• Hello Friends You can Register on the Forum and by posting you can earn money too.

परिवार(दि फैमिली) complete

  • Thread starter Thread starter StoryPublisher
  • Start date Start date
"हाहहह मम्मी बुहत भीड़ है इसीलिए हमारा वह आपके पेट पर लग रहा है" नरेश ने अपनी माँ का हाथ अपने लंड पर लगने से सिसकते हुए कहा । मनीषा का पूरा जिस्म पेण्ट के ऊपर से ही अपने बेटे के लंड को हाथ लगाने से सिहर उठा ।

मानिषा मन ही मन में सोचने लगी उसका बेटे का लंड तो बुहत तगडा लगता है।

"ओह बेटे मुझे तो पता ही नहीं था की मेरा बेटा भी जवान हो गया है" मनीषा ने अपने बेटे के लंड को यों ही पेण्ट के ऊपर से टटोलते हुए कहा ।

"हाहहह मम्मी आपके जिस्म की गर्मी की वजह से यह उठ गया है" नरेश ने अपनी माँ के नरम हाथों को अपने लंड पर महसूस करते हुए मज़े से सिसकते हुए कहा।

"बेटे तुम्हारा तो बुहत बदमाश है अपनी माँ के जिस्म को देखकर उठ गया है" मनीषा ने अपने बेटे की तरफ देखकर मुस्कुराते हुए कहा ।

"माँ इस में इसका कोई क़सूर नहीं वह मैं आपको उस शख्स के साथ कब से देख रहा था। इसीलिए यह बेचारा फडक रहा है" नरेश ने अपनी माँ को सीधे सीधे कह दिया । मनीषा के चेहरे से अपने बेटे की बात सुनकर पसीना बहने लगा।

"अरे माँ हम किसी को नहीं बतायेंगे हम अपनी माँ की मजबूरी समझ सकते है" नरेश ने अपनी माँ के चेहरे से अपने हाथ से पसीना पोछते हुए अपनी उँगलियों को उसके गुलाबी लबों पर फिराते हुए कहा ।

"नरेश वह हम बहक गए थे मगर में तुम्हारी माँ हूँ" मनीषा ने गुस्सा करते हुए अपने बेटे के हाथ को अपने चेहरे से हटाते हुए कहा।

"माँ जब आप इतना बहक सकती हो की अपने बेटे के सामने किसी और के साथ यह सब कर लो तो मेरा क्या क़सूर" नरेश ने अपनी माँ की नंगी कमर को अपने हाथों से पकडकर अपनी तरफ खीचते हुए कहा ।

"हाहहह बेटा प्लीज ऐसा मत करो" अपने बेटे का हाथ अपनी नंगी कमर में ड़ालने और उसका लंड अपने पेट पर रगडने से मनीषा ने सिसकते हुए कहा।

"मम्मी मुझे माफ़ कर देना मगर मैं इस वक्त अपने होश में नहीं हूँ" नरेश ने अपनी माँ की कमर से लेकर अपने हाथ को उसके चिकने पेट पर फिरते हुए कहा ।

"ओहहह बेटा क्या कर रहे हो" मनीषा ने सिसकते हुए अपने बेटे से कहा, उसका पूरा जिस्म अपने बेटे का हाथ अपने नंगे पेट पर महसूस होते ही गर्म होने लगा।

"माँ आप ने जैसे उस शख्स को शांत कर दिया प्लीज मुझे भी कर दो वरना मैं मर जाऊँगा" नरेश ने अपनी पेण्ट की ज़िप खोलते हुए अपने अंडरवियर से अपना खडा लंड निकालते हुए कहा ।
 
" बेटे यह सब पाप है" मनीषा की साँसें अपने बेटे का लंड देखकर अटकने लगी, ज़्यादा चिपके होने कारण नरेश का नंगा लंड उसके नंगे पेट पर ठोकरे मारने लगा। जिस कारण मनीषा ने भी गरम होते हुए अपने बेटे के लंड को अपने हाथ से पकडकर बुहत तेज़ साँसें लेते हुए कहा । नरेश का लंड अपनी माँ के नरम हाथ पड़ते ही ज़्यादा तनकर फूलने लगा ।

"आह्ह मम्मी आपका हाथ कितना नरम है" नरेश ने अपनी माँ का हाथ अपने लंड पर पड़ते ही सिसकते हुए कहा और अपने हाथ से अपनी माँ की साड़ी का पल्लु उसकी चुचियों से नीचे गिरा दिया ।

मानिषा का पल्लु नीचे गिरते ही उसके ब्लाउज में क़ैद चुचीयाँ आधि नंगी होकर उसके बेटे के सामने आ गयी ।मनीषा की साँसें बुहत तेज़ चल रही थी। जिस वजह से उसकी चुचियां भी बुहत ज़ोर से ऊपर नीचे हो रही थी, नरेश ने अपनी माँ की आधि नंगी चुचियों को देखते हुए अपने होठ उसके चुचियों के उपरी उभार पर रख दिये।

"आह्ह्ह्ह हहह बेटे" मनीषा ने अपने बेटे के होंठ अपनी चुचियों पर पड़ते ही धीरे से सिसकते हुए कहा और उसका हाथ अपने बेटे के तने हुए गरम लंड पर बुहत ज़ोर से चलने लगा । नरेश किसी भी वक्त झर सकता था। क्योंकी वह इतनी देर से सबकुछ देखकर बुहत ज़्यादा उतेजित हो चुका था, मनीषा भी अपने बेटे के गरम मोटे और लम्बे लंड पर हाथ पड़ने से बुहत ज़्यादा एक्साईटेड हो गई थी और उसकी चूत से भी पानी टपकने लगा था । मनीषा अपना दूसरा हाथ अपने बेटे के बालों में डालकर उसके बालों को सहलाते हुए अपनी चुचियों पर दबाने लगी ।

मानिषा अपनी आँखें बंद करके एक हाथ से अपने बेटे के बालों और दुसरे हाथ से उसके लंड को सहलाने लगी।

"आह्ह मम्मी मैं झरने वाला हूँ" नरेश ने धीमी आवज़ में अपनी माँ से कहा और उसके लंड से वीर्य निकलने लगा ।

मानिषा ने अपने दुसरे हाथ को भी अपने बेटे के बालों से निकालते हुए अपने बेटे के लंड के सामने कर दिया ताकी उसके बेटे के लंड से निकालते हुए वीर्य से उसकी साड़ी ख़राब न हो । नरेश के लंड से कुछ देर तक वीर्य की पिचकारी निकलने के बाद उसका लंड मुरझाते हुए ढीला हो गया।

मानिषा ने अपने बेटे के लंड को छोडते हुए अपनी पर्स से रुमाल निकालते हुए अपने हाथ को साफ़ कर दिया। मनीषा जानती थी की अगर इस बार उसने अपनी साड़ी से हाथ साफ़ किया तो उसकी साड़ी पर बुहत ज़्यादा दाग हो जाएंगे ।

नरेश झरने के बाद शांत होकर सीधा हो गया तभी बस रुक गयी और उस स्टॉप तक आने वाले लोग उतरने लगे । मनीषा और नरेश को भी उसी स्टॉप पर उतरना था तो मनीषा ने अपनी साड़ी को ठीक कर दिया और नरेश ने अपनी पेण्ट की ज़िप बंद कर लिया, दोनों माँ बेटे एक साथ नीचे उतरने लगे ।
 
बेटे तुम्हारे लिए जल्दी से कोई लड़की देखनी पडेगी। आज हमें पता चल गया की तुम बिलकुल जवान हो चुके हो" मनीषा ने बस से उतरने के बाद अपने बेटे के साथ एक अंडरगारर्मेन्टस की दूकान में दाखिल होते हुए कहा ।

"मम्मी हमें माफ़ कर दो हम आपको उस शख्स के साथ देखकर अपना कण्ट्रोल खो बैठे थे" नरेश ने शरमिंदा होते हुए कहा ।

"बेटे तुम्हारा कोई क़सूर नहीं हम ही बहक गए थे तो तुम्हारा क्या क़सूर, वैसे जिस लड़की के साथ तुम शादी करोगे वह दुनिया की ख़ुशनसीब लड़की होगी" मनीषा ने अपने बेटे के गाल की चिकोटी लेते हुए कहा।

"क्या चाहिए मेंम साहब" जिस दूकान में वह दाखिल हुए थे उस में से एक ख़ूबसूरत लड़की ने मनीषा की तरफ देखते हुए पूछा।

मानिषा ने उस लड़की से अपने लिए कुछ पेंटी और ब्रा लाने को कहा ।

मानिषा की बात सुनकर वह लड़की ढेर सारी अलग अलग किसम की ब्रा और पेंटी निकालकर मनीषा के सामने रख दी ।

"नरेश देखो इन में से तुम्हें कौन सा रंग पसंद है" मनीषा ने कुछ पेन्टियां अपने बेटे को दीखाते हुए पुछा ।

अपनी माँ को ऐसे पेंटी दीखाते हुए नरेश का लंड अकडकर उसकी पेण्ट में झटके मारने लगा और उसका गला ख़ुश्क होने लगा।

"नरेश बताओ न क्या हुआ तुम्हें" मनीषा ने अपने बेटे को खामोश देखकर फिर से कहा ।

"जी मुझे वह दोनों रंग पसंद है" नरेश ने अपनी मम्मी की बात सुनकर अपने गले से थूक को निगलते हुए ब्लैक और पिंक पेंटी की तरफ इशारा करते हुए कहा।

मानिषा ने अपने बेटे की बात सुनकर उसकी पसंद वाली पेंटी ब्रा समेत कुछ और भी चीजे खरीद कर ली।

मानिषा ने अपने लिए पेंटी और ब्रा ख़रीदने के बाद उस लड़की से अपने बेटे के लिए अंडरवियर देने को कहा।वह लड़की मनीषा की बात सुनते ही ढेर सारे अंडेरवियर्स निकाल लाई और नरेश की तरफ देखते हुए कहा।

"सर आप चेंजिंग रूम में जाकर ट्राई कर सकते हो"।

नरेश उस लड़की की बात सुनकर वहां से दो तीन अंडेरबियर्स उठाकर चेंजिंग रूम में जाकर ट्राई करने लगा। मगर सभी अंडरबीयर्स उसे छोटे और टाइट लगे।

"यह तो छोटे हे" नरेश ने वापस आते ही अंडरवियर वापस टेबल पर रखते हुए कहा।
 
ए लड़की हमारे बेटे का ज़रा लम्बा है थोरा बड़ा साइज लो" मनीषा ने हँसते हुए उस लड़की से कहा । वह लड़की मनीषा की बात सुनकर हडबडाते हुए वह अंडरवियर उठा लिए और बड़े साइज वाले अंडरबियर्स निकाल लाई।

नरेश की हालत पहले से ख़राब थी ऊपर से अपनी मम्मी के मूह से अपने बारे में ऐसी बात सुनकर उसकी हालत और ज़्यादा खराब होने लगी । नरेश ने वह अंडरबियर्स उठाये और चेंज रूम में चला गया।

"ये साइज सही है" थोडी देर बाद नरेश ने वापस आते हुए कहा।

उस लड़की ने सारा सामन पैक कर दिया । मनीषा ने उस लड़की को पेमेंट दे दी और अपने बेटे के साथ वहां से जाने लगी, वह लड़की दोनों माँ बेटों को जाते हुए गौर से देखते हुए सोच रही थी।

"अजीब लोग हैं माँ बेटे होकर एक साथ अंडरर्गर्मेन्ट्स खरीद कर रहे थे" ।

मानिषा ने कुछ और सामान भी खरीद लिया और वापसी के लिए फिर से बस में चढ़ गए । इस बार बस में भीड़ नहीं था तो दोनों माँ बेटे एक सीट पर जा बैठे।

मानिशा ने सीट पर बैठते ही अपना हाथ अपने बेटे की जाँघ पर रख दिया ।

नरेश का लंड अपनी माँ का हाथ अपनी जांघ पर पड़ते ही फिर से तनने लगा।

"मम्मी आप मेरी शादी के बारे में कुछ कह रही थी, ऐसा क्या है मुझ में जो मुझसे शादी करने वाली लड़की ख़ुशनसीब होगी" नरेश ने अपनी माँ से कहा ।

"अरे बेटा तुम ने यह जो इतना बड़ा पाल रखा है, आजकल हर लड़की को बस लम्बा और मोटा चाहिये" मनीषा ने अपना हाथ अपने बेटे की पेण्ट पर रखते हुए कहा। नरेश का लंड अपनी माँ की बात सुनकर ज़ोर से झटके खाते हुए उसके हाथ को चूमने लगा।

"देख बेटे मेरा हाथ लगते ही यह की फडकने लगा" मनीषा ने अपने हाथ से अपने बेटे के लंड को दबाते हुए कहा।

"आहहह मम्मी दर्द होता है" नरेश ने अपने लंड पर थोडा दबाव पड़ते ही सिसकते हुए कहा ।

"अरे हाँ मैं तो भूल ही गयी इस पर तो तुम्हारी पत्नी का ही हक़ है तुम हमें कहाँ इसे छूने देगा" मनीषा ने अपना हाथ अपने बेटे के लंड से हटाकर मूह बनाते हुए कहा।

"अरे माँ यह क्या कह रही हो हमारे पूरे जिस्म पर तो सिर्फ आप का हक़ है" नरेश ने अपनी माँ का हाथ पकडते हुए कहा ।
 
" तुम मेरा दिल रखने के लिए कह रहे हो" मनीषा ने अपना हाथ अपने बेटे के हाथ में ही रखे हुए कहा।

"सच्ची माँ हमारे जिस्म पर पहले हक़ आपका है क्योंकी आपकी वजह से हम पैदा हुए हैं" नरेश ने अपनी माँ के हाथ को सहलाते हुए कहा ।

"बेटे सच में मुझे खुद पता नहीं की मुझे यह क्या हो गया है। मगर तुम्हारा वह देखकर मुझे कुछ होने लगता है" मनीषा ने शर्मा से अपना सर झुकाते हुए कहा।

"माँ मेरा भी वही हाल है। आपको देखकर ही मेरे इस में हरकत होने लगती है" नरेश ने अपनी माँ का हाथ पकडकर अपनी पेण्ट पर रखते हुए कहा।

"हाहहह बेटा तुम्हारा तो सच में अब भी तना हुआ है" मनीषा अपने हाथ को अपने बेटे की पेण्ट पर लगते ही सिसकते हुए कहा।

"हाँ माँ मुझे खुद पता नहीं की ऐसा क्यों हो रहा है अपनी माँ को देखते ही यह क्यों फडकने लगता है" नरेश ने अपनी माँ का हाथ अपने लंड पर दबाते हुए कहा।

"बेटा इसपर हाथ लगाते ही मुझे यहाँ पर कुछ होने लगता है" मनीषा ने अपना दूसरा हाथ अपनी चूत पर रखते हुए कहा ।

"माँ हमें पता नहीं की यह पाप है या पुण्य पर अब हम से बर्दाशत नहीं होता आप हमें अपनी शरण में ले लो वरना हम यों ही तडपते मर जाएंगे" नरेश अपनी माँ की बात सुनकर अपना दूसरा हाथ उसकी जाँघ पर रखकर जज़्बाती होते हुए कहा ।

तभी बस का स्टोप आ गया और बस रुक गई, दोनों माँ बेटे बस से उतरते हुए घर की तरफ जाने लगे । घर पुहंचकर मनीषा अपने कमरे की तरफ बढ़ने लगी । नरेश भी उसके पीछे पीछे जाने लगा क्योंकी सामान उसके हाथ में था।

"मैं जाऊँ माँ" नरेश ने सामान को बेड पर रखते हुए अपनी माँ से कहा जो अपना मूह दुसरे तरफ किये हुए थी । मनीषा अपने बेटे की बात सुनकर अचानक सीधा होते हुए उसके गले से लग गयी और उसके पूरे चेहरे को प्यार से चूमने लगी।

"नही यह ठीक नहीं है" मनीषा कुछ देर तक अपने बेटे के चेहरे को चूमने के बाद उससे अलग होते हुए बोली ।

"माँ अब बुहत हो चुका जो हो रहा है उसे होने दो । कब तक हम दोनों यों ही तड़पते रहेंगे" नरेश ने अपनी माँ को अपनी बाहों में भरते हुए कहा ।

नरेश के होंठ अपने होंठो पर पड़ते ही मनीषा भूल गयी की वह उसका बेटा है और अपने बेटे के साथ फ्रेंच किस में डूब गई।

"बेटा दरवाज़ा तो बंद कर लो" कुछ मिनटों तक यों ही एक दुसरे के साथ किसेस करते हुए साँसें अटकने के बाद मनीषा ने अपने होठ अपने बेटे से जुदा करके हाफ्ते हुए कहा ।

नरेश का दिल अपनी माँ की बात सुनकर ख़ुशी से नाचने लगा। उसने जल्दी से भागते हुए दरवाज़ा बंद कर दिया और वापस आते हुए अपनी माँ को अपनी बाहों में भरते हुए उसके गुलाबी लबों का रस पीने लगा।
 
मानिषा की चूत बुहत ज़्यादा गरम होकर पानी टपकाने लगी थी, उसने अपने बेटे के होंठो को छोडते हुए नीचे झुकते हुए उसकी पेण्ट में हाथ डालकर उसे नीचे सरका दिया ।

नरेश ने जल्दी से अपनी शर्ट को भी उतार दिया । मनीषा अपने बेटे की गाठीली बॉडी को देखकर पागल हो गई और सीधा होते हुए अपने होंठो से अपने बेटे के बालों वाले चोडे सीने को चूमने लगी, अपनी माँ के होंठ अपने सीने पर पड़ते ही उत्तेजना के मारे नरेश का लंड तनकर उसके अंडरवियर को फाडने लगा ।

नरेश अपनी माँ की साड़ी को पकडते हुए उतारने लगा, मनीषा भी अपने बेटे की मदद करते हुए गोल घुमते हुए अपनी साड़ी उतारने में अपने बेटे की मदद की । मनीषा साड़ी उतरने के बाद अपने बेटे के सामने सिर्फ एक छोटी सी पेंटी और ब्लाउज में खड़ी थी ।

मानिषा की साँसें उत्तेजना के मारे बुहत ज़ोर से चल रही थी । नरेश अपनी माँ का का गोरा चिकना बदन सिर्फ एक छोटी सी पेंटी और ब्लाउज में देखकर अपने होंठो पर जीभ फिराने लाग, मनीषा का भी उत्तेजना के मारे बुरा हाल था।

नरेश अपनी माँ के आधे नंगे जिस्म को देखते हुए उसकी तरफ बढने लगा, अपने बेटे को अपनी तरफ आता हुआ देखकर मनीषा की साँसें और तेज़ चलने लगी । नरेश अपनी माँ के पास आते हुए उसकी पीठ की तरफ चला गया ।

नरेश ने अपनी माँ के नंगे गोरे पीठ को देखते हुए अपनी बाहें आगे बढाकर अपने हाथ अपनी माँ के नंगे पेट पर रखते हुए उसके चूतड़ो को अपने अंडरवियर में खड़े लंड पर दबा दिया ।

"आहहह शह" अपने बेटे का खडा लंड अपने चूतडों पर लगते ही मनिषा सिसक उठी।

नरेश अपने लंड को यों ही अपनी माँ के चूतडों पर चिपकाये हुए अपने हाथ से उसके गोर पेट को सहलाने लगा । मनीषा की चूत से उत्तेजना के मारे पानी की नदियाँ बह रही थी और वह मज़े से अपनी आँखें बंद किये सिसक रही थी ।

नरेश ने कुछ देर तक अपने माँ के नंगे पेट को सहलाने के बाद अपना हाथ वहां से हटाते हुए अपनी माँ के ब्लाउज को उतार दिया । नरेश अपनी माँ के ब्लाउज को उतारने के बाद अपने होठ उसके नंगी गोरी पीठ पर रखकर उसे चूमते हुए अपने हाथों से उसकी ब्रा को भी खोल दिया।

मानिषा का पूरा जिस्म अपने बेटे के होंठ अपनी नंगी पीठ पर लगने से सिहर उठा । नरेश ने अपनी माँ की ब्रा को खोलने के बाद उसकी पीठ से अपने होंठो को हटाते हुए उसे सीधा कर दिया ।
 
नरेश ने अपनी माँ के सीधा होते ही अपना हाथ आगे बढाकर उसकी चुचियों से ब्रा को खींचकर अलग कर दिया।

"वाह माँ आपकी तो सच में आपकी चूचियां दुनिया की सब से अच्छी चुचियां है" अपनी माँ ब्रा के हटते ही उसकी चुचियों को पूरा नंगा देखते ही नरेश के मूह से निकल गया ।

मानिषा ने शर्म के मारे अपना सर झुका रखा था । अपने बेटे की बात सुनते ही उसने नरेश को अपनी बाहों में भर लिया।

"आह्ह्ह्ह इसस" एक दुसरे से गले लगते ही दोनों माँ बेटे के नंगे सीने एक दुसरे में दबने से दोनों के मूह से एक साथ सिस्कियान निकल गयी ।

नरेश का लंड लोहे की तरह सख्त होकर अपनी माँ की गीली पेंटी पर ठोकरें मारने लगा । नरेश ने अपनी माँ को ज़ोर से अपनी बाँहों में दबाते हुए उसके गुलाबी होंठो पर अपने होंठ रख दिये और अपनी सगी माँ के होंठ बुहत ज़ोर से चूसने लगा।

नरेश को अपनी माँ की नरम चुचियां अपने सीने में दबती हुयी इतना मजा दे रही थी की उसने अपनी माँ के मूह को खोलते हुए अपनी जीभ उसमें घुसा दी । मनीषा कोई बच्ची तो थी नहीं अपने बेटे की जीभ अपने मूह में आते ही वह उसे अपने होंठो के बीच लेकर चूसने लगी ।

मानिषा ने कुछ देर तक अपने बेटे की जीभ को चाटने के बाद अपने बेटे की जीभ को अपने मूह से निकालते हुए अपनी जीभ को उसके मूह में डाल दिया।नरेश अपनी माँ की जीभ अपने मूह में आते ही उसे बड़े प्यार से चाटने लगा ।

नरेश को अपनी माँ की जीभ बुहत ज़्यादा टेस्टी लग रही थी । नरेश ने अब अपनी माँ की जीभ को अपने मूह से निकाल दिया और उसके काँधे को चूमते हुए नीचे होता हुआ अपनी माँ की चुचियों तक आ गया।

नरेश ने अपनी माँ की एक चूचि को अपने हाथ से पकडते हुए उसके तने हुए दाने को अपने मूह में भर लिया और उसे बुहत ज़ोर से चूसने लगा ।

"आजहहह बेटे ऐसी ही अपनी माँ की चुचियों को ज़ोर से चूस बुहत मजा आ रहा है" मनीषा अपनी चूचि को अपने बेटे के चूसने से गरम होकर सिसकते हुए बोली।

"हाँ माँ आज मुझे आपकी चुचियों का सारा रस पीना है" नरेश ने अपनी माँ की बात सुनकर उत्तेजित होते हुए उसकी दोनों चुचियों को बारी बारी चुसते हुए कहा ।

अपने बेटे से अपनी चुचियां चुसवाते हुए मनीषा को अपने पूरे शरीर में अजीब किसम की सनसनाहट महसूस हो रही थी । मनीषा ने अपना हाथ आगे बढाकर अपने बेटे के तने हुए लंड को उसके अंडरबियर के ऊपर से ही पकड़ लिया।
 
" आह्ह्ह्ह माँ" अपनी माँ का हाथ अपने लंड पर लगते ही नरेश के मूह से सिसकी निकल गयी और वह अपनी माँ की चूचि को जितना अपने मूह में हो सकता था उतना अंदर लेकर चूसने लगा ।

मानिषा ने कुछ देर तक अपने बेटे के लंड को यों ही अंडरवियर के ऊपर सहलाने के बाद अपनी चुचियों को उसके मूह से अलग करते हुए घुटनों के बल नीचे बैठ गयी और अपने बेटे के अंडरवियर में बने लंड के उभार को अपने होंठो से चूमते हुए उसके अंडरवियर में हाथ डालकर उसे उतार दिया ।

नरेश का लंड अंडरवियर के उतारते ही अपनी माँ के मूह के सामने ज़ोर से उछलता हुआ सलामी देने लगा। मनीषा की चूत अपने बेटे का गुलाबी मोटा और लम्बा लंड अपनी आँखों के इतना क़रीब देखकर और ज़्यादा उत्तेजित होकर पानी बहाने लगी ।

मानिषा ने अपने बेटे के लंड को अपने हाथ से पकड लिया और उसे धीरे धीरे सहलाने लगी।

"आह्ह्ह्ह" अपनी माँ का हाथ अपने लंड पर पड़ते ही नरेश के मूह से सिसकी निकल गयी । नरेश का लंड उत्तेजना के मारे तन कर बुहत गरम हो चुका था और उसके लंड से वीर्य की कुछ बूँदे निकलने लगी।

मानिषा ने अपने बेटे के लंड से वीर्य की बूँदों को निकलता हुआ देखकर अपनी जीभ निकलकर अपने बेटे के लंड के छेद से निकलती हुए वीर्य की बूँदों को चाट लिया।

"आहहहहह आअह्ह्ह माँआ" अपनी माँ की जीभ अपने लंड पर लगते ही नरेश का पूरा जिस्म काम्पने लगा ।

मनीषा को अपने बेटे के लंड का गुलाबी सुपाडा बुहत प्यारा लग रहा था । उसने अपना मूह खोला और अपने बेटे के लंड का गुलाबी सुपाडा अपने मूह में भर लिया। मनीषा अपने बेटे के लंड के सुपाडे को बड़े प्यार से किसी कुल्फ़ी की तरह अपने होंठो के बीच लेकर चाटने लगी।

"आह्ह्ह्ह शहहहहह माँ ओह्ह्ह्हह्ह्" नरेश के मूह से बुहत ज़ोर की सिसकिया निकलने लगी। उसका उत्तेजना के मारे बुरा हाल था । नरेश ने अपनी माँ के सर को पकडते हुए उसका मूह अपने लंड से निकाल दिया। क्योंकी वह जानता था की अगर उसका लंड कुछ देर और उसकी माँ के गरम मुँह में रहा तो वह झर जाएगा जो वह नहीं चाहता था ।

नरेश ने अपनी माँ को सीधा खडा कर दिया और उसे बड़े गौर से एक बार देखने के बाद अपनी बाहों में उठाकर बिस्तर पर लिटा दिया । नरेश अपनी माँ के टांगों के बीच आ गया और उसकी छोटी सी पेंटी को अपने हाथों से खीच कर उसके जिस्म से अलग कर दिया।
 
मानिषा की पेंटी के उतरते ही उसकी हलकी झाँटों वाली गोरी चूत उसके बेटे के सामने आ गयी । नरेश अपनी माँ की चूत को बड़े गौर से देखने लगा। मनीषा ने अपने बेटे को अपनी चूत की तरफ यो घूरता हुआ देखकर शर्म से अपनी टांगों को आपस में मिला दिया।

"माँ हमें देखने दो हम देखना चाहते हैं की हम जिस चूत से पैदा हुए हैं वह कितनी ख़ूबसूरत है" नरेश ने अपनी माँ की टांगों को पकडते हुए पूरा फैलाकर कहा ।

नरेश फिर से अपनी माँ की चूत को गौर से देखने लगा। मनीषा की छूट से उत्तेजना के मारे रस तपक रहा था।

नरेश अपना मूह अपनी माँ की चूत के तरफ ले जाने लगा।

"आह्ह्ह्ह माँ क्या खुशबु है तुम्हारी चूत की हमें तो पागल बना रही है" नरेश ने अपनी माँ की चूत के क़रीब पुहंचते ही ज़ोर से अपनी साँसें लेते हुए अपनी माँ की चूत की गंध को सूँघते हुए कहा।

मानिषा की चूत अपने बेटे की बात सुनकर और ज्यादा उत्तेजित होकर पानी बहाने लगी । नरेश ने अपनी जीभ निकाली और अपनी माँ की चूत से निकलते हुए पानी को चाटने लगा।

"आजहहह हहहह बेटे ओह्ह्ह्ह तुम बुहत अच्छे हो" अपने बेटे की जीभ अपनी चूत पर लगते ही मनीषा के मूह से बुहत ज़ोर की सिसकिया निकलने लगी।

नरेश ने अपनी माँ की चूत को बाहर से ही चाटते हुए अपने हाथ से अपनी माँ की चूत के मोटे दाने को सहलाने लगा । नरेश कुछ देर तक अपनी माँ की चूत को ऐसे ही चाटने के बाद अपने दोनों हाथों से अपनी माँ की चूत के झाँटों को हटाते हुए अपने हाथ से उसकी चूत के लबों को खोलते हुए अपनी जीभ को कडा कर के अपनी माँ की चूत में घुसा दिया ।

"आआह्ह्ह्ह इसशहहहह बेटे ओह्ह्ह्हह्हह क्या कर दिया ओईए हाँ और अंदर तक मेरी चूत को चाट बुहत मज़ा आ रहा है" अपने बेटे की जीभ अपनी चूत में जाते ही मनीषा बुहत ज़ोर से सिसककर अपनी चूत को अपने बेटे की जीभ पर उछालते हुए बोली ।

नरेश अपनी माँ की चूत में बुहत ज़ोर से अपनी जीभ को अंदर बाहर करने लगा । मनीषा का पूरा जिस्म अपने बेटे की जीभ के अपनी चूत में अंदर बाहर होने से काँपते हुए अकडने लगा, मनीषा किसी भी वक्त झर सकती थी। उसके मूह से बुहत ज़ोर की सिसक़िया निकल रही थी।
 
ओहहहहह आआह्ह्ह्ह बेटे में आईईसश्ह ओफ्फफ्फ्फ्फफ्फ" मनीषा की चूत झटके खाते हुए अपने बेटे के मूह पर पानी की नदियाँ छोड़ने लगी । झरते वक़त मनीषा ने मज़े से अपनी आँखें बंद कर ली और बुहत ज़ोर से सिसकते हुए झरने लगी ।

नरेश अपनी माँ की चूत का नमकीन पानी बड़े प्यार से चाटने लगा । मगर मनीषा की चूत से बुहत ज़्यादा पानी निकल रहा था जिस वजह से उसका पूरा मूह गीला हो गया । नरेश जब तक उसकी माँ की चूत से पानी निकलता रहा उसे अपनी जीभ से चाटता रहा और फिर अपनी जीभ को अपनी माँ की चूत से निकालकर उसकी साड़ी उठाकर अपना मूह साफ़ कर दिया।

नरेश की हालत बुहत बिगड चुकी थी। उसने जल्दी से अपनी माँ की टांगों को उठा कर घुटनों तक मोड़ दिया और अपने लंड को उसकी चूत के छेद पर रखकर रगडने लगा, मनीषा ने जैसे ही अपनी आँखें खोली अपने बेटे का लंड अपनी चूत से रगडता हुआ देखकर फिर से गरम होते हुए सिसकने लगी ।

"आआह्ह्ह बेटे अब और मत ताडपा घुसा दे अपनी माँ की चूत में अपना मोटा लंड। दिखा दे अपनी माँ को की उसकी चूत से निकला हुआ ही अपने मोटे और लम्बे लंड से कैसे उसकी चूत को शांत करता है" मनीषा ने उत्तेजना में बोलते हुए कहा ।

नरेश अपनी माँ की बात सुनकर बुहत ज्यादा एक्साइटेड हो गया और अपना लंड अपनी माँ की चूत के छेद पे टीका कर धक्का मारने ही वाला था की बाहर से दरवाज़ा खटखटाने की आवज़ आई ।

"भाभी खाना बन चूका है बाहर आ जाओ। मैं खाना लगा रही हूँ" बाहर से रेखा की आवाज़ आ रही थी।

"दीदी आप खाना लगाओ में 5 मिनट में आती हूँ" मनीषा ने अपने गुस्से को काबू में रखते हुए कहा।

"भाभी वह नरेश को जल्दी से भेजो खाना लगाने में मदद करेंगा" रेखा की फिर से आवाज़ आई ।

नरेश को अपनी मामी पर इतना गुस्सा आ रहा था की उसका दिल कर रहा था की अभी जाकर अपना लंड उसकी चूत में घुसेड़े । मनीषा ने लाचारी में अपने बेटे की तरफ देखा, नरेश समझ गया की उसकी माँ उसे बाहर जाने के लिए कह रही है । नरेश ने गुस्से से अपनी माँ को छोडते हुए अपने कपडे पहनने लगा और कपडे पहनकर वहां से बाहर आ गया ।
 
Back
Top