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परिवार(दि फैमिली) complete

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दोस्तों आपलोगों के सहयोग के लिए बहुत बहुत थैंक्स।कहानी जारी रहेगी।अगला अपडेट जल्दी ही।कहानी के बारें में अपनी राय अवश्य दें।thanks
 
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और 50 पेज पूरा होने पर सभी पाठकों को बहुत बहुत थैंक्स।आपलोगों के सहयोग के लिए शुक्रिया।
 
मानिषा अपने बेटे के जाने के बाद उठकर कपडे पहनने लगी, उसे भी बुहत गुस्सा आ रहा था उसके बेटे का लंड उसकी चूत को छु चूका था। बस अंदर घूसने ही वाला था की रेखा ने उसे आवाज़ देकर बुला लिया । मनीषा बेड से उठकर बाथरूम में घुस गयी और पेशाब करने के बाद कमरे से बाहर निकल आई ।

मानिषा बाहर निकल कर खाने की टेबल पर जाकर बैठ गई, रेखा खाना लगा रही थी और नरेश भी उसकी मदद कर रहा था, अनिल और मनीषा की दोनों बेटियाँ भी वहां पर बैठी हुयी थी।

"भाभी शीला से कह देती मदद के लिए। नरेश तो लड़का है उसे क्यों यह काम करा रही हो" मनीषा ने रेखा की तरफ देखते हुए कहा।

"हाँ माँ मेने भी यही कहा था मामी से की मैं कर देती हूँ मगर मामी ने मना कर दिया" शीला ने रेखा के जवाब से पहले ही बोल दिया।

"हाँ हाँ मुझे सब पता है मगर नरेश खुद मेरे साथ यह सब करने की ज़िद करता है, कहता है की बैठे बैठे बोर हो जाता है तो अपनी मामी का थोडा सा हाथ बंटा देता है क्यों नरेश" रेखा ने नरेश की तरफ देखते हुए झूठ बोलते हुए कहा ।

"हाँ माँ मैंने ही मामी से कहा था मुझे मामी के साथ काम करने में मजा आता है" नरेश ने दिल में रेखा को गाली देते हुए कहा।

"जाब मामी भांजा राज़ी तो क्या करेगा काज़ी" यह कहते हुए मनीषा के साथ सब हंसने लगे।

"भाभी अपने बच्चों के आने का इंतज़ार कर लेती। मनिषा ने रेखा से कहा।

"नही दीदी फिर तो देर हो जाती उन्हें मैं गरम करके दे दूंगी । आप बेफिक्र होकर खाओ" रेखा ने सारा खाना टेबल पर रखने के बाद खुद भी बैठते हुए कहा ।

सब मिलकर खाना खाने लगे और खाना खाने के बाद अपने अपने कमरों में जाने लगे, नरेश उठकर अपनी माँ के कमरे में जाने लगा।

"भान्जे कहाँ माँ के पीछे पीछे लटू हो रहे हो इधर आओ। यह बर्तन उठाने में हमारी मदद करो" रेखा ने नरेश को आवज़ देते हुए कहा।

"लगता है साला आज नसीब ही खराब है" नरेश दिल ही दिल में बड़बड़ाते हुए अपनी मामी की तरफ लोटने लगा।

"क्या बात है नरेश बुहत अपसेट लग रहे हो" रेखा ने बर्तन उठाते हुए अपने भांजे से कहा।

"कुछ नहीं मामी" नरेश ने भी बर्तन उठाते हुए कहा।

"नही नरेश कोई बात तो ज़रूर है, ज़रूर हम से कुछ छुपा रहे हो" रेखा ने बर्तन उठाकर कीचन की तरफ जाते हुए कहा ।
 
" वो मामी सुबह से हमें यह बुहत तँग कर रहा है इसीलिए परेशान था" नरेश भी बर्तन उठाकर अपनी मामी के पीछे कीचन में दाखिल होते हुए कहा।

"च हमारा भंजा अपने साँप को काबू में नहीं रख सकता इसीलिए परेशान है" रेखा ने बर्तन नीचे रखते हुए नरेश की तरफ देखते हुए कहा।

नरेश ने अपनी मामी की बात सुनकर अपना कन्धा नीचे कर दिया।

"अरे पागल फ़िलहाल अपने हाथ से इसे शांत कर दे। जब तक शादी नहीं हो जाती तुम्हारी" रेखा ने नीचे बैठकर बर्तन धोते हुए कहा।

नरेश बाहर जाकर जल्दी से एक कुर्सी ले आया और अंदर आते हुए किचन का दरवाज़ा बंद करते हुए कुर्सी पर बैठ गया।

"भान्जे यह दरवाज़ा क्यों बंद किया" रेखा ने हैंरान होते हुए नरेश से पुछा ।

"मामी अगर कोई अचानक आ गया तो हमारी बातें सुन लेगा इसीलिए बंद किया" नरेश ने अपने हाथ से अपने लंड को पेण्ट के ऊपर से ही खुजलाते हुए कहा।

"लगता है तुम्हारा साँप बुहत बेसब्र है उसे बस कोई भी बिल चाहिए घूसने के लिये" रेखा ने अपने भांजे को लंड खुजाते हुए देखकर कहा।

"मामी मुझे तो इसे शांत करना भी नहीं आता । आप ही कुछ तरीका बताओ न हाथ से इसे की शांत कैसे किया जाता है" नरेश ने भोला बनते हुए कहा।

"भान्जे इतने भोले दीखते तो नहीं क्यों अपनी मामी से गन्दी बातें सुनकर मजा आता है। जो ऐसी बातें कर रहे हो" रेखा ने अपने हाथ से अपनी चुचियों के ऊपर खुजाते हुए कहा ।ऐसा करने से उसकी साड़ी का पल्लु भी उसकी चुचियों से हटकर नीचे गिर गया। जिसे उसने ऊपर नहीं किया और ऐसे ही बर्तन धोने लगी ।

"नाही मामी हम सच कह रहे हैं हमें कुछ नहीं पता। प्लीज हमें बताओ ना" नरेश ने अपनी मामी की चुचियों के नंगा होते ही उसे गौर से देखते हुए कहा।

"अपनी मामी की चुचियों को देखना आता है पर अपने साँप का इलाज नहीं पता" रेखा ने अपने भांजे को अपनी चुचियों की तरफ घूरते हुए देखकर कहा।

"मामी आप की चुचियां है ही इतनी सूंदर की हर वक्त उन्हें देखने का मन करता है" नरेश ने भी इस बार अपनी मामी को सीधे कह दिया।

"हाय हाय क्या कलयूग का दौर आ गया है भान्जा अपनी मामी की चुचियों को देखना चाहता है" रेखा ने अपने भांजे की बात सुनकर बिना अपना पल्लु चुचियों पर रखे बर्तनों को धोने का नाटक करते हुए कहा।
 
"मामी प्लीज बताओ न आपके सिवा है कौन जिससे मैं पूछुं। यह देखो अब भी कैसे खडा हो चुका है" नरेश ने अपनी पेण्ट की ज़िप खोलकर अंडरवियर में खडा लंड अपनी मामी को दिखाते हुए कहा।

"अरे तुम ने इसे क्यों खोला" रेखा ने अपने भांजे का अनडरवियर में ही खडा लंड देखकर ज़ोर की साँसें लेते हुए कहा।

"फिर क्या करुं मामी पेण्ट में तो दर्द होने लगता है इसमे" नरेश ने अपने लंड को यों ही अपनी मामी की आँखों के सामने सहलाते हुए कहा।

"भान्जे जैसे इसे अभी सहला रहे हो वेसे ही नंगा करके ज़ोर से सहलाने से इसमें से पानी निकल जाएगा और तुम शांत हो जाओगे" रेखा ने अपने भांजे के लंड को गोर से देखते हुए यों ही ज़ोर से साँसें लेते हुए कहा।

"मामी एक बार आप करके बताओ न मुझे नहीं आता" नरेश ने इस बार अपने लंड को अंडरवियर से भी निकालते हुए कहा।

"अरे तुम पागल हो गये हो क्या भांजे । इसे अंदर वापस डालो तुम्हें शर्म नहीं आती अपनी मामी को अपना इतना बड़ा साँप दिखाते हुये" रेखा ने अपने भांजे को डाँटते हुए कहा । उसके पूरे जिस्म अपने भांजे का नंगा लम्बा और तगडा लंड देखकर अजीब किस्म की सिहरन और गुदगुदी हो रही थी।

"मामी प्लीज तुम्हे मेरी कसम करके बताओ ना" नरेश ने अपनी मामी को मिन्नतें करते हुए कहा । नरेश जानता था की उसकी मामी नाटक कर रही है । उसके लंड को छूने का मन तो उसका भी हो रहा है।

"ठीक है मगर तुम किसी को बताना मत" रेखा जिसके दिल में इतनी देर से अपने भांजे का लंड अपने हाथ में लेने की इच्छा हो रही थी । अखिरकार अपने भांजे के सामने हार मानते हुए कहा

"हाँ मामी मैं किसी को नहीं बताऊँगा" नरेश ने अपनी मामी की बात सुनते ही खुश होते हुए कहा । रेखा वहां से उठते हुए अपने भांजे की कुर्सी के सामने आकर घुटनों के बल बैठ गयी और अपने भांजे के गुलाबी लम्बे और तगडे लंड को गौर से देखते हुए अपने हाथ में ले लिया।

"आजहहह मामी आपका हाथ कितना नरम है बुहत मजा आ रहा है" अपनी मामी का हाथ अपने लंड पर पड़ते ही नरेश ने सिसकते हुए कहा ।

"नरेश तुम्हारा तो बुहत गरम है" रेखा ने अपने भांजे के लंड पर हाथ के रखते ही कहा । रेखा को अपने भांजे का लंड अपने हाथ में लेते ही पूरे शरीर में बिजली के करेन्ट लग रहे थे।

"हाँ मामी इसीलिए तो कह रहा हूँ कोई इलाज करो ना" नरेश ने अपनी मामी की बात का जवाब देते हुए कहा।

"नरेश मैं पहले इसे अपनी जीभ से कुछ ठण्डा करती हूँ" रेखा का दिल अपने भांजे के लंड के गुलाबी सुपाडे को चूमने का कर रहा था इसीलिए उसने नरेश से कहा।

"हाँ मामी जैसे भी करो मगर मेरे इसको ठण्डा करो" नरेश ने अपन लंड की तरफ इशारा करते हुए कहा।

"हाँ भान्जे अब तुम फिकर मत करो । मैं तुम्हारे इस शैतान साँप को आज ठण्डा करके ही दम लूंग़ी" रेखा ने अपने भांजे के लंड को अपने हाथ से थोडा आगे पीछे करते हुए कहा।
 
रेखा ने अपना मुँह अपने भांजे के लंड की तरफ ले जाते हुए उसके गुलाबी सुपाडे को अपने होंठो से चूम लिया।

"आह्ह्ह्ह मामी" अपने लंड पर अपनी मामी के नरम होंठ पड़ते ही नरेश के मूह से सिसकी निकल गयी और उसका लंड उत्तेजना के मारे ज़्यादा फूलने लगा ।

रेखा ने जैसे ही अपने होंठ अपने भांजे के लंड से हटाये तो उसके लंड के छेद में से वीर्य की कुछ बूँदे निकलने लगी, रेखा ने इस बार नीचे झुकते हुए अपनी जीभ निकालकर अपने भांजे के लंड के छेद से निकालते हुए वीर्य को चाट लिया।

"आह्ह्ह्ह " नरेश अपनी मामी की जीभ अपने लंड के छेद पर लगते ही काम्पने लगा । रेखा की भी हालत अपने भांजे के लंड से खेलते हुए बिगडती जा रही थी। उत्तेजना के मारे उसकी चूत से ढेर सारा पानी निकल कर उसकी पेंटी को गीला कर चुका था।

रेखा अपनी जीभ से कुछ देर तक अपने भांजे के लंड को यों ही ऊपर से नीचे तक चाटती रही और फिर अचानक अपना मुँह खोलकर अपने भांजे के लंड का गुलाबी सुपाड़ा अपने मूह में भर लिया ।

रेखा अपने भांजे के लंड के सुपाडे को अपने गुलाबी लबों के बीच लेकर आराम से आगे पीछे करते हुए उसे चाटने चूसने लगी।

"आह्ह्ह्ह आहह मामी मेरा निकलने वाला है" नरेश का पूरा जिस्म अपना लंड अपनी मामी के होंठो के बीच रगडने से काम्पने लगा और वह ज़ोर सिसकते हुए बोला क्योंकी उसे लग रहा था की वह किसी भी वक्त झर सकता है।

रेखा नरेश की बात सुनकर उसके लंड पर अपने होंठो की पकड और ज्यादा मज़बूत करते हुए उसके लंड को चूसने लगी । नरेश समझ गया के मामी उसके लंड का वीर्य अपने मूह में लेना चाहती है। नरेश का पूरा जिस्म काँपते हुए झटके खाने लगा।

"आह्ह्ह्ह आहहहह मामी ओह्ह्ह्हह्हह मजा आ गया" नरेश का लंड अपनी मामी के मुँह में पिचकारियां छोडने लगा और नरेश झरते वक्त बुहत ज़ोर से सिसकते हुए अपनी मामी को बालों से पकडते हुए उनके मुँह को अपने लंड पर आगे पीछे करने लगा।

नरेश के लंड से निकलती हुए पहली पिचकारी इतनी तेज़ थी की वह सीधा रेखा हलक से उतरती हुयी उसके पेट में जा पुहंचा और फिर उसके मूह में जैसे पिचकारियों की बारिश होने लगी, रेखा अपने भांजे का जितना हो सकता था वीर्य चाटने लगी ।

नरेश का लंड कुछ ही देर में अपना सारा वीर्य निकलने के बाद ढीला पड़ने लाग। रेखा के होंठो से भी वीर्य निकल कर नीचे गिर रहा था । रेखा ने अपने भांजे के लंड के ढीला पड़ते ही उसे पूरा अपने मुँह में भर कर ज़ोर से अपने होंठो के बीच दबा कर उसमें से सारा वीर्य चाट लिया और फिर उसके लंड को अपने मुँह से निकाल कर रेखा ने उठते हुए जल्दी से अपना मूह धो लिया।
 
अरे अब तो अपने साँप को वापस अपने पिटारे में डालो" रेखा ने मुँह धोने के बाद बर्तनों को उठाकर ऊपर अपनी जगह पर रखते हुए कहा।

"मामी सच में आप बुहत अच्छी हो । मेरा कितना ख़याल रखती हो काश आप मेरी मामी नहीं होती तो मैं अपने साँप को सिर्फ आपके बिल में ही रखता" नरेश ने अपने लंड को वापस अपने अंडरवियर में डालकर पेण्ट की ज़िप को बंद करते हुए कहा।

"बदमाश क्या मैं तुम्हें इतनी अच्छी लगती हूँ । जो तुम मेरे भांजे होते हुए भी तुम मेरी बिल में अपने साँप को घुसाने के सपने देख रहे हो" रेखा ने बर्तन रखने के बाद अपने भांजे के पास आते हुए उसके गाल की एक चुटकी लेते हुए कहा ।

"हाँ मामी सच में मुझे आप दुनिया की सब से अच्छी औरत लगती हो" नरेश ने इस बार हिम्मत करते हुए अपनी मामी को बाज़ू से खींचकर अपनी गोद पर बिठाते हुए उसे अपनी बाहों में मज़बूती से दबाकर कहा।

"छोड़ो नालायक कोई देख लेगा तुम्हें शर्म नहीं आती अपनी मामी को अपनी गोद पर बिठाते हो" रेखा ने अपने भांजे की गोद से उठने की नाक़ाम कोशिश करते हुए कहा । रेखा का पूरा जिस्म अपने भांजे की गोद में बैठते हुए उत्तेजना के मारे कांप रहा था।

"मामी दरवाज़ा बंद है थोडी देर हमारी गोद में बेठो न। हमें बुहत अच्छा लग रहा है" नरेश ने अपने दोनों हाथ अपनी मामी के नंगे पेट पर दबाते हुए कहा।

"बदमाश अभी अगर मैं नहीं उठी तो तुम्हारा साँप फिर से उठने लगेगा और हमें फिर से उसे शांत करना पडेगा" रेखा ने इस बार अपने भांजे की गोद से उठने की कोशिश किये बिना ही उसके हाथों को अपने नंगे पेट पर महसूस करते हुए मस्ती लेते हुए कहा ।

"नही मामी हम आपसे अपने साँप को शांत करने के लिए नहीं कहेंगे पर बस आप थोडी देर यों ही हमारी गोद में बैठी रहिये" नरेश ने अपनी मामी के नरम चूतडों को अपनी गोद पर महसूस करते हुए मज़े से कहा। नरेश का लंड अपनी मामी की बात सुनकर फिर से तनने लगा।

"आह्ह्ह्ह बदमाश लड़के तुम्हारा साँप तो हमारी बिल में घूसने की कोशीश कर रहा है" रेखा ने अपने भांजे का लंड अपने चुतडो में चुभता हुआ महसूस करके मज़े से सिसकते हुए कहा।

"मामी बेचारा बस आपकी बिल को कपड़ों के उपर से ही चूमने की कोशिश कर रहा है अंदर तो घुस नहीं सकता" नरेश ने अपने लंड को अपनी मामी के भारी चूतडों में ज़ोर से दबाते हुए कहा।

"आह्ह बदमाश तुम्हारा साँप तो बुहत बदमाश है मुझे तो लगता है कहीं यह मेरे कपड़ों को फाड कर न मेरी बिल में घुस जाए" रेखा ने अपने भांजे के फुल तनकर कर उसके चूतडो में धक्के मारते हुए लंड को अपने चूतडों के बीच मज़े से दबाते हुए कहा।
 
मामी इस बदनसीब का इतना नसीब कहाँ के आपकी नंगी बिल को छु सके" नरेश ने अपने मामी के नंगे पेट को अपने हाथों से सहलाते हुए कहा।

"भान्जे एक बात कहूं" रेखा ने यों ही मज़े से अपने भांजे के लंड पर बैठे हुए ही कहा । वह बुहत गरम हो चुकी थी और उत्तेजना के मारे उसकी चूत से बुहत ज्यादा पानी टपक रहा था।

"हाँ मामी बोलो" नरेश ने इस बार अपने होंठ अपनी मामी के नंगे गोर पेट पर रखते हुए कहा।

"ओहहहह बदमाश मैं कह रही थी की अगर तुम कहो तो मैं तुम्हारी खातिर अपनी बिल को एक बार नंगा करके तुम्हारे साँप को छूने दे सकती हूँ। मगर तुम उसे सिर्फ ऊपर से अपने साँप को रखोगे अंदर नहीं घुसओगे" रेखा ने अपने भांजे के होंठ अपनी नंगी पीठ पर पड़ते ही सिसकते हुए कहा।

"मामी सच में आप बुहत अच्छी हो । हमारे लिए आप इतना कर सकती हो। हम भी वादा करते हैं के आपकी बिल में अपना साँप नहीं घुसाएंगे" नरेश ने अपने मामी की बात सुनकर बुहत खुश होते हुए कहा।

"ठीक है मुझे छोडो और अपने साँप को बाहर निकालो। जब तक मैं अपनी बिल को नंगा करती हूँ" रेखा ने अपने भांजे के हाथों को अपने पेट से जुदा करते हुए उसकी गोद से उठकर कहा ।

रेखा ने अपने भांजे की गोद से उठने के बाद अपनी साड़ी को उतारकर अपने पेटिकोट और पेंटी को भी उतार दिया।

"वाह मामी आपकी गुलाबी बिल को देखकर तो उसे चूमने का मन करता है" नरेश ने अपनी मामी की चूत के नंगा होते ही अपने लंड को अपने हाथो से सहलाते हुए कहा।

नरेश ने अपनी पेण्ट और अंडरवियर को खीचकर अपने पाँव तक सरका दिया था।

"अरे बदमाश तुमने भी अपने साँप को नंगा कर दिया" अपने भांजे की बात सुनकर रेखा ने उसके तरफ देखते हुए कहा। रेखा सिर्फ एक ब्लाउज और ब्रा में नरेश के सामने खडी थी और उसकी चूत उत्तेजना के मारे बुहत गीली हो चुकी थी । नरेश का लंड अपनी मामी की चूत और उसकी गोरी चिकनी टांगों को देखकर झटके खाने लगा ।

रेखा अपने भांजे की तरफ आये हुए उसके बिलकुल सामने आकर उल्टा हो गई और अपने नंगे चूतड़ अपने भांजे की गोद पर रख दिये।

"आहहहह मामी" नरेश अपनी मामी के नंगे चूतड़ अपने लंड पर पड़ते ही सिसक उठा । नरेश को अपनी मामी की गांड का भूरा छेद उल्टा होते हुए बुहत भा गया उसने सोच लिया जब भी मोका मिला वह अपनी मामी की गांड ज़रूर मारेगा।

"आह्ह्ह्ह हहहहः" रेखा अपनी गीली चूत को अपने भांजे के लंड पर ज़ोर से घिसते हुए सिसकने लगी।

नरेश की हालत भी अपनी मामी की गीली चूत को अपने लंड पर घिसते हुए खराब होने लगी ।

"आह्ह्ह्ह मामी आप सीधी होकर हमारा इस पर बैठ जाओ न हमें ज्यादा मजा आयेगा" नरेश ने सिसकते हुए अपनी मामी से कहा । रेखा को उस वक़त कुछ समझ में नहीं आ रहा था । वह अपने भांजे के ऊपर से उठते हुए अपनी टांगों को फ़ैला कर अपने भांजे के ऊपर सीधा होकर बैठ गई।
 
" ओहहहहहह भाँजे" रेखा ने जैसे ही सीधा होकर अपने भांजे के उपर बैठी। उसका लंड रेखा की चूत के छेद को छूते हुए उसकी पूरी चूत से घिसता हुआ उसके पेट से जा टकराया । जिस वजह से रेखा के मूह से बुहत ज़ोर की सिसकी निकल गयी । नरेश की तो जैसे आज लाटरी निकल आई थी । सीधा होते ही उसकी मामी की दोनों बड़ी बड़ी चुचियां बिलकुल उसके मूह के सामने आ गयी थी, नरेश ने अपनी मामी की दोनों बड़ी चुचियों को गौर से देखते हुए अपना मुँह उसकी दोनों चुचियों के बीच बने क्लीवेज पर रख दिया ।

"आहहह भांजे क्या कर रहे हो" अपने भांजे के होंठ अपनी चुचियों के क़रीब महसूस करके रेखा ने सिसकते हुए कहा । रेखा की हालत बिगडती जा रही थी । उसे कुछ समझ में नहीं आ रहा था की क्या करे, रेखा ने अपने हाथ से अपने भांजे के लंड को पकडते हुए अपनी चूत के छेद पर रख दिया और बुहत ज़ोर से घीसने लगी ।

"आआह्ह्हह्ह्ह्ह ह ओह्ह्ह्ह भाँजे" रेखा अपनी चूत से अपने भांजे के लंड को घिसते हुए बुहत ज़ोर से सिसक रही थी और उसका पूरा जिस्म कांप रहा था । नरेश का मज़े के मारे बुरा हाल था। उसने मोका देखकर अपने हाथों से अपनी मामी की दोनों चुचियों को ब्लाउज के ऊपर से ही पकडते हुए सहलाने लगा।

"आआह्ह्ह्ह भांजे क्या कर रहे हो" रेखा ने वैसे ही नरेश के लंड को अपनी चूत पर घिसते हुए कहा । रेखा का पूरा जिस्म अकड रहा था वह किसी भी वक़त झर सकती थी, रेखा की आँखें अब मज़े के मारे बात करते हुए बंद हो रही थी । नरेश ने अपनी मामी की एक चूचि से हाथ हटाते हुए उसको सर से पकड कर अपने होंठो को उसके गुलाबी गरम तपते होंठो पर रख दिया ।

नरेश अपनी मामी के दोनों होंठो को अपने पूरे मुँह में लेकर चूसने लगा । नरेश की इस हरकत से रेखा का पूरा जिस्म काँपते हुए झटके खाने लगा और वह उत्तेजना के मारे अपने भांजे के लंड को अपनी चूत के छेद में थोडा सा डालकर घीसने लगी।

रेखा की चूत अचानक झटके खाते हुए झरने लगी। झरते वक्त रेखा ने मज़े से अपने दोनों हाथों से अपने भांजे के सर को ज़ोर से अपने मूह पर दबाते हुए अपनी जीभ को उसके मूह में डाल दिया । रेखा की चूत से निकलता हुआ पानी नरेश के लंड पर गिरने लगा ।

नरेश का लंड अब भी रेखा की चूत के छेद से सता हुआ था। नरेश ने अपने हाथों को अपनी मामी के चुतडो में ड़ालते हुए उसे अपने लंड पर दबा दिया । नरेश का लंड एक ज़ोर के झटके के साथ अपनी मामी की चूत में 2 इंच घुस गया।

रेखा अपनी चूत में अपने भांजे के लंड के जाते ही उछल पडी और अपना मूह अपने भांजे के मूह से हटाकर उससे अलग होने लगी । मगर नरेश ने अपनी मामी को ज़ोर से अपनी बाहों में दबा रखा था ।

"नरेश छोडो मुझे तुमने वादा किया था" रेखा ने वैसे ही अपने भांजे से छूटने की कोशिश करते हुए कहा।

"हाँ मामी मगर हम अपने ऊपर कण्ट्रोल नहीं कर सके प्लीज थोडी देर ऐसे ही रहने दो । हम और अंदर नहीं घुसाएंगे" नरेश ने अपने लंड को यों ही अपनी मामी की चूत में 2 इंच लंड डाले हुए कहा।
 
" नरेश तुम बुहत बूरे हो" रेखा ने बनवटी गुस्सा अपने भांजे पर करते हुए कहा, रेखा को तो अपने भांजे का लंड अपनी चूत में स्वर्ग का मज़ा दे रहा था ।

"मामी आप बुहत अच्छी हो" नरेश ने अपनी मामी के ढीला होते ही उसके सर को पकडते हुए अपनी जीभ को अपनी मामी के मुँह में घुसा दिया ।

रेखा ने अपने भांजे की जीभ अपने मूह में घुसते ही उसे अपने होंठो से चूसने लगी । रेखा के ऐसा करने से नरेश का पूरा जिस्म कापंने लगा, रेखा समझ गयी की वह झरने वाला है । इसीलिए वह अपनी चूत को अपने भांजे के लंड से उठने लगी मगर नरेश ने अपने दोनों हाथ अपनी मामी के चुतडो में डालकर उसे ऐसा न करने दिया।

"नरेश ऐसा मत करो मेरी चूत में मत झरो प्लीज" रेखा ने अपने भांजे को मिन्नतें करते हुए कहा । मगर नरेश अपनी मामी की कोई बात सुने बगैर अपनी मामी को चुतडो से पकडे उसकी चूत में पिचकारियां छोडने लगा।

"आह्ह्ह्हह भांजे तुम बुहत बदमाश हो" अपने भांजे के लंड से निकलती हुए पिचकारिया अपनी चूत में पड़ते ही रेखा ने सिसकते हुए मज़े से अपने आप को ढीला छोड दिया । नरेश ने अपनी मामी के ढीले होते ही अपने चुतडो को ज़ोर से अपनी मामी की चूत पर धक्का मार दिया और अपनी मामी के चूतडों को ज़ोर से अपने लंड पर दाब दिया। जिस वजह से उसका लंड अपनी मामी की चूत को चीरता हुआ आधे से ज्यादा उसकी चूत में घुस गया ।

आहहह शह्ह्हह्ह्ह्ह भाँजे" अपनी चूत में अपने भांजे का आधे से ज्यादा लंड घूसने से रेखा ने सिसकते हुए अपने चुतडो को और ज़ोर लगा कर अपने भांजे के लंड पर दबा दिया। जिस वजह से उसका पूरा लंड अपनी मामी की चूत में घुस गया और रेखा की चूत अपने भांजे का पूरा लंड घुसते ही ख़ुशी से लार टपकने लगी ।

रेखा दूसरी बार झर चुकी थी और नरेश भी अपना पूरा वीर्य अपनी मामी की चूत में भर चूका था, दोनों कुछ देर तक यों ही एक दुसरे की बाहों में पडे हाँफते रहे । कुछ देर बाद जब रेखा को होश आया तो वह जल्दी से अपने भांजे के ऊपर से उठ गयी।

नरेश के ऊपर से उठते ही रेखा की चूत से अपने भांजे और उसका मिला जुला रस ज़मीन पर गिरने लगा।

"नरेश तुमने अच्छा नहीं किया तुम बुहत बूरे हो" रेखा ने अपनी चूत को एक कपडा उठाकर साफ़ करते हुए कहा।

"मामी मेरा कोई दोष नहीं है । आप हो ही इतनी सूंदर की मैं अपना कण्ट्रोल खो बैठा" नरेश ने अपने अंडरवियर को ऊपर करने के बाद अपनी पेण्ट भी पहनते हुए कहा ।

"अच्छा अब जाओ यहां से में जल्दी से सफाई कर दूँ कोई आ न जाए" रेखा ने भी अपनी साड़ी को पहनते हुए कहा।

"मामी फिर कब अपने भांजे के साँप को अपनी बिल में घूसने दोगी" नरेश ने कुर्सी से उठते हुए अपनी मामी को अपने बाहों में भरते हुए उसके होंठो को चूमते हुए कहा।

"जाओ बदमाश मैं तुमसे बात नहीं करूंगी तुम बुहत गंदे हो" रेखा ने अपना मूह बनाते हुए कहा ।

"च बाबा सॉरी में जा रहा हूँ पर अपने भांजे के साँप के बारे में ज़रूर कुछ सोचना" नरेश ने अपनी मामी को छोडते हुए शरारत से हँसते हुए कहा।

"भाग बदमाश" रेखा ने भी हँसते हुए अपने भांजे को मारने की कोशिश करते हुए कहा । नरेश वहां से चला गया और रेखा किचन को पूरा साफ़ करने लगी ।
 
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