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पड़ोसन का प्यार compleet

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usaka dam sa ghuTane laga par usapar dhyaan na dekar Shobha ne use aur

bheencha aur apana uroj aur usake muh me Thoonsane ki koshish karate hue

usane dhakke maarana chaalu rakhaa

Prachi ko apana dam ghuTata sa laga par muh me khachaakhach bhara stan ka

mulaayama maas bhi use madahosh kar rah tha. Shobha ka yah jabaradasti ka

andaaj bhi use bahut pyaara laga. aakhir Shobha badi thi, usaki didi thi, use itana

sukh

diya tha, aur usako poora hak tha ki wo jo chaahe jo kare. chupachaap pade

pade wah Shobha ki choonchi choosati rahi aur usake dhakke sahan karati rahi.

Shobha ki waasana ab dhadhak rahi thi. uTh kar wah Prachi se boli. "Prachi chal,

ab striyon ka khaas aasan karate hain, siksaTi nayin. mujhe ab nahi rah jaata. tu

hai aisi meeThi ki tera fir se ras peene ka man ho rah hai. meri khajaane me bhi

kaafi ras jama ho gaya hai lagata hai tere liye" Prachi kuCh nahi boli par usaki

aankhon ke bhaav se saaf tha ki kuCh bhi karane ko wah taiyaar hai.

apani karawaT par ulaTi baaju se leT kar Shobha ne Prachi ki kamar me haath

Daalakar use paas kheencha aur usaki Taamg uThaakar apana muh unake beech

Daal diya. khud usane apani ek Taamg uThaayi aur Prachi ke sir ko apani bur se

saTa diya. Prachi ke sir ko apani jaanghon me jakadakar usane usake muh par

dhakke maarane shuru kar diye.

yah aasan Prachi ke man ko lubha gaya. usane suna bahut tha par kiya kabhi nahi

tha. Shobha badi kushalata se usake nitamb pakadakar apani jeebh se use chod

rahi thi aur beech beech me apani ungali se usake guda ko TaTol deti thi. Prachi

bhi man lagaakar Shobha ki choot choosane me lagi thi. usane apani baahom me

Shobha ka bhaari bharakama chootad bhar liye the aur unhe dabaate hue poore

jor se apani saheli ki bur ka paani peene me lagi thi.

wah raat kaise aur kab gujari, Prachi ko samajh me hi nahi aaya. wah ek alag

duniya me thi, uttejana aur kaamana ke swarg me aisi kho gayi thi ki samaya ko

koi ehasaas nahi bacha tha.

Shobha ne apani saathin ka poora upabhog kiya. use hastamainthun ke naye

tareeke sikhaaye, kaise do ungali se bur khodi jaati hai, kaise clit ko amgooThe

se ragadate hue jeebh ko chammach ki tarah choot me Daalakar ras nikaala jaata

hai aadi aadi. apani waasana poorti me Shobha ne koi kami nahi hone di.

baraabar apani bur Prachi se chusawaayi. jeebh se poori choot chaTawaayi aur

chudawaayi. beech me jab Shobha ki bur me jeebh karate karate Prachi ki jeebh

dukhane lagi aur wah ruk gayi to Shobha ne use neeche paTakakar apani

jaangheM jakadakar usake sir ko pakad liya aur jabaradasti apani bur usake muh

par ragadane lagi.

aakhir raat ko jab Prachi poori last ho gayi aur simaTakar sone ki koshish karane

lagi to Shobha ne apana aakhari teer Choda. usane nishchaya kiya ki Prachi ki

choot ke ras ki boond boond jabatak wah nahi nichod leti tabatak use nahi

Chodegi.

thaki hui Prachi ko usane bistar par seedha sulaaya aur khud usapar ulaTi baaju

se so gayi. apani bur usane Prachi ke muh par jamaayi aur khud jhuk kar Prachi

ki

bur bhagoShThon samet apane muh me bhar li. fir use choosate hue, Prachi ke

clit ko apane amgooThe se ragadate hue wah Prachi ke muh ko chodane lagi

jaise usake muh ko sayikil ki seeT banaakar sawaari kar rahi ho.

jab Shobha ne daaMton me Prachi ke clit ko le kar halke se chabaaya to bechaari

Prachi ko sahan nahi hua. wah itana jhad chuki thi ki usaki bur me kuCh nahi

bacha tha. ab apani choot ya clit par kisi tarah ka sparSh use sahan nahi ho rah

tha. bechaari ChooTane ke liye haath pair maarate hue Shobha ko kahane ki

koshish kar rahi thi ki didi ab Chodo, main mar jaaoongi. par Shobha ne usaka

muh apani bur se kas ke band kar rakha tha.

udhar Shobha apana poora kaamakaushal laga rahi thi ki Prachi ko aur jhadaaye,

usaki bur ko poora nichod le. khud usaki bur abhi bhi mast thi aur jabaradasti

wah Prachi ko apani choot ka paani pila rahi thi.

aakhir bechaari Prachi ko apani choot ki nason par padata yah ati sukh ka bojh

sahan nahi hua aur ek lambi saans lekar wah behosh ho gayi. usake shareer ke

Dheele padane ke baad Shobha ne use Choda. uTh kar Shobha ne Prachi ke

nistej pade bhoge hue gore badan ko dekha. usake honthom par ek muskaan thi,

kuCh meeThi aur kuCh kuTil. aaj wah poori tRupt thi, aakhir usane apani is

padosan ko fansa kar use man chaahe waisa bhog liya tha. use apane is meeThe

jaal me fansaane ka usaka iraada poora ho gaya tha. ab is jaal me se Prachi ka

ChooTana asambhav tha.

Prachi ke Dheele pade shareer ko baahom me lekar wah so gayi jaise wah

shareer kisi aurat ka nahi, balki koi bada TeDi beeyar ho, khilauna ho. Prachi ke

badan se khelate khelate Shobha ki bhi aankh lag gayi.

 


सुबह प्राची बहुत देर से उठी. वह भी तब जब सुबह दर्शन ने बेल बजाई. उसका अंग अंग टूट रह था. पैरों मे मानों जान ही नही थी. पर मन मे एक अजीब सी तृप्ति और सुख की भावना थी.

दर्शन सुबह अपने मित्र के यहाँ से लौट आया था. अपने फ्लॅट पर ताला देख कर उसे याद आया कि मा शोभा मौसी के यहाँ होगी. उसने शोभा के फ्लॅट की बेल बजाई.

शोभा ने दरवाजा खोला. दर्शन को देखकर मुस्कराई और उसे अपने घर की चाबी दी. कहा कि रात भर उन्होने गप्पें मारी और देर से सोई इसलिए उसकी मा अभी अभी उठी है और अभी आती है.

दर्शन की नज़र शोभा के गाउन पर गयी. ऊपर के दो बटन खुले थे, उनमे से शोभा के उरोजो का ऊपरी भाग दिख रह था. उसने ब्रा भी नही पहनी थी. शोभा मन ही मन मुस्कराई और जान बूझकर नीचे पड़ा न्यूज़ पेपर उठाने को झुकी. उसकी करीब करीब पूरी चून्चिया, निपलों को छोड़कर, दर्शन को दिखाने लगीं. वह बेचारा शरमा कर नज़र हटाकर बोला "शोभा मौसी, मा को आराम करने दो, कोई जल्दी नही है, मैं घर खोलता हूँ, मा को फिर भेज देना.

शोभा कुछ देर उसे देखती रही जब तक वह अपने घर के अंदर नही चला गया. 'बड़ा स्वीट लड़का है, एकदम गोरा और चिकना, प्राची पर गया है. लगता नही है कि इंजिनियरिंग के पहले साल मे होगा, लगता है जैसे हाई स्कूल मे हो. इसे भी फँसाना पड़ेगा, माल है' मन ही मन शोभा ने सोचा.

शोभा ने अंदर जाकर प्राची को बताया कि दर्शन आ गया है. वह वैसे ही नंगी पड़ी थी. शोभा की नज़र अपने बदन पर गाड़ी हुई देखकर शरमा कर उठी और जल्दी जल्दी कपड़े पहनने लगी. शोभा के सामने वह ऐसे शरमा रही थी जैसे रात भर चुदने के बाद कोई नववधू सुबह अपने पति से शरमाये. उसका अंग अंग दुख रह था पर यह पीड़ा भी उसे एक अलग तृप्ति का

एहसास दिला रही थी.

शोभा का एक चुंबन लेकर वह जाने को तैयार हुई. अपना पल्लू संभालते हुए वह बोली "शोभा दीदी, तुमने तो मुझे पूरा निचोड़ लिया, कुछ नही छोड़ा मेरे बदन मे. लगता है कि जान ही नही है पैरों मे."

शोभा उसे दरवाजे पर छोड़ने आई. उसके कान मे बोली "आराम कर मेरी रानी. जल्दी फिर से रस बना अपने शरीर मे. मेरे मूह को स्वाद लग गया है, अब तू मुझसे नही बच सकती." प्रेम और अधिकार से कहे गये इस वासना भरे वाक्य से प्राची का चेहरा लाल हो गया. लज्जा भरी एक मुस्कान शोभा को देकर वह अपने घर मे चली गयी.

वह दिन ऐसे ही बीत गया. दर्शन ने कॉलेज को बंक किया और घर मे ही पढ़ाई करता रहा. इसलिए उस दिन दोनो सखियों की यह कामलीला आगे नही बढ़ सकी. दूसरे दिन भी दर्शन घर मे ही था. प्राची ने दो दिन बस आराम किया, सोई ही रही, बस दर्शन को चाय नाश्ता या खाना बना देने के लिए उठती थी. दर्शन को लगा मा की तबीयत ठीक नही है इसलिए वह भी कुछ नही बोला.

दूसरे दिन दोपहर तक उसके बदन मे फिर ताज़गी लौट आई थी. आराम करने से उसकी थकान दूर हो गयी थी पर कामाग्नि फिर से धधकने लगी थी. उस रात की रति ने जैसे उसकी दबी कामवासना को फिर से सुलगा दिया था. उसे बार

बार लगता था कि जाए और शोभा की बाहों मे खुद को झोंक दे. पर दर्शन घर मे होने से बेचारी कुछ कर नही पा रही थी. इतना अच्छ मौका था, शोभा भी अकेली थी, नेहा भी नही थी. मन मार कर प्राची रह गयी. बस बीच बीच मे गप्पें लड़ाने के बहाने आधे घन्टे को वह शोभा के यहाँ जा आती थी. उस आधे घन्टे मे दोनो औरते चूमा चाटि और स्तनमर्दन कर लेती थीं, पर इससे शांत होने के बजाय प्राची की कामाग्नि और धधक उठी थी. शोभा की मादक भूखी नज़र और नटखट मुस्कान

उसे और परेशान कर रही थी. शोभा खुश थी, वह अपनी वासना पर नियंत्रण रख सकती थी, उसे मज़ा आ रह था कि उसकी यह सहेली कैसे उसके पीछे पागल हो गयी है.

कामदेव शायद प्राची पर मेहरबान थे. उस शाम को दर्शन ने उसे जल्दी खाना बनाने को कहा. खाना खाकर उसने अपनी किताबें उठायि और अपने दोस्त के यहाँ चला गया. प्राची को कह गया की आज रात वह फिर से अपने दोस्त के यही रहकर पढ़ाई करेगा. प्राची की खुशी का पारावार ना रहा. दर्शन के जाते ही वह अपना फ्लॅट बंद करके शोभा के यहाँ जा पहूंची और जल्द ही शोभा के बेडरूम मे उन दो नारियों की रति लीला फिर से शुरू हो गयी.

 
पहली रात की धुआँधार कामक्रीड़ा के बाद उनकी वासना की धार थोड़ी कम हो गयी थी इसलिए आज उन्होने बड़े प्यार से और धीरे धीरे आपस मे प्रणय किया. खूब चुंबन लिए, एक दूसरे के कपड़े उतार कर नग्न शरीर को देखने और छूने का आनंद लिया और फिर आधे घन्टे तक प्रेम से सिक्सटी नाइन किया.

पहले स्खलन के बाद जब वे लिपट कर बिस्तर पर पड़ी थी तब शोभा अपनी दो उंगलियाँ प्राची की बुर मे डालकर उसे धीरे धीरे चोदने लगी. प्राची मचल कर बोली "शोभा, तीन उंगली डाल ना, दो से मेरा मन नही भरता"

"लगता है की पति के लंड की याद आ रही है, क्यों" शोभा ने चुटकि ली.

"हां दीदी, इनका लंड बहुत मस्त है, मोट और लंबा. जब भी चोदते हैं तो मज़ा आता है. पर पिछले दो साल मे इन्होने मुझे दस बार भी नही चोदा होगा, ये यहाँ रहते ही कहाँ है मुझे चोदने को, और रहते हैं तब मूड हो ना हो" प्राची ने शिकायत की.

"मेरे पास इसका भी नुस्ख़ा है. मैं डिल्डो लाती हूँ ठहर. वैसे इसका इस्तेमाल मैं कम ही करती हूँ. स्त्रियों को आपस मे संभोग के लिए मर्दों के इस नकली भाग की भी ज़रूरत नही पड़ना चाहिए ऐसा मुझे लगता है. हां कभी कभी ठीक है, मज़ा आता है" कहकर शोभा उठी और अपनी अलमारी से एक डिल्डो निकाल लाई. प्राची उसे देखती ही रह गयी. उसने एक दो

फोटो मे सादे डिल्डो देखे थे पर ऐसा कभी नही देखा था. वी शेप का डिल्डो था, करीब डेढ़ इंच मोटा. वी के दोनो ओर के भाग करीब करीब आठ इंच के थे. बीच मे बाँधने के लिए स्ट्रप्स थे.

प्राची के चहरे के भाव देखकर शोभा हँसने लगी. "अरे यह ख़ास औरतों के लिए है, याने लेस्बियनो के लिए. दोनो अपनी अपनी चूत मे एक एक हिस्सा डालकर चोद सकती हैं" शोभा टाँग फैलाकर उसके पास बैठ गयी और एक भाग उसने अपनी बुर मे घुसेड लिया. उसकी बुर मे वह आराम से समा गया. शोभा ने फिर स्ट्रप्स अपने चूतडो के चारों ओर बाँध लिए. प्राची की आँखों के प्रश्न को देखकर उसने समझाया. "अरी मेरी बुद्धू रानी, अगर औरत को मर्द की तरह चोदना है तो ऐसे बाँधना पड़ता है एक को. नही तो दोनो की बुर से बार बार बाहर आ जाता है. उसमे भी मज़ा आता है पर जमा के चुदाई नही होती. जो मर्द बनना चाहती है वह ये स्ट्रैप बाँध लेती है और उसकी बुर मे यह डिल्डो फँसा रहता है, इसलिए वह मन लगाकर अपनी साथिन को चोद सकती है. जैसे अब मैं तुझे चोदून्गि.

प्राची के मन मे एक प्रश्न था. "शोभा दीदी, एक बात पूछूँ, तुम्हे ऐसे डिल्डो की क्या ज़रूरत है?"

"मज़ा आता है प्राची. वैसे मुझे बिना डिल्डो के मस्ती करना ज़्यादा अच्छा लगता है दूसरी औरतों के साथ. पर इससे चुदवाने मे भी मज़ा आता है. और कभी कभी अपने प्रिय व्यक्ति के लिए ये सब करना पड़ता है"

 
"पर तेरे पति तो तुझे चोदते होंगे ना, याने अभी वे नही हैं पर जब यहाँ थे तब. तेरे जैसी गरमागरम औरत पर तो वे रोज चढ़ते होंगे, उन्हे डिल्डो की क्या ज़रूरत है?" प्राची ने पूछा. डिल्डो देख कर उसकी चूत और पसीजने लगी थी. उधर शोभा ने जिस आसानी से आठ इंच का एक भाग आराम से बिना रुके पूरा अपनी चूत मे घुसेड लिया था उससे प्राची सोचने लगी कि

क्या गहरी होगी छोभा की चूत, बिना रुके इस डिल्डो को खा गयी. शोभा ने उसे मुठ्ठी मे पकड़ा कर हौले हौले आगे पीछे कर रही थी जैसा मर्द हस्तमैथुन के समय करते है. बिलकुल ऐसा लगता था कि जैसे उसका लंड ऊग आया हो.

"नही रानी, उन्होने तो एक बार भी नही चोदा आज तक, असल मे वे ज़रा अलग किस्म के आदमी हैं, मुझे या किसी और औरत को चोदने मे उन्हे कोई रूचि नही है. तू समझ तो गयी उन्हे क्या अच्छ लगता है, बस मेरी और तेरी कहानी है

समझ ले उलटे किस्म की. हमारी शादी तो बस एक दिखावा है, हमने मिल कर सोच समझ कर की है कन्वीनियेन्स के लिए. वे भी खुश और मैं भी खुश. इसलिए उन्होने आराम से दुबई की नौकरी पकड़ ली. चल बहुत बाते हो गयीं, लेट नीचे और अपने नीचे वह तकिया ले ले. अब तुझे दिखाती हूँ कि चोदना क्या होता है"

वह प्राची की फैली हुई टाँगों के बीच घुटनों पर बैठ गयी. बिलकुल मर्द के अंदाज मे डिल्डो पकड़कर उसने उसका गोल सिरा प्राची की चूत पर रगड़ कर गीला किया और फिर चूत के मूह पर रखकर पेलने लगी. प्राची की तपती चूत के लिए वह नकली लंड मानों एक वरदान था. उसने आँखे बंद कर ली और लंड अंदर घुसने का आनंद लेने लगी. छः इंच डिल्डो आराम से अंदर गया फिर रुक सा गया. शोभा ने किसी सधे चोदु के जैसे प्राची की कमर पकड़कर एक धक्का मारा और बाकी बचा भाग भी सप्प से प्राची की बुर मे समा गया. शोभा अब उसे सपासप चोदने लगी. वेदना और सुख की मिली जुली अनुभूति से प्राची चीख पड़ी. पर वह इतनी मस्ती मे थी कि अपनी टांगे उसने प्राची शोभा की कमर के इर्द गिर्द लपेट ली और उससे चिपट कर नीचे से अपने चूतड़ उछालने लगी.

शोभा अब शातिर चोदु जैसी उसे चोद रही थी, बिलकुल एक मर्द की तरह. कस कस के डिल्डो अंदर पेलति और अचानक रुक कर हौले हौले उसे अंदर बाहर करती. फिर हचक हचक कर चोदने लगती. प्राची को उसने अपने रति कौशल से पाँच मिनिट मे खलास कर दिया.

प्राची उससे लिपट कर चूमते हुए बोली. "शोभा, क्या मस्त चोदति हो तुम! मेरे पति ने भी आज तक ऐसा नही चोदा

मुझे. लगता है काफ़ी प्रैक्टिस है तुझे"

शोभा उसे फिर से चोदने लगी थी. प्राची के होंठों को चूमते हुए बोली "हां, बार बार करके मुझे अच्छि प्रैक्टिस हो गयी है"

प्राची को कुछ समझ मे नही आ रहा था. कुछ देर वह कमर उछाल कर चुदने का आनंद लेती रही फिर शोभा के गालों को अपनी हथेलियों मे पकड़कर बड़ी उत्सुकता से पूछा. "शोभा बता ना. किसके साथ प्रैक्टिस करती है? मेरी तो कुछ समझ मे नही आ रहा है, तेरे पति यहाँ है नही, उनके साथ वैसे भी ये डिल्डो बेकार है, तुझे कही ज़्यादा आते जाते नही देखा कि छिप कर किसी से मिलने जाती हो, किसी औरत को तेरे यहाँ आते भी नही देखा. यहाँ अकेली रहती है अपनी बेटि के साथ, फिर तुझे मौका ही कब मिलता है डिल्डो से प्रैक्टिस करने का?"

शोभा हँसने लगी. उसने उठ कर अपने हाथ प्राची के दोनो बाजू मे टेके और ज़ोर ज़ोर से डिल्डो पेलते हुए बोली "यह देख, अब इस तरह चोदति हूँ, इसमे धक्के ज़ोर के लगते हैं. हां तो तू पूछ रही थी कि प्रैक्टिस कब करती हूँ. अरे भाई करीब करीब रोज रात को करती हूँ, वीक एन्ड मे तो दोपहर को भी मौका मिलता है"

"अरे पर नेहा रात मे और वीक एन्ड मे दोपहर को घर मे रहती है तब तू कैसे ...." कहते कहते प्राची रुक गयी. शोभा के चेहरे के नटखट भाव को देख कर वह चुप हो गयी. सहसा उसके दिमाग़ मे बिजली सी कौंध गयी.

"शोभि दीदी! याने नेहा तो नही! उई मा ये कैसा छिछोरापन है! ये तो उसकी मा है ना? सौतेली भले ही सही?"

 
प्राची की बुर मस्ती से पसीज उठी. इस तरह के नाजायज़ संबंध की उसने कभी कल्पना भी की थी. ये ऊँची पूरी साँवली औरत और वह दुबली पतली गोरी कमनीय युवती? प्राची की चूत अब इतनी गीली हो चुकी थी कि डिल्डो फिसल कर चूत के बाहर आते आते बचा. अब उसे काफ़ी बाते सॉफ हो गयी थी. उसे पहले ही मालूम था कि मा बेटी मे बहुत प्यार है, सौतेले होने के बावजूद. नेहा इतनी सुंदर इक्कीस साल की युवती थी पर उसने कभी उसे लड़को के साथ नही देखा था. कॉलेज छूटते

ही नेहा सीधी घर आती थी, कभी ग्रूप मे घूमने नही जाती थी. कही जाना होता तो मा बेटि साथ साथ जाते.

परसों दोपहर को ब्रा के हुक प्राची से खुलवाते समय शोभा बोली थी कि नेहा हमेशा उसे ब्रा के हुक लगाने और निकालने मे मदद करती है. तब उसे ज़रा अजीब सा लगा था कि जवान हुई बेटी से वो ऐसे काम करवाती है. अब सब सॉफ हो गया था.

शोभा को प्राची की स्थिति देखकर मज़ा आ गया था. मा बेटी की यह नाजायज़ रति की बात सुनने के बात प्राची के चेहरे पर झलक आई कामुकता से वह भी खुद उत्तेजित हो गयी थी. उसने अपनी कमर के स्ट्रप्स निकाले और डिल्डो भी पुक्क की आवाज़ से बाहर खींच लिया. प्राची को बोली "चल बहुत मज़ा ले लिया तूने मेरी रानी, मैं थक गयी अब, मेरी भी बुर कुलबुला रही है. अब तू मुझे चोद, ज़रा मेहनत कर अपनी दीदी की खातिर"

शोभा अपने चूतडो के नीचे तकिया लेकर लेट गयी और चूत खोल कर लेट गयी. प्राची ने स्ट्रप्स अपनी कमर मे बाँधे और फिर वो नकली रबर का लंड शोभा की बुर मे ज़ोर से घुसेड़ा दिया जैसा शोभा को चाहिए था. शोभा ने सुख की सिसकारी छोड़ी और प्राची शोभा को चोदने लगी "अब बता ना दीदी, पूरी कहानी बता. सच लगता है कि मेरी बुर आज मुझे मार डालेगी, इतना मीठा मज़ा आ रह है. बताओ ना दीदी" प्राची से चुदते हुए शोभा ने अपनी और नेहा की कहानी बताई..........

कंटिन्यूड…

भाग 1 समाप्त

 


Subah Prachi bahut der se uThi. wah bhi tab jab subah Darshan ne bel bajaayi.

usaka ang ang TooT rah tha. pairom me maanon jaan hi nahi thi. par man me ek

ajeeb si tRupti aur sukh ki bhaavana thi.

Darshan subah apane mitra ke yahaan se lauT aaya tha. apane flat par taala dekh

kar use yaad aaya ki ma Shobha mausi ke yahaan hogi. usane Shobha ke flat ki

bel bajaayi.

Shobha ne darawaaja khola. Darshan ko dekhakar muskaraayi aur use apane ghar

ki chaabi di. kah ki raat bhar unhone gappen maari aur der se soyi isaliye usaki

ma abhi abhi uThi hai aur abhi aati hai.

Darshan

ki najar Shobha ke gaaun par gayi. oopar ke do baTan khule the, uname

se Shobha ke urojon ka oopari bhaag dikh rah tha. usane bra bhi nahi pahani thi.

Shobha man hi man muskaraayi aur jaan boojhakar neeche pada nyooz pepar

uThaane ko jhuki. usaki kareeb kareeb poori choonchiyaan, nipalon ko

Chodakar, Darshan ko dikhane lageen. wah bechaara sharam kar najar haTaakar

bola "Shobha mausi, ma ko aaraama karane do, koi jaldi nahi hai, main ghar

kholata hoon, ma ko fir bhej dena.

Shobha kuCh der use dekhati rahi jab tak wah apane ghar ke andar nahi chala

gaya. 'bada sweeT ladaka hai, ekdam gora aur chikana, Prachi par gaya hai.

lagata nahi hai ki engineering ke pahale saal me hoga, lagata hai jaise hayi

school me ho. ise bhi fansaana padega, maal hai' man hi man Shobha ne socha.

Shobha ne andar jaakar Prachi ko bataaya ki Darshan a gaya hai. wah waise hi

nangi padi thi. Shobha ki najar apane badan par gadi hui dekhakar sharam kar

uThi aur jaldi jaldi kapade pahanane lagi. Shobha ke saamane wah aise sharam

rahi thi jaise raat bhar chudane ke baad koi navavadhu subah apane pati se

sharamaye. usaka ang ang dukh rah tha par yah peeda bhi use ek alag tRupti ka

ehasaas dila rahi thi.

Shobha a ek chumban lekar wah jaane ko taiyaar hui. apana pallu saMbhaalate

hue wah boli "Shobha didi, tumane to mujhe poora nichod liya, kuCh nahi Choda

mere badana me. lagata hai ki jaan hi nahi hai pairom me."

Shobha use darawaaje par Chodane aayi. usake kaan me boli "aaraama kar meri

raani. jaldi fir se ras bana apane shareer me. mere muh ko swaad lag gaya hai, ab

tu mujhase nahi bach sakati." prema aur adhikaar se kahe gaye is waasana bhare

waakya se Prachi ka chehara laal ho gaya. lajja bhari ek muskaan Shobha ko

dekar wah apane ghar me chali gayi.

wah din aise hi beet gaya. Darshan ne college ko baMk kiya aur ghar me hi

padhayi karata raha. isaliye us din dono sakhiyon ki yah kaamaleela aage nahi

badh saki. doosare din bhi Darshan ghar me hi tha. Prachi ne do din bas aaraama

kiya, soi hi rahi, bas Darshan ko chaay naashta ya khaana bana dene ke liye

uThati thi. Darshan ko laga ma ki tabeeyat Theek nahi hai isaliye wah bhi kuCh

nahi bola.

doosare din dopahar tak usake badan me fir taajagi lauT aayi thi. aaraama karane

se usaki thakaan door ho gayi thi par kaamaagni fir se dhadhakane lagi thi. us

raat ki rati ne jaise usaki dabi kaamawaasana ko fir se sulaga diya tha. use baar

baar lagata tha ki jaaye aur Shobha ki baahom me khud ko jhoMk de. par

Darshan

ghar me hone se bechaari kuCh kar nahi pa rahi thi. itana achCha mauka

tha, Shobha bhi akeli thi, Neha bhi nahi thi. man maar kar Prachi rah gayi.

bas beech beech me gappen ladaane ke bahaane aadhe ghanTe ko wah Shobha ke

yahaan ja aati thi. us aadhe ghanTe me dono aurate choona chaaTi aur

stanamardan kar leti theen, par isase shaant hone ke bajaay Prachi ki kaamaagni

aur dhadhak uThi thi. Shobha ki maadak bhookhi najar aur naTakhaT muskaan

use aur pareshaan kar rahi thi. Shobha khush thi, wah apani waasana par

niyaMtraN rakh sakati thi, use maja a rah tha ki usaki yah saheli kaise usake

peeChe paagal ho gayi hai.

kaamadev shaayad Prachi par meharabaan the. us shaana ko Darshan ne use jaldi

khaana banaane ko kaha. khaana khaakar usane apani kitaabeM uThaayi aur

apane dost ke yahaan chala gaya. Prachi ko kah gaya ki aaj raat wah fir se apane

dost ke yahi rahakar padhayi karega. Prachi ki khushi ka paaraawaar na raha.

Darshan ke jaate hi wah apana flat band karake Shobha ke yahaan ja pahoonchi

aur jald hi Shobha ke bedroom me un do naariyon ki rati leela fir se shuru ho

gayi.

pahali raat ki dhuaandhaar kaamakreeda ke baad unaki waasana ki dhaar thodi

kam ho gayi thi isaliye aaj unhone bade pyaar se aur dheere dheere aapas me

praNaya kiya. khoob chumban liye, ek doosare ke kapade utaar kar nagna

shareer ko dekhane aur Choone ka anand liya aur fir aadhe ghanTe tak prema se

siksaTi nayin kiya.

pahale skhalan ke baad jab we lipaT kar bistar par padi thi tab Shobha apani do

ungaliyaan Prachi ki bur me Daalakar use dheere dheere chodane lagi. Prachi

machal kar boli "Shobha, ti ungali Daal na, do se mera man nahi bharataa"

"lagata hai ki pati ke lund ki yaad a rahi hai, kyon" Shobha ne chuTaki li.

"haan didi, inaka lund bahut mast hai, moTa aur lamba. jab bhi chodate hain to

maja aata hai. par piChale do saal me inhone mujhe das baar bhi nahi choda

hoga, ye yahaan rahate hi kahaan hai mujhe chodane ko, aur rahate hain tab

mooD ho na ho" Prachi ne shikaayat ki.

"mere paas isaka bhi nuskha hai. main DilDO laati hoon Thahar. waise isaka

istemaal main kam hi karati hoon. striyon ko aapas me sambhog ke liye mardon

ke is nakali bhaag ki bhi jaroorat nahi padana chaahiye aisa mujhe lagata hai.

haan kabhi kabhi Theek hai, maja aata hai" kahakar Shobha uThi aur apani

almaari se ek DilDo nikaal laayi. Prachi use dekhati hi rah gayi. usane ek do

foTo me saade DilDo dekhe the par aisa kabhi nahi dekha tha. vi shep ka DilDo

tha,

kareeb Dedh inch moTa. vi ke dono or ke bhaag kareeb kari aaTh inch ke

the. beech me baandhane ke liye sTraps the.

Prachi ke chahare ke bhaav dekhakar Shobha hansane lagi. "are yah khaas

auraton ke liye hai, yaane lesbiyanon ke liye. dono apani apani choot me ek ek

hissa Daalakar chod sakati hain"

Shobha Taamg failaakar usake paas baiTh gayi aur ek bhaag usane apani bur me

ghuseda liya. usaki bur me wah aaraama se sama gaya. Shobha ne fir sTraps

apane chootadon ke chaaron or baandh liye. Prachi ki aankhon ke prashna ko

dekhakar usane samajhaaya. "ari meri buddhu raani, agar aurat mard ki tarah

chodana hai to aise baandhana padata hai ek ko. nahi to dono ki bur se baar baar

baahar a jaata hai. usame bhi maja aata hai par jama ke chudayi nahi hoti. jo

mard banana chaahati hai wah ye sTraip baandh leti hai aur usaki bur me yah

DilDo fansa rahata hai, isaliye wah man lagaakar apani saathin ko chod sakati

hai. jaise ab main tujhe chodoongi.

Prachi ke man me ek prashna tha. "Shobha didi, ek baat pooChoon, tumhe aise

DilDo ki kya jaroorat hai?"

"maja aata hai Prachi. waise mujhe bina DilDo ke masti karana jyaada achCha

lagata hai doosari auraton ke saath. par isase chudawaane me bhi maja aata hai.

aur kabhi kabhi apane priya vyakti ke liye ye sab karana padata hai"

"par tere pati to tujhe chodate honge na, yaane abhi we nahi hain par jab yahaan

the tab. tere jaisi garamaagarama aurat par to we roj chadhate honge, unhe DilDo

ki kya jaroorat hai?" Prachi ne pooCha. DilDO dekh kar usaki choot aur

paseejane lagi thi.

 
udhar Shobha ne jis aasaani se aaTh inch ka ek bhaag aaraama

se bina ruke poora apani choot me ghuseda liya tha usase Prachi sochane lagi ki

kya gahari hogi chobha ki choot, bina ruke is DilDo ko kha gayi. Shobha use

muThThi me pakada kar haule haule aage peeChe kar rahi thi jaisa mard

hastamainthun ke samaya karate hai. bilakul aisa lagata tha ki jaise usaka lund oog

aaya ho.

"nahi raani, unhone to ek baar bhi nahi choda aaj tak, asal me we jara alag kisma

ke aadami hain, mujhe ya kisi aur aurat ko chodane me unhe koi ruchi nahi hai.

tu samajh ho gayi unhe kya achCha lagata hai, bas meri aur teri kahaani hai

samajh le ulaTe kisma ki. hamaari shaadi to bas ek dikhaawa hai, hamane mil kar

soch samajh kar ki hai kanveeniyens ke liye. we bhi khush aur main bhi khush.

isaliye unhone aaraama se Dubai ki naukari pakad li. chal bahut baate ho gayeen,

leT neeche aur apane neeche wah takiya le le. ab tujhe dikhaati hoon ki chodana

kya hota hai"

wah

Prachi ki faili hui Taangom ke beech ghuTanon par baiTh gayi. bilakul

mard ke andaaj me DilDO pakadakar usane usaka gol sira Prachi ki choot par

ragad kar geela kiya aur fir choot ke muh par rakhakar pelane lagi. Prachi ki

tapati choot ke liye wah nakali lund maanon ek varadaan tha. usane aankhe band

kar li aur lund andar ghusane ka anand lene lagi. Chah inch DilDo aaraama se

andar gaya fir ruk sa gaya. Shobha ne kisi sadhe chodu ke jaise Prachi ki kamar

pakadakar ek dhakka maara aur baaki bacha bhaag bhi sapp se Prachi ki bur me

sama gaya. Shobha ab use sapaasap chodane lagi. vedana aur sukh ki mili juli

anubhooti se Prachi cheekh padi. par wah itani masti me thi ki apani Taange

usane Prachi Shobha ki kamar ke ird gird lapeT li aur usase chipaT kar neeche se

apane chootad uChaalane lagi.

Shobha ab shaatir chodu jaisi use chod rahi thi, bilakul ek mard ki taraha. kas kas

ke DilDo andar pelati aur achaanak ruk kar haule haule use andar baahar karati.

fir hachak hachak kar chodane lagati. Prachi ko usane apane rati kaushal se

paanch miniT me khalaas kar diya. Prachi usase lipaT kar choonate hue boli.

"Shobha, kya mast chodati ho tuma! mere pati ne bhi aaj tak aisa nahi choda

mujhe. lagata hai kaafi praikTis hai tujhe"

Shobha use fir se chodane lagi thi. Prachi ke honthom ko choonate hue boli

"haan, baar baar karake mujhe achChi praikTis ho gayi hai"

Prachi ko kuCh samajh me nahi a rah tha. kuCh der wah kamar uChaal kar

chudane ka anand leti rahi fir Shobha ke gaalon ko apani hatheliyon me

pakadakar badi utsukata se pooCha. "Shobha bata na. kisake saath praikTis karati

hai? meri to kuCh samajh me nahi a rah hai, tere pati yahaan hai nahi, unake

saath waise bhi ye DilDo bekaar hai, tujhe kahi jyaada aate jaate nahi dekha ki

Chip kar kisi se milane jaati ho, kisi aurat ko tere yahaan aate bhi nahi dekha.

yahaan akeli rahati hai apani beTi ke saath, fir tujhe mauka hi kab milata hai

DilDo se praikTis karane kaa?"

Shobha hansane lagi. usane uTh kar apane haath Prachi ke dono baaju me Teke

aur jor jor se DilDo pelate hue boli "yah dekh, ab is tarah chodati hoon, isame

dhakke jor ke lagate hain. haan to tu pooCh rahi thi ki praikTis kab karati hoon.

are bhai kareeb kareeb roj raat ko karati hoon, week enD me to dopahar ko bhi

mauka milata hai"

"are par Neha raat me aur week enD me dopahar ko ghar me rahati hai tab tu

kaise ...." kahate kahate Prachi ruk gayi. Shobha ke chehare ke naTakhaT bhaav

ko dekh kar wah chup ho gayi. sahasa usake dimaag me bijali si kaundh gayi.

"shobhi didi! yaane Neha to nahee! ui & ma & ye kaisa ChiChoraapan hai! ye to

usaki ma hai naa? sauteli bhale hi sahi?"

Prachi ki bur masti se paseej uThi. is tarah ke naajaayaz sambandh ki usane

kabhi kalpana bhi ki thi. ye oonchi poori saaMwali aurat aur wah dubali patali

gori kamaneeya yuwati? Prachi ki choot ab itani geeli ho chuki thi ki DilDo fisal

kar choot ke baahar aate aate bacha.

ab use kaafi baate saaf ho gayi thi. use pahale hi maalooma tha ki ma beTi me

bahut pyaar hai, sautele hone ke baawajood. Neha itani sundar ikkees saal ki

yuwati thi par usane kabhi use ladako ke saath nahi dekha tha. college ChooTate

hi Neha seedhi ghar aati thi, kabhi groop me ghoonane nahi jaati thi. kahi jaana

hota to ma beTi saath saath jaate. parason dopahar ko bra ke huk Prachi se

khulawaate samaya Shobha boli thi ki Neha hamesha use bra ke huk lagaane aur

nikaalane me madada karati hai. tab use jara ajeeb sa laga tha ki jawaan hui beTi

se wo aise kaam karawaati hai. ab sab saaf ho gaya tha.

Shobha ko Prachi ki sthiti dekhakar maja a gaya tha. ma beTi ki yah naajaayaz

rati ki baat sunane ke baat Prachi ke chehare par jhalak aayi kaamukata se wah

bhe khud uttejit ho gayi thi. usane apani kamar ke sTraps nikaale aur DilDo bhi

pukka ki aawaaj se baahar kheench liya. Prachi ko boli "chal bahut maja le liya

toone meri raani, main thak gayi ab, meri bhi bur kulabula rahi hai. ab tu mujhe

chod, jara mehanat kar apani didi ki khaatir"

Shobha apane chootadon ke neeche takiya lekar leT gayi aur choot khol kar leT

gayi. Prachi ne sTraps apani kamar me baandhe aur fir wo nakali rabar ka lund

Shobha ki bur me jor se ghuseda diya jaisa Shobha ko chaahiye tha. Shobha ne

sukh ki sisakaari Chodi aur Prachi Shobha ko chodane lagi "ab bata na didi,

poori kahaani bata. sach lagata hai ki meri bur aaj mujhe maar Daalegi, itana

meeTha maja a rah hai. bataao na didi"

Prachi se chudate hue Shobha ne apani aur Neha ki kahaani batayi..........

Continued…

Bhag 1 samaapt

 
पड़ोसन का प्यार – भाग 2

मैं नेहा को तब से जानती हूँ जब से वह स्कूल मे थी और मैं उसी स्कूल के जूनियर कॉलेज मे मैथ पढ़ाती थी. तब वह काफ़ी छोटी थी. पर मुझे वह तब से बहुत अच्छी लगती थी. सच कहती हूँ प्राची, मैं उसे देखती थी तो मेरी चूत गीली हो जाती थी. बचपन से मैं बहुत सेक्सी हूँ और मुझे दूसरी स्त्रियाँ और लड़किया बहुत अच्छी लगती है. इसलिए शादी करने की मैने कभी सोची भी नही थी.

किसी तरह मन मारकर मैने दिन काटे, वैसे कॉलेज की दूसरी बड़ी लड़किया थी मेरी ख़ास सहेलिया, एक दो लेडी प्रोफ़ेसर भी थीं, मैं मज़े मे थी. पर नेहा की बात और थी. कभी मन हुआ कि उस कमसिन बच्ची को ही फँसा लूँ पर फिर सोचा कि बहुत प्यारी लड़की है, ठीक से धीरे धीरे उसे बस मे करना पड़ेगा कि किसी को कुछ पता ना चले. इसलिए वह जूनियर कॉलेज मे आने तक मैं रुकी.

जब वह जूनियर कॉलेज मे आई, मैने उसपर नज़र रखना शुरू कर दिया. मुझे पता चला कि वह एक दो लड़कियों के साथ रहती थी हमेशा, उनके साथ होस्टल मे समय बिताती थी, जब कि उसका घर यही था कॉलेज के पास. वो लड़किया किस टाइप की थीं, मुझे मालूम था, सब लेस्बियन थी. वैसे मैं उनके साथ इन्वोल्व नही थी पर यह बात मुझे पता चल गयी कि नेहा भी शायद उसी टाइप की हो. इस बात से मुझे बहुत राहत मिली.

मैने किसी तरह से उसे अपनी क्लास मे ट्रान्स्फर करवा लिया. मैं मैथ सिखाती थी. बार बार उसकी ओर देखती, क्या मस्त लड़की थी. वह भी मेरी ओर देखती, उसकी नज़रों मे एक अजीब सा भाव होता. जब हमारी नज़र मिलती तो वह झेंप कर

इधर उधर देखने लगती. एक दिन मैने फ़ैसला किया कि अब आगे कदम बढ़ाया जाए. एक दिन जब उसे मैथ मे कम मार्क्स आए तो मैने उसे डांटा. वह रोने को आ गयी. क्लास के बाद मैने उस प्यार से समझाया कि अगर कोई डिफीकाल्टी हो आकर मेरे घर मे मिले.

मैने कॉलेज के पास ही एक छोटा फ्लॅट किराए पर ले रखा था. मुझे बहुत खुशी हुई जब मैने उसे उसी शाम को अपने घर के सामने वेट करते हुए पाया. मेरी ओर देखकर वह झेंप गयी और सिर नीचे करके बोली कि उसे एक दो मैथ के सवाल पूछना है. मैं उसे अपने घर ले गयी. बिठाया, चाय पिलाई और फिर मत समझाए, उसका तो सिर्फ़ बहाना था, उसका ध्यान नही थी, वह बस बार बार मेरी ओर देखती और शरम सी जाती.

मैने जाल डाला, जानबूझ कर अपना पल्लू गिराया और उसे पास बिठाकर एक प्राब्लम सॉल्व करने लगी. वह बार बार मेरी उस छाती को देखती. उसकी साँसे भी ज़ोर से चल रही थी. मैने सोच लिया कि समय आ गया है. उसे बाहों मे लेकर मैने चूम लिया. मुझे टेंशन था कि क्या कहेगी पर वह तो शायद तैयार बैठी थी. उसने मेरी गर्दन मे बाहे डालकर मुझे ऐसा चूमा कि मैं भी अचंभे मे आ गयी.

उस दिन मैने पहली बार उससे रति की. जल्दी मे की गयी वह रति मुझे हमेशा याद रहेगी, उस दिन पहली बार मैने उस षोड़शी की जवानी का रस चखा. मेरी अपेक्षा के अनुसार नेहा मेरे लिए एक अप्सरा ही थी, बिल्कुल स्वर्गिक आनंद देने

वाली. उसने भी जिस अधीरता से मेरे शरीर के हर भाग को प्यार करने की कोशिश की, उससे मुझे पता चल गया कि मैं उसे कितनी अच्छी लगती हूँ. बाद मे शरमाते हुए उसने स्वीकार किया कि वह कब से मुझे देखती थी. उसने यह भी बताया कि उसे बस लड़कियों और ख़ास कर बड़ी औरतों के प्रति बहुत यौन आकर्षण होता है.

हमारा अफेर शुरू हो गया और बहुत दिन चला. उसने अपने पिता से कहकर मेरी ट्यूशन ही लगवा ली जिससे वह खुले आम रोज दो तीन घंटे मेरे घर पर आ सके. शनिवार रविवार को तो वह दिन भर रहती थी. कभी कभी पढ़ाई के बहाने से वह मेरे घर रात को भी रुक जाती थी. पढ़ने मे वह होशियार थी, मैने उसे सचमुच मे मैथ ओर फ़िज़िक्स सिखाया. बाकी समय मे मैं उसे कामकला सिखाती थी, प्रॅक्टिकल करा करके. उसकी कामुकता देख कर मैं हैरान रह गयी. क्या गरम लड़की थी, मुझे भी पीछे छोड़ देती थी, मैं थक जाती थी, वह नही थकती थी. मुझे बार बार कहती कि मा की उम्र की औरते

उसे बहुत अच्छी लगती थी. मुझपर तो वह मरने लगी थी, अब और कही नही जाती थी, बस जितना समय मिले मेरे साथ बिताने की कोशिश करती थी.

नेहा का मा बचपन मे ही गुजर गयी थी और वह यहाँ अपने डॅडी के साथ रहती थी. एक साल हमारा यह प्रेम प्रकरण एकदम ठीक से चला. पर एक दिन उसके डॅडी मुझसे मिलने आए. मेरा माथा ठनका. कुछ इधर उधर की बाते करने के बाद अचानक वे मुझसे पूछ बैठे कि क्या उनकी बेटी नेहा के साथ मेरे यौन संबंध है. मैं घबरा गयी और सॉफ मना कर दिया. उन्हे बाहर जाने को भी कहा कि आप ने ऐसी बाते ही कैसे की.

वे शांति से मेरी बाते सुनते रहे और फिर बोले की मैं उन्हे ग़लत समझ रही हूँ, उन्हे इस बात पर कोई आपत्ति नही है बल्कि खुशी है कि कम से कम नेहा किसी बड़ी रिस्पांसिबल औरत के साथ है. उन्हे नेहा के बारे मे मालूम था और वे बस ये चाहते थे कि वह बिगड़ ना जाए. उन्होने मुझे आग्रह किया कि मैं खुद नेहा का ख़याल रखूं, एक मा की तरह भी.

मैं बहुत खुश हुई. उस दिन से मैने नेहा का पूरा जिम्म ले लिया. वह अक्सर मेरे साथ रहने भी लगी. मैं अब नेहा को मा का प्यार भी देती थी और एक प्रेमिका का भी. दो साल के बाद जब नेहा सेकेंड ईयर मे पहूंची तो वे एक बार फिर मेरे

पास आए. बोले कि उन्हे बाहर दुबई मे बहुत अच्छी नौकरी मिल रही है पर नेहा के बारे मे चिंता है कि वह यहाँ अकेले कैसे रहेगी. फिर एक दो मिनिट के बाद वे बोले कि क्या मैं उनसे शादी कर सकती हूँ? मैं चकरा गयी. उन्हे मालूम तो था कि मैं किस तरह की औरत हूँ याने लेस्बियन हूँ.

वे बोले कि शादी नाम मात्र की होगी, बस इसीलिए कि मैं उनके साथ नेहा की मा की तरह रह सकूँ. खुद उन्होने भी बता दिया कि उन्हे भी औरतों मे कोई दिलचस्पी नही है. मैं तैयार हो गयी. शादी के बाद हमने ये फ्लॅट ले लिया और यहाँ रहने आ गये. शादी के एक महने के अंदर वे दुबई चले गये. अब नेहा मेरे पास दिन रात होती है. क्या बताऊं प्राची कितने सुख मे हूँ मैं. और अब तुम भी मिल गयी हो, मेरे तो भाग्य खुल गये......

 


प्राची शोभा की कहानी सुनते सुनते उसे चोद रही थी. बीच मे रुक जाती और फिर दुगने ज़ोर से चोदने लगती. कहानी ख़तम होते ही उसने शोभा के होंठ अपने होंठों मे दबा लिए और हचक हचक कर चोदने लगी. उसकी आँखों मे भरी वासना से शोभा को पता चल गया कि इस कहानी से वह कितना गरम गयी है. झड़ने के बाद वे पाँच मिनिट वैसी ही पड़ी रही. आख़िर चुप्पी तोड़ कर प्राची बोली "क्या लड़की है ये नेहा, इतनी कम उम्र मे इतनी आगे पहुँच गयी! ये सब तुम्हारा कमाल है शोभा दीदी"

शोभा प्रेम से प्राची के बालों मे उंगलियाँ चलाती हुई बोली. "अरी पगली, इस उमर मे बच्चे होते ही है ऐसे, उनके हॉर्मोन बढ़ रहे होते है, जो ज़्यादा कामुक होते है वे तो क्या क्या सोचते है. कुछ बच्चे इसीलिए तो बिगड़ जाते है. वैसे नेहा ज़रा ज़्यादा ही कामुक है. मुझे मालूम है कि काफ़ी लड़के भी ऐसे होते है. उन्हे बड़ी औरतों का आकर्षण होता है. कुछ का तो मा के

प्रति ऐसा प्रेम होता है पर बेचारे बताते नही है. अब तुम ही देखो, बुरा मत मानना, पर कभी गौर किया है कि दर्शन तेरी ओर कैसे देखता है!"

सुनकर प्राची चमक कर बोली "कुछ भी क्या बोलती है शोभा! अरे मेरे जिगर का टुकड़ा है वो, मैने पेट मे रखा है नौ महने. वह कभी अपनी मा के बारे मे ऐसा नही सोचेगा"

शोभा ने उस समझाते हुए कहा "अरे मैं कहाँ कहती हूँ कि वह बिगड़ा हुआ है. बहुत अच्छा लड़का है. जान बूझ कर नही करता वह. उसे शायद खुद मालूम नही होगा कि उसके मन मे क्या है. पर मैने बहुत बार गौर किया है कि जब तेरी नज़र और कही होती है तो वह चुप चाप तेरी ओर देखता है. बहुत प्यार करता है मा से. पर प्यार के साथ बड़ी सुंदर औरत के प्रति होने वाला यौन आकर्षण भी होता है उसकी नज़र मे, मैने तो बहुत बार देखा है"

शोभा ने उसके मन मे यह बात डाल दी थी इसलिए प्राची चाह कर भी उस बात को भुला ना पाई. उसे अचानक याद आया कल की सुबह जब शोभा के साथ रात भर की चुदाई के बाद वह अपने कपड़े ठीक से पहन कर अपने घर वापस आई थी, दर्शन पहले ही आ गया था. वह नज़र गढ़ाकर प्राची को देखता रह गया था, शायद मा को इतने अच्छे कपड़ों मे कभी नही देखा था. उसने तब कहा था कि "मा आज बहुत खुश लग रही हो, लगता है शोभा मौसी से अच्छी गप्पें हुई है तुम्हारी रात भर. आज तुम अलग ही लग रही हो, यह साड़ी कितनी अच्छी है, ये नयी हेर स्टाइल भी तुमको सूट करती है". उसकी नज़रों के भाव जब प्राची को याद आए तो उसे लगने लगा कि शायद शोभा ठीक कह रही है. "मेरा बेटा, मेरा दर्शन, ऐसा सोचता होगा मेरे बारे मे?" सोचकर लाज से उसका मूह लाल हो गया.

बात बदलने के लिए वह शोभा से बोली "शोभा, हमारी ये प्रेमलीला नेहा के आने तक तो चलेगी, उसके बाद? उसे पता चल गया तो नाराज़ हो जाएगी."

शोभा पहचान गयी कि प्राची पूरी उसके वासना जाल मे फँस चुकी है, यहाँ तक कि उसे अब यह कल्पना सहन नही हो रही है कि नेहा के आने के बाद वह शोभा के साथ कुछ नही कर पाएगी. उसको दिलासा देते हुए शोभा बोली. "चिंता मत कर प्राची, कोई रास्ता निकाल लेंगे. पर मुझे विश्वास है कि नेहा नाराज़ नही होगी. वह इस मामले मे काफ़ी ओपन माइंडेड है और मुझे बहुत प्यार करती है, मेरी खुशी के लिए कुछ भी कर लेगी. पिछले हफ्ते दो दिन उसका सिर दुख रहा था, तबीयत खराब थी, इसलिए मैं उसके सिर मे मालिश कर के वैसे ही उसे सुला देती थी, हमारी रति मैने बंद कर दी थी. नेहा को मेरा गरम स्वाभाव मालूम है, कि मुझे बिना संभोग किए नींद भी नही आएगी. कहने लगी मा, तुम बोर हो रही हो. स्वाद बदल कर क्यों नही देखती? वो प्राची मौसी ही कितनी सुंदर है, उसीको पटा लो. फिर हँसने लगी. पर मुझे लगता है कि वह आधा मज़ाक कर रही थी और आधा सीरियस्ली बोल रही थी. इसलिए मुझे लगता है कि वह नाराज़ नही खुश होगी"

फिर प्राची के स्तनों को हल्के हल्के मसलते हुए शोभा बोली "वैसे प्राची, सम्भल जा अब से. उसे पता चल गया कि हमारे बीच ये लफडा चल रहा है तो हो सकता है कि वह भी अपने इस खेल मे शामिल होने की हट करे, बोलेगी कि मा अकेले अकेले? मुझे भी तो ज़रा चखने दो प्राची मौसी का स्वाद"

अब प्राची बेचारी काफ़ी बौखला गयी थी. ये सब क्या हो रहा है? शुरू तो हुआ था बस शोभा के साथ एक सुंदर स्त्री स्त्री संभोग के रूप मे, एक 'तबू' संबंध पर जो उसके इस रसहीन जीवन मे ढेरों बहारे लेकर आया था. अब क्या नेहा के साथ भी? उस सुंदर युवती के साथ? और दर्शन के बारे मे क्या बोल रही है शोभा? बौखलाहट और लज्जा के साथ साथ उसके मन मे अब एक अपूर्व कामुकता और वासना की लहर उठ रही थी. शोभा ने चलाया कामदेव का बान उसे पूरा घायल कर गया था. उसने डिल्डो अपनी और शोभा की चूत से निकाला और शोभा से बोली "दीदी, बहुत हो गया, कुछ भी बके जा रही हो. ऐसा कभी होता है? चलो अब अपनी बुर चुसवाओ, मूह सूख रहा है"

शोभा ने डिल्डो उठा लिया और उस भाग को चाटने लगी जो प्राची की बुर मे घुसा हुआ था. चाट कर सॉफ करने के बाद डिल्डो उलटा करके प्राची को दिया "ले चाट ले. इस कामरस को वेस्ट करना पाप है. इतनी मेहनत से हम निकालते है" फिर

प्राची को बाहों मे लेकर फिर से बिस्तर पर लेट गयी. बाकी बचे दो दिन दोनो पड़ोसन मौका मिले तब मिलकर इसी तरह कामदेव की पूजा करती रही. आख़िर शनिवार का दिन आया. नेहा उसी दिन वापस आने वाली थी.

नेहा शाम को वापस आई. शोभा राह ही देख रही थी. जैसे ही उसने नेहा को घर मे लेकर दरवाजा लगाया, नेहा उससे लिपट कर उसे चूमने लगी. "ओह्ह्ह मम्मी, कितना अच्छा लगता है घर आ कर. मैने तुम्हे बहुत मिस किया. लगता था कब घर वापस जाऊं और मेरी मम्मी की गोद मे घुस जाऊं"

शोभा ने उसके चुंबनों का जवाब देते हुए उसे भींच कर छाती से लगा लिया. वह भी अपनी लाडली बेटी की राह देख रही थी. सौतेली मा होते हुए भी उसे अपनी इस बेटी से बहुत प्रेम था, एक प्रेमिका की तरह भी और एक मा की तरह भी. अपनी बाहों मे नेहा के उश्न मुलायम जवान बदन को भींच कर उसकी चूत मे तुरंत एक मीठी गुदगुदी होने लगी. "कैसी हुई तेरी ट्रिप नेहा? मज़ा आया?" अपनी वासना को दबाते हुए उसने पूछा.

"अच्छी हुई पर पूरी तरह से नही. लीना के साथ बस दो दिन अकेले मे मज़ा करने मिला, बाद मे इतने रिश्तेदार आ गये शादी मे कि घर मे जगह ही नही थी, हमारे कमरे मे दो बूढ़ी औरते आ कर रहने लगी. उसके बाद तो मुझे तुम्हारी बहुत याद आई. वैसे मम्मी, तुम सच कह रही थी, लीना हम दोनो जैसी ही है, तुमने बिल्कुल ठीक पहचाना उसे. पहली रात को मैने पहल की तो वो इस तरह से मुझसे लिपट गयी जैसे राह ही देख रही हो. मुझे छोड़ती ही नही थी. बहुत मस्त है उसका बदन, बहुत कसा हुआ, आख़िर स्टेट लेवेल की वॉलीबॉल प्लेयर है. हम दो रात सोए ही नही, बिस्तर मे वॉलीबॉल और कुश्ती खेलते रहे. बाद मे दिन मे भी जब मौका मिलता अपने कमरे मे आ जाते. फिर जब लीना की नानी और बुआ आ गयी हमारे कमरे मे तो सब बंद हो गया. क्या बोरियत हुई! उसके बाद बस खाना और सोना. बीच बीच मे थोड़ा अकेलापन मिलता तो किस कर लेते." नेहा ने बताया.

 


"मेरी नज़र की दाद दे, मैने तो लीना को देखते ही पहचान लिया था कि किस तरह की लड़की है और तुझ पर कितनी फिदा है. खैर आगे भी मौका मिलेगा तुझे उसके साथ. तब तक हम मा बेटी तो है ही. लीना को कभी घर पे बुला ले एक दो

दिन रहने को. मैं भी तो देखूं कि तेरी सहेली कितनी नमकीन है" शोभा ने चुटकी ली.

"क्या मम्मी, बड़ी हरामी हो तुम. मेरी सहेली पर निगाहे है तेरी अब! चलो, बुला लूँगी, अभी तो दो महने वा वापस नही आने वाली. पर मम्मी एक बात बताओ, तुम इतनी खुश और तृप्त कैसे दिख रही हो, नही तो क्या हालत हो जाती है तुम्हारी जब मैं नही होती हू. मेरे आते ही भूखी शेरनी सी झपट पड़ती हो मुझ पर, आज मुझे आकर इतनी देर हो गयी फिर भी प्यार से बाते कर रही हो! क्या बात है, कोई मिला गया था क्या, मेरा मतलब है कोई मिल गयी थी क्या?" नेहा ने शोभा के चेहरे के भावों को ताकते हुए उत्सुकता से पूछा.

शोभा ने यह कहकर कि ऐसा कुछ नही है, बाद मे बताऊँगी, बात बदल दी. नेहा ने एक दो बार फिर पूछा, फिर मचल कर शोभा को धकेलकर बेडरूम ले गयी. "चलो मम्मी, मुझसे रहा नही जा रहा है, मेरी ये दुश्मन, ये जो मेरी टाँगों के बीच है, बहुत सता रही है, रो रही है बेचारी, इसे दिलासा दो"

"अरी पागल हो गयी है क्या, शाम को? कोई आ जाएगा, बेल बजेगी तो वैसे ही उठना पड़ेगा. उससे कह की रात तक रुक, फिर उसे भरपूर मज़ा चखाऊंगी, अच्छी खबर लूँगी कि मेरी लाडली बेटी को इतना क्यों सताती है."शोभा प्रेम से नेहा के स्तनों को हौले हौले सहलाते हुए बोली. "हां एक बात बताने की रह ही गयी. तेरे कॉलेज से फोन आया था. तुझे कल ही नासिक जाना है, सोमवार को सुबह इंटरकॉलेज क्विज़ है, तेरा नाम दिया है कॉलेज ने"

नेहा मचल उठी "मैं नही जाऊंगी. क्या बोरियत है, ये लोग तुम्हारे साथ रहने भी नही देते. मेरा जीके अच्छा है यह जी का जंजाल हो गया. कितनी बार बाहर भेजते है मुझे ये कॉलेज वाले. तुम भी चलो ना मम्मी"

"मुझे यहाँ काम है नेहा. ऐसा कर, तू प्राची मौसी के साथ क्यों नही चली जाती? दो दिन रहकर, नासिक घूमकर मज़ा करना और आ जाना. प्राची मौसी का भी घूमना हो जाएगा. वह बेचारी वैसे ही घर मे अकेली बोर होती है"शोभा ने निर्विकार चेहरे से कहा.

"क्या फ़ायदा मा! और क्या मज़ा करूँगी? तुझे मालूम है कि मुझे रोज क्या लगता है! वैसी मज़ा तो सिर्फ़ तुम ही मुझे दे सकती हो मम्मी. मुझे और कोई नही चाहिए साथ मे. तुम्हारे बिना मैं पागल सी हो जाती हूँ. प्राची मौसी के सामने कुछ कर भी नही सकती" नेहा नाक भौं सिकोड कर बोली.

"ठीक है, उसके सामने नही कर सकती, उसके साथ तो कर सकती है?" तू ही तो कह रही थी कि प्राची मौसी तुझे बहुत अच्छी लगती है" शोभा ने मुस्कराते हुए कहा.

"मुझे चलेगा, चलेगा क्या दौड़ेगा. वह सच मे बहुत सुंदर है. बहनजी जैसा रहना छोड़ दे तो एकदम चिकना माल दिखेगी. पर मम्मी, वह बेचारी सीधी साधी औरत, वह तो शॉक से मर ही जाएगी अगर मैं ऐसा कुछ करने जाऊंगी उसके साथ. अच्छा मज़ाक करती ही तुम मम्मी, क्या क्या सूझता है तुम्हें" नेहा ने हँसते हुए कहा.

 
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