S
StoryPublisher
Guest
मैंने बिजली से पूछा- बिजली, क्या बात है? तुमने मुझे क्यों बुलाया?
बिजली- अरे दीनू, मेरे पिताजी रोज दोपहर को आते हैं और मम्मी को कहते हैं कि चल ऊपर स्टोर-रूम में चीनी बोरी फाड़नी है।
मैं- तो बिजली रानी, चीनी बोरी फाड़ने जाते होंगे।
बिजली- चल देखते हैं?
मैं- मैं नहीं जाता, चीनी बोरी फाड़ते हुए देखने।
बिजली- चल ना दीनू... प्लीज़ज़ चल ना।
मैं और बिजली दोनों सीढ़ियां चढ़कर ऊपर गये। और खिड़की से झाँक करके देखा की बिजली की मम्मी साड़ी को कमर तक खिसकाये, अपनी झाँटदार बुर को बिजली के पापा से चटवा रही हैं। और फिर जब दोनों गरम हो गये तो दोनों की चुदाई चालू हो गई। मैं और बिजली भी गरम होने लगे। मैंने बिजली की चूची थाम ली तो उसने मेरे लण्ड को थमा।
दूसरे दिन... मैं उसके यहां कुछ जल्दी ही पहुँच गया। बिजली भी खुश, मैं भी खुश। उसकी मम्मी पड़ोस में, उसका बाप दुकान में और मैं और बिजली दोनों उसके स्टोर-रूम में।
मैंने बिजली की सलवार खोल दी। हाय... हाय... झाँटों के बिना उसकी फुद्दी बड़ी सुंदर लग रही थी। मैंने देखा फुद्दी के ठीक ऊपर एक काला तिल उसकी फुद्दी की सुंदरता में चार चाँद लगा रहा था। मैंने उसकी तारीफ की तो उसने भी मेरे लण्ड के सुपाड़े के ऊपर के तिल की तारीफ की। उसने मेरा लण्ड चूसा तो मैं भी उसकी फुद्दी के ऊपर टूट पड़ा।
थोड़ी देर में दोनों जब गरम हो गये। तब बिजली बोली- दीनू, अब टाइम आ गया है, चीनी बोरी फाड़ने का। माँ बोलती है रोज बहुत मजा आता है।
मैंने उसकी फुद्दी के छेद में लण्ड का सुपाड़ा लगाया, और एक हल्का सा धक्का लगाया, और बिजली की चीख निकल गई। उसने मुझे हटाना चाहा, पर मुझमें और रुकने की चाहत नहीं थी। मैंने दूसरा धक्का लगाया और मेरा लण्ड उसकी फुद्दी में आधा घुस चुका थाता। खून निकलना चालू हो गया, पर मैंने उसे बताया नहीं। मैंने अपना लण्ड थोड़ा सा बाहर निकाला और तीसरा और आखिरी धक्का लगाया तो मेरा लण्ड जड़ तक घुस चुका था। और बिजली दर्द से छटपटा रही थी।
बिजली- “दीनू.. मुझे नहीं फड़वानी चीनी बोरी... बाहर निकल... दीनू, बाहर निकल ले... सच में बहुत दर्द हो रहा है, पर मम्मी तो कहती थी कि बहुत मजा आता है। लगता है तेरा लण्ड पापा से भी बड़ा है। पर धीरे-धीरे दर्द कम हो रहा है। दीनू, हाँ हाँ ऐसे ही चूचियों को दबाते हुए धक्का लगाते रहो। देखो दीनू मैं भी मम्मी के जैसे चूतड़ उछालना सीख गई हूँ। है ना... देख सच में मुझे भी मजा आने लगा है। हाँ... दीनू, बोल ना... तुझे कैसा लग रहा है? मैं तो आसमान में उड़ रही हूँ दीनू। हे... मेरा तो पेशाब निकलने वाला है। अरे ... मेरा निकल रहा है रे... अरे रे, मैं आसमान से नीचे गिर रही हूँ..” और बिजली रानी शांत हो गई।
मैं अभी तक झड़ा नहीं था। मैं बदस्तूर धक्के मारता रहा।
इतने में बिजली फिर से गरमा गई- “हाँ हाँ दीनू, फिर से मजा आने लगा है। हाँ हाँ... धक्का बंद मत करियो... बंद मत करियो धक्का.. मेरे बापू का कभी-कभी पहले निकल जाता है तो मम्मी गुस्सा करती हैं। फिर रसोई से बैगन लेकर अपनी फुद्दी में घुसेड़ लेती हैं। पर दीनू, मैं बैगन, गाजर, मूली, केला, ककड़ी, कुछ भी नहीं घुसेड्गी... कुछ भी नहीं। मेरी फुद्दी को तो सिर्फ तेरा लण्ड ही चाहिए। सिर्फ और सिर्फ तेरा लण्ड... ये मस्ताना लण्ड... लण्ड के ऊपर आलू जैसे सुपाड़ा और उसपर काला सा तिल है... इसे मैं जिंदगी भर नहीं भूलूंगी... जिंदगी भर नहीं भूलूंगी...”
और मेरा भी पानी निकलने वाला था। मैंने धक्के की स्पीड तेज कर दी।
बिजली तीसरी बार गरम होने लगी, और चूतड़ उछलने लगी। बिजली बोली- “आई लोव यू.. दीनू, आई लव यू..”
मैं- बिजली, मेरा भी निकालने वाला है। पानी कहाँ निकालूं?
बिजली- अरे दीनू, मेरे पिताजी रोज दोपहर को आते हैं और मम्मी को कहते हैं कि चल ऊपर स्टोर-रूम में चीनी बोरी फाड़नी है।
मैं- तो बिजली रानी, चीनी बोरी फाड़ने जाते होंगे।
बिजली- चल देखते हैं?
मैं- मैं नहीं जाता, चीनी बोरी फाड़ते हुए देखने।
बिजली- चल ना दीनू... प्लीज़ज़ चल ना।
मैं और बिजली दोनों सीढ़ियां चढ़कर ऊपर गये। और खिड़की से झाँक करके देखा की बिजली की मम्मी साड़ी को कमर तक खिसकाये, अपनी झाँटदार बुर को बिजली के पापा से चटवा रही हैं। और फिर जब दोनों गरम हो गये तो दोनों की चुदाई चालू हो गई। मैं और बिजली भी गरम होने लगे। मैंने बिजली की चूची थाम ली तो उसने मेरे लण्ड को थमा।
दूसरे दिन... मैं उसके यहां कुछ जल्दी ही पहुँच गया। बिजली भी खुश, मैं भी खुश। उसकी मम्मी पड़ोस में, उसका बाप दुकान में और मैं और बिजली दोनों उसके स्टोर-रूम में।
मैंने बिजली की सलवार खोल दी। हाय... हाय... झाँटों के बिना उसकी फुद्दी बड़ी सुंदर लग रही थी। मैंने देखा फुद्दी के ठीक ऊपर एक काला तिल उसकी फुद्दी की सुंदरता में चार चाँद लगा रहा था। मैंने उसकी तारीफ की तो उसने भी मेरे लण्ड के सुपाड़े के ऊपर के तिल की तारीफ की। उसने मेरा लण्ड चूसा तो मैं भी उसकी फुद्दी के ऊपर टूट पड़ा।
थोड़ी देर में दोनों जब गरम हो गये। तब बिजली बोली- दीनू, अब टाइम आ गया है, चीनी बोरी फाड़ने का। माँ बोलती है रोज बहुत मजा आता है।
मैंने उसकी फुद्दी के छेद में लण्ड का सुपाड़ा लगाया, और एक हल्का सा धक्का लगाया, और बिजली की चीख निकल गई। उसने मुझे हटाना चाहा, पर मुझमें और रुकने की चाहत नहीं थी। मैंने दूसरा धक्का लगाया और मेरा लण्ड उसकी फुद्दी में आधा घुस चुका थाता। खून निकलना चालू हो गया, पर मैंने उसे बताया नहीं। मैंने अपना लण्ड थोड़ा सा बाहर निकाला और तीसरा और आखिरी धक्का लगाया तो मेरा लण्ड जड़ तक घुस चुका था। और बिजली दर्द से छटपटा रही थी।
बिजली- “दीनू.. मुझे नहीं फड़वानी चीनी बोरी... बाहर निकल... दीनू, बाहर निकल ले... सच में बहुत दर्द हो रहा है, पर मम्मी तो कहती थी कि बहुत मजा आता है। लगता है तेरा लण्ड पापा से भी बड़ा है। पर धीरे-धीरे दर्द कम हो रहा है। दीनू, हाँ हाँ ऐसे ही चूचियों को दबाते हुए धक्का लगाते रहो। देखो दीनू मैं भी मम्मी के जैसे चूतड़ उछालना सीख गई हूँ। है ना... देख सच में मुझे भी मजा आने लगा है। हाँ... दीनू, बोल ना... तुझे कैसा लग रहा है? मैं तो आसमान में उड़ रही हूँ दीनू। हे... मेरा तो पेशाब निकलने वाला है। अरे ... मेरा निकल रहा है रे... अरे रे, मैं आसमान से नीचे गिर रही हूँ..” और बिजली रानी शांत हो गई।
मैं अभी तक झड़ा नहीं था। मैं बदस्तूर धक्के मारता रहा।
इतने में बिजली फिर से गरमा गई- “हाँ हाँ दीनू, फिर से मजा आने लगा है। हाँ हाँ... धक्का बंद मत करियो... बंद मत करियो धक्का.. मेरे बापू का कभी-कभी पहले निकल जाता है तो मम्मी गुस्सा करती हैं। फिर रसोई से बैगन लेकर अपनी फुद्दी में घुसेड़ लेती हैं। पर दीनू, मैं बैगन, गाजर, मूली, केला, ककड़ी, कुछ भी नहीं घुसेड्गी... कुछ भी नहीं। मेरी फुद्दी को तो सिर्फ तेरा लण्ड ही चाहिए। सिर्फ और सिर्फ तेरा लण्ड... ये मस्ताना लण्ड... लण्ड के ऊपर आलू जैसे सुपाड़ा और उसपर काला सा तिल है... इसे मैं जिंदगी भर नहीं भूलूंगी... जिंदगी भर नहीं भूलूंगी...”
और मेरा भी पानी निकलने वाला था। मैंने धक्के की स्पीड तेज कर दी।
बिजली तीसरी बार गरम होने लगी, और चूतड़ उछलने लगी। बिजली बोली- “आई लोव यू.. दीनू, आई लव यू..”
मैं- बिजली, मेरा भी निकालने वाला है। पानी कहाँ निकालूं?