मानिषा अपने बेटे के जाने के बाद उठकर कपडे पहनने लगी, उसे भी बुहत गुस्सा आ रहा था उसके बेटे का लंड उसकी चूत को छु चूका था। बस अंदर घूसने ही वाला था की रेखा ने उसे आवाज़ देकर बुला लिया । मनीषा बेड से उठकर बाथरूम में घुस गयी और पेशाब करने के बाद कमरे से बाहर निकल आई ।
मानिषा बाहर निकल कर खाने की टेबल पर जाकर बैठ गई, रेखा खाना लगा रही थी और नरेश भी उसकी मदद कर रहा था, अनिल और मनीषा की दोनों बेटियाँ भी वहां पर बैठी हुयी थी।
"भाभी शीला से कह देती मदद के लिए। नरेश तो लड़का है उसे क्यों यह काम करा रही हो" मनीषा ने रेखा की तरफ देखते हुए कहा।
"हाँ माँ मेने भी यही कहा था मामी से की मैं कर देती हूँ मगर मामी ने मना कर दिया" शीला ने रेखा के जवाब से पहले ही बोल दिया।
"हाँ हाँ मुझे सब पता है मगर नरेश खुद मेरे साथ यह सब करने की ज़िद करता है, कहता है की बैठे बैठे बोर हो जाता है तो अपनी मामी का थोडा सा हाथ बंटा देता है क्यों नरेश" रेखा ने नरेश की तरफ देखते हुए झूठ बोलते हुए कहा ।
"हाँ माँ मैंने ही मामी से कहा था मुझे मामी के साथ काम करने में मजा आता है" नरेश ने दिल में रेखा को गाली देते हुए कहा।
"जाब मामी भांजा राज़ी तो क्या करेगा काज़ी" यह कहते हुए मनीषा के साथ सब हंसने लगे।
"भाभी अपने बच्चों के आने का इंतज़ार कर लेती। मनिषा ने रेखा से कहा।
"नही दीदी फिर तो देर हो जाती उन्हें मैं गरम करके दे दूंगी । आप बेफिक्र होकर खाओ" रेखा ने सारा खाना टेबल पर रखने के बाद खुद भी बैठते हुए कहा ।
सब मिलकर खाना खाने लगे और खाना खाने के बाद अपने अपने कमरों में जाने लगे, नरेश उठकर अपनी माँ के कमरे में जाने लगा।
"भान्जे कहाँ माँ के पीछे पीछे लटू हो रहे हो इधर आओ। यह बर्तन उठाने में हमारी मदद करो" रेखा ने नरेश को आवज़ देते हुए कहा।
"लगता है साला आज नसीब ही खराब है" नरेश दिल ही दिल में बड़बड़ाते हुए अपनी मामी की तरफ लोटने लगा।
"क्या बात है नरेश बुहत अपसेट लग रहे हो" रेखा ने बर्तन उठाते हुए अपने भांजे से कहा।
"कुछ नहीं मामी" नरेश ने भी बर्तन उठाते हुए कहा।
"नही नरेश कोई बात तो ज़रूर है, ज़रूर हम से कुछ छुपा रहे हो" रेखा ने बर्तन उठाकर कीचन की तरफ जाते हुए कहा ।