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नौकरी हो तो ऐसी

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वकील बाबू- “हमे बहुत पसंद है लस्सी ज़रा हमे भी पिला दो बड़ी भाभिजी… वैसे कैसे बनी है लस्सी गाढ़ी है या पतली है…”

रूपवती – “लस्सी के आप तो खूब दीवाने है ये कौन नही जानता… वैसे आपकी लस्सी से ज़्यादा गाढ़ी लस्सी कोई नही बना सकता ”

वकील बाबू- “हम कहाँ भाभिजी…..यहा हम से भी बड़े बड़े दीवाने है जो लस्सी के प्यासे रहे है….”

अब सब हसने लगे मुझे कुछ समझ रहा था कुछ नही….

इस बातचीत के कारण मैं अभी कई लोगोको जानने लगा था …ताइजी जो सेठ जी की एकलौती बेटी थी वो कोई अप्सरा से कम नही थी… उसकी एक एक चुचि 2-2 किलो के तरबूज के बराबर थी और उनका वो पारदर्शक सारी मेसे दिखने वाला सुंदर पेट …. मेरा लॉडा खाना खाते हुए ही बड़ा हो रहा था… ताइजी का ख़ासकर मेरी तरफ ज़्यादा ध्यान था और ये बात छोटी बहू ने भाँप ली थी… मैं जब भी उपर देखता वो मुझे हल्केसे आँख मारती और मैं नीचे देखने लगता…

तभी मैने देखा वकील बाबू की मझली लड़की रसोईघर के अंदर आ गयी… वो नलिनी थी, वही नलिनी जिसे खुद के बापने वकिलबाबू ने चलती गाड़ी मे राव साब ने चोदा था और बाद मे पंडितजी ने… उसका वो गदराया बदन और चुतताड एक लय मे हिल रहे थे पर मैने देखा कि उसे चलने मे थोड़ी तकलीफ़ हो रही थी वो धीरे धीरे पाव उठा कर चल रही थी… ये सब कल की चुदाई का परिणाम था… बेचारी को कल 3 भारी भरकम काले घोड़ो की भूख शांत करनी पड़ी थी…. नलिनी धीरसे नीचे बैठ गयी नीचे बैठते समय उसके मुँह पे पीड़ा जनक भाव दिख रहे थे….

क्रमशः...................
 
नौकरी हो तो ऐसी--15

गतान्क से आगे…………………………………….

हम लोगो का भोजन होने के बाद घर की सभी महिलाओ ने भोजन कर लिया और सब लोग अपने अपने कमरो की तरफ चल पड़े……

मैं अपने कमरे के तरफ जानेवाला था कि मुझे कॉंट्रॅक्टर बाबू की छोटी लड़की मालंबंती ने पूछा “आप कौन है” मैं उसके सामने गया और बोला “मैं इस घर मे काम करता हू..”

मालंबंती की चुचिया छोटे छोटे सेब की तरह थी और उस टांग कमीज़ के अंदर से बाहर आने के लिए तरस रही थी..उसने कमीज़ के अंदर कोई अन्तवस्त्र नही पहना होने के कारण उसके छोटे छोटे अंगूर के जैसे चूचुक(निपल्स) का आकार मेरे लंड को फिरसे खड़ा कर रहा था

मालंबंती ने पूछा “कैसा काम…”

मैं – “जो भी तुम कहो वो काम”

मालंबंती – आप सब काम करते हो क्या आपको कहानी सुनाना आता है”

मैं अर्श्चर्य मे पड़ गया इस उमर मे भला ये कहानी सुनने की बात क्यू कर रही है तभी वहाँ पे नलिनी और नसरीन (वकील बाबू की सबसे छोटी लड़की) चहल पहल करते हुए आ गयी. नसरीन एक दम मालंबंती के जैसी दिखती थी.. उसने भी तंग कमीज़ पहनी थी.. उस वजह से उसके चूचुक(निपल्स) भी नमस्ते कह रहे थे और हमारे लंड महाराज भड़क रहे थे… मेरी पॅंट को अगर कोई ठीक से देखता तो जान जाता कि मैं किस हाल से गुजर रहा था….

नसरीन बोली “अरे वाह आप हमे कहानी सूनाओगे.. आपको आती है कहानी..”

मैं उसकी पीठ थपथपाते हुए बोला- “हां आती है और मैं तुम्हे सबको कहानी सुनाउन्गा”… ज़रूर सुनाउन्गा और मैने उसके गाल पे हाथ पे रख के ईक चिमती काट ली…

नलिनी बोली- “चलो ना हमारे कमरे मे हमे कहानी सूनाओ ना…”

उतने मे उधर ताइजी अपनी सारी के पेड्र को ठीक करते हुए और अपने सुंदर पेट पर धकते हुए आई और बोली “लड़कियो तुम सब सो जाओ कल तुम्हे सुनाएँगे ये कहानी…”

सब लड़किया एक सूरमे बोली “नही अभी सुननी है कहानी ..”

ताइजी बोली “नही आज नही कल…सोने जाओ तुम लोग अभी ”

लड़किया ना चाहते हुए भी अपने अपने कमरे मे चली गयी… मैं उनके मस्त मस्त चूतड़ देखते रह गया… ये मेरे खड़े लंड पे वार था…

ताइजी मुझे देखकर बोली “तुम किधर सोवोगे”

मैं – वही जहाँ मैं दोपेहर मे सोया था

ताइजी – अरे नही वहाँ तुम नही सो सकते… उस कमरे मे मैने आज समान रखवाया है

मैं – तो फिर........कहाँ........

ताइजी – तो एक काम करो मेरे कमरे मे दो पलंग है.. तुम एक पे सो जाना

मेरे लंड ने ये सुनके फिरसे लार टपकानी शुरू करदी, फिर भी मैं बोला

मैं – पर….

ताइजी – अरे शरमाओ नही… आ जाओ
 


अब आदेश तो आदेश…वैसे भी अकेले सोने से अच्छा किसिके साथ सोना चाहिए चुदाई के ज़्यादा आसार रहते है... मैं ताइजी के पीछे उनके मुलायम सारी के अंदर के चूतादो का नाप लेते लेते उनके साथ पहला माला चढ़ने लगा, जैसे ही वो पैर उपर रखती चूतड़ मस्त सुर ताल ले मे हिलता और मज़ा आ जाता….

मैं – आपका कमरा कौन्से माले पे है

ताइजी – तीसरे माले पे

मैं – इतना उपर क्यू

ताइजी – मुझे पसंद है…. उपर शान्ती होती है और उपर से सब गाव भी दिखता है ठंडी हवा आती है इसलिए

हम एक बड़े कमरे मे पहुच गये…कमरे मे दो दीवान-पलंग, एक बड़ी मेज, 2-3 कुर्सियाँ, सजने सवरने के लिए एक बड़ा आयना बहुत कुछ था…. ताइजी ने दूसरे पलंग पर पड़ा हुआ बिस्तर थोड़ा ठीक ठाक किया मैं वही खड़ा उनके दूध को और चूचुक(निपल) की मस्ती को देख रहा था… वो चादर डाल रही थी… इससे उनकी चोलिसे उनके मुलायम दूध बाहर आनेकी नाकाम कोशिश कर रहे थे… वो पीछे पीछे आ रही थी… अचानक उनकी बड़ी गांद मेरे जाँघोसे टकरा गयी…

ताइजी – अरे मैने देखा ही नही… माफ़ करदेना

मैं – अरे माफी क्यू.. आप हम से बड़े हो ऐसा मत बोलिए

ताइजी – (हस के)ठीक है… (और बिस्तर ठीक करने लगी)

वाह क्या चेहरा था क्या रुतबा था उस अदा मे, क्या कम्सीन अदा थी … सेठानी की पूरी जवानी और गरमी ताइजी मे उतरी थी… जब वो रास्ते से चलती होगी तो सबके लंड लार ज़रूर टपकाते होंगे…

ताइजी – ये हो गया तुम्हारा बिस्तर तैय्यार अभी तुम सो सकते हो आराम से..( उन्होने हॅस्कर कहा)

मैने हां भरी और पलंग पर गिर गया…

ताइजी बोली – थोड़ी ही देर मे रमिता, रजिता के पिताजी भी आ जाएँगे

मैं – रमिता, रजिता????

ताइजी – ये मेरी दो प्यारी और नटखट बेटियाँ है…जल्द ही मिलवाउंगी मैं तुम्हे उनसे… मैं नीचे जाके आती हू तुम सोजाओ और कुछ लगे तो चंपा को आवाज़ देना

ताइजी नीचे चली गयी… मेरा मान आज सेठानी और छोटी बहुको बहुत याद कर रहा था और याद कर रहा था वो हर एक पल जो मैने उनकी चुदाई करते हुए ट्रेन मे बिताए थे… पर यहा मुझे जागरूक रहना था.. सब परिस्तिथि का अंदाज़ा लेने के बाद ही मैं अपना असली रंग दिखानेवाला था क्यू कि किसिको पता नही चलना चाहिए था कि मैं क्या चीज़ हू नहितो मेरी पूरी आमदनी, नौकरी और पता नही क्या क्या जाना संभव था…

मैने आँख बंद की पर लंड महाराजा चादर को अपनी करतूतो से उपर उठा रहे थे… मैने उपर हाथ रखा पर इससे वहाँ पहाड़ बन गया… मैं एक बाजू पे सोने की कोशिश करने लगा पर वैसे मुझे जल्दी नींद नही आती थी….

लगभग आधा पौना घंटे के बाद कमरे मे किसीकि आहट हुई… दरवाजा बंद हुआ मैं जाग रहा पर आँखे बंद थी… मैने हल्केसे आँखे मिचमिची करके देखा कोई आदमी था… वो मेरे दीवान के पास खड़ा रहा.. काफ़ी अंधेरा था… वो 2-3 मिनट खड़ा रहा और फिर दरवाजा बंद करके मेरे पलंग पे बैठ गया.. मेरे मुँह की अपोजिट दिशा मे…

अब हल्केसे उसने मेरी गांद पे हाथ रखा और उसे सहलाने लगा… मैं अंदर हॅकबॅक्का रह गया… मुझे इस तरह कभी किसी पुरुष ने स्पर्श नही किया था… पहले तो मुझे बहुत गुस्सा आया पर थोड़ा अच्छा भी लगने लगा… वो गांद को सहलाते सहलाते मेरी जाँघो तक पहुच गया और उन्हे सहलाने लगा.. मेरे मन मे एक गुदगुदी होने लगी… मुझे पता नही पर मज़ा आ रहा था….

तभी उसने मेरा एक हाथ पकड़ा मैने भी पता नही क्यू… बेझिझक अपना हाथ ढीला छोड़ दिया.. और अपनी चड्डी मे घुसा दिया और मेरे हाथो को अचानक से कुछ गरम लगा.. वो उसका लंड था.. वो मेरा हाथ उसके लंड पे रखके उपर से अपना हाथ रख के हिलाने लगा… उसका लंड बड़ा ही छोटा लग रहा था पर गरम बहुत था… मेरा लंड पूरा तन गया था पर इसका बिल्कुल ही छोटा सा क्यू था… उसका लंड गरम तो लग रहा था पर अभी भी सोया हुआ था और बहुत ही छोटा, बस करीब 2 इंच तक का लग रहा था…

 


वो दीवान से उठा और फिरसे दरवाजे की तरफ जाके एक बड़ी कील को दरवाजे मे घुसा के अच्छे से बंद कर लिया…. वो फिर मेरे पास आके दीवान पे बैठा और चादर को मेरे मुँह की तरफ धकेला… मुँह पे पूरी चादर थी मेरा मुँह पूरा ढका गया.. मैं कुछ समझ नही पा रहा था… उसने एकदम फटाक से मेरी पॅंट को नीचे खिचा…. फिर मेरे निक्कर को भी नीचे खीच के मेरे काले पहाड़ को हाथ मे ले लिया और गपक कर मुँह मे भर लिया… मैं दंग रह गया पर मज़ा आ गया…वो बहुत ही कसा हुआ खिलाड़ी मालूम हो रहा था उसने पूरा लंड एक ही बार मे मुँह मे ले लिया और अपने मुँह मे अंदर तक घुसा दिया.. मेरा पूरा लंड मुँह मे जाने की वजह से उस की साँसे फूल गयी और कुछ पल बाद उसने आधे अधिक उसे बाहर निकाल दिया…. और अपनी लार उस पे टपका के चाटने लगा मैं सातवे आसमान पे था मुझे नही पता था कि आदमी भी औरत का मज़ा दे सकता है… वो मेरे सुपरे की चमड़ी अपने मुँह के अंदर बड़ी आसानी से उपर नीचे करके अपनी जीब से घिस रहा था…. अब वो मेरी गांद के नीचे हाथ डाल के मेरे निचले शरीर को उपर उठाते हुए लंड को मुँह मे अंदर ही अंदर भर रहा था… मेरा बालो का जंगल उसकी नाक मे दस्तक दे रहा था… उसकी साँसे फूली जा रही थी पर रुक ने का कुछ भी नाम नही था… घ्घ्घ्घ्ग्गाअताक्क्क…. गुपप्प्प्प….गाअत्ट….गगगगगगगग…..गुपप्प्प्प्प्प्प्प्प गुपप्प्प गुपप्प्प्प्प्प्प्ुउुुऊउक्

ककककककक…गगगगगगज्गगगग्गगुउुुुुउउप्प आवाज़े आ रही थी …मैं अपने आप को पूरी तरह नियंत्रण मे रखे हुए था

इतने मे उसने मेरे काले घोड़े को मुँह से निकाला और मेरी गोटियो को हाथ मे पकड़ के उनको तान के उनपर थुका.. और अपनी जीब उन पर फेरने लगा.. जीब फेरते फेरते उसने मेरी दोनो गोटियो को मुँह मे भर लिया और उनके साथ मुँह मे मस्ती करने लगा… जैसे वो गोटियो के साथ पकड़ा पकड़ी का खेल रहा हो मेरी गोटियो को बहुत ही मस्त मस्साज़ मिल रहा था….. गोतिया बाहर निकाल के वो मेरे मुण्ड पे थूकने लगा उसकी वो गाढ़ी थूक को वो फिर चाट के पूरे लंड पे पसार देता…. मेरा अभी रुकना नामुमकिन के बराबर था.. इतने मे उसने अपनी नाक मेरी दो गोटी के बीच की चमड़ी पे रगड़ना शुरू किया और एक हाथ मेरे सूपदे की चमड़ी को हिलाने लगा.... उसका वो कोमल चेहरा मेरे लंड महाराज से टकराने लगा … मेरा नियंत्रण अभी छूटने वाला था…

तभी उसने फिरसे मेरा लंड मुँह मे भर लिया और चूसने लगा… मैं चरम सीमा लाँघ चुका था… मैने अपनी मलाई उसके मुँह के अंदर ही छोड़ना चालू किया…. वैसे ही उसने मेरे लंड से निकलती पूरी मलाई को अपने जीब पे जमाए रखा और धीरे से निगलने लगा…..वो निगलता गया और मैं छोड़ता गया… मा कसम क्या मज़ा आया था…. उसने मेरे लंड को पूरी तरह चाट लिया….

तभी किसीकि दूर से आहट सुनाई दी उसने मेरी पैंट और चड्डी को उपर उठा दिया और मेरी चादर ठीक कर दी. और फाटक से जाके दरवाजे से कील निकाल ली और जाके बाजुवाले दीवान पे सो गया…

मैं अभी संभल गया था और कुछ समझ पा रहा था… इसका मतलब ये था कि रमिता और रजिता का बाप था ये… ताइजी का पति परमेश्वर.. पर ये तो लंड की तलाश मे था… मेरे सर मे बहुत सारे प्रश्नो का कोलाहल मच गया….

उतने मे दरवाजा खुला और ताइजी अंदर आ गयी. उन्होने मेज पे रखी मोमबत्ती जला दी…

मोमबत्ती के प्रकाश मे ताइजी का वो चिकना चेहरा, टमाटर जैसे लाल लाल गाल और चुचिया अति उभरकर दिखने लगी… उन्होने सफेद ब्लाउस को ठीक किया…

मैने पीछेसे देखा तो मुझे ब्लाउस के अंदर का अंतरवस्त्र(ब्रा) कीपत्तिया नही दिखी मतलब ताइजी ब्रा निकाल के आई थी… लाल सारी और सफेद ब्लाउस मे वो काम की देवी दिख रही थी…. उनके माथे का सिंदूर तो और भी चमक रहा था….

ताइजी ने बाल खोल दिए…उनके वो लंबे बाल ठीक गांद के उभार तक जाके गांद से चिपक गये .. ताइजी अपने पति के बाजू दीवान पे लेट गयी….. ताइजी का पति खिड़की के बाजू मे था उनके बाजू ताइजी और दूसरे दीवान पे मैं था… उन्होने लेटते ही अपनी सारी का पल्लू उन्होने अपनी चुचियो से हटा दिया.. और मैं देखते रह गया….

क्या दूध थे… एक से एक …तरबूज की तरह… पूरा दिन उनमे मुँह घुसाए रखो ऐसे….एक दम कड़क और मोटे….सीधी पीठ पे सोने से वो पहाड़ के जैसे उँचे उँचे ….चुचियोसे चूचुक आसमान को पुकार रहे थे ..

चूचुक(निपल्स) बड़े बड़े गुलाबी गुलाबी अंगूरो की तरह दिखने लगे…. ताइजी अभी मेरे बाजू मुँह कर के सोई… वैसे उनके वो दोनो चूचुक मेरे तरफ निसाना करके मुझे निमंत्रित करने लगे…. इससे मेरे लंड महाराज फिरसे उठने की कोशिश करने लगे और इससे थोड़ा मेरे लंड को दर्द होने लगा.

क्रमशः...................

 
नौकरी हो तो ऐसी--16

गतान्क से आगे…………………………………….

मुझे रसोई घर की बात याद आई.. कंटॅकटर बाबू की आमो वाली बात…. कॉंट्रॅक्टर बाबू अपनी बहेन को कहते कहते कह गये कि दो दिन पहले ही आम खाए थे… क्या इसका मतलब कॉंट्रॅक्टर बाबू जो ताइजी के सगे भाई थे वो ताइजी की बुर चोदते थे…. इन सबका मुझे पता लगाना था… उन्होने रसोईघर मे सबके सामने जब यह बात कही थी तब वकील बाबू और रावसाब भी मुस्कुरा रहे थे इसका मतलब क्या ये तीनो भाई….???????????????

तभी ताइजी के पति दीवान से उठे और जाने लगे………..

ताइजी – इतनी रात गये कहाँ जा रहे हो…………….

ताइजी के पति – मैं ज़रा नीचे जाके सोने की कोशिश करता हू…………

ताइजी – क्यू क्या हुआ यहाँ…………….

ताइजी के पति – नही यहाँ मुझे नींद नही आ रही………..

ताइजी – अरे अच्छे ख़ासे तो सोए थे यहाँ……………..

ताइजी के पति – नही आँख खुल गयी फिरसे…. बहुत देर बाद लगी थी… मैं नीचे ही सोता हू

ताइजी – ठीक है….

मेरे मन मे आनंद की धाराए बहने लगी थी… ताइजी और मैं अकेले कमरे मे, इससे मुझे बुर चुदाई की आशा बढ़ती लग रही थी…….

10-15 मिनट तक जब कुछ हलचल नही दिखी तो मेरे लंड जी शांत हो गये और मुझे नींद भी आने लगी थी और मैं सो गया….

अचानक आधी रात को मुझे कुछ गिरने की आवाज़ सुनाई दी… मैने चादर मुँहसे हल्केसे हटा के देखा तो कमरे की छोटी बल्ब जल रही थी … मैने देखा कोई शीशी का ढक्कन उठा रहा था…. शरीर से देखा जाए तो वो कॉंट्रॅक्टर बाबू ही लग रहे थे… और उनके हाथ एक शीशी थी…..

शीशी पे कुछ नाम नही था पर शीशी से निकल रही गंध से ये ज़रूर पता चल रहा था कि गाव की हाथ भट्टी पे बनी कोई मस्त और महँगी दारू है….

कॉंट्रॅक्टर बाबू ने शीशी का ढक्कन मेज पे रख दिया… एक ग्लास उठाई और उसमे आधे से ज़्यादा दारू डाल दी और थोड़ा सा पानी डाला

वो ग्लास लेके वो ताइजी के दीवान के पास आए और उन्हे जगाने लगे…ताइजी आँखो को मसलते हुए उठी और बैठ गयी

ताइजी – ये क्या है….

कॉंट्रॅक्टर बाबू – ये वोही है जो तुम्हे बहुत पसंद है

ताइजी – अरे वाह…असलीवाली ताजी ताजी दारू…. मज़ा आएगा …

कॉंट्रॅक्टर बाबू – हाँ मज़ा तो ज़रूर आएगा

ताइजी – हाँ पर मुझे एक ही ग्लास पीना है… मैं जब ज़्याता लेती हू तो मुझे तो सरदर्द होता है बहुत… मुझे दूसरे दिन पूरे अन्ग अन्ग मे दर्द होता है… चलने और उठने मे तकलीफ़ होती है…...तुम मुझे एक से ज़्यादा मत पीने देना

कॉंट्रॅक्टर बाबू – ठीक है.. ज़रूर ज़रूर

ताइजी – नही तो मेरे होश नही रहते और फिर तुम मेरे आम चुसते हो…

कॉंट्रॅक्टर बाबू – हम बस आम चुसते है ताइजी… और कुछ नही करते

ताइजी – याद ही नही रहता एक बार जो मैं पी लेती हू
 


अब मेरे दिमाग़ मे बात जा रही थी के आमो के साथ ये भाई ताइजी का क्या क्या चुसते और चोदते थे…

उधर ताइजी के मुँह को कॉंट्रॅक्टर बाबू ने ग्लास लगाया… ताइजी ने 2-3 घूंठ पी लिए… कॉंट्रॅक्टर बाबू ताई जी से सटिककर बैठे थे. उनके हाथ ताइजी की चुचीयोको कोहनी से घिस रहे थे…5-10 मिनट बाद….. ताइजी ने और एक बार ग्लास को मुँह लगाया और 2-3 घूंठ पी गयी… उनपे उस गाव की दारू का नशा चढ़ते हुए दिख रहा था…

अब ताइजी ने फिरसे ग्लास को मुँह लगाया और गतगत सब दारू पी गयी… ग्लास खाली हो गया….

ताइजी – कितनी मस्त है ना ये दारू

कॉंट्रॅक्टर बाबू – हाँ बहुत मस्त है… और चाहिए तुम्हे

ताइजी – हाँ चाहिए पर….

ताइजी की आँखे झपक रही थी दारू का असर उनके चेहरे पे सॉफ दिख रहा था वो अपना आधा अधिक होश खोनेके कगार पे थी…..दारू पीते हुए ताइजी के होठ और गुलाबी और मदभरे लग रहे थे अभी कॉंट्रॅक्टर बाबू ने ताइजी की चुचीयोको थोड़ा थोड़ा करके मसलना शुरू किया था…

कॉंट्रॅक्टर बाबू – पर वर कुछ नही ताइजी मैं दो शीशी लेके आया हू…

ताइजी – अरे वाआह… तो लाओ….

कॉंट्रॅक्टर बाबू की छाती पे गिरती हुई वो बोली, कॉंट्रॅक्टर बाबुने ताइजी को बिस्तर पे ठीक से बिठाया और ग्लास लेके मेज की तरफ गये…. ताइजी अभी काम की देवी लग रही थी…. वो मचलता बदन और हसीन और गरम हो गया था…

कॉंट्रॅक्टर बाबुने ग्लास भरा और इस बार उसमे बिल्कुल हल्कसा पानी मिलाया…. मैं दंग रह गया… खड़े खड़े ही ताइजी के मुँह को ग्लास लगा दिया, और एक ही झटके मे उन्होने पूरा पिला दिया…. ग्लास से दारू गिरती हुई ताइजी के ब्लाउस को गीला कर गयी….. उससे उनकी चुचिया गीली हुई और उस हल्केसे प्रकाश मे भी एक दम स्पष्ट दिखने लगी…..

ताइजी अभी लगभग पूरा होश गवाँ बैठी

ताइजी – और दो… और दो मुझे…. और

कॉंट्रॅक्टर बाबू – हाँ हाँ ज़रूर…. ज़रूर

कॉंट्रॅक्टर बाबुने और एक ग्लास भरा और इस बार शीशी मे सब बची कूची दारू ग्लास मे डाल दी… पानी डालनेकी जगह ही नही थी ….ग्लास से उन्होने ताइजी के मुँह को लगाया… घ्घ्घ्गतक गतक गगग्गगातक करके ताइजी फिरसे एक ग्लास पी गयी

अब ताइजी को बिल्कुल भी होश नही था… इधर कॉंट्रॅक्टर बाबुने ग्लास को मेज पर रखा और दीवान पे बिस्तर पे मुन्दि डालके बैठ गये… जैसे कि ताइजी का शरीर मस्त फूला फला था वैसे ही कॉंट्रॅक्टर बाबू का शरीर भी था उन्होने ताइजी को अपनी तरफ खिचा और उठ कर छोटी बच्ची की तरह अपनी गोद मे बिठा लिया बस गोद मे बिठाते वक़्त ताइजी का मुँह अपने मुँह के तरफ कर लिया.

भाई की गोद मे बहेन…मेरा लंड तन के खड़ा हो गया…. मेरी हालत पतली होने लगी….

उधर कॉंट्रॅक्टर बाबू ने ताइजी के ब्लाउस के हुक निकाल दिए… ताइजी हल्की आवाज़ मे कुछ तो बड़बड़ा रही थी… कॉंट्रॅक्टर बाबुने ब्लाउस निकाल के फेंक दिया वो मेरे मुँह पे आके गिरा…. उसमे से दारू की गन्ध आ रही थी… उससे मैं रोमचित हो उठा

कॉंट्रॅक्टर बाबुने ताइजी की छाती मे चुचियो के बीच मे अपना मुँह दबाया और दोनो हाथो से चुचीयोको अपने मुँह पे दबाने लगे… ताइजी के मुँह से आअहह….अया… की आवाज़े आ रही थी…. उन्होने एक चुचिको मुँह मे पकड़ा और उसकी चूचुक(निपल) को कस के काटने लगे वैसेही ताइजी कराह उठी

पर कॉंट्रॅक्टर बाबू चुचि को काटते रहे…ताइजी कराह रही थी….. अब कॉंट्रॅक्टर बाबुने दोनो चुचियो को एक साथ किया और दोनोकी निपल्स को पकड़ के जोरोसे काटने लगे

ताइजी ज़ोर्से कराह उठी
 


कॉंट्रॅक्टर बाबू – चुप कर रंडी …. आवाज़ मत निकाल

ताइजी कुछ बोल नही पा रही थी…

कॉंट्रॅक्टर बाबू – मालूम है ना कौन है तू रंडी है तू …रंडी है रंडी…..

ये कह के उसने ताइजी को बिस्तर पर लिटा दिया और अपने कपड़े उतार दिए

कपड़े उतरते ही उसका वो बड़ा काला नाग दिखने लगा… ये मेरे नाग के जितना ही था

अब उन्होने ने ताइजी की सारी निकाल दी और उनका अंत्रावस्त्रा भी निकाल दिया….

अब ताइजी पूरी नंगी दीवान पे पड़ी … होश तो उनसे कोसो दूर जा चुका था

कॉंट्रॅक्टर बाबुने अपने नाग को पकड़ा और ताइजिको पलंग के ईक बाजू खिचा और झपाक करके अपने काले लंड को उसकी उस चिकनी बुर मे घुसा दिया

एक ही झटके मे पूरा लंड ताइजी की बुर के अंदर घुस गया… उसके मुँह से आअहह…. आअहह… की आवाज़ निकलने लगी … मिशनरी पोज़िशन मे कॉंट्रॅक्टर बाबू चोद रहे थे

उसकी गति अभी बढ़ गयी ..कमर ज़ोर ज़ोर से हिलने लगी ….. उन्होने दोनो आमोको अपने हाथो मे पकड़ लिया और ताइजी को पलंग से और बाहर खिचा और खड़े होके…. फिरसे उसकी बुर मे घुसाया.. और गति बढ़ा दी… गति बढ़ने से पचक पाचक आवाज़ आने लगी और पूरे कमरे मे घूमने लगी

ताइजी के मुँह से अब बड़ी ज़ोर्से आवाज़े निकलने लगी..उसने आमो को छोड़ के ताइजी के मुँह पे हाथ रखा और लंड को जोरोसे अंदर बाहर करने लगा…. उसका वो बड़ा लंड पूरा अंदर बाहर जा रहा था…. ताइजी के चूतर और दीवान ज़ोर के धक्को से बहुत ज़यादा हिल रहे थे ….

मुझे बस कॉंट्रॅक्टर बाबुकी कमर और नंगा च्यूट्र दिखाई दे रहा था….

उतने मे कॉंट्रॅक्टर बाबू चिल्लाया – वाह मेरी रंडी मेरी छिंनाल क्या चीज़ है तू वाह… और जोरोके धक्के मारने लगा

और उसके अगले पल वो ताइजी के उपर गिर पड़ा… उसने पूरा रस अंदर छोड़ दिया था और ताइजी की बुर पूरी खुली और सफेद सफेद रस से भर गयी… सफेद सफेद रस बाहर तक आ गया….

उधर कॉंट्रॅक्टर बाबुने अपने कपड़े पहने. ताइजी को 2-4 गालिया दी और उसी हालत मे छोड़ के कमरे से निकल गये

मेरा लंड पूरा तंबू बन गया था और इतना तन गया था कि क्या बोलू….. वैसे मेरे हाथ मे भी मौका था मैं भी इस बहती गंगा मे हाथ धो सकता था पर मैने परिस्तिथि का जायज़ा लेना चाहा… और वैसे ही पड़ा रहा….. ताइजी थोड़ी हिली और उसने अपने पैर पूरे खुले कर दिए इससे उनकी बुर और खुल गयी और वीर्य रस की गन्ध पूरे कमरे मे घूमने लगी…..

तभी दरवाजे पे आहट हुई मुझे पता था ज़रूर कोई ना कोई होगा…. जैसे ही वो अंदर आया मैने भाप लिया ये कोई दूसरा तीसरा कोई नही वकील बाबू है

वकील बाबू अंदर आके सीधे कपड़े उतारने लगे, कपड़े उतार के वो अपने लंड को हाथ मे लेके सहला के बड़ा करने लगे, दो मिनट मे उन्होने अपने नाग को बड़ा किया और सीधे ताइजी के आमो को चूसने लगे… दोनो आमो को हाथ मे पकड़ के ज़ोर्से रगड़ते थे, और मुँह मे भर के काट लेते, वकील बाबू की आँखे चमक रही थी उन्हे बड़ा मज़ा आ रहा था.....

ताइजी दारू की नशे मे कुछ तो बड़बड़ रही थी, उसपे वकील बाबू ने उसे रंडी…… कही की चुप रह साली कह के गाली दी. और अपनी दो उंगलिया ताइजी की बुर मे घुसा के हिलाने लगे, दोनो उंगलिया वीर्य से भर गयी जो कॉंट्रॅक्टर बाबू ने अपनी बहेन की चूत मे छोड़ा था, और आधा वीर्य बुर के आजूबाजू फैला हुआ था… वकील बाबू ने उंगलियाँ निकाल के ताइजी के मुँह मे घुसाई और “चाट साली चाट इसे रंडी….” कहके उसके मुँह मे उंगलिया घुसाने लगे…. सफेद रस से लथपथ उंगलिया ताइजी के कोमल होंठो पे नाच रही थी… ताइजी की कमर तक के बाल दीवान से नीचे तक आ चुके थे….

क्रमशः...................

 
नौकरी हो तो ऐसी--17

गतान्क से आगे…………………………………….

वकील बाबू ने उंगलियो का नृत्य बंद करके ताइजी की घोड़ी बनाई, दो हाथ उसे पकड़ा, उल्टा किया सर दीवान के सामने वाले बाजू पे रखा और अपने सूपदे की चमड़ी को पीछे करके उसपे थोड़ी सी थूक लगा डाली, सूपड़ा लाल काले रंग पर चमक रहा था …. वकील बाबुने ताइजी की गांद को दोनो हाथो से फैलाया… और निशाना लगा डाला…ताइजी के मुँह से चीख सी निकल गयी…वकिलबाबू प्रहार करते रहे अपनी कमर को आगे पीछे करते रहे …ताइजी चुदति रही ..कुछ तो बड़बड़ा रही थी …उन्हे शायद और दारू चाहिए थी ….. ताइजी की गांद एक दम मस्त हिल रही थी ….दीवान से कुई कुई की आवाज़ निकल रही थी …..लगभग 5 मिनट के बाद वकिलबाबू ढेर हो गये और पूरी वीर्य ताइजी की नदी मे छोड़ दिया ….ताइजी के उपर गिर पड़े…और बोले “तुझे चोदने के लिए क्या क्या नही करना पड़ता रंडी …. पर तुझे चोदने मे जो मज़ा है उसके सामने कुछ भी फीका है ….” उनका लंड बुर से बाहर निकल आया…बुर से वीर्य रस की गंगा बह रही थी … आधे से अधिक चादर दारू और वीर्य की वजह से गीला हो चुका था और ताइजी को पता भी नही था कि यहाँ पर क्या हो रहा है और कैसे उनका एक एक भाई उनकी ले रहा है ….

मेरी चादर मे पॅंट के अंदर पता नही कितनी बार तंबू बने और तंबू उखड़ गये….वकील बाबू दीवान से उठ खड़े हुए एक बॉटल मे थोड़ी सी दारू बाकी थी वो पी ली और कपड़े पेहेन्के चुपकेसे दारवाजा खोल के निकल गये…..

अभी जैसे कि कंट्रेटरबाबू और वकील बाबू अपना अपना काम करके चले गये थे, मुझे पूरी आशंका थी अभी और कोई नही रावसाब ही आएँगे…. पर बहुत टाइम होनेपर भी कोई नही आया…. उधर ताइजी थोडिसी नींद मे थी और तभी भी थोडिसी बड़बड़ा रही थी…. उसकी बुर पे हुए प्रहार से उन्हे मज़ा और सज़ा दोनो मिल रही थी… बुर पूरी तरह से सूजी थी …लाल लाल दिख रही थी …बुर के होठ तो ऐसे लग रहे थे जैसे खून छोड़ रहे है इतने लाल थे …उसके उपर वो मुलायम रेशमी बॉल एक दम आकर्षक और मस्त दिख रहे थे….. और उसमे उनके गोल मटोल बड़े बड़े लाल लाल निपल वाले दूध मेरी काम अग्नि को और जला रहे थे…..

बहुत वक़्त होने पर भी कोई नही आया.. मैं सोच रहा था कि अभी कोई तो आएगा पर बहुत वक़्त होनेपर कोई नही आया…. दरवाजा खुला ही था …. मैं सोच रहा था मैं भी हाथ सॉफ करलू…. वीर्य की वो खुशबू पूरे कमरे मे घूम रही थी और उससे मैं पूरा पागल हो गया था…. कब जाके ताइजी के उपर मैं चढ़ु ऐसे मुझे हो रहा था पर मैं यहा हू ये बात जो छुपी थी वो मैं छुपी ही रहने देना चाहता था इसलिए कुछ कदम उठाए बिना अपने लंड की नाराज़गी सहते हुए पड़ा ही रहा था….

लगभग एक घंटा हुआ पर कोई नही आया, अब मेरे मे हिम्मत आ गयी थी… पूरी सावधानी से मैं उठा और जाके दरवाजे को बंद कर दिया…. अपनी पॅंट उतार दी और अपने लंड थोड़ा सा सहलाया और जाके ताइजी के मम्मे पकड़ लिए… उनके वो चूतर और वो मम्मे मुझे कभी छोड़ने का मन ही नही कर रहा था… उनके मम्मे गोल मटोल और इतने रसभरे थे कि मैं उनको दांतो मे पकड़ के चूसने लगा, मम्मो के निपल्स पे दाँत के निशान गढ़े थे और निशान हल्के फुल्के नही बल्कि बहुत ही अंदर तक गये थे…. निपल्स पूरे उभर कर कठोर हो रखे थे. मैं एक एक करके चुसता गया वाह क्या आनंद था उन मम्मो को चूसने का…..

मैने अब वक़्त जाया नही किया औरअपने नाग को थोडिसी थूक लगाई और बुर के प्रवेष्द्वार पे रख के ताइजी की दोनो टाँगे जितना फैला सकता था उतनी फैला दी… प्रवेष्द्वार पहले से ही बहुत सारे वीर्य रस से चिकना हो रखा था… मुझे थूक भी लगाने की ज़रूरत नही थी…उलटा बुर से ही उलटी गंगा बह रही थी जिसमे अब मैने देर ना करते हुए अपने लंड को पेल दिया और एक ही झटके मे आधा लंड बुर मे घुसा दिया…. वाह वाहह…अजब ….मस्त ……लाजवाब….. दिलखुश…. मन खुश … क्या अनुभव था ऐसा लग रहा था कि लंड इस जनम मे इस बुर से फिर कभी नही निकालु…..मैं हल्के हल्के लंड को पेलने लगा और एक हाथ से बुर के रेशमी बालो को सहलाने लगा क्या अदभुत क्षण था वो….

मेरा लंड अंदर जाते ही धक्को से पच्चक पच्छाक आवाज़ होने लगी मैने अपनी गति बढ़ा दी और लंड को ताइजी के चूतरो को हाथ मे पकड़ के बुर की आखरी सीमा तक घुसने लगा पूरा लंड अंदर जाने से ताइजी की आवाज़ अब ज़रा ज़्यादा निकल रही थी… और उससे उसका हुस्न और मस्त और लुभावना लग रहा था ….. मैं पेलता रहा… कुछ देर बाद मैं ताइजी पे गिर पड़ा और अपनी पिचकारी ताइजी की बुर मे रंग दी….. मुझे अंदर बहुत दबाव महसूस हुआ क्यू कि उसमे पहलेसे ही बहुत सारा रस भरा था …मैने अपने लंड को बाहर निकाला और ताइजी के पेटको पोछ के थोड़ा साफ किया और उनके मुँह के पास जाके उनके होटोसे लगा के होंठो को और रस भरित कर दिया…. क्या मज़ा आया था ….जिंदगी मे सबसे ख़ास चुदाई मे एक ये चुदाई थी…..

अब ताइजी पूरी तरह रस से भर गयी थी उनके हर एक अंग पर वीर्य ही वीर्य लगा हुआ था बालो मे वीर्य की बूंदे गिरी थी और उन्हे इस बात का ज़रा भी ख़याल नही था….. अब मैं क्या करूँ इस बात का मुझे ठिकाना नही था … क्यू कि सबेरे जब वो उठेगी तो मुझसे कुछ ना कुछ तो ज़रूर पूछेगी….?

मैने उनकी ब्रा पहेना के, उपर से ब्लाउस चढ़ा दी….. ब्लाउस के उपर से एक बार उनके मम्मो को चूस लिया और थोड़ा आगे पीछे करके उनके पूरे अंगो को सारी ढक दिया…

और अब मैं आके अपने दीवान पे शांति से सो गया… मैं पूरी तरह खुश हो गया था ताइजी की बुर मे अपना पानी छोड़ के…जिसकी गंध अभी भी पूरे कमरे मे घूम रही थी…..ऐसे ही सोते सोते मैं कब सो गया पता ही नही चला

सबेरे जब मैं उठा तो लगभग 7 बज गये थे. मैं उठ कर नीचे जाके नहा धो लिया और सेठ जी के साथ काम पे चल दिया…

आज मुझे खुदसे काम करना था… सेठ जी ने मुझे एक बड़ी लिस्ट दे दी और बोले कि ये लोग है जिनके कुछ पैसे आने है तुम ड्राइवर को साथ लेके जाओ और इन सबसे पूछ के आओ के पैसे कब देनेवाले हो…

मैं पैसे वसूलने के लिए निकल पड़ा, पहला कोई किसान था…मुझे ड्राइवर ने बोला कि ये जो किसान है ये बहुत ही स्याना है…. पैसे होनेपर ऐयाशी करता है…. इसके पास पैसे होनेपर भी सेठ जी का पैसा नही देता …जो भी इसके पास पैसे माँगने जाता है वो वापस से सेठ जी के पास उसे थोड़ा टाइम दे दो कहके बिना पैसे वैसे ही आता है …… थोड़ी देर मे हम जब उसके घर के पास पहुचे तो पाया कि उसका घर नदी के उस पार है उस पूल पे से गाड़ी नही जा सकती. मैने ड्राइवर को नदी के उस पार ही गाड़ी को संभालते हुए बैठने को बोला और मैं वो छोटे से पूल को पार करके उसके घर के पास पहुचा… नदी मे थोड़ा पानी था जो कि धीरे धीरे बह रहा था …. आजूबाजू हल्की हल्की हरियाली थी…. उस किसान का घर ठीक ठाक ही था… मैने उधर खड़े आदमी को पूछा कि इस नाम का व्यक्ति इधर रहता है तो उसने हां मे जवाब दिया… और मुझे उस घर के अंदर लेके गया…..

 


अंदर जाके मैने देखा कि वो किसान और उसकी धर्मपत्नी जो अपने छोटे बच्चे को दूध पिला रही थी… बैठे थे… सामानेवाले आदमी ने जब बोला कि ये सेठ जी के यहाँ से आए है तो वो उठा खड़ा हुआ ..और मुझे “आइए आइए बाबूजी..” बैठने को बोला. अंदर जाके पानी लेके आया, उसकी बीवी उधर ही मेरे सामने बैठे बिना कुछ लाज शरम किए बच्चे को दूध पिला रही थी… जैसे कोई उसके सामने कोई है ही नही..

मैं : तुम्हारे 12 हज़ार रुपये आने बाकी है

किस्सान: हाँ बाबूजी

मैं : सेठ जी ने मुझे पैसे लेने भेजा है

किस्सन: बाबूजी पैसे तो नही है

मैं: फिर कब मिलेंगे

किस्सन : फसल निकलने पे मिलेंगे बाबूजी

मैं: सेठ जी ने मुझे आज ही पैसे लाने को कहा है

किस्सन : मैने बहुत जुगाड़ करना चाहा बाबूजी पर कुछ बना नही बाबूजी

सामने खड़ा हुआ आदमी मुझे इशारा करके निकल गया…. किसान की बीवी के मम्मे मस्त थे… बहुत बड़े नही थे पर बहुत ही गोल और छोटे छोटे टमाटर की तरह उसके छाती से चिपके हुए थे….

किसान फिर बोला: बाबूजी कुछ जुगाड़ कीजिए… इसबार सेठ जी को मना लीजिए कि मैं पैसा फसल निकलने पे दे दूँगा

मैं : अरे भाई मेरी अभी अभी नौकरी लगी है… मैं ऐसे खाली हाथ जाउन्गा तो सेठ जी क्या कहेंगे… मैं भी एक नौकर हू मालिक नही

किसान: पर आप उन्हे मना सकते है …कुछ तो कीजिए बाबूजी

उतने मे उसकी बीवी उठी और अंदर चली गयी… वो मेरे पास आके बैठ गया… मैं उसे क्या बोलू कुछ समझ नही आ रहा था…. उसने मेरे जाँघो पे हाथ रख दिया… और हल्केसे सहलाने लगा…. मैं गरम होने लगा…. मतलब ये सेठ जी का पैसा ना चुकाने के बदले कुछ तो देना चाह रहा था….

मैं भी इसी खोज मे था कि अगर पैसा नही दे रहा है तो कुछ और तो दे सकता है जैसे कि कुछ सामान वमान… पर ये तो पूरा चालू निकला साला …अपनी गांद ही दे रहा था … मेरे से पूरा सॅट कर बैठ गया…. जाँघोसे घुमा के उसने अपना हाथ अभी मेरी पॅंट के बीचोबीच लाया और सहलाने लगा….

थोड़ी देर मे मेरा तंबू बड़ा हो गया… और उसने मेरे तंबू को अपने हाथो से और अच्छे सहलाना शुरू किया… मुझे तो मुफ़्त मे मेज़वानी मिल रही थी…. उतने मे उसकी बीवी आ गयी… और मेरे दूसरे बाजू बैठ गयी…. इतना सॅट के बैठ गयी कि उसकी एक चुचि मेरे हाथ को चिपक रही थी….

इधर इसने मेरा चैन खोला और मेरा लॉडा एक क्षण मे मुँह मे भर लिया….. और चूसने लगा… मैने भी उसके बीवी के साथ रति क्रीड़ा शुरू की और उसके दूध से भरे मम्मो को दोनो हाथो से रगड़ने लगा….. उसने अपना ब्लाउस खोल दिया और एक मम्मा मेरे मुँह मे दे दिया …. मम्मे को मुँह मे लेके मैने अपना ट्रेन वाला सफ़र याद किया जिसमे मैने छोटी बहू के मम्मो मे से दूध पिया था…. मैं देखते ही देखते उसकी चुचियोसे दूध चूसने लगा…ऐसे कि मानो सालो का भूका हू…

नीचे उसका पति मेरा लंड मुँह मे लेके चूसे जा रहा था. पूरा लंड उसने अपने मुँह मे भर लिया था और गोटियो के साथ खेलते खेलते चुसाइ का मज़ा ले रहा था… उसकी थूक मेरे पूरे लंड पे फैल गयी थी…. मज़ा बहुत आ रहा था …उपर दूध और नीचे चुसाइ ….स्वर्ग मे रहने आया हू बल्कि यही स्वर्ग है ऐसा प्रतीत हो रहा था …..

चुसाइ के बाद मैने उसकी बीवी को घोड़ी बना दिया और पीछे से उसकी सारी उपर उठा दी…. साड़ी उसकी पीठ पे चढ़ गयी मैने पीछे से जाके उसके बुर मे उंगली डाली… मस्त बुर थी …. जाने किस जमाने से बल निकाले नही गये थे …बालो मे छिप सी गयी थी ….. मैने 2-3 उंगलिया घुसाई… उधर वो मेरा लंड नीचे सहला रहा था …मैने उसे बाजू किया और घोड़ी बनी उसकी बीवी पे चढ़ा… और उसकी बुर मे उसके पति के थूक से लिच्पिच लंड घुसा दिया…. और पेलने लगा …उसके चूतर मस्त हिलने लगे….
 


मेरे दिमाग़ मे एक ख़याल आया क्यू ना इसकी गोरी गान्ड मारी जाए…. मैने अपने लंड बाहर निकाला उसकी गांद का छेद पूरा सिकुदा सा और पूरी तरह बंद था

मैने किसान को बोला -कि इसके दोनो चूतरो को फैला तो

उसने पूछा: क्यू बाबूजी वो बोला

मैं: क्यू कि मुझे इसकी गांद मारनी है ….

वो बोला: बाबूजी उधर मत डालना उधर इसने कभी लिया नही है

मैं : तो क्या हुआ अब ले लेगी

वो : बाबूजी चाहे तो आप मेरी ले लो पर इसकी मत लो इसको इस चीज़ का ज़रा भी अनुभव नही है

मैं: पहली बार जब तूने इसकी बुर मे लंड डाला था तो क्या इसको अनुभव था …नही ना …फिर

वो : ठीक है बाबूजी जैसा आप कहे

उसने अपने बीवी के सामने से आके उसकी घोड़ी पे चढ़के उसके गांद को फैला दिया… मैने अपन लंड उसके छेद पे रखा और सवारी की तैय्यारि करने लगा ….

मैने एक दो बार प्रयत्न किया पर कुछ फ़ायदा नही हुआ …लंड सटके जा रहा था …छेद बहुत ही छोटा था… मैने उसे उसपे थूकने को कहा वो 2-3 बार थूकने पर भी लंड नही गया

मैने उसे अंदर जाके तेल की सीसी लाने को बोला, वो थोड़ी देर मे तेल ले आया हमने मिलके उसके बीवी के गांद के छेद पे अच्छे तेल पोत दिया और निशाना लगाया…. चिकनाई के कारण इस बार सूपड़ा थोड़ा अंदर चला गया.. और उधर उसकी बीवी चिल्लाने हिलने लगी “बाहर निकालो….बहुत बड़ा है ….”

मैने बोला : अभी तो ये बाहर नही निकलेगा अभी बस ये अंदर ही जाएगा

और मैने अपने आप को ठीक करके सूपदे को अंदर घुसा दिया.. वैसे ही उसकी गांद मेरे लंड पर सिकुड़ने लगी…मेरा लंड एक दम पक्का बैठ गया था थोड़ी भी हिलने की जगह नही थी और उसकी हालत बहुत ही खराब हो रही थी वो सिर्फ़ बाहर निकालो मर गयी मर गयी बोल रही थी…

मैने लंड को एकबार बाहर निकाला और थोड़ा तेल डालके फिरसे घुसा दिया इस बार ज़ोर्से धक्का मारा वैसे ही वो ज़ोर्से आगे सरक गयी….. उसके पति ने उसे आगे पकड़े रखा और मैने फिर ज़ोर्से धक्का मारा …गांद फॅट गयी

उसकी…मेरा आधा लंड उसकी पकई और ना चुदी गांद मे पूरा जम गया और आगे जाने की राह ढूँढने लगा …वो पागलो की तरह चिल्लाने लगी पर उसे पकड़े होने के कारण वो ज़्यादा हिल नही सकती थी….. मैने भी पीछे नही देखा और उसके पिछवाड़े को पेलने लगा …अपनी गति बढ़ा दी मेरी कमर अभी अच्छी ख़ास्सी हिल रही थी …उसका पति असमंजस से देख रहा था …अभी उसकी आवाज़े थोड़ी कम हुई… उसकी गांद को मेरे लंड ने थोड़ा ढीला कर दिया था इसलिए शायद…. वो साँसे ले रही थी और अपनी गांद को थोड़ा थोड़ा ढीला छोड़ रही थी …वैसेही मैने पूरा लंड एक दम घुसा दिया ….वो एक दम आगे सरक गयी और मेरे लंड को फटक से बाहर छोड़ नीचे बैठ गयी और मुझसे नही होगा नही होगा….. ये बहुत बड़ा बहुत बड़ा लंड है मैं मर जाउन्गि चिल्लाने लगी पर अब उसके पति ने ही उसे मनाया…

और फिर घोड़ी बना दिया… मैने अपना नाग बिल मे घुसा दिया और उसकी अनचुदी गांद को फिरसे मस्त चोदने लगा… उसका मुँह पूरा लाल लाल हो गया था गांद सूज गयी थी…. उसे थोड़ा हिलने पर भी तकलीफ़ हो रही थी …. गांद जो फॅट गयी थी उसकी…. दस बारह धक्को के बाद मैं उसकी गांद मे ही ढेर हो गया और नीचे दबा के उसके पीठ पे ही गिर पड़ा… वाह क्या मज़ा आया था इस वसूली मे बहुत ही ज़्यादा मज़ा था …

क्रमशः...................

 
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