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विजय को नमकीन सा स्वाद लग रहा था.. और कुछ देर यूं ही पैन्टी के ऊपर से चाटने के बाद मुँह से ही पैन्टी को साइड कर दिया और उसकी गुलाबी चूत को जीभ से चाटने लगा।
कंचन ने भी आज ही चूत को साफ़ किया था.. एक भी बाल नहीं था और ऊपर से इतनी मखमल सी मुलायम चूत.. आह्ह.. मजा आ गया।
आप सोच सकते हो विजय को उसकी चूत को चाटने में कितना मजा आ रहा होगा। लेकिन उसकी पैन्टी बार-बार बीच में आ जा रही थी.. तो विजय ने अपनी बहन या बीबी की पैन्टी को उतार दिया।
अब नंगी चूत देख कर विजय उसको किस करने लगा और अपनी पूरी जीभ चूत के अन्दर डाल कर चूसने लगा। विजय की पूरी जीभ चूत के बहुत अन्दर तक चली जा रही थी.. कंचन भी मस्त हो कर अपनी चूत को उठा रही थी।
कुछ देर ऐसा चला.. फिर विजय ने उंगली से चूत की फांकों को अलग किया और जीभ को और अन्दर तक ले गया।
कंचन की ‘आह्ह..’ निकल गई.. विजय ने पूरी मस्ती से जीभ को चूत में अन्दर-बाहर करने लगा।
कंचन के मुँह से सिसकारी निकल रही थी। कुछ देर ऐसा करने के बाद उसका बदन अकड़ने लगा और उसने अपनी जांघों से विजय के सिर को दबा लिया.. तभी अचानक उसकी चूत ने एक जोरदार पानी की धार छोड़ दी.. जिससे विजय का पूरा चेहरा भीग गया।अब कंचन झटके ले-ले कर पानी छोड़ती रही और फिर निढाल हो कर लेट गई।
कुछ देर बाद विजय ने भी उसको छोड़ दिया करीब 5 मिनट के बाद विजय फिर से हरकत में आ गया और उसकी नाभि पर उंगली घुमाने लगा.. तो कंचन खुद विजय के ऊपर लेट गई और ‘लिप किस’ करने लगी।
कुछ देर ‘लिप किस’ करने के बाद दोनों एक-दूसरे के बदन पर किस करने लगे और एक-दूसरे को चूसने लगे। विजय ने कुछ देर ऐसा करने के बाद उसके लहँगे के अन्दर हाथ डाल दिया और उसके भरे हुए चूतड़ों को दबाने लगा।
कुछ देर दबाने के बाद विजय ने कंचन के लहँगे को नीचे कर दिया और उसके चूतड़ों को क़ैद से आज़ाद करवा दिया।
कंचन ने भी आज ही चूत को साफ़ किया था.. एक भी बाल नहीं था और ऊपर से इतनी मखमल सी मुलायम चूत.. आह्ह.. मजा आ गया।
आप सोच सकते हो विजय को उसकी चूत को चाटने में कितना मजा आ रहा होगा। लेकिन उसकी पैन्टी बार-बार बीच में आ जा रही थी.. तो विजय ने अपनी बहन या बीबी की पैन्टी को उतार दिया।
अब नंगी चूत देख कर विजय उसको किस करने लगा और अपनी पूरी जीभ चूत के अन्दर डाल कर चूसने लगा। विजय की पूरी जीभ चूत के बहुत अन्दर तक चली जा रही थी.. कंचन भी मस्त हो कर अपनी चूत को उठा रही थी।
कुछ देर ऐसा चला.. फिर विजय ने उंगली से चूत की फांकों को अलग किया और जीभ को और अन्दर तक ले गया।
कंचन की ‘आह्ह..’ निकल गई.. विजय ने पूरी मस्ती से जीभ को चूत में अन्दर-बाहर करने लगा।
कंचन के मुँह से सिसकारी निकल रही थी। कुछ देर ऐसा करने के बाद उसका बदन अकड़ने लगा और उसने अपनी जांघों से विजय के सिर को दबा लिया.. तभी अचानक उसकी चूत ने एक जोरदार पानी की धार छोड़ दी.. जिससे विजय का पूरा चेहरा भीग गया।अब कंचन झटके ले-ले कर पानी छोड़ती रही और फिर निढाल हो कर लेट गई।
कुछ देर बाद विजय ने भी उसको छोड़ दिया करीब 5 मिनट के बाद विजय फिर से हरकत में आ गया और उसकी नाभि पर उंगली घुमाने लगा.. तो कंचन खुद विजय के ऊपर लेट गई और ‘लिप किस’ करने लगी।
कुछ देर ‘लिप किस’ करने के बाद दोनों एक-दूसरे के बदन पर किस करने लगे और एक-दूसरे को चूसने लगे। विजय ने कुछ देर ऐसा करने के बाद उसके लहँगे के अन्दर हाथ डाल दिया और उसके भरे हुए चूतड़ों को दबाने लगा।
कुछ देर दबाने के बाद विजय ने कंचन के लहँगे को नीचे कर दिया और उसके चूतड़ों को क़ैद से आज़ाद करवा दिया।