• Hello Friends You can Register on the Forum and by posting you can earn money too.

नाना ने बनाया दिवाना complete

नेहा:= उम्म्म मेरी जान मन तो ये लंड लेने का कर रहा है पर ... आज दादाजी की हालात ठीक नहीं है वरना आज तो चूत फड़वा ही लेती।

नानाजी:= माधवी तू एक काम कर यहाँ बेड को पकड़ के मेरे मुह पे बैठ जा तुम्हारी चूत चाट चाट के पानी निकाल दूंगा और कब से तरस रहा हु मैं तुम्हारी चूत का रस पीने के लिए आह्ह्ह।

मै खड़ी हो के नानाजी सर के दोनों तरफ पैर रखके और चूत जितना खोल सकती थी उतना खोल के उनके मुह पे बैठने लगी। नानाजी ने मुझे बीच में ही रोका और दोनों हाथो से मेरी चूत के लिप्स को अलग करते हुए अंदर उंगली घुमाने लगे उनके ऐसा करने से मैं पागल सी हो उठी.....""उम्म्म्म अह्ह्ह्ह नानाजीईईईईई उम्म्म्म बहोत अच्छा लग रहा है अह्ह्ह्ह"""

नानाजी:= उम्म्म्म आहा क्या गुलाबी चूत है तुम्हारी माधवी उम्म्म इसके होठ बिलकुल गुलाब की पंखुड़ियों की तरह ही है उम्म्म्म एकदम पतले और कोमल।

आह्ह्ह्ह...... ऐसा बोलके उन्होंने मुझे निचे खीच लिया और मेरी चूत अपने मुह में भर लिया और अपने हाथ ऊपर लेके मेरी चुचिया मसलने लगे। उनकी जुबान का खुरदुरापन मेरी चूत की आग को भड़का रहा था। मैं उनके हाथो को पकड़ के अपनी चुचियो पे जोर से दबाने लगी ""अह्ह्ह्हम्मम्म उईईमाआ मर गयी अह्ह्ह्ह्ह हा नानाजी ऐसेही उम्म्म और एअह्ह्ह्ह्हआःह्ह्ह्ह्हैह्ह्ह्ह् उम्म्म और चाटिये ना अह्ह्ह"""

मैं पागल हो चुकी थी। मैं अपनी चूत उनके मुह पे गांड आगे पीछे करके रगड़ रही थी अह्ह्ह्ह उनका सर पकड़ कर अपनी चूत दबा रही थी मुझे बहोत मजा आ रहा था....

मैं:=उम्म्म्म अह्ह्ह स्स्स्स सीसीसी अहह क्या आंनद है इस बात में उफ्फ्फ्फ़ चुदाई में इतना अह्ह्ह मजा आता है सीसी सीसी पता ही नहीं थॉ उम्म्म्म नानाजी अह्ह्ह अंदर तक डालिये ना अपनी जुबान अह्ह्ह्ह्ह्ह.

नानाजी मेरी चूत में अपनी जुबान डाल के आगे पीछे करने लगे और दूसरे हाथ से चूत का दाना रगड़ने लगे उफ्फ्फ्फ्फ्फ ये दो तरफा हमला मैं सह नहीं पायी और गांड तेज तेज हिलाते हुए नानाजी के मुह में झड़ गयी। और निढाल हो के बाजू में सो गयी।

 
इस दौरान नेहा भी नानाजी का लंड चूसे जा रही थी लेकिन मेरी चीखे और आहो ने उसे बेचैन कर दिया वो खड़ी हो के नानाजी का लंड अपनी चूत पे रगड़ रही थी। उससे चूत की तड़प सहन नहीं हुई तो वो लंड का सुपाड़ा चूत में लेने लगी उसने पूरा सुपाड़ा चूत में ले लिया था उसे थोडा दर्द हो था लेकिन शायद वो आज लंड को चूत में लेना ही चाहती थी। उसने थोडा दबाव बनाया तो नानाजी को शायद कमर में दर्द होने लगा था। तो नानाजी ने उसे मना कर दिया। तो फिर से चूत पे रगड़ने लगी और वो भी झड़ गयी। जब हम दोनों नार्मल हुए तो नानाजी बोले "" मेरा लंड तो अभी भी खड़ा है जरा उसे भी आजादी दिलवाओ""

अब हम दोनों ने उनका लंड अपनी चुचियो में पकड़ा और उसे ऊपर निचे करने लगे. फिर नेहा ने उनका लंड निचे से ऊपर तक चाटते हुए उसे ऊपर निचे करने लगी और मई बीच बीच में उनके लंड का सेंसिटिव पार्ट चाट जाती जिससे वो जल्दी ही झड़ने की हालात में आ गए। नेहा उनकी मुठ मारने लगी और हम दोनों उसका पानी अपने चहरे पे लेने के लिए बेताब हो उठे। उम्म्म्म्म फच फच सप सप करके उनकी पिचकारी मेरे और नेहा के मुह पे उड़ाने लगे। उम्म्म अह्ह्ह्ह नेहा उसे पुरे चहरे पे उंगलियो से फैलाने लगी और उंगली चाटने लगी।

जब नेहा ने देखा की मैं सिर्फ आखे बंद करके उसकी गर्माहट का मजा ले रही हु तो वो मेरे चहरे से उनका वीर्य चाटने लगी """ अह्ह्ह्ह्ह माधवी एक बार टेस्ट करके देख मजा आ जाएगा""

मैंने आखे खोली और नेहा केचे हरे को पकड़ के चाटने लगी। नानाजी हमारी ये हरकते देख कर मुस्कुराने लगे ..............

 
कहानी जारी रहेगी।कमेंट के लिए थैंक्स।
 
उस रात बहोत अच्छी नींद आयीं। मेरी और नेहा की चूत की आग कुछ हद तक कम हो जायेगी ऐसा मुझे लगा। लेकिन ये निगोड़ी चूत कहा शांत बैठती है। इसकी आग तो और भड़क उठी थी।

अगला दिन हमेशा की तरह ही गुजरा। नानाजी की हालत में काफी सुधार था। अब उन्हें ज्यादा तकलीफ नहीं थी। गाँव में से किसी मालिश वाले को मामाजी ले आये थे। उसने तो जैसे जादू ही कर दिया उसकी सुबह और शाम की मालिश ने नानाजी का दर्द एकदम गायब कर दिया। लेकिन नानाजी जानबुझ के बोल रहे थे की मूवमेंट में अभी भी तकलीफ हो रही है क्यूकी वो चाहते थे कि हम आज रात फिर उनके कमरे में गुजारे।

नेहा दिनभर बड़ी खुश थी क्यू की उसे पता था आज चुदाई पक्की है।मेरी भी हालत उससे कुछ अलग नहीं थी। रात को चुदने के ख़याल से ही चूत में दिन भर पानी आता रहा।

शाम को जब हम खेतो में घुमने गए तब नेहा मुझसे बोली.....

नेहा:=माधवी यार आज दिन भर से ही चूत में बहोत पानी आ रहा है।

मैं:= हा यार मेरी भी हालत ऐसी ही है।

नेहा:= कब होगी रात और कब होगी इस चूत आग ठंडी हाय रे.....

माधवी:= सबर कर ...सबर कर सब्र का फल हमेशा मीठा होता है।

नेहा:= पर इस केस में सब्र का फल नहीं पानी है .... और वो मीठा तो नहीं पर बहोत टेस्टी है ।

इस बात पर हम दोनों हंस पड़े। ऐसेही हँसते हुए और घूमते हुए ठंडी हवा का मजा लेते हुए घर आ गए।

लेकिन घर पहोचते ही हमारे होठो से हँसी गायब हो गयी। हमने देखा की नानाजी के दोस्त उनसे मिलने आ धमके थे। नेहा का चेहरा रोने जैसा हो गया था। मुझे भी बहोत गुस्सा आ रहा था। नानाजी को हमारी हालत समझ आ रही थी। उन्होंने मौका देख के हमसे कहा"" कोई बात नहीं सिर्फ आज की ही तो बात है"""

नेहा ने उनसे कह दिया की ""उनको गेस्ट रूम में सुला दीजिये"" नानाजी भी उस बात के लिए मान गए।

 
लेकिन शायद हमारी किस्मत आज बहोत ही खराब थी। इस मामले को निपटाया नहीं तो सामने एक और मुसीबत आ गयी। ""मेरे पापा""

उनका एक कांफ्रेंस मीटिंग थी महाबलेश्वर में कल। तो वो मुझे सरप्राइज देने आज रात को यहाँ पहुँच गए।कल सुबह वो मीटिंग के लिए चले जाएंगे। ""हाय रे हमारी किस्मत""

नेहा तो रोने ही लगी थी। मैंने उसे समझाया की चल होता है ऐसे कोई बात नहीं।

रात को हमने खाना खाया। और सब अपने अपने कमरे में सोने के लिए जाने लगे। नानाजी और उनके दोस्त उनके कमरे में सो रहे थे। पापा और ड्राईवर अंकल गेस्ट रूम में। लेकिन... पापा ने मामी से कहा की वो ऊपर छत पे सोयेंगे।

पापा:= अरे नेहा बेटा मेरा बिस्तर ऊपर छत पे लगा देना।वो क्या है हम मुम्बई में रहने वालो को कहा नसीब होता है खुले आसमान में सोना।

नेहा := हाँ सच कहा आपने काका।(दोस्तों ये बात मैं बता दू की हमारे मराठी लोगो में मौसी के हस्बैंड को काका ही कहते है)

नेहा ने और मैंने पापा का बेड छत पे लगा दिया। और हम दोनों अपने कमरे में चले गए।

नेहा:=क्या यार ऐसा क्या हो रहा है हमारे साथ।

मैं:=हा ना यार... तूने तो भी नानाजी का लंड अपनी चूत में थोडा सा ले लिया पर मैंने तो बस एक बार सिर्फ टच करवाया है ।

नेहा:÷सोचा था की आज मस्त खूब जम के चुदुंगी पर सारे अरमानो पे पानी फिर गया। माधवी यार कुछ कर ना कुछ सोच।

मैं:=(हँसते हुए) हाय रे देखो तो जरा मेरी बहन लंड के लिए कितना तड़प रही है। और में क्या करू यार? मेरे पास लंड होता तो तुम्हे चोद देती।

नेहा:= हा यार काश तू लड़का होती....

उतने में रितेश का फ़ोन आया। हमने हमेशा की तरह उसके फ़ोन पे बात करके चूत रगड़ने लगे पर आज मजा नहीं आ रहा था। आएगा भी कैसे एक बार किसी ने पकवान का टेस्ट कर लिया तो उसे रूखी सुखी रोटी कहा अच्छी लगती है?

जैसे तैसे नेहा ने फ़ोन रखा....

नेहा:= साला कमीना यहाँ आग लगी है और ये आ गया उसपे पेट्रोल डालने।

मुझे बड़ी हँसी आ रही थी नेहा पे। लेकिन मैं कण्ट्रोल कर रही थी।

मैं:= नेहा तू न पागल हो गयी है।

 
नेहा ने खुद शांत करते हुए आखे बंद करली और लेट गयी। मैं भी कुछ बोल नहीं रही थी बस आखे बंद करके लेट गयी। नींद तो हम दोनों को नहीं आ रही थी। मैंने वाच देखा 11.30 बज चुके थे। मैंने नेहा से कहा "" चल निचे टीवी देखते है"" लेकिन उसने मना कर दिया। मुझे बिलकुल भी नींद नहीं आ रही थी। मैं उठ के निचे हाल में टीवी देखने लगी। और टीवी देखते देखते कब मेरी आँख लग गयी मुझे पता ही नहीं चला। मैं वही सोफे पे सो गयी।

रात के करीब 1 बजे किसी चीज के अहसास ने मेरी आखे खुली। कोई सोफे पे मेरे पास बैठा हुआ था। और वो मेरी चुचियो पे धीरे धीरे हाथ घुमा रहा था। हाल में पूरा अँधेरा था। मुझे कुछ भी दिखाई नहीं दे रहा था। मुझे लगा शायाद नानाजी है इसलिए मैं चुप चाप लेटी रही।और घर में बहोत मेहमान थे इसलिए मैंने कुछ भी बोलना सही नहीं समझा। लेकिन डर भी बहोत लग रहा था। पर मजे भी करने थे।

मुझे उनका टच आज अजनबी लग रहा था। मैंने आखे खोली और गौर से देखा तो वो.....""मामाजी"" थे। ओह गॉड ये क्या हो रहा है। मैंने झट से उनके हाथ को पकड़ा और उठ के बैठ गयी और ""मामाजी ये आप क्या कर् रहे हो?""

मामाजी:=( वो थोडा घबरा गए) वो माधवी तुम यहाँ सोफे पे सो रही थी तो मैंने तुम्हे जगाया लेकिन तुम बहोत गहरी नींद में थी तो मैं तुम्हे ठीक से सुला रहा था।

मैं:= हा वो शायद मैं टीवी देखते देखते सो गयी। अच्छा ठीक है मैं जाती हु ऊपर।

मामाजी:=क्या हुआ माधवी। मैंने तुम्हे छुआ तो अच्छा नहीं लगा तुम्हे? उस दिन तो जब बाबूजी तुम्हे छु रहे थे तुम्हे मजा आ रहा था? मामाजी ने मेरा हाथ पकड़ के धीमी आवाज में कहा।

मैं घबरा गयी।

मैं:= नहीं नहीं मामाजी ऐसा कुछ नहीं है अ वो अ...

मामाजी:= घबराओ मत माधवी मैं जानता हु बाबूजी कैसे है। और उस दिन वो तुम्हारे साथ क्या क्या कर रहे थे और तुम उनके साथ क्या क्या कर रही थी सब देखा मैंने। मैं तो बस तुम्हारी जवानी को एक बार छूना चाहता हु। जब से तुम यहाँ आयीं हो ये तुम्हारी बड़ी बड़ी चुचिया देख के पागल सा हो गया हु।

और आज जब तुम्हारी ये बड़ी बड़ी चुचिया तुम्हारी साँसों के साथ ऊपर निचे होते देखा तो मैं अपने आप को रोक नहीं पाया। प्लीज माधवी बस मुझे इन्हे आज जी भर के छु लेने दो मैं तुम्हे कभी दुबारा कुछ नहीं करूँगा।

मुझे खुद पे नाज होने लगा था। मेरी चुचियो को देख सिर्फ नानाजी ही नहीं मामाजी का ईमान भी डोल गया था। मैं तो थी ही प्यासी सोचा चलो आज नानाजी नहीं तो मामजी ही सही। मैंने घबराने का नाटक करते कहा...

मैं:= मामाजी वो उस दिन मैंने कुछ नहीं किया प्लीज ये बात आप किसी से कहियेगा मत।। मेरी बात सुनके उनका होसला बढ़ गया।

मामाजी:= नहीं बताऊंगा पर अगर तुम मुझे अपनी चुचियो के साथ जी भर के खेलने दोगी तो....

मैं:= मामाजी प्लीज मुझे शरम आ रही है।

मामाजी समझ गए की चिड़िया फंस गयी। पर उन्हें कोन बताये की चिड़िया ने आपको फसा लिया।

मामाजी := शरम की क्या बात है? तुम जवान हो मजे लो जवानी के खेल के।

मैं मन ही मन सोचने लगी...""इस जवानी के खेल का मजा लेने के लिए आपकी बेटी उतावली है। आज बिचारी तड़प तड़प के सो गयी और मैं यहाँ उसके बाप के साथ रंगरेलिया मनाने जा रही हु"""

मैं:=ठीक है मामाजी लेकिन सिर्फ छूना ही आगे कुछ नहीं... वादा कीजिये।

मामाजी:= हा माधवी वादा.... मामाजी खुश होते हुए बोले।
 
मामाजी ने मेरे टॉप के अंदर हाथ डाला और ब्रा के उपर से चुचिया मसलने लगे।

मामाजी:= अहह माधवी बहोत अछि है उम्म्म

मैं:= थैंक यू ... हम फुसफुसा कर ही बात कर रहे थे।मन में तो बहोत डर लग रहा था की कोई देख ना ले पर दूसरा मन ये कहता कुछ नहीं होगा।

मामाजी मेरी चुचिया अब ब्रा के अंदर से हाथ डालके बारी बारी दबा रहे थे।

मैं आखे बंद करके सोफे अपनी पीठ टिका के बैठी हुई थी।

मामाजी मेरे नजदीक आके मेरे गालो पे किस्स करते हुए बोले""" माधवी ब्रा के हुक खोल दू?"""

मैं:=उम्म्म्म आह्ह्ह मामाजी आपने तो आग भड़का दी मेरे अंदर अब आप जो चाहे वो कीजिये पर इस आग को ठंडी कीजिये।

मामाजी:= उम् ठीक है मेरी जान ....

मामाजी ने मेरे ब्रा के हुक खोल दिए और उसे निचे सरका दिया। अब मेरी चुचिया आजाद थी। वो उसे जोर जोर से भींचने लगे और मेरे गले पे गालो पे होठो पे किस करने लगे। मैं भी उनका साथ देने लगी। फिर वो मेरे निप्प्ल्स को मुह में लेके चूसने लगे। और अपना हाथ मेरी चूत की तरफ बढ़ाने लगे।

मैं:= हा मामाजी उम्म्म उफ्फ्फ बहोत अच्छा लग रहा है अह्ह्ह्ह और चूसिये ना अह्ह्ह उम्म्म

मामाजी मेरी चूत पैंट के ऊपर से ही रगड़ रहे थे। मुझसे रहा नहीं गया मैंने उनका हाथ पकड़ा और अपने नाईट पैंट के अंदर घुसा दिया और उनका हाथ अपने चूत पे रगड़ने लगी।

मामाजी:= उफ्फ्फ्फ़ माधवी अहाह्ह्ह तुम तो बहोत उतावली हो रही हो अह्ह्ह उम्म्म उफ्फ्फ तुम्हारी चूत से गरम गरम भाप निकल रही है...

मैं:=( जोर जोरसे साँसे लेती हुई) अहह हा मामाजी उम् मेरी उफ़्फ़सीसीसी अहह चूत में सच में अह्ह्ह सीसीसी आग लगा दी है एअह्ह्ह्ह् आपने उम्म्म

मामाजी मेरी चूत को बीच वाली उंगली से रगड़ने लगे और मेरी चुचिया जी भर के मुह में लेके खाने लगे। अह्ह्ह्ह। वो मेरी चूत में उंगली डालने लगेअह्ह्ह्ह्मेरि तो चूत और भी तड़पने लगी थी मैंने पैर जमींन पे रखा और गांड को थोडा हवा में लेके गई जिससे मामाजी को मेरी चूत में उंगली घुसाने को आसानी हो गयी। वो अब तेज तेज उंगली अंदर बाहर करने लगे मैं अह्ह्ह्ह स्स्स हां और और हा बहोत अच्छा लग रहा है अह्ह्ह्ह्ह्ह्ह उईईईमाआआउम्म्म करते हुए अपनी गांड को और ऊपर उठा उठा के उनकी उंगली को चूत में लेने लगी।

वो भी अपनी पसंदीदा चुचियो मस्त चूसे जा रहे थे। मैं ज्यादा देर तक टिक नहीं पायी और अपनी गांड धड़ाम से सोफे पे पटक के झड़ने लगी। मामाजी को ये बात समझ आ गयी उन्होंने अपना हाथ बाहर निकाला और मुझे गालो पे किस्स करते हुए कहा....

मामाजी:= हो गयी तुम्हारी आग ठंडी? अब जरा इसे भी ठंडा कर दो ना....उन्होंने मेरा हाथ अपने लंड पे रखते हुए कहा।
 
मैंने देखा उनका लण्ड धड़ धड़ करके उड़ रहा था। नानाजी जितना बड़ा नहीं था पर छोटा भी नहीं था।

मैंने उसे पैंट के ऊपर से थोड़ी देर सहलाया। फिर मामाजी को पैंट निचे करने को कहा। मैंने उसे हाथ में पकड़ा उम्म्म्म बोहोत गरम था। मेरी मुट्ठी में समां रहा था नहीं तो नानाजी का लंड ना ही हाथ में पकड़ा जाता है और नाही मुह में ठीक से बैठता है। पूरा मुह दर्द करने लगता है। मैं उसे ऊपर निचे कर रही थी उसके प्रीकम को हाथो से पुरे लंड पे फैला रही थी। मैंने उसका प्रीकम टेस्ट करने के लिए हाथ अपने जुबान तक लाया और उसे चाटने लगी तो मामजी बोल पड़े...

मामाजी:= उम् ऐसे नहीं माधवी सीधा मुह लगा के टेस्ट करो मजा आएगा।

मैं:=(मन में) हा मामाजी ओ भी करुँगी मुझे पता है लंड का पानी कैसे टेस्ट करते है।

मैंने मामाजी का लंड निचे झुक के मुह में भर लिया। अह्ह्ह्ह्ह ऊऊऊओफ़्फ़्फ़्फ़्फ़् माधवी मामाजी के मुह से आह निकल गयी।

उम्म्म्म सच में मामाजी का लंड मुझे बड़ा पसंद आया मैं उसे अपने मन मुताबिक चूस सकती थी। मैं उसके साथ जुबान से खेलने लगी। उसे चाट चाट के गिला गिला कर दिया। उम्म्म्म्म"" मामाजी अह्ह्ह्ह बहोत अच्छा है आपका लंड अह्ह्ह्ह"""

मामाजी मेरी पीठ से हाथ निचे ले जा के मेरी गांड के छेद को छेड़ने लगे अह्ह्ह उनके ऐसा करने से मुझमे एक अलग सी लहर दौड़ने लगी।

मैं:= उम्म्म मत कीजिये ना मामाजी....मेरी चूत फिर से फड़फड़ाने लगी है अह्ह्ह्ह

मामाजी:= कोई बात नहीं...अभी उसे ठीक किये देते है।

मामाजी ने मेरी पैंट निकाल दी और मुझे सोफे पे लेटा दिया और उनका लंड मेरी मुह के पास लाके और अपना मुह मेरी चूत के पास ले जा के वो भी सोफे पे लेट गए।

मैंने गप से उनका लंड मुह में लेके चूसने लगी और उसे मुट्ठी में पकड़ के हिलाने लगी। मामाजी भी मेरी चूतको चाटने लगे । वो ऊपर मेरी चूत चाट रहे थे और निचे एक उंगली घुसा के मेरी चूत चोद रहे थे। मैंने उनको नीचे किया और मैं उनके उपर से आ गयी और उनका लंड मुह में भरके ऊपर निचे करने लगी.
 
मैं तेजी से उनका लंड चूस रही थी और अपनी चूत उनके मुह पे तेजी से रगड़ने लगी। फिर उन्होंने मुझे निचे किया और वो ऊपर आ गए। ऐसेही हम एक दूसरे को ऊपर निचे करते करते झड़ गए। मैंने उनका सारा पानी अपने मुह में ही लिया।वो भी मेरा सारा पानी पी गए। मुझे तो बहोत इच्छा हो रही थी की चुदवा लुँ उनसे। पर मन में कहा नहीं मेरी चूत में पहला लंड जाएगा तो वो नानाजी का। हमने कपडे पहने एक दूसरे को किस्स किया।

मामाजी:= माधवी प्लीज चोदने दो ना। बड़ा मन कर रहा है।

मैं:= नहीं मामाजी आप कैसी बाते कर रहे है? आपने सिर्फ चुचियो को छूने की बात की थी पर आपने चूत भी चाटी और लंड भी चुसवाया। अपना वादा मत तोडिये।

मामाजी:= ठीक है ठीक है....पर कभी अपने मामा से चुदवाने का मन किया तो जरूर बताना।

मैं:= हा ठीक है।..... फिर मैं ऊपर आ गयी रूम में देखा तो नेहा नहीं थी। बाथरूम में भी नहीं थी।

मेरा माथा ठनका.... मैं नीरज के रूम में गयी और खिड़की से बाहर देखा तो मैं दंग रह गयी......

 
सभी पाठकों को थैंक्स।अगला अपडेट जल्दी ही।
 
Back
Top