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परिवार(दि फैमिली) complete

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नीलम की सांसें चढ़ रही थी… वो भी कभी भी झड़ सकती थी, वो पागलों की तरह अपने चुचियों को मसल रही थी… चूत पे होते हमले उसे पागल कर रहे थे। महेश उसे घचाघच पेल रहा था अचानक महेश का बदन अकड़ने लगा, उसके झटके स्लो पर भारी हो गए, नीलम का बदन भी चरम पर था और ऐंठ रहा था। एक लंबी चीत्कार के साथ दोनों झड़ गए और थकावट से निढाल गए महेश उसपर गिर गया और प्यार से चूमने लगा। दोनों काफी देर वहीं पड़े रहे।

जब ज्योति घर पर नहीं रहती है तब महेश नीलम को दिनभर नंगा ही रखता है और दिन भर अपनी बहू से अपना लंड चुसवाता है और उस की जबरदस्त चुदाई करता है जब महेश को मालूम चलता है कि नीलम को पीरियड्स बंद हो गए हैं तब वह नीलम को सलाह देता है कि वह वह अपने पति के साथ भी सेक्स कर ले किसी तरह से नीलम अपने पति को सेक्स करने देती है ताकि बाद में कोई प्रॉब्लम ना हो और बाद में उसका पति उसके बच्चे को अपना नाम देने से इंकार ना कर दे और समीर और ज्योति अभी भी हर रात को पति पत्नी की तरह चुदाई करते हैं और नीलम भी अपने ससुर के साथ बहुत खुश है।महेश अपनी बहु और बेटी दोनों अपनी पर्सनल रंडी बना चूका है।नीलम तो अपने ससुर की इतनी दीवानी हो चुकी है की अगर उसका ससुर महेश बोल दे तो वह बीच चौराहे पर भी अपनी चूत और गांड अपने ससुर से चुदवा लेगी।

महेश अपनी बहु को कही भी कुतिया बना के चोदने लगता है।वह अपनी बहु को रंडियो की तरह गाली दे देकर उसकी चूत और गांड मारता है।उसकी बहु तो लंड की इतनी प्यासी हो चुकी है की एक इशारे पर अपने ससुर के आगे घुटनों के बल बैठकर उसका लंड चूसने लगती है।सेक्स का ऐसा कोई आसन नहीं जो महेश ने अपने बहु पर नहीं आजमाया हो।महेश अपनी बहु को घर में हर जगह चोद चूका है।वह अपनी बहु से अपनी हर फैन्टेसी पूरी करा चूका है।

अब ससुर बहु खुश है साथ में ज्योति और समीर भी।अब समीर और नीलम भी समझौता कर चुके है।और नीलम अब माँ बननेवाली है।बच्चा भले ही महेश का है लेकिन नाम तो समीर का ही चलेगा।

अब चलते है आखिरी परिवार की तरफ

अगले अपडेट में-
 
कहानी पसंद करने और उत्साह बढ़ने के लिए सभी को थैंक्स।कहानी जारी रहेगी।अगला अपडेट जल्दी ही।कहानी के बारें में अपनी राय अवश्य दें।thanks
 
अब चलते है रेखा के घर जहाँ रेखा रात को अपने पति के सोने के बाद अपने ससुर अनिल के रूम में जाकर चुदवा रही है।

दूसरी तरफ विजय कोमल को चोद रहा था तभी उसने कोमल से कहा । मैं चाहता हूं की मैं तुमको और कंचन दीदी को एक साथ चुदाई करुं ताकि फिर हमें भविष्य में चुदाई करने में कोई दिक्कत ना हो । उसके बाद हम लोग या तो तुम्हारे रूम में या फिर कंचन दीदी के रूम में या फिर मेरे रूम में कहीं भी खुल के चुदाई का मजा ले सकते हैं। और किसी को घर में खबर भी नहीं होगा बहुत कुछ समझा कर विजय ने कोमल को थ्रीसम के लिए तैयार कर लिया।

विजय ने प्लान के अनुसार कोमल को बता दिया था कि कल दिन में जब मैं कंचन दीदी की चुदाई करूं तब तुम उनके रूम के अंदर आ जाना और फिर जब हम दोनों चुदाई करने लगे तो तुम सामने आ जाना और चुदाई में शामिल हो जाना।

अपने प्लान के अनुसार दिन में जब विजय कंचन के रूम में आया तब उसने धीरे से कोमल को भी बुला लिया जब विजय कंचन के कमरे में अंदर आकर कंचन दीदी को अपनी बाहों में भर लिया और कंचन के रसीले होंठो को चूसने लगा तभी कंचन बोली।

कंचन- क्या कर रहे हो भाई। जाओ पहले दरवाजा बंद करके आओ.. ताकि कोई आए तो पता चल जाएगा।

विजय- ओके.. मैं आता हूँ..

विजय दरवाजा बंद करके बाहर निकला तो पीछे के दरवाजे से कोमल अन्दर आकर छुप चुकी थी.. तो विजय ने दरवाजा बंद कर दिया।

कंचन- ठीक से बंद कर दिया ना?

विजय- हाँ मेरी जान.. अब मुझसे कंट्रोल नहीं हो रहा है।

कंचन- तो करने को कौन बोल रहा है.. मेरी जान.. आ जाओ मैं भी तड़फ रही हूँ।

विजय- तो आ जा.. अभी तड़फ मिटा देता हूँ।

विजय अपनी दीदी से लिपट गया और दोनों एक-दूसरे को चूमने लगे और विजय सीधा कंचन के रसीले होंठों पर अपने होंठों को रख दिया और उसे किस करना शुरू कर दिया।
 
कुछ देर वैसा करने के बाद विजय थोड़ा नीचे आया और उसकी गर्दन को चूमने लगा।

कंचन विजय के लंड पर हाथ फेरने लगी और विजय उसकी चूचियों को कपड़ों के ऊपर से ही चूमने-चाटने लगा। वो अपने भाई के लंड को दबाने लगी.. तो विजय भी उसकी चूचियों को मुँह से और चूतड़ों को हाथ से ज़ोर-ज़ोर से दबाने लगा। कुछ देर ऐसा करने के बाद विजय उसकी चूचियों को टॉप से निकालने लगा.. तो उसने खुद हाथ ऊपर कर दिए तो विजय ने पूरा टॉप ही बाहर निकाल दिया।

अब कंचन के दोनों रसीले संतरे बाहर आ गए और विजय की आँखों के सामने नग्न हो चुके थे.. तो विजय बेसब्री से उनको चूसने लगा।

अब तक कंचन विजय के लंड को बाहर निकालने की कोशिश करने लगी थी.. तो विजय ने खुद अपना पैंट खोल दिया और उसका लंड फनफनाता हुआ बाहर निकल आया.. जिसको पकड़ कर कंचन बोली- अरे वाह.. ये तो पहले से काफ़ी बड़ा और मोटा हो गया है.. लगता है इसका बहुत इस्तेमाल हुआ है।

विजय ने हँसते हुए कहा- नहीं दीदी वैसी बात नहीं है.. ये तो तुम्हारे हाथों का कमाल है।

कंचन- देख कर तो नहीं लग रहा है.. मुझे तो ऐसा लग रहा है कि इसका इस्तेमाल बहुत ज्यादा हुआ है।

विजय- दीदी अगर आपके सवाल-जवाब ख़तम हो गए हों तो अब हम अपना काम करें.. मुझसे कन्ट्रोल नहीं हो पा रहा है।

कंचन ने अपने भाई के लंड को पकड़ते हुए कहा- हाँ यार.. सच बोलूँ.. तो मुझे भी कंट्रोल नहीं हो रहा है.. जी कर रहा है खा जाऊँ इसे..

विजय- तो खा जाओ.. रोका किसने है.. लेकिन पूरा मत खाना.. नहीं तो तुम्हारी चूत को कौन शान्त करेगा..

कंचन- हाँ ये भी सही बोल रहे हो भाई..

विजय अपनी दीदी की चूचियों को पीने लगा और मसलने लगा। तभी उसकी नज़र कोमल पर पड़ी.. तो वो इशारा कर रही थी कि ठीक से दिख नहीं रहा है।

तो विजय ने अपनी दीदी को गोद में उठाया और दूसरे साइड में बिस्तर पर लिटा दिया।

पीछे से कोमल की सहमति मिली कि हाँ.. अब सब कुछ दिख रहा है.. तो विजय फिर से अपने काम में लग गया और अपनी दीदी की बड़ी बड़ी चूचियों को पीने लगा।
 
विजय अपनी बड़ी बहन की बड़ी बड़ी चूचियों को पीते-पीते नीचे बढ़ने लगा और उसके पेट पर चुम्बन करने लगा.. तो कंचन मुँह से सीत्कार निकलने लगी।

अंततः विजय उसकी चूत के पास पहुँच गया और कपड़ों के ऊपर से ही उसे चूमने लगा। कुछ देर चूमा.. कि तभी कोमल ने इशारा किया कि दीदी को पूरा नंगा करो। तो विजय कंचन को बिस्तर पर खड़ा किया और उसकी स्कर्ट को नीचे कर दिया। अब उसकी दीदी की चूतड़ कपड़ों से पूरी तरह से आज़ाद हो गए थे और विजय ने देखा कि पीछे कोमल की चुदासी सूरत देखने लायक थी। वो अपनी दीदी को पहली बार नंगा देख रही थी।

विजय अपनी दीदी के मुलायम चूतड़ों पर हाथ फेरने लगा.. उसे बहुत अच्छा लग रहा था.. वह बता नहीं सकता कि कितना अच्छा लग रहा था। कुछ देर ऐसा करने के बाद दीदी ने विजय के लंड को पकड़ लिया और चूसने लगीं..

तभी विजय ने कोमल को आने का इशारा कर दिया और वो पीछे आ कर खड़ी हो गई.. लेकिन कंचन को पता नहीं चला… वो तो विजय का लंड चूसने में मस्त थी।

तभी कोमल आगे आ गई और तभी कंचन दीदी की नज़र उस पर पड़ी तो उन्हें झटका लगा और वो लंड छोड़ कर सीधे एक चादर से अपने आपको ढकने की कोशिश करने लगी, कंचन के चेहरे पर शर्मिन्दगी साफ़ झलक रही थी।

विजय उसी तरह नंगा ही खड़ा हो गया.. विजय का लंड तो पहले से ही खड़ा था ही.. वह बिस्तर के एक तरफ बैठ गया। अब विजय ने अपनी छोटी बहन कोमल को अपने तरफ़ खींच लिया और उसको अपनी गोद में बैठा लिया और उसके हाथ में अपना लंड दे कर उसको चुम्बन करने लगा।

कंचन- ये क्या कर रहे हो तुम दोनों मेरे सामने ? तुम दोनों को शर्म नहीं आती अपनी बड़ी बहन के सामने ये सब करते हुए।

कोमल- अभी तुम क्या कर रही थी दीदी।अब शर्म छोड़ दीजिए दीदी.. और चादर हटा लीजिये।

विजय- हाँ हटा दो दीदी..

कंचन हँसते हुए- हटाती हूँ.. लेकिन तुम कहाँ से आ गई छोटी।

तो विजय और कोमल ने मिल कर अपनी दीदी को सारी बातें बता दीं।

कंचन- मतलब ये तुम दोनों का प्लान था।

कोमल और विजय- हाँ..दीदी।

कंचन- तुम दोनों को देख कर मुझे लगा तो था..

कोमल और विजय- क्या लगा था?

कंचन- यही की दोनों जल्दी ही मेरे सामने चुदाई करोगे और अपनी चुदाई में मुझे भी शामिल करोगे।

कोमल और विजय- हाहहह..दीदी।

कंचन-अब तो तुम पक्के बहनचोद बन गए हो भाई।अब दोनों बहनों को एक साथ चोदने वाले हो।

विजय- वो तो हूँ ही.. लेकिन चोदने वाली क्या बात है.. घर का माल अगर घर में ही रह जाए.. तो बुरा ही क्या है.. मैं नहीं चोदता.. तो तुम जैसी जबरदस्त माल को कोई और तो पक्का ही चोद देता . तो मैं ही क्यों नहीं चोद लूँ।

कंचन & कोमल- ओह ऊओ.. तो हम दोनों माल हैं..

विजय- अरे नहीं दीदी.. मेरा मतलब वो नहीं था..

कंचन और कोमल- तो क्या मतलब था?

विजय- अरे कुछ नहीं दीदी।छोड़ो इन बातों को.. आओ मजे करते हैं।

कंचन और कोमल- हाँ आओ भाई..
 
विजय- हम दोनों तो नंगे हैं ही.. कोमल सिर्फ़ कपड़ों में है.. तुम भी अपने कपड़े उतारो न..

कंचन- हाँ छोटी उतार दे और आज तक इसने हम दोनों को चोदा है.. आज हम दोनों मिल कर इसको चोदेंगे।

कोमल- हाँ ये सही रहेगा दीदी.. मैं जल्दी से कपड़े उतार देती हूँ।

कोमल एक-एक करके अपने कपड़े उतारने लगी और विजय मन ही मन ये सोच कर रोमांचित हो रहा था कि आज फिर से दो मस्त रसीली चूतों को एक साथ चोदने का मौका मिलेगा। पिछली बार कंचन और शीला को एक साथ चोदा था।

कंचन और शीला के बारे में जानने के लिए कहानी शुरु से जरूर पढ़ें।

लेकिन उसके बाद फिर से विजय ने किसी दो लड़कियों को एक साथ में नहीं चोदा था। अब मौका मिल गया है.. दो लड़कियों को एक साथ चोदने का..वो भी अपनी सगी बहनों को।

तब तक कोमल कपड़े उतार चुकी थी और वो इतराती हुई विजय और कंचन की तरफ़ बढ़ने लगी और उसकी तनी हुई चूचियों को ऊपर-नीचे होते देख कर विजय का लंड.. जो पहले से ही खड़ा था.. उसको इस तरह देख कर पूरे उफान पर पहुँच गया था।

विजय उसे पकड़ने के लिए उठने ही वाला था कि तभी कंचन दीदी ने उसे खींच लिया और विजय बैठ गया। कंचन विजय की एक जाँघ के पास बैठ गई.. तब तक कोमल भी विजय के दूसरी जाँघ के पास बैठ गई।

विजय के लंड की कुछ ऐसी हालत थी कि दो-दो चूतें उसके दोनों बगलों में थीं.. लेकिन किस में पहले जाया जाए.. वह यही सोच रहा था..

लेकिन विजय का हाथ कौन सा रुकने वाला था एक हाथ से अपनी बड़ी बहन कंचन की और दूसरी हाथ से अपनी छोटी बहन कोमल की चूचियों को दबाने लगा और दोनों विजय को लिप किस करने लगीं।

कुछ देर ऐसा करने के बाद विजय अलग हुआ और तो कंचन ने उसे बिस्तर पर गिरा दिया। विजय पीठ के बल लेट गया और दोनों बहने उसे किस करने लगीं। पूरे बदन पर कुछ देर किस करने के बाद उसकी दीदी लंड को चुम्बन करने लगीं और कोमल विजय को अपनी चूचियों का रस पिला रही थी।
 
कुछ देर बाद कोमल भी अपनी चूत को विजय के मुँह के पास करके लंड को चाटने लगी। ऐसा लग रहा था कि एक आइसक्रीम को दोनों बहन शेयर करके चूस रही हों। दोनों विजय के लंड को चाट रही थीं और उसका लंड गरम होता जा रहा था। तो विजय भी इधर कोमल की चूत को चाटने लगा।

उधर उसकी दीदी ने विजय के लंड को चूसने के बाद मुँह से लंड को बाहर निकाला.. तो कोमल ने लंड को मुँह में ले लिया।

अब कंचन विजय के दोनों गोलों को चूसने लगीं.. कुछ देर ऐसा करने के बाद दोनों अपनी गाण्ड विजय के तरफ़ करके उसके लंड को चूसने लगीं.. तो विजय भी कहाँ पीछे रहने वाला था, वह अपनी दोनों बहनो की चूत में उंगली करने लगा।

खैर.. दोनों की चूत इतनी ज्यादा फ़ैल चुकी थी कि उनमें एक उंगली से कुछ होने वाला नहीं था तो विजय ने दूसरी ऊँगली भी डाल दी.. कुछ देर बाद तीसरी और फिर चौथी भी घुसेड़ दी.. तो उसकी दोनों बहनों के मुँह से सीत्कार निकलने लगी।

कुछ देर ऐसा करने के बाद सब झड़ गए और दोनों मिल कर विजय के लंड के पानी को पी गईं।

अब तीनों एक साथ बिस्तर पर लेट गए, विजय बीच में और दोनों बहने दोनों बगल में थीं।

कुछ देर लेटे रहने के बाद दोनों बहने एक साथ विजय के बदन पर उंगली फेरने लगीं.. विजय समझ गया कि अब दोनों को चुदने का मन हो रहा है और उसके लंड महाराज भी खड़े होकर अपनी मर्ज़ी बता चुके थे।

विजय ने कंचन को उठा कर अपने ऊपर खींच लिया और वो विजय के लंड कर बैठ गईं। विजय का लंड थोड़ी सी मेहनत से ही सही लेकिन अन्दर जड़ तक घुसता चला गया और वो भी लण्ड को लीलने के बाद झटके मारने लगी।

इधर कोमल अपनी गाण्ड विजय के मुँह के सामने हिलाने लगी। कुछ देर उछल कुद करने के बाद कंचन लंड पर से हटी.. और कोमल जा कर अपने भाई के लौड़े पर बैठ गई।
 
अब कंचन ने अपनी चूत विजय के मुँह के पास रख दी.. चूसने के लिए.. इधर कोमल विजय के लंड पर खुद झटके मारने लगी।

विजय इधर अपनी दीदी की चूत को चूसने लगा कि तभी उसकी दीदी ने कोमल के मुँह को पकड़ा और अपने होंठों को उसके होंठों पर लगा दिए.. और दोनों चुम्बन करने लगीं।

दोनों रण्डियों की तरह अपनी गाण्ड हिला-हिला कर विजय से चूत चटवाने लगीं.. और वो दोनों विजय के होंठों को चुम्बन भी करती रहीं।

कुछ देर वैसा चलने के बाद कोमल ने अपनी दीदी की चूचियों को पकड़ लिया और दबाने लगी। तो दीदी भी कौन सा पीछे रहने वाली थी.. वो भी शुरू हो गई। उसने भी कोमल की चूचियों को दबाना शुरू कर दिया.. और इधर विजय अपने काम में लगा हुआ था, कोमल को झटके मार रहा था और अपनी दीदी की चूतड़ों को दबाते हुए उसकी चूत को भी चाट रहा था।

कुछ देर ऐसा करने के बाद तीनों अलग हुए और विजय अभी उठने ही वाला था कि दोनों बहनों ने विजय को फिर से बिस्तर पर गिरा दिया और दोनों बहने उसके लंड को चूसने लगीं।

बस कुछ देर में ही विजय झड़ गया.. और दोनों बहनों ने उसके रस को साफ़ कर दिया।

कुछ देर बाद चूत चाटते ही वो दोनों भी विजय के चेहरे पर फिर से झड़ गईं और सारा पानी उसके मुँह में चला गया.. विजय भी मजे से अपनी दोंनो बहनों के चूत का रस पी गया।

फिर तीनों ने साथ में बाथरूम में जाकर अपने आपको साफ़ किया..

दोनों बहनों ने मिलकर नाश्ता बनाया और तीनों नाश्ता करने बैठ गए।

कुछ देर बाद विजय ने देखा कि कोमल और कंचन दीदी दोनों बिस्तर पर बैठे हुए थे। कोमल ने सफेद और गुलाबी मिक्स बिकिनी पहनी थी और दीदी ने काली लाल मिक्स बिकिनी पहनी थी। उन्हें यूँ देख कर तो विजय उत्तेजित हो गया था.. लेकिन फिर विजय ने सोचा कि देखता हूँ कि ये दोनों क्या करती हैं। उसके बाद अन्दर जाऊँगा।

विजय ने देखा कि कंचन दीदी गाण्ड हिला रही थीं और कोमल भी अपने बदन को सहला रही थी कि तभी कोमल और दीदी दोनों एक-दूसरे के पास आए और लिप किस करने लगीं।

कुछ देर लिप किस करने के बाद दीदी कोमल की ब्रा के ऊपर से किस करने लगी।
 
फिर कुछ देर के बाद कंचन दीदी ने कोमल की ब्रा नीचे कर दी और उसके निप्पल को चूसने लगी और हाथ से उसके चूतड़ों को सहलाने लगी।

कोमल भी अपनी दीदी की चूतड़ों को सहलाने लगी.. कुछ देर बाद दीदी की ब्रा नीचे करके वो उसकी चूचियों को चूमने लगी और दबाने भी लगी।

दोनों एक-दूसरे की चूचियों को मसल ही रही थी.. तभी विजय सिर्फ़ अंडरवियर और टी-शर्ट में अन्दर पहुँच गया।

विजय को देखते ही दोनों मुस्कुरा दीं और दोनों एक साथ उसकी तरफ बढ़ने लगीं। दोनों का गोरा बदन.. ऊपर से बड़ी-बड़ी चूचियाँ हिल रही थीं.. जो बहुत ही अच्छा लग रहा था।

जैसे ही विजय उनकी चूचियों को दबाना चाहा कि दोनों बिस्तर पर चूत आगे करके लेट गईं और दोनों ने खुद ही अपनी-अपनी पैन्टी निकाल दी।

पैन्टी निकालने के लिए पैर उठाया.. तो दोनों बहनों की चूत सामने दिखने लगी और बिना बाल का पूरा साफ़-सुथरी गुलाबी चूतें विजय नज़रों के सामने थीं।

तभी विजय कंचन दीदी की चूत की तरफ़ बढ़ने लगा और उनकी चूत को चाटने लगा तो कोमल भी कंचन दीदी की जाँघों को सहलाने लगी और दीदी की चूचियों को चूसने लगी।

विजय इधर चूत को चूसता रहा और कोमल अपनी दीदी की चूचियों को दबाने लगी.. और उनके लबों को चूमने लगी।

तभी कोमल ने दीदी की ब्रा खोल कर पूरी हटा दी।

अब विजय भी कंचन दीदी की चूत को छोड़ कर कोमल की चूत पर पहुँच गया और तब तक कंचन दीदी ने भी कोमल की ब्रा को पूरे तौर से बदन से हटा दी और उसके निप्पलों पर अपना जीभ घुमाने लगी, अपने हाथों से दूसरी चूची को दबाने लगी।

कुछ देर यूँ ही चलता रहा..विजय चूत चूसता और ऊपर वो दोनों मजे लेते रहे।

तभी विजय ने अपनी दीदी की चूत में एक उंगली को घुसा दिया.. तो उसे पता भी नहीं चला.. बड़ी आसानी से अन्दर चली गई.. तो उसने दूसरी उंगली को भी घुसाया और अपनी बड़ी बहन की चूत में अन्दर-बाहर करने लगा।

विजय की देखा-देखी कोमल भी कंचन दीदी की चूत को ऊपर से सहलाने लगी, विजय तेज़ी से अपनी ऊँगली अन्दर-बाहर करने लगा और कंचन दीदी चीखने लगीं।

तभी कोमल ने अपने भाई की उंगली चूत से निकलवा दी और उंगली को मुँह में ले लिया। कुछ देर चूसने के बाद कोमल भी लेट गई और विजय उसकी चूत में भी उंगली करने लगा, अब कंचन दीदी उसकी चूत के ऊपर दबाने लगी और सहलाने लगीं।
 
कुछ देर बाद जब विजय ने कोमल की बुर में से उंगली को निकाला.. तो झट से कंचन दीदी विजय के उंगली को अपने मुँह में ले कर चूसने लगीं।

फिर उन्होंने कोमल की चूत को भी एक बार चाट लिया।

कुछ देर चूत चाटने के बाद विजय ने भी अपनी टी-शर्ट को उतार दिया.. तो दोनों बहनें एक साथ विजय की तरफ़ बढ़ीं और उसे चूमने-चाटने लगीं।

कुछ देर यूँ ही मस्ती करने के बाद विजय उन दोनों के बीच में लेट गया और दोनों बहने विजय के बदन पर चुम्बन करने लगीं। चुम्बन करते-करते दोनों विजय के एक-एक निप्पल पर अपनी जीभ फेरते हुए उसे चुभलाने लगीं और उसको चाटने लगीं।

कुछ देर बाद दोनों साथ ही अपने भाई के लौड़े को अंडरवियर के ऊपर से ही चूमने लगी और कुछ देर ऐसा करने के बाद दोनों ने आपस में कुछ इशारा किया और एक साथ में ही विजय का अंडरवियर नीचे कर दिया.. तो विजय ने हँसते हुए अपने पैर उठा दिए.. जिससे अंडरवियर को पूरा बाहर कर दिया गया।

अब वे तीनों पूरी तरह से नंगे हो चुके थे। वे दोनों बहने साथ में अपने सगे भाई विजय के लंड को चाटने लगीं।

तभी कोमल ने लंड को मुँह में ले लिया और उसकी दीदी नीचे गोटियाँ चाटने लगीं।

विजय अपना लौड़ा चुसवाता हुआ उन दोनों के चूतड़ों को सहला रहा था और दोनों मिल कर विजय के लंड के साथ खेल रही थीं।

कुछ देर कंचन चूसतीं.. तो कुछ देर कोमल..

कुछ देर बाद विजय ने अपनी दीदी को अपने पास खींच लिया और उसके साथ चूमा चाटी करने लगा।

उधर कोमल अब भी उसका लंड चूस रही थी। कुछ देर ऐसा चलता रहा..

फिर वे तीनों खड़े हुए।

कोमल ने कंचन को बेड के एक किनारे पर इस तरह बैठा दिया कि कंचन की चूत एकदम सामने को हो गई.. तो विजय ने अपने खड़े लंड को कंचन की चूत पर घुमाने लगा और एक झटका मारा.. लंड अन्दर घुसता चला गया.. और कंचन के मुँह से ज़ोर से चीख निकल पड़ी- आआ.. आआहह.. उ..ह..!

तो कोमल अपनी दीदी की चूत के पास हाथ फेरने लगी और विजय झटके मारने लगा।

जब कंचन थोड़ा संयत हो गई.. तो विजय ज़ोर-ज़ोर से झटके मारने लगा।
 
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