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रेखा अब अपने बेटे के लंड पर ज़ोर से उछलने लगी। विजय आराम से लेटे हुए अपनी माँ को अपने लंड पर उछलता हुआ देख रहा था, रेखा की बड़ी बड़ी चुचीयाँ अपने बेटे के लंड पर उछलते हुए बुहत ज़ोर से हिलते हुए इधर उधर झूम रही थी ।
विजय ने अपनी माँ की हिलती हुयी चुचियों को अपने हाथों से दबाने लगा । विजय कुछ देर तक अपनी माँ की चुचियों को दबाने के बाद उसकी कमर में हाथ डालकर नीचे झुकाते हुए अपनी माँ की चुचियों को एक एक करके चाटते हुए अपने चूतडों को बुहत ज़ोर से उछलते हुए अपनी माँ को चोदने लगा।
रेखा का जिस्म फिर से अकडने लगा और उसने अपने बेटे के मूह से चुचियों को निकालते हुए बुहत ज़ोर से उसके लंड पर उछलने लगी । रेखा का जिस्म कुछ देर में ही झटके खाने लगा और वह ज़ोर से हाँफते हुए दूसरी बार झरने लगी, रेखा दूसरी बार झरते हुए बुहत ज़ोर से अपने बेटे के लंड पर उछलते हुए सिसक रही थी ।
रेखा झरने के बाद अपने बेटे के ऊपर ढेर हो गयी, विजय भी अब झरने के क़रीब था वह अपनी माँ को अपने ऊपर से उठाकर सीधा लिटाते हुए अपना लंड उसकी चूत में घुसा दिया और 5 मिनट तक बुहत तेज़ी के साथ बिना रुके हुए उसे चोदता रहा।
"माँ मैं झरने वाला हूँ। माँ कहा झडूं" विजय ने अचानक ज़ोर से सिसकते हुए कहा।
"अपनी माँ की चूत में झरना बेटे । मैं तुम्हारा गरम वीर्य अपनी छुइ में महसूस करना चाहती हू" रेखा ने चिल्लाते हुए कहा।
"ओहहहहहहह माँ आअह्ह्ह्हह" विजय कुछ ही देर में ज़ोर से हाँफते हुए अपनी माँ की चूत में अपना वीर्य छोड़ने लगा, विजय ने झरते हुए अपना लंड पूरी ताक़त के साथ अपनी माँ की चूत में घुसा दिया जिस वजह से उसका वीर्य सीधा उसकी माँ की बच्चेदानी में गिरने लगा।
"आआह्ह्ह्हह बेटे ओह्ह्ह्हह्हह तुम्हारा वीर्य कितना गरम है ओहहह यह तो मेरी बच्चेदानी में गिर रहा है" रेखा भी अपने बेटे का वीर्य अपनी चूत में गिरने से तीसरी बार झरने लगी । दोनों माँ बेटे कुछ देर तक झरने का मज़ा लेने के बाद एक दुसरे की बाहों में ढेर हो गए ।
विजय ने अपनी माँ की हिलती हुयी चुचियों को अपने हाथों से दबाने लगा । विजय कुछ देर तक अपनी माँ की चुचियों को दबाने के बाद उसकी कमर में हाथ डालकर नीचे झुकाते हुए अपनी माँ की चुचियों को एक एक करके चाटते हुए अपने चूतडों को बुहत ज़ोर से उछलते हुए अपनी माँ को चोदने लगा।
रेखा का जिस्म फिर से अकडने लगा और उसने अपने बेटे के मूह से चुचियों को निकालते हुए बुहत ज़ोर से उसके लंड पर उछलने लगी । रेखा का जिस्म कुछ देर में ही झटके खाने लगा और वह ज़ोर से हाँफते हुए दूसरी बार झरने लगी, रेखा दूसरी बार झरते हुए बुहत ज़ोर से अपने बेटे के लंड पर उछलते हुए सिसक रही थी ।
रेखा झरने के बाद अपने बेटे के ऊपर ढेर हो गयी, विजय भी अब झरने के क़रीब था वह अपनी माँ को अपने ऊपर से उठाकर सीधा लिटाते हुए अपना लंड उसकी चूत में घुसा दिया और 5 मिनट तक बुहत तेज़ी के साथ बिना रुके हुए उसे चोदता रहा।
"माँ मैं झरने वाला हूँ। माँ कहा झडूं" विजय ने अचानक ज़ोर से सिसकते हुए कहा।
"अपनी माँ की चूत में झरना बेटे । मैं तुम्हारा गरम वीर्य अपनी छुइ में महसूस करना चाहती हू" रेखा ने चिल्लाते हुए कहा।
"ओहहहहहहह माँ आअह्ह्ह्हह" विजय कुछ ही देर में ज़ोर से हाँफते हुए अपनी माँ की चूत में अपना वीर्य छोड़ने लगा, विजय ने झरते हुए अपना लंड पूरी ताक़त के साथ अपनी माँ की चूत में घुसा दिया जिस वजह से उसका वीर्य सीधा उसकी माँ की बच्चेदानी में गिरने लगा।
"आआह्ह्ह्हह बेटे ओह्ह्ह्हह्हह तुम्हारा वीर्य कितना गरम है ओहहह यह तो मेरी बच्चेदानी में गिर रहा है" रेखा भी अपने बेटे का वीर्य अपनी चूत में गिरने से तीसरी बार झरने लगी । दोनों माँ बेटे कुछ देर तक झरने का मज़ा लेने के बाद एक दुसरे की बाहों में ढेर हो गए ।