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पंजाबी मालकिन और नौकर complete
मैं : बीजी......तुस्सी किन्हे सोफ्ट हो.........जी चान्दा ए मैं त्वाड्डी पप्पी (किस/चुंबन) ले लेया..
एक उंगली से उनके चूतडो के बीच मे ऊपर नीचे कर रहा था जैसे कि रंग मल रहा हू..
बीजी: आह..आह..........मैंनु लगदा ए तेरा भांग दा नशा बढ़-दा जा रेया ए....
मैं : बीजी..........................इक पप्पी लेने दो
बीजी: ए तू जो भी कर रेया ए भांग दे नशे विच कर रया ए......तेनू नही पता तू की करदा
पाया ए ते की बोल्दा पाया ए...
मैं : बीजी....इक पप्पी देने विच त्वाड्डा की चला जाएगा.........लें दो..
बीजी: हुन मैं की कवान......इक ले ले....बस इक
मेरे होठ (लिप्स) बीजी के गालो (चीक्स) से चिपक गये..........................मैंने अपनी उंगली
उनके चूतडो के बिल्कुल बीच मे घुसा दी....लेकिन उनकी सलवार गीली होने के कारण
चूतडो से इतनी टाइट हो गयी थी कि मेरी उंगली ज़्यादा अंदर ना घुस पाई.......
मैंने फिर बीजी के चूतडो के बीच उंगली
ऊपर नीचे करनी शुरू कर दी...........
मेरे होठ बीजी के गालो पर थे...
बीजी धीरे से बोली..
बीजी: बस कर......
मैंने होठ उनके गालो से हटाए....लेकिन मेरे हाथ उनके चूतडो को दबा रहे थे...सलवार के
ऊपर से ही........मैं बोला...
मैं : बीजी....तुस्सी बड़े मीठे हो.................इक पप्पी और लेन दो..
मेरे हाथ बीजी के चूतडो को दबा रहे थे...
बीजी: आह....नही....ए तू नही...भांग बोल रही है................बस और नही..
बीजी ने खुद को मुझसे अलग किया और बोली..
बीजी: चल नीचे....लेकिन....छत सॉफ कर दे.....कही तेरे साहब ने ऊपर आ के ज़मीन ते
गिरा रंग देख लिया ते ओ समझ जाएँगे कि अस्सी होली खेली ए.........मैं नीचे जा रही आं..
ये कह कर बीजी नीचे चली गयी.....मैंने भी ज़्यादा रोकने की कोशिश नही की......आख़िर
काफ़ी मस्ती तो ले ही चुका था..
फिर दोपहर तक हम दोनो नहा-धो के सॉफ हो चुके थे....
बीजी ने नहा के फ्लोरोसेंट ग्रीन कलर का सूट पहना था और बहुत आकर्षक लग रही
थी......चुन्नी नही पहनी थी....सूट इतना पतला था क़ी उनकी काली ब्रा सॉफ सॉफ दिख
रही थी.......पता नही आज कल औरते इतना पतला सूट क्यो पहनती है...
हमने नाश्ता ही 1:30 बजे किया और इसलिए लंच की भूख नही थी.....
करीबन 7 बजे मैं रसोई मे खाना बना रहा था.....बीजी रसोई मे आई.....
बीजी: धरम....की बना रहा ए ?
मैं : बीजी....आलू-भे बना रेया आं..[भे (कमाल ककडी) इज आई रौड्लाईक वेजीटेबल विच इज
कट इनटू पीसीज बोफोर मेकिंग ....ईट ईज़ क्वाईट सोलिड ऐन्ड केन नोट बी प्रेस्ड बट ओनली कट ...ईट
ईज़ नोरमली 6 सेंटी मीटर 12 ईंच इन लेंग्थ]
बीजी ने एक भे हाथ विच लिया..
बीजी: धर्मा...तेनू भे लेने नही आंदे..
मैं : क्यो बीजी..
बीजी: हमेशा मोटे भे अच्छे होंदे ए......ते तू पतले भे लित्ते ए...
मैं: पर बीजी पतले भे जल्दी बन जांदे एँ..
बीजी: पर स्वाद मोटे भे दा ही अच्छ होन्दा ए......
मुझे लग रहा था कि बीजी भे के बारे मे नही और किसी चीज़ (तुम जानते हो !!) के बारे
मे बात कर रही थी
बीजी: आग्गो (आगे से) नाल मोटे मोटे ते लंबे भे लिया कर....समझा..
मैं: जी बीजी....बीजी तुस्सी इस सूट विच बहुत सुंदर लगडे पाए ओ......इस सूट दा रंग त्वाड्डे
गोरे रंग ते खूब मैंच करादा पेया ए..
बीजी: अच्छा.......
मैं: बीजी तुस्सी बुरा ना मानो ते मेरा दिल चान्दा ए की त्वाड्डी इक पप्पी और ले लाँ..
बीजी: तेरी होली ख़तम नही हुई..
मैं: होली ते ख़तम हो गयी लेकिन तुस्सी ते ओ ही हो....
बीजी: मैं नही.....इक पप्पी ले ली..बस...और नही
मैं: प्लीज़ा बीजी...लेने दो ना.........इक पप्पी नाल त्वाड्डा की चला जाएगा..
बीजी: तू खाना बना..मैं बाहर जा रही आं
ये कह कर बीजी रसोई से बाहर चली गयी..
हमने खाना खाया और सोने चले गये..
अगली सुबह मैं बीजी को बैड टी देने गया तो बीजी सो रही थी
मैं: बीजी....चा रखी ए..
बीजी: आहमम्म्म.....(अंगड़ाई लेते हुए).......ले आया...
मैं चाय रखने के बाद भी बीजी को देखता रहा..
बीजी: पुतर...ऐसे की देख दा पेया ए...
मैं: बीजी..तुस्सी जद सो के उठ दे हो ते इतने सुंदर क्यो लग दे ओ......तुस्सी इतने सुंदर लग्दे ओ
कि त्वाड्डी पप्पी लें दा जी करदा ए..
बीजी: फिर पप्पी...सुबह सुबह...हाल्ली मैं सो के उठी नही कि तू पप्पी मान्ग्दा पेया ए..
मैं: लेन दो ना..
बीजी: ओफफ्फ़..ओ...नही दी ते तू पूरे दिन मान्ग्दा रहेगा...............ले ले..
बीजी लेटी हुई थी...मैं बीजी के पास गया...उनके पलंग (बेड) पर चढा.....और
अपने होठ उनके कानो (ईयर्स) के पास लाया..और धीरे से बोला..
मैं: बीजी......तुस्सी बड़े सोफ्ट सोफ्ट हो....
बीजी: किन्ही वार मैंनु दस्सेगा कि मैं सोफ्ट सोफ्ट आं.....................हुन ले पप्पी
मैं: बीजी......कित्थो दी (कहाँ की) पप्पी लेया..
बीजी: पप्पी ते गालो दी ली जाँदी ए....और कित्थो दी ?
मैं: बीजी गालों दी ते कल ले ली सी......आज कही और की लेन दो..
बीजी: और कित्थो दी लेनी ए..
मैं: अपने गले (नेक) दी लेन दो..
बीजी: गले दी.....
मैं: हां बीजी..
बीजी: चल ले ले...और मेरा पीछा छोड़..
मैंने अपने होठ गीले किए और बीजी के गले को चूमने लगा........
मैंने एक हाथ बीजी के पेट पे रख दिया.....और हल्का हल्का घुमाने लगा..
बीजी: धरम...पुत्तर...आअहह
मैं कुछ देर उनके गले को चूमता रहा...कभी
लेफ्ट से कभी राईट से......और एक हाथ उनके पेट पे घुमाता रहा..
बीजी: बस कर...पुत्तर...मेरी चा ठन्डी हो जाएगी..
मैं अलग हो गया
बीजी: हुन ते ठीक ए....खुश..
मैं: आ हो बीजी........मज़ा आ गया...तुस्सी ते चा पियोगे पर मैं ते शरबत पी लित्ता
ए...त्वाड्डे गले से..
बीजी: धत....हुन तू अपना काम कर..
मैं अपना काम करने लगा...
दोपहर को करीब 1:30 बजे मैं रसोई मे खाना बना रहा था तो बीजी आई...............
बीजी ने आज पहली बार स्लीव-लेस कमीज़ पहनी थी........बीजी की गोरी गोरी बाहे देख कर मेरे
मूह इच पानी आ गया..
बीजी: की बनान्दा पेया ए ?
मैं: पालक पनीर....
मैं: बीजी......तुस्सी सूट दी बावां (स्लीवस) काट दित्ति एन..
बीजी: मैं नही काट-टी....ए सूट स्लीव्ले है..
मैं: बीजी.....ए गल ग़लत है..
बीजी: कौन सी गल ?
मैं: मैं त्वाड्डी गोरी गोरी बावां देखी होन्दी ते
मैं सुबह पप्पी त्वाड्डी बावां दी लेन्दा...तुस्सी हुन मैंनु अपनी बावां दिखांदे पाए हो..
बीजी: क्यो तू पहले मेरी बावां नही देखी....मैं पहले वी ते हाल्फ स्लीवस दी कमीज़
पान्दि सी..
मैं: पर पूरी बावां ते आज ही देखी एँ......मैं
त्वाड्डी पूरी बावां देखी होन्दी ते सुबह पप्पी त्वाड्डी बावां दी लेन्दा...तुस्सी मैंनु धोखा दित्ता ए..
बीजी: ते तू की चाहन्दा ए ?
मैं: त्वाड्डे बावां दी पप्पी..
बीजी: तू खाना ते बना...बाद इच देखांगे
मैं: नही बीजी....अभी लेन दो..
बीजी: हुन...रसोई इच...
मैं: पप्पी लेन वास्ते कोई ख़ास कमरा नही चाहिए..
बीजी: ऑफ..ओ...ले ले..
मैं बीजी को रसोई की दीवार के पास ले गया और उनको दीवार के साथ लगा दिया..
फिर मैं बीजी की गोरी और नंगी बाहो को चूमने लगा..
मैंने उनकी कलाई से शुरू किया और धीरे धीरे ऊपर आता गया....
अब मैं बीजी के कंधे के पास उनकी नंगी बाहो को चूम रहा था
बीजी: ओह....धर्मा....तू ते पागल ही हो गयाए...
मैं: बीजी तुस्सी मैंनु पागल कित्ता ए..............अपनी बाह ऊपर करो..
बीजी: क्यो ?...
मैं: करो ते सही..
बीजी ने अपनी बाह अपने सिर से ऊपर कर ली..हैन्डस-अप पोज़ीशन मे..
मैं बीजी की बाहो का अंदर वाला पोर्शन चूमने लगा..
बीजी की दोनो आर्म्स ऊपर थी.....और मैं उनकी आर्म्स पे किस कर रहा था....
मैंने अपने हाथ उनकी कमर पे रख दिए.. फिर उनकी पीठ पे.........और फिर...
उनके चूतड पे..
बीजी: आहह...पुत्तर....कितनी पप्पिया लेगा.....और कहाँ कहाँ पप्पियाँ लेगा...
अब मैं उनके चूतडो को हल्का हल्का दबाने लगा....सच कहूँ उनके चूतड काफ़ी बड़े
थे.....लेकिन बहुत मुलायम
मेरा मूह उनकी बाहे चूमते हुए उनके अन्डर आर्म्स के पास आ गया...याद रहे कि बीजी ने
अपनी दोनो बाहे अपने सिर से ऊपर कर रखी थी....इसलिए उनके अन्डर आर्म्स ओपन
थे.......लेकिन उनके अन्डर आर्म्स कमीज़ से ढके हुए थे....
मैं अपने होठ उनके अन्डर आर्म्स पे ले आया और वहाँ चूमने लगा..
मैंने बीजी की कमीज़ अन्डर आर्म्स से थोड़ी हटानि चाही.....
बीजी: पुत्तर....ए की करदा पेया ए....
मैं: बीजी अपनी कमीज़ इस जगह से थोड़ी हटाओ...
बीजी: पर तू ते मेरी बावां दी पप्पी लेनी सी..
मैं: पर ए जगह भी ते बावां मे आंदी ए...
बीजी:धरम पुतर...सच दस्सा ते शायद तेनू ये जगह पसंद ना आए...
मैं बीजी के चूतड को दबा रहा था..
मैं: क्यो बीजी..
बीजी: मेरे इस जगह थोड़े बाल है......इसलिए शायद तेनू पसंद ना आए
मैं: नही बीजी.....सच दस्सा ते मैंनु कुछ जगहो ते बाल पसंद है.....ते इस जगह ते बाल
बहुत पसंद है..
बीजी: ठीक ए...ते ए ले
बीजी ने अपने अन्डर आर्म्स से अपनी कमीज़ झट्के
से नीचे करी..
उनके अन्डर आर्म्स मे थोड़े बाल थे.....
मैंने एक दम से अपना मूह उनके अन्डर आर्म्स मे घुसा दिया...और चूमने लगा...मैं उनके
चूतडो को भी दबा रहा था
बीजी: अया...ससस्स.......
मैं बीजी को चूम रहा था तो पुच पुच...की आवाज़ आ रही थी...
अब मैं अपनी जीभ बीजी के अन्डर आर्म्स के बालो पे चलाने लगा...........
बीजी: ऊहह.....सस्स...पुत्तर..........तेनू ए जगह पसंद आई ए..
मैं: बहोत..........आईस्क्रीम चाटने से ते त्वाड्डे अन्डर आर्म्स दे बाल चाटने अच्छे
है.....त्वाड्डे अन्डर आर्म्स दी गंध भी सारे परफ्यूम्स से अच्छी है......त्वाड्डे अन्डर आर्म्स
बहोत गरम है...
बीजी: हाए....स्स....मेरी इतनी तारीफ़ ना कर........उउंम.सस्स..
मैं: त्वाड्डे गाल ते गर्दन मीठे.....त्वाड्डे अन्डर आर्म्स नमकीन....त्वाड्डा अन्डर आर्म्स कितना
टैस्टी ए....आ..
मैं बीजी के अन्डर आर्म्स चाट रहा था....चूतड दबा रहा था............इतने मे
फ़ोन की घन्टी बजी..
बीजी: छोड़ मैंनु.....फ़ोन है.
मैं: छोडो फोन नू..
बीजी: नही नही...
बीजी फोन उठाने चली गयी..................उनके पति का फ़ोन था......वे काफ़ी देर तक बाते करती
रही............
मैंने रोटी बना ली और हमने खाना खा लिया.......
रात को डिनर के बाद सारा काम ख़तम करने के बाद मैंने बीजी से कहा..
मैं: बीजी..........दप्पहर नू तुस्सी मैंनु पप्पी पूरी नही करने दी.....ओ..फ़ोन आ गया सी ना..
बीजी: हुन नही......मैंनु नींद आ रही ए.......कल देखांगे.
अगले दिन मैं बीजी को बेड टी देने गया......
बीजी ने वही अपना पतला वाला सूट पहना हुआ था..
मैं: बीजी...चा रखी ए
बीजी: रख दे...
मैं वही खड़ा रहा..
बीजी: तेनू रोज़ सुबह सुबह पप्पी चाहिदि ए..
मैं: बीजी...कल तुस्सी पप्पी नू अधूरा छोड़ दित्ता सी..
बीजी: ऑफ..ओ.....ले करले हुन अधूरा काम पूरा.
मैं बीजी के पलंग पर चढ़ गया......अपना मूह उनके अन्डर आर्म्स के पास ले गया..
मैं: पर बीजी.....तुस्सी ओ सूट नही पहन रखा जो कल पहन रखा सी.......
बीजी: ते तू दस....हुन की करा...ओ सूट ते मैं नहा के पावान्गी
मैं: ते हुन और कित्थे दी पप्पी लेन दो..
बीजी: कित्थे दी ?...
मैं: उत्थो (वहाँ) दी..
बीजी: उत्थो कित्तों दी (वहाँ कहाँ की) ?
मैं: ओ...चुन्नी वाली जगह दी...
बीजी: चुन्नी वाली जगह....नही नही....उत्थो दी पप्पी नही लेने दूँगी...
मैं: क्यो बीजी....
बीजी: उस दिन ते तू कह रहा सी कि चुन्नी वाली
जगह मरदा नू अच्छी क्यो लगदी ए...इस इच अच्छे लगने वाली की चीज़ ए..............ते आज
उसी जगह दी पप्पी मान्ग्दा ए..
मैं: लेन दो ना बीजी..........बस इक वारी.....प्लीज़.....प्लीज़ बीजी.....चाहे फिर
अपने अन्डर आर्म्स दी पप्पी ना लेन देना.......प्लीज़ा बीजी....ना मत करो..
बीजी: बस इक वारी.........सिर्फ़ इक वारी..
बीजी के ये कहते ही मैं अपना मूह बीजी की छाती पे ले आया......
पहले बीजी के स्तनो के साईड मे होठ चलाता रहा....... बीजी ने पतले कपड़े की कमीज़ पहनी
थी....ब्रा भी पहनी थी..
मैंने उनके निप्पल पे कस के पप्पी ली....
बीजी: आह.......पुत्तर...आराम नाल कर....मैं की भागी जा रही आं..
मैं: बीजी.....कुछ मज़ा नही आ रहा......तुस्सी बहुत मोटे कपड़े पहन रखे
है..
बीजी: नही ते.......मेरी कमीज़ ते बहुत पतली ए..............मैं ओ ज़रूर पाया ए जो
औरते कमीज़ दे अंदर पान्दी है
मैं: बीजी ए गल ग़लत है....
बीजी: तू की चाहन्दा ए कि मैं ओ चीज़ निकाल दाँ........नही
मैं: बीजी......रात नू ते आपने पहाडा (माऊन्टैन्स) नू आज़ादी दित्ता करो..
बीजी: पहाडा नू.......तेनू की ये पहाड दिख दे है?
मैं: दिख दे कित्थे है.....पहाडो के ऊपर ते बादल है.......तुस्सी इक बादल भी हटा दो ते
पप्पी दा मज़ा आ जाए. मैं उनके पहाडो पे हाथ रख कर दबाने लगा..
बीजी: आह...हह....की करदा पेया ए..?..
मैं: पहाडा नू दबा के देख रहा हूँ......शायाद बादल उड़ जाए..
बीजी थोड़ा सा मुस्कुराई
बीजी: पगले.......दबान नाल बादल नही उडान्गे...आअहह.....तू मेरे नहाने के बाद मेरी
अन्डर आर्म्स दी ही पप्पी ले लियो..
मैंने उनके पहाड बहुत कस के दबाए...
बीजी: आहह....आअहह
मैं: ठीक है बीजी....मैं त्वाड्डे अन्डर आर्म्स दी पप्पी ही ले लेवांगा.
ये कह मैं पलंग से उठ गया..
दोपहर को मैं जब रसोई मे था.....बीजी कल वाला स्लीवलेस सूट पहन कर रसोई मे आई....
बीजी: धर्मा.......तेरे चक्कर विच मेरी सुबह दी चा सारी ठन्डी हो गयी सी..
मैं: ओ....सॉरी बीजी...............चलो हुन दीवार नालो (दीवार के साथ) खड़े हो जाओ..
बीजी: क्यो..?
मैं: क्यो!....मैं त्वाड्डी पप्पी लेनी ए.....तुस्सी प्रोमिस कित्ता ए
बीजी दीवार से लग कर खडी हो गयी..........उन्होने दोनो बाहे ऊपर कर
ली..........अपनी एक उंगली से अपने अन्डर आर्म्स से कमीज़ नीचे की..
बीजी: ले..
मैं: बीजी दूसरी अन्डर आर्म्स भी तैयार रखो..
मैं बीजी के अन्डर आर्म्स मे घुस गया......उनके अन्डर आर्म्स के बाल चाटने लगा....
मैं अपने दोनो हाथ उनकी छाती पे ले गया और उनके मम्मो को हल्का हल्का दबाने लगा....
मैंने उनके अन्डर आर्म्स पे दातों से हल्का सा काटा..
बीजी: उउईइ.......काटदा क्यो ए...ऐसे ना कर.....दर्द होन्दी ए..
मैं: अगर तुस्सी सुबह बादला नू उड़ा देन दे...तो त्वानु ये दर्द ना होन्दा...
मैं उनके स्तनो को और दबाने लगा
बीजी: अयाया......हह...सस्स....
अब मैं उनके दूसरे अन्डर आर्म्स पे आ गया और उसे चूसने और चूमने लगा......
तभी फ़ोन की बेल बज पडी..
मैं: ये फ़ोन मेरी पप्पी दे टाईम ते ही क्यो बजदा ए..
बीजी हँसते हुए बोली..
बीजी: शायद ओ तेरी पप्पीया नाल चिड्दा ए......................छोड़ मैंनु...फ़ोन देखन दे..
बीजी फोन उठाने चली गयी.................उनकी मम्मी का फ़ोन था........वे काफ़ी देर बाते करती
रही.......मैंने रात तक कुछ ना कहा.....रात को सोने से पहले..
मैं: बीजी......तुस्सी आज भी मैंनु धोखा दित्ता ए..
बीजी: नही.....फ़ोन आ गया...इस इच मैं की करा...
मैं: ते हुन..
बीजी: हुन नही.....मैंनु नींद आई ए.........कल देखांगे............और
हां........कल से तू मेरी चाय थर्मस इच लाया कर..........
अगले दिन मैं बीजी की थार्मस मे चाय ले गया..
मैं: बीजी....चाय
बीजी: रख दे...
बीजी आज स्लीवलेस सूट पहन कर सोई थी....
मैं बीजी के पास पलंग पे चढ गया..
बीजी: मैंनु पता सी........तू पहला काम ए ही करेगा.......
मैं: अच्छा बीजी.............तो इस इच मेरी की ग़लती ए.....तुस्सी हो ही इतने स्वाद....मैंनु
त्वाड्डी पप्पीया लें दा नशा चढ गया ए..
बीजी: अच्छा अच्छा....ज़्यादा बोल ना......अपना काम कर
मैं बीजी के अन्डर आर्म्स मे घुस गया और चूमना शुरू किया......
मेरी नज़र उनकी छाती पर पडी तो ऐसा लगा कि आज उन्होने ब्रा नही पहनी..
मैंने उनके अन्डर आर्म्स के बाल को चूसते वक्त एक हाथ उनके पहाड पे रखा.......
बड़ा मुलायम सा लगा....और मैं श्योर हो गया कि आज बीजी ने ब्रा नही पहनी...
मैं उनके पहाड को हल्के हल्के दबाने लगा...
मैं: बीजी.......आज अन्डर आर्म्स दा दिल नही कर रहा..
बीजी: ते फिर..?
मैं: पहाडा दी पप्पी ही लेन दो..
बीजी: उम्म्म......चल..ले..ले
मैंने पहले उनके स्तन दबाए....काफ़ी बड़े बड़े और मुलायम थे..
मैं: बीजी.....आज ते बादल कुछ कम लग रहे हैं..
बीजी: ओ.....सच्ची.....मैं ओ पहनना भूल गयी रात नू...
मैं:की....की पहनना भूल गये ?
बीजी: ओ ही...जो औरते कमीज़ दे अंदर पान्दी है..
मैं: ते ए कहो ना तुस्सी ब्रा पहनना भूल गये..
बीजी: हां...ओ ही....मैं ब्रा पहनना भूल गयी
मैं: अच्छा है...जो होन्दा ए अच्छे के लिए होन्दा ए..
ये कह कर मैंने उनके लेफ्ट पहाड को अपने मूह मे ले लिया और राईट पहाड अपने हाथ से दबाने
लगा..
बीजी:अह्ह्ह्ह....ओई....पुत्तर.......ए..पप्पीया....तेरी पप्पीया.....मुझसे ग़लत काम करवा देंगी...
मैं बीजी के निप्पल को कमीज़ के ऊपर से ज़ोर ज़ोर से चूसने लगा....बीजी के निप्पल काफ़ी
पोइन्टेड थे..
मैं: बीजी....त्वाड्डे ए पोइन्टेड लग्दे हैं..आइसक्रीम दी कोण वाले..
बीजी: आआईए.....य्यी.....
मेरे मूह मे लेने से उनके निप्पल से उनकी कमीज़ गीली हो गयी थी.........
उनकी कमीज़ उनके निप्पल से चिपक गयी थी और उनका निप्पल कमीज़ मे से सॉफ दिख रहा था...
मैं दूसरे निप्पल पे आया और पहले वाला उभार हाथ से दबाने लगा..
मैं: बीजी.....त्वाड्डे उभार किन्ने बड्डे हैं..
बीजी: आहाहह......पुत्तर.....तेरी पप्पी पप्पी मे मैं बदनाम ना हो जावां....
मैं: बीजी........मैं इक नये स्टाईल इच पप्पी लेना चाहन्दा..
बीजी: कैसे ?...
मैं: तुस्सी मेरे ऊपर आ जाओ.....अपने पहाड़ मेरे मूह ते रख दो....ते मैं उनकी पप्पी लूँगा
बीजी ने ऐसा ही किया....मैं लेट गया...वो मेरे ऊपर आ गयी......अपने उभार मेरे मूह पे रख दिए....
मैं निप्पल चूसने लगा......साथ ही साथ मैंने अपने हाथ उनके चूतडो पे रख दिए और उनके चूतड दबाने लगा..
मैं: त्वाड्डे उभार दा काफ़ी भार है...
बीजी: आहह...अच्छा
मैं: मैंनु लगदा ए त्वाड्डे उभार पूरे भरे हुए है.. मेरे हाथ उनके चूतडो को दबा रहे थे.....
बीजी अपनी पतली सलवार कमीज़ मैं मेरे ऊपर लेट गयी थी...उनके बड़ी चूची मेरे मूह पर थी..
उनका निप्पल मेरे मूह मे था..
बीजी: आहह..ओह्ह.........पुत्तर........इक चीज़ ते बता...सच्ची सच्ची..
मैं: पूछो..बीजी... (मैं निप्पल चूसने लगा)
बीजी: आह....कुछ दिन पहले....जब तू मेरी चाय लाया सी....ते मैं पेट ते बल सो रही सी....मेरी कमीज़ थोड़ी उत-ते (ऊपर) चढी हुई सी............ते तू घूर घूर के की देख रेया सी....सच्ची दस..
मैं: बीजी...तुस्सी बुरा ते नही मानोगे..?
बीजी: ऊई...नही..बोल..
मैं: बीजी.....त्वाड्डी कमीज़ थोड़ी उत-ते चढी हुई सी.......ते त्वाड्डी सलवार..त्वाड्डे
चूतडो दे बीच मे घुसी हुई सी
बीजी: आअहह....ते इस्स इच...आहहय्ी.....घूरने वाली कौन सी गल ए..?
मैं: बीजी...मुझे त्वाड्डे चूतडो दे बीच मे घुसी हुई सलवार बहुत अच्छी लगी सी...
बीजी: हा..एयेए.....मतलब..?
मैं: मैंनु बहुत आकर्षक लगी...........मेरे दिमाग़ इच ख़याल आया...कि त्वाड्डे चूतड कैसे
होंगे..और त्वाड्डे चूतड दे बीच दी जगह कैसी होगी....
बीजी: अपनी मालकिन वास्ते इतने गंदे ख़याल रखदा ए..?
मैं: बीजी इस बिच मेरा की कसूर ए......
बीजी: आअहह....होली पर तूने मेरे चूतडो पे रंग लगाया सी.....ते बहुत दबाया सी मेरे
चूतडा नू....ते जिस वक्त तू रसोई विच मेरे अन्डर आर्म्स दी पप्पी ले रेया सी उस वक्त वी तू
इनको दबा रेया सी...आअहह
मैंने बीजी का उभार दातों मे दबाया
बीजी: आह....पप्पी लेन्दा पेया ए....कि काटदा पेया ए...?..बेरहम...
मैं: बीजी....सच दस्सा ते होली ते मैं त्वाड्डे चूतडो दे नाल इक कोशिश किति सी...
बीजी: मैंनु पता है बेशरम....आहह.....तू अपनी उंगली मेरे चूतडो दे विच घुसानी चाही सी....हैना ..?
मैं: हां बीजी......त्वाड्डी कमीनी सलवार टाईट सी...
बीजी: आआहह.........अच्छा हुआ सलवार टाईट सी...आहह...वरना तू ते पता नही की करदा..
अब मैं अपनी उंगली बीजी के चूतडो के बीच ऊपर नीचे करने लगा...
बीजी ने हल्का सा मुस्कुराते हुए कहा..
बीजी: आआहह......सौ शैतान मरे सी जद्दो (जब) तू पैदा हुआ सी.....आआआहह....बेशरम..
अब मैंने अपनी उंगली उनके चूतडो के बीच घुसानी शुरू की...
बीजी: अहह...........पुत्तर............तेरी होली हुने (अभी) ख़तम नही होई की..?.....
मैं: नही बीजी....
बीजी: बस.....बस कर........मैंनु पिशाब आया ए.....छोड़ मैंनु..
मैं: नही बीजी..........हुन ते मैं त्वाड्डी चूतडो दी वी पप्पी लेवान्गा..दोगे ना..?
बीजी: की..!.......चूतडो दी वी भला कोई पप्पी लेन्दा ए..?...
मैं: हां बीजी....त्वाड्डे जैसे चूतड हो...तो पप्पी ते लेनी ही पड्ती है.....
बीजी: आहहह...........आई....नही....छोड़
मैंनु.........मैंनु पिशाब आया ए...ते तू वी अपना काम कर...
मैं: नही बीजी....पहले....चूतड दी पप्पी..
बीजी: ओफफ्फ़...ओ...आअहह...........हुने नही....बाद विच देखांगे...हुन छोड़ मैंनु
मैंने बीजी को छोड़ दिया...बीजी सीधे बाथरूम मे गयी....
मैं भी उठा और घर के काम मे लग गया..
कुछ देर बाद बीजी की मम्मी आ गयी.... बीजी काफ़ी देर तक उनके पास बैठी रही.....
मैं रसोई मैं खाना बना रहा था..........बीजी रसोई मैं आई....
बीजी ने आज नॉर्मल सूट (विड स्लीवस) पहन रखा था..
बीजी: धरम पुतर....खाने विच की बनाया ए..?..
मैं: मैं त्वाड्डी मम्मी नू ही पूछा ए......उन्होने कया कि गोभी बना ले.......
बीजी: अच्छा...ठीक ए....मैं कोई हेल्प करां.?
मैं बीजी को हाथ से पकड़ के रसोई की साईड मे ले गया..
मैं: हाँ.........इक पप्पी लेन दो..
बीजी: पागल है........मेरी मम्मी बाहर बैठी है...और तू मुझसे पप्पी मान्गदा ए..?...
मैं: प्लीज़ बीजी......लेन दो ना....बस इक...
ये कह के मैं बीजी की गर्दन को चूमने लगा...
बीजी ने मुझे नही रोका और दीवार से लग गयी....
बीजी: ऊओह...तू ते पागल हो गया ए....
मैं उनकी गर्दन चूम रहा था....मैंने दोनो हाथ उनके चूतड पे रखे और दबाने लगा...
बीजी: आहह...स.....जल्दी कर पुत्तर.....मम्मी बाहर बैठी है........कित्थे मम्मी नू पता
चल गया कि मैं तेनू पप्पीया देन्दी हां........ते ग़ज़ब हो जाएगा...
मैं: सस्स....तुसी आज स्लीवलेस सूट क्यो नही पहना...?..
बीजी: पागल है.....सस्स...आह....मम्मी दे सामने..मैं ओ सूट नही पा सकदि....मम्मी
समझेंगी...कि अपने नौकर ते डोरे डाल रही हां..
मैं: बीजी...अपनी बावां उँची करो...
बीजी ने अपनी बाहे ऊँची करी तो मैं उनके अन्डर आर्म्स को चूमने लगा......उनके चूतड दबा रहा था..
बीजी: ऊओह......बस कर पुत्तर.....कही मम्मी रसोई विच ना आ जाए..
मैं: नही.....हुन तुसी मैंनु अपने चूतडा दी पप्पी लेन दो..
बीजी: नही नही....हुने नही.....तू ए दस....गोभी ते अच्छी ली ए...
मैं: आ हो...ए गोभी त्वाड्डे चूतडा जैसी है...
बीजी: आआहहह...ओ कैसे.?..
मैं: काफ़ी बड़ी बड़ी और सफेद ....बिल्कुल त्वाड्डे चूतड जैसी.......अपनी गोभियाँ दी पप्पी लेन दो ना...
बीजी: आह...हुने नही....बाद विच लियो...मेरी गोभियाँ दी पप्पी...........................हुन मैंनु छोड़...
ये कह कर बीजी मुझसे अलग हुई...अपने कपड़े ठीक करके बाहर चली गयी...
उनकी मम्मी रात का खाना खा के गयी....
अगली सुबह मैं चाय लेकर बीजी के कमरे मे गया..
बीजी पेट के बल सो रही थी.........पहले जैसे उनकी कमीज़ उनकी कमर तक चढी हुई
थी....और..और...और..उनकी सलवार उनके चूतडो मे फसि हुई थी......
मैंने चाय रखी..
मैं: बीजी....चा रखी ए..
बीजी: अच्छा...रख दे..
मैं बीजी के पास गया और उनके चूतडो पे हाथ फेरने लगा...
बीजी: की कर रहा है पुत्तर...?.. (बीजी ने पेट के बल लेटे लेटे ही बोला)
मैं: बीजी.....अपना प्रोमिस पूरा करो..
बीजी: पप्पी दा प्रोमिस......ले ले पप्पी..
बीजी के ये कहते ही मैं बीजी के चूतडो को चूमने लगा...
बीजी ने कच्छी नही पहनी थी....उनकी सलवार का कपडा भी बहुत पतला था...इसलिए हल्के हल्के उनके चूतड दिख रहे थे....
मैं एक चूतड को चूम रहा था और दूसरे चूतड को हाथ से दबा रहा था..
मैं: ओह..बीजी.....त्वाड्डी गोबी खाने वास्ते मैं तरस गया सी..
बीजी: पुत्तर....मेरी सलवार मेरी इन गोबियाँ दे विच फसि हुई ए..........तू निकालेगा..के मैं निकालूं..?..
मैं: बीजी.....निकालने दा कोई फ़ायदा
नही....मैं फिर घुसा देवांगा...
बीजी: कैसे..?..
मैं अपनी उंगली बीजी के चूतडो के बीच मे घुसाने लगा....साथ साथ चूम भी रहा था...
बीजी: ऊहह.....पुत्तर....गोबियाँ विच....अपनी उंगली मत डाल......
मैं: ठीक है बीजी...उंगली नही डाल दा..
ये कह कर मैंने उनके चूतडो के बीच अपना
मूह डाल दिया.....और वहाँ चूमने लगा...
बीजी: ओह्ह......किथे मूह मारदा पेया है....ए जगह मूह मारान दी नही है....तू ते जानवर हो गया है..आअहह
मैंने बीजी की कमीज़ और ऊपर चढा दी.....बीजी ने अंदर कुछ ना पहना था....उनकी पीठ नंगी हो गयी....
मैं अब उनके चूतडो मे जीभ मार रहा था..और उनकी नंगी पीठ पर हाथ फेर रहा था...
मैंने बीजी को सीधा किया.....उनका पेट नंगा था........मैं उनके नंगे पेट पे टूट पड़ा...पेट को चूमने लगा
बीजी: ऊओ.........
मैंने हाथ उनकी कमीज़ मे डाल दिए....उनकी चूचियो तक पहुँच गया...और हल्के हल्के दबाने लगा..
फिर मैं अपना मूह उनकी गर्दन पे ले आया...मेरे हाथ उनके नंगे उभारों पर
थे....उनके उभार बहुत बड़े पर सोफ्ट थे........मैं उनकी गर्दन को चूम रहा था
मैं: ऊहह...बीजी....आज चेरी ते खिलाओ...
बीजी: मैंनु नही पता चेरी की होन्दी ए.....तू खुद ही ख़ाले..
मैं बीजी के होठो पे आके उनके होठ चूमने लगा....वो भी मेरे होठ चूम रही थी.....
मैं: बीजी.....चेरी ते त्वाड्डे होठा दे अंदर ए..
मैं अपनी जीभ बीजी के होठो पे मारने लगा......बीजी ने भी अपने होठ खोल दिए..
मैंने फॉरेन अपनी जीभ उनके मूह मे घुसा दी.........हम दोनो इक दूसरे दी जीभ चाट दे रहे..
मैं: ऊहह...बीजी......आज ते बादल उडने दो अपनी छाती से...
बीजी: आहः....पुत्तर.......तेरे हाथ ते बादला दे नीचे ही है.....पहाडो पे..
मैं: बीजी....हाथ नही.....मेरे होठ बादला ने नीचे होने चाही दे एँ..
बीजी: ते...आजा बादला दे नीचे...
मैंने बीजी की कमीज़ उनके मम्मो से ऊपर चढा दी...उन्होने ब्रा नही पहनी थी....
बीजी दे निप्पल्स थोड़े डार्क कलर के थे....
मैं ठोडी देर हाथ मे लेके उनके उभारों को देखता रहा..
बीजी: की देख दा पेया ए..?....मेरे निप्प्ला (निप्पल्स) दा रंग तेरी तरह थोड़ा डार्क है..
मैं: बीजी...त्वाड्डे उभार किन्ने सोने हैं.........कितने बड़े है.....और दबान इच उन्तने ही सोफ्ट.........
मैं बीजी के निप्पल्स चूसने लगा..
बीजी: आह....पुत्तर.....चूस ले......हुन पप्पी नाल तेरा काम नही बनदा.......आहह..स..स...........
बीजी मेरे सिर पे अपने हाथ रख के मेरे बालो को हल्का हल्का खींचने लगी..
बीजी: चूस ले........मेरे आम सोफ्ट है........रस वाले है......चूसने वाले है..........आआई....मैं तेनू उस दिन ए ही ते दस
दी पयी सी पागल.......मेरा इशारा आम दी तरफ नही...इनकी तरफ था..........
मैंने कुछ और चूसा तो निप्पल मे से दूध निकलने लगा..
मैं: बीजी.....तुसी हुकम दो तो त्वाड्डा दूध पी लाँ ?
बीजी: पी ले...
मैं उनका दूध पीने लगा
बीजी: आअहह...ऊओ......पी ले पुत्तर......ए दूध तेरे वास्ते ही ते रखया
ए....आआआ.....दबा दबा के चूस...पी...दोनो कटोरे खाली कर दे....
मैं उठा और मैंने अपनी टी-शर्ट निकाल दी....अब मैं सिर्फ़ निक्कर मे था....
मैंने बीजी को अपने ऊपर ले लिया........उन्होने अपने उभार मेरे होठो पे रख दिए.....और मैं
फिर दूध पीने लगा.....बीजी मेरे ऊपर थी मैं उनके नीचे....
मैं हाथ उनकी नंगी पीठ पे चला रहा था..
बीजी की कमीज़ चूची के ऊपर थी....मैंने पकड़ कर उनकी कमीज़ पूरी निकाल दी......अब बीजी ऊपर से बिल्कुल नंगी थी..बीजी और मेरा नंगा पेट हल्का सा टच कर रहा था...
बीजी: आआहहह....स.स........पु...पुतर......तू ते सारे बादल ही उड़ा दित्ते........बड़ा शैतान है तू........
मैं बीजी के नंगे बदन पे हाथ चला रहा था......
मैं: बीजी......त्वाड्डे और मेरे नंगे बदन दे मिलने से गर्मी कितनी बढ़ गयी ए..
बीजी: आहाः......सच.......मैं ते नंगे बदाना दा मिलना भूल ही गयी सी...मेरे पति जो टूर ते रेन्दे एन..........आहह...
मैं बीजी के चूतडो को दबाने लगा.............फिर उनके चूतडो के बीच अपनी उंगली घुसानी शुरू कर दी....
बीजी: आअहह.....देख....ऐसा मत कर......कुछ ते....ससस्स...आ... शरम रख अपनी मालकिन
से...
मैं उंगली उनके चूतडो के बीच घुसाता रहा और दूध पीता रहा...
मैं: मेरी मालकिन ते बड़ी अच्छी है.......बहुत हसीन है.....उसदा शरीर कितना मक्खन ए.......
बीजी: ऊऊओ...ह....स......मेरा नौकर वी अच्छा ए......बस.....स.स.....थोड़ा ज़्यादा
शरारती ए.........मेरी पप्पीया लेन्दा ए.......मेरा दूध पीन्दा ए..........मेरे अन्डर
आर्म्स नू चूम्दा ए....अन्डर आर्म्स दे बालो नू चाट-दा ए.......मेरे चूतडो दे विच मूह
मारदा ए................................................. . .........पुत्तर.....दूसरा कटोरा वी ते ए........
मैं दूसरे उभार ते आ गया.......अपने मूह मे निप्पल लेकर बीजी का दूध पीने लगा...
मैं अब भी अपनी उंगली उनके चूतडो के बीच घुसा रहा था...
मैं: बीजी मैं त्वाड्डी धुन्नी (नेवेल) ते टैस्ट कीत्ती नही आज तक...
बीजी मेरे ऊपर ही रही....और अपना पेट मेरे मूह पर ले आई......मैं उनके नंगे पेट को
चूमने लगा.......लेकिन बीजी की धुन्नी के ऊपर उनकी सलवार चढी हुई थी..
मैं: बीजी...तुस्सी अपनी धुन्नी ते वी बादल कर रखे है......
बीजी ने अपनी सलवार हल्की सी नीचे कर दी.....
बीजी: ले.....चाट ले अपनी बीजी दी धुन्नी वी......वरना कहेगा कि धुन्नी की पप्पी नही
दी..
बीजी दा पेट मेरे मूह ते था....ते मैं उनकी धुन्नी विच जीभ मार रहा था....
कुछ देर बाद बीजी घोडी बन गयी और अपने उभार मेरे होठ पे रख दिए और मैं दूध पीने
लगा... अब मैंने बीजी की सलवार का नाडा खोलना शुरू किया...
बीजी: आअहह....ना पुत्तर ना.......ए मत
कर...आअहह......
मैं: प्लीज़ बीजी......पहाडा ते बादल हटा दित्ते है ते.....फुट्बाल से वी कवर हटा दो..
बीजी: फुट्बाल!.....मेरे चूतड कोई खेलन दी चीज़ ए की..?
मैं: तुस्सी मैंनु खेलन दो तद् ना (तब ना)........खोलन दो नाडा....कर दो अपने चूतडा नू आज़ाद....
मैंने हल्के हल्के नाडा खोल दिया....और हाथ सलवार मे डाल दिए.... उनके नंगे चूतडो को मैंने पहली बार छुआ
था....... काफ़ी बड़े चूतड थे उनके.....लेकिन उतने ही सोफ्ट....
बीजी: आहह........ते तू नही मानेगा......
मैं: बीजी....मैं कितनी वार सलवार दे ऊपरों ही त्वाड्डे चूतड दबाए है......आज पहली
वार मैं त्वाड्डे नंगे चूतडा नू दबा रहा हां...
बीजी घोडी बनी हुई थी.....मेरे मूह मे उनके निप्पल थे...
मैं धीरे धीरे उंगली उनके चूतडो के बीच मे ले गया.....
उनके चूतडो के बीच मे काफ़ी बाल थे........
मैं उंगली उनके चूतडो के बीच की स्किन पे मलने लगा..
बीजी: आहह...........ससस्स....तू ते ऐसे उंगली चलांदा पेया है...जैसे किसी दी माँग भर रहा हो...
मैं: हां बीजी.......तुसी सिंदूर ले आओ.....ते मैं त्वाड्डे चूतडो दे विच दी माँग भर दान्गा..
बीजी के पलंग के साथ एक ड्राअर था...बीजी ने हाथ लंबा करके उस मे से एक छोटी सी
डिब्बी निकाली.......और खोल के मेरे सामने करदी...
बीजी: ए ले....
मैं: की बीजी..
बीजी: ए...सिंदूर ए....भर दे मेरी पिच्छे दी माँग...
मैं उनके चूतड से हाथ हटाया.....डिब्बी से चुटकी मे सिंदूर भरा.....और उनके चूतडो के
बीच सिंदूर भरने लगा...