नेहा अब वो नल के निचे खड़ी हो के उसका पानी अपनी चुचियो ले रही थी। और वो नानाजी को इस तरह देखे जा रही थी की बस पूछिये मत। नानाजी भी पीछे नहीं थे वो भी खुले आम अपना लंड सहला रहे थे। ये देख के नेहा और भी मादक अदाएं दिखाने लगी। उसने अपना कुरता ऊपर उठाया और अपनी गांड नानाजी की तरफ करके झुक गयी और मेरे साथ पानी में मस्ती कर रही है ऐसा दिखाने लगी। जिसकी वजह से उसकी गांड बिलकुल नंगी जैसे दिखाई दे रही थी। और उसके चूत भी साफ़ साफ़ नजर आ रही थी।
वो बिलकुल राम तेरी गंगा मैली वाली मंदाकिनी नजर आ रही थी। हम ने थोड़ी देर मस्ती की फिर हम लोग बाहर आ गए। नेहा तो बाहर आने के बाद पूरी तरह से नंगी ही दिख रही थी।नानाजी उसे बस देखे जा रहे थे। आज अगर वो अकेली होती तो यकीनन नानाजी उसे चोद देते। खैर हम घर आये मैंने उसे बहोत डाटा उसने कहा यार वो मैंने टाइम पे तय किया। लेकिन वो मुझे बोली की आज रात को हम दोनों देर तक टीवी देखेंगे। मैंने सोचा चलो देखते है क्या होता है।
रात को खाना खाने के बाद हम सब टीवी देखने लगे। नेहा ने जानबुज कर डिस्कव्वरी लगा दिया जिससे सब उठ के जाने लगे। हम दोनों फिर टीवी देखते हुए इधर उधर की बाते करने लगे। और नानाजी का इंतजार करने लगे। लेकिन वो नहीं आये। रात के 11.45 बज चुके थे। नेहा को रितेश के फ़ोन आ रहे थे लेकिन उसने कह दिया की आज बात नहीं हो सकती। मैंने नेहा से कहा चल यार चलते है।
नेहा बोली रुक न यार। थोड़ी देर और। फिर मैंने कहा लगता है नानाजी हम दोनों है इस वजह से नहीं आ रहे । नेहा बोली ठीक है तू जा मैं 10 मिनट में आती हु। अगर नहीं आयी तो तू आ जाना।मैंने कहा ठीक है। मुझे बड़ी नींद आ रही थी। मै जाकर लेट गयी। पानी में नहाने की वजह से सुस्ती सी चढ़ रही थी। मै लेटते ही सो गयी।
जब मेरी आँख खुली तो मैंने देखा 1 बज रहे थे । मैंने नेहा को फ़ोन लगाया पर उसने उठाया नहीं। मैंने सोचा की शायद हॉल में ही सो गयी। इसलिए उसे उठाने के लिए निचे गयी तो मैंने देखा हॉल में नेहा सोफे पे बैठ के टीवी देख रही थी। और नानाजी अपने कमरे की और तेजी से जा रहे थे। मैं उसके पास गयी और उसको कहा चल ना क्या कर रही है अकेली? उसपे नेहा ने कहा। "" 10 मिनट देरी से आती तो क्या बिगड़ जाता तेरा?""
मैं:= क्या हुआ? और वो नानाजी ही थे ना? चल जल्दी से बता क्या हुआ?
नेहा:= हा चल ऊपर रूम में चलते है....सब बताती हु। और तू वापस क्यू नहीं आयीं? मुझे लगा की तू छुपके सब देख रही है।
मैं:=अरे मुझे नींद लग गयी थी।
हम अपनी रूम में आ गए। फिर नेहा मुझे सब बताना सुरु किया।
नेहा====== तू जैसे ही गयी वैसे दादाजी आ गए।
वो:=अरे नेहा माधवी कहा गयी? और अकेले ही टीवी देख रही है?क्या हुआ?
मैं:=वो कुछ नहीं ये प्रोग्राम अच्छा लग रहा है इसलिए देख रही हु। आप सोये नहीं अब तक?
वो:= नहीं खेतो में काम जादा था आज सो पूरा बदन अकड़ रहा है।
नेहा:= आप कहे तो दबा देती हु। बचपन में कितना दबाने को बोलते थे।
वो:= हा ठीक कह रही है तू।
वो निचे फर्श पर डाली हुई मैंट पर ही उल्टा लेट गए। मैं उनके कमर के दोनों तरफ घुटने पे बैठ के पीठ हाथो से दबाने लगी। उन्होंने मुझे बैठने को कहा। मैं उनकी गांड पे अपनी गांड टिका के बैठ गयी । मेरी नरम मास्सल गांड का स्पर्श उन्हें अच्छा लग रहा था। मुझे भी अच्छा लग रहा था मैं मस्त अपनी गांड और चूत रगड़ रही थी। मेरी तो चूत में पानी आना भी सुरु हो गया था।
उनका लंड भी खड़ा होने लगा था। शायद दबने की वजह से दिक्कत हो रही थी उनके लंड को। उन्होंने मुझे रुकने को कहा। और वो सीधे लेट गए। उम्म्म उनका लंड पूरी तरह तना हुआ था। और वोसे छुपाने की बिलकुल भी कोशिश नहीं कर रहे थे। मैंने देखा वो अपने लंड को झटके दे रहे थे। जैसे कह रहे हो आ जाओ पकडलो मुझे। मैं तो घबरा ही गयी उनका इतना बड़ा लंड इतने करीब से जो देख रही थी। वैसे तो बहोत बाते कराती हु पर जब मौका था तो मेरी हिम्मत नहीं हुई।
उन्होंने मुझे पैर दबाने को कहा। मै निचे बैठ गयी और उनके पैर दबाने लगी। लेकिन मेरी नजर उनके लंड से हट नहीं रही थी। वो भी मेरे चहरे को बड़े गौर से देख रहे थे। और अपने लंड को झटके दिए जा रहे थे। फिर मैं उनकी जांघे दबाने लगी । वो मुझे ऊपर की तरफ दबाने को बोल रहे थे। मेरे हाथ कापने लगे थे। जैसे मेरे हाथ उनके लंड के पास जाते मैं और काप जाती। लेकिन फिर मैंने हिम्मत करके उनके लंड को छु ही लिया। बापरे कितना सख्त था उम्म्म्म और गरम भी। लंबा तो दिख ही रहा था पर छूने से पता चला की वो कितना जाड़ा था उम्म्म्म मेरी चूत में से लहर दौड़ने लगी थी।
मैं बार बार उसे छु रही थी। उन्होंने अंदर अंडरवियर नहीं पहनी थी। अब मैं उसे अपनी उंगलियो में पकड़ लेती। अह्ह्ह्ह्ह सीसीसीसी मैं बता नहीं सकती क्या मस्त फीलिंग थी वो।उन्होंने अपना हाथ आगे बढ़ाया और मेरी गांड को छु लिया। वैसे ही मै उचक पड़ी और खड़ी हो के मैंने हड़बड़ी में कहा "दादाजी मैं जा रही हु मुझे नींद आ रही है।"
वो:= क्या हुआ? उनको लगा की शायद उन्होंने जल्दी कर दी।
मैं:= कुछ नहीं...
उनको समझ आ गया की मुझे बुरा नहीं लगा बस घबरा गयी हु।
वो := अच्छा 5 मिनट जरा मेरे बालो में तेल लगा दे।
मैं सोफे पे बैठ गयी जैसे कल तू बैठी थी। दादाजी भी समझ गए वो अपना सर सीधा मेरी चूत पे रख दिया मैं उनका सर अपनी चूत पे दबा दबा तेल मालिश करने लगी। मैं पागल सी हुई जा रही थी। फिर वो बोले की गर्दन की पीछे से मालिश कर दे। और टर्न हो के मेरे तरफ मुह करके बैठ गए और गर्दन झुका ली। मैं थोडा पीछे सरक गयी।और उनकी गर्दन पे तेल लगा के मालिश करने लगी।
उन्होंने अपने हाथ आगे बढ़ा के मेरी गांड पे रखे और मुझे आगे खीचा और अपना चेहरा बिलकुल मेरी चूत के ऊपर रख दिया। मेरे पुरे शरीर में करंट सा दौड़ा मैं अपने सुधबुध खो बैठी। एक तो मैंने अंदर पॅंटी नहीं पहनी थी। वो थोडा पीछे सरके और मेरी गांड को पकड़ के और अपनी तरफ खीचा।मैं बिलकुल सोफे के किनारे पे बैठी थी और आगे सरकती तो गिर जाती। मैं अब होश खो चुकी थी। मैने उनका सर पकड़ कर गर्दन की मालिश करने लगी।
लेकिन उन्होंने अपना सर निचे नहीं झुकाया बल्कि अपने होठ मेरे चूत पे रख दिए। सीसीसीसीसीसी अह्ह्ह्ह्ह्ह्ह मेरी आखे बंद हो गयी। पहली बार कोई मर्द मेरी चूत को चूम रहा था। मैं उत्तेजना से पागल सी हो गयी थी। मैंने अपने पैरो को और खोला और उनका सर चूत पे दबाने लगी । वो समझ गए की चिड़िया फस चुकी है। वो अब मेरी चूत को चूम रहे थे।उनके होठो और मेरी चूत में सिर्फ मेरी सलवार का पतला कपड़ा ही था। मुझे उनके होठो की गर्माहट साफ़ महसूस हो रही थी।
मैं आखे बंद करके मजे ले रही थी।हम कुछ भी बोल नहीं रहे थे। वो मेरी गांड को दबा दबा के मेरी चूत चाट रहे थे।उनकी जुबान का खुरदुरा पण मैं अपनी चूत पे साफ़ महसूस कर रही थी। मैं अपनी गांड उचका के अपनी चूत उनके होठो पे दबा रही थी। मैं उनका स्पर्श जादा देर तक सह नहीं पायी। मैं झड़ गयी। उफ्फ्ग्ग्ग सीसीसीसी आआआअ ह्ह्ह्ह बहोत अच्छा लग रहा था। जैसे मैं हवा में उड़ रही हु।वो समझ गए की मेरा हो चूका है।
मैं अब होश में आ चुकी थी। मैं झट से उठी और गर्दन को इधर उधर करके बोली दादाजी बहोत नींद आ रही है।तो वो बोले क्या हुआ? गर्दन में दर्द है क्या? आओ निचे बैठो मैं दबा देता हु। पता नहीं क्यू मैं मना नहीं कर पायी । मै निचे बैठ गयी वो मेरी गर्दन दबाने लगे। धीरे धीरे कंधो से उनके हाथ फिसल कर सामने मेरी चुचियो की तरफ बढ़ने लगे। मै आखे बंद करके बैठी रही। वो अपने हाथ कंधो पे ले जाते और वहा से फिसला कर निचे चुचियो की तरफ। अह्ह्ह्ह्ह्ह स्स्स्स सीसीसीसी उम्म्म्म मै बस मजे लिए जा रही थी।
वो हर बार अपना हाथ ज्यादा ही निचे लेके जाते। उनके हाथ मेरे कुर्ते के गले से मेरी चुचियो तक पहोच चुके थे। उन्होंने अपना एक हाथ गले में से अंदर डाल के मेरी चुचिया पकड़ ली। उम्म्म्म्म सीसीसीसी आह्ह्ह्ह मेरे मुह से सिस्कारिया निकलने लगी थी। वो बारी बारी मेरी चुचिया मसल रहे थे। निप्प्ल्स को उंगली में पकड़ कर दबा रहे थे। उफ्फ्फ्फ्फ्फ क्या बताऊ बहोत मजा आ रहा था। उन्होंने अपना लंड सेट किया और मेरा सर पकड़ कर उसपे झुका दिया।
मेरे गाल उनके लंड पे थे। मैं गाल से उनका लंड रगड़ने लगी। मेरे अंदर से अब डर निकल चूका था। मैं मजे लेके उनका लण्ड रगड़ रही थी। फिर मैंने अपना सर टर्न करके उनके लंड पे अपने होठ रख दिए। उम्म्म्म वो उनका पैजामा प्रीकम की वजह से गिला हो चूका था। बड़ी मस्त खुशबू आ रही थी। मेरे होंठ उनके प्रीकम की वजह से गीले हो गए। मैं धीरे धीरे उनके लंड के सुपाड़े पे अपने होठ रगड़ रही थी। फिर मैंने अपने होठ खोल के उनके सुपाड़े पे रख दिए। वो अब मेरी चुचिया जोर जोर से भींच रहे थे। जिसकी वजह से मेरे होठ अपने आप ही खुल जाते।
मैंने उनका लंड का सुपाड़ा अब पैजामे के ऊपर से ही होठो में पकड़ लिया। और टंग से उसके साथ खेलने लगी। बड़ा अच्छा टेस्ट था यार....आगे कुछ कर पाते की तेरा फ़ोन आ गया। हम होश में आये। एक दूसरे से नजर नहीं मिला पा रहे थे और नाही कुछ बोल पा रहे थे की तभी तेरी कदमो की आहट हुई और दादाजी झट से उठके कमरे की और चले गए।
नेहा:=नेहा क्या यार सब बिगाड़ दिया तूने। थोड़ी देर बाद आती तो मै उनके कमरे में जाके उनसे चुद रही होती।
मैं:= मुझे क्या पता यार...पर क्या बात है तूने आखिर उनका लंड चख ही लिया।
नेहा:= उम्म्म्म क्या मजा आ रहा था मै बता नहीं सकती।
चल यार 2 बज गए। सोते है अभी। मैं लेट गयी नेहा ने जो भी बताया उससे मेरी चूत फड़फड़ाने लगी थी। काश की कल मैं भाग के ना आयीं होती तो मैं भी मजे कर लेती। खैर अब मुझे शरम छोड़ के कुछ करना होगा। क्या करना चाहिए ये सोचते सोचते सो गयी।
इधर नानाजी जैसे कमरे के अंदर आये दरवाजा बंद किया और बाथरूम में जाके लंड निकाल कर मुठ मारने लगे। कुछ ही पलो में उनका लंड ठनक ठनक कर वीर्य छोड़ने लगा। करीब 1 मिनट तक उनका लंड पानी छोड़े जा रहा था। इतना अच्छा उनको पहली बार मजा आया था मुठ मारके।
सोते सोते वो सोचने लगे चलो नेहा तो अब जाल में फस चुकी है। उसकी चूत में अब सिर्फ लंड डालना बाकी है।फिर माधवी भी अपनी टाँगे फैला ही देगी...............
अगला दिन भी रोज की तरह ही गुजरा।शाम को हम खेतो में गए। नानाजी वहा नहीं थे। हमें लगा की शायद फिर से उसी औरत को चोद रहे होंगे। हम खेतो में इधर उधर उन्हें ढूंढने लगे। लेकिन वो कही दिखाई नहीं दिए। और खेत इतने दूर दूर तक फैले हुए थे की उनको ढूंढना थोडा मुश्किल ही था। हम थक हार के कुवे के पास आ गए। तभी नानाजी हमें कुवे के पास वाले गोडाउन से बाहर आते दिखाई दिए।
नानाजी:= अरे आज बहोत लेट हो गए तुम लोग।
नेहा:= नहीं तो हम तो बहोत देर से आ गए और आपको ही ढूंड रहे थे।
नेहा के मुह से निकल गया। नानाजी को समझ आ गया। वो मुस्कुराने लगे।
नानाजी:= मुझे खेतो में क्यू ढूंढ रहे थे। मैं तो यहाँ गोडाउन में इलेक्ट्रीशियन से काम करवा रहा था। अभी गया वो। अच्छा तुम दोनों अंदर आओ थोडा काम है। वो मालती भी नहीं आयी आज।
नेहा:= (टॉन्ट टाइप) तो क्या मालती चाची वाला काम हमसे करवाओगे आज दादाजी?
नानाजी:= हा अगर तुम लोग रेडी हो तो मुझे क्या प्रॉब्लम हो सकती है!!!
नेहा:= लेकिन हमारी अ अ अ...मतलब हम तो बहोत छोटे है और मालती चाची बहूऊओत बड़ी...तो कैसे होगा?
नानाजी:= पहले मालती भी छोटी ही थी काम कर करके बड़ी हो गयी तुम भी सिख जाओगी। अब ज्यादा बाते मत बनाओ यहाँ आओ थोड़ी हेल्प करो मेरी ये सामन थोडा ढंग से रखना है।
उपस्स्स क्या चल रहा था ये मैं शर्म से पानी पानी हो रही थी। हम लोग अंदर गए। सब्जिया और दूसरा सामान बिखरा हुआ था वो सब हमने सही से रखने में नानाजी की हेल्प की और फिर घर आ गए।
नानाजी भी हमारे पीछे आ रहे थे। नेहा अपनी मस्त गांड हिला हिला के चल रही थी। जब हम घर पहोंचे तो हमने देखा मामाजी नीरज को छोड़ने बस स्टैंड जा रहे थे। वो 10 दिन के लिए समर कैंप जा रहा था पुणे में। ये सब अचानक ही तय हुआ था।
हमने उसे बाय बोला और वो चला गया। रात को खाने के बाद नानाजी ने मामी से कहा की वो छत पर सोयेंगे। मैंने नेहा की तरफ देखा वो भी मेरी तरफ देखके मुस्कुरा रही थी।
रात को टीवी देखने के बाद हम रूम में गए। नेहा बोली चल दादाजी से मिलके आते है। ऊपर दो ही रूम थी एक नीरज की और एक हमारी। और सामने पूरा ओपन था। नानाजी ने वही नीचे अपना बिस्तर लगाया हुआ था। हम लोग नानाजी के पास गए। वो सोये नहीं थे। कोई किताब पढ़ रहे थे।
मैं:= अरे नानाजी आप सोये नहीं अबतक? क्या पढ़ रहे थे?
नानाजी:= अरे कुछ नहीं... बस ऐसे ही।( और उन्होंने किताब निचे रख दी)
नेहा को शक हुआ उसने वो किताब उठाई और देखने लगी। वो सेक्सी नॉवेल थी। नेहा ने थोडा पढ़ा नानाजी ने उसे रोकने की कोशिश भी की लेकिन शायद वो चाहते थे की हम वो पढ़े।
नेहा:= उम्म्म्म बहोत अच्छी है नॉवेल।
मैं:= अच्छा बता मुझे।
मैंने पढना सुरु किया। मैंने वो पन्ना पढ़ा जिसमे साफ़ शब्दों में चुदाई की बाते थी।
मैं := बाप रे ये क्या है? और तू बोलती है ये अच्छी है?
नेहा:= हा मुझे तो अच्छी लगी। लगता है तूने बुरा वाला पन्ना पढ़ा।
जरा पढ़ के सुना तो क्या पढ़ा तूने?
मैं:=छी मुझे नहीं पढना। और नानाजी आप?....
मैं आगे कुछ बोल ही नहीं पायी।
नानाजी:= क्या करू बेटी? तन्हाई में कुछ तो चाहिए करने को।( अपना लंड़ दबाते हुए इस तरह की हम देख सके) और तेरी नानी की बहोत याद आती है।
मेरे मुह से अनजाने में निकल गया। ""क्यू मालती चाची है ना"""
नानाजी:=( मुस्कुराते हुए) हा है तो पर अब उसमें वो बात नहीं।
नेहा:=वो बात मतलब?
नानाजी:= वो जो तुम दोनों में है...!!!
मेरे तो होश ही उड़ गए। लेकिन नेहा बड़ी बेशरम हो के बात कर रही थी।
नेहा:= हम दोनों में क्या है?
नानाजी कुछ बोल पाते इससे पहले मैंने नेहा का हाथ पकड़ा और उसे खीचते हुए कहा ""चल न यार मुझे बहोत नींद आ रही है।""
और मैं उसे खीचते हुए रूम में ले आयीं। नेहा ने मुझपर ग़ुस्सा करते बोला।
नेहा:=क्या कराती है पागल मस्त मजा आ रहा था।
मैं:= पागल है क्या तू मुझे बड़ा अजीब लग रहा था। हम अकेले में भले ही बहोत बाते करते है पर यार उनसे खुले आम ऐसे बात करना बड़ा अजीब लगता ।
नेहा:= हा पर बड़ा मजा आ रहा था।
उतने में रितेश का फ़ोन आया। नेहा ने उसे बोल दिया की निंद आ रही है।
नेहा ने अपने कपडे उतारे और आज उसने स्कर्ट पहना पॅंटी निकाल दी।ऊपर एक ढीला सा शर्ट टाइप टॉप पहन लिया। मैंने अपने रेगुलर नाईट ड्रेस पहना था।
मैं:= नेहा तू ये कया पहना है?
नेहा:= कुछ नहीं थोड़े ढीले कपडे पहने है।
मैं समझ गयी की इसके दिमाग में कोई प्लान चल रहा है।
हम बिस्तर पे लेट गए।नींद हमसे कोसो दूर थी। फिर भी हम आखे बंद करके लेटे हुए थे। करीब आधे घंटे बाद दरवाजे पे टकटक हुई। नेहा और मैं उठे। नेहा ने मुझे इशारे से सोने को कहा और दरवाजा खोला।
नानाजी:= नेहा जरा पानी देना तो।
नेहा ने उनको पानी दिया। वो नेहा को देखे जा रहे थे।
नानाजी:= माधवी सो गयी लगता है? अगर तुम्हे नींद नहीं आ रही होगी तो मेरे पैर और पीठ 'कल' की तरह दबा दो ना
नेहा:= जी अभी आती हु।
मैं उठी और नेहा से पूछा क्या हुआ?
नेहा ने बताया और कहा की मैं आती हु थोड़ी देर में। तू मत आना उधर।
नेहा चली गयी। मुझसे नहीं रहा जा रहा था। मैं पैट से उठ के सामने नीरज की रूम में चली गयी। वहा उसके रूम का लाइट ऑफ था।उसकी रूम की खिड़की को थोडा खोल के मैं बाहर देखने लगी। उन्होंने लाइट बंद कर दिया था पर चाँद की रोशनी में मैं साफ़ साफ देख सकती थी और उनकी बाते भी सुन सकती थी।
नानाजी सिर्फ अंडरवियर में उलटे लेटे हुए थे। नेहा अपनी स्कर्ट उठा के अपनी नंगी चूत और गांड उनके गांड पे रगड़ती हुयी उनकी पीठ दबा रही थी।
नानाजी:= उम्म्म्म बहोत अच्छा लग रहा है ।
नेहा:=क्या दादाजी?
नानाजी:= तुम्हारे नरम हाथ और नरम नरम ....वो चुप हो गए।
नेहा:=और क्या दादाजी....नेहा की आवाज भारी और मादक हो गयी थी।
नानाजी:=कुछ नहीं....एक काम कर थोड़ी ऊपर आ जा और कंधे भी दबा दे।
नेहा ऊपर सरकी जिससे उसकी नंगी गांड और चूत नानाजी के कमर पे लग रही थी।नेहा मस्त रगड़ के उनको मजा दे रही थी।
नेहा := अब ठीक है? अब कैसा लग रहा है?
नानाजी:= ह्म्म्म अब सही है....अह्ह्ह्ह अब सब अच्छे से महसूस हो रहा है।
थोड़ी देर बाद नानाजी सीधे हुए और नेहा को जांघे दबाने को कहा। उनका लंड बहोत तना हुआ था। नेहा की आखे उसपे से हट ही नहीं रही थी।
वो धीरे धीरे उनकी दोनों जांघे दबा रही थी। जब वो जांघे चेंज करती वो उनका लंड छु लेती। नानाजी एक टक नेहा को देखे जा रहे थे।फिर नानाजी ने उससे कहा की उनके हाथ और कंधे सामने से दबा दे।नेहा ने एक पल के लिए सोचा और वो अपनी स्कर्ट उठा के नानाजी के लंड पे बैठ गयी। उफ्फ्फ्फ्फ्फ इसकी उम्मीद तो मुझे नहीं थी और शायद नानाजी को भी न होगी।
अब उसकी चूत और नानाजी के लंड में सिर्फ अंडरवियर थी। नेहा पूरी तरह से पागल हो चुकी थी। वो नानाजी के लंड पे अपनी चूत और गांड रगड़ रगड़ के उनके कंधे दबा रही थी।और अपनी चुचिया बिलकुल नानाजी के मुह के पास ले जा रही थी। नानाजी भी अब खुद पर से काबू खो चुके थे। उन्होंने अपने हाथ उसकी स्कर्ट में से आगे बढ़ाये और उसकी नंगी गांड को पकड़ कर सहलाने लगे। और निचे से अपनी गांड उचका के अपना लंड नेहा की चूत पे रगड़ने लगे। नेहा की गांड पहली बार नंगी उनके हाथो में थी। जिसकी वो कल्पना करते थे अक्सर।
नेहा:= अह्ह्ह्ह दादाजी आप ये क्या कर रहे है? प्लीज छोड़ दीजिये।
नानाजी:= क्यू अच्छा नहीं लग रहा ?
नेहा:= हा अच्छा तो लग रहा है पर माधवी आ जायेगी तो?
नानाजी ने अपना एक हाथ निकाला और उसकी पीठ पे रखा और उसे अपने ऊपर गिरा लिया। और वापस अपना हाथ उसकी गांड पे ले जा के उसे सहलाते हुए बोले
नानाजी:= तो आने दो उसे भी मजे दे देंगे।
नेहा आखे बंद करके नानाजी का लंड और हाथो का स्पर्श एन्जॉय कर रही थी।
नानाजी ने उसके होठो को अपने होठो में जकड लिया ओर उसे चूसने लगे। नेहा भी अपनी चूत उनके लंड पे रगड़ रगड़ के उनका साथ दे रही थी।
नानाजी:= एक बात बताओ(नेहा के ओंठो को छोड़ते हुए) कभी किसी से चुदी हो?
उफ्फ्फ्फ़ नानाजी के मुह से ये बात सुनके नेहा की उत्तेजना और बढ़ गयी। वही हालात मेरी भी थी। मेरी चूत बहोत गीली हो चुकी थी। मैंने अपनी नाईट पैंट निचे कर दी थी और लगातार चूत के दाने को मसल रही थी।
नेहा:=उम्म्म क्या दादाजी आप भी...!!! नहीं दादाजी आज तक मैंने कभी किसी को छूने तक नहीं दिया।
नानाजी:= तभी इतनी तड़प है तुम्हारी चूत में...
नेहा:= उम्म्म चुप कीजिये ना... ऐसी बाते मत कीजिये मुझे कुछ होता है।
नानाजी:=कहा ?
नेह:= यहाँ नीचे (वो एकदम नानाजी के आखो में आखे डालके धीरेसे बोली)