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परिवार(दि फैमिली) complete

उईई बेटे यहाँ क्यों चूम रहे हो" रेखा का पूरा जिस्म अपने बेटे के होंठो को अपनी बाहों के नीचे बने बालों पर पड़ने से काँपते हुए झटके खाने लगा । विजय अपनी माँ की किसी बात का जवाब दिए बगैर उसके बाहों के नीचे दोनों तरफ ऐसे ही चूमता रहा, विजय कुछ देर तक ऐसा करने के बाद अपना मूह सीधा अपनी माँ की बड़ी बड़ी चुचियों के बीच डाल दिया।

विजय ने अपनी माँ की दोनों चूचियों के बीच अपना मुँह डालकर उसे अपने होंठो से चूमने लगा। ऐसा करते हुए विजय ने अपनी माँ की बाहों को आज़ाद कर दिया ।रेखा अपनी बाहों के आज़ाद होते ही अपना एक हाथ अपने बेटे के बालों में डाल दिया, विजय अपनी माँ की दोनों चुचियों के ऊपर बारी बारी अपने होंठो से चूमते हुए उसे अपने दांतों से काटने लगा ।

"उईए बदमाश काट क्यों रहे हो इन्हें अपने मूह में लेकर चूसो ना" रेखा ने अपने बेटे के दांतों से अपनी चुचियों को काटने से ज़ोर से उछलकर चीखते हुए कहा । विजय अपनी माँ की बात सुनकर उसकी एक चूचि के दाने को अपने मूह में भर लिया और बड़े ज़ोर से चूसने लगा ।

विजय कुछ देर तक अपनी माँ की चूचि के दाने को चूसने के बाद उसकी चूचि को पूरा अपने मुँह में भरने की कोशिश करने लगा। मगर उसकी माँ की चुचियां इतनी बड़ी थी की उसके मूह में न समा पाई। इसीलिए वह अपनी माँ की चुचियों को बारी बारी वैसे ही चूसने लगा।

"ओहहहह बेटे अब बस करो न कोई आ जायेगा" रेखा ने अपनी चुचियों को अपने बेटे से चुसवाते हुए ज़ोर से सिसकते हुए कहा।

"माँ इसका कुछ करो ना" विजय ने अपनी माँ की चुचियों से अपने मूह को हटाते हुए उसका हाथ पकडकर अपने खडे लंड पर रखते हुए कहा ।
 
"बेटे तुम बुहत बदमाश हो सिर्फ देखने का कहकर हमारी हर चीज़ को छु लिया" रेखा ने अपने बेटे के ऊपर से उठकर अपने कपडे उठाते हुए कहा।

"माँ आपने भी तो हमारा साथ दिया" विजय ने भी सीधा होते हुए कहा और अपनी माँ को खींचकर अपने गले से लगाते हुए उसके होंठो को चूसने लगा ।

"छोड़ो बदमाश तुम जानबूझकर ऐसी हरकतें करते हो की हम सबकुछ भूलकर तुम्हारा साथ देने लगते हैं" रेखा ने अपने बेटे को खुद से अलग करते हुए कहा।

"माँ तो फिर बुरा क्या है। हम भी तो यही चाहते हैं की आप हमारा साथ दे" विजय ने अपनी माँ के पास जाते हुए कहा।

"बुहत हो चूका बेटे क्या तुम अपनी माँ को चोदकर ही छोड़ोगे क्या" रेखा ने गुस्सा करते हुए कहा।

"माँ आप ने हमारे मुँह की बात छीन ली। मगर जब तक आप खुद हमारा साथ नहीं देगी हम आपको हाथ नहीं लगाएँगे" विजय ने अपनी माँ की बात सुनकर खुश होते हुए कहा।

"बेटा क्या तुम ने मुझे इतना पागल समझा है की मैं अपने बेटे से खुद चुद्वावाऊँगी" रेखा ने अपने बेटे की बात सुनकर अपनी पेंटी को पहनते हुए कहा ।

"माँ मुझे इतना तो यकीन है की अगर मैं आपको प्यार करुं तो आप अपने मूह से कहेंगी की बेटे अपना लंड हमारी चूत में डाल" विजय ने भी अपने अंडरवियर को पहनते हुए कहा।

"बेटा खवाब देखना बुरी बात नहीं हमने भी सारी उम्र ऐसे नहीं बितायी" रेखा ने अपनी ब्रा को पहनते हुए कहा।

"माँ यह तो बुहत अच्छी बात है। अगर आपको अपने ऊपर इतना यकीन है तो एक काम करते हैं । रात को हम कहीं मिलते हैं और एक दूसरे का इम्तहान लेते है" विजय ने अपनी माँ की बात सुनकर खुश होते हुए कहा।

"ठीक है बेटा मैं तुम्हें एक चांस देने को तैयार हूँ मगर तुम मुझसे यह कहलवाने में कामयाब नहीं हुए तो फिर ज़िंदगी भर तुम मुझे छुने की हिम्मत नहीं करोगे" रेखा ने अपने पेटिकोट को पहनते हुए कहा।

"मनज़ूर है माँ मगर आप हार गयी ती सारी ज़िंदगी मैं जब चाहुँ जहाँ चाहुँ आपको चोद सकता हू" विजय ने अपनी माँ की बात मानते हुए कहा ।

"ठीक है बेटे रात को तैयार रहना" रेखा ने हँसते हुए अपने ब्लाउज को पहन लिया । विजय भी अपने कपडे पहनकर किचन से निकल गया और रेखा अपनी साड़ी को पहन कर बचे हुए बर्तनों को साफ़ करने लगी।
 
"आहहह दीदी" मुकेश अपनी बहन का हाथ अपनी पेण्ट पर पड़ते ही सिसक उठा । मुकेश ने सीधा होते हुए अपनी पेण्ट को अपने जिस्म से नीचे सरकाते हुए अपने अंडरवियर को भी नीचे कर दिया।

"भइया आपका लंड कितना प्यारा है" मनीषा ने अपने भाई के भूरे रंग के 6 इंच लम्बे और 2 इंच मोटे लंड को निहारते हुए कहा ।

"दीदी इसे अपने हाथ में लेकर देखो ना" मुकेश ने अपनी बहन का हाथ पकडते हुए अपने नंगे लंड पर रख दिया।

"ओहहहह भैया यह तो बुहत गरम है" मनीषा ने अपना हाथ अपने भाई के लंड पर फिराते हुए कहा।

"दीदी जल्दी से कुछ करो अगर कोई आ गया तो मैं प्यासा ही रह जाऊँगा" मुकेश ने अपनी बहन की तरफ देखते हुए कहा।

"भइया अब तो मैं भी गरम हो चुकी हूँ । आप ऐसा करो मेरी चूत को चाटकर शांत करो।मैं आपके लंड को जल्दी से अपने होंठो से चूसकर झाड़ देती हू" मनीषा ने अपने भाई की बात सुनकर अपनी सलवार को अपनी टांगों से अलग करते हुए कहा। मुकेश अपनी बहन की नंगी गोरी चिकनी टांगों को देखकर जल्दी से उसकी पेंटी में हाथ ड़ालते हुए उसे उसकी चूत से नीचे सरका दिया ।

"दीदी आपकी चूत कितनी गोरी और फूली हुयी है और इसमें से तो रस भी निकल रहा है" मुकेश ने अपनी बहन की हलके काले बालों वाली गोरी चूत को देखते हुए कहा । मनीषा ने अब देर करना सही नहीं समझा और अपने भाई को सीधा लिटाते हुए अपनी दोनों टांगों को फ़ैलाकर उसके मूह के पास लेट गयी ।

मानिषा ने नीचे झुकते हुए अपने भाई का लंड पकड लिया और अपनी जीभ निकालकर उसके लंड पर फिराने लगी । मुकेष अपनी बहन की जीभ को अपने लंड पर लगने से काँपते हुए अपनी बहन की चूत को चूमने लगा, मनीषा अपनी चूत पर अपने भाई के होंठो के लगते ही अपना मूह खोलते हुए अपने भाई के लंड को अपने मूह में ले लिया।

मानिषा अपने भाई के लंड को अपने होंठो के बीच लेकर ज़ोर से चूसने लगी । मुकेश का तो मज़े के मारे बुरा हाल था। अपना लंड अपनी बहन के गरम मुँह में उसके नरम होंठो के बीच दबने से उसे जन्नत का मज़ा मिल रहा था। जिस वजह से वह अब अपनी बहन की चूत को अपने मूह में भरकर चूस रहा था ।

मानिषा का भी वही हाल था। उसकी चूत से ढेर सारा रस निकल कर उसके भाई के मूह में जा रहा था जिसे वह बड़े प्यार से चाट रहा था । मुकेश ने अचानक अपनी जीभ को कडा करते हुए अपनी बहन की चूत में घुसा दिया। मनीषा अपनी चूत में अपने भाई की जीभ के घूसने से एकदम काँपते हुए अपने भाई के लंड को ज़ोर से चूसने लगी।
 
मुकेश भी अपनी बहन की चूत में अपनी जीभ को ज़ोर से अंदर बाहर करने लगा, कुछ ही देर में दोनों भाई बहनों का बदन काम्पने लगा और दोनों के जिस्म काँपते हुए झरने लगे । मनीषा खुद झरते हुए अपने भाई के लंड से निकलता हुआ वीर्य चाटने लगी और मुकेश खुद झरते हुए अपनी बहन की चूत से निकलता हुआ पानी चाटने लगा ।

दोनों कुछ देर तक एक दुसरे का जूस पीने के बाद शांत होकर एक दुसरे से अलग हो गये । मनीषा ने उठते हुए अपने कपडे पहन लिए और वहां से उठकर जाने लगी,

"दीदी फिर कब मिलोगी" मुकेष ने अपनी बहन को जाता हुआ देखकर पूछा।

"भइया रात को मेरे कमरे में आ जाना" मनीषा ने मुस्कराते हुए कहा और अपनी गांड को मटकाती हुयी वहां से चलि गयी ।

मुकेश अपनी बहन के जाने के बाद अपने कपड़ों को ठीक करता हुआ बाथरूम में चला गया और फ्रेश होने लगा, मनीषा अपने कमरे में आकर लेट गयी और कुछ देर बाद वह भी बाथरूम में जाकर नहाने लगी।

शीला कुछ देर तक कंचन को छेड़ने और उससे बातें करने के बाद वहां से उठते हुए अपने भाई नरेश के कमरे में जाने लगी, शीला जैसे ही अपने भाई के कमरे में पुहंची उसने देखा उसका भाई बेड पर आराम से लेटा हुआ था । शीला ने अंदर दाखिल होते हुए कमरे का दरवाज़ा अंदर से बंद कर दिया ।

नरेश जो यों ही आँखें बंद किये हुए लेटा हुआ था। दरवाज़े की आवाज़ सुनकर अपनी आँखें खोल दी । नरेश ने देखा उसकी बहन दरवाज़ा बंद कर रही है वह जल्दी से बेड से उठकर बैठ गया।

"दीदी आपने दरवाज़ा क्यों बंद किया" नरेश ने अपनी बहन को दरवाज़ा बंद करने के बाद अंदर आता हुआ देखकर कहा।

"भइया आपसे कुछ बात करनी है" शीला अपने भाई की बात सुनकर एक अदा से अपनी गांड को मटकाते हुए बेड की तरफ बढ्ते हुए कहा।

"दीदी पर दरवाज़ा बंद करने की क्या ज़रुरत थी" नरेश डर रहा था की अगर कोई आ गया तो क्या सोचेगा । इसीलिए वह अपनी बहन से ऐसा कह रहा था ।

"भइया मैं आपकी बहन हूँ क्या आप मुझसे भी ड़रते हो जो दरवाज़ा बंद करने से रोक रहे हो" शीला ने अपने भाई की तरफ देखते हुए मुसकुराकर कहा।

"नही दीदी ऐसी कोई बात नही" नरेश अपनी बहन की बात सुनकर अपने माथे से पसीना पोछते हुए कहा।
 
"ओहहहहह भैया मुझे यहाँ पर दर्द हो रहा है" शीला ने अचानक चलते हुए वहीँ पर बैठकर अपने घुटनों को दबाते हुए चिल्लाकर कहा।

"दीदी क्या हुया" नरेश अचानक अपनी बहन की चीख़ सुनकर बेड से उठकर अपनी बहन के पास जाते हुए कहा।

"भइया मुझे यहां बुहत दर्द हो रहा है" शीला ने वैसे ही चीख़ने का नाटक करते हुए अपनी जाँघ पर हाथ रखते हुए कहा ।

"दीदी थोडा साड़ी को ऊपर करके दिखाओ कहाँ पर है दरद" नरेश ने अपनी बहन की बात सुनकर उसकी तरफ देखते हुए कहा।

"हाहहह भैया आप ही कर दो ना" शीला ने अपने भाई की बात सुनकर झूठ के दर्द का बहाना करते हुए चीख़कर कहा।

"दीदी यहाँ पर है दरद" नरेश ने अपनी बहन की साड़ी को उसके घुटनों तक ऊपर करते हुए उसके घुटनों के ऊपर उसकी गोरी चिकनी जाँघ पर अपना हाथ रखते हुए कहा।

"हाहहह भैया थोडा और उपर" शीला ने अपने भाई के हाथ को अपनी जाँघ पर महसूस करके ज़ोर से सिसकते हुए कहा।

नरेश अपनी बहन की बात सुनकर अपने हाथों से उसकी साड़ी को पूरा ऊपर कर दिया । नरेश को अब अपनी बहन की साड़ी के अंदर पहना हुआ पेटिकोट नज़र आ रहा था ।

"दीदी यहाँ पर है दरद" नरेश ने अपने काँपते हुए हाथों से अपनी बहन की जाँघ के थोडा ऊपर रखते हुए कहा।

"ओहहहहह भैया थोडा और ऊपर" शीला ने अपने भाई का हाथ अब अपने पेटिकोट के इतना नज़दीक महसूस करके ज़ोर से सिसकते हुए कहा । नरेश की हालत बिगडती जा रही थी । उसका लंड उसकी पेण्ट में आंदोलन मचाने लगा था।

"दीदी यहाँ है दरद" नरेश ने अपना हाथ अब और ऊपर करते हुए अपनी बहन के पेटिकोट पर रखते हुए कहा । नरेश का गला बिलकुल सुख चूका था।

"आह्ह्ह्हह भैया यहाँ है पर थोडा इधर" शीला ने अपने भाई का हाथ पकडते हुए अपनी टांगों के बीच अपने पेटिकोट के ऊपर ही सीधा अपनी चूत पर रख दिया ।
 
नरेश अपना हाथ अपनी बहन की चूत पर उसके पेटिकोट के ऊपर से सहलाने लगा।

"ओहहहहह भैया हाँ यहीं पर दर्द है" शीला ने ज़ोर से सिसकते हुए कहा।

"दीदी चलो बेड पर चलकर देखते है" नरेश ने अपने सूखे लबों पर अपनी जीभ फिराते हुए कहा ।

"भइया मैं चल नहीं पाऊँगी । आप मुझे उठाकर बेड पर लिटा दे" शीला ने मन ही मन में खुश होते हुए कहा । नरेश अपनी बहन की बात सुनकर उसे अपनी बाहों में उठा लिया और बेड की तरफ ले जाने लगा।

"आह्ह्ह्ह भैया अगर आप नहीं होते तो मेरा क्या होता" शीला ने अपने भाई की पीठ में अपनी बाहों को डालकर अपनी चुचियां उसके सीने में दबाते हुए कहा।

नरेश का लंड अपनी बहन की चुचियों को अपने सीने में दबने उसकी पेण्ट में ज़ोर से झटके मारने लगा । नरेश ने अपनी बहन को बेड पर ले जाकर लिटा दिया और खुद उसकी टांगों के पास बैठ गया।

"अअअअअहःहः भैया कुछ करो न बुहत दर्द हो रहा है" शीला ने अपने भाई को ऐसे ही बैठा हुआ देखकर ज़ोर से सिसकते हुए कहा ।

"हाँ दीदी अभी कुछ करता हू" नरेश यह कहकर अपनी बहन की साड़ी को बिलकुल ऊपर कर दिया और उसके पेटिकोट की तरफ देखने लगा।

"ओहहहह भैया ऐसे क्या देख रहे हो । जल्दी यहाँ कुछ करो ना" शीला ने अपने भाई को अपने पेटिकोट की तरफ निहारता हुआ देखकर बेसब्री से उसका हाथ पकडकर अपनी चूत पर पेटिकोट के ऊपर से ही रखकर ज़ोर से सिसकते हुए कहा।

नरेश की हालत बुहत खराब होती जा रही थी। वह अब अपनी बहन की चूत को उसके पेटिकोट के ऊपर से ही ज़ोर से सहला रहा था । शीला भी अपने भाई के हाथ की रगड अपनी चूत पर पड़ने से बुहत ज़ोर से सिसक रही थी।

"आह्ह्ह्ह शहहहह भैया एक काम करो आप मेरी साड़ी और पेटिकोट को उतार दो ताकी आपके हाथ की रगड जल्दी से मेरे दर्द को मिटा सके" शीला ने अचानक ज़ोर से सिसकते हुए अपने भाई से कहा ।

अपनी बहन की बात सुनकर नरेश के माथे से पसीना निकलना लगा और उसका गला बिलकुल सुख गया । वह बस चुपचाप अपनी बहन की तरफ देख रहा था।

"भइया क्या कहते हो" शीला ने फिर से अपने भाई से कहा।
 
दीदी जैसे आप ठीक समझे" नरेश के गले से यह लफ़्ज़ जाने कैसे निकले थे । वह बुहत ज्यादा उत्तेजित हो गया था । शीला अपने भाई की बात सुनकर जल्दी जल्दी अपनी साड़ी में हाथ ड़ालते हुए उसको अपने जिस्म से अलग कर दिया और लेटकर अपने भाई की तरफ देखने लगी ।

नरेश के सामने उसकी बहन अब पेटिकोट और ब्लाउज में लेटी हुयी थी, शीला की गोरी चिकनी टांगों और उसके शीशे की तरह साफ़ पेट को नंगा देखकर नरेश की हालत और खराब होती जा रही थी।

"भइया पेटिकोट उतारो ना" शीला ने अपने भाई की हालत देखकर मन ही मन में हँसते हुए कहा।

नरेश अपनी बहन की बात सुनकर उसके पेटिकोट को उतारने लगा, शीला ने भी अपने चूतडों को थोडा ऊपर करते हुए अपने भाई को पेटिकोट उतारने में मदद की। नरेश के सामने अब उसकी बहन की चूत सिर्फ एक छोटी सी पेंटी में क़ैद थी जो उसकी बहन की चूत से बुरी तरह चिपकी हुयी थी ।

"भइया ऐसे क्या देख रहे हो हमें दर्द हो रहा है" शीला ने अपने भाई को अपनी पेंटी की तरफ देखते हुए पाकर टोकते हुए कहा । नरेश अपनी बहन की बात सुनकर होश में आते हुए अपने हाथ से अपनी बहन की चूत को उसकी पेंटी के ऊपर से सहलाने लगा।

"ओहहहहहह इसशहहह भैया आराम से दबाओ बुहत ज्यादा दर्द है" शीला ने अपने भाई के हाथों से तेज़ दबाने से बुरी तरह काँपते हुए ज़ोर से चीख़कर उसके हाथ को पकडते हुए कहा । नरेश अपनी बहन की बात सुनकर अपने हाथ को आराम से उसकी पेंटी पर घुमाने लगा ।

"भइया यह आपका तो बुरी तरह उछल रहा है" शीला की नज़र अचानक अपने भाई की पेण्ट की तरफ चलि गयी। जिसमें उसका लंड बुरी तरह झटके खा रहा था,

"दीदी इस बेचारे का क्या क़सूर आपका जिस्म देखकर यह अपने होश खो बैठा है" नरेश ने अपने लंड को अपनी पेण्ट में दबाते हुए कहा।

"बुहत बदमाश है आपका यह अपनी बहन के जिस्म को देखकर भी खामोश नहीं बैठ सकता" शीला ने अपने हाथ से नरेश के लंड को उसकी पेण्ट के ऊपर से ही दबाते हुए कहा।

"आआह्ह्ह्ह दीदी छोड़ो इसे वरना यह ज्यादा तंग करने लगेंगा" नरेश ने अपनी बहन का हाथ अपने लंड पर पड़ने से बुहत ज़ोर से सिसकते हुए कहा ।

"भइया आप भी इस बेचारे पर ज़ुल्म कर रहे हो । ऐसे इसको क़ैद कर रखा है बेचारे का दम घुट रहा होगा ऐसा करो अपनी पेण्ट को उतार दो ताकि यह आराम से उछल कूद सके" शीला ने अपने भाई के लंड को छोडकर उसे सलाह देते हुए कहा।
 
दोस्तों आपलोगों के सहयोग के लिए बहुत बहुत थैंक्स।कहानी जारी रहेगी।अगला अपडेट जल्दी ही।कहानी के बारें में अपनी राय अवश्य दें।thanks
 
"दीदी शायद आप ठीक कह रही हो" नरेश को भी पेण्ट में उसका लंड बुहत तंग कर रहा था । इसीलिए उसने फ़ौरन अपनी दीदी की बात मानते हुए अपनी पेण्ट को उतारकर अपने जिस्म से अलग करते हुए कहा । शीला के सामने अब उसके भाई का लम्बा और मोटा लंड सिर्फ अंडरवियर में क़ैद था। जिसे देखकर वह ज्यादा गरम होने लगी ।

नरेश ने अब अपने हाथ को फिर से अपनी बहन की छोटी सी पेंटी पर रख दिया और बुहत आराम से उसे सहलाने लगा।

"आह्ह्ह्हह भैया ओह्ह्ह्हह" शीला बुहत गरम हो चुकी थी । जिस वजह से उसकी चूत से अब रस टपक कर उसकी पेंटी को गीला करने लगा था और शीला भी उत्तेजना के मारे वैसे ही सिसक रही थी।

"दीदी यह क्या है आपके यहाँ से तो कुछ पानी निकल रहा है कहीं आपको यहाँ पर कोई ज़ख़्म तो नहीं जहाँ से यह पानी निकल रहा है" नरेश ने अपनी बहन की चूत से निकलते हुए पानी को अपने हाथ पर लगने से परेशानी का नाटक करते हुए कहा ।

"भइया पता नहीं है मगर आपके रगडने से आराम मिल रहा है" शीला ने भी अपने भाई का साथ देते हुए कहा।

"दीदी ऐसे नहीं चलेगा हमें आपके ज़ख़्म को देखना होगा कहीं गहरा ज़ख़्म निकला तो फिर ओपरेशन होगा आपका" नरेश ने अपनी बहन की तरफ देखते हुए कहा।

"भइया जैसे आप ठीक समझें आप हमारा बुरा तो नहीं सोचेंगे" शीला का अंग अंग अपने भाई की बात सुनकर सिहर उठा और वह वैसे ही लेटे हुए अपने भाई से बोली । नरेश अपनी बहन की इजाज़त पाते ही अपने हाथों को उसकी पेंटी में ड़ालते हुए उसके चूतडों से अलग करने लगा, शीला की पेंटी उसके चूतडों से हटते हुए नीचे होने लगी। शीला ने भी अपने चूतडों को थोडा सा ऊपर करते हुए अपनी पेंटी उतारने में अपने भाई की मदद की ।

"दीदी आप अपनी टांगों को जितना हो सकता है फ़ैला दें ताकी हम आपके ज़ख़्म को ठीक से देख सके" नरेश ने अपनी बहन की पेंटी के उतारते ही उतेजित होते हुए कहा।

शीला ने अपने भाई की बात सुनकर अपनी दोनों टांगों को पूरी तरह से फ़ैला दिया । शीला अपनी चूत को अपने भाई के सामने नंगा होने के अहसास से बुरी तरह उत्तेजित हो रही थी। जिस वजह से उसकी चूत बुहत ज्यादा पानी टपका रही थी।

"दीदी मेरा अंदाजा ठीक था यहाँ पर तो ज़ख़्म दिख रहा है उसी में से देखो कितना पानी निकल रहा है" नरेश ने अपनी बहन की हलके बालों वाली गुलाबी चूत को गौर से देखकर अपने हाथ को उसकी चूत के छेद से निकलते हुए पानी पर रखते हुए कहा ।
 
"हाहहहहह भैया फिर कुछ करो ना" शीला अपने भाई के हाथ को अपनी चूत के छेद पर लगते ही बुरी तरह काँपकर सिसकते हुए बोली।

"दीदी हमें आपके ज़ख़्म को अपनी जीभ से चाटना होगा । क्योंकी थूक से ज़ख़्म जल्दी ठीक हो जाता है" नरेश ने अपनी बहन की बेचैनी को देखकर जल्दी से बोला।

"भइया जो करना है जल्दी करो अब हम से बर्दाशत नहीं होता" शीला ने अपने भाई की बात को सुनकर जल्दी से कहा।

"ठीक है हम आपके ज़ख़्म को अभी अपनी जीभ से चाटकर ठीक कर देते है" नरेश ने इतना कहकर थोडा पीछे होकर अपनी बहन की टाँगो के नीचे लेटते हुए अपना मूह उसकी चूत पर रख दिया।

नरेश को अपनी बहन के चूत से निकलती हुयी गंध बुहत ज्यादा मदहोष कर रही थी। उसने पहले अपनी दीदी की चूत को अपने होंठ से चूमा और फिर अपनी जीभ को निकलकर अपनी बहन की चूत के छेद पर रखते हुए उसमें से निकलता हुआ रस चाटने लगा ।

"ओहहहहह भैया बुहत सुकून मिल रहा है" शीला अपने भाई की जीभ को अपनी चूत के छेद पर लगने से ही कापंते हुए ज़ोर से चील्लाकर बोली । नरेश अपनी बहन की चीख़ें सुनकर उसकी चूत को बुहत ज़ोर से चाटने लगा। नरेश कुछ देर तक अपनी बहन की चूत को चाटने के बाद अब अपना मुँह खोलकर उसको चूत के दोनों पतले लबों को अपने मुँह में लेकर चूसने लगा।

"आह्ह्ह्ह भैया हहः" शीला के मुँह से ज़ोर की सिसकिया निकली और वह अपनी चूत को बुरी तरह से अपने भाई के मूह पर दबाते हुए झरने लगी । शीला की आँखें झरते हुए मज़े के मारे बंद हो गयी, नरेश अपनी बहन की चूत का रस जितना हो सकता था ,चाटने लगा।

शीला ने कुछ देर बाद अपनी आँखें खोली तो उसके भैया ने भी अपना मूह उसकी चूत से हटा दिया।

"दीदी अब कैसा लग रहा है" नरेश ने अपनी बहन की तरफ देखते हुए कहा।

"भइया आपने हमारा सारा दर्द ख़तम कर दिया" शीला ने अपने भाई को देखते हुए कहा।

"दीदी हमने आपके ज़ख़्म को ऊपर से साफ़ किया है अभी तो इसे अंदर से साफ़ करना बाकी है" नरेश ने अपने बहन की आँखों में देखते हुए कहा।

"ओहहहह भैया वह कैसे" शीला समझ चुकी थी की उसका भाई अब उसे चोदना चाहता है मगर फिर भी वह नाटक करते हुए बोली । शीला का पूरा जिस्म अपनी चुदाई के बारे में सोचकर ही ख़ुशी से झूमने लगा।।

"दीदी अब मुझे अपने इसका इस्तमाल करना होगा" नरेश ने अपने लंड की तरफ इशारा करके अपनी बहन को बताते हुए कहा।

"भइया आप इससे क्या करेंगे" शीला ने फिर से अन्जान बनते हुए कहा।

"दीदी मैं इसे आपकी जीभ से गीला करके आपके इस छेद में डालूँगा ताकी आपकी यह जगह अंदर से भी पूरी तरह साफ़ हो जाए" नरेश ने अपनी बहन की आँखों में देखते हुए कहा जो अपने भाई की बात को सुनते हुए चमक रही थी ।
 
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