विजय ने अपने लंड को थोडा बाहर खींचकर एक करारा धक्का मार दिया । इस बार विजय का पूरा लंड रेखा की चूत में सरकता हुआ अंदर घुस गया।
"आह्ह्ह्ह बेटा कितना तगड़ा लंड है तेरा" रेखा ने इस बार भी ज़ोर से सिसकते हुए कहा ।
मुकेश आँखें फाड़े हुए अपने पत्नी को अपने बेटे से चुदवाते हुए देख रहा था । उसे अब भी यकीन नहीं आ रहा था की उसकी पत्नी की चूत में उसके बेटे का इतना बड़ा लंड घुस गया है और वह उत्तेजना में आकर अपने लंड को अपने अंडरवियर के ऊपर से सहला रहा था । विजय अब अपनी माँ की चूत में अपने लंड को बुहत ज़ोर से अंदर बाहर करने लगा ।
रेखा भी अपने चूतडो को उठाकर उठाकर अपने बेटे के लंड को अपनी चूत में ले रही थी और बुहत ज़ोर से सिसक भी रही थी । मुकेश अपनी पत्नी के क़रीब आ गया और विजय के हर धक्के के साथ अपनी पत्नी की हिलती हुयी बड़ी बड़ी चुचियों को अपने हाथों से सहलाने लगा।
"आह्ह्ह्ह डार्लिंग देखो तुम्हारा बेटा कितना बड़ा हो गया है वह अपनी माँ को की खुश कर रहा है" रेखा ने मुकेश को अपने क़रीब देखते ही ज़ोर से सिसकते हुए कहा ।
"डालिंग मैं भी अपने बेटे को ही देख रहा हूँ और मुझे अपने आप पर गर्व हो रहा है की मेरा बेटा कितना बड़ा और ताक़तवर हो गया है की वह अपने सारे घर की इज्ज़त को खुद ही सँभाल रहा है" मुकेश ने अपनी बीवी की चुचियों को ज़ोर से मीसते हुए कहा और अपनी पत्नी की चूत की तरफ देखने लगा जहाँ विजय का लंड बुहत तेज़ी के साथ अंदर बाहर हो रहा था ।
"आह्ह्ह्ह बेटे ज़ोर से मैं झरने वाली हूँ" अचानक रेखा ने ज़ोर से चीखते हुए कहा । विजय अपनी माँ की बात सुनकर उसकी चूत में तूफ़ान की तेज़ी के साथ अपना लंड अंदर बाहर करने लगा और रेखा भी बुहत ज़ोर से अपने चूतड़ों को उछाल उछालकर अपने बेटे से चुदवाने लगी ।
"ओहहहहह बेटे मैं आई शहहहः" रेखा का बदन अचानक अकडने लगा और उसकी चूत झटके खाते हुए पानी छोडने लगी। झडते हुए रेखा ने ज़ोर से सिसकते हुए अपनी आँखों को बंद कर दिया । विजय अपनी माँ की चूत में वैसे ही तेज़ी के साथ धक्के मारते रहा, रेखा की चूत के झड जाने के सबब अब विजय का लंड जैसे ही उसकी माँ की चूत में अंदर बाहर होता फच फच की आवाज़ें गूँजने लगती ।
"डालिंग तुम नहीं जानते तुम्हारे बेटे से चुदवाते हुए मुझे कितना ज्यादा मजा आता है" रेखा ने भी झडने के बाद अपनी आँखें खोल दी और अपने पति को हाथों से पकडकर अपने ऊपर गिरा दिया । रेखा अपने पति के होंठो को चूमने लगी और मुकेश भी अपनी पत्नी को चूमने लगा ।
विजय के लंड से अभी तक पानी नहीं निकला था इसीलिए वह बिना रुके अपनी माँ को चोदे जा रहा था ।कंचन की हालत भी बुहत ख़राब हो चुकी थी। वह अपनी माँ को अपने भाई से चुदता हुआ देखकर अपनी पेंटी के ऊपर से अपनी चूत को सहला रही थी, कंचन अचानक उठते हुए अपने भाई के पीछे आ गयी और विजय को पीछे से पकडकर उसकी पीठ पर अपनी चुचियों को मसलने लगी ।
विजय का लंड पहले से ही पत्थर जैसे सख्त होकर उसकी माँ की चूत में अंदर बाहर हो रहा था । ऊपर से अपनी बहन की इस हरकत से उसका लंड और ज्यादा मोटा होकर रेखा की चूत में झटके खाते हुए अंदर बाहर होने लगा।
"आजहहह बेटे अचानक क्या हो गया तुम्हें उइइइइ तुम्हारा इतना मोटा कैसे हो गया" रेखा को भी अब अचानक महसूस हुआ की विजय का लंड बुहत ज्यादा फूल गया है जिस वजह से उसने अपने पति के होंठो को छोडते हुए ज़ोर से चिल्लाते हुए कहा ।
विजय अपनी माँ को बिना कोई जवाब दिए उसकी चूत में अपना लंड बुहत तेज़ी और ताक़त के साथ अंदर बाहर करने लगा । रेखा भी कुछ ही देर में फिर से गरम होकर सिसकने लगी और वह अपने बेटे के हर धक्के का जवाब अपने चूतडों को उछालकर देने लगी।
"आह्ह्ह्ह माँ मैं झडने वाला हूँ" विजय ने अचानक सिसकते हुए कहा ।
"ओहहहहह बेटे अपनी माँ की चूत में ही झडना" रेखा ने अपने चूतडों को ज़ोर से उछालते हुए कहा।
"आआह्ह्ह्ह ले महसूस कर अपने बेटे के वीर्य को ओह्ह्ह्हह" विजय कुछ ही धक्के मारने के बाद ज़ोर से अपना लंड रेखा की चूत में पूरा घुसाकर ज़ोर से सिसकने लगा।
"वह बेटे तुम्हारा वीर्य तो सीधा मेरी बच्चेदानी में गिर रहा है कितना गरम है।आह मैं भी आ रही हू" रेखा अपने बेटे के लंड से निकलता हुआ गरम वीर्य अपनी चूत के इतने अंदर महसूस करके खुद को न रोका सकी और अपनी आँखें बंद करते हुए झडने लगी ।
विजय अपनी माँ को दूसरी बार झडता हुआ देखकर अपना लंड उसकी चूत में फिर से तेज़ी के साथ अंदर बाहर करने लगा और पूरी तरह झडने के बाद वहीँ पर अपनी माँ के ऊपर ढेर हो गया । विजय का लंड अब सिकूड़कर उसकी माँ की चूत से निकल चूका था और रेखा की चूत से उसका और विजय का मिला जुला वीर्य निकलकर बेड पर गिरने लगा ।
रेखा ने कुछ देर तक यों ही पडे रहने के अपने बेटे को अपने ऊपर से हटाते हुए साइड में कर दिया और खुद उठकर बाथरूम में चलि गयी । विजय बेड पर लेटे हुए अपनी बहन और पिता को देखने लगा, कंचन ने मुकेश के अंडरवियर को उतार दिया था और खुद नीचे झुककर अपने बाप के लंड को चूम रही थी ।
मुकेश का लंड अपनी बेटी के होंठो के छूते ही ज़ोर के झटके खाने लगा जिसे कंचन ने अपने हाथ से पकड लिया और अपनी जीभ निकालकर बड़े प्यार से उसके सुपाडे पर फिराने लगी।
"ओहहहह बेटी" कंचन की जीभ अपने लंड के सुपाडे पर पडते ही मुकेश सिसक उठा और उसके लंड से प्रिकम की बूँदे निकलने लगी जिसे कंचन ने अपनी जीभ से चाट लिया ।
"आहहह बेटी बस अब बर्दाशत नहीं होता" मुकेश ने यह कहते हुए अपनी बेटी के सर को पकड़कर उसे सीधा बेड पर लिटा दिया और खुद उसके ऊपर चढ़ गया ।मुकेश अपनी बेटी के सारे चेहरे को चूमते हुए उसकी चुचियों तक आ गया, मुकेश अपनी बेटी के ब्रा को उसकी चुचियों से हटाते हुए उन्हें बारी बारी अपने मुँह में लेकर चूसने और चाटने लगा ।
"आहहह पिता जी आज क्या मेरी चुचियों को चूसते रहोगे" कंचन ने ज़ोर से सिसककर अपने चूतडों को उछालते हुए कहा।
"नही बेटी आज तो मैं तुम्हारे सारे जिस्म को चूम चाटकर मजा लूँगा" मुकेश ने कंचन की तड़प को देखकर उसकी चूचि को अपने मुँह से निकालते हुए कहा ।
"तो चाटिये ना" कंचन ने अपने पिता को सर से पकड़कर अपनी चूत के पास दबाते हुए कहा । मुकेश समझ गया की कंचन बुहत ज्यादा गरम हो चुकी है इसीलिए उसने अपने हाथों से कंचन की पेंटी को उसके जिस्म से अलग कर दिया और खुद उसकी टांगों के बीच बैठकर अपनी बेटी की कमसीन गुलाबी चूत को निहारने लगा ।
मुकेश ने कुछ देर तक अपनी बेटी की चूत को गौर से देखने के बाद अपने होंठो को अपनी बेटी की चूत के छोटे लबों पर रख दिया।
"ईसस्स्स्शह्ह्ह्ह पिता जी" अपने पिता के होंठो को अपनी चूत पर महसूस करते ही कंचन का सारा जिस्म मज़े से कांप उठा । मुकेश अपनी बेटी की चूत के छोटे लबों को अपने होंठो से चूमने के बाद अपनी जीभ निकालकर उनके बीच डालकर अंदर बाहर करने लगा।
"आह्ह्ह्हह पिताजी" अपने पिता की जीभ के लगते ही कंचन बुहत ज़ोर से सिसकते हुए अपने चूतडों को उछालकर अपने पिता के मुँह पर अपनी चूत दबाने लगी । मुकेश को भी अपनी बेटी की चूत से उत्तेजना के मारे निकलना वाला पानी बुहत ज्यादा मज़ा देने लगा। इसीलिए वह अपनी बेटी की चूत को बुहत ज़ोर से अपनी जीभ से चोदने लगा ।
विजय का लंड अपने पिता और कंचन को देखकर फिर से खड़ा होने लगा । वह उन्हें बड़े गौर से देख रहा था । कंचन की हालत बुहत खराब हो चुकी थी । वह इतनी देर से अपनी माँ और भाई का खेल देखकर बुहत गरम हो चुकी थी और अब वह झरने के बिलकुल क़रीब थी उसका पूरा जिस्म अकडकर झटके खा रहा था ।
मुकेश भी कंचन की हालत देखकर यह समझ गया की वह झडने वाली है इसीलिए उसने अपना पूरा मुँह खोलकर कंचन की चूत को अपने मुँह में भर लिया । और उसे बुरी तरह चाटने लगा।
"उईई पिताजी इसशहहहह मैं आई आह्ह्ह्हह" कंचन अपने बाप की यह हरकत सह न पाई और वह बुहत ज़ोर से चिल्लाते हुए झडने लगी । कंचन ने झडते हुए अपनी आँखें बंद कर ली और अपने पिता के सर को पकडकर अपनी चूत पर दबा दिया ।
कंचन जब तक पूरी तरह झडकर शांत नहीं हुयी तब तक उसका बाप उसकी चूत को अपने मुँह में भरे हुए उसका वीर्य चाटता रहा । कंचन के पूरी तरह झडने के बाद मुकेश ने अपना मूह अपनी बेटी की चूत से हटाया और उसकी टांगों को उठाकर उसके पेट पर रख दिया ।
कंचन ने अपनी आँखें खोल दी थी और वह नशीली आँखों से अपने पिता को देख रही थी।
"बेटी पेल दूं अंदर" मुकेश ने अपने खडे लंड को अपनी बेटी की चूत के छेद पर रखकर उसकी तरफ देखते हुए कहा।
"हाहहह पिताजी आपने तो मुझे पागल कर दिया है पेल दो अपना लंड अपनी बेटी की चूत में और अपनी बेटी की सारी खुजली मिटा दो" कंचन ने गरम होते हुए कहा।
"ओहहहह बेटी लो अपने पिता के लंड को अपनी चूत में महसूस करो" मुकेश ने कंचन की चूत में अपना लंड एक ही झटके में पूरा घुसाते हुए कहा और कंचन की चूत को बुहत ज़ोर से चोदने लगा और अपनी बेटी के गोरे गोरे गालो को काटने लगा।
रेखा बाथरूम से निकलकर वापस बेड पर आ गयी थी। वह अपनी बेटी को यो अपने पिता से अपने चूतडों को उछाल उछालकर चुदवाता हुआ देखकर हैंरान रह गयी, कंचन अपने पिता से चुदवाते हुए बुहत ज़ोर से सिसक रही थी और अपने पिता के हर धक्के का जवाब अपने चूतडों को उछालकर दे रही थी ।
आह्ह्ह्ह बेटी कितनी गरम और टाइट चूत है तुम्हारी ओह्ह्ह्हह" मुकेश भी सिसकता हुआ बुहत ज़ोर से अपनी बेटी को चोद रहा था । विजय का लंड अब पूरी तरह से तन चूका था उसने अपनी माँ को पकडकर उलटा कर दिया और खुद उसके पीछे आकर अपने लंड को उसकी चूत के छेद में रखकर धक्का मार दिया।
"उई हारामखोर आराम से नहीं डाल सकता क्या। आज मेरी चूत फाड ही डालोगे" रेखा ने एक ही झटके में अपने बेटे का मुसल लंड पीछे से अपनी चूत में पूरा घूसने से ज़ोर से चिल्लाते हुए कहा ।
"साली रंडी चिल्ला तो ऐसे रही है जैसे हम तुम्हारी चूत से नहीं गांड से निकले हैं। तीन बच्चों की माँ होकर भी लंड घूसने से चिल्लाती है" विजय ने अपनी माँ की बात सुनकर गुस्से से उसकी गांड पर थप्पड मारते हुए कहा।
"ओहहहह साले मादरचोद अपना लंड देखा है किसी मरद का लंड हो तो झेल लूँ। मगर यहाँ तो गधे के लंड से चुदवाना पड़ता है" रेखा ने भी अपने बेटे की गाली का जवाब उसी अन्दाज़ में देते हुए कहा ।
मुकेश अपनी पत्नी और बेटे की बाते सुनकर हैंरान रह गया।
"आप को क्या हुआ पिताजी आप भी तो बहनचोद और बेटीचोद बन चुके हो फिर इनकी गाली सुनकर क्यों रुक गए । छोड़ो इन्हें और अपनी बेटी की जवान चूत का मजा लो" कंचन ने अपने पिता के रुक जाने से उसे जोश दिलाते हुए कहा ।
"ओहहहह बेटी मेरी जान तुम भी तो अपने भाइयों से चुदवाने के बाद मुझसे भी चुदवा रही हो फिर तुम क्या हुई" मुकेश ने अपनी बेटी की बात सुनकर उसकी चूत में ज़ोर के धक्के मारते हुए कहा।
"हाहहहहह भाईचोद और बापचोद हूँ मैं अपने पिता और भाई का लंड मेरी चूत में घुसते ही इतना मजा आता है की मैं बयान नहीं कर सकती" कंचन ने सिसकते हुए कहा ।
विजय भी अपनी माँ को दूसरी बार जम कर चोदने लगा । वह बुहत तेज़ी के साथ अपनी माँ की चूत में अपना लंड अंदर बाहर कर रहा था । इधर मुकेश इतनी देर से अपनी बेटी को चोदते हुए थक चूका था और वह झडने के बिलकुल क़रीब था इसीलिए वह कंचन को चोदते हुए बुरी तरह से हांफ रहा था।
"क्या हुआ पिताजी थक गए क्या इतनी जल्दी" कंचन ने अपने पिता को हाँफता हुआ देखकर अपने चूतडों को ज़ोर से उछालते हुए कहा ।
"हाँ बेटी मैं झडने वाला हूँ" मुकेश ने अपनी बेटी को ज़ोर से पेलते हुए कहा।
"आआह्ह्ह पिता जी बस 2 मिनट मैं भी झरने के क़रीब हूँ" कंचन ने अपनी टांगों को अपने पिता की कमर में फँसाकर अपने चूतडों को ज़ोर से उछालते हुए बोली।
"आह्ह्ह्ह बेटी ओह्ह्ह्हह मैं गया" कुछ ही धक्को के बाद मुकेश ने ज़ोर से हाँफते हुए अपनी बेटी की चूत में अपना वीर्य भरना शुरू कर दिया ।
"ओह्ह्ह्ह्ह पिताजी आअह्ह्ह्ह कितना गरम है ओह्ह्ह्हह मैं भी आईईई" कंचन भी अपनी टांगों को अपने पिता की कमर पर कसकर ज़ोर से चिल्लाते हुए झडने लगी । कंचन ने झडते हुए अपनी आँखों को बंद कर लिया, मुकेश जब तक कंचन की चूत में पानी निकालता रहा वह भी उसकी चूत में अपना लंड लंड अंदर बाहर करते हुए झडता रहा और दोनों बाप बेटी पूरी तरह से झडने के बाद एक दुसरे की बाहों में निढाल होकर हाँफने लगे ।
रेखा भी अपने बेटे से चुदवाते हुए एक दफ़ा झड चुकी थी और अब वह सीधा होकर विजय से चुदवा रही थी 10 मिनट की चुदाई के बाद विजय का बदन अकडने लगा और वह अपनी माँ की टांगों को पकड़कर उसकी चूत में बुहत भयानक धक्के मारने लगा।
"हाय्य्य्य्य बेटे ओह्ह्ह्हह क्या हुआ अचानक" रेखा ने अचानक विजय के लंड को ज्यादा फूलकर अपनी चूत में ज़ोर के धक्के मारते हुए पाकर चिल्लाते हुए कहा।
"आआह्ह्ह्ह माँ मैं झरने वाला हुँ" विजय ने वैसे ही तेज़ धक्कों के साथ अपनी माँ को चोदते हुए कहा।
"ओहहहह बेटे झडते वक्त तो तुम्हारा लंड और ज्यादा मोटा और टाइट हो जाता है आह्ह्ह्हह" रेखा ने भी अपने बेटे के धक्को का जवाब अपने चूतडों को उछालकर देते हुए कहा ।
"ओहहहहह माँ मैं आया" विजय ने अचानक ज़ोर से चिल्लाते हुए कहा और बुहत तेज़ अपनी माँ की चूत में तेज़ धक्के मारते हुए झडने लगा।
"आहहह बेटे आईई मैं भी आई । तुम्हारा वीर्य तो मेरी बच्चेदानी में गिर रहा है ओह्ह्ह्हह्ह" रेखा भी अपने बेटे के लंड से निकालते हुए वीर्य को अपनी चूत की गहराईयों में महसूस करके ज़ोर से चिल्लाकर झडते हुए कहा ।
विजय कुछ देर तक अपनी माँ की चूत को अपने वीर्य से भरने के बाद उससे अलग होकर साइड में लेट गया । रेखा की चूत से विजय का लंड निकलते ही दोनों का मिला जुला वीर्य निकलकर बेड पर गिरने लगा, सभी लोग कुछ देर तक वैसे ही शांत पडे रहे और कुछ देर बाद विजय और कंचन बाथरूम से फ्रेश हुए और अपने अपने कमरों में जाने लगे ।
नरेश अपनी बहन को चोदने के बाद जब अपने कमरे में पुहंचा तो वहां पर विजय और कंचन को न पाकर वह समझ गया की ज़रूर उसके साथ आज दगाबाजी हो गई है और रेखा उन दोनों को अपने कमरे में ले गयी है। नरेश गुस्से से रेखा को गाली देते हुए अपने कमरे में बेड पर लेट गया मगर उसे नींद नहीं आ रही थी वह करवटे लेते हुए विजय के आने का इंतज़ार करने लगा ।
"डालिंग कैसा लगा मज़ा आया की नही" सब के जाते ही रेखा ने वैसे ही नंगी अपने पति के पास जाकर उसे गले लगाते हुए कहा।
"ओहहहह डार्लिंग मैं लफ़्ज़ों में बयान नहीं कर सकता की मुझे कितना मज़ा आया और तुम्हें अपने बेटे के बड़े लंड से चुदवाते हुए देखकर तो कुछ ज्यादा ही मज़ा आया" मुकेश ने रेखा को अपनी बाहों में भरते हुए कहा।।
दोनों पति पत्नी वैसे ही नंगे एक दुसरे की बाहों में बातें करते हुए नींद की आग़ोश में चले गए । मनीषा मौका देखते ही अपने बापू के कमरे में आ गयी और दरवाज़ा अंदर से बंद कर दिया।
"बेटी तुम आ गयी तबीयत कैसी है?" अनिल ने मनीषा के अंदर दाखिल होते ही उसे देखते हुए कहा ।
"बापु जी तबीयत को ठीक करने ही तो यहाँ आई हूँ" मनीषा ने अपनी नाइटी को उतारकर नीचे फेंकते हुए कहा । नाइटी के उतरते ही मनीषा का गोरा जिस्म बल्ब की रोशिनी में चमकने लगा।
"ओहहहह बेटी आओ आज मैं तुम्हारी तबीयत को अच्छे तरीके से ठीक कर देता हूँ" मनीषा की बात सुनकर अनिल ने बेड से उठकर अपनी धोती को उतारकर दूर फेंकते हुए कहा ।
अनिल की धोती के हटते ही उसका मुसल लंड ज़ोर के झटके खाता हुआ मनीषा को सलामी देने लगा।
"बापु जी" मनीषा अपने पिता के खडे लंड को देखकर भागते हुए जाकर उससे लिपट गयी और दोनों बाप बेटी एक दुसरे को ज़ोर से अपनी बाहों में भरते हुए एक दुसरे के सारे चेहरे को चूमने और चाटने लगे ।
अनिल और मनीषा दोनों के जिस्म आग की तरह गरम हो गये थे । अनिल ने मनीषा को अपनी बाहों में उठाकर बेड पर लिटा दिया और उसको चेहरे से लेकर पाँव तक चूमने और चाटने लगा, अनिल ने अपनी बेटी को चूमते हुए उसके सारे कपडे उतार दिये और फिर दोनों के बीच होने वाले सेक्स का खेल फिर से शुरू हो गया ।
अनिल ने आज अपनी बेटी को दो बार जम कर चोदा। उस चुदाई में मनीषा 4 बार झडी और अब दोनों बाप बेटी एक दुसरे की बाहों में पड़े हुए हांफ रहे थे।
"वाहहहह पिता जी आज तो आपने मेरी जान ही निकाल दी" मनीषा ने अपने पिता के सीने में अपनी चुचियों को दबाते हुए कहा।
"हाहहह बेटी। मेरी जान तो तुम हो मैं तुम्हारी जान कैसे ले सकता हूँ" अनिल ने मनीषा को देखते हुए कहा और उसके होंठो को चूम लिया ।
मानिषा कुछ देर तक अपने पिता से बातें करने के बाद उनके कमरे से निकलकर अपने कमरे में आ गयी । विजय अपने कमरे में जाकर दरवाज़ा अंदर से बंद कर लिया उसने देखा नरेश बेड पर लेटा हुआ है।
"साले आ गया कहाँ गए थे और मामी कहाँ है आज। उसने अपनी गांड देने का वादा किया था" नरेश ने विजय को देखते ही बेड से उठकर सीधा होते हुए कहा।।
"साले मजा । आज कुछ नहीं मिलेंगा" विजय ने नरेश को देखते हुए कहा।
"क्या मतलब है तुम्हारा?" नरेश ने विजय को गुस्से से देखते हुए कहा । विजय नरेश को गुस्से में देखकर उसके साथ जाकर बेड पर बैठ गया और सारी बात उसे बता दिया।
"साले तू कंचन को अकेले वहां भेज देते और हम दोनों मामी का मजा लेते" नरेश ने विजय को देखते हुए कहा।
"मेरे हाथ में कुछ थोडे ही था । तुम चिंता मत करो कल माँ की गांड को भी देख लेंगे" विजय ने नरेश को तसल्ली देते हुए कहा ।
विजय बेड से उठकर बाथरूम में नहाने के लिए घुस गया और इधर नरेश बड़बड़ाते हुए बेड पर लेट गया । कंचन ने भी अपने कमरे में आते ही दरवाज़ा अंदर से बंद कर लिया और खुद अपनी नाइटी को वहीँ छोडकर बाथरूम में नहाने के लिए घुस गई, कंचन नहाने के बाद बाहर निकलकर बेड पर जाकर लेट गयी ।
कंचन को यह देखकर जान में जान आई की शीला सो चुकी थी और वह बगैर किसी सवाल का जवाब दिए आराम से सो सकती थी । कंचन बुहत थक चुकी थी इसीलिए बेड पर लेटते ही वह नींद के आग़ोश में चली गयी ।