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Guest
मैं दिल्ली में रहती हूँ। पति का काफी अच्छा बिजनेस है, बेटा भी अपनी पढ़ाई पूरी करके अपने पापा के साथ ही काम करने लगा है। बेटी अभी छोटी है और कॉलेज में पढ़ती है, जवान है, बहुत खूबसूरत है।
बेटे की तो गर्ल फ्रेंड है, मुझे पता है। बेटी का भी कोई न कोई बॉय फ्रेंड ज़रूर होगा, अभी मुझे पता तो नहीं है, पर मुझे शक है कि होगा ज़रूर। मुझे क्यों शक है उसकी भी एक वजह है। मेरे पति एक बहुत तगड़े चोदू हैं। आज तक कोई ऐसी औरत या लड़की नहीं है जो उन्हें पसंद आई हो और उनकी चंगुल से बिना चुदे बच के निकल गई हो, और उनकी सबसे बड़ी ताकत है पैसा। पैसे के दम ही उन्होंने बहुत सी औरतों को अपने बिस्तर पर लेटने को मजबूर कर दिया।
कम मैं भी नहीं हूँ। पति जब बाहर नित नई चूत को चोद रहे हों, तो मैं कैसे बिना मर्द के रह सकती थी। मैंने भी अपनी जवानी को बहुत से लोगों पर लुटाया है। मैंने कभी इस बात की परवाह नहीं की कि जो मेरे ऊपर चढ़ने जा रहा है, वो कौन है। मैंने हर खड़े लंड को अपनी चूत तक आने का खुला निमंत्रण दिया है।
अब जब माँ बाप इतने चुदक्कड़ हों, तो बच्चों पर असर क्यों नहीं पड़ेगा। मुझे याद जब मेरा बेटा 12वीं क्लास में था, तब उसने हमारी काम वाली बाई को चोद दिया था। मुझे तब पता चला जब मैंने उसे एक बार ऐसा करते देख लिया था। मगर मैंने देख कर भी अनदेखा कर दिया। उसको शै मिल गई, और उसके बाद तो उसने कमला को जी भर के चोदा।
इसी लिए मुझे शक है कि मेरी बेटी का भी कोई न कोई बॉयफ्रेंड ज़रूर होगा, जिस पर वो अपनी खूबसूरत जवानी लुटवाती होगी।
मतलब यह कि हमारे घर सेक्स कोई प्रतिबंधित चीज़ नहीं थी। सबको पता था कि हर कोई किसी न किसी को चोद रहा है, या किसी न किसी से चुदवा रही है। अपनी ज़िंदगी के मज़े लो और दूसरों को भी लेने दो, किसी पर कोई पाबंदी मत लगाओ।
बड़ी हंसी खुशी में ज़िंदगी गुज़र रही थी।
हमारे घर में जो नौकर काम करता है, रमेश, गर्मियों की छुट्टियों में उसका बेटा गाँव से यहाँ आ गया, हमारे घर। अब नौकर का बेटा था, तो हमें उससे क्या था। सारा दिन वो अपने क्वाटर में बैठा रहता, कभी कभार अपने बाप की मदद करवाने को हमारे घर के अंदर भी आ जाता था। घर की साफ सफाई, या और किसी काम में वो अपने बाप की मदद करता रहता। खाने पीने को घर में खूब खुला था, दिन में वो अक्सर हाल में बैठ कर टीवी देखता रहता।
एक दिन की बात है कि रात को एक पार्टी से हम लोग बहुत देर से लौटे। रात को मैंने भी कुछ ज़्यादा ही पी ली थी, तो सुबह बहुत देर तक सोती रही।
करीब 11 बजे सो कर उठी। उठ कर देखा, बेडरूम के पर्दे अभी भी बंद थे, तो अभी भी रात जैसा ही अंधेरा सा माहौल था। मैं कुछ देर लेटी लेटी अपने आस पास को समझती रही। फिर उठ कर बैठी। किचन में फोन मिला कर रमेश से चाय लाने को कहा।
मैंने रिमोट उठा कर टीवी ऑन किया।
रात को सोते समय मैं अक्सर टी शर्ट और पेंटी ही पहनती हूँ, कभी कभी लोअर भी पहन लेती हूँ। मगर मुझे सिर्फ पेंटी या नंगी सोना ही अच्छा लगता है। कभी कभी बिल्कुल नंगी भी सो जाती हूँ। पर कोई आ न जाए इस डर टी शर्ट और पेंटी ही पेंटी ही पहन कर सोती हूँ।
मैं बाथरूम में गई, पेशाब किया, और हाथ मुँह धो कर वापस आकर बेड पे लेट गई। तभी रमेश का बेटा चाय की ट्रे लेकर कमरे में आया और मेरे बेड के पास ट्रे ले कर खड़ा हो गया। बेशक वो मेरी तरफ ही देख रहा था, मगर उसकी तिरछी नज़रें मेरी गोरी, चिकनी और मांसल जांघों को ही घूर रही थी।
मुझे लगा कि लड़के पर नई नई जवानी चढ़ी है, तो इसे भी औरत के बदन को घूरना अच्छा लगता होगा। मगर मैंने उसे अनदेखा कर दिया, घूरता है तो घूर ले या, तू कौन सा कुछ उखाड़ के ले जाएगा।
मैं चाय पीने लगी पर वो मेरे पास ही खड़ा रहा।
मैंने उस से पूछा- क्या हुआ, कुछ कहना है?
वो बोला- नहीं।
मैंने उसको डांटा- तो जाओ फिर!
वो चला गया, पर मुझे अच्छा नहीं लगा। मेरे दिल में खयाल आया ‘क्या यार खामख्वाह बेचारे को भगा दिया। कहीं बुरा न मान जाए।’
चाय पीकर भी मैं वैसे ही बेड पर लेटी रही और रात की पार्टी की बातें याद करने लगी। पहले सीधी लेटी थी, फिर उल्टी हो कर लेट गई। मैं अपने ही ख्यालों में खोई थी, तभी फिर से दरवाजा खुला और वो अंदर आया। चाय का कप उठाते हुये उसने मेरी तरफ देखा। एक 45 साल की गोरी चिट्टी, 5 फुट 6 इंच कद की भरपूर बदन की औरत, बेड पर आधी नंगी हालत में आपके सामने लेटी हो तो आप क्या करोगे।
मेरी टी शर्ट मेरी कमर से उठी हुई थी, मेरी सारी पेंटी, मेरी जांघें, मेरे चूतड़ सब नुमाया हो रहे थे।
मैंने उसकी तरफ देखा, इस बार उसकी हालत मुझे पहले से भी खराब लगी। अब वो कैसे अपने जवानी के जोश को संभाल पाता। मैंने उसकी ओर देखा, वो थोड़ा झेंप रहा था, मगर फिर भी चोर निगाह से मुझे ताड़ भी रहा था।
जाने से पहले मैंने उससे पूछा- रूम की सफाई कर दी?
वो बोला- जी, कर दी।
बेटे की तो गर्ल फ्रेंड है, मुझे पता है। बेटी का भी कोई न कोई बॉय फ्रेंड ज़रूर होगा, अभी मुझे पता तो नहीं है, पर मुझे शक है कि होगा ज़रूर। मुझे क्यों शक है उसकी भी एक वजह है। मेरे पति एक बहुत तगड़े चोदू हैं। आज तक कोई ऐसी औरत या लड़की नहीं है जो उन्हें पसंद आई हो और उनकी चंगुल से बिना चुदे बच के निकल गई हो, और उनकी सबसे बड़ी ताकत है पैसा। पैसे के दम ही उन्होंने बहुत सी औरतों को अपने बिस्तर पर लेटने को मजबूर कर दिया।
कम मैं भी नहीं हूँ। पति जब बाहर नित नई चूत को चोद रहे हों, तो मैं कैसे बिना मर्द के रह सकती थी। मैंने भी अपनी जवानी को बहुत से लोगों पर लुटाया है। मैंने कभी इस बात की परवाह नहीं की कि जो मेरे ऊपर चढ़ने जा रहा है, वो कौन है। मैंने हर खड़े लंड को अपनी चूत तक आने का खुला निमंत्रण दिया है।
अब जब माँ बाप इतने चुदक्कड़ हों, तो बच्चों पर असर क्यों नहीं पड़ेगा। मुझे याद जब मेरा बेटा 12वीं क्लास में था, तब उसने हमारी काम वाली बाई को चोद दिया था। मुझे तब पता चला जब मैंने उसे एक बार ऐसा करते देख लिया था। मगर मैंने देख कर भी अनदेखा कर दिया। उसको शै मिल गई, और उसके बाद तो उसने कमला को जी भर के चोदा।
इसी लिए मुझे शक है कि मेरी बेटी का भी कोई न कोई बॉयफ्रेंड ज़रूर होगा, जिस पर वो अपनी खूबसूरत जवानी लुटवाती होगी।
मतलब यह कि हमारे घर सेक्स कोई प्रतिबंधित चीज़ नहीं थी। सबको पता था कि हर कोई किसी न किसी को चोद रहा है, या किसी न किसी से चुदवा रही है। अपनी ज़िंदगी के मज़े लो और दूसरों को भी लेने दो, किसी पर कोई पाबंदी मत लगाओ।
बड़ी हंसी खुशी में ज़िंदगी गुज़र रही थी।
हमारे घर में जो नौकर काम करता है, रमेश, गर्मियों की छुट्टियों में उसका बेटा गाँव से यहाँ आ गया, हमारे घर। अब नौकर का बेटा था, तो हमें उससे क्या था। सारा दिन वो अपने क्वाटर में बैठा रहता, कभी कभार अपने बाप की मदद करवाने को हमारे घर के अंदर भी आ जाता था। घर की साफ सफाई, या और किसी काम में वो अपने बाप की मदद करता रहता। खाने पीने को घर में खूब खुला था, दिन में वो अक्सर हाल में बैठ कर टीवी देखता रहता।
एक दिन की बात है कि रात को एक पार्टी से हम लोग बहुत देर से लौटे। रात को मैंने भी कुछ ज़्यादा ही पी ली थी, तो सुबह बहुत देर तक सोती रही।
करीब 11 बजे सो कर उठी। उठ कर देखा, बेडरूम के पर्दे अभी भी बंद थे, तो अभी भी रात जैसा ही अंधेरा सा माहौल था। मैं कुछ देर लेटी लेटी अपने आस पास को समझती रही। फिर उठ कर बैठी। किचन में फोन मिला कर रमेश से चाय लाने को कहा।
मैंने रिमोट उठा कर टीवी ऑन किया।
रात को सोते समय मैं अक्सर टी शर्ट और पेंटी ही पहनती हूँ, कभी कभी लोअर भी पहन लेती हूँ। मगर मुझे सिर्फ पेंटी या नंगी सोना ही अच्छा लगता है। कभी कभी बिल्कुल नंगी भी सो जाती हूँ। पर कोई आ न जाए इस डर टी शर्ट और पेंटी ही पेंटी ही पहन कर सोती हूँ।
मैं बाथरूम में गई, पेशाब किया, और हाथ मुँह धो कर वापस आकर बेड पे लेट गई। तभी रमेश का बेटा चाय की ट्रे लेकर कमरे में आया और मेरे बेड के पास ट्रे ले कर खड़ा हो गया। बेशक वो मेरी तरफ ही देख रहा था, मगर उसकी तिरछी नज़रें मेरी गोरी, चिकनी और मांसल जांघों को ही घूर रही थी।
मुझे लगा कि लड़के पर नई नई जवानी चढ़ी है, तो इसे भी औरत के बदन को घूरना अच्छा लगता होगा। मगर मैंने उसे अनदेखा कर दिया, घूरता है तो घूर ले या, तू कौन सा कुछ उखाड़ के ले जाएगा।
मैं चाय पीने लगी पर वो मेरे पास ही खड़ा रहा।
मैंने उस से पूछा- क्या हुआ, कुछ कहना है?
वो बोला- नहीं।
मैंने उसको डांटा- तो जाओ फिर!
वो चला गया, पर मुझे अच्छा नहीं लगा। मेरे दिल में खयाल आया ‘क्या यार खामख्वाह बेचारे को भगा दिया। कहीं बुरा न मान जाए।’
चाय पीकर भी मैं वैसे ही बेड पर लेटी रही और रात की पार्टी की बातें याद करने लगी। पहले सीधी लेटी थी, फिर उल्टी हो कर लेट गई। मैं अपने ही ख्यालों में खोई थी, तभी फिर से दरवाजा खुला और वो अंदर आया। चाय का कप उठाते हुये उसने मेरी तरफ देखा। एक 45 साल की गोरी चिट्टी, 5 फुट 6 इंच कद की भरपूर बदन की औरत, बेड पर आधी नंगी हालत में आपके सामने लेटी हो तो आप क्या करोगे।
मेरी टी शर्ट मेरी कमर से उठी हुई थी, मेरी सारी पेंटी, मेरी जांघें, मेरे चूतड़ सब नुमाया हो रहे थे।
मैंने उसकी तरफ देखा, इस बार उसकी हालत मुझे पहले से भी खराब लगी। अब वो कैसे अपने जवानी के जोश को संभाल पाता। मैंने उसकी ओर देखा, वो थोड़ा झेंप रहा था, मगर फिर भी चोर निगाह से मुझे ताड़ भी रहा था।
जाने से पहले मैंने उससे पूछा- रूम की सफाई कर दी?
वो बोला- जी, कर दी।