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"पिता जी मुझे कुछ नहीं पता मगर आपको देखकर मुझे भी कुछ होने लगता है" कंचन ने अपना कन्धा फिर से नीचे करते हुए कहा।
"ओहहहह बेटी इसका मतलब तुम्हारा दिल भी अपने पिता के साथ सब करने को करता है" मुकेश ने कंचन की बात सुनकर खुश होते हुए कहा और अपनी बेटी का हाथ पकडकर अपनी पेण्ट के ऊपर सीधा अपने खडे लंड पर रख दिया ।
कंचन का पूरा जिस्म अपना हाथ अपने पिता की पेण्ट पर पडते ही सिहर उठा क्योंकी मुकेश का लंड पूरी तरह से तना हुआ था जो कंचन को अपना हाथ वहां पर रखते ही महसूस हुआ।
"पिताजी एक बात कहूँ?" कंचन ने मुकेश की तरफ देखते हुए कहा।
"हाँ बेटी बताओ क्या बात है" मुकेश ने खुश होते हुए कहा।
"पिताजी मुझे इतनी शर्म आ रही है की मैं आपका साथ नहीं दे पाऊँगी अगर आप अपनी आँखें बंद करके मेरे साथ यह सब करें तो मुझे शर्म नहीं आएगी और मैं आपका साथ भी दूँगी" कंचन ने अपना कन्धा नीचे करते हुए कहा ।
"ठीक है बेटी मैं अपनी आँखें अभी बंद कर देता हूँ मगर फिर सब कुछ तुम्हें ही करना होगा" मुकेश ने अपनी बेटी की तरफ देखते हुए कहा।
"ठीक है पिता जी मगर ऐसे नहीं एक मिनट" कंचन ने बेड से उठकर अलमारी से अपनी माँ का एक दुप्पटा उठा लिया और अपने पिता के पास आते हुए उसे उनकी आँखों पे कस के बाँध दिया ।
"अरे बेटी तुमने तो सच में मुझे अँधा बना दिया" मुकेश ने अपनी आँखों पर पट्टी बाँधने के बाद कहा।
"पिताजी अभी तो आपकी बाहों को भी बाँधना है" कंचन ने अपनी साड़ी को अपने जिस्म से अलग करते हुए कहा।
"बेटी यह ठीक नहीं है फिर तो मैं तुम्हें छु भी नहीं सकता" मुकेश ने कंचन की बात सुनकर परेशान होते हुए कहा ।
"पिताजी आप चिंता मत करें मैं आप को किसी शिकायत का मौका नहीं दूंगी" कंचन ने अपने पिता से कहा और उनके शर्ट को उनके जिस्म से अलग करते हुए उनको सीधा बेड पर ले जाते हुए उसके दोनों बाजु को ऊपर करके बाँध दिया । कंचन ने अपने पिता को बाँधने के बाद बेड से उतरते हुए अपने पूरे कपड़ों को अपने जिस्म से अलग कर दिया और बिलकुल नंगी हो गई ।
"ओहहहह बेटी इसका मतलब तुम्हारा दिल भी अपने पिता के साथ सब करने को करता है" मुकेश ने कंचन की बात सुनकर खुश होते हुए कहा और अपनी बेटी का हाथ पकडकर अपनी पेण्ट के ऊपर सीधा अपने खडे लंड पर रख दिया ।
कंचन का पूरा जिस्म अपना हाथ अपने पिता की पेण्ट पर पडते ही सिहर उठा क्योंकी मुकेश का लंड पूरी तरह से तना हुआ था जो कंचन को अपना हाथ वहां पर रखते ही महसूस हुआ।
"पिताजी एक बात कहूँ?" कंचन ने मुकेश की तरफ देखते हुए कहा।
"हाँ बेटी बताओ क्या बात है" मुकेश ने खुश होते हुए कहा।
"पिताजी मुझे इतनी शर्म आ रही है की मैं आपका साथ नहीं दे पाऊँगी अगर आप अपनी आँखें बंद करके मेरे साथ यह सब करें तो मुझे शर्म नहीं आएगी और मैं आपका साथ भी दूँगी" कंचन ने अपना कन्धा नीचे करते हुए कहा ।
"ठीक है बेटी मैं अपनी आँखें अभी बंद कर देता हूँ मगर फिर सब कुछ तुम्हें ही करना होगा" मुकेश ने अपनी बेटी की तरफ देखते हुए कहा।
"ठीक है पिता जी मगर ऐसे नहीं एक मिनट" कंचन ने बेड से उठकर अलमारी से अपनी माँ का एक दुप्पटा उठा लिया और अपने पिता के पास आते हुए उसे उनकी आँखों पे कस के बाँध दिया ।
"अरे बेटी तुमने तो सच में मुझे अँधा बना दिया" मुकेश ने अपनी आँखों पर पट्टी बाँधने के बाद कहा।
"पिताजी अभी तो आपकी बाहों को भी बाँधना है" कंचन ने अपनी साड़ी को अपने जिस्म से अलग करते हुए कहा।
"बेटी यह ठीक नहीं है फिर तो मैं तुम्हें छु भी नहीं सकता" मुकेश ने कंचन की बात सुनकर परेशान होते हुए कहा ।
"पिताजी आप चिंता मत करें मैं आप को किसी शिकायत का मौका नहीं दूंगी" कंचन ने अपने पिता से कहा और उनके शर्ट को उनके जिस्म से अलग करते हुए उनको सीधा बेड पर ले जाते हुए उसके दोनों बाजु को ऊपर करके बाँध दिया । कंचन ने अपने पिता को बाँधने के बाद बेड से उतरते हुए अपने पूरे कपड़ों को अपने जिस्म से अलग कर दिया और बिलकुल नंगी हो गई ।