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बड़ी देर तक हाफते हुए वह मेरे उपर ही
पड़ा रहा. मेरी चूत मे लंड घुसा ही रहा. जब तक-तब तक की ससुरा
ढीला हो कर खुद ही ना खिसका. घर के घर मे थे कोई जल्दी तो थी
ही नही. बड़ी देर तक दोनो चिपते पड़े रहे..फिर जब मुझे ज़ोर की
बाथरूम आई तभी मैं नीचे से कुनमूनाई. वह मुझे पर से
उतरा. तो मैं उठ कर अपने कपड़े ढूँढने लगी. उसने मुझे रोक दिया.
मैने प्रश्न भरी निगाहों से उसे देखा..छोड़ो ना.जाने दो अब. मेरी
निगाहों मे उस के लिए असीमित प्यार था..अभी नही..वह मुझे पकड़
कर गले से लगा लिया. नंगा वह नंगी मैं सीन मजेदार था..कर तो
लिए..अब और क्या ?कैसा लगा बीबीजी. मैने जवाब तो नही दिया बस मुस्करा
के उसे देखी..बताओ ना.वह मेरी नंगी पीठ पर हाथ चलाया. तब
मैं उसके गाल पर अपनी तरफ से एक किस करी. यह मेरा हरिया को
पहला किस था. और हाथ छुड़ाने लगी..अभी मत जाओ बीबी जी..अभी
मन नही भरा .. मन तो साला मेरा भी सात साल से प्यासा था. पर
यदि मैं बाथरूम ना जाती तो वही निकल पड़ती. क्या करती-जाना
अर्जेंट था. मैने छूटने की कोशिश की तो वही समझ
गया..बीबीजी..पेशाब जाना है क्या ?.मैने शरमा कर हा मे गरदन
हिलाई. वा बोला.यही मोरी पर हो आओ ना.. मैं फिर हा मे गरदन
हिला दी. तब जा के वो छोड़ा. मैं लगभग दौड़ती हुई सी मोरी पर
गयी. वाहा बैठते ही जो मेरी सुर्राटी छूटी तो एक बारगी तो मैं
खुद अपने पर शरमा उठी. अकेले बंद कमरे मे-रात के सन्नाटे
मेमेरी पेशाब निकलने की आवाज़ हरिया ने भी ज़रूर सुनी होगी.क्या
सोचा होगा उसने मन मे...
उस रात भी मेरी दो चुदाई हुई. एक बार तृप्त होने के बाद भी उस
ने मुझे जाने ना दिया.ना कपड़े पहनने दिए.वही अपने साथ सुला
लिया. अकेले बंद कमरे में-अपने नौकर के साथ नंगी पड़ी मुझे शरम
तो बहुत आ रही थी.पर क्या करती. जानती थी कि जवानी का मज़ा इसी
तरह लिया जाता है.-भगवान ने चूत को बनाया ही ऐसी जगह है.
बिना कपड़े खोले इस का मज़ा लिया ही नही जा सकता है. चुदाई के
बाद की खुमारी भी अजीब होती है. मेरा तो उस से अलग होने का मन ही
नही हो रहा था. नंगी होने की वजह से शरम आ रही थी सो मैं तो
हरिया की छाती में ही घुसी जा रही थी. उस के नंगे बदन से
चिपकाने मे मज़ा भी आ रहा था. उपर से वह मुझे बाहों मे ले मेरे
सारे बदन पर यहा वाहा सब जगह हाथ फेर रहा था..बीबीजी..(उसने
मेरी पीठ पर हाथ फिराया.) उम..(मैं अपनी तरफ से उस से चिपक
उठी.)कैसा लग रहा है .. (उसने मुझे अपनी तरफ खीचा तो मेरे
मम्मे उसके छाती से जा लगे.)...(मैं अपने छत्तीस न्म्बर के मम्मों
को हरिया से दबाता हुआ महसूस की.)बोले ना..चुप मत रहा करो..(उसने
पीठ पर हाथ फेरा.)क्या...(मैने आँख उठा कर उसकी तरफ
देखा.)अच्छा लग रहा है ना..(वह मेरे कूल्हों पर पहुँच
गया.)हूंम्म (करके मैं आगे को सरक अपने मम्मों को उस की छाती से
चिबद जाने दी.).और अपना पुराना राग आलापी..हरीयाहह.मुझे
छोड़ के मत जाना कभी..वह मेरे कूल्हों की मालिश किया..नही
बीबीजी..हमारा विस्वास करो.हम आपको छोड़ कर कही नही
जाएँगे..उसके कहने के ढंग पर मुझे बहुत प्यार आ गया. मैने उस
से चिपक कर अपने हेवी कूल्हे पर उस के हाथ का दबाव महसूस
किया..हमने आपकी माँग में सिंदूर भरा है ना बीबीजी.हम..-अब हम
आपको नही छोड़ने वाले है..और उसने मुझे अपने से चिपका लिया
मेरे मम्मे उस के सीने से दब कर पिचक गये. मेरे गाल की पप्पी लिया
तो मुझे बड़ा अच्छा लगा. धीरे धीरे उसमे फिर से उत्तेजना आ रही
थी. और जब उत्तेजना बढ़ी तो वह पुँह मेरे उपर चढ़ता चला आया.
मेरी तरफ से कोई विरोध ना था. मैं पीठ के बल हो गयी. अपनी
टागो को उस के स्वागत में खुद ही फेला दिया. दर-असल जो वो चाहता
था वही मैं भी चाहती थी. संगम लंड और चूत क़ा संगम.. उसने
मेरे घुटनों को हाथ लगा इशारा दिया तो मैने फॉरन अपने घुटने
मोड़ कर उस के लिए जगह बना दी.