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दोस्त और उसकी बीवी ने लगाया चस्का

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दोस्त और उसकी बीवी ने लगाया चस्का

इस किस्से की शुरुआत तब हुई जब मैं चौबीस साल का छह फीट का एक बांका नौजवान था, मेरी शादी हुए एक साल हो चुका था, पर व्यापार के कारण मैं अपनी पत्नी से अलग गाजियाबाद में रहता था। यहाँ मेरी गैस एजेंसी थी, कमाई बढ़िया थी।

पत्नी के ज्यादा नजदीक मुझे घरवालों ने जान बूझकर नहीं जाने दिया था मगर कुदरत की दी हुई चीज से मैं हाथ से खेलकर खुश हो जाया करता था।

फ़िर भी एक अनबुझी आग अन्दर ही अन्दर भड़क रही थी, रोज रात को अश्लील किताबें पढ़ना और मोबाइल पर कहानी पढ़ना या मोबाइल पर ही इन्डियन पोर्न वीडियो देखना और मुठ मार कर सो जाना ही जिन्दगी बन गया था।

उधर मेरी बीवी जो मुझसे ज्यादा कामातुर थी, वो परेशान रहती थी और मुझे रोज वहाँ लाने की जिद करती थी पर घरवालों के डर से न तो मैं कभी कुछ कह पाया न वो कुछ बोली।

पंद्रह दिन में एक बार पत्नी के पास जा पाता था, उस दिन रात भर चुदाई होती। यह हम दोनों की इच्छा थी कि जब तक साथ नहीं रहेंगे, तब तक बच्चा नहीं करेंगे।

अगले दिन अगले पंद्रह दिनों के बाद मिलने की आस में मुझे गाजियाबाद वापस आना पड़ता!

मेरे पड़ोस में एक पंजाबी परिवार रहता था, पूरा परिवार था, उनका होलसेल कपड़ों का व्यापार था, उस परिवार की सबसे छोटी बहू कामिनी लगभग तीस साल की होगी, मगर लगती उम्र मुझसे छोटी थी और बला की खूबसूरत थी।

उसका पति राजीव बतीस साल का सेक्स में बहुत रूचि रखने वाला व्यक्ति था। यह बात अक्सर उसकी बातों से मालूम पड़ती थी जब वो सेक्स और रोमांच की बात खुलेआम करता था।

उनके दो जुड़वाँ बच्चे हुए थे और वो अपने बाबा दादी के साथ उनके कमरे में रहते, सोते थे।

इस कारण राजीव कामिनी को अपने लिए पूरा वक़्त मिल जाता था।

उनकी और मेरे मकान की छत मिली हुई थी इसलिए रात को हम लोग अपनी अपनी छत पर से गप्पें मार लेते थे। जब मैं घर से वापस आता था तो राजीव कामिनी बड़ी बेबाकी से पूछ लेते थे कि खाट तोड़ी या नहीं?

और मैं बस हंस कर रह जाता!

एक रात को वो दोनों ऊपर खाना खा रहे थे, मुझे देख कर मुझे जबरदस्ती बुला लिया, मैं छत कूदकर ही चला गया।

उन्होंने मुझे अपने साथ खाने पर बिठा लिया।

हालाँकि मुझे बहुत संकोच हो रहा था क्योंकि भाभी केवल एक फ्रॉक पहने थी और राजीव लुंगी में था जिसे उसे घुटने के ऊपर बंधा था। भाभी के गोल गोल मम्मे साफ दिखाई दे रहे थे।

मैं भी टी शर्ट और लोअर में था।

भाभी ने मुझे अपने पास बिठाया था, मेरी हालत ख़राब हो रही थी और लोअर में तम्बू बन चुका था।

राजीव ने हंस कर कहा- कब तक मुठ मारता रहेगा, एक लोकल इंतजाम भी कर ले।

मैं शर्मा गया भाभी के सामने।

अब वो मेरे लोअर की ओर इशारा करके राजीव से बोली- सनी वाकयी बहुत परेशान है, कुछ तो तुम्हें इसके लिए करना चाहिए। इसका मन भी कैसे लगता होगा?

राजीव मस्ती में बोला- चल तेरा कुछ जुगाड़ करता हूँ… शाम को तू यहाँ आ जाया कर, एक एक पैग साथ लगाया करेंगे और तुझे मस्त वीडियो दिखाया करूँगा।

मैं समझ नहीं पा रहा था कि आज कामदेव मुझ पर मेहरबान क्यों हो रहे हैं।

खाना खाकर राजीव ने लुंगी उठा कर मुँह पौंछा तो मैंने देखा कि उसका औजार बहुत बड़ा नहीं है।

मुझे झांकते देखकर भाभी बोली- यह क्या सनी, आदमी का क्या देखना, देखना है तो लड़की का देखो!

अब मेरी भी शर्म खुल चुकी थी, मैंने भी हंस कर कह दिया- कभी दिखवा दो।

राजीव मस्ती के मूड में था, ये सुनते ही उसने कहा- ये कौन सी बड़ी बात है!

और कामिनी की फ्रॉक पर झपट्टा मारकर उसे उठाने की कोशिश की।

उसकी नीयत भांप कर कामिनी हँसते हुए वहीं खाट पर गुल्टी खाकर मुड़ गई मगर इस कोशिश में उसकी फ्रॉक ऊपर उठ गई और जन्नत का नजारा मैंने कर लिया।

इस बात को राजीव ने नहीं देखा पर कामिनी जान गई कि उसने मेरी चाहत पूरी कर दी है।

अब मेरा कामिनी को और उसका मुझे देखने का नजरिया बदल गया था।

मैं भी हँसते हुए उनसे गुडनाइट बोल कर आ गया और दो बार कामिनी की चूत का ख्याल करके मुठ मार कर सो गया।

सुबह उठा तो सीधे छत पर गया पर कामिनी कहीं दिखाई नहीं दी।

नहा कर दुकान गया, मगर काम में मन नहीं लग रहा था।

तभी मोबाइल बजा, दूसरी ओर कामिनी थी, मेरी तो बज गई, आवाज नहीं निकल रही थी।

कामिनी बोली- क्यों नाराज हो, अब तो तुम्हारी इच्छा पूरी हो गई।

मेरी तो जैसे जान में जान आई, मैंने विश करके थैंक्स बोला।

वो हंस कर बोली- बस इतना ध्यान रखना कि राजीव को कुछ पता नहीं।

वो बोली- वैसे तो राजीव बहुत खुले दिमाग का है, वो तो हरदम मुझसे कहता है कि बिना ब्रा के टॉप पहन कर घूमने चलो या रात को लॉन्ग फ्रॉक पहन लो जिसमें वो जब चाहे हाथ घुसा सके।

मैंने कामिनी से यह वादा किया कि मैं राजीव को कुछ नहीं बताऊँगा।

इसके बाद मेरी और कामिनी की रोज तीन चार बार बातें होने लगी, हम बातों में खुलने भी लगे।

एक दिन वो मुझे बाजार में मिली। उसने अभी ख़रीदा ऑरेंज कलर का सूट दिखाया। वो गोरी थी, उस पर ये रंग फबेगा, ऐसा मैंने उससे कहा।

बाद में लेडीज शॉप से मैंने ऑरेंज कलर का अंडरगारमेंट्स सेट ख़रीदा। साइज़ पसंद करने में सेल्सगर्ल ने मेरी हेल्प की। इसके बाद मैंने कलर मैचिंग की नेलपालिश भी ली।

शाम को कामिनी को फ़ोन किया कि तुम्हारे लिए एक रिटर्न गिफ्ट है।

वो बड़ी बेशर्मी से हंस कर बोली- क्या अपना दिखाओगे रिटर्न में?

मैंने कहा- वो तो कभी भी देख लेना, आज तो भाभी कुछ खास लाया हूँ तुम्हारे लिए!

वो इतरा कर बोली- मुझे भाभी मत बोला करो, नाम लिया करो।

मैंने कहा- राजीव भैया बुरा मान गए तो?

वो बोली- उन्हें किसी चीज का बुरा नहीं लगता, जब तक मैं खुश हूँ।

मैंने भी बेशर्म होकर पूछ ही लिया- अच्छा और किस चीज का उन्हें बुरा नहीं लगेगा जिसमें आप खुश हो?

वो मेरा मतलब समझ गई, हंस कर बोली- पहले मुझे खुश तो करो!

मैंने उससे पूछा- गिफ्ट कैसे दूँ आपको?

वो अब तक मजाक समझ रही थी।

जब मैंने कहा- कुछ लिया है तुम्हारे लिए!

तो वो बोली- छत पर रख दो।

मैं दुकान नौकर पर छोड़ कर घर गया और उसकी छत पर पैकेट रख आया।

उतरते समय मैंने देख लिया कि वो छत पर आ गई थी।

मैं दुकान पर धड़कते दिल से आकर बैठ गया, इंतज़ार करने लगा उसके फ़ोन का मगर उसका कोई फ़ोन नहीं आया।

मेरे को घबराहट होने लगी कि मैंने कितनी बड़ी गलती कर ली!

रात को घर पहुँचा तो उसके मकान की तरफ देखने की भी हिम्मत नहीं हुई।

नहा कर खाना खाने होटल भी नहीं गया, डर रहा था कि राजीव के घर आने पर वो उससे शिकायत करेगी।

पता नहीं राजीव क्या करेगा।

मैं सोच ही रहा था कि राजीव की ऊपर से आवाज आई- अबे सो गया क्या? ऊपर आ!

मैं लुंगी टी शर्ट में ऊपर डरते डरते गया।

ऊपर राजीव अकेला था, बोला- पैग लगाएगा?

मेरी तो गांड फटी पड़ी थी, मैं खिसियाते हुए बोला- हाँ क्यों नहीं।

राजीव ने बोतल खोल कर दो पैग बनाये।

अपना ज्यादा बनाया।

मेरे यह पूछने की हिम्मत नहीं हुई कि भाभी कहाँ है।

पैग मुझे देते हुए उसने नीचे देखकर सीटी मारी।

मैंने पूछा- सीटी क्यों?

वो बोला- यह हमारा पासवर्ड है, ग्रीन सिग्नल का!

मैंने पूछा- ग्रीन सिग्नल किस चीज का?

वो बोला- भोसड़ी के, देख सब समझ में आ जायेगा।

अगले ही पल कामिनी एक प्लेट में पनीर और काजू लेकर ऊपर आई।

क्या स्वर्ग की हूर लग रही थी।

उसने एक शार्ट टॉप और शार्ट स्कर्ट पहनी थी।

मैं तो बिना पलक झपकाये उसे देखने लगा।

राजीव बोला-, देखी जा… छेड़ीं ना…

कामिनी भी बनावटी गुस्सा दिखाते हुए राजीव से बोली- जब सनी यहाँ था तो मुझे ये कपड़े क्यों पहन कर आने को कहा?

राजीव ने शायद पहले से भी पी रखी थी, वो सुरूर में बोला- पहन कर आने को ही तो बोला है, कोई उतारने को तो बोला नहीं है सनी के सामने।

कामिनी हमारे पास आकर बैठ गयी, वो आज मुझसे दूर राजीव की बगल में बैठी थी।

राजीव ने अपना पैग उसके होठों से लगा दिया।

पहले तो कामिनी ने मना किया फिर एक सिप ले लिया।

हम दोनों बातें करते पीने लगे। बातें धीरे धीरे साथ साथ नहाने पर आ गई।

राजीव बोला कि वो दोनों हमेशा साथ साथ नहाते हैं।

मैंने कहा कि ज्वाइंट फैमिली में रहने के कारण मैं ऐसे सुख से दूर हूँ।

कामिनी जो अब तक चुप थी, वो हंस कर राजीव से बोली- चलो आज तुम और सनी साथ साथ नहा लो।

तभी राजीव को नीचे से उसके भाई ने आवाज दी और कोई चाभी मांगी।

कामिनी बोली- मैं तो इन कपड़ों में नीचे नहीं जाऊंगी।

मजबूरी में राजीव को ही जाना पड़ा।

उसके जीने से नीचे उतरते ही कामिनी पागलों की तरह मुझसे लिपट गयी और चुम्बनों की बरसात करने के बाद बोली- थैंक्स। इतना सुंदर गिफ्ट तो आज तक राजीव ने भी कभी नहीं दिया।

उसके जलते हुए होठों से अलग होने का मन नहीं कर रहा था, पर जीने पर आहट सुन कर हमने अपने को संभाला।

आते ही राजीव ने हंस कर पूछा- कमीने चख कर देखी या नहीं?

कामिनी ने झूटे को उसकी छाती पर मुक्का मारते हुए कहा- कुछ तो देख कर बोला करो?

राजीव नशे के सुरूर में तो था ही, उसने कामिनी की टॉप में हाथ डाल कर उसके मम्मे रगड़ दिये।

कामिनी को भी मस्ती छा रही थी, उसने भी राजीव की लुंगी खींच दी।

बेशर्म राजीव ने लुंगी खोल कर अलग रख दी और बोला- ले रात को उतारता, अभी उतार देता हूँ।

मैंने उसे लुंगी दी- भाई ठण्ड लग जाएगी, अभी तो पहन ले।

कामिनी राजीव से चिपक कर बैठ गई और एक सिप और मार लिया।

कुछ पलों बाद मैंने महसूस किया कि कामिनी ने अपना हाथ राजीव की लुंगी में डाला हुआ है और उसके औज़ार को मस्ती से हिला रही है।

मुझे लगा कि ये वो मुझे दिखाने को कर रही है।

मैंने भी हंस कर कहा- भाभी का हाथ कहाँ है?

राजीव तुरंत बोला- भाभी तो आज अपना हाथ तेरी लुंगी में डालना चाह रही है।

मुझे नहीं मालूम था कि क्या होने वाला है, यह सुन कर मैं तो बस यही बोला- भाभी की ख़ुशी के लिए मैं कुछ भी कर सकता हूँ, बशर्ते तुम्हें कोई एतराज न हो।

कामिनी ने फिर झूठा गुस्सा दिखाते हुए कहा- आप भी न कभी भी कुछ भी बोल देते हो।

राजीव ने कामिनी को हाथ से धकेलते हुए मेरी ओर किया।

कामिनी इठलाते हुए मेरे पास आई और बोली- अब घर जाओ।

मैं उठने को हुआ राजीव ने मेरी लुंगी पकड़ कर बिठा लिया, बोला- साली अब नखरे कर रही है। रात को चुदाई करते वक़्त कह रही थी कि एक बार सनी का दिखवा दो। अब पकड़वा रहा हूँ तो ड्रामा कर रही है।

राजीव ने उसका हाथ मेरी लुंगी के अन्दर कर दिया। बाकी का काम तो मेरे खड़े 6″ के लौड़े ने और कामाग्नि में जलती कामिनी के मचलते जज्बातों ने कर दिया।

उसने मेरा लंड कस कर पकड़ लिया और लम्बी लंबी सांसें लेने लगी।

मुझे लगा वो और नजदीकी चाहती है, मैंने उसके लबों पर अपने होंठ रख दिये। वो मेरा लंड जोर जोर से हिलाने लगी, शायद उसकी चूत में आग लग गई थी।

यह बात राजीव की समझ में आ गई थी। उसे शायद यह भी लगा कि अगर अपनी बीवी की चूत को उसने नहीं संभाला तो वो मेरा लंड अंदर कर लेगी।

राजीव ने उसकी स्कर्ट के अंदर हाथ डाल कर उसकी चूत में तेजी से उंगली करनी शुरू कर दी।

कामिनी की हालत ख़राब हो चुकी थी, उसकी चूत फव्वारा छोड़ चुकी थी, मेरा लंड माल छोड़ने को तैयार था।

मैंने उसके हाथ से अपना लंड छुड़ाया और तेजी से छत कूद कर अपने घर आ गया।

आते ही मैंने मुठ मार कर अपने को शांत किया और जिन्दगी का एक अनोखा अनुभव पाकर निढाल हो सो गया।

रात 11 बजे पत्नी का फ़ोन आया, वो रोते हुए बोली कि अब उससे बर्दाश्त नहीं हो रहा, उसकी चूत को लंड रोज चाहिए।

वो बोली कि या तो मैं उसे अपने पास ले आऊँ या वो मायके चली जायेगी।

अगले दिन मंगलवार था, दुकान की छुट्टी थी, मैंने मोटरसाइकिल उठाई और घर के लिए चल दिया।

घर पहुँचा तो घर वाले मुझे देख कर घबरा गए क्योंकि मैं बिना बताये पहुँचा था।

पत्नी तो खिल गई मुझे देख कर…

माँ ने पूछा- क्या खायेगा?

मैंने कहा- मुझे आप लोगों से पहले बात करनी है।

सब बैठक में इकट्ठे हुए, मैंने हाथ जोड़ कर कहा कि मैं अपनी पत्नी को साथ ले जाना चाहता हूँ।

पता नहीं क्या हुआ, मेरे बाबा बोले- ठीक है, अगले महीने श्राद्ध हैं, उसके बाद ले जाना।

मैं और मेरी पत्नी बहुत खुश हुए। हमने सबके पैर छुए और उन्हें धन्यवाद दिया।

फिर मैं चाय पीकर अपने कमरे मैं गया। पत्नी को भींचकर उसकी साड़ी उठानी चाही, तभी माँ ने मेरी बीवी को आवाज दी, वो भुनभुनाते हुए बहार चली गई।

वक़्त की बात थी, तभी दूकान के मुनीम का फ़ोन आ गया कि पास में आग लग गई है, हालाँकि अब आग बुझ चुकी है पर फायर ब्रिगेड वाले एक बार हमारा गोदाम चेक करना चाहते हैं।

चाभी मेरे पास थी, मैं तुरंत वापस लौट पड़ा।

दूकान पर और मित्र और राजीव भी थे, गोदाम का ताला तोड़कर फायर वालों ने चेकिंग कर ली थी, सब ठीक था, सब लोग चले गए।

राजीव और मैं दूकान पर अकेले रह गए, मैंने दोनों के लिए खाने को मंगाया और राजीव से कल के लिए संकोच के साथ माफ़ी मांगी।

राजीव ने हँसते हुए कहा- जो कुछ हुआ, वो कामिनी की मर्जी से हुआ! और हम दोनों ने उसे एन्जॉय किया।

राजीव ने मुझसे कहा- आज उनके घर पर कोई नहीं है, इसलिए आज शाम को मैं सीधे दूकान से उनके घर आ जाऊँ, खाना वहीं खाना है।

मैंने कहा- ठीक है, मैं शाम को नहा कर आ जाऊँगा।

इस पर राजीव बोला- नहीं, तुम सीधे घर आना।

मैं कुछ समझा नहीं पर मैंने कहा- ठीक है।
 
शाम को आठ बजे मैं राजीव के घर पहुँचा, कामिनी ने ही दरवाजा खोला।

उस दिन लिए ऑरेंज सूट में वो परी सी लग रही थी, नेलपेंट भी उसने ऑरेंज ही लगाया था।

दरवाजा बंद करते हुए उसने मुझे धीरे से किस कर लिया, उसके होठों की गर्मी कल से भी ज्यादा थी। लगता था उसकी प्यास और बढ़ गई है।

!

मैं अन्दर घुसा, राजीव बेड पर बैठा था, बोला- बहुत देर कर दी, कब से तेरा इंतजार कर रहे हैं। नहाने भी नहीं गए तेरे इंतजार में!

मैंने हंस कर कहा- क्यों, क्या मेरे साथ नहाना है?

राजीव बोला- चलो आज सब साथ नहायेंगे।

कामिनी बोली- मुझे नहीं नहाना सबके साथ, आप दोनों नहा लो, मैं बाद मैं नहाऊँगी।

राजीव ने मुझे आँख मार कर कहा- चल हम दोनों नहाते हैं।

मुझे भी क्या मस्ती सूझी मैं भी कपड़े कर चड्डी में चल दिया।

बाथरूम में राजीव नंगा खड़ा था, मुझे चड्डी में देखकर बोला- क्यों बे, घर में भी चड्डी में नहाता होगा।

कहकर उसने मेरी चड्डी उतार दी, हम दोनों नंगे शावर के नीचे खडे होकर नहाने लगे।

मैंने साबुन लगाने के लिए साबुन उठाया ही था कि राजीव ने कामिनी को आवाज़ दी।

कामिनी दरवाजे पर आकर बोली- क्या चाहिए?

राजीव बोला- चलो तुम नहाओ मत, पर साबुन तो लगा दो हमारी पीठ पर!

कामिनी बोली- तुम दोनों बदमाशी करोगे, मैं नहीं आऊँगी।

मैंने कहा- तुम राजीव के लिए मत आओ पर मेरी पीठ पर तो आज तक किसी ने साबुन नहीं लगाया, प्लीज एक बार लगा दो।

कामिनी बोली- चलो तुम दोनों तौलिया लपेट लो, मैं तभी आऊँगी।

राजीव बहुत बदमाश है, उसने कामिनी को बोला- तुम्हारा नया सूट भीग जायेगा, तुम भी तौलिया लपेट कर आ जाओ और मैं तो तुम्हें कुछ भी नहीं कहूँगा।

कामिनी को भी मस्ती चढ़ी थी, वो सूट उतार कर ब्रा पैंटी के ऊपर ही तौलिया लपेट कर अंदर आ गई।

उसे ऐसे देखकर मेरा लंड तो तौलिया खोलकर बाहर आने की सलामी दे रहा था। कामिनी ने हम दोनों के लंडों को मुस्कुराते हुए देखा और मेरी पीठ पर साबुन लगाने लगी।

राजीव ने अचानक शॉवर खोल दिया।

अचानक बौछार से हम तीनों भीग गए, बचने की कोशिश में मेरा तो तौलिया खुल गया, मैं नंग धड़ंग खड़ा था।

मुझे देख कामिनी ने राजीव का भी टॉवल खोल दिया, राजीव ने कामिनी का तौलिया हटा दिया।

वो मेरी दी हुई ब्रा पैन्टी में हूर की परी लग रही थी।

वो बोली- ये तो बेइमानी है।

मगर अब उसकी कौन सुन रहा था, राजीव ने उसको कस कर पकड़ कर शावर के नीचे ले लिया और उसके मम्मे चूसने लगा।

उसने मुझे नीचे झुकने को कहा।

मैं जैसे ही नीचे झुका उसने कामिनी की पैंटी उतार कर उसकी चूत मेरे मुँह के सामने कर दी।

मैंने जीभ से उसकी चूत को चाटना शुरू कर दिया।

कामिनी तड़फ रही थी, उन्ह आह की आवाज बढ़ती जा रही थी।

अचानक कामिनी ने मेरे मुँह में अपना योनि रस छोड़ दिया, वो हाँफती हुई राजीव से बोली- चलो बेड पर चलो।

मैं जैसे ही नीचे झुका उसने कामिनी की पैंटी उतार कर उसकी चूत मेरे मुँह के सामने कर दी।

मैंने जीभ से उसकी चूत को चाटना शुरू कर दिया।

कामिनी तड़फ रही थी, उन्ह आह की आवाज बढ़ती जा रही थी।

अचानक कामिनी ने मेरे मुँह में अपना योनि रस छोड़ दिया, वो हाँफती हुई राजीव से बोली- चलो बेड पर चलो।

हम लोग नंगे ही बाहर आये।

कामिनी बोली- पहले खाना खा लो, फिर..

राजीव बोला- फिर क्या?

कामिनी हंसते हुए बोली- फिर चुदाई..

कामिनी मुझसे बोली- बुरा नहीं मानना, राजीव को यही भाषा पसंद है।

हमने तौलिया लपेट कर खाना खाया।

खाना खाते समय राजीव ने दो बार कामिनी की तौलिया खोलकर उसके मम्मे चूस लिए।

कामिनी भी टेबल के नीचे से पैर से मेरा लंड हिलाने की कोशिश कर रही थी

खाना खाकर हम बेडरूम में आये।

कामिनी ने पूछा- कुछ मीठा?

राजीव ने उसके मम्मे चूसते हुए कहा- सनी, इन आमों से मीठा और क्या?

अब उसका एक मम्मा मैं चूस रहा था और एक राजीव।

कामिनी ने मेरा हाथ अपनी चूत पर रख दिया, मैंने अपनी दो उँगलियाँ उसकी चूत में कर दी और जोर जोर से अंदर बाहर करने लगा। वो भी तड़फ कर बोल रही थी- सनी, और जोर से करो न प्लीज, आज फाड़ दो दोनों मिलकर मिलकर मेरी चूत को।

राजीव ने यह सुनकर उसे बिस्तर पर गिराया और चढ़ गया उसके ऊपर…

उसका लंड छोटा था, उसने अपने लंड को उसकी चूत में डाल दिया पर कामिनी की तड़फ शांत नहीं हुई थी, उसकी चूत में तो आग लगी हुई थी।

मैंने अपना लंड उसके मुँह में कर दिया, अब वो जोर जोर से हिल हिल कर मेरा लंड चूस रही थी।

राजीव का हो गया था, पर कामिनी की आग तो भड़की हुई थी, वो राजीव को गाली देते हुए बोली- जब मेरी आग बुझा नहीं पाते तो लगाते क्यों हो?

राजीव बोला- तेरी आग बुझाने को ही तो सनी को बुलाया है। आज वो तेरी चूत फाड़ेगा।

कामिनी बोली- हाँ मेरे राजा सनी… आ देखूँ तेरे लंड की ताक़त!

मैं यह सुन कर उसकी ओर लपका और एक झटके में ही उसकी चूत में लंड घुसेड दिया।

कामिनी एक बार तो चीखी- फाड़ देगा हरामी… चल अब धक्का मार जोर जोर से!

और फिर शुरू हुआ चुदाई का घमासान जो उस कमरे की दीवारों ने कभी देखा न था।

राजीव भी कामिनी के मम्मे मसल रहा था, कामिनी उसका लंड पकड़ कर उसे दोबारा खड़ा कर चुकी थी।

मेरा लंड कामिनी की चूत से दोस्ती के नए आयाम स्थापित कर रहा था, पूरा कमरा ‘फच्च फच्च… उह आह…’ की आवाज से गूँज रहा था।

चूँकि कामिनी की चूत में पहले से ही राजीव का वीर्य पड़ा था इसलिए मेरे लंड की स्पीड उसकी कसी हुई चूत में खूब बढ़ी हुई थी।

मैंने भी कभी इतने खुले माहौल में चुदाई नहीं की थी जहाँ शोर या आवाज का कोई डर नहीं था।

और यह हूर जैसा मखमली नंगा बदन मुझसे चिपका पड़ा था, सब कुछ एक सपने की तरह हो रहा था।

मेरा लंड और कामिनी की चिकनी चूत एसे भिड़े हुए थे जैसे बरसों के प्यासे हों।

न कामिनी को इस बात की परवाह थी कि वो अपने पति के सामने एक पराये मर्द से चुद रही है, न मुझे इस बात का डर था कि मैं एक पराये आदमी की बीवी को उसी के सामने उसी के बिस्तर पर चोद रहा हूँ।

तभी मुझे लगा कि कामिनी ने एक बार फिर अपना योनि रस छोड़ दिया है..

ठीक उसी समय मुझे भी लगा कि मैं आने वाला हूँ, मैंने कामिनी से कहा- मेरी जान, मैं छुटने वाला हूँ, कहाँ निकालूँ?

कामिनी बोली- मेरे अंदर ही डाल दो मेरे राजा, आज मेरी चूत की दूसरी सुहागरात है।

उसे और मुझे यह शर्म ही नहीं थी कि उसका पति भी हमारी बात सुन रहा है।

मैं अपना सारा माल उसके अंदर डाल कर निढाल होकर उसके ऊपर ही लेट गया।

वो भी मुझे ऐसे भींच कर बुदबुदा रही थी- अब मुझे छोड़ कर मत जाना जानू…

कुछ मिनट ऐसे पड़े रहने के बाद मुझे ख्याल आया कि घर भी तो जाना है। मैंने कामिनी को अलग करते हुए राजीव से कहा- मुझे घर जाना है।

कामिनी बोली- कॉफ़ी बनाती हूँ, पीकर जाना।

वो नंगी ही किचन में गई, राजीव उसके पीछे पीछे किचन में गया, मैं बाथरूम में एक बार फिर शावर लेने चला गया।

किचन से फिर ‘उह आह…’ की आवाज आने पर मैं समझ गया कि राजीव फिर चालू हो गया है।

मैं वहाँ झांकने गया तो देखा कि राजीव कामिनी को कुतिया बना कर चोद रहा है।

मुझे देखते ही बोला- तू भी आ जा, दे दे इसके मुँह में।

कामिनी ने खुद हाथ बढ़ा कर मेरा लंड अपने मुँह में ले लिया और चूसना शुरू कर दिया।

राजीव तो बहुत जल्दी झड़ गया और कामिनी की प्यास फिर अधूरी रह गई।

मैंने कहा- अब फिर कभी!

काफी पीकर मैं घर आ गया।

आते ही मेरी बीवी का फ़ोन आया।
 
काफी पीकर मैं घर आ गया।

आते ही मेरी बीवी का फ़ोन आया।

वो इस बात से बहुत खुश थी कि अगले महीने से उसकी चूत रोज चुदेगी, मगर इस बात से उदास थी कि आज कुछ नहीं हो पाया।

मेरा लंड तो फिर टाइट था, मैंने उससे कहा- अपनी उंगली चूत में डालो और जोर जोर से अन्दर बाहर करो… उसके लिए यह नया रोमांच था।इधर मैं अपना लंड जोर जोर से हिला रहा था, उधर वो चूत में उंगली अन्दर बाहर कर रही थी.. फ़ोन पर ही ‘उह आह…’ की आवाज आr अही थी।कुछ ही पलों में हम दोनों ही झड़ गए।

इस तरह का यह पहला अनुभव था हम दोनों का…

फ़ोन पर ही एक जोर का चुम्बन करके हम दोनों सो गए।

अगले दिन सुबह 11 बजे कामिनी का फ़ोन आया। फ़ोन पर पहले तो उसने जोरदार चुम्बन किया, फिर बोली- जानू, शादी के इतनी साल बाद पहली बार मेरी चूत की आग शांत हुई है।

उसने मुझे बताया कि अब वो रोजाना 11 बजे मुझे फ़ोन करेगी क्योंकि इस समय राजीव रोज बैंक जाता है।

हम लोग आधा घंटा फ़ोन पर बात करते रहे। उसने मुझे बताया कि राजीव करता तो रोज है मगर उसका छोटा होने से कामिनी को बड़े लंड की चाहत थी जो मुझसे मिल कर पूरी हुई।

कामिनी बोली- वैसे मैं और राजीव सेक्स को बहुत एन्जॉय करते हैं और लगभग दो महीने से राजीव इस फिराक में था कि मुझे एक नया लंड कैसे मिले। मगर मैं हर किसी के लिए तैयार नहीं थी, तुम में पता नहीं मुझे क्या दिखा कि मैं तुरंत मान गई।

शाम को राजीव का फ़ोन आया- आज रात को छत पर आ जाना।

मैं रात को नौ बजे करीब छत पर गया तो देखा कामिनी राजीव की गोदी में बैठी है, उसने नाइटी पहनी हुई थी जो राजीव ने उसके पेट तक उठा रखी थी और उसकी चूत उंगली से चोद रहा था।

मैंने उन्हें ऐसे देख कर कहा- आप मौज करो, मैं चलता हूँ…

कामिनी बोली- मौज तो हम रोज ही करते हैं, आप आये हो तो कुछ देर बैठो।

मैंने कहा- कहाँ बैठूँ?

तो राजीव ने कामिनी को नीचे सरका दिया, बोला- ले हरामी बैठ ले इसके ऊपर!

कामिनी ने हंसकर अपने हाथ में राजीव का लंड ले लिया और उसे मसलने लगी।

मेरे सामने मखमली चूत खुली पड़ी थी, मैं झुक कर उसे चाटने लगा।

धीरे धीरे स्पीड बढती गई और बढ़ गई कामिनी की सीत्कारें… वो बोली- सनी अब और मत तड़फाओ, आ जाओ अन्दर!

मैंने भी अपना लंड घुसेड़ दिया और दे दी पूरी स्पीड।

पांच मिनट के घमासान के बाद मैंने अपना माल कामिनी के कहने पर उसके मुँह में छोड़।

वो सारा माल गटक नकार पी गई और मेरा लंड चाट कर साफ कर दिया।

राजीव ने बताया कि जिन्दगी में पहली बार कामिनी ने वीर्य पिया है, उसने राजीव का कभी इसलिए नहीं पिया कि फिर चूत क्या पीयेगी। अब बिस्तर पर वो अपना माल कामिनी की चूत में डालेगा।

मैं कामिनी को चूम कर वापिस आ गया, क्योंकि 11 बजे बीवी का फ़ोन आना था।

आज कामिनी ने थका दिया था, इसलिए बीवी को फ़ोन करके मैंने बहाना बना दिया कि मैं कहीं बाहर हूँ और आज वो कल की तरह अपनी चूत को मजा दे।

मेरी बीवी ने मुझे कहा कि वो आज एक भुट्टा लेकर आई है और दिन में उसने एक बार अपनी चूत को उससे रगड़ा है।

मैं बहुत खुश हुआ कि अब मेरी बीवी भी चुदाई में एक्सपर्ट हो रही है।

मैं और कामिनी रोज फ़ोन पर बात करते बिना राजीव को बताये..

एक दिन कामिनी ने मुझे कहा- आज रात को दस बजे छत पर आ जाना और राजीव को मत बताना।

शाम को राजीव मुझे कहीं शादी में जाते मिला और बोला- आज नहीं मिलेंगे क्योंकि मैं रात को लेट लौटूंगा।

मैं लुंगी और टी शर्ट में रात को छत पर पहुँच गया, वहाँ कामिनी पहले से खड़ी थी, आज उसने नाइटी पहने थी।

मैं गुस्सा हुआ- यह क्या पहना है?

उसने हंस कर मुझे गले लगा लिया और बोली- नीचे सब जाग रहे हैं और राजीव भी जब आएगा तो उसे शक नहीं होगा।

पंद्रह मिनट तक चूमा चाटी के बाद वो एकदम से नीचे झुकी और मेरी लुंगी के अंदर मुँह करके मेरे तनतनाये लौड़े को पागलों की तरह चूसने लगी।

ऐसा लग रहा था वो आज इसे खा जाएगी।

मैंने भी उसकी नाइटी ऊपर की और उसके मम्मे दबाने लगा।

पाता नहीं क्या माहौल था, मैं भी खूब ताक़त से दबा रहा था वो भी जोर जोर से चूस रही थी, दर्द दोनों को हो रहा था मगर खुमारी ऐसी थी कि होश नहीं था

उसकी चूत ने बगावत कर दी वो खड़ी हुई और खड़े खड़े मेरा लंड अपनी चूत में कर लिया।

मैंने उसको घुटनों से उठा लिया, उसने अपने घुटने मेरी कमर पर लपेट लिए।

अब मैं उसे उछाल उछाल कर चोदने लगा।

हम दोनों की जीभ एक दूसरे के मुँह में थी और एक दूसरे को लोलीपॉप की तरह चूस रही थी।

यह उसके और मेरे दोनों के लिए एक नया अनुभव था।

मैंने ऐसा ब्लू फिल्म में देखा था।

कुछ देर बाद वो झड़ गई, मैंने उसे नीचे उतारा और कुतिया बना कर चोदना शुरू किया।

मैंने उसकी गांड में लंड डालना चाहा तो वो बोली- दर्द होगा।

पांच मिनट की धक्का मुक्की के बाद मैंने उसकी चूत अपने माल से भर दी।

अब एक नई समस्या थी, उसे पोंछने को कोई टॉवल नहीं था।

उसने मेरी लुंगी से ही अपनी चूत साफ़ की और कुछ पल चूमा चाटी करके नीचे चली गई।

अगले दिन किसी कारण मार्केट में हड़ताल हो गई तो मैंने अपनी बीवी से बात की और घर चल दिया।

मैंने अपने साथ कई अश्लील किताबें ली।

आज दिन अच्छा था, घर पर पत्नी के अलावा कोई नहीं था, माँ और पिताजी मामा के घर उसी शहर में गये हुए थे और शाम तक वापिस आने वाले थे।

घर पहुँचते ही बीवी जिसका नाम दीपा है ने मुझसे चाय को पूछा।

मैंने दीपा से कहा- चाय वाय बाद में, पहले नहा लूँ।

मैं बाथरूम में जाकर नहाने लगा और वहीं से दीपा को आवाज दी।

वो आई तो उसे मैंने अंदर खींच लिया और उसके कपड़े उतार दिए।

इससे पहले हम कभी साथ नहीं नहाये थे।

वो मुझसे चिपक गई।

शावर के नीचे मैंने उसके मम्मे चूसने शुरू किये। वो नीचे झुकी और मेरा लंड अपने मुँह में ले लिया।

अब हम दोनों से बर्दाश्त नहीं हो रहा था, हम फटाफट बदन पौंछ कर नंगे ही कमरे में आ गए और बिस्तर पर शुरू हुई हमारी रास लीला।

मैंने वो सब कुछ किया जो पिछले पंद्रह दिनों में मैंने कामिनी के साथ किया था।

मैंने चुदाई के वक़्त उससे पूछा- भुट्टे से करते कैसा लगा?

तो वो शर्मा कर बोली- अब तो रोज भुट्टे या करेले से करती हूँ और ऐसा लगता है जैसे कोई दूसरा उसे चोद रहा है।

मैंने चुदाई पूरी करके उसे किताबें दी और छुपा कर रखने को कहा।

खाना खाकर मैं बाबाजी से मिलने दूकान की ओर चला गया।

चार बजे जब घर लौटा तो देखा एक करेला बिस्तर के नीचे पड़ा है।

दीपा को लगा कि उसकी चोरी पकड़ी गई।

पूछने पर उसने बताया पूरी दोपहर वो किताबें पढ़ती रही, ज्यादा गर्म होने पर उसे करेले से अपनी चूत को शांत करना पड़ा।

रात को बिस्तर पर हम खुसुर पुसुर बात कर रहे थे।

उसने मुझसे पूछा- क्या शहर में लोग एक दूसरे की बीवी को चोदते हैं?

मैं डर गया कि मेरी चोरी पकड़ी गई, मैंने उससे पूछा- क्यों ऐसा पूछ रही हो?

उसने बताया कि हर किताब में दो-तीन कहानी इसी विषय पर हैं।

मैंने उससे कह दिया- मकसद तो मजा लेने से है चाहे कैसे भी आये।

आज पहली बार उसने मुझे बताया कि शादी से पहले एक बार वो अपनी चचेरी बहन के साथ नंगी नहाई थी और उस रात उन दोनों ने एक दूसरे की चूत में उंगली भी की थी।

यह सुनकर मेरा तो लंड तम्बू बन गया, मैंने उससे कहा- जब हम शहर रहेंगे तो अपनी चचेरी बहन को बुला लेना और एक बार फिर नंगी नहा लेना!

वो बोली- धत्त.. अब तो तुम हो साथ नहाने के लिए!

मैंने भी कह दिया- ठीक है, हम तीनों नहा लेंगे।

ऐसा सुनकर वो भी गर्म हो गई और मेरा लंड टटोलकर अपनी चूत में कर लिया।

सुबह मैं वापिस आ गया, मोटरसाइकिल खड़ी ही की थी कि राजीव का फ़ोन आ गया, पूछ रहा था कि बिना बताये क्यों चला गया था।मैंने हंस कर कहा- किसी की प्यास बुझानी थी।

अब मैं और राजीव सेक्स पर खुल कर बात कर लेते थे, दो दिन काम ज्यादा होने से मैं कामिनी से ज्यादा फ़ोन पर बात नहीं कर पाया।
 
पंद्रह दिन बाद दीपा को लाना था इसलिए घर में पेंट कराना और फरनीचर लेना था।

डबल बेड लेने के लिए मैं राजीव को साथ ले गया।

वहाँ राजीव ने हँसते हुए कहा- बड़ा और मजबूत लेना।

मैंने कहा- मजबूत तो ठीक है पर बड़ा किसलिए?

वो बेशर्मी से बोला- हम चारों के लिए!

आज उसने मुझे एक नया सपना दिखा दिया।

मैंने उससे कहा कि आज शाम को वो और कामिनी मेरे घर आयें और मुझे बताएँ कि मुझे क्या क्या करवाना चाहिए।

खाना भी मैं होटल से मंगा लूँगा, सब साथ खायेंगे।

राजीव ने कामिनी को बोल दिया कि रात को चुदाई सनी के घर पे होगी।

मैंने राजीव को बोला- तू तो हर समय यही सोचता है।

अब मैं राजीव को तू तड़ाक से बोल लेता था।

शाम को राजीव कामिनी आये, राजीव तो टीशर्ट और बरमूडा पहने था, कामिनी ने सूट पहना था।

हम लोगों ने होने वाले कामों की एक लिस्ट बनाई। हर कमरे का रंग फाईनल किया, पर्दों के साइज़ लिखे और रसोई का सामान की लिस्ट भी फाईनल की।

हालाँकि रसोई का काफी सामान तो माँ ने घर से ही भेजने को कह दिया था।

मैंने राजीव को बोला कि खरीददारी में वो मेरी मदद करे!

वो बोला कि वो तो नहीं जा पायेगा पर कामिनी मेरे साथ जा सकती है।

मैं तो यही चाहता था।

मैंने अपने लैपटॉप पर म्यूजिक लगा रखा था, राजीव बोला- क्या बजा रहा है, कुछ सेक्सी दिखा ना!

मैंने एक पोर्न फिल्म लगा दी जिसमे एक लड़की एक साथ दो लंड ले रही थी।

राजीव ने कामिनी को आँख मारी, वो समझ गई, बोली- नहीं एक साथ दोनों नहीं।

मगर उसकी सुननी किसे थी।

राजीव ने उसके होंठ अपने होंठों से मिला लिए और उसकी सलवार का नाड़ा खोल दिया।

मैं उसकी पेंटी नीचे करके उसकी चूत चूसने लगा।

राजीव ने उसके और अपने पूरे कपड़े निकाल दिये।

कामिनी ने बेशर्मी से पूछा- क्यों क्या अपना दीपा के पास छोड़ आये जो उतार नहीं रहे हो?

मैं भी फटाफट नंगा हो गया।

मेरे कमरे ने पहली बार मेरे अलावा किसी को नंगा देखा होगा।

राजीव बेड पर नीचे लेट गया और कामिनी को ऊपर लिटा कर अपना लंड नीचे से उसकी चूत में कर दिया और मुझे इशारा किया कि मैं ऊपर से आ जाऊँ।कामिनी चीखी- मेरी चूत फट जाएगी।

मैंने अपने लंड पर वैसलीन लगाई और धीरे से राजीव के पैरों के बीच आ गया।

ऊपर कामिनी अपनी चूत में एक लंड घुसाए दूसरे का इंतज़ार कर रही थी। उसको डर भी लग रहा था, पर उसकी आँखों को पढ़कर मैंने यह अनुमान लगा लिया कि वो दोनों सेक्स की इस क्रिया के लिए पहले से बात किये हुए हैं और आतुर हैं।

मैंने अपने हाथों से अपना लंड राजीव के लंड से सट कर निशाने पर जमाया और अपने होठों को कामिनी के होठों पर जड़कर धीरे धीरे लंड घुसाना शुरू किया।

कामिनी मिसमिसाई और अपनी बाहें मेरे गले में डालकर मुझे अपनी ओर खींचा… तभी उसकी चीख निकल गई।

मेरा लंड राजीव के लंड के साथ उसकी चूत में पूरा घुस चुका था।

मैंने धक्के धीरे धीरे देने शुरू किये क्योंकि मुझे डर था कि कही कामिनी को चोट न लग जाये और कहीं मेरा लंड बाहर न निकल आये। कामिनी ने मुझे और राजीव ने कामिनी को जोर से अपने से भींच रखा था, हम बिना हिले ऐसे ही पड़े रहे।

चूत रगड़ाई मांग रही थी और मेरा लंड भी रफ़्तार चाह रहा था।

मैंने राजीव से कहा- तुम गांड में आओ, मैं चोदता हूँ।

यह सुनकर कामिनी उठकर खड़ी हो गई और बोली- गांड में मैं नहीं करवाऊंगी, दर्द होगा।

मैंने राजीव से उसके लंड पर और कामिनी की गांड में वैसलीन लगाने को कहा।

राजीव ने ढेर सारी वैसलीन लगाई और कामिनी को घोड़ी बनने को कहा।

ना नुकुर के बाद कामिनी घोड़ी बन गई। राजीव उसके ऊपर आकर उसके मम्मे दबाने लगा कर उसको गर्म करने लगा। मैं उनके नीचे लेट गया।

तभी राजीव ने अपना लंड कामिनी की गांड में घुसा दिया।

कामिनी दर्द से चीखी और अलग होने की कोशिश करने लगी। तब तक मैं कामिनी की चूत को अपने लंड के पास ले आया था और कामिनी को नीचे झुका कर अपना लंड उसकी चूत में घुसा दिया।

कामिनी दर्द से छटपटा रही थी मगर हम दोनों ने अपने अपने लंडों की स्पीड बढ़ा दी।

दो मिनट के बाद कामिनी को भी मजा आने लगा, वो बोलने लगी- हाँ आज मजा आ रहा है। हरामखोरो… फाड़ दो मेरी चूत और गांड! आने दो दीपा को… अगर उसकी चूत पहले दिन ही न बजवाई तो मेरा नाम नहीं।

वो हाँफ रही थी, ‘उह आह फच्च फच्च…’ की आवाज से कमरा भर गया।

चुदास का अनोखा नजारा था।

राजीव कुछ नहीं कर रहा था, बस लंड को गांड में डाले पड़ा था, उसके ऊपर दो दो लोग लदे थे।

कामिनी तो सातवें आसमान पर थी।

तभी मेरा फव्वारा छूट गया… शायद इस ख्याल से कि जल्दी दीपा को भी हम इसमें शामिल कर लेंगे।

सब एक दूसरे से हटे और राजीव कामिनी को लेकर मेरे बाथरूम में चला गया।

मैंने भी अपने को ठीक किया।

वो दोनों नंगे ही बाहर आये, मैंने कहा- कपड़े पहन लो। खाना खाते हैं।

11 बजे वो लोग चले गए।

जाते समय कामिनी यह कहना नहीं भूली- अब दीपा को जल्दी ले आओ, वो अकेली कब तक चुदेगी।

मैं हंस पड़ा।

उनके जाते ही मैंने दीपा को फ़ोन किया कि क्या कोई जोड़ा मैं यहाँ ढूंढूँ जो हमरे साथ चुदाई करे।

दीपा ने मजाक में कहा- पहले मुझे ले तो जाओ… कभी तुम ढूंढ लो और मैं यहीं रह जाऊँ और वहाँ वो तुम्हारी इज्जत लूट लें।

मैं हंस पड़ा मगर मुझे यकीन हो गया कि दीपा को अपने ग्रुप में शामिल करने में दिक्कत नहीं आएगी। मुझे यह भी शक हुआ कि कहीं न कहीं दीपा भी कुछ बदमाशी कर रही है अपनी कामाग्नि को शांत करने के लिए।

जब मैंने उसको अपनी कसम देकर पूछा तो उसने बता दिया कि वो और उसकी चचेरी बहन रोज फ़ोन पर बातें करते हैं और उसकी बहन अपने देवर से पूरे मजे लेती है।

मैंने दीपा से कहा- अपनी बहन की मुझे भी दिलवाओ!

तो दीपा बोली- दिलवा दूँगी… मगर फिर मुझे भी तो एक और चाहिए क्योंकि उसकी बहन कह रही थी कि पति के अलावा दूसरे से करने का मजा कुछ और ही है।

मेरे मन में तो लड्डू फूट गए… यहाँ तो बात बनी बनाई है, बस दस पन्द्रह दिन की ही तो बात है। मैं इन्ही ख्वाबों में खो कर सो गया।

अगले दिन 11 बजे कामिनी का फ़ोन आया कि उसकी गांड सूज गई है और चूत से भी ब्लीडिंग हुई है।

मैंने उसको सॉरी बोला तो वो बोली- अरे इसमे सॉरी क्यों… कल के मजे के लिए तो मैं कबसे तड़फ रही थी। हाँ बस अब तीन चार दिन मैं छुट्टी पर रहूंगी, मिलना नहीं होगा फ़ोन पर तो दोस्ती निभाएँगे ही। और दीपा के आने के बाद हमारी दोस्ती और पक्की होगी।

दीपा को मनाने की जिम्मेदारी कामिनी ने ली, वो बोली- मैं एक दो दिन में ही उसे प्यार से बांध लूंगी। क्योंकि इस रिलेशनशिप में मन से स्वीकृति जरूरी है।

मैंने भी उससे वादा किया कि हम हमेशा अच्छे दोस्त बन कर रहेंगे।

अब मेरे सामने लक्ष्य था अगले दस दिनों में अपने मकान को नया रूप देने का!

मैं अपने मकान की मरम्मत और पेंट आदि कामों में जुट गया, कामिनी व राजीव ने दिल से मेरी मदद की।

कामिनी मेरे साथ जाकर मार्केट से परदे के कपड़े, बेड शीट, आदि दिलवा लाई और दर्जी को परदे सिलने भी दिलवा दिये। वो दिन में एक दो बार पेंटरों का काम भी देख जाती, अगर मैं भी उस समय घर पर होता तो सबकी निगाह बचाकर हम होंठ मिला भी लेते थे।

बढ़ई भी काम कर रहा था।

एक दिन कामिनी और उसकी सास मेरे साथ जाकर रसोई के सामान दिलवा लाई। इसके लिए मैंने उन लोगों की बात अपनी माँ से करवा दी थी। मेरी माँ को भी उनसे बात करके अच्छा लगा कि मेरे पड़ोसी इतने अच्छे हैं।

आखिर पंद्रह दिनों की मेहनत के बाद मकान तैयार हो गया। मैंने कामिनी और राजीव को थैंक्स कहने के लिये रात को खाने पर बुलाया।

राजीव ने शर्त रखी कि तुम हमारा स्वागत बिना कपड़ों के करोगे।

मैंने कहा- अच्छा आओ तो सही!

मैंने होटल से खाना मंगा लिया था और फ्रिज में बीयर ठंडी होने को रख दी।

पूरे घर में मोगरा की खुशबू कर कर नहा कर मैं उनका इंतजार करने लगा पर मैंने लोअर और टी शर्ट पहने थी। आठ बजे घंटी बजी और दरवज़ा खोलते ही मुझे जन्नत का नज़ारा देखने को मिला।

राजीव ने कामिनी को गोदी में उठा रखा था और कामिनी के हाथों में एक फूलों का गुलदस्ता था।

राजीव आते ही गुस्सा हुआ- क्यों बे तुससे कहा था कि बिना कपड़ों के दरवाज़ा खोलना… इस बात पर मेरी और कामिनी की शर्त लगी थी। तेरी वजह से मैं शर्त हार गया, शर्त के हिसाब से अब मुझे नंगा होना पड़ेगा।

मैंने और कामिनी ने हँसते हुए राजीव को जुर्माने से माफ़ कर दिया।

असल में मुझे कामिनी ने ही दिन में फ़ोन करके कह दिया था कि मैं कपड़े पहन कर ही रहूँ।

मैंने कामिनी और राजीव को मकान के काम में उनके सहयोग के लिए धन्यवाद दिया। इस पर कामिनी ने मुझे होठों से भींच लिया। इस अचानक हमले के लिए मैं भी तैयार नहीं था।

हम लोग सोफे पर बैठ गए, मैंने बियर निकल ली। राजीव के दिमाग में फिर एक खुराफात आई, बोला- आज हम कामिनी की चूत की बियर पियेंगे।

कामिनी ने शायद पहले भी ऐसा किया होगा और वो घर पर बात करके आये होंगे, इसलिए कामिनी ने तुरंत अपनी सलवार उतार दी और सोफे पर लेट गई।

राजीव ने मुझसे एक खाली बियर मग उसकी चूत के नीचे रखकर पकड़ने को कहा।

अब उसने बियर की बोतल को उसकी चूत के ऊपर से लुढ़काना शुरू किया, बियर कामिनी की चूत से होकर मग में गिरने लगी। ऐसा करके उसने तीन गिलास बनवाये, दो गिलास हम दोनों ने लिए और एक कामिनी को दिया।
 
कामिनी बोली- चलो तुम दोनों भी अपने लंड निकालो!

हमें भी अपने लोअर उतारने पड़े।

अब कामिनी ने एक एक करके हमारे लंड अपने बियर के गिलास में डुबाये और बियर में हमारे लंड घुमाया।

अब हम कामिनी की चूत में भीगी बियर पी रहे थे और कामिनी हमारे लंड में भीगी बियर पी रही थी। कामिनी को मस्ती चढ़ रही थी वो लंड पर आकर बैठ गई और हाथ से लंड अंदर कर लिया।

यह नजारा देखकर राजीव भी खड़ा हुआ और अपना लंड कामिनी के मुँह में कर दिया।

कामिनी ने अपना गिलास बराबर में टेबल पर रख और एक हाथ से राजीव का लंड चूसते हुए दूसरे हाथ को मेरे कंधे का सहारा लेकर ऊपर नीचे होकर मेरी चुदाई करने लगी।

मैंने भी अपना गिलास साइड टेबल पर रखा और कामिनी को कमर से उठा कर ऊपर नीचे करने लगा।

अचानक कामिनी ने अपनी स्पीड बढ़ा दी और हांफते हुए बोली- मजा आ गया जान… मजा आ गया… मैं… मैं… हाँ… हाँ… और जोर से करो जानू… मैं आने वाली हूँ… फाड़ दो मेरी चूत… बना दो इसका भुरता… मैं आई… मैं आई!

और कहते-कहते उसने अपना पानी छोड़ दिया।

हमने एक ब्रेक लिया और साफ़ करके कपड़े पहने, सोचा चलो खाना खा लें।

हमने एक प्लेट में ही खाना लगाया और एक दूसरे को खिलाते हुए खाना खाया।

घर जाते समय कामिनी बोली- अगली बार हम तब करेंगे जब दीपा भी साथ होगी।

दो दिन बाद मैं टैक्सी लेकर दीपा और सामान लेने घर गया।

दीपा मुझे देखकर ऐसे खुश हुई जैसे किसी कैदी को रिहाई मिल रही हो।

मैं जैसे ही अपने कमरे में पहुँचा, दीपा चाय लेकर आई और आते ही गले लिपट गई। आज उसके कसाव में वासना की आग झलक रही थी।

मैं चाय लेकर बाहर माँ बाबूजी के पास आकर बैठ गया।

वो उदास थे, मैंने उनको समझाया कि दिल छोटा न करें, कभी वो लोग गाजियाबाद आ जाया करें, कभी हम दोनों आते रहा करेंगे।

शाम को हम लोग वापिस हुए। रास्ते में ड्राईव चाय पीने उतरा तो मैंने दीपा को भींच लिया और होठों को मिला लिया।

दीपा ने अपनी जीभ मेरे मुँह में डाल दी, मैंने भी उसके मम्मे दबा दिये।

उसका हाथ मेरा लंड टटोल रहा था।

तभी ड्राईवर आता दिखाई दिया, हम ठीक होकर बैठ गए।

घर पहुँचते ही राजीव और कामिनी ने हमारे स्वागत किया।

कामिनी ने दीपा को गले लगाया और माथा चूम लिया, राजीव बोला- स्वागत में तो हम भी खड़े हैं।

दीपा शर्मा गई और राजीव को हाथ जोड़कर नमस्कार किया।

कामिनी ने हंसकर कहा- लो उसने तो तुमसे हाथ जोड़ लिए!

राजीव हार मानने वालों में से नहीं था, उसने आगे बढ़कर दीपा के कंधे पर हाथ रखकर कहा- दीपा, यहाँ तो हम ही लोग तुम्हारे रिश्तेदार और दोस्त हैं।

मैंने भी राजीव का हाथ अपने हाथ में लेकर कहा- बिल्कुल… मैं तो उनको अपने परिवार का ही हिस्सा मानता हूँ।

हमने गाड़ी से सामान उतारा, कामिनी अपने घर से चाय नाश्ता लेकर आ गई। हम सबने मिलकर चाय पी।

कामिनी जाते समय दीपा के गले में हाथ डालकर बोली- एक अच्छी दोस्त की तरह की चीज की आवश्यकता हो तो बता देना!

और फिर जो उसने किया वो मैं और दीपा सोच भी नहीं सकते थे, उसने दीपा के गले में बाहें डाले डाले कहा कि उसने सोचा भी नहीं था कि दीपा इतनी मिलनसार और प्यारी होगी।

और यह कह कर उसने दीपा को होंठ पर चूम लिया।

बस यही शुरुआत थी भविष्य में उन दोनों के बीच बढ़ी नजदीकियों की…

दोनों के जाने के बाद मैंने दीपा को गोदी में उठाकर पूरा घर दिखाया।

दीपा बोली- गर्मी लग रही है।

मैं उसका मतलब समझ गया और फटाफट हम दोनों ने अपने कपड़े उतार लिए और चिपक गए।

हमारा हर अंग एक हो जाने को बेकरार था, जीभ तो दोनों की एक हो ही चुकी थीं।

उसने अपना एक पैर उठा कर मेरी कमर पर लपेट लिया था, मैंने एक हाथ से उसकी चूत की मालिश शुरू कर दी थी।

वो कसमसा कर बोली- बिस्तर पर चलो!

बिस्तर पर उसको लिटा कर मैंने उसकी चूत चूसनी शुरू कर दी, वो जोर जोर से आवाज करने लग गई। मैं चाहता था कि वो धीमे से बोले, पर उसकी कामाग्नि भड़क चुकी थी और उसे इस समय सिर्फ एक चीज ही चाहिये थी, वो थी जोरदार चुदाई!

मैं भी बर्दाश्त नहीं कर पा रहा था, मैंने अपना लंड उसकी चूत के मुँह पर लगाया और एक ही धक्के में अन्दर कर दिया।

एक बार तो दीपा चीखी- फाड़ ही दोगे क्या?

मैंने भी कहा- और लाया किस लिए हूँ?

वो बोली- फिर देर क्यों कर रहे हो फाड़ दो मेरी चूत… बना दो इसका भोसड़ा… घुसेड़ दो अपना लौड़ा पूरा अन्दर!

यह भाषा उसको उन्ही किताबों से मिली थी जो मैं उसको दे आया था।

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दस मिनट के घमासान के बाद दोनों एक साथ छूटे, कोई तौलिया नहीं था पास में, चादर ही गन्दी हो गई।

इतने में ही राजीव का फ़ोन आया- क्यों बे साले, कर लिया गृह प्रवेश?

मैंने कहा- तुझे कैसे मालूम?

वो बोला- कामिनी ने ठंडा पानी भिजवाया था, क्योंकि तेरा फ्रिज बंद था, गेट पर जब अन्दर की सीत्कारें सुनाई दी तो वो वापिस चला गया।

रात को कामिनी का भेजा खाना खाकर हम जल्दी सोने चले गए, क्योंकि सफ़र की थकान थी और एक बार चुदाई हो चुकी थी।

मगर बिस्तर पर लेटते समय मैंने दीपा से कहा- आज के बाद हम कभी कपड़े पहन कर नहीं सोयेंगे।

उसे भी यह आईडिया अच्छा लगा और वो तुरंत नंगी हो गई, मुझे तो केवल लुंगी ही उतारनी थी। जब चूत और लंड का टकराव हुआ और मम्मे दबे तो सारी थकान भूल कर मैं दीपा के चढ़ गया।

उसने भी टांगें चौड़ा कर मेरा पूरा लंड अंदर कर लिया।

फिर जो चुदाई का आलम शुरू हुआ तो आगे पीछे ऊपर नीचे सारे आसन निबटा कर हम चुपक कर लेटे।

अब हमारा बातचीत का विषय था कामिनी और राजीव!

मैंने उनकी खूब तारीफ़ की और सबसे ज्यादा तारीफ़ की राजीव के सेक्सी स्वभाव की क्योंकि कामिनी ने मुझसे कहा था कि मैं दीपा से कामिनी की तारीफ न करूँ क्योंकि कोई औरत दूसरी औरत की तारीफ़ अपने पति से सुनना पसंद नहीं करती।

मैंने बातों ही बातों में यह भी बता दिया कि राजीव को रोज सेक्स करने की आदत है और वो भी नए नए स्टाइल में!

कुल मिलाकर दीपा के मन में राजीव के लिए क्रेज पैदा कर दिया।

अगले दिन मैं जब दुकान के लिए निकल ही रहा था, कामिनी आ गई और दीपा को आँख मारकर बोली- कैसी रही?

दीपा शर्मा गई।

कामिनी ने मुझसे कहा- आप दुकान जाओ, मैं दीपा के साथ घर ठीक करवाती हूँ, मैं शाम तक यहीं हूँ।

मैं समझ गया कि कामिनी अपनी जिम्मेदारी पूरी करने आ गई है मैदान में!

अब शाम तक की कहानी दीपा के मुख से सुनिए:

सनी के जाते ही मैंने कामिनी से कहा- दीदी आप बैठिये, मैं अपने आप कर लूंगी!

तो कामिनी ने मुझसे कहा कि भले ही वो मुझसे बड़ी है, पर दीपा उसे कामिनी ही कहे, क्योंकि कामिनी की अपनी छोटी बहन भी उसे कामिनी ही कहती है।

मैंने कहा- ठीक है, जैसा आपको अच्छा लगे! मैं नहा कर आती हूँ, फिर बैठ कर गप्पे मारेंगे।

कामिनी बोली- ठीक है।

मैं नहाने के कपड़े लेकर चली तो कामिनी ने उसे टोका कि ये साड़ी वाड़ी पहनने की कोई जरूरत नहीं है, यहाँ कोई नहीं आएगा शाम तक, कुछ भी हल्का पहन लो।

मैंने कहा- मेरे पास अभी तो कोई ऐसे कपड़े नहीं हैं।

तो कामिनी बोली- तू तो बहुत सीधी है, कपड़े मैं निकाल कर देती हूँ, तू नहा कर आ!

मैंने नहा कर अन्दर से आवाज दी- दीदी मेरे कपड़े दे दो!

तो कामिनी मुझसे बोली- टॉवल लपेट कर बहार आ जाओ, मैंने कपड़े बिस्तर पर रख दिये हैं।

जब मैं बाहर आई तो मैंने केवल तौलिया लपेट रखा था, और मेररे भीगे बालों से पानी टपक रहा था।

कामिनी ने मुझे गले लगा लिया, बल्कि सही कहूं तो मेरे मम्मे भींच दिये और बोली- अगर अब के बाद दीदी कहा तो मैं तेरा टॉवल खींच दूँगी।

मैं घबरा गई मैंने कहा- सॉरी अब कामिनी ही बोलूंगी, मगर मेरे कपड़े तो दो?

उसने मुझे सनी की लुंगी और टीशर्ट दी।

मैंने कहा- मैं ये नहीं पहनूंगी आप के सामने!

तो कामिनी बोली- चल अच्छा अब वो पहन ले जो पहन कर रात को सोई थी।

मेरे मुँह से निकल गया- रात को तो कुछ भी नहीं पहना था!

कह कर मैं खुद शरमा गई कि हाय यह मैंने क्या कह दिया।

तो कामिनी बोली- शर्मा मत, मैं भी अभी चेंज कर लेती हूँ और उसने तो केवल टी शर्ट ही डाली, नीचे कुछ नहीं!

मैं तो आश्चर्य से देख रही थी, लग ही नहीं रहा था कि इससे मैं केवल एक दिन पहले मिली हूँ।

खैर, अब हमने घर का काम करना शुरू किया, पूरा घर सेट किया, बीच में कई बार कामिनी ने मेरे मम्मे छू दिये।

परदे टांगने के लिए वो एक स्टूल पर चढ़ी और मैं नीचे से उसे पर्दे पकड़ा रही थी, टी शर्ट के नीचे से उसकी पैंटी दिख रही थी और वो इतनी महीन जाली की थी कि उसकी गुलाबी चूत साफ़ नजर आ रही थी।

वो बोली- क्या देख रही है?

मैंने कहा- आज आपने मुझे पूरा बदमाश बना दिया!

कामिनी बोली- अब तक तो तूने कोई बदमाशी की नहीं?

मुझे क्या झक चढ़ी, मैंने उनकी चूत में उंगली कर दी।

वो चीखी, बोली- हाय मेरी जान, मैं तो कब से इन्तजार कर रही थी!

यह कह कर वो स्टूल पर से ही कूद गई और मेरी टी शर्ट के अंदर हाथ डाल कर मेरे मम्मी दबा दिये और मेरे होंठ अपने होठों से लगा लिए।
 
पता नहीं क्या मस्ती का आलम था, मुझ पर क्या नशा चढ़ गया था, मैंने भी कामिनी के होंठ चूसने शुरू कर दिए और अपनी उंगली उसकी चूत में घुमानी शुरू कर दी।

वो मुझे खींचकर बिस्तर पर ले गई और अगले ही पल हम दोनों नंगी होकर एक दूसरी की चूत चूस रही थी।

कुछ पल बाद मुझे ऐसा लगा कि कहीं कुछ गलत हो रहा है मुझसे… मैं झटके से खड़ी हो गई और भाग कर बाथरूम में चली गई।

मेरे अन्दर आग लगी थी पर मन में डर था।

मैंने शावर खोल दिया…

अगले ही पल कामिनी भी बाथरूम में आ गई और मुझे सहलाते हुए शावर लेने लगी, हम एक बार फिर चिपक गए।

मगर इस बार डर नहीं शरीर की जरूरत थी।

दस मिनट शावर लेने के बाद हम टॉवल लपेट कर बाहर आये, कामिनी अपने कपड़े पहन कर घर चली गई और मैं भी सो गई।

शाम को आँख खुली तो देखा पांच बजे हैं, फटाफट खाने की तैयारी में लग गई।

कामिनी मुझे बहुत अच्छी लगी थी और सच बताऊँ तो मुझे राजीव भी मस्त आदमी लगा था।

मैंने सनी को फ़ोन किया कि आज रात को खाने पर कामिनी और राजीव को भी बुला लो।

मैं गली के बाहर डेरी से पनीर ले आई और रात की तैयारी करने लगी।

कामिनी का फ़ोन आया और मुझसे बोली- बुरा तो नहीं लगा?

मैंने कहा- बहुत बुरा लगा और ऐसा बुरा मैं रोज लगाना चाहती हूँ।

यह सुनकर कामिनी बहुत जोर से हंसी और बोली- वादा रहा!

कामिनी बोली- अभी राजीव का फ़ोन आया है कि उससे सनी ने रात को खाने पर आने को कहा है। पर राजीव का कहना है कि डिनर का ड्रेस कोड होना चाहिए।

कामिनी ने मुझसे पूछा कि मैं क्या ड्रेस पहनना चाहती हूँ, वो ड्रेस कामिनी मुझे भेज देगी।

मुझे राजीव के सामने उल्टा सीधा पहनने में शर्म आ रही थी तो कामिनी ने मुझे समझाया कि अब हम सब दोस्त हैं, और जब एक बार राजीव से घुल मिल जाओगी तो अटपटा नहीं लगेगा।

खैर मैं कामिनी के कहने पर फ्रॉक पहनने को तैयार हो गई, जो कामिनी ने मुझे छत पर बुला कर दे दी।

उसने मुझे बता दिया कि जेंट्स को लुंगी और टी शर्ट पहननी है।

मुझे बड़ा मजा आया वो फ्रॉक पहन कर देखने में!

कामिनी ने मुझे फ़्रॉक दी, मैंने पहन कर देखी मैं काफ़ी रोमांचित हो गई।

मैं उत्साहित होकर सनी का इन्तजार करने लगी।

आठ बजे सनी आये और आते ही मुझे गोदी में बिठा कर चूमा चाटी की, हम दोनों चाय पीकर साथ साथ नहाने गए।

नहाकर मैंने तो फ्रॉक पहनी, उसके नीचे ब्रा और पैंटी भी पहनी, सनी ने लुंगी बिना अंडरवियर के पहनी।

मैंने कहा- अंडरवियर क्यों नहीं?

तो बोले- गर्मी है!

नौ बजे राजीव कामिनी आये।

कामिनी खुले बालों में गजब लग रही थी और राजीव का शार्ट लोअर उसके औजार का साइज़ बताने के हिसाब से छोटा था। राजीव ने बड़ी बेशर्मी से मेरे गालों को सहलाया, मुझे उलझन लगी पर कामिनी ने तो हद कर दी, सबके सामने मुझे चूम लिया और मेरे मम्मों से अपने मम्मे भिड़ाये।

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वो मुझे खींचकर कमरे में ले गई और बोली- ये ब्रा क्यों पहनी है?

मैंने कहा- कामिनी हद करती हो, राजीव भैया के सामने बिना ब्रा के?

तो वो बोली- बेफिक्र रहो, राजीव तुम्हारे मम्मे नहीं दबायेंगे।

मैं हंस पड़ी और बोली- तुम चलो मैं अभी उतार कर आती हूँ!

मैं फटाफट ब्रा उतारकर बाहर गई और सबको कोल्ड ड्रिंक सर्व की।

राजीव ने कामिनी से कहा कि वो उसकी गोद में बैठ जाये।

मुझे लगा कि वो मजाक कर रहे हैं मगर कामिनी तो उछाल मार कर राजीव की गोद में जा बैठी।

मुझे लगा सनी को ख़राब लग रहा होगा, पर वो तो मेरी ओर देखकर आँख मारकर बोला- भाई अब मुझे क्यों अकेला छोड़ रही हो?

कामिनी उठी और मुझे जबरदस्ती सनी की गोद में बिठा दिया।

सनी को खड़ा लंड मुझे ठीक से बैठने नहीं दे रहा था, मैं इधर उधर हिल रही थी।

यह देखकर कामिनी हंसकर बोली- इसे अंदर करके आराम से बैठ जाओ, अपना ही घर और अपना ही घरवाला है।

मेरी फ्रॉक पीछे से ऊपर उठी हुई थी, मगर मैंने पैंटी पहनी हुई थी।

सनी इतनी हिम्मत नहीं कर पा रहा था कि वो सबके सामने मेरी पैंटी उतार सके।

कामिनी उठी और कमरे की बड़ी लाईट बंद कर कर छोटी लाईट जला दी जिसमें कुछ ज्यादा नहीं दिख रहा था।

फिर वो राजीव की गोद में बैठ गई, मगर बैठते समय उसने अपनी फ्रॉक पीछे से ऊपर उठा दी।

और पता नहीं क्या हुआ, उसकी हल्की सी ‘ओ मर गई…’ की आवाज आई।

मैंने ध्यान से देखा तो समझ में आया कि राजीव भैया ने अपना लंड उसकी चूत में कर दिया है।

मुझे बड़ी शर्म आ रही थी, मैं वहाँ से उठी और किचन में चली आई।

पीछे पीछे कामिनी भी आ गई और हंसते हुए बोली- राजीव बहुत बेसब्र है, कभी जगह का भी ख्याल नहीं रखते!

उसने पीछे से मेरी फ्रॉक उठा कर कहा- अरे तूने पैंटी क्यों पहनी, इसीलिए सनी तेरी चूत में नहीं घुस पाया?

मैंने कहा- आखिर कुछ तो शर्म होनी ही चाहिए और अगर मैं बिना पैंटी के भी होती तो सनी सबके सामने कुछ ऐसा नहीं करते।

कामिनी बोली- चल लगा शर्त, तू पैंटी उतार और फिर देखना सनी की बेशर्मी!

मैंने भी शर्त मान ली और किचन में ही पैंटी उतार दी।

कामिनी बोली- अब मैं बाहर जाती हूँ, तू सनी को किसी बहने से यहाँ बुला ले, फिर देखना सनी की शराफत!

कामिनी बाहर चली गई, मैंने सनी को आवाज लगाकर कहा कि खाना लगवाने में मेरी मदद करो।

मैं खुद भी चुदासी हो रही थी, बल्कि मेरा मन तो कर रहा था कि बजाये सनी के राजीव को यहाँ बुलाऊँ!

सनी आया और बोला- क्या मदद करूँ जानू?

पीछे से आते ही उसने मेरी गांड को टटोला और जब उसे ये एहसास हुआ कि मैंने पैंटी उतार दी है तो वो जैसे पागल हो गए, उसने मुझे पीछे से पकड़ा और मेरे मम्मे दबाने शुरु कर दिये।

मैंने भी पीछे हाथ ले जाकर उसका लंड पकड़ लिया।

बस अब क्या था, उसने अपना लंड बाहर निकला और घुसेड़ दिया मेरी चूत में!

मैं बोली- क्या कर रहे हो? कामिनी आ जाएगी।

सनी बोला- वो कैसे आएगी, वो तो बाहर चुदवा रही है।

मुझे विश्वास नहीं हुआ, मैं सनी का हाथ पकड़ कर बाहर आई तो देखा राजीव कामिनी को कुतिया स्टाइल में चोद रहा है।

मैं घबरा रही थी, यह मेरे लिए नया और अजूबा अनुभव था।

मेरी चूत गीली और चुदने को बेताब थी।

सनी ने मेरी आँखें पढ़ ली थी और मुझे उसने आगे मेज पर झुकाया और अपना लंड मेरी चूत में दाखिल कर दिया।

अब कामिनी और मैं चुदवा रही थी और एक दूसरे को देख भी रही थी।

हालाँकि सनी का लंड राजीव से बड़ा था मगर मुझे अपनी चचेरी बहन की बात याद आ रही थी कि दूसरे लंड का मजा कुछ और ही है।

इतने में ही राजीव ने अपना माल कामिनी के अंदर छोड़ दिया और वो एक रुमाल से अपने को पौंछने लगे।

सनी के धक्के चालू थे और कामिनी आँख फाड़कर सनी के लंड को देख रही थी।

अचानक राजीव उठा और मेरे मम्मे पकड़ लिए।

सच बताऊँ तो मुझे अच्छा लगा।

सनी ने धक्के और तेज कर दिए और एक झटके में अपना माल मेरी चूत में डाल दिया।

हम सब हंसते हुए उठे और अपने अपने को साफ करके खाना खाने बैठ गए।

यह तो बस शुरुआत थी.. कहानी तो अब शुरू होनी थी…
 
अब आगे की कहानी मैं सुनाता हूँ!

खाना खाकर मैंने दीपा को फ्रिज से आइसक्रीम निकालने को कहा।

वो उठी, मैं भी पीछे पीछे चला गया, मैंने उसको पीछे से गले लगाकर पूछा कि उसे बुरा तो नहीं लग रहा, और क्या वो और भी आगे बढ़ने को तैयार है?

तो उसने पलट कर मुझे चूम कर कहा कि मेरे साथ वो हर चीज के लिए और किसी भी लिमिट तक तैयार है बस इन सबसे मेरे और उसके संबंधों पर फर्क नहीं आना चाहिए।

मैंने उससे पूछा- कामिनी और राजीव कैसे लगे?

तो वो हंसकर बोली- कामिनी बहुत जिंदादिल और अच्छी है और राजीव को उसने चखा कहाँ है तो उसे क्या मालूम कि वो कैसा है।

मैंने कहा- चल बाहर… अभी चखा दूँ।

तो दीपा बोली- अभी तो आइसक्रीम ले आऊँ, फिर देख लेंगे! जरूरी तो नहीं कि आज ही सारा कार्यक्रम हो जाये!

वो चार कपों में डालकर आइसक्रीम ले आई, हमने आइसक्रीम खानी शुरू की तो राजीव ने फिर एक नई खुराफात हमसे बिना पूछे कर दी, उसने कामिनी को लिटाकर उसकी फ्रॉक ऊपर करके उसकी चूत में अपना आइसक्रीम का कप पलट दिया और उसे जीभ से चाटने लगा।

कामिनी ने दीपा जो आँख फाड़कर ये नजारा देख रही थी, को अपने पास बुलाया और उसे अपने मुँह के ऊपर बिठाया और उसकी चूत चूसने लगी।

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अब अकेला मैं क्या करता, मैंने भी ताव में आकर अपने लंड पर आइसक्रीम लगा ली और लंड दे दिया दीपा के मुँह के अंदर…

यह देख कर कामिनी बोली- सनी, मुझे भी चूसना है!

मैंने दीपा की ओर देखा, दीपा ने मेरे लंड को मुँह से निकाल कर उस पर और आइसक्रीम लगा कर मुझे अपनी जगह बिठा दिया और कामिनी मेरे लंड चूसने लगी।

राजीव कामिनी की चूत चूस रहा था और कामिनी मेरे लंड चूस रही थी।

मैंने दीपा से कहा- राजीव का लंड खाली है उसे तू चूस…

दीपा को झिझक हो रही थी, राजीव ने उसका हाथ अपने लोअर में कर दिया।

फिर तो दीपा ने उसका लोअर नीचे किया और उसका लंड अपने मुँह के अंदर ले लिया।

क्या नजारा था… हर ओर चुसाई और चुदाई का आलम!

जैसे ही एक मिनट को राजीव ने अपना मुँह कामिनी की चूत से हटाया और दीपा से चुसवाने में अच्छी पोजीशन करी, मैंने फटाक से अपना लंड कामिनी के मुँह से हटाकर उसकी चूत में घुसा दिया।

कामिनी ने भी अपनी टांगें मेरे कंधों पर रख ली। हम जोरदार चुदाई में लग गए।

यह देखकर दीपा ने भी राजीव का लंड मुँह से निकाल दिया और लेट गई इस इन्तजार में कि राजीव उसकी चूत फाड़ दे!

राजीव ने उसकी दोनों टांगों को दोनों हाथों से फैलाया और अपना औज़ार दीपा की चूत में डाल दिया।

दीपा ने जिन्दगी में पहली बार किसी दूसरे का लंड खाया था, भले ही इसका इंतज़ार वो कबसे कर रही थी।

दीपा और कामिनी ने एक दूसरे के हाथ पकड़ लिए थे और मैं और राजीव एक दूसरे की बीवियों की चूत बजा रहे थे।

मैंने कहा- राजीव चलो इनकी गांड भी खोल दें!

मगर दीपा इसके लिए तैयार नहीं हुई, बोली- फिर कभी!

रात काफी हो चुकी थी, कामिनी राजीव अपने घर चले गए।

हमने कपड़े नहीं पहने थे, हम ऐसे ही सो गए।

अगले इतवार को कामिनी ने वाटर पार्क का प्रोग्राम बनाया। मेरी छुट्टी तो मंगलवार को होती थी मगर कामिनी के बार बार कहने पर मैं दोपहर दो बजे बाद चलने को तैयार हुआ।

वाटर पार्क में स्विमिंग कोस्टयूम तो वहीं से लेने थे, अपने टॉवल लेकर दीपा कामिनी के साथ आ गई। मैं और राजीव सीधे वहीं पहुँचे।

कामिनी और दीपा ने बिकनी स्टाइल का कोस्टयूम लिया और मैंने और राजीव ने बरमूडा!

हम लोग एक साथ खूब मस्ती करने लगे। यह तय हो गया था कि कामिनी मेरे साथ रहेगी और दीपा राजीव के साथ!

एक बंद वाली स्लाइड में मैं और कामिनी ऊपर से नीचे फिसल कर आये, अंदर मैंने कामिनी के मम्मे जोरे से दबाये।

कामिनी चीखी पर इतनी शोर में उसकी चीख कहाँ सुनाई देती।

नीचे दीपा आते ही बोली- राजीव तो बहुत बदमाश है! ऊपर से नीचे आते में इसने मेरे मम्मे दबा दबा कर परेशान कर दिया।

हम लोग स्विमिंग पूल में भी इन दोनों की चूत में उंगली करते रहे।

वहाँ खड़े गार्ड ने एक बार देख भी लिया और सीटी बजाई।

मैंने बाहर आकर उससे कहा कि चुपचाप जो हो रहा है होने दे और कल मेरी दुकान पर आकर 500 रुपये ले जाये।

वो मुस्कुरा कर बोला- ठीक है, पर और लोगों न देखें, इस बात का भी ध्यान रखें!

शाम को घर आने पर प्रोग्राम बना कि रात को खाना छत पर खायेंगे।

हम लोग अपना अपना खाना लेकर 9 बजे छत पर पहुँच गए। छत पर ज्यादा रोशनी नहीं थी। कामिनी और दीपा ने तय कर लिया था कि वो दोनों गाऊन में आएँगी, मैंने लुंगी और शर्ट पहनी थी, राजीव भी लुंगी और टीशर्ट पहने था।

हम लोग नीचे चटाई बिछाकर बैठ गए, अब हमें दूसरी छतों से भी कोई देख नहीं सकता था।

कामिनी ने हाथ आगे बढ़ाकर मेरी और राजीव की लुंगी की गाँठ खोल दी।

हमारी लुंगी आगे से खुलकर हमारे औजार दिखाने लगी।

इसके बाद कामिनी ने दीपा के गाऊन की बेल्ट खींच दी।

मैं यह देख कर दंग रह गया कि दीपा ने नीचे कुछ भी नहीं पहना था

अब दीपा ने कामिनी का भी गाऊन खोल दिया, हम चारों अपने नंगे बदन को दिखा रहे थे।

यह देखकर और कामिनी और दीपा की बदमाशी समझ कर हम हंस पड़े।

राजीव ने दीपा को अपनी ओर खींच लिया, दीपा पेट के बल लेट कर राजीव का लंड चूसने लगी।

मैं कामिनी के पीछे बैठकर उसके मम्मी दबाते हुए उसकी जीभ अपनी जीभ से चूसने लगा।

तभी दीपा ने अपनी उंगली कामिनी की चूत में कर दी और कामिनी ने भी अपने पैर का अंगूठा दीपा की चूत में कर दिया..

कोई देख न ले इसलिए हम लोग खड़े नहीं हो सकते थे।

बहुत देर तक हम ऐसे ही करते रहे।

राजीव तो दीपा के मुँह में झड़ गया पर दीपा, कामिनी और मेरी प्यास अधूरी रही।

मैंने दीपा से कहा- चलो नीचे चलते हैं।

तो कामिनी बोली- मेरा क्या होगा?

पर मजबूरी थी इससे ज्यादा यहाँ कुछ हो भी नहीं सकता था।

मैंने राजीव को एक आईडिया दिया कि दो दिन के लिए जिम कार्बेट पार्क चलते हैं, वहाँ मैं कामिनी के साथ रहूँगा और तुम दीपा के साथ… दो दिन सिर्फ चुदाई… बस खाने के लिए ही बहार निकलेंगे।

मेरा आईडिया सबको पसंद आया। यह जिम्मेदारी मुझे दी गई कि मैं काम के हिसाब से छुट्टी की डेट निकाल लूँ और राजीव से कन्फर्म करके रिजर्वेशन करा लूँ।
 
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