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Guest
हम औरतें अपनी यौन भूख पर बहुत नियंत्रण रखती हैं, पर कभी कभी हम भी मजबूर हो जाती हैं। कुछ ऐसा ही मेरी बहन सीमा के साथ हुआ। इसलिए मैं उसको दोषी नहीं मान रही थी। सेक्स की कमी मुझसे ज्यादा कौन समझ सकता है। पर सीमा ने मुझे अंदर तक कुरेद दिया था। मैं सेक्स की कमी को हमेशा ही नजर अंदाज करती रही थी। शर्म की वजह से या और कुछ, पर मैंने कभी इसके बारे में ज्यादा ध्यान नहीं दिया था। पर अब अपनी छोटी बहन की चुदास भरी बातें सुनकर मेरे अंदर वह भूख फिर से उभरने लगी थी।
पर डर भी लग रहा था कि सीमा की तरह मेरे बारे में अगर नितिन को पता चल गया तो वह मुझे जान से मार देगा।
जिस तरह सीमा कंफ्यूज थी पहली बार करते वक्त… उसी तरह मैं भी कंफ्यूज थी, सोच सोच कर मेरा दिमाग चकराने लगा था।
मैं बाथरूम गयी और शावर लेने लगी, ऊपर से बरस रही ठंडे पानी की धारों में मेरा मन भी शांत हो जाये यही एक इच्छा थी पर वो शांत नहीं हो रहा था। लगभग दस मिनट मैं पूरे कपड़ों में शावर के नीचे खड़ी रही।
कुछ समय बाद शांति मिली तो मैंने अपने कपड़े उतार दिए, चुत में उंगली डाल कर देखा तो वह भी पानी पानी हो गयी थी। फिर मैं ठीक से नहाई, तौलिये से अपना नंगा बदन को सुखाने के बाद आईने में खुद की देखने लगी।
“कितना अन्याय कर रही थी मैं अपने बदन पर! मुझे नितिन से उसके बारे में बात करनी होगी, उसे मेरी जरूरतों के बारे में बताना होगा!” फिर से उन्ही विचारों ने मेरे दिमाग पर कब्जा कर दिया।
“मेमसाब, खाना लगा दूँ क्या?” रूम के बाहर से राजू की आवाज आई, वैसे ही मैं होश में आई।
“हा लगा दो.” मैं बोली तो वह नीचे चला गया, मैंने नाईटी पहन ली। अंदर कुछ पहनने की इच्छा नहीं हो रही थी, वैसे भी बहुत गर्मी थी।
मैं नीचे जाकर खाना खाने लगी, राजू मेरे सामने नहीं आ रहा था, शायद वह डर गया था कि दोपहर की बात मुझे पता न चल जाये।
मैंने खाना खत्म किया और ऊपर जाकर बैड पर सो गई, दिमाग में फिर भी वही ख्याल बार बार आ रहे थे… पर क्या करूँ… कुछ समझ में नहीं आ रहा था।
सोचते सोचते कब मेरी आँख लग गयी मुझे पता नहीं चला।
अचानक दरवाजे पे दस्तक हुई, मैं उठ गई। नींद अभी पूरी नहीं हुई थी, मैं अंगड़ाई लेते हुए बेड से उतरी और दरवाजा खोला।
बाहर का नजारा देखा तो मैं शॉक हो गयी, बाहर राजू खड़ा था, एकदम नंगा।
राजू का पूरा शरीर उसका विशाल लंड मेरी तरफ देख रहा था। उसका कसरती बदन बिल्कुल सीमा ने बोला था वैसे ही था, उसका लंड भी वैसा ही था काला मूसल, उसके ऊपर गुलाबी सुपारी।
गुलाबी… पर सीमा ने तो चॉकलेटी बोली थी, मुझे कुछ भी समझ में नहीं आ रहा था। मैं शॉक में वैसी ही खड़ी रही।
उसने मुझे एक धक्का दिया, उस धक्के से मैं पीछे सरक गई। वह एक हाथ से उसका विशाल लंड पर मुठ मारते हुए और राक्षसी स्माइल देते हुए मुझे पीछे धकेलने लगा। मैं कुछ भी प्रतिकार नहीं कर सकती थी, उसकी राक्षसी मुस्कान देखकर पीछे पीछे हट रही थी।
अचानक मेरे पैर बेड के पास आ कर रुक गए और उसके एक और धक्के से मैं बेड पर बैठ गई।
उसका लंड बिल्कुल मेरे सामने था, उस काले विशाल लंड पर वह मुठ मार रहा रहा। राक्षसी हँसी हँसते हुए मुझे वह सब दिखा रहा था।
मैं होश में आई और उसको पूछा- यह क्या कर रहे हो राजू?
“कुछ नाही मेमसाब, ईह है ना, बहुत जालिम है, एकदम से गरम हुई गवा, अभी तनिक ठंडा करना है.” मेरी तरफ देख कर हंसते हुए बोला।
“तुम जाओ यहाँ से!” मैं बोली।
“नहीं मेमसाब तनिक इसे ठंडा तो कराई दो!” वह अपना लंड आगे लाते हुए बोला।
“नहीं राजू, तुम जाओ यहाँ से!” मैंने उसे दूर धकेलते हुए बोला।
“आईसा का करत हो मेमसाब… जरा सी ठंडक तो मांगत है.” कहकर वह फिर से मेरे सामने खड़ा हो गया। अपना लंड मेरे होठों पर घिसते हुए वह फिर से हँसने लगा।
“आहहह…” मैं चिल्लाई, जलती भट्टी में से निकले लोहे की रॉड की तरह वह गरम था। मेरे होंठ अब जलने लगे थे।
“जल गए मेरे होंठ!” मैं बोली।
“हाँ तभी तो बोले हैं, ईह कमीना बोहुत गरम हुई गवा है, तनिक ठंडा कराई दो!” कहकर वह फिर से अपना लंड मेरे होंठों पर घिसने लगा।
“नहीं राजू तुम जाओ यहाँ से” मैंने उसके लंड को अपने हाथों से दूर धकेलते हुए बोला।
“अरे जानेमन, तनिक ठंडक तो देई दो, तोहार जवानी बड़ी मस्त मस्त है…” ऐसा कह के वह फिर से अपना लंड मेरे होठों पे घुमाने लगा और एक हाथ से मेरा स्तन दबाने लगा, दबाने नहीं पूरा मसलने लगा।
“नहीं राजू!” मैं रोते हुए बोली।
“का नही… अरे मेमसाब… ईह ससुरा तो तोहार गुलाम होना चाहत है, और तुम हो कि…” वह आगे कुछ बोले उसके पहले मैं वहाँ से उठी।
“राजू, अब तुम जाओ यहाँ से!” मैंने उसे बाजू से धकेला।
मेरा शरीर तो कह रहा था कि राजू की बात मान ले… लेकिन दिमाग उचित अनुचित के फेर में पड़ा हुआ था.
पर डर भी लग रहा था कि सीमा की तरह मेरे बारे में अगर नितिन को पता चल गया तो वह मुझे जान से मार देगा।
जिस तरह सीमा कंफ्यूज थी पहली बार करते वक्त… उसी तरह मैं भी कंफ्यूज थी, सोच सोच कर मेरा दिमाग चकराने लगा था।
मैं बाथरूम गयी और शावर लेने लगी, ऊपर से बरस रही ठंडे पानी की धारों में मेरा मन भी शांत हो जाये यही एक इच्छा थी पर वो शांत नहीं हो रहा था। लगभग दस मिनट मैं पूरे कपड़ों में शावर के नीचे खड़ी रही।
कुछ समय बाद शांति मिली तो मैंने अपने कपड़े उतार दिए, चुत में उंगली डाल कर देखा तो वह भी पानी पानी हो गयी थी। फिर मैं ठीक से नहाई, तौलिये से अपना नंगा बदन को सुखाने के बाद आईने में खुद की देखने लगी।
“कितना अन्याय कर रही थी मैं अपने बदन पर! मुझे नितिन से उसके बारे में बात करनी होगी, उसे मेरी जरूरतों के बारे में बताना होगा!” फिर से उन्ही विचारों ने मेरे दिमाग पर कब्जा कर दिया।
“मेमसाब, खाना लगा दूँ क्या?” रूम के बाहर से राजू की आवाज आई, वैसे ही मैं होश में आई।
“हा लगा दो.” मैं बोली तो वह नीचे चला गया, मैंने नाईटी पहन ली। अंदर कुछ पहनने की इच्छा नहीं हो रही थी, वैसे भी बहुत गर्मी थी।
मैं नीचे जाकर खाना खाने लगी, राजू मेरे सामने नहीं आ रहा था, शायद वह डर गया था कि दोपहर की बात मुझे पता न चल जाये।
मैंने खाना खत्म किया और ऊपर जाकर बैड पर सो गई, दिमाग में फिर भी वही ख्याल बार बार आ रहे थे… पर क्या करूँ… कुछ समझ में नहीं आ रहा था।
सोचते सोचते कब मेरी आँख लग गयी मुझे पता नहीं चला।
अचानक दरवाजे पे दस्तक हुई, मैं उठ गई। नींद अभी पूरी नहीं हुई थी, मैं अंगड़ाई लेते हुए बेड से उतरी और दरवाजा खोला।
बाहर का नजारा देखा तो मैं शॉक हो गयी, बाहर राजू खड़ा था, एकदम नंगा।
राजू का पूरा शरीर उसका विशाल लंड मेरी तरफ देख रहा था। उसका कसरती बदन बिल्कुल सीमा ने बोला था वैसे ही था, उसका लंड भी वैसा ही था काला मूसल, उसके ऊपर गुलाबी सुपारी।
गुलाबी… पर सीमा ने तो चॉकलेटी बोली थी, मुझे कुछ भी समझ में नहीं आ रहा था। मैं शॉक में वैसी ही खड़ी रही।
उसने मुझे एक धक्का दिया, उस धक्के से मैं पीछे सरक गई। वह एक हाथ से उसका विशाल लंड पर मुठ मारते हुए और राक्षसी स्माइल देते हुए मुझे पीछे धकेलने लगा। मैं कुछ भी प्रतिकार नहीं कर सकती थी, उसकी राक्षसी मुस्कान देखकर पीछे पीछे हट रही थी।
अचानक मेरे पैर बेड के पास आ कर रुक गए और उसके एक और धक्के से मैं बेड पर बैठ गई।
उसका लंड बिल्कुल मेरे सामने था, उस काले विशाल लंड पर वह मुठ मार रहा रहा। राक्षसी हँसी हँसते हुए मुझे वह सब दिखा रहा था।
मैं होश में आई और उसको पूछा- यह क्या कर रहे हो राजू?
“कुछ नाही मेमसाब, ईह है ना, बहुत जालिम है, एकदम से गरम हुई गवा, अभी तनिक ठंडा करना है.” मेरी तरफ देख कर हंसते हुए बोला।
“तुम जाओ यहाँ से!” मैं बोली।
“नहीं मेमसाब तनिक इसे ठंडा तो कराई दो!” वह अपना लंड आगे लाते हुए बोला।
“नहीं राजू, तुम जाओ यहाँ से!” मैंने उसे दूर धकेलते हुए बोला।
“आईसा का करत हो मेमसाब… जरा सी ठंडक तो मांगत है.” कहकर वह फिर से मेरे सामने खड़ा हो गया। अपना लंड मेरे होठों पर घिसते हुए वह फिर से हँसने लगा।
“आहहह…” मैं चिल्लाई, जलती भट्टी में से निकले लोहे की रॉड की तरह वह गरम था। मेरे होंठ अब जलने लगे थे।
“जल गए मेरे होंठ!” मैं बोली।
“हाँ तभी तो बोले हैं, ईह कमीना बोहुत गरम हुई गवा है, तनिक ठंडा कराई दो!” कहकर वह फिर से अपना लंड मेरे होंठों पर घिसने लगा।
“नहीं राजू तुम जाओ यहाँ से” मैंने उसके लंड को अपने हाथों से दूर धकेलते हुए बोला।
“अरे जानेमन, तनिक ठंडक तो देई दो, तोहार जवानी बड़ी मस्त मस्त है…” ऐसा कह के वह फिर से अपना लंड मेरे होठों पे घुमाने लगा और एक हाथ से मेरा स्तन दबाने लगा, दबाने नहीं पूरा मसलने लगा।
“नहीं राजू!” मैं रोते हुए बोली।
“का नही… अरे मेमसाब… ईह ससुरा तो तोहार गुलाम होना चाहत है, और तुम हो कि…” वह आगे कुछ बोले उसके पहले मैं वहाँ से उठी।
“राजू, अब तुम जाओ यहाँ से!” मैंने उसे बाजू से धकेला।
मेरा शरीर तो कह रहा था कि राजू की बात मान ले… लेकिन दिमाग उचित अनुचित के फेर में पड़ा हुआ था.