मैं और नेहा घर आ गए थे। नीरज और बाकी बच्चे हमारा वेट कर रहे थे। हमने फिर खूब मस्ती की। रात को नेहा मामी की खाना बनाने में हेल्प कर रही थी। और मैं मामा और नानाजी के पास बैठ के उनसे बाते कर रही थी। हमने साथ बैठ के खाना खाया टीवी देखा और फिर सोने चले गए।
रात में फिर से रितेश का फ़ोन आया। और नेहा ने कल रात जैसा ही फ़ोन स्पीकर पे डाला हुआ था। उनकी चुदाई वाली बाते शूरु हो गई। मैं भी उनकी बातो का मजा लेके अपनी चूत रगड़ रही थी। लेकिन आज जब मैंने आखे बंद की तो देखा की नानाजी मेरी चूत चाट रहे है मैं उनका लंड चूस रही हु। और जब नेहा की बाते चूत चोदने तक पहोची तो मुझे ये दिखाई दे रहा था की नानाजी मुझे अपने लंड से खच खच चोद रहे है। और मुझे ये सोच के ज्यादा उत्तेजना हो रही थी।
मुझे उसमे कोई बुराई नजर नहीं आ रही थी। उत्तेजना में अंधी हो चुकी मैं बड़े चाव से नाना जी के लंड के बारे में सोच के चूत में उंगली चला रही थी। उफ्फ्फ्फ्फ्फ ये मुझे क्या हो रहा था। तब भी जब हम निचे खाना खाने से पहले बाते कर रहे थे तब नानाजी जब मेरे चीन को हाथ लगा रहे थे तब उनका हाथ मेरी चुचियो को लग रहा था और मेरा हाथ पकड़ कर नानाजी कैसे मेरी कोहनी अपने लंड की और धकेल रहे थे।
उफ्फ्फ्फ्फ़ कितना कड़क हो चूका था वो। मैंने तब इतना माइंड नहीं किया था क्यू की मुझे लगा था शायद गलती से हो रहा होगा। लेकिन क्या नानाजी जानबूझ कर ऐसा कर रहे थे। मैंने सोचा अब मैं देखूंगी की ये गलती से हो रहा था या जानबुज के? क्या नानाजी सच में मुझे चोदने के बारे में सोच रहे है? सोचते सोचते मैं कब सो गयी पता ही नहीं चला।
इधर नेहा भी उसके दादाजी के लंड के बारे में सोच सोच कर चूत में उंगली कर रही थी। अब उसे रितेश नहीं उसके दादाजी नजर आ रहे थे। उसे अब अपने दादाजी का लंड अपनी चूत में चाहिए था। वो किचेन से देख रही थी कैसे दादाजी माधवी के साथ हरकते कर रहे थे। हो ना हो वो अब वो भी हमारी जवानी का मजा लेना चाहते थे। तभी कैसे वो किचन में आके मेरी कमर पे हाथ रखकर मुझे फ्राई को कैसे करते है बता रहे थे। और उनका हाथ कब मेरी कमर से निचे मेरी गांड पे आ गया था ये यकीनन गलती से नहीं हुआ था। उम्म्म्म्म जब उनका हाथ मेरी गांड से टच हुआ तब कैसी लहर सी दौड़ी थी मेरे शरीर में।
इधर नानाजी का भी हालत बहोत ख़राब थी। वो अपना लंड पैजामे में से निकालके उसे मुठ मार रहे थे। माधवी और नेहा की जवानी बिना कपड़ो के कैसे लगेगी ये सोच सोच के उनका लंड किसी रॉड की तरह ताना हुआ था। नेहा की गांड क्या मुलायम थी। सीसीसीसी अह्ह्ह जब मैं उसे नंगी करके छुऊँगा तो क्या मजा आएगा स्सस्सह्ह्ह् और माधवी के चुचिया उफ्फ्फ्फ़ उसके सलवार से क्या लगाती है जब नंगी देखूंगा तो आह्ह्ह्ह ये सोच के अपना लंड तेजी से हिलाने लग गए और फिर सरसरसर करके पिचकारी छोड़ने लगे। ऐसी उत्तेजना पहले कभी नहीं हुई थी उन्हें। उन्होंने अब मन ही मन सोच लिया था की किसी एक को जरूर चोदेंगे या फिर दोनोंको..............
सुबह के 5 बजे होंगे की मामी के आवाज से हम दोनों की नींद खुली।
मैंने दरवाजा खोला तो वो बोल पड़ी....
मामी:=झटपट तैयार हो जाओ मंदिर जाना है।
मैं:=मंदिर??नहीं मामी मैं नहीं आ रही मंदिर मुझे सोना है।
मामी :=अरे आज पोर्णिमा है ये पोर्णिमा 10 साल में एक बार आती है और अपने गाव के मंदिर में आज बहोत बड़ी पूजा होती है और आज के दिन जो भी मुराद मांगोगे वो पूरी होती है।
नेहा भी उठ चुकी थी।
नेहा:=हा माधवी माँ सच कह रही है। चल चलते है
मामी:=चलो जल्दी तैयार हो जाओ बाबूजी तुम्हारा इन्तजार कर रहे है। मुझे तो मंदिर मना है इसलिए मैं नहीं आ पाऊँगी।
हम लोग तैयार हुए और नानाजी और नीरज के साथ मंदिर पहुचे। बहोत भीड़ थी और लंबी लाइन हम लाइन में लग गए।सामने नीरज उसके पीछे मै नेहा और नानाजी लाइन में भी बहोत लोग आगे पीछे धकेल रहे थे। इधर नेहा की हालात ख़राब थी। क्यू की पिछेसे नानाजी का लंड उसकी गांड पे लग रहा था।
नानाजी तो थे दीवाने नेहा की गांड के वो भी भीड़ का फायदा लेके मजे से अपना लंड उसकी गांड पे रगड़ रहे थे। सुरु सुरु में नेहा को घबराहट हुई पर बादमे वो नानाजी से चिपके खड़ी हो गयी और नानाजी के तगड़े लंड का मजा अपनी गांड को दिलाने लगी। नानाजी की मुराद तो जैसे मंदिर जाने से पहले ही पूरी हो चुकी थी।
उन्हें भी सुरु सुरु में थोडा झिझक हो रही थी पर जब उन्हें नेहा की और रेसपोंस मिलाने लगा तो वो भी बिनधास्त हो के अपना लंड नेहा की गांड से रगड़ने लगे थे।मुझे तो इस बात का अंदाजा नेहा का चेहरा देख के ही चल चूका था। मैं उन्हें डिस्टर्ब नहीं करना चाहती थी सो मैं नीरज के साथ बाते करने लगी।
लाइन बहोत बड़ी थी अभी और आधा घंटा लगने वाला था। और लाइन भी बड़ी अजीब थी एक साथ चार चार रो थी। इसके वजह से नेहा और नानाजी में क्या चल रहा है ये कोई देख नहीं सकता था। जैसे ही कोई पीछे से धकेलता नानाजी जोर से अपना लंड नेहा की गांड पे रगड़ देते। और जैसे कोई आगे से धकेलता तो मैं नेहा को जोर से पीछे धकेल देती जिससे नेहा अपनी गांड नानाजी के लंड पे दबा देती। इधर नेहा की तरफ से आता रिस्पांस देख नानाजी ने अपना लंड खड़ा करके नेहा की गांड के दरारों में घुसा दिया था।
जैसे लाइन आगे बढती नानाजी अपना लंड पीछे लेके हल्का सा धक्का दे देते। नेहा इधर अपने गांड में फसे लंड का भरपूर आनंद उठा रही थी। कभी कभी लंड सरक के निचे जाता तो सीधा उसके चूत के पास चला जाता जैसे उसकी चूत पे दस्तक दे रहा हो। उसकी चूत पानी पानी हो चुकी थी। नानाजी ने अब अपना हाथ भी नेहा के गांड पे फिरना और हलके हलके दबाना सुरु कर दिया था जिसकी नेहा को जरा भी उम्मीद नहीं थी। एक बार तो नानाजी ने अपना हाथ फिसला कर सीधा चूत से टच कराने की कोशिश की पर नेहा एकदम से चोकी तो उन्होंने हाथ पीछे हटा लिया।
नानाजी मस्त हो चुके थे नेहा की नरम नरम मांसल गांड से लंड रगड़ के नेहा भी पहली बार रियल लंड का टच महसूस करके निहाल हो चुकी थी। दोनों भी भूल चुके थे की वो कहा है। सच कहते है लोग वासना अंधी होती है उसे ना रिश्ता समज आता है और नाही मंदिर....
हम सब लोग दर्शन करके घर पहोंचे। मैं लगभग खीचते हुए नेहा को ऊपर ले गयी और उससे सारी बाते डिटेल में पूछी। उसने वर्ड तो वर्ड सब बताया।
मै := क्या बात है तूने तो बड़े मजे किये यार अपने दादाजी के लंड से अपनी गांड घिसाई करावा ली।
नेहा:= तो तू आ जाती मेरी जगह तू भी कर लेती मजा।
मैं:= मुझे नहीं करनी मजा...अब आगे क्या? कब ले रही है उनका लंड चूत में?
नेहा :=हाय रे क्या बताऊ दिल तो करता है अभी ले लू।
मैं:=तू न बावरी हो गयी है बेशरम....
हम दोनों हँसने लगी। और फिर ऐसे ही छेड़छाड़ हँसी बाते होती रही।
नानाजी हमारी हरकते बड़ी गौर से देख रहे थे। उनके चहरे पे एक अलग तरह की ख़ुशी झलकने लगी थी। वो खाना खाके खेत में चले गए। हम भी खाना खाके थोड़ी मस्ती की और थोडा सुस्ता लिया । फिर शाम को फिर खेतो की ओर निकल पड़े। सोचा आज भी कुछ देखने को मिल जाय पर नानाजी कुछ काम करवा रहे थे। हमें देख के वो हमारी तरफ आये। हमे तो बड़ी मायूसी हुई। नानाजी आप यही है??मेरे मुह से यकायक निकल गया।
नानाजी:=क्यू कही और होना चाहिए था क्या मुझे ?उस खेत में?
मेरे और नेहा के होश उड़ गए हमने एक दूसरे की और देखा हम दोनों की आखो में इक ही सवाल था कही नानाजी ने कल हमें देख तो नहीं लिया?
नानाजी:=ऐसे क्या एक दूसरे की और देख रहे हो। चलो आओ इधर ।
हम नानाजी के पीछे पीछे चलने लगे।
मैं:= यार लगता है नानाजी ने हमें कल देख लिया।
नेहा:=मुझे भी ऐसा लगता है। देख न कल से ही तो वो हमसे कैसे बर्ताव कर रहे तुझे और मुझे छूने की कोशिश और सुबह भी तो....
मैं:= हा यार सही कह रही है तू।पहले कभी उन्होंने ऐसा नहीं किया। शायद पेड़ के निचे बैठ के जो बाते हम कर रहे थे वो भी सुन ली।
नेहा:= अगर ऐसा है तो ठीक है न यार मैं तो रेडी हु उनसे चुदने को बिस सालकी हो गयी हु यार बहोत तड़पती है (उसने चूत की और इशारा किया) बोल तू भी चाहती है ना?
मैं:==नहीं बाबा मैं नहीं......मैं इस मामले में थोड़ी शर्मा रही थी पर मन ही मन मैं भी यही चाहती थी क्यू की आग लगी पड़ी थी चूत में उसे बुझानी तो पड़ेगी।
हम कुवे के पास आ गए नानाजी एक टोकरी में आम और तरबूज लेके आ गए। दोनों हाथो में आम पकड़ कर मेरी चुचियो की ओर देखते हुए बोले....
नानाजी:= कितने बड़े बड़े है अंदर से कितने मीठे होंगे?
मैं तो शर्मा के लाल लाल हो गयी।नेहा को समझ आ गयी बात । हम एक दूसरे की तरफ देखा फिर नेहा ने कहा।
नेहा:= तो देख लीजिये ना खाके आपको रोका किसने है? वो मेरे कंधो पे दोनों हाथ रखके और अपना चेहरा हाथो पे रख के कुछ अलग ही अंदाज से बोली।
नानाजी:=खाऊंगा बेटी पर थोडा पकाना पड़ेगा।
मैं शर्मा के निचे देख के मुस्कुराती रही और उनकी बाते सुनने लगी।
नानाजी:= ह्म्म्म हा सुबह बस छुआ था तरबूज को बड़ा मजा आ रहा था। अब तो खाके देखना ही पड़ेगा। ये तो यकीनन पक गए है। बड़ा मजा आएगा इनको खाने में।
अब शरमाने की बारी नेहा की थी। वो झटके से खड़ी हुई और नाखून एक दूसरे पे घिसते हुए निचे देखने लगी।ये डबल मीनिंग बाते सुनके बड़ा मजा आ रहा था।
मैं:= नानाजी इस साल गन्ना क्यू नहीं लगाया हमें भी तो मजा आता गन्ना खाके?
नानाजी:= लगा दूंगा बेटी फिर मजे करना गन्ना चूस के।
बापरे इसके बाद न मैं और नेहा कुछ बोल पायी। हमने वो आम और तरबूज लिए और घर की और निकल पड़े।
नेहा:=यार दादाजी तो बड़े चालू निकले क्या बाते कर रहे थे लगता है वो हम दोनों की जवानी देख के पागल हो चुके है खासकर तेरे आम पे तो ऐसे नजर टिकाये थे वो हाय रे...
मैं:=हा न यार मेरी हार्ट बीट तो एकदम फुल स्पीड में दौड़ रही है अबतक
नेहा:=हा क्या?अभी से ये हाल है अगर वो सचमुच तेरे आम चूसने लगेंगे तो क्या होगा तेरा?
मैं:=क्या होगा?मैं भी उनका गन्ना चूस लुंगी...
ऐसा बोल के हम दोनों ने एकदूसरे को ताली दी और हंस पड़े।
रात को खाने के बाद एक चॅनेल पे मेरी fvrt मूवी आ रही थी ddlj मैं उसे देखने लगी और सबको पता था मैं उसे पूरा देखे बगैर सोने नहीं वाली। थोड़ी देर में सब जाने लगे नेहा भी जाने लगी तो मैंने उसे रोका तो वो कहने लगी यार तू देख मैं रितेश को फ़ोन करती हु मुझसे रहा नहीं जा रहा।
मैं अकेले ही टीवी देखने लगी। मैं सोफे पे लेटी थी। नानाजी ने देखा की हॉल में कोई नहीं है तो वो तेल की बोतल लेके आ गए और मुझसे थोड़ी चम्पी करने को कहा ।
मैं सोफे पे बैठ गयी वो निचे बैठ गए। मैंने अपने पैर थोड़े फैला दिए जिससे उनका सर मेरी गोद में आ गया था। मैं टीवी देखते देखते मालिश करने लगी। नानाजी अपना सर पीछे करने लगे लेकिन मैं बहोत पीछे होने की वजह से कुछ हो नहीं रहा था। मैं थोडा आगे खिसकी जिसकी वजह से उनका सर अब मेरी चूत से कुछ ही इंच की दुरी पे था मैं उनका इरादा समझ रही थी और मुझे भी अब इस छेड़छाड़ का मजा आने लगा था।
मै मालिश करते वक़्त अपनी चूत से टच करवा देती जिसकी वजह से उनका लंड अब खड़ा होना सुरु हो गया था। जिसको वो छुपा नहीं रहे थे उल्टा बिच बिच में उसे पकड़ कर सहला देते। मेरी चूत में और शरीर में झनझनाहट होने लगी थी। नानाजी बोले बेटा थोडा सर भी दबा दे। मैंने उनका सर पीछे लिया और चूत पे दबा दिया उफ्फ्फ्फ्फ्फ्फ़ क्या फीलिंग थी पहली बार किसी मर्द का शरीर मेरे चूत के इतने करीब था।
मैं थोडा दबाव बना के उनका सर दबा रही थी।और साथ साथ अपनी चूत भी थोडा आगे ले जाके उनके सर से टच करा रही थी।मेरी मुलायम चूत का स्पर्श से नानाजी बहोत उत्तेजित हो चुके थे मैं ऊपर से देख रही थी उनका लंड अब पूरा कड़क हो चूका था। बिच बिच में वो उसे पकड़ के मसल रहे थे। मन तो किया की मैं ही पकड लू पर खुद को काबू में किया।
फिर मैंने नानाजी के सर पे अपना चीन रखा और पूछा नानाजी बस हो गया या और दबाउ? नानाजी बोले। "मजा तो बहोत आ रहा है पर ठीक है" मैं समझ गयी की उनको मजा किस चीज का आ रहा है।
उन्होंने अपना हाथ मेरा गाल पकड़ने के लिए पीछे की तरफ लाया लेकिन मैं तब तक अपना चीन उठा चुकी थी जिससे उनके हाथ सीधा मेरी चुचियो पे आ लगा और उनके हाथ में मेरी एक चूची आ गयी उफ्फ्फ्फ्फ़ पहली बार मेरी चुचियो को किसी मर्द का हाथ लगा था मेरे मुह से आउच निकल गया। नानाजी समज गए की उनका हाथ मेरी चुचियो को लगा है....उन्होंने पूछा क्या हुआ? मैंने कहा कुछ नहीं। उन्होंने ने भी आगे कुछ नहीं कहा।
नानाजी := चल ठीक है मैं तेरे सर में मालिश कर देता हु।
मैंने ठीक है कहा और निचे बैठ गयी । नानाजी सोफे पे बैठ गए और जैसे मैं आगे खिसक के बैठी थी वैसेही वो बैठ गए। उनका लंड सीधा मेरी गर्दन से होता हुआ मेरे गाल के पिछले हिस्से को छु रहा था । उम्म्म्म्म्म क्या मजेदार टच था वो । नानाजी तेल लगाते वक़्त मेरा सर आगे पीछे कर रहे थे और मैं ज्यादा से ज्यादा अपनी गर्दन उनके लंड से रगड़ रही थी।
मेरी हालात उस लंड के टच की वजह से बिगड़ती जा रही थी। मेरी चूत इतनी गीली हो चुकी थी बस पूछिये मत। नानाजी ने अब मेरा सर अपने लंड पे दबा दिया और मेरा सर दबाने लगे मैं बहकती जा रही थी। मुझसे अब बर्दास्त नहीं हो पा रहा था। मैंने नानाजी से कहा बस हो गया और मैं खड़ी हो गयी।
नानाजी ने पूछा क्या हुआ अच्छा नहीं लग रहा?ऐसे बोलके उन्होंने अपना हाथ लंड पे रखा।मैं भी उनके लंड को खुले आप देखते हुए बोली "वो बहोत सख्त है ना....5 Sec का पॉज फिर बोली आपके हाथ तो थोडा सर भारी लग रहा है।ओके मैं जाती हु सोने। ऎसा बोल के मैं ऊपर जाने के लिए मूडी और चलने लगी और नानाजी मेरी मटकती गांड को देख के अपना लंड मसलने लगे।
सुबह हमेशा की तरह सब चल रहा था। मैं नानाजी से नजरे नहीं मिला पा रही थी। लेकिन नेहा मौका देख के नानाजी के करीब चली जाती। नानाजी भी मौका नहीं छोड़ रहे थे कभी नेहा की चुचियो को छू लेते कभी उसकी गांड को। सब को कुछ समझ नहीं आ रहा था पर मुझे सब समझ आ रहा था। मैंने नेहा से कहा भी तो वो बोली कुछ नहीं होता यार। नानाजी खेत में चले गए।
हमारी रोज के गेम्स और मस्ती होती रही दिन भर फिर श्याम को खेत में जाने के लिए हम दोनों निकले। नेहा ने आज white कलर का चूड़ीदार और कुरता पहना था। पता नहीं उसके मन में क्या चल रहा था पर वो बहोत एक्साइटेड नजर आ रही थी।
हम चारो और घूमते घूमते खेत पहुचे। नानाजी हमें देख के बड़े खुश हुए। खेत में आज कोई मजदूर नहीं था। नानाजी कुवे के पास बैठकर कुछ रस्सी का बना रहे थे। शायद वो बैल गाय को बांधने वाली रस्सी ।
जैसे हम वहा पहुचे नानाजी ने हमें वो पेड़ पे ही पके हुए आम दिए। हम वहा छाव में बैठ के आम खाने लगे। तभी नेहा के कपड़ो पे आम की गुठली गिर गयी जिससे उसका white ड्रेस ख़राब हो गया। वो दाग ज्यादा गहरा न हो इसलिए वो पट से उठी और जानवरो को पानी पिलाने के लिए जो सीमेंट का बड़ा सा टैंक रहता है वहा जाके धोने लगी। और मुझे आवाज देने लगी। मुझे लगा क्या हुआ और क्या नहीं इसलिए भागती गयी। तो वो बोली चल नहाते है।मैंने मना किया लेकिन वो नहीं मानी।
खेतो को पानी देने के लियें मोटर पंप सुरु था। उसने छोटा नॉब सुरु किया जो टैंक भरने के लिए रहेता है। और ओढनी निकाल के अंदर कूद गयी। मैं भी अंदर जाके पानी में भीगने का मजा लेने लगी। लेकिन जब मैंने नेहा को देखा तो मेरे होश उड़ गए। उसने ब्रा या स्लीप कुछ नहीं पहना था अंदर भीगने की वजह से वो कॉटन ड्रेस उसके शरीर से चिपक गया। उसके बूब्स पुरे नजर आ रहे थे उसके काले काले निप्प्ल्स जो ठन्डे पानी एरेक्ट हो चुके थे वो साफ़ साफ़ नजर आ रहे थे। और उसने अंदर पॅंटी भी नहीं पहनी थी उसकी गांड तो कमाल की लगरही थी। उफ्फ्फ तो ये सारा प्लान करके आई थी वो।
नानाजी को जब ये दिखा तो उनके होश उड़ गए। वो टैंक से 5 फ़ीट दुरी पर होंगे वो सब साफ़ साफ़ देख सकते थे। उन्होंने काम छोड़ दिया और हमें देखने लगे। नेहा इतरा इतरा के उन्हें सब दिखा रही थी। कभी अपने चुचिया तो कभी अपनी गांड । मेरे कपडो में से कुछ नहीं दिख रहा था । मुझे नेहा पे बड़ा ग़ुस्सा आया।