"ओहहहह भैया करो ना" कंचन अपने भाई के लंड को अपनी चूत पर घीसने से बुहत ज्यादा उत्तेजित होते हुए अपने चूतडों को उछालकर अपने भैया के लंड को अपनी चूत में घुसाने की नाक़ाम कोशिश करते हुए कहा।
"क्या करुं प्यारी बहना" विजय ने अपनी बहन को इतना ज्यादा गरम देखकर उसे तडपाते हुए कहा और उत्तेजना के मारे अपनी बहन की चूत से निकलते हुए पानी से अपने लंड को गीला करते हुए अपना लंड वैसे ही उसकी चूत पर घीसने लगा ।
"हाहहह भैया वह डालो न क्यों तंग कर रहे हो" कंचन ने फिर से अपने चूतडों को उछलकर अपने भाई के लंड को अपनी चूत में लेने की कोशिश करते हुए ज़ोर से सिसककर नशीली आँखों से अपने भाई की तरफ देखते हुए कहा । कंचन का उत्तेजना के मारे बुरा हाल था और उसकी आँखें उत्तेजना के मारे ऐसे दिख रही थी जैसे उसने शराब पी रखी हो ।
"दीदी वही तो पूछ रहा हूँ क्या डालुँ" विजय को अपनी बहन को सताते हुए बुहत मज़ा आ रहा था । इसीलिए वह अपने लंड को अपनी बहन की चूत पर नीचे से लेकर ऊपर तक घिसते हुए बोला।
"ओहहहह भैया आप बड़े वह हो । ऐसे नहीं मानोगे अपना लंड हमारी इस में घुसाओ न । मुझे कुछ हो रहा है" कंचन ने आखिर हार मानकर ज़ोर से सिसककर कहा।
"दीदी हम अपना लंड किस में घुसाऊँं" विजय ने फिर से उसी अन्दाज़ में अपना लंड अपनी बहन की चूत पर घिसते हुए कहा।
"आआह्ह्ह्ह भैया अपना लंड हमारी चूत अपनी बड़ी दीदी की चूत में घुसाओ ना" कंचन ने जल्दी से अपने भाई से कहा । वह जान चुकी थी की विजय ऐसे नहीं मानेगा ।
"ओहहहह दीदी हमारी प्यारी दीदी हमारे होते हुए ऐसे कैसे तडप सकती है" विजय ने यह कहते हुए अपना लंड अपनी बहन की कुँवारी चूत के छेद पर टीका दिया और अपनी बड़ी बहन की टांगों को पकडते हुए अपने लंड पर दबाब डालकर अपनी बहन की चूत में घुसाने की कोशीश करने लगा।
विजय के ज़ोर लगाने पर उसके लंड का मोटा टोपा उसकी बहन की चूत में थोडा सा अंदर जाकर फँस गया,
"उईई भैया आपका तो बुहत मोटा है" कंचन ने अपने भाई के लंड के मोटे सुपाडे को अपनी चूत के दीवारों को फ़ैलाने से ज़ोर से चिल्लाते हुए बोली ।
"दीदी बस थोडा सा दर्द बर्दाशत कर लो। फिर मजा ही मजा आयेगा" विजय ने अपनी बहन की चीख़ को सुनकर उसको तसली देते हुए कहा।
"ओहहहह हाँ भैया आप अपना काम करो । मैं अब और बर्दाशत नहीं कर सकती । जल्दी से अपना लंड मेरी चूत में डालकर मुझे लड़की से औरत बनाओ" कंचन ने अपने भाई की बात सुनने के बाद ज़ोर से सिसकते हुए कहा।
दीदी आप ऐसा करो एक तकिया उठाकर अपने मुँह पर रख लो । ऐसा न हो की आपकी चीख़ सुनकर कोई आ जाए" विजय ने अपनी बड़ी बहन को सलाह देते हुए कहा । कंचन ने अपने भाई की बात को मानते हुए एक तकिया उठाकर अपने मूह पर रख दिया, विजय ने अपनी बड़ी बहन की टांगों को पकडते हुए अपने चूतड़ो को थोडा पीछे करते हुए एक ज़ोर का धक्का अपनी बहन की चूत में लगा दिया ।
"उईईईई मायआ ओहहहहहह फट गयीईइई" विजय का लंड उसकी बहन की सील को तोड़ता हुआ आधा अंदर घुस गया । कंचन के मूह से ज़ोर की चीख़ें निकलने लगी । जो उसका मुँह तकिए में होने की वजह से एक घुटी सी आवज़ के रूप में विजय को सुनायी देने लगी।
विजय कुछ देर तक अपने लंड को बिना हरकत दिए अपनी बहन की चूत में घुसाए रखा । कंचन की कुँवारी चूत की झीली फ़टने से उसकी चूत से खून की कुछ बूँदे निकल बेड पर गिर रही थी।
"ओहहहहह भैया बुहत दर्द हो रहा है । आपका तो बुहत मोटा है" कुछ देर बाद कंचन ने अपने मूह से तकिए को दूर करते हुए ज़ोर से सिसककर कहा ।
"दीदी बस आपकी झीली फट चुकी है और आप एक औरत बन चुकी हैं यह दर्द कुछ ही देर में चला जाएगा" विजय ने अपनी बहन के ऊपर झुकते हुए कहा और उसकी एक चूचि को पकडते हुए अपने मूह में डाल दिया । कंचन के आँखों से दर्द के मारे आंसू निकल रहे थे। अपनी चूचि को अपने भाई के मूह में महसूस करके वह कुछ सुकून महसूस करने लगी।
कंचन की चूत का दर्द कुछ ही देर में कम होकर न के बराबर रह गया और वह अपने भाई के मूह में अपनी चूचि को महसूस करके फिर से गरम होते हुए अपने चूतडों को अपने भाई के लंड पर हिलाने लगी । विजय अपनी बहन के चूतडों को हिलता हुआ महसूस करके समझ गया की उसकी चूत का दर्द ख़तम हो गया है।
विजय अपनी बहन की चूचि को छोड़ता हुए सीधा होगया और अपनी बड़ी बहन की टांगों को पकडते हुए अपने लंड को धीरे धीरे उसकी चूत में अंदर बाहर करने लगा।
"ओहहहहह हहह भैया" अपने भाई के लंड की रगड से कंचन ने बुहत ज्यादा मज़े और हलके मीठे दर्द के अहसास से ज़ोर से सिसकते हुए कहा।
विजय अपनी बहन की चूत में अपना लंड कुछ देर तक यों ही धीरे से अंदर बाहर करता रहा । कंचन को अब अपनी चूत में दर्द बिलकुल महसूस नहीं हो रहा था। जिस वजह से अब वह अपने चूतडों को अपने भाई के लंड पर ज़ोर से उछालते हुए उसका लंड अपनी चूत के अंदर ले रही थी, विजय भी अपनी बहन के चूतडों को ज़ोर से हिलता हुआ देखकर अपना लंड तेज़ी के साथ अपनी बड़ी बहन की चूत में अंदर बाहर करने लगा।
" आह्ह्ह्ह भैया ओहहहह मुझे बुहत मज़ा आ रहा है आपका लंड मेरी चूत के दीवारों से बुरी तरह से रगड खा रहा है" कंचन ने अपने चूतडों को वेसे ही अपने भाई के लंड पर उछालते हुए उत्तेजना के मारे सिसककर बोली।
"आहहह दीदी आपकी चूत तो बुहत ज्यादा टाइट और गरम है । मुझे आपकी चूत में अपना लंड अंदर बाहर करते हुए जितना मज़ा आ रहा है । वह सिर्फ मैं ही जानता हू" विजय अपनी बहन की बात सुनकर ज़ोर से उसकी चूतमें अपने लंड को अंदर बाहर करते हुए बोला।
"ओहहहह भैया आपका लंड तो मेरी चूत में और अंदर तक घुस रहा है । अभी कितना बाहर है" कंचन अपने भाई के लंड के ज़ोर के झटको से सिसकते हुए बोली।
"दीदी बस थोडा सा है आप कहे तो पूरा अंदर कर दूं" विजय ने अपनी दीदी की चूत में अपना लंड पूरा सुपाडे तक निकालकर उसकी चूत में ज़ोर का धक्का मार कर अंदर घूसा रहा था । जिस वजह से उसका पूरा जिस्म अपने भाई के हर धक्के के साथ कांप रहा था।
"ओहहहह भैया घुसेडो पूरा मुझे चोद चोद कर अपनी गुलाम बना लो" कंचन ने अपने भाई के ज़ोर के धक्कों से बुरी तरह हाँफते हुए कहा।
"तो दीदी सम्भालो अपने आपको" यह कहते हुए विजय ने अपनी बहन की टांगों को पकड अपना लंड आधा बाहर करते हुए बुहत ज़ोर के २-३ धक्के मारकर उसे अपनी बड़ी बहन की चूत में पूरा पेल दिया ।
"उईई मायआ ओह्ह्ह्हह भैया मर गयी । दर्द हो रहा है" कंचन अपने भाई का पूरा लंड घुसते ही फिर से दर्द के मारे झटपटाने लगी । विजय ने इस बार अपनी बहन की कोई परवाह न करते हुए अपने लंड को उसकी चूत में बुरी तरह अंदर बाहर करने लगा।
"आह्ह्ह्ह इसशहहहह भैया आपका लंड तो मुझे अपने पेट के क़रीब महसूस हो रहा है ओह्ह्ह्ह बुहत मज़ा आ रहा है। मैंने खवाब में भी नहीं सोचा था की चुदाई में इतना मज़ा आता है" कुछ ही देर में कंचन की चूत में विजय के लंड ने अपनी जगह बना ली और वह ज़ोर से अपने चूतडों को उछालते हुए अपने भाई के लंड को अपनी चूत में लेकर ज़ोर से सिसकते हुए बोली ।
विजय ने अपनी बहन के चूतडों से तक़िए को खींचकर निकाल दिया और अपनी बहन की चूत में अपने लंड को पूरी तेज़ी और ताक़त के साथ उसकी चूत में अंदर बाहर करने लगा।
ओहहहह भैया आअह्ह्ह्हह मुझे कुछ हो रहा है तेज़ी के साथ करो" कंचन अपने भाई के लंड को अपनी चूत की गहराईयों में ज़ोर की रगड खाते हुए महसूस करके उत्तेजना के मारे ज़ोर से चिल्लाते हुए बोली।
विजय समझ गया की उसकी बहन झरने वाली है। इसीलिए वह अपने लंड को पूरा बाहर खींचकर अपनी बहन की चूत में पेलने लगा । कंचन का भी उत्तेजना के मारे बुरा हाल था। उसका पूरा जिस्म काँपते हुए अकड़ रहा था, कंचन ने अपनी टांगों को अपने भाई की कमर में डाल दिया और अपने दोनों हाथों को अपने भाई की गांड को पकडकर अपनी चूत में उसके लंड को ज़ोर से घुसाने लगी ।
विजय अपनी बहन की चूत में अपना लंड इतनी ज़ोर से अंदर बाहर कर रहा था की उसके हर धक्के के साथ उसकी बहन के मूह से एक सिसकी निकल रही थी। कंचन का पूरा जिस्म अकडने लगा। वह झरने के बिलकुल क़रीब थी।
"आह्ह्ह्हह इसशहहहहह मैं झड रही हूँ ओहहहह भैया" कंचन ने अचानक अपने नाखुनों को अपने भाई की गांड में घुसा दिया और झडते हुए बुहत ज़ोर से चिल्लाने लगी।
"आआह्ह्ह्ह दीदी मेरा भी निकल रहा है ओह्ह्ह्हह्ह्" कंचन की चूत झडते हुए सिकुड़ने लगी। जिस वजह से विजय भी अपने आप को रोक नहीं पाया और अपनी बहन की चूत में ज़ोर से चिल्लाते हुए वीर्य भरने लगा।
"आआह्ह्ह्ह भैया ओह्ह्ह्हह आपके लंड से कितना वीर्य निकल रहा है" कंचन अपनी चूत में अपने भाई के लंड से निकलते हुए वीर्य को महसूस करके सिसकते हुए बोली।
"आआह्ह्ह्ह दीदी आपकी चूत ने झरते हुए मेरे लंड को इतनी ज़ोर से पकड लिया की मैं अपने आप को रोक नहीं पाया। यह चुदाई मुझे सारी ज़िंदगी याद रहेगी" विजय ने झडते हुए बुहत ज़ोर से हांफकर अपनी बहन की चूत में ज़ोर के धक्के मारते हुए कहा ।
"आआह्ह्ह्ह भैया मुझे भी अपने प्यारे भैया की चुदाई सारी ज़िंदगी याद रहेगी" कंचन ने भी सिसकते हुए कहा। । विजय पूरी तरह झडने के बाद अपनी बहन के ऊपर ढेर हो गया ।
माँ मैं अपने कमरे में जाऊं" नरेश ने वैसे ही सोते हुए कहा।
"नही बेटा मेरी प्यास अभी बुझि नहीं मैं अपने बेटे से अपनी पूरी प्यास बुझाना चाहती हू" अपने बेटे की बात को सुनते ही मनीषा ने उठते हुए अपने बेटे के मुरझाये हुए लंड को सहलाते हुए कहा।
"आह्ह्ह्ह माँ तो इसे अपने मुँह में लेकर प्यार करो ना" नरेश ने अपनी माँ का नरम हाथ अपने लंड पर पड़ते ही सिसकते हुए उसके बालों में अपना हाथ डालकर कहा।
"हाँ बेटे अभी इसे अपने मूह में लेती हूँ" मनीषा ने यह कहते हुए अपने बेटे का मुर्झाया हुआ लंड अपने मूह को खोलते हुए उसे अपने मूह में भर लिया । नरेश का लंड मुर्झाया हुआ था। जिस वजह से वह मनीषा के मुँह में पूरा चला गया, मनीषा अपने बेटे के लंड को पूरा अपने मूह में पड़ते ही ज़ोर से चूसने लगी।
"आह्ह्ह्ह माँ ऐसे ही चूसो बुहत मज़ा आ रहा है" नरेश ने अपनी माँ के बालों को सहलाते हुए उसे अपने लंड की तरफ ज़ोर देते हुए कहा । मनीषा को अपने बेटे के लंड से अजीब किस्म का स्वाद आ रहा था क्योंकी जब उसने उसे अपने मूह में लिया था तो वह उसके बेटे के वीर्य और उसकी अपनी चूत के पानी से गीला था ।
नरेश का लंड अपनी माँ के मूह की गर्मी से अब तनने लगा था। जिस वजह से मनीषा को उसे अपने मूह में पूरा रखने में परेशानी हो रही थी । मनीषा ने अपने बेटे के लंड को अब अपने मूह से निकालकर अपनी जीभ निकालकर उसे ऊपर से नीचे तक चाटने लगी।
मानिषा ने अचानक अपनी जीभ को नीचे करते हुए अपने बेटे के लंड के नीचे लटकती गोटियों पर फिराने लगी । मनिषा ने अपने बेटे की अंडों पर जीभ को फिराते हुए अचानक उसकी एक गोटी को अपने मूह में भरकर चूसते हुए अपने हाथ से बेटे के लंड को सहलाने लगी ।
"आहहहहह ईश माँ क्या कर रही हो ओह्ह्ह्हह्ह्" नरेश अपनी गोटी को अपने माँ के मूह में जाते ही ज़ोर से चिल्लाते हुए सिसकने लगा, नरेश को अपने पूरे जिस्म में अजीब किस्म के सिहरन का अहसास हो रहा था ।
नरेश उत्तेजना के मारे इतना बेकाबू हो गया की उसने अपनी माँ को बालों से पकडते हुए अपनी गोटियों से उसका मुँह निकाल दिया और उसे कमर से पकडते हुए उलटा लिटाते हुए खुद उसके पीछे आ गया।
"माँ तुम तो किसी रंडी से भी ज्यादा गरम हो । अभी तुम्हारा बेटा तेरी चूत में अपना लंड डालकर तुझे शांत करता है" नरेश ने अपनी माँ के चूतडों पर ज़ोर से थप्पड़ मारते हुए कहा।
ओहहहहह बेटे तुम्हें अचानक क्या हुआ। इतनी ज़ोर से थप्पड़ क्यों मार रहे हो" मनीषा अचानक अपने बेटे के बदलाब से परेशान होकर सिसकते हुए बोली।
"चुप कर साली रंडी वरना अपना लंड तेरी चूत के बदले तेरी गांड में पेल दूंगा" नरेश ने वेसे ही अपनी माँ के चूतडों पर ज़ोर से थप्पड़ मारते हुए कहा ।
मानिषा अपने बेटे से डर गयी इसीलिए चुप चाप उलटा लेटी अपने बेटे के थप्पडों को बर्दाशत करने लगी।
"साली छिनाल तेरी गांड को देखकर तो लगता है आजतक तुम ने किसी से अपनी गांड नहीं मरवायी" नरेश ने अचानक नीचे झुकते हुए अपनी माँ की गांड को अपने होंठो से चूमते हुए कहा।
"ओहहहहहह बेटे क्या कर रहे हो" मनीषा अपने बेटे के होंठो को अपनी गांड के छेद पर महसूस करके सिहर उठी।
नरेश अपनी जीभ को निकालकर अपनी माँ की गांड के भूरे छेद पर फिराने लगा । मनीषा भी अपने बेटे की जीभ को अपनी गांड पर महसूस करके ज़ोर से सिसकने लगी।
"वाह तुम्हारी गांड का स्वाद तो बुहत बढ़िया है साली रंडी बता न कभी अपनी गांड मरवाई है" नरेश ने अपनी माँ की गांड से अपनी जीभ को हटाते हुए कहा ।
"नही बेटे मगर तुम्हें अपनी माँ से ऐसे बात करते हुए शर्म नहीं आती" मनीषा ने अपने बेटे को जवाब देते हुए कहा।
"साली रंडी मुझे शर्म करने को कहती हो और तुम खुद जो अपने बेटे के सामने नंगी लेटकर अपनी चूत में लंड पेलवा रही हो तुम्हें शर्म नहीं आती" नरेश ने अपनी माँ की बात सुनकर गुस्से से अपनी माँ की गांड में अपनी एक ऊँगली ड़ालते हुए कहा।
"उई बेटे ओह्ह्ह्हह तुम सच कह रहे हो मगर फिर भी तुम मेरे बेटे हो। तुम्हें मुझे गाली नहीं देनि चाहिये" मनीषा ने अपने बेटे की बात सुनकर ज़ोर से चिल्लाकर सिसकते हुए कहा।
"माँ शायद आप सच कह रही हो । मगर आपको गाली देने में मज़ा आ रहा है । आप भी ज़रा मुझसे खुलकर बातें करो फिर देखो तुम्हें कितना मजा आता है" नरेश ने अपनी माँ की बात सुनकर उसकी गांड में अपनी ऊँगली को ज़ोर से अंदर बाहर करते हुए कहा ।
"ओहहहह बेटे अब अपनी माँ की चूत में अपना लंड डालकर ज़ोर से उसके चूत की खुजली मिटाओ । बुहत खुजली हो रही है हमारी चूत में" मनीषा भी अपने बेटे की बात को समझते हुए उससे उसी तरह बात करते हुए कहा ।
"हाँ माँ आप का बेटा जो इसी चूत से निकला है। आज अपनी माँ की चूत की सारी खुजलि मिटा देगा" नरेश ने यह कहते हुए अपना फनफनाता हुआ लंड अपनी माँ की चूत के छेद पर रखते हुए ज़ोर का धक्का देते हुए एक ही बार में अपनी माँ की चूत में पेल दिया।
आह्ह्ह्ह बेटे एक ही धक्के में पूरा घुसा दिया। अब ज़ोर जोर के धक्के मारकर अपनी माँ की चूत की खुजलि मिटा दो।बुहत तगडा लंड है तुम्हारा" मनीषा ने अपने बेटे का पूरा लंड घुसते ही ज़ोर से सिसकते हुए कहा।
"ले साली रंडी ले अपने सगे बेटे के लंड को अपनी चूत की गहराइयों तक महसूस कर" नरेश ने अपनी माँ की चूत में ज़ोर के धक्के मारते हुए कहा ।
"ओहहहहह बेटा तुम्हारा लंड तो सच में मेरी चूत की गहराइयों को नाप रहा है तुम सच्चे मरद हो। ऐसे ही अपनी माँ की चूत का भोसडा बना दे दे और ज़ोर के धक्के मार" मनीषा अपने बेटे के तेज़ धक्कों से मज़े के मारे हवा में उडते हुए अपने बेटे के लंड पर अपने चूतड़ो को ज़ोर से धकेलते हुए हांफकर कहने लगी।
"साली रंडी तुम्हारी चूत तो पहले से भोसडा बनी हुई है। मेरे जैसे तो इस में दो लंड भी घुस जाएंगे मुझे तो तुम्हारी कुंवारी गांड मारनी है" नरेश ने वैसे ही ज़ोर से अपनी माँ को चोदते हुए उत्तेजना के मारे चिल्लाते हुए कहा और अपने हाथों से अपनी माँ के चूतडों पर जोर जोर से थप्पड़ मारने लगा ।
"आआह्ह्ह्ह बेटे हमने आज तक गांड नहीं मरवाई है मगर अपने बेटे से ज़रूर अपनी गांड मरवाऊँगी। मगर कुछ दिन सबर करना होगा" मनीषा ने अपने बेटे की बात को सुनकर उत्तेजना के मारे वैसे ही अपने चूतडों को हिलाते हुए कहा।
"ठीक है माँ मैं अभी आपकी गांड नहीं मारता। मगर याद रखना मेरी बात को" नरेश ने अपनी माँ की बात को सुनते हुए खुश होकर कहा और वेसे ही अपनी माँ की चूत में ज़ोर के धक्के मारते हुए कहा ।
"आह्ह्ह्ह बेटे मैं झरने वाली हूँ ज़ोर से धक्के लगाओ " मनीषा ने अचानक चिल्लाते हुए कहा । नरेश अपनी माँ की बात सुनकर उसके चूतडों में हाथ डालकर उसे पूरी तेज़ी और ताक़त के साथ उसे पेलने लगा।
"आआह्ह्ह्ह इसशहहहहह बेटे मैं आईईई" मनीषा यह कहते हुए अपनी आँखें बंद करके अपने चूतडों को ज़ोर से अपने बेटे के लंड पर पीछे धकेलने लगी, मनीषा की चूत ने झरते हुए सिकुडना शुरू कर दिया जिस वजह से नरेश अपने आप पर कण्ट्रोल न रख सका और ज़ोर से चिल्लाते हुए अपनी माँ की चूत में अपने लंड को पूरा जड़ तक पेल दिया और झड़ने लगा।
"अअअअहहहह माआ ओह्ह्ह्हह्ह्" नरेश ने झरते हुए अपनी माँ के चूतड़ों को पकडकर अपने लंड पर ज़ोर से दबा दिया था जिस वजह से नरेश का लंड उसकी माँ की चूत में जड़ तक घुसकर उसके बच्चेदानी में अपना वीर्य छोड़ने लगा।
"ओहईई बेटे आआह्ह्ह्ह तुम्हारा गरम वीर्य मेरी बच्चेदानी में गिर रहा है ओहहहह। मैं अगर बच्चा गिराने की गोली नहीं खा रही होती तो मुझे यकीन था की मैं आज अपने बेटे के बच्चे की माँ बन जाती" नरेश का वीर्य अपनी बच्चेदानी में गिरता हुआ महसूस करके मनीषा ने ज़ोर से सिसकते हुए कहा ।
"भइया ये खून कहाँ से आया" कंचन ने कुछ देर यों ही लेटे रहने के बाद जैसे ही उठकर बाथरूम जाने के लिए बेड से उठी उसकी नज़र बेड पर बने खून के धब्बों पर पडी। जिन्हें देखकर उसने घबराकर अपने भाई से कहा।
"दीदी आपको पता नहीं की पहली बार में जब किसी लड़की की झीली टूटती है तो उसकी चूत से खून निकलता है बस अब कभी भी तुम्हारी चूत से खून नहीं निकलेगा" विजय ने अपनी बहन को परेशान देखकर समझाते हुए कहा ।
"भइया इसका मतलब आपने अपने इस मुसल से अपनी बहन की चूत को सच में फाड ही दिया" कंचन ने सीधा खडे होते हुए कहा । कंचन जैसे ही आगे जाने के लिए बढ़ी उसे अपनी टांगों के बीच बुहत दर्द महसूस हुआ और वह वहीँ पर बेड पर बैठ गयी ।
"क्या हुआ दीदी" विजय ने अपनी बहन को वहां पर बैठता हुआ देखकर बोला।
"भइया मुझे बुहत दर्द हो रहा है। मैं चल नहीं पा रही हू" कंचन ने सिसकते हुए अपनी आँखों से मोटे आंसू बहाकर कहा।
"कहाँ जाना है तुम्हें?" विजय ने अपनी बहन के क़रीब आते हुए उसकी आँखों से आंसू पोछते हुए पुछा।
"भइया मुझे बाथरूम जाना है। बुहत ज़ोर की पेशाब लगी है" कंचन ने यों ही सिसकते हुए कहा।
"दीदी हमारे होते हुए आपको परेशान होने की ज़रुरत नहीं है" विजय ने यह कहते हुए अपनी नंगी बहन को अपनी बाहों में उठा लिया और बाथरूम की तरफ जाते हुए अपनी बहन को बाथरूम में ले जाकर नीचे बिठा दिया।
"भइया आप जाओ न मैं पेशाब करती हू" कंचन ने शरमाते हुए अपने भाई से कहा ।
"क्यों दीदी आपको हम से भी शर्म आ रही है । हमें भी पेशाब लगी है । हम आपके साथ साथ पेशाब करेंगे । यह कहते हुए विजय अपनी बहन के दूसरी तरफ जाकर खडा हो गया।
"भइया ठीक है जैसे आपकी मर्जी" कंचन ने यह कहते हुए पेशाब करना शुरू कर दिया । कंचन की चूत से पेशाब करते हुए मधुर आवज़ निकलने लगी। जिससे विजय ने सुनकर खुद भी पेशाब की धार छोड़ने लगा।
"दीदी शावर ऑन करों। मुझे आपके साथ नहाने का मन हो रहा है" विजय ने अपनी दीदी की तरफ देखते हुए कहा।
"भइया आपकी मर्ज़ी मगर कोई मस्ती मत करना" कंचन ने अपने भाई की बात को सुनकर खुद भी राज़ी होते हुए कहा।
"ओहहहहह दीदी आई लव यू" यह कहते हुए विजय ने शावर ऑन कर दिया और अपनी बहन के पास जाते हुए उसे उठाते हुए सीधा शावर के नीचे खडा कर दिया ।शावर से निकलता हुआ पानी कंचन और विजय दोनों के नंगे बदन पर गिरने लगा ।
विजय का लंड अपनी दीदी के गोरे जिस्म को देखकर जो पानी से पूरा भीग चूका था तनने लगा । विजय अपनी बहन के पास जाते हुए उसे अपनी बाहों में भर लिया और अपनी दीदी की एक चूचि को अपने मूह के पास लाते हुए उसके ऊपर गिरता हुआ शावर का पानी पीने लगा।
"आह्ह्ह्ह भैया मैंने कहा था मस्ती नहीं करना" कंचन ने अपने भाई का मूह अपनी चुचियों पर पड़ते ही सिसककर कहा।
"दीदी मैं मस्ती नहीं प्यार कर रहा हूँ । आप भी इसे प्यार करे" विजय ने अपनी बहन की चूचि को अपने मूह से निकालते हुए उसका हाथ अपने तने हुए लंड पर रख दिया ।
"आआह्ह्ह्ह भैया आप बड़े बदमाश हो बात तो वही हुई" कंचन का हाथ अपने भाई के लंड पर पड़ते ही अपने आप उस पर ऊपर नीचे होने लगा और उसने मज़े के मारे सिसकते हुए कहा।
"दीदी क्या करूं आपका जिस्म है ही ऐसा की देखते ही इसे प्यार करने का मन होता है" विजय ने अपनी बहन की तारीफ करते हुए कहा ।
"भइया आपका यह बुहत प्यारा है मैं इसे प्यार कर सकती हू" कंचन ने अपने भाई के गुलाबी लंड को यों ही सहलाते हुए नीचे घुटनों के बल बैठकर कहा।
"दीदी आप यह क्या कह रही हो । यह आपका गुलाम है आप इसे जी भरकर प्यार करें। हम से क्यों पूछ रही हो" विजय ने अपनी बहन के नीचे झुकते थोडा आगे होते हुए अपना लंड उसके मूह के क़रीब करते हुए कहा।
कंचन ने अपने भाई का लंड अपने मूह के इतने क़रीब देखकर अपने आप को रोक नहीं पायी और अपने भाई के लंड के गुलाबी सुपाडे पर अपने होंठो को रखकर उसे चूमने लगी।
"अअअहहहह दीदी ऐसे ही हमारे लंड से प्यार करो बुहत मज़ा आ रहा है" विजय ने अपनी बहन के नरम होंठो को अपने लंड पर महसूस करते ही ज़ोर से सिसकते हुए कहा ।
विजय का उत्तेजना के मारे बुरा हाल था और उत्तेजना के मारे उसके लंड से वीर्य की कुछ बूँदे निकलने लगी। कंचन की नज़र जैसे ही अपने भाई के लंड के छेद पर पडी। उसने अपनी जीभ निकालकर अपने भाई के लंड से निकालते हुए वीर्य को अपनी जीभ से चाटने लगी। कंचन ने कुछ देर तक अपने भाई के लंड के छेद पर अपनी जीभ को फिराने के बाद अपना पूरा मूह खोलते हुए अपने भाई के लंड का गुलाबी सुपाड़ा अपने मुँह में भर लिया और उसे अपने दोनों होंठो के बीच लेकर चूसने लगी ।