पर रानी तुम पीछे से सिर्फ़ एक पतली पट्टी वाली सेक्सी सी पैंटी क्यों नहीं पहनती? उसमें तुम्हारे पूरे चूतर नंगे दिखेंगे। इसमें तो आधे आधे छुप ही जाते हैं।
नमिता हँसते हुए बोली: आपने कभी लेकर दी है मुझे ऐसी पैंटी ? और हाँ ,अगर देखना हो गया हो तो साड़ी नीचे कर लूँ?
वह: हाँ नीचे कर लो। मैं तुम्हारे लिए एक से एक पैंटी और ब्रा लाउँगा रानी, पहनोगी ना?
नमिता: आपका काम तो इनको उतारने से होता है तो पहनाना क्यों चाहते हैं?
वह हँसते हुए : हा हा सच कहा। पहले पहनाओ और फिर उतारो।
नमिता ने दरवाज़ा खोला और चलती हूँ कहकर बाहर चली गयी।
नमिता अपने ऑफ़िस का काम निपटायी और बाहर निकली तभी बारिश होने लगी। वह सोची कि अभी राज को आने में एक घंटा है इसलिए वह शांति से खड़ी होकर बारिश के बंद होने का इंतज़ार करने लगी।
तभी एक कार आकर रुकी और उसमें उसकी पड़ोसन का पति बैठा था। वह कभी कभी उसको देखती थी आते जाते। वो राजन था और उसकी पत्नी कभी कभी उसके घर आती थी और वह भी कभी कभी उसके घर जाती थी। उनका एक बेटा भी था जो दसवीं में पढ़ता था जिसके लिए सुषमा याने राजन की बीवी परेशान रहती थी।
राजन: आइए भाभीजी आपको घर छोड़ दूँगा। मैं भी घर खाना खाने जा रहा हूँ।
नमिता थोड़ा संकोच की फिर सोची कि आख़िर पड़ोसी है क्या हर्ज है लिफ़्ट लेने में?
वह आकर उसकी बग़ल वाली सीट में बैठ गयी।
राजन ने कार आगे बढ़ाई।
नमिता ने नोटिस किया कि वह उसकी छातियों को चोरी से देख रहा है बीच बीच में । उसने आह भरी सब मर्द एक जैसे ही होते हैं। उसकी अच्छी ख़ासी बीवी है पर वह है कि उसको लाइन मार रहा है।
नमिता ने साड़ी ठीक को और अपनी छातियाँ पूरी ढक ली।
राजन: राज की पढ़ाई कैसी चल रही है।
नमिता: बहुत अच्छा कर रहा है वह आजकल ।
राजन: हमारा बेटा राजू तो पढ़ता ही नहीं। उसका ध्यान यहाँ वहाँ ही भटकता रहता है।
नमिता: इस उम्र में बच्चे थोड़ा बहक जाते हैं उनका ध्यान रखना पड़ता है।
राजन: हाँ सही कहा भाभीजी आपने।
नमिता: सुषमा उस दिन काफ़ी परेशान थी , उसकी पढ़ाई के लिए।
राजन: वह पढ़ाई में कभी भी बहुत अच्छा नहीं था पर पास तो हो जाता था, आजकल तो वह सभी टेस्ट में फ़ेल हो रहा है।
नमिता: हाँ इस उम्र में मोबाइल है और इंटर्नेट और सोशल मीडिया भी इनको भड़काने का काम करता है। मैंने तो अभी तक राज को मोबाइल दिलाया ही नहीं है।
राजन: अरे ये तो मोबाइल और लैप्टॉप सब लेकर रखा है।
नमिता: फिर तो आपको इसका और ध्यान रखना होगा।
राजन: जी हाँ सही कहा आपने। चलिए घर आ गया ।
नमिता उसको धन्यवाद देकर जाने लगी। तो वह बोला: भाभीजी क्या आपके पास कुछ समय होगा आज?
नमिता: जी क्या हुआ?
राजन: मैं आपको अभी फ़ोन करूँगा और हो सका तो आपके आप सुषमा के साथ आऊँगा ।
नमिता: ओह ठीक है। अभी राज को आने में क़रीब ४० मिनट हैं।
अब वह दोनों अपने अपने घर चले गए।
अभी नमिता फ़्रेश बाई हुई थी कि सुषमा का फ़ोन आ गया।
सुषमा: नमिता, मैं और राजन थोड़ी देर के लिए आ जाएँ क्या?
नमिता: हाँ क्यों नहीं। आ जाओ।
सुषमा: थैंक्स करके फ़ोन काट दी।
पाँच मिनट बाद वो दोनों नमिता के साथ ही बैठे थे।
नमिता: क्या हुआ सुषमा , आप दोनों परेशान लग रहे हो ?
सुषमा: अब क्या बोलूँ? बोलने में भी हिचक हो रही है।
नमिता: ऐसा क्या हो गया? बोलो ना जो भी मन में है।
राजन: असल में क्या है पिछले कुछ दिनों में हमें जो भी हमारे बेटे के बारे में पता चला है उसने हमें हिला दिया है।
नमिता: ऐसा क्या पता चला है आपको?
राजन: हमने नोटिस किया था कि पिछले एक दो महीने से वह ज़्यादा समय लैप्टॉप पर ही लगाता था। वह शाम को भी खेलने नहीं जाता था। मुझे लगा कि कहीं पोर्न साइट पर तो नहीं जाता है इसलिए मैंने उसका लैप्टॉप माँगा और चेक भी किया पर शायद वह हिस्ट्री डिलीट कर देता था इसलिए मैं कुछ ख़ास पता नहीं कर पाया।
फिर भी मैंने उसपर नज़र रखने का सोचा था।
फिर एक हादसा हुआ और हम लोग हैरान रह गए।
सुषमा: असल में तीन चार दिन पहले मैं सीढ़ियों से गिर गयी। राजू उस समय घर पर ही था। वो भाग कर आया और मुझे सहारा देकर बिस्तर पर लेटा दिया और इनको फ़ोन लगाया। ये अभी पास ही थे सो वापस आ गए। इन्होंने कहा है मैं दर्द की क्रीम लाता हूँ और किचन के एक दवाई के बॉक्स में चेक किए। तभी इनको याद आया कि दवाई तो राजू के कमरे में है क्योंकि उसको कुछ दिन पहले चोट लगी थी तब वह लेकर गया था।
राजन: मैं जब उसके कमरे में पहुँचा तो मुझे दवाई मिल गयी। पर उस समय उसका लैप्टॉप चालू था। शायद अपनी माँ के गिरने की आवाज़ सुनकर वह भाग कर बाहर आया था। इसी हड़बड़ी में लैप्टॉप खुला रह गया था।
मैंने लैप्टॉप में सुषमा की एक फ़ोटो देखी जिसमें वह पूरी नंगी थी। मैंने ध्यान से देखा कि सिर तो उसका था पर बदन किसी और का था। मैं तो सन्न रह गया कि आख़िर इस लड़के के दिमाग़ में चल क्या रहा है
नमिता: ओह ये तो बड़ी अजीब हरकत है।
राजन: वही तो, अब मैं थोड़ा सा परेशान हुआ और मैंने कई विडीओ शॉर्ट कट देखे , जब उनको क्लिक किया तो मैं तो पागल ही हो गया।
नमिता: क्या था उन विडीओ में ?
सुषमा: अब क्या बताऊँ उस नालायक ने मेरे नहाते हुए का विडीओ बनाया हुआ था। और तो और हमारे बेडरूम में भी कैमरा लगा कर हमारी सेक्स की भी विडीओ बनाकर रखा हुआ था।
राजन: मेरा तो सिर ही घूम गया कि ये कैसा लड़का है जो अपनी माँ को नंगी नहाते हुए देख रहा है और अपने माँ बाप को सेक्स करते हुए देख रहा है। मेरा ग़ुस्सा सातवें आसमान पर था और मैं नीचे आया तो देखा कि वह अपनी माँ की टाँग की चोट पर बर्फ़ लगा रहा था और इतनी भोली शक्ल बना रखी थी कि कोई सोच भी नहीं सकता कि वह इतना कमीना लड़का है।
नमिता: फिर आपने क्या किया?
राजन: मैंने उसको उठाया और बाथरूम में जाकर एक कैम ढूँढा और फिर बेडरूम में भी एक कैम ढूँढा और उसको एक थप्पड़ लगाकर पूछा कि ये सब क्या है?
वह रोने लगा और बाद में ये पता चला कि उसको इंटर्नेट से ये ख़याल आया कि इस तरह कैम लगाकर अपने माँ बाप की सेक्स विडीओ बनायी जा सकती है।
वह कुछ लड़कों से चैट किया था और वो उसको बताए थे कि वो भी ऐसा करते हैं।
सुषमा: जब इन्होंने मुझे ये सब बताया तो मेरे तो पैर से ज़मीन ही निकल गयी थी। बहुत समय लगा मुझे सामान्य होने में । मैंने तो उससे १० दिन बात ही नहीं की थी।
नमिता: ओह, अब क्या करता है वह दिन भर? स्कूल जाता है या नहीं?
सुषमा: इन्होंने उसका लैप्टॉप छीन लिया है। और वह बस हर समय अपने कमरे में ही रहता है पागल सा हुआ जा रहा है।
नमिता: ओह, मुझे लगता है उसे एक मनोवैज्ञानिक की ज़रूरत है। आप उसको डॉक्टर गुप्ता को दिखाइए । वह ज़रूर कोई हल निकाल देगा।
सुषमा: तुम उनको कैसे जानती हो?
नमिता हकला सी गयी, वह उनको राज के बारे में सब नहीं बताना चाहती थी। वह बोली: वह मेरे परिचित हैं और आप चाहो तो मैं उनसे बात कर सकती हूँ।
सुषमा: हाँ प्लीज़ करो ना।
नमिता उठकर थोड़ी दूर चली गयी क्योंकि उसको पता था कि वह उससे अश्लील बातें भी कर सकता है। उसने फ़ोन लगाया।
गुप्ता: हेलो, जानू कैसी हो?
नमिता: सर अभी मैं अकेली नहीं हूँ। आप मेरी बात ध्यान से सुनिए।
गुप्ता: अरे हम तो तुम्हारी सब बात ध्यान से ही सुनते हैं , तुम ही हो कि हमारा ध्यान नहीं रखती। देखो अब भी लंड सहला रहे है तुमको याद करके।
नमिता: सुनिए तो मैं आपके पास एक केस भेज रही हूँ । फिर वह उसको थोड़ा सा संक्षेप में राजू के बारे में बतायी।
गुप्ता: ओह तो ठीक है उनको बोलो कि वह तीनों कल दस बजे मेरे क्लीनिक में आ जाएँ। और राज कैसा है?
नमिता: वह अब बहुत ठीक है, मैं आपसे बाद में बात करूँगी। बाई।
अब नमिता राजन और सुषमा को बोली: आप तीनो कल १० बजे उनसे मिलो और उनको सब कुछ साफ़ साफ़ बता दो। वह कोई ना कोई हल निकाल देंगे।
अब वो दोनों उसको थैंक्स कहकर चले गए।
नमिता ने देखा कि राज के आने में अब १५ मिनट हो रह गए थे।
वह अपने कमरे में गयी और अपनी साड़ी उतार दी और पैंटी भी उतार दी। फिर उसने ब्लाउस और पेटिकोट मेंख़ुद को देखा और सोचने लगी कि आज ती राज उसकी चूचियों का बुरा हाल ही कर देगा। वह राजू और राज की तुलना करने लगी। उसने सोचा कि आह क्या ज़माना आ गया है?
फिर वह सोचने लगी कि राज आज थोड़ा सा नर्वस दिख रहा था पता नहीं उसका पेपर कैसा हुआ होगा।
उसने सोचा कि अगर थोड़ा कम नम्बर भी आए तो भी वह उसे अपनी चूचियाँ दे ही देगी मज़ा लेने के लिए। उसने सोचा कि कम से कम वह राजू से तो बेहतर है।
आज पता नहीं वह कैसे मूड में होगा और पता नहीं चूचियाँ पीने के बाद वह अपना संयम तो नहीं खो देगा और उसे चोद तो नहीं डालेगा। फिर वह सोची कि उसे राज से आख़िर में चुदवाना तो है ही फिर क्या फ़र्क़ पड़ता है कि आज चुदवाऊँ या कुछ दिन बाद।
यह सोचकर उसकी बुर गरम हो गयी। वह पेटिकोट के ऊपर से बुर खुजाने लगी।
पर वह फिर से सोची कि ये जो वह अपने आप और राज पर बंधन लगा रही है , आख़िर उसकी ही भलाई के लिए है। उसने सोच लिया कि नहीं वह नहीं चुदवायेगी आज किसी भी हालत में। उसे राज को अपना बदन आख़िरी पेपर के बाद ही देना होगा। वरना वह हर समय बस उसे चोदने की फ़िराक़ में ही रहेगा और पढ़ाई नहीं कर पाएगा।
उसने अपने मन को मनाया और उसके आने का इंतज़ार करने लगी।
तभी दरवाज़ा खुला और राज अंदर आया---------------