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दो भाई दो बहन compleet

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जहाँ तक चुदाई की बात है तो राज और रिया के बीच बहोत ही अछी

चल रही थी.. तकरीबन हर रात रिया उस पर छा जाती... पर राज

का दिल मे दर्द भर उठा था.. जो सपने उसने रोमा के साथ यहाँ आने

से पहले देखे थे.. वो सब उसे चूर चूर होते दिखाई पड़ रहे

थे.. आख़िर ये सब ऐसे कितने दिन चलेगा.. एक दिन तो आख़िर किसी

ना किसी को पहल कर बात करनी ही पड़ेगी.. अगर आगे का जीवन

गुज़ारना है तो फ़ैसला तो करना ही पड़ेगा... आख़िर उसने फ़ैसला किया

कि वो रोमा से बड़ा है.. तो एक बड़ा भाई होने के नाते वो सब कुछ

भूल रोमा से बात करेगा.

* * * * *

आज राज काम पर से जल्दी छुट्टी ले वो घर की ओर चला पड़ा.. वो

रोमा से पहले घर पहुँच जाना चाहता था.. रिया का कहीं नामो

निशान नही था ये उसके लिए अछी बात थी... वो अकेले मे अपनी बेहन

से बात करना चाहता था... रिया के सामने शायद वो दोनो आपस मे

इतना खुल कर बात ना कर पाते... क्यों कि जो कुछ भी हुआ उसका रिया

भी एक हिस्सा थी.

घर आकर जैसे ही वो सोफे पर बैठा तो उसकी नज़र साइड टेबल पर

पड़ी तस्वीर पर पड़ी.. वो रोमा की स्कूल की ग्रॅजुयेशन की तस्वीर

थी... कितनी सुंदर लग रही थी वो... उसका चेहरा खुशी से खिला

हुआ था.. उसकी आँखों मे चमक थी..होठों पर मुस्कान थी.. और

आज भी वो वैसे ही मुस्कुराती रहती है.. लेकिन वो जानता था कि इस

मुस्कुराहट के पीछे कितनी पीड़ा कितनी मेहनत छुपी हुई थी..

बचपन से ही रोमा ने अपने भविश्य को लेकर कुछ सपने देखे थे

और वो आज भी उन सपनो को पूरा करना चाहती थी.. चाहे किसी भी

कीमत पर.

थोड़ी देर बाद कंधे पर अपना कीताबों वाला बॅग लटकाए रोमा अपने

मकान पर आई... उसने छोटी डेनिम वाली स्कर्ट और शर्ट पहन रखी

थी... फ्लॅट का दरवाज़ा खुला देख वो चौंक पड़ी... राज को सोफे पर

बैठा देख वो हैरत मे थी.. वो इतनी जल्दी कभी भी घर नही

आता था.. उसने अपनी बॅग वहीं टेबल के पास ज़मीन पर रख दी और

उसे देखने लगी.

राज ने महसूस किया कि रोमा उसका कुछ कहना का इंतेज़ार कर रही

है.. तो उसने कहा, "हमे बात करनी चाहिए रोमा."

रोमा उसकी बात सुनकर बेचैन हो गयी उसकी दिल की धड़कन बढ़

गयी.. ये आज राज को क्या हो गया है.. क्या वो रिया को और ज़्यादा

चाहने लग गया है और यहाँ से जाना चाहता है... बेचैनी मे वो

अपने नीचले होठों को दाँतों से चबाने लगी... उसकी आँखों मे फिर

आँसू आ गये.

"क्या तुम मुझसे रिया के बारे मे बात करना चाहते हो? रोमा ने अपने

दिल के जज्बातों को दबाते हुए कहा, उसे लग रहा था कि आज उसकी

जिंदगी बिखर रही है.. "मुझे नही पता राज में ऐसा कर पाउन्गि

की नही.. कुछ समझ मे नही आ रहा."

रोमा रोए जा रही थी और उसका पूरा बदन कांप रहा था.. राज सोफे

पर से उठा और उसने उसे कस कर अपनी बाहों मे पकड़ लिया.

"में तुमसे रिया के बारे मे नही हम दोनो के बारे मे बात करना

चाहता हूँ, में तुमसे इतना प्यार करता हूँ कि में तुम्हे बता नही

सकता... हां कुछ देर के लिए में भटक जाता हूँ.. लेकिन ये सही

है कि में तुमसे बहोत प्यार करता हूँ."

"में जानती हूँ और समझती हूँ... मुझे माफ़ करना लेकिन में क्या

करूँ में भी तुम्हे बहोत प्यार करती हूँ... लेकिन जब भी तुम्हे

रिया के साथ देखती हूँ तो मुझसे रहा नही जाता... लगता है कि

में कुछ कर बैठू."

"और जब तुम उस टूटर के साथ..." राज ने कहा.. "खैर छोड़ो जो हो

गया सो हो गया.. मुझे खुशी है की तुम कॉलेज मे इतना अछा कर

रही हो.. रोमा हमे अपना वो समय वापस लाना होगा जो हमारे बीच

था... वो ही प्यार वो ही रिश्ता.. समझ रही हो ना में क्या कह

रहा हूँ."

"हां राज हां... में भी यही चाहती हूँ." रोमा ने एक राहत की

सांस लेते हुए कहा, "में तुमसे ये बात कहने से डर रही थी...

मुझे लगने लगा था कि अब हमारे बीच वो सब लौट के नही आ सकता

है.. तुम और रिया इतने करीब होते जा रहे थे कि....."

"में समझ सकता हूँ.. लेकिन पीछले दिनो तुम भी तो घर से बाहर

रहती थी.. "राज ने कहा, "क्या तुम हमारे बीच की इस दूरी को

मिटाने मे मेरा साथ दोगि?'

"हां दूँगी.. तुम जो कहोगे में करूँगी." रोमा ने जवाब दिया.

दोनो के खुले मुँह एक दूसरे को चूमने लगे.. जीब आपस मे मिल

खिलवाड़ करने लगी... रोमा का बदन मे खुशी की लहर जाग उठी

थी... उसकी चुचियों कठोर हो गयी थी और चूत मे हलचल मचने

लगी थी.

"श राज आज जितनी मिठास तुम्हारे होंठो मे पहले कभी नही थी.."

रोमा ने उसके कान मे फुसफुसाते हुए कहा.

"हां मेने कीताबों मे पढ़ा है कि दूरी प्यार बढ़ाती है...

शायद उसी वजह से हो." राज ने उसके होठों को चूसते हुए कहा.

"तो फिर तुम तैयार हो ना.. अपने वादे से मुकर तो नही जाओगे?' रोमा

ने पूछा.

"हां.. में जानता हूँ क़ि ये बात सुनकर रिया पर क्या गुज़रेगी..

लेकिन उससे कहना तो पड़ेगा ही ना." राज ने जवाद दिया.

"तुम्हे पता है कि पीछले कुछ हफ्ते मेने कैसे गुज़ारे हैं?" रोमा

ने अपने गालों पर से आँसुओं को पौन्छ्ते हुए कहा.

"में जानता हूँ रोमा प्लीज़ मुझे माफ़ कर दो."

"एक वक्त के लिए तो में तुमसे नफ़रत करने लगी थी."
 
"में समझ सकता हूँ.. लेकिन सही मे तुम्हे दूसरे मर्द की बाहों मे

देख मेरा दिल भी बहोत रोया था .." राज ने उसे बाहों मे भरते हुए

बोला.. "तब मुझे लगा कि हमारे बीच जो हो रहा है वो अछा नही

हो रहा .. हमे मिलकर बात करनी चाहिए."

"क्या करती में.. तुम मेरे पास थे नही कहाँ जाती में.. लेकिन अब

वो सब ख़त्म हो चुका है.." रोमा ने कहा.

"हां.. अब सब कुछ ठीक हो चुका है... है ना?"

"ठीक होने मे थोड़ा वक्त लगेगा लेकिन में संभाल लूँगी." रोमा ने

जवाब दिया.

* * * * * * * * *

राज और रोमा बड़ी सँभाल कर रिया की ओर बढ़े.

राज ने रिया से बात शुरू की और उसे समझाने लगा..... रिया पर तो

जैसे गमो का पहाड़ टूट पड़ा....आँखों से आँसू तो जैसे रुकने का

नाम ही नही ले रहे थे.. उसे तो लगा था कि झगड़े के बाद रोमा

राज को छोड़ देगी... लेकिन जैसा उसने सोचा था वैसा नही हुआ.

लेकिन नसीब से कौन लड़ सकता है.. अपने मुक़द्दर के इस फ़ैसले को

आख़िर कर रिया ने मान लिया. और जिंदगी के साथ समझौता कर लिया.

रोमा को अपने जखम भरने मे मे कई रातें लग गयी... जखम तो और

भी कई तो लेकिन उन्हे राज ने अपने प्यार से भरना शुरू कर दिया...

अब वो पहले से ज़्यादा लायक हो गया था.. हर तरह से रोमा का

ख़याल रखने लगा था.... उसके व्यवहार को देख रोमा को महसूस होने

लगा था कि अब राज को उससे कोई नही छीन सकता.

हक़ीकत का सामना कर रिया अपने आप को राज से दूर रखने की कोशिश

करने लगी... बड़ी जब भी राज और रोमा को साथ देखती तो बड़ी

मुश्किल से वो अपने दिल को संभालती..... फ्लॅट मे जहाँ पहले तीनो

मिलकर हँसी मज़ाक किया करते थे .. साथ साथ कहला करते थे वहीं

अब वातावरण ने एक गंभीर रूप लिया था.. तीनो जानते थे कि वक़्त के

साथ शायद फिर से पहले जैसा महॉल पैदा हो जाएगा.....

फिर धीरे धीरे महॉल बदलता गया... रोमा के व्यवहार मे भी

परिवर्तन आ गया था.. अब वो शॉपिंग पर जाने लगी..हँसी मज़ाक

करने लगी.... और एक दिन तो उसने दोनो को चौंका ही दिया.... उसने

खुद अपने हाथों से खाना बना दोनो को दावत दी.

तीनो खाना ख़तम कर वाइन पी रहे थे...रोमा ने देखा कि एक बोवल

मे अभी भी पिसे हुए आलू की सब्ज़ी बची हुई थी... .. पता नही

रोमा के क्या मन मे आया कि उसने बोवल को उठा उसमे बची हुई सब्ज़ी

राज की ओर उछाल दी.... सब्ज़ी मे आलू के टुकड़े किसी गोली की तरह

निकले और राज और रिया के चेहरे पर गिर पड़े... उन दोनो के चेहरे

की प्रतिक्रिया देख रोमा ज़ोर ज़ोर से हँसने लगी.

रिया राज को देख रही थी... "तुम्हे नही लगता कि ये फिर से शैतान

हो रही है."

राज ने अपनी नज़रें उस केक पर डाली जो वो बाज़ार से लेकर आया

था , "क्या तुम भी वही सोच रही हो जो में सोच रहा हूँ."

"पहले तो नही सोच रही थी लेकिन जब तुम केक की ओर देखने लगे

तो में समझ गयी." रिया ने जवाब दिया.

"तुम लोग क्या सोच रहे हो.... ओह नही ये नही हो सकता." रोमा चिल्ला

पड़ी.

राज उठा और उसने टेबल पर पड़ा केक उठा लिया... रिया रोमा को

देकने लगी.. "अगर तुम शैतानी कर सकती हो तो हम भी कर सकते

है."

रोमा ज़ोर से 'नहीं....' चीखते हुए भागी वहाँ से और उसके पीछे

रिया फिर हाथों मे केक लिए राज भागा.

"प्लीज़ ऐसा मत करो ना.. " रोमा हंसते हुए चिल्ला कर बोली...

लेकिन रिया ने उसकी शर्ट को उतार दिया... जब तक राज कमरे मे आया

उसकी दोनो चुचियाँ नंगी हो गयी थी.

रोमा ने राज की तरफ देखा, "तुम तो हिम्मत भी मत करना."

रोमा ने देखा की राज मुस्कुरा रहा था.. तभी उसने वो केक रोमा की

चुचियों पर ज़ोर से फैंक कर मारा.... केक जोरों से रोमा की

चुचियों से टकराया और उसकी चुचियाँ केक पर लगी क्रीम से भर

गयी... रिया ने अपनी भी शर्ट उतार दी और रोमा की चुचियों से

रगड़ने लगी.. राज ने भी अपनी शर्ट उतार दी... और दोनो के साथ

मिल गया... तीनो ज़ोर ज़ोर से एक दूसरे के शरीर को केक से मलने

लगे.

"तुम दोनो से कितना प्यार करता हूँ में." राज ने दोनो की चुचियों

को मसल्ते हुए कहा.

"में भी बहोत प्यार करती हूँ दोनो से" रिया ने कहा.

"मुझे भी तुम दोनो बहोत पसंद हो." रोमा ने खुशी भरे स्वर मे

कहा.

"मुझे तो लगता है कि आज हम तीनो..... " रिया ने आँख मारते हुए

कहा.

"नही कुछ भी नही..... कुछ करने से पहले तुम दोनो को ये केक

खाना पड़ेगा." रोमा ने कहा.

क्रमशः..................

 
28

गतान्क से आगे.......

राज और रिया दोनो ने अपना चेहरा रोमा की क्रीम से भरी छाती पर

झुका दिया. उनेक होठों का स्पर्श पाते ही रोमा हंस पड़ी...रिया ने

थोड़ी सा केक उठा कर रोमा के मुँह मे ठूंस दिया... अब तीनो एक

दूसरे को केक खिलाने लगे... थोड़ी ही देर मे तीनो एक दूसरे को

चूम रहे थे.. एक दूसरे के होठों को चूस रहे थे..

"मुझे माफ़ करना रोमा." रिया ने दिल से माफी माँगते हुए कहा, "सब

कुछ जानते हुए भी शायद में ज़बरदस्ती तुम दोनो के बीच आ गयी

सही मे तो मुझी...."

"मेरे भाई से पहले तक चुद्वाना चाहिए था..." रोमा ने थोड़ा गुस्से

मे कहा.. और तुमने वो किया भी लेकिन साथ ही तुमने इसे थोड़ी सी

अकल भी दे दी जिसके लिए मुझे शुक्रिया कहना चाहिए... लेकिन में

कहूँगी नही."

"में तो सिर्फ़ ये चाहती हूँ कि हम तीनो के बीच कभी झगड़ा ना

हो." रिया ने कहा.

"फिलहाल तो केक खाती रहो बाकी तुम्हे क्या चाहिए अपने आप पता चल

जाएगा."

रोमा रिया को देखती रही.. वो अपने मुँह मे केक भर खा रही थी..

वहीं राज अपने हाथों से अपनी बेहन को केक खिला रहा था.... थोड़ी

ही देर मे तीनो खेल के लिए तैयार थे.

रिया आगे बढ़ कर रोमा की जीन्स खोल उतारने लगी और राज खुद के

कपड़े उतार रहा था.. फिर रोमा ने रिया के कपड़े उतार उसे नंगा

कर दिया.. अब तीनो जान पूरी तरह नंगे थे.

थोड़ी ही देर मे सब कुछ पहले जैसा हो गया... रिया ने रोमा की

टाँगो को फैलाया और अपना चेहरा उसकी चूत पर रख दिया... जब

उसने देखा कि रोमा की चूत से बालों से घिरी हुई है तो उसने

कहा, "सुबह मुझे याद दिलाना.. में एक बार फिर इस जंगल को सॉफ

कर दूँगी."

रिया की हवा मे उठी गंद देख कर राज का दिल किया कि वो उसके पीछे

जाकर अपना लंड उसकी चूत मे घुसा दे.. लेकिन वो हिचकिचा कर रुक

गया... आज की रात रोमा के लिए थी.... उसे ऐसा नही लगना चाहिए

कि में फिर उसके साथ बेवफ़ाई कर रहा हूँ.. इसलिए वो रोमा की छाती

पर चढ़ गया और उसकी दोनो चुचियों को पकड़ अपना लंड उसकी

चुचियों के बीच दे दिया.

उसका लंड छाती पर लगी क्रीम की चिकनाहट से चिकना हो फिसल

कर आगे पीछे होने लगा.. रोमा ने अपनी जीब निकाल ली और जब भी

लंड उसके मुँह के पास आता वो अपनी जीब निकाल उसके लंड पर लगी

मीठी क्रीम को चाट लेती.

रिया अपनी प्यारी सहेली से एक बार फिर दोस्ती करने के लिए ज़्यादा

मूड मे थी... रोमा की टाँगों के बीच बैठ उसने उसकी चूत को

फैलाया और उसकी गरम चूत को चूसने लगी. उसकी चूत को चूस्ते

हुए उसने अपनी दो उंगलियाँ भी अंदर घुसा कर अंदर बाहर करनी

शुरू कर दी..

"ऑश हाआँ चूसो ऑश हाआँ अपनी जीब और अंदर घुसा दो..." रोमा

सिसक पड़ी.

रोमा नज़रे उठा कर अपने भाई को देखने लगी.. जो बड़े प्यार से उसकी

चुचियों के बीच अपने लंड को फँसाए उसकी चुचियों को चोद रहा

था... तभी राज के लंड के मुँह पर वीर्य की बूँद चमक पड़ी...

उसने तुरंत अपनी जीब निकाल उस बूँद को अपनी जीब से चाट लिया...

राज इसी तरह प्यार से कुछ देर तक अपनी बेहन की चुचियों को

चोद्ता रहा और रोमा उसके लंड से छूटी वीर्य की बूँदों को चाटती

रही.. जब राज को लगा कि अब रुकना मुश्किल है और उसका लंड पानी

छोड़ने के लिए तैयार है. तो वो उसकी छाती से उतार उन दोनो

लड़कियों के बगल मे बैठ गया... और अपने लंड को मसल्ते रहा

जिससे कि उसका लंड मुरझा ना जाए.
 
उसने देख कि रिया बड़ा मन लगाकर रोमा की चूत चूस रही थी..

उसके चूत चूसने की आवाज़ कमरे मे गूँज रही थी... साथ ही वो

उसकी बेहन को अपनी उंगलियों से चोद रही थी.. उसकी बेहन उन्माद मे

सिसक रही थी.

जब रोमा की चूत उबाल खाने लगी.. तो उसने रिया के सिर को पकड़

अपनी चूत पर जोरों से दबा दिया... रिया और ज़ोर से उसकी चूत को

चूसने लगी. और तेज़ी से अपनी उंगलियों को अंदर बाहर करने

लगी.... रोमा की चूत मे उत्तेजना और बढ़ने लगी.. शरीर अकड़ने

लगा..... और उसकी चूत ने पानी छोड़ दिया.

"ऑश रिया तुम कितनी अच्छी हो... मुझे आज इसकी ज़रूरत थी.." रोमा

ने खुश होते हुए कहा.

"रोमा तुम जानती हो तुम मेरी इकलौती और सबसे प्यारी सहेली हो

तुम्हारी खुशी के लिए में कुछ भी कर सकती हूँ." रिया ने जवाब

दिया.

"इस वक्त तो मुझे मेरे भाई की बहोत ज़रूरत है," कहकर रोमा ने

खिसक कर अपना सिर राज की गोद मे रख दिया.

"रिया यहाँ आओ" राज ने कहा.

रिया की आँखों मे चमक आ गयी.. वो राज से प्यार जो इतना करती

थी... वो सावधानी से अपने पावं को घसीटते हुए राज के पास आई जो

पलंग का सहारा लिए बैठा था.... वो अपनी टाँगो को फैला ठीक

राज के चेहरे के सामने खड़ी हो गयी... राज बड़े प्यार से उसकी

उत्तेजना मे फूली बालों बिना की चूत को देखने लगा.

राज ने उसके कूल्हे पकड़े और उसे अपने मुँह के नज़दीक खींच लिया...

फिर उसकी चूत पर अपनी जीब फिराने लगा.... उसकी पंखुड़ियों को

अपने मुँह मे ले लिया और चूसने लगा.... रिया का बदन कांप रहा

था..

वहीं रोमा राज की गोद मे अपना सिर रखे अपना खेल खेल रही थी...

वो अपने मुँह को उपर नीचे कर उसके लंड को तेज़ी से चूस रही

थी..... हालत से खुश हो वो ज़ोर ज़ोर से उसके लंड को चूस रही

थी...आख़िर उन तीनो के बीच फिर से सब कुछ पहले जैसा हो गया

था..
 
राज अपनी बेहन की आवाज़ सुनकर चौंक पड़ा. उसने अपना मुँह उसके लंड

से हटा लिया था.. "अब बाकी सब कुछ रिया के साथ करना."

राज ने रिया को उसकी कमर से पकड़ा और अपनी जांघों पर नीचे

खींचने लगा... रिया ने उसकी जाँघ पर बैठते हुए रोमा के होठों

को चूम लिया... उसने रोमा के होठों पर लगे थूक और राज के वीर्य

को चाट लिया... "थॅंक्स रोमा तुमने मुझे आज जो दिया है उसे में

कभी नही भूल सकती."

राज ने अपने लंड को रिया की चूत पर लगाया और वो उसकी लंड पर

बैठ गयी.. उसका लंड उसकी चूत मे घुस गया.. थोड़ी ही देर मे

रिया उछल उछल कर धक्के लगा रही थी... राज को बहोत अछा लग

रहा था.. रिया की चूत उसे बहोत ही मज़ा दे रही थी...

रिया उछल उछल कर धक्के लगाने लगी... उसकी साँसे तेज हो गयी

थी और उसका शरीर पसीने से भीग गया था....

"हां राज चोदो मुझे ऑश और ज़ोर से चोदो ऑश हाआँ और ज़ोर से

ऑश और ज़ोर से"

राज अपनी पूरी ताक़त से नीचे से कमर उठा उसे चोदने लगा.. दोनो

के शरीर उछल रहे थे... रिया की चुचियाँ भी मचल रही

थी...दोनो एक दूसरे को खुश करने मे लगे हुए थे..

राज की नसों मे खून का उबाल और तेज हो गया.... उसका लंड झड़ने

के लिए मचलने लगा....उसने अपनी कमर को उपर उठा दिया और अपने

लंड को उसकी चूत की जड़ तक पेलते हुए अपना पानी छोड़ दिया.

राज ने कमर उठाई और वो समझ गयी कि वो झड़ने वाला है... उसकी

चूत खुद पानी छोड़ने वाली थी.. वो और जोरों से उछल उछल कर

उसके लंड को अपनी चूत मे लेने लगी...

"ओह राज प्लीज़ अपने लंड को खड़ा रखो... मेरा छूटने ही वाला

है..." रिया ने उछलते हुए कहा.

आख़िर रिया ने अपनी चूत मे उसके लंड को जाकड़ लिया और वो जोरों से

सिसकने लगी..

"श हाआँ ऑश में तो गयी राज..... ऑश"

रिया जब राज से अलग हुई तो रोमा ने उसे अपनी बाहों मे भर

लिया.... "मेरे भाई को खुश करने के लिए शुक्रिया."

"रोमा एक बात कहूँ राज जितना तुम्हारा है उतना ही मेरा है.. हम

दोनो राज के बिना नही जी सकते...." रिया ने कहा.

"हन ये तो में भी समझ रही हूँ." रोमा ने जवाब दिया.

"रोमा क्यों ना हम तीनो ये जिंदगी इसी तरह हंसते खेलते गुज़ारे..

तुम भी समझ रही हो. " रिया ने कहा.

"हां रिया तुम ठीक कह रही हो.. ये तो मेने भी समझ लिया..

में राज के बिना नही जी सकती और राज तुम्हारे बिना.. तो क्यों ना

हम तीनो साथ रहकर जिंदगी का लुफ्त उठाए और अपने भविस्य को

संवारे." रिया ने रोमा से कहा.

"हां रिया शायद भगवान भी चाहता है कि हम साथ साथ रहें"

राज खुश था.. उसे जिंदगी मे जो चाहिए था वो मिल गया था.. ना

वो रोमा को छोड़ सकता था और ना ही रिया को.. आख़िर भगवान ने उसकी

सुन ली थी.

दा एंड

समाप्त
 
साथ बने रहने के लिए धन्यवाद दोस्तो
 
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