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कामरू- डाक्टर के पास? डाक्टर के पास क्यों भाभी?
रश्मि- अरे एक छोटा सा आपरेशन करना है।
कामरू- एक छोटा सा आपरेशन करना है? मुझे नहीं कटवाना है, अपना लण्ड। मुझे छोटा नहीं करवाना अपने लण्ड को। भले ही आप मत चुदवाना दुबारा मुझसे। पर मैंने अपने लण्ड को कटवा के छोटा नहीं करवाना।
रश्मि- अरे, बुद्धू... तेरे लण्ड को छोटा नहीं करवाना है। मेरी बच्चेदानी को थोड़ा सा ऊपर करवाना है। फिर आएगा पूरा मजा जब मिल बैठेगे चार यार। आप, मैं, मेरी मखमली फुद्दी और आपका ये बिशाल लण्ड। जो कर रहा है मेरी फुद्दी को खंड बिखंड। आपरेशन से बच्चेदानी थोड़ी ऊपर हो जाएगी तो फिर आनंद ही आनंद...
अखंड आनंद... परमानंद। बस अब बातें ना बनाओ, अपने लण्ड का कमाल दिखाओ। कुछ तो ऐसा करो सजना की मेरी फुद्दी हमेशा के लिये तुम्हें अपना बना ले।
सासूमाँ- तो मेरी प्यारी चम्पा रानी। फिर कैसे चुदाई की तेरे भाई कामरू ने उस साली रश्मि की। चोद के उसे संतुष्ट किया की पहले ही पिचकारी मार दी?
चम्पा- अरे नहीं ना अम्माजी। मेरे भाई का लण्ड दस इंची है। साला ऐसा चोदता है की दिन में तारे नजर आ जाएं। मेरी तो पहली बार में हालत ऐसी हो गई थी की दो दिन तक ठीक से चल ही नहीं पाई थी।
दीदी- अच्छा... ऐसी बात है तो बुला ना तेरे उस मस्ताने भाई को जिसका इतना मस्ताना लण्ड है की चुदवाने पर दिन में तारे नजर आएं और दो दिन तक ठीक से चला भी ना जाए। सासूमाँ, मैं ठीक कह रही हूँ ना?
सासूमाँ- हाँ बेटी... जरा हम भी चखें उस मस्ताने लण्ड के रस को... कैसा स्वाद लगता है? चम्पा रानी हमारे बेटे से, हमारे पति से तो चुदवा रही हैं पर अपने भाई के मस्ताने लण्ड को हमें नहीं चखवा रही हैं।
चम्पा- अरे। आप क्यों चिंता करती हैं। मैं कल ही खबर करवा देती हूँ भाई को बुलवा दें।
सासूमाँ- अरे, अभी नहीं... अभी रामू बेटा है ना, यहाँ पे हमारी चूतों की खातिरदारी करने को। जब वो अपने गाँव चले जाएगा तब बुलाना। ऐसे में हम बोर नहीं होंगे और हमारी चूत की खुजली भी आसानी से मिट जाएगी। क्यों
बहू?
दीदी- अरे चम्पा रानी, तू कहानी आगे बढ़ा। और उंगली चलाते रह बुर में।
चम्पा- हाँ... भाभीजी। आप भी उंगली अंदर-बाहर करते रहिए ना। जैसे मैं सासूमाँ की कर रही हूँ। और सासूमाँ आपकी कर रही हैं।
दीदी- अरे बाबा, कर रही हूँ... तेरी चूत चूत है या गाँव का पुराना कुआँ। जितना भी उंगली करो खुजली मिटती ही नहीं।
चम्पा- अरे भाभीजी, वो चूत ही क्या जिसकी खुजली उंगली के आगे-पीछे अंदर-बाहर करने से मिट जाए। मेरी चूत की कुजली तो लण्ड की चुदाई से ही मिटती है। और आप लोगों की?
दीदी- अरी चम्पा, मेरी चूत क्या दुनिया की सबकी चूत की खुजली लण्ड की चुदाई से मिटती है। जिसे मिलता है। वो लण्ड से खुजली मिटाती है। जिसे नहीं मिलता वो मजबूरी में गाजर, मूली, बैगन, डिल्डो, या उंगली से मिटाने की नाकाम कोशिश करती हैं। जिससे खुजली मिटने की जगह और भी बढ़ती ही जाती है... बढ़ती ही जाती है।
सासूमाँ- तू ने बहुत ही सच बात कही बहूरानी। हाँ री... चुदक्कड़ चूत तेरी यही कहानी, कभी गाजर से, कभी मूली से, कभी उंगली से, मजबूरी में निकालती है अपना पानी।
चम्पा- तो मेरा भाई रश्मि भाभी की दमदार चुदाई कर रहा था। रश्मि के गले से चीख निकल रही थी।
रश्मि- “अरे देवर राजा, ऐसे धक्के मत लगाओ। मेरी चूत चुनचुना उठी है। है देवरजी बस करो मेरा पानी निकल चुका है। बस देवरजी हो गया है, बस करो..."
कामरू- पर भाभी। मेरा लण्ड तो अभी आपकी चूत में आधा भी नहीं घुसा है।
रश्मि- क्क-क्याऽऽ? अभी आधा भी नहीं घुसा है? अभी तो मेरी बच्चेदानी से टकरा रहा था।
कामरू- अरे भाभी, वो तो आपको दर्द हो रहा था तो मैंने तनिक बाहर निकल लिया था।
रश्मि- अरे तो क्या रात भर यूँ ही पेलते रहोगे? मेरी फुद्दी सूज गई है देवरजी। अब तो बस करो। अरे... रे... रे.. तुमने तो फिर से पेल दिया इसे गहराई तक। हे भगवान्... प्लीज निकालो... निकालो इसे... प्लीज मुझे दर्द हो रहा है.. अरे धक्के तो धीरे-धीरे मारो। हाँ... ऐसे धक्का... अरे, अब धक्का तो लगाओ... जोर से पेलो... रात को खाना । तो भरपूर खिलाई थी। साले जमकर पेलो... पेलो... मेरे राजा पेलो... हाँ हाँ बस ऐसे ही धक्के लगाते रहो। देखो, मैं भी चूतड़ उछाल-उछाल के तुम्हारे हर धक्के का जवाब दे रही हूँ। अरे पेलो मेरे राजा... पेलो... बस पेलो... हाँ हाँ। मेरे राजा... बस मेरा फिर से निकलने वाला है... अरे मेरा निकला रे अम्मा... निकला मेरा पानी... अरे देवरजी... तुम और तुम्हारा लण्ड दोनों ही लाजवाब हैं। पर अब बस करो। देखो, अब बस करो मेरे राजा... थोड़ी देर बाद फिर से चोद लेना।
रश्मि- अरे एक छोटा सा आपरेशन करना है।
कामरू- एक छोटा सा आपरेशन करना है? मुझे नहीं कटवाना है, अपना लण्ड। मुझे छोटा नहीं करवाना अपने लण्ड को। भले ही आप मत चुदवाना दुबारा मुझसे। पर मैंने अपने लण्ड को कटवा के छोटा नहीं करवाना।
रश्मि- अरे, बुद्धू... तेरे लण्ड को छोटा नहीं करवाना है। मेरी बच्चेदानी को थोड़ा सा ऊपर करवाना है। फिर आएगा पूरा मजा जब मिल बैठेगे चार यार। आप, मैं, मेरी मखमली फुद्दी और आपका ये बिशाल लण्ड। जो कर रहा है मेरी फुद्दी को खंड बिखंड। आपरेशन से बच्चेदानी थोड़ी ऊपर हो जाएगी तो फिर आनंद ही आनंद...
अखंड आनंद... परमानंद। बस अब बातें ना बनाओ, अपने लण्ड का कमाल दिखाओ। कुछ तो ऐसा करो सजना की मेरी फुद्दी हमेशा के लिये तुम्हें अपना बना ले।
सासूमाँ- तो मेरी प्यारी चम्पा रानी। फिर कैसे चुदाई की तेरे भाई कामरू ने उस साली रश्मि की। चोद के उसे संतुष्ट किया की पहले ही पिचकारी मार दी?
चम्पा- अरे नहीं ना अम्माजी। मेरे भाई का लण्ड दस इंची है। साला ऐसा चोदता है की दिन में तारे नजर आ जाएं। मेरी तो पहली बार में हालत ऐसी हो गई थी की दो दिन तक ठीक से चल ही नहीं पाई थी।
दीदी- अच्छा... ऐसी बात है तो बुला ना तेरे उस मस्ताने भाई को जिसका इतना मस्ताना लण्ड है की चुदवाने पर दिन में तारे नजर आएं और दो दिन तक ठीक से चला भी ना जाए। सासूमाँ, मैं ठीक कह रही हूँ ना?
सासूमाँ- हाँ बेटी... जरा हम भी चखें उस मस्ताने लण्ड के रस को... कैसा स्वाद लगता है? चम्पा रानी हमारे बेटे से, हमारे पति से तो चुदवा रही हैं पर अपने भाई के मस्ताने लण्ड को हमें नहीं चखवा रही हैं।
चम्पा- अरे। आप क्यों चिंता करती हैं। मैं कल ही खबर करवा देती हूँ भाई को बुलवा दें।
सासूमाँ- अरे, अभी नहीं... अभी रामू बेटा है ना, यहाँ पे हमारी चूतों की खातिरदारी करने को। जब वो अपने गाँव चले जाएगा तब बुलाना। ऐसे में हम बोर नहीं होंगे और हमारी चूत की खुजली भी आसानी से मिट जाएगी। क्यों
बहू?
दीदी- अरे चम्पा रानी, तू कहानी आगे बढ़ा। और उंगली चलाते रह बुर में।
चम्पा- हाँ... भाभीजी। आप भी उंगली अंदर-बाहर करते रहिए ना। जैसे मैं सासूमाँ की कर रही हूँ। और सासूमाँ आपकी कर रही हैं।
दीदी- अरे बाबा, कर रही हूँ... तेरी चूत चूत है या गाँव का पुराना कुआँ। जितना भी उंगली करो खुजली मिटती ही नहीं।
चम्पा- अरे भाभीजी, वो चूत ही क्या जिसकी खुजली उंगली के आगे-पीछे अंदर-बाहर करने से मिट जाए। मेरी चूत की कुजली तो लण्ड की चुदाई से ही मिटती है। और आप लोगों की?
दीदी- अरी चम्पा, मेरी चूत क्या दुनिया की सबकी चूत की खुजली लण्ड की चुदाई से मिटती है। जिसे मिलता है। वो लण्ड से खुजली मिटाती है। जिसे नहीं मिलता वो मजबूरी में गाजर, मूली, बैगन, डिल्डो, या उंगली से मिटाने की नाकाम कोशिश करती हैं। जिससे खुजली मिटने की जगह और भी बढ़ती ही जाती है... बढ़ती ही जाती है।
सासूमाँ- तू ने बहुत ही सच बात कही बहूरानी। हाँ री... चुदक्कड़ चूत तेरी यही कहानी, कभी गाजर से, कभी मूली से, कभी उंगली से, मजबूरी में निकालती है अपना पानी।
चम्पा- तो मेरा भाई रश्मि भाभी की दमदार चुदाई कर रहा था। रश्मि के गले से चीख निकल रही थी।
रश्मि- “अरे देवर राजा, ऐसे धक्के मत लगाओ। मेरी चूत चुनचुना उठी है। है देवरजी बस करो मेरा पानी निकल चुका है। बस देवरजी हो गया है, बस करो..."
कामरू- पर भाभी। मेरा लण्ड तो अभी आपकी चूत में आधा भी नहीं घुसा है।
रश्मि- क्क-क्याऽऽ? अभी आधा भी नहीं घुसा है? अभी तो मेरी बच्चेदानी से टकरा रहा था।
कामरू- अरे भाभी, वो तो आपको दर्द हो रहा था तो मैंने तनिक बाहर निकल लिया था।
रश्मि- अरे तो क्या रात भर यूँ ही पेलते रहोगे? मेरी फुद्दी सूज गई है देवरजी। अब तो बस करो। अरे... रे... रे.. तुमने तो फिर से पेल दिया इसे गहराई तक। हे भगवान्... प्लीज निकालो... निकालो इसे... प्लीज मुझे दर्द हो रहा है.. अरे धक्के तो धीरे-धीरे मारो। हाँ... ऐसे धक्का... अरे, अब धक्का तो लगाओ... जोर से पेलो... रात को खाना । तो भरपूर खिलाई थी। साले जमकर पेलो... पेलो... मेरे राजा पेलो... हाँ हाँ बस ऐसे ही धक्के लगाते रहो। देखो, मैं भी चूतड़ उछाल-उछाल के तुम्हारे हर धक्के का जवाब दे रही हूँ। अरे पेलो मेरे राजा... पेलो... बस पेलो... हाँ हाँ। मेरे राजा... बस मेरा फिर से निकलने वाला है... अरे मेरा निकला रे अम्मा... निकला मेरा पानी... अरे देवरजी... तुम और तुम्हारा लण्ड दोनों ही लाजवाब हैं। पर अब बस करो। देखो, अब बस करो मेरे राजा... थोड़ी देर बाद फिर से चोद लेना।