• Hello Friends You can Register on the Forum and by posting you can earn money too.

परिवार(दि फैमिली) complete

"हाँ यार वह तो है मगर रात को हमारी बहनें भी तो है" नरेश ने अपनी चिंता जताते हुए कहा।

"साले कह तो तू सच रहा है मगर तुम चिंता मत करो हम कोई न कोई रास्ता निकाल लेंगे" विजय ने नरेश की बात सुनकर मुस्कराते हुए कहा ।

रेखा किचन का सारा काम करने के बाद वहां से उठते हुए अपने कमरे में जाने लगी । रेखा का पूरा शरीर टूट रहा था। वह अपने बेटे और भांजे से चुदवाने के बाद बुहत ज्यादा थक चुकी थी, रेखा ने अपने कमरे में आते ही अलमारी से कपडे निकाले और बाथरूम में घुस गयी ।

मुकेश ने अपनी पत्नी को बाथरूम में जाता हुआ देखकर कमरे का दरवाज़ा अंदर से बंद किया और अपने कपड़े उतारते हुए सिर्फ एक अंडरवियर में अपनी पत्नी के पास बाथरूम में घुस गया।

"अरे आप क्या हुआ?" रेखा जो बिलकुल नंगी होकर शावर के नीचे नहा रही थी अचानक अपने पति को अंदर दाखिल होता हुआ देखकर हैंरान होते हुए बोली।

"कुछ नहीं आज जाने क्यों मेरा मूड कुछ सेक्सी हो गया है" मुकेश ने अपनी पत्नी को पीछे से अपनी बाहों में भरते हुए कहा।

"अरे नहीं मुझे छोड दो। मैं अभी कुछ नहीं कर सकती। पहले से ही में बुहत थकी हुयी हूँ" रेखा ने अपने पति की बाहों को पकडकर अपने आप से दूर करते हुए कहा ।

"क्या हुआ है आज तुम्हें वैसे तो हर वक्त तैयार रहती हो फिर अभी क्यों नखरे कर रही हो" मुकेश ने रेखा की तरफ हैंरानी से देखते हुए कहा।

"वो कुछ नहीं बस आज ज़रा काम की वजह से थक गयी हूँ" रेखा ने अपने पति की बात सुनकर मन ही मन में मुस्कराते हुए कहा ।

"देखो तुम मुझसे झूठ नहीं बोल सकती। जल्दी से मुझे सच बताओ वरना मैं तुम्हें नहीं छोड़ने वाला" मुकेश ने अपने अंडरवियर को भी अपने जिस्म से अलग करते हुए कहा।

"क्या बताउं तुम्हें की तुम्हारे बेटे और भांजे ने मिलकर तुम्हारी पत्नी की चूत का बुरा हाल कर दिया है इसी लिए वह आपसे चुदवा नहीं सकती" रेखा ने गुस्से में अपने पति को सब कुछ बताते हुए कहा ।
 
"क्या कहा उन दोनों ने एक साथ और वह भी दिन में" मुकेश का लंड एक्साइटमेंट में ज़ोर के झटके खाने लगा जिसे उसने अपने हाथ से पकडकर सहलाते हुए कहा।

"हाँ एक साथ वह भी दिन में सालों ने बाप का माल समझ रखा है देखा नहीं और अपना लंड खडा करके चोदने लगते हैं। देखो क्या हालत कर दी है उन दोनों ने मेरी चूत की" रेखा ने अपने पति की तरफ सीधी होकर अपनी सूजी हुई चूत को उसे दिखाते हुए बोली ।

"बात तो तुम्हारी ठीक है मादरचोदों ने तुम्हारी चूत का कचूमर बना दिया है क्या उन दोनों के लंड बुहत बड़े है" विजय ने वेसे ही उत्तेजना में अपने लंड को सहलाते हुए अपनी पत्नी के पास जाते हुए कहा।

"हाँ मेरे पतिदेव इसीलिए तो तुम्हारी यह पत्नी उन्हें मना नहीं कर सकती क्योंकी उनके तगडे लन्डों से चुदवाकर जो मजा आता है उसके सामने यह दर्द कुछ भी नही" रेखा ने अपने पति को जवाब देते हुए कहा ।

"रेखा यह बताओ की दोनों में से किसका लंड ज्यादा बड़ा और मोटा है" मुकेश ने नीचे झुककर अपनी पत्नी की चूत को चूमते हुए कहा।

"आह्ह्ह्ह मेरे पतिदेव तुम्हारे बेटे का लंड सबसे मोटा और लम्बा है बिलकुल गधे जैसा" रेखा अपनी चूत पर अपने पति के होंठ लगते ही सिसकते हुए बोली ।

"रेखा तुम्हारी बाते सुनकर मेरी हालत ख़राब हो चुकी है अब में क्या करुं?" मुकेश ने सीधे खडा होकर अपनी पत्नी की बड़ी बड़ी चुचियों को मसलते हुए कहा।

"मेरे पतिदेव आप चिंता मत करो मेरे होते हुए आपको किसी बात की चिंता करने की ज़रुरत नही" रेखा अपने पति के हाथों को अपनी चुचियों से दूर करते हुए नीचे झुककर बैठ गई और अपने हाथों से मुकेश के लंड को सहलाने लगी ।

"आहहह रेखा तुम बुहत अच्छी हो" अपने लंड पर अपनी पत्नी के हाथों के पडते ही मुकेश ने सिसकते हुए कहा । रेखा ने कुछ देर तक मुकेश के लंड को अपने हाथों से सहलाने के बाद अपना मुँह खोलते हुए अपने पति का लंड अपने मूह में भर लिया और उसे बुहत ज़ोर से चूसने लगी ।वह बहुत अच्छे से लंड को अपने थूक में भिगोकर चूस रही थी।कुछ ही देर बाद।

"आह्ह्ह्ह रेखा मेरा निकलने वाला है" अचानक मुकेश ने सिसकते हुए कहा।

"हाँ अपना वीर्य मेरे मूह में ही डाल दो" रेखा ने अपने पति की बात सुनकर उसका लंड अपने मूह से निकालते हुए कहा और फिर से उसके लंड को अपने मुँह में लेकर बुहत ज़ोर से चूसने लगी।

"ओहहहहह आह्ह्ह्हह्ह्ह्" मुकेश के मुँह से ज़ोर की सिस्कियाँ निकलने लगी और उसके लंड से वीर्य निकलकर रेखा के मूह को भरने लगा ।

रेखा अपने पति का सारा पानी गटकने लगी और कुछ ही देर में मुकेश का लंड पूरी तरह झरकर उसके मूह में सिकुड़ गया जिसे रेखा ने अपने मूह से निकाल दिया । उसके बाद दोनों पति पत्नी नहाकर वापस अपने कमरे में आ गये और दोनों आराम करने लगे ।
 
"दीदी चलो आज नाना जी से चलकर बाते करते है" पिंकी ने अचानक कोमल से कहा।

"दादा जी से ठीक है जैसे तुम्हारी मर्जी" कोमल ने पिंकी की बात सुनकर कहा और दोनों अपने कमरे से निकलकर अनिल के कमरे में जाने लगी । पिंकी ने अनिल के कमरे के बाहर आकर जैसे ही दरवाज़े को हाथ लगाया वह अपने आप खुल गया, पिंकी और कोमल दोनों अंदर दाखिल हो गई ।

अंदर दाखिल होते ही दोनों ने देखा के अनिल बेड पर बैठकर एक न्यूज़ पेपर पढ रहा था।

"दादा जी नाना जी" दोनों लड़कियों ने एक साथ अनिल को अचानक से पुकारते हुए कहा।

"कौन" अनिल अचानक उन दोनों के पुकारने से चौकते हुए बोला । अनिल हमेशा की तरह धोती पहने हुए दोनों लड़कियों के पुकारने से बुरी तरह चोंक गया जिस वजह से उसकी धोती आगे से थोडा खुल गयी ।

"हम हैं दादा जी" कोमल ने अपने दादा को चौंकता हुआ देखकर हँसते हुए कहा । मगर अचानक उसकी नज़र अपने दादा की खुली हुई धोती पर पर गई जिसमें से उसका सिकुडा हुआ लंड साफ़ दिख रहा था। कोमल का चेहरा अपने दादा का नंगा लंड देखकर शर्म से लाल हो गया और वह अपने चेहरे को दूसरी तरफ करते हुए सोफ़े पर जा बैठी ।

"नाना जी मैं भी आई हुँ" कोमल के आगे से हटने के बाद पिंकी ने अपने दादा को देखते हुए कहा मगर दुसरे ही पल उसकी भी हालत कोमल की तरह हो गई और अपने नाना का लंड देखकर उसका चेहरा भी शर्म से लाल हो गया । पिंकी ने भी अपना चेहरा दूसरी तरफ कर लिया।

"शरारती बच्चों तुम दोनों ने तो मुझे डरा ही दिया मगर तुम दोनों ने अपने चेहरा दूसरी तरफ क्यों कर दिया?" अनिल ने उन दोनों की तरफ देखकर हैंरान होते हुए कहा ।

"दादा जी आपकी धोती" कोमल ने सिर्फ इतना कहा ।अनिल ने जल्दी से अपनी धोती को ठीक कर दिया और बेड से उठकर सोफ़े पर जाकर बैठ गया।

"आज तुम दोनों को कैसे हमारी याद आयी?" अनिल ने सोफ़े पर बैठते हुए कहा।

"नाना जी मैं जब से आई हूँ आपसे बात ही नहीं हुई। इसीलिए आज आपसे बात करने के लिए हम यहाँ आ गये" पिंकी ने अपने नाना की तरफ देखते हुए कहा ।

"ओहहह मेरी बच्ची तुमने बुहत अच्छा किया। मैं भी तुमसे बात करना चाहता था। इधर आओ तुम दोनों मेरे पास आकर बैठो" अनिल ने पिंकी की तरफ देखकर उन दोनों को प्यार से अपनी तरफ बुलाते हुए कहा ।अनिल की बात सुनकर पिंकी और कोमल दोनों अनिल के दोनों तरफ आकर बैठ गयी ।
 
कमेंट के लिए सभी को थैंक्स।कहानी जारी रहेगी।अगला अपडेट जल्दी ही।कहानी के बारें में अपनी राय अवश्य दें।thanks
 
"नाना जी आपने हमें भुला ही दिया है इसीलिए तो आप आज तक कभी भी हमारे घर नहीं आए" पिंकी ने अपने नाना से शिकायत करते हुए कहा।

"नही बेटी ऐसी कोई बात नहीं इस बार वादा करता हूँ की तुम्हारे जाने के बाद में वहां पर ज़रूर आऊंगा" अनिल ने अपने एक बाज़ू को पिंकी के काँधे पर रखते हुए उसे अपने गले लगाते हुए कहा ।

"दादा जी आप पिंकी को देखकर हमें भूल ही गये" अचानक कोमल ने मुँह बनाते हुए कहा।

"अरे बेटी तुम ऐसा मत कहो। मेरे लिए तुम दोनों एक जैसी हो" अनिल ने अपना दूसरा बाज़ू कोमल के काँधे पर रखकर उसे भी अपने गले से लगाते हुए कहा ।

कोमल ने अपने दादा से चिपकने के बाद अपने मुँह जानबूझकर उनके काँधे के पास रख दिया । अनिल ने जैसे ही कोमल से बात करने के लिए उसकी तरफ देखा वह हकाबका रह गया क्योंकी कोमल की तरफ देखने से उसका चेहरा अनिल के चेहरे से बिलकुल सट गया और दोनों की साँसें एक दुसरे से टकराने लगी ।

"क्या देख रहे हैं दादा जी?" कोमल ने अनिल को अपनी तरफ घूरता हुआ देखकर सवाल किया।

"कुछ नहीं बेटी तुम्हें देखकर एतबार नहीं होता की मेरी छोटी बच्ची जो हमेशा मेरी गोद में आकर बैठती थी वह आज इतनी बड़ी हो गई है" अनिल ने कोमल के सवाल का जवाब देते हुए कहा ।

"दादा जी मैं तो आपकी वही छोटी बच्ची हूँ आप भले मुझे बड़ा समझे" कोमल ने इतना कहा और अनिल के गाल पर एक किस देते हुए उसकी साइड से उठकर उसकी गोद में बैठ गई।

"आह्ह्ह्ह बेटी तुम भी ना" अनिल ने अचानक कोमल को अपनी गोद पर बैठने पर सिसकते हुए कहा क्योंकी कोमल के कोमल चूतड़ सीधा अनिल की धोती के ऊपर से उसके लंड को दबा रहे थे ।

अनिल का लंड जवान गरम मुलायम चूतडो के बीच आते ही अपना फन उठाने की कोशिश करने लगा।

"आहहह दादा जी आपकी गोद में बैठकर मुझे तो बचपन की याद आ गई" कोमल ने महसूस कर लिया की उसके दादा का लंड उसके चूतडों में ज़ोर से उछल रहा है मगर फिर भी उसने वहां से उठने के बजाये अपने चूतडों को जानबूझकर अपने दादा के लंड पर दबाते हुए मजा लेकर कहने लगी ।

अनिल को तो जैसे होश ही नहीं था उसने खवाब में भी नहीं सोचा था की कोमल कभी ऐसे उसके लंड पर आकर बैठेगी।

"कोमल क्या तुम ही नाना की गोद के मज़े लेती रहोगी। उठो मुझे भी नानाजी की गोद में बैठना है" अचानक पिंकी ने कोमल की तरफ देखते हुए कहा ।
 
"पिंकी जल मत थोडी देर मुझे दादा की गोद में बैठने दे" कोमल ने पिंकी की बात सुनकर उसे आँख मारते हुए कहा और अचानक वह अन बैलेंस होकर गिरने का नाटक करने लगी। अनिल ने कोमल को गिरता हुआ देखकर अपने दोनों हाथों को आगे ले जाकर कोमल को पकड लिया, अनिल के दोनों हाथ सीधा कोमल की दोनों चुचियों नीचे आ गयी। जिस वजह से अनिल के हाथों में कोमल की दोनों नरम चुचियां आ गयी।

"आहहह दादा जी आपने मुझे गिरने से बचा लिया" कोमल ने अपने दादा का हाथ अपनी दोनों चुचियों पर पड़ने से सिसकते हुए कहा । अनिल को कुछ समझ में नहीं आ रहा था की क्या करे। अपने हाथ में कोमल की नरम चुचियों के आने से उसका लंड बुहत ज़ोर से फनफनाने लगा था ।

कोमल अब सीधा होकर अनिल की गोद में बैठ चुकी थी। मगर इस बार कोमल को बैठने में बुहत ज्यादा तकलीफ हो रही थी क्योंकी उसके दादा का लंड पूरी तरह से जाग चूका था जो बुहत ज़ोर से उछलते हुए उसके चूतडों के बीच चुभ रहा था।

"बेटी अब बुहत हो गया तुम यहाँ आकर बैठ जाओ" अनिल ने कोमल को समझाते हुए कहा ।

"ठीक है दादा जी जैसे आपकी मर्ज़ी " कोमल ने इतना कहा और अपने पूरे वजन के साथ एक बार अपने दादा के लंड को अपने चूतडों के बीच दबाते हुए वहां से उठ गयी।

"आआह्ह्ह्ह बेटी" कोमल के ज़ोर देने की वजह से अनिल के मुँह से चीख़ निकल गयी ।

"क्या हुआ नाना जी" पिंकी जैसे इसी इंतज़ार में थी। कोमल के उठते ही वह जल्दी से अपने नाना की गोद में बैठ गयी।

"आआह्ह्ह कुछ नहीं बेटी वह मुझे पेशाब आ रही है" पिंकी के बैठने से अनिल ने फिर से सिसकते हुए कहा । पिंकी जैसे ही अपने नाना की गोद में बैठी। अपने चूतडों के बीच इतने मोटे और सख्त चीज़ के चुभने से वह हैंरान होते हुए वहां से उठ गयी ।

"बेटी तुम यहाँ बैठो मैं अभी पेशाब करके आता हूँ" अनिल समझ गया था की पिंकी नादान है। इसीलिए वह उसके लंड के चुभने से वहां से उठ गयी। इसीलिए वह भी जल्दी से वहां से उठकर बाथरूम में घुस गया,

"क्या हुआ दीदी तुम तो जल्दी से दादा की गोद से उठ गयी" कोमल ने अनिल के जाते ही पिंकी की तरफ देखते हुए कहा ।
 
वो दीदी वहां पर बैठते ही मेरे चूतडों में कोई मोटी चीज़ चुभ गयी । इसीलिए मैं जल्दी से उठ गयी थी" पिंकी ने मासूमियत से कहा।

"अरे पगली तुम कब सुधरोगी" कोमल ने पिंकी की बात सुनकर अपने माथे पर हाथ रखते हुए कहा।

"क्यों दीदी क्या हुआ?" पिंकी ने वैसे ही कोमल की तरफ देखते हुए कहा ।

"पगली वह मोटी चीज़ कुछ और नहीं दादा जी का लंड था। जो मेरे जवान चूतडों की गर्मी से खडा हो गया था और असल मजा उसी के चुभने से आता है" कोमल ने पिंकी को समझाते हुए कहा।

"मगर दीदी नाना जी को शर्म नहीं आती की वह अपनी बेटी और बेटे की बेटियों के सामने भी उसे खडा करके बैठे है" पिंकी ने गुस्सा करते हुए कहा ।

"पगली इसमें दादा का कोई दोष नहीं है वह मैंने ही जानबूझकर उनके लंड पर दबाब डालकर उसे उत्तेजित कर दिया था" कोमल ने पिंकी को समझाते हुए कहा।

"दीदी आपको शर्म नहीं आती अपने दादा के साथ ऐसी गन्दी हरकत करते हुये" पिंकी ने कोमल की बात सुनकर उस पर गुस्सा करते हुए बोली।

"दीदी क्या करुं वह सीन देखकर मैं इतनी गरम हो गई हूँ की मैं अब बस अपनी चूत में किसी का भी लंड लेने पीछे नहीं हटूंगी" कोमल ने अपने हाथ से अपनी चूत को सहलाते हुए कहा।

"दीदी कुछ तो शर्म करो। कम से कम नाना के साथ तो यह सब करने की मत सोचो" पिंकी ने कोमल की बात सुनकर हैंरान होते हुए कहा ।

"क्यों पिंकी दीदी । क्या दादा जी मरद नहीं हैं उनका लंड भी उस मूवी वाले लड़के की तरह बुहत बड़ा और मोटा है और उनके साथ यह सब करने से कोई खतरा भी नहीं है क्योंकी घर की बात घर में ही रह जाएगी और किसी को शक भी नहीं होगा" कोमल ने पिंकी की आँखों में देखते हुए कहा ।

"कोमल दीदी मगर हमारी चूत तो बुहत छोटी है" पिंकी ने कोमल की तरफ देखते हुए कहा। उसकी आँखें कोमल की बात सुनकर उत्तेजना से लाल हो चुकी थी।

"दीदी वह सब मैं नहीं जानती अब मुझसे रहा नहीं जाता मुझे बस मजा लेना है" कोमल ने पिंकी की बात का जवाब देते हुए कहा ।

अनिल ने बाथरूम में घुसते ही दरवाज़ा अंदर से बंद कर दिया और अपनी धोती को उतारकर अपने लंड को ज़ोर से हिलाने लगा। कुछ ही देर में उसके लंड से वीर्य की बारिश होने लगी और उसका लंड झरने के बाद ढीला होने लगा, अनिल को झडने के बाद बुहत ज्यादा आनंद आ रहा था क्योंकी इतनी देर से उसका लंड कोमल की हरक़तों से उत्तेजना के मारे उसे बुहत परेशान कर चूका था ।
 
"अनिल ने अपने लंड को साफ़ किया और अपनी धोती को पहनकर बाहर आ गया, कोमल और पिंकी अनिल को आता हुआ देखकर चुप हो गई । अनिल अब चलते हुआ सीधा पिंकी और कोमल के बीच आकर बैठ गया और उन दोनों के साथ बातें करने लगा ।

"नाना जी मुझे बुहत नींद आ रही है। मैं जा रही हुँ" पिंकी ने अचानक वहां से उठते हुए कहा।

"अरे बेटी तुम जा रही हो ठीक है जैसे तुम्हारी मर्जी" अनिल ने अचानक पिंकी को उठता हुआ देखकर हैंरान होते हुए कहा । पिंकी वहां से उठकर चलि गयी अब कोमल और उसके दादा वहां पर बिलकुल अकेले थे ।

"दादा जी अच्छा हुआ पिंकी दीदी यहाँ से चली गई मुझे आपसे एक बात पूछनी है" पिंकी के जाने के बाद कोमल ने अपने दादा की तरफ देखते हुए कहा। ठीक है बेटी पहले मेरी गोद में तो आ जाओ फिर पूछना।कोमल फिर से अपने दादा की गोद में बैठ गई और अनिल कोमल के बदन को सहलाते हुए बोला।

"हाँ बेटी पूछो क्या बात है" अनिल ने कोमल की बात सुनकर उस की तरफ देखते हुए कहा ।

अनिल का लंड कोमल की बात सुनकर अपने आप उठने लगा था क्योंकी वह जानता था की कोमल उससे ज़रूर कोई ऐसी बात करेगी जो उसे नहीं करनी चाहिये,

"दादा जो वह मुझे यह पूछ्ना था की जब मैं आपकी गोद में बैठी तो मुझे कोई चीज़ चूभ रही थी वह क्या थी" कोमल ने अपने दादा की तरफ देखते हुए कहा ।

"बेटी मुझे माफ़ कर दो मगर तुम्हारे जवान चूतडों की गर्मी से मेरा उठ गया" अनिल ने कोमल की बात सुनकर शरमिंदा होते हुए कहा।

"उठ गया था मगर क्या दादाजी" कोमल ने अनिल की बात सुनकर अन्जान बनने का नाटक करते हुए कहा।

"बेटी क्या सच में तुम्हें पता नहीं था की वह क्या है?" अनिल ने हैंरान होते हुए कहा ।

"नही दादाजी सच्ची में मुझे पता नहीं था की वह क्या है मगर जब वह मुझे वहां चूभ रहा था तो मुझे अजीब किस्म का मजा आ रहा था" कोमल ने अपने दादा को बताते हुए कहा।

"बेटी मैं तुम्हें सब कुछ बता दूंगा मगर तुम्हें वादा करना होगा की तुम यह बात किसी को नहीं बताओगी" अनिल ने कोमल की बात सुनकर उसकी तरफ देखते हुए कहा ।

"ठीक है दादा जी में किसी को कुछ नहीं बताउँगी" कोमल ने अपने दादा से वादा करते हुए कहा।

"तुम बुहत अच्छी लड़की हो बेटी जो चीज़ तुम्हें चूभ रही थी । वह मेरा लंड था जो हर मरद के पास होता है और वह शादी के बाद उसे औरत की चूत में घुसाकर उसे चोदता है । जब मरद का वीर्य निकलकर औरत की चूत को भरता है तभी मरद को सुकून और मजा मिलता है और उसी वीर्य से औरत बच्चे की माँ बनती है" अनिल ने कोमल को एक ही साँस में सारी बात बताते हुए कहा ।
 
"दादाजी वह सब तो ठीक है मगर आपका तो बुहत मोटा लग रहा था और एक दफ़ा मैंने जब अपनी चूत में एक ऊँगली घुसाने की कोशिश की थी तो मुझे बुहत दर्द हुआ था। फिर यह औरतें इतने मोटे और लम्बे लंड को कैसे अपनी चूत में ले लेती है?" कोमल ने अपना कन्धा झुकाकर अनिल से कहा ।

"बेटी तुम सही कह रही हो भगवान ने औरत की चूत को बनाया ही ऐसा है की पहली बार में उसमें एक ऊँगली भी बड़ी मुश्किल से जाती है और जब एक दफ़ा इसकी झील्ली फट जाए तो फिर इसमें कितना भी मोटा या लम्बा लंड हो वह भी बगैर किसी तकलीफ के घुस जाता है" अनिल ने कोमल को देखते हुए कहा ।

अनिल का लंड कोमल से ऐसी बाते करते हुए फिर से उठ चूका था । इधर कोमल का भी बुरा हाल था उसकी चूत से भी उत्तेजना के मारे पानी टपक रही थी।

"दादा जी मैंने आज तक इसे नहीं देखा क्या मैं आपका देख सकती हुँ" कोमल ने अपनी ऊँगली के इशारे से अनिल की धोती में बने टेंट की तरफ इशारा करते हुए कहा ।

"बेटी क्या मैं तुम्हारी बात को टाल सकता हूँ मगर तुम किसी को भी इस बारे में मत बताना और बदले में तुम्हे भी अपनी कुँवारी चूत और अनछुई चूचियाँ दिखानी पड़ेगी" अनिल कोमल की बात सुनकर खुश होते हुए बोला।

"दादू मैं पागल थोडी हूँ जो ऐसी बातें बाहर करूँगी ।

ठीक है दादु मैं दिखा दूँगी लेकिन मेरी चूत में आप लन्ड नहीं घुसायेगें प्रोमिस कीजिये" कोमल ने अनिल की बात सुनकर कहा ।

"ठीक है बेटी प्रॉमिस । तुम जाकर दरवाज़ा बंद कर लो ताकी अगर कोई आ जाये तो हमें न देख सके" अनिल ने कोमल की तरफ देखते हुए कहा । कोमल ने अपने दादा की बात सुनकर सोफ़े से उठकर दरवाज़ा बंद कर लिया।

"बेटी आओ यहाँ आकर बैठ जाओ" अनिल ने कोमल को बाज़ू से पकडकर अपने साथ सोफ़े पर बिठा दिया ।

कोमल की साँसें बुहत ज़ोर से चल रही थी उसने इससे पहले कभी भी मोबाइल के अलावा किसी का भी लंड नहीं देखा था।

"बेटी देख लो अब इसे लंड कहते हैं जो औरत को दुनिया का सब से बड़ा सुख देता है" अनिल ने अपनी धोती को आगे से खोलकर अपने तने हुए लंड को हाथ में पकडकर कोमल को दिखाते हुए कहा ।
 
"दादा जी यह तो सच में बुहत लम्बा और मोटा है" कोमल की आँखें अपने दादा के तने हुए लंड को देखकर फटी की फटी रह गयी और वह अपना मुँह फाड़कर अनिल के लंड को देखते हुए बोली।

"बेटी लंड जितना लम्बा और मोटा होता है औरत को उतना ही ज्यादा सुख और मजा देता है" अनिल ने अपने लंड के सुपाडे से चमड़ी को हटाकर उसका गुलाबी सुपाडा कोमल को दिखाते हुए कहा ।

"दादा जी इसका सुपाडा तो बुहत गुलाबी है" कोमल का पूरा शरीर अपने दादा के लंड को देखकर गरम हो चुका था।

"बेटी तुम शर्माओ मत इसे भले छु कर देख लो" अनिल ने अचानक कोमल के हाथ को पकडकर अपने खडे लंड पर रखते हुए कहा ।

"नही दादू आअह्ह्ह आपका तो बुहत गरम और सख्त है" कोमल ने पहले तो अपने हाथ को वहां पर रखने से इन्कार करते हुए कहा मगर जैसे ही उसका हाथ वहां पर पडा उसके पूरे जिस्म में सिहरन का एक तूफ़ानी दौर शुरू हो गया और उसका हाथ अपने आप अनिल के लंड पर रुक गया ।

"बेटी तुमने कभी पहले किसी का लंड देखा है?" अनिल ने अपने हाथ को कोमल के हाथ पर रखे हुए ही अपने लंड पर ऊपर नीचे करते हुए कहा।

"आह्ह्ह्ह नहीं दादू मैंने आज तक किसी का भी लंड नहीं देखा" कोमल ने सिसकते हुए कहा । कोमल को अपनी चूत में बुहत ज़ोर से सिहरन हो रही थी। उसका दिल कर रहा था की अभी हाथ से वह अपनी चूत को ज़ोर से रगड़ दे मगर अपने दादू के सामने वह ऐसा नहीं कर सकती थी ।

"बेटी कभी तुमने अपनी चूत से पानी निकाला है?" अनिल ने अपना हाथ कोमल के हाथ से हटाकर उसकी जाँघ पर रखते हुए कहा।

"ओहहहह हाँ दादू मैंने तीन चार बार अपनी चूत से पानी निकाला है" कोमल ने अपने दादा का हाथ अपनी जाँघ पर पडते ही उनके लंड को ज़ोर से दबाते हुए सिसककर कहा ।

"बेटी क्या कभी किसी लड़के से तुमने किस किया है या किसी लड़के ने कभी तुम्हारे जिस्म को कहीं छुआ है?" अनिल ने अपने हाथ को कोमल को जांघों पर रगडते हुए उसकी चूत की तरफ ले जाते हुए कहा।

"आह्ह्ह्ह नहीं दादू मेरे जिस्म को आज तक किसी ने नहीं छुआ है" अनिल का हाथ अपनी चूत की तरफ बढ़ने से कोमल ने सिसकते हुए कहा ।
 
Back
Top