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परिवार(दि फैमिली) complete

बेटी, बेटी नीलम" अचानक महेश को एक आईडिया सूझा और वह नीलम को झंझोडते हुए पुकारकर उठाने लगा । नीलम को अपने ससुर के झझोडने और पुकारने का कोई असर नहीं हुआ और वह वैसे ही बेसुध बेहोश पड़ी रही, अब महेश को पूरा यकीन होगया की उसकी बहु ऐसे नहीं उठेगी उसे जितना मजा लेना है ले सकता है ।

महेश सिर्फ एक धोती में था उसने अपनी धोती को उतारकर नीचे फ़ेंक दिया और खुद बिलकुल नंगा ही अपना लंड अपने हाथ से सहलाते हुए बेड पर बैठ गया।महेश ने अपनी बहु की नाइटी को आगे से बिलकुल खोल दिया और उसका हाथ पकडकर अपने मुसल लंड पर रख दिया। अपनी बहु का नरम हाथ अपने लंड पर महसूस करते ही महेश का पूरा बदन कांप उठा और उसका लंड और ज्यादा तनकर झटके खाने लगा ।

महेश ने अपने लंड को नीलम की हथेली में फँसाया और अपने हाथ से उसके हाथ को पकडकर सहलाने लगा । महेश को अब अपने लंड पर सिर्फ अपनी बहु के नरम हाथ का अहसास हो रहा था उसे यह महसूस हो रहा था जैसे उसके लंड को उसकी बहु सहला रही है। महेश अपने एक हाथ से ऐसे ही अपनी बहु के हाथ को अपने लंड पर ऊपर नीचे करते हुए अपने दुसरे हाथ से अपनी बहु की ब्रा को उसकी गोल गोल चुचियों से हटाने लगा ।

ब्रा बुहत ही टाइट थी इसलिए वह नीचे नहीं हो रही थी महेश ने अपने हाथ को थोडा ज़ोर देकर अपनी बहु की ब्रा को नीचे सरका दिया । महेश अपनी बहु की चुचियों को देखकर लार टपकाने लगा, नीलम की चूचियाँ बुहत ज्यादा सूंदर थी। उसकी चुचियां गोल गोल दूध की तरह सफेद थी और उसके ऊपर गुलाबी दाने उसकी चुचियों को ज्यादा आकर्षक बना रहे थे ।

"आह्ह्ह्ह कितनी नरम हैं आह" महेश ने जैसे ही अपना हाथ अपनी बहु की एक चूचि पर रखा उसके मूह से निकल गया । महेश अपने हाथ से अपनी बहु की दोनों चुचियों को बारी बारी अपने हाथ से सहलाने और दबाने लगा, महेश को ऐसा करते हुए बुहत ज्यादा मजा आ रहा था। उसका दूसरा हाथ अब उसकी बहु के हाथ को अपने लंड पर बुहत तेज़ी के साथ ऊपर नीचे कर रहा था ।
 
महेश के मन में आया की क्यों न वह एक बार अपनी बहु की चुचियों को अपने होंठो से चूम कर देखे । यह ख़याल आते ही महेश का पूरा शरीर अगले पल आने वाले मज़े के अहसास को महसूस करके सिहर उठा। महेअः ने अपनी बहु के हाथ को छोड दिया और खुद नीचे झुककर अपना मूह अपनी बहु की चुचियों की तरफ करने लगा ।

महेश के होंठ जैसे ही उसकी बहु की चुचियों के बिलकुल नज़दीक पुहंचे उसने अपने एक हाथ से अपनी बहु की एक चूचि को पकडा और अपना मुँह खोलते हुए उसकी चूचि के गुलाबी दाने को अपने मुँह में ले लिया । महेश अपनी बहु की चूचि के दाने को किसी बच्चे की तरह चूसने लगा, वह नीलम की चूचि को ऐसे चूस रहा था जैसे कोई बच्चा अपनी माँ का दूध पीता है और महेश अपनी बहु की चूचि को चूसते हुए ऐसे रियेक्ट कर रहा था जैसे वह सच में नीलम की चुचियों का दूध पी रहा हो ।

महेष ने बारी बारी अपनी बहु की दोनों चुचियों को अपने मूह लेकर चूसा और उसके बाद वह अपनी बहु के गोर चिकने पेट को चूमते हुए नीचे होता हुआ उसकी चूत की तरफ बढ़ने लगा । महेश ने अब अपने होठो को अपनी बहु की पेंटी के ऊपर रख दिया और उसकी चूत को पेंटी के ऊपर से चूमने लगा, नीलम के बेहोश होने के बावजूद उसकी चूत पानी छोड रही थी जिससे महेश ने उसकी पेंटी को चूमते हुए महसूस किया।

महेश ने अब अपने और अपनी बहु के बीच पड़ा हुआ आखरी पर्दा भी हटाने का फैसला किया और उसने अपनी बहु की पेंटी को अपने दोनों हाथों से पकडकर नीचे सरका दिया।

"ए भगवान् क्या चूत बनाई है" महेश अपनी बहु की गुलाबी चूत को देखकर अपने होंठो पर जीभ फेरते हुए बोला। महेश ने आज तक अपनी बहु की चूत से ज्यादा सूंदर चूत कभी नहीं देखी थी, अपनी बहु की चूत को देखकर महेश का पूरा जिस्म एक्साईटमेंट में काँपने लगा और वह अपने कापंते हुए हाथ को आगे बढाकर अपनी बहु की चूत की तरफ ले जाने लगा ।

नीलम की चूत पर हलके काले बाल थे । महेश ने अपने काँपते हुए हाथ को जैसे ही अपनी बहु की चूत पर रखा उसका पूरा जिस्म सिहर उठा । महेश अपने हाथों की उँगलियों से नीलम की चूत के बालों को सहलाकर उसकी चूत को अपने हाथों में महसूस करने लगा, महेश के लंड का तो उत्तेजना के मारे बुरा हाल था वह बुहत ज़ोर से उछलते हुए प्रिकम की बूँदे बहा रहा था ।
 
महेश अब अपने हाथ को अपनी बहु की चूत के छेद की तरफ ले जाने लगा । महेश के हाथ ने जैसे ही नीलम की चूत के दाने को छुआ उसे अपने बदन में एक अजीब सी गुदगुदी का अहसास हुआ । महेश का हाथ अब उसकी बहु की चूत के छेद तक पुहंच चूका था। नीलम की चूत के छेद से अब भी पानी बह रहा था जिस वजह से महेश का हाथ गीला होने लगा ।

महेश ने अपने गीले हाथ को अपनी बहु की चूत से हटाया और अपने नाक के क़रीब लाकर उसे सूँघने लगा।

"आह्ह्ह्ह क्या खुशबु है" अपने हाथ को सूँघते हुए महेश के मुँह से निकला और वह अपनी जीभ निकालकर अपने गीले हाथ को चाटने लगा । अपने हाथ को पूरी तरह से चाटने के बाद महेश अपनी बहु की चूत की तरफ देखते हुए अपनी जीभ को अपने होंठो पर फिराने लगा ।

महेश नीलम की चूत को बड़े गौर से देख रहा था शादी के इतने सालों बाद भी उसकी चूत के होंठ आपस में बिलकुल सटे हुए थे । उसकी चूत को देखकर लग रहा था जैसे उसकी बुहत ही कम चुदाई हुयी हो । महेश अब अपना मूह नीचे करते हुए अपनी बहु की चूत की तरफ बढ़ने लगा, महेष ने नीचे झुकते हुए अपने होंठो को नीलम की चूत के दाने पर रख दिया ।

महेष का एक्साईटमेंट के मारे बुरा हाल था वह अपनी बहु की चूत के दाने को चूमते हुए अपनी जीभ से चाटने लगा । महेश कुछ देर तक अपनी बहु की चूत के दाने से खेलने के बाद नीचे होते हुए अपने होंठो को उसकी चूत के छेद की तरफ ले जाने लगा, महेश के होंठ अब उसकी बहु की चूत के दोनों बंद होंठो तक पुहंच चुके थे।।

महेश ने अपने होंठो से एक बार अपनी बहु के चूत के बंद होंठो को चूमा और फिर अपने हाथ की उँगलियों से उसकी चूत के छेद को खोल दिया।

"ओहहहह यह अंदर से कितनी लाल है" महेश ने अपनी बहु की चूत के छेद को खोलने के बाद उसके अंदर के लाल हिस्से को देखते हुए कहा । महेश ने अपनी जीभ निकाली और अपनी बहु की चूत के लाल छेद में डाल दी ।
 
महेश अपनी बहु की चूत के छेद को बुहत तेज़ी के साथ अपनी जीभ से चाटने लगा। वह बिलकुल पागल हो चुका था। वह अपनी बहु की चूत को ज़ोर से चाटते हुए यह भी भूल गया था की कहीं वह होश में आ गयी तो क्या होगा । अचानक महेश को महसूस हुआ की नीलम का जिस्म हिल रहा है वह डर के मारे अपनी बहु से अलग हो गया और जल्दी से उसके कपड़ों को ठीक कर दिया ।

महेष अपनी धोती को पहनकर फिर से अपनी बहु को उठाने की कोशिश करने लगा मगर वह वैसे ही पड़ी रही ।महेश का लंड अब भी तना हुआ था वह इतनी देर से अपनी बहु के जिस्म से खेलने के बाद बुहत ज्यादा एक्साइटेड हो गया था, महेश ने अपनी धोती को फिर से उताकर नीचे फ़ेंक दिया और वहां पर खड़े हुए ही अपनी बहु के गालों पर हाथ फेरते हुए अपना लंड हिलाने लगा ।

महेश अपने लंड को तेज़ी के साथ हिलाते हुए अपनी बहु के गालों को सहला रहा था । अचानक महेश अपने हाथ से अपनी बहु के गालों को सहलाते हुए उसके गुलाबी होंठो की तरफ ले जाने लगा, नीलम के होंठो पर अपने हाथ के लगते ही महेश का पूरा जिस्म काँपने लगा और उसका हाथ अपने लंड पर बुहत तेज़ हो गया। महेश की आँखें मज़े से बंद हो चुकी थी और वह बुहत ज़ोर से हाँफते हुए झडने लगा ।

महेश को यह भी पता नहीं था की वह कहाँ पर झड़ रहा है उसके लंड से निकलते हुए वीर्य की बूँदे नीलम के पेट,चुचियों और उसके जिस्म के दुसरे हिस्सों पर गिरने लगा, महेश के लंड से इतना ज्यादा वीर्य निकला था की नीलम का पूरा जिस्म ही उसके वीर्य से भीग चूका था । महेश ने जैसे ही पूरी तरह झडने के बाद अपनी आँखें खोलकर अपनी धोती उठाई उसके होश गायब हो गये क्योंकी उसके सामने उसका बेटा समीर खडा था ।
 
अब आगे क्या होगा।जानने के लिए पढ़ते रहिये।

कहानी पसंद करने और उत्साह बढ़ने के लिए सभी को थैंक्स।कहानी जारी रहेगी।अगला अपडेट जल्दी ही।कहानी के बारें में अपनी राय अवश्य दें।thanks
 
महेश ने अपने बेटे को देखकर काँपते हुए अपनी धोती पहन ली और अपना सर नीचे झुककर खड़ा हो गये।

"वाह यहाँ पर तो बुहत बड़ा नाटक हो रहा है ससुर अपनी बहु के जिस्म से खेलकर उसके जिस्म पर अपना वीर्य गिरा रहा है और बहु सोने का नाटक कर रही है जैसे वह गहरी नींद में हो। उठ छिनाल" समीर ने चीखते हुए अपनी पत्नी से कहा।

"नही बेटे वह बेहोश है" महेश ने अपने बेटे को गुस्से में देखकर कहा ।

"बेहोश है क्यों क्या हुआ इसे?" समीर ने हैंरान होते हुए कहा । महेश ने अपने बेटे को सारी बात बता दिया की कैसे नीलम बेहोश हुई और वह उसे यहाँ लेके आया।

"बापु जी आपको शर्म नहीं आई अपनी बेटी जैसी बहु के बेहोश होने का फ़ायदा उठाते हुए।

"वाह बेटे उल्टा चोर कोतवाल को डांटे। यह सब तुम्हारी वजह से हुआ है शर्म तो तुम्हें आनी चाहिए। अपनी विधवा बहन का फ़ायदा उठा रहे हो, तुमको उसके साथ देखने से ही बहु बेहोश हुई और मेरी नियत भी तुम भाई बहन को देखकर ही फिसली" महेश ने इस बार अपने बेटे को दबाव में लाते हुए कहा ।

अपने पिता की बात सुनकर समीर को जैसे साँप सूंघ गया वह चुप होकर खड़ा रहा।

"क्या हुआ बेटे निकल गयी सारी हवा मगर तुमने अपनी बहन के साथ जो पाप किया है उसकी सजा तुम्हें भुगतनी होगी" महेश ने अपने बेटे को चुप खड़ा देखकर खुश होते हुए कहा।

"पिता जी उसमें जितना मेरा क़सूर है उतना ही ज्योति दीदी का" महेश ने हकलाते हुए कहा ।

"हाँ तुम्हारे साथ उसे भी सजा मिलेगी" महेश ने अपने बेटे की तरफ देखते हुए कहा।

"पिटा जी मैं हर सजा के लिए तैयार हू" समीर ने अपने सर झुकाये हुए कहा।

"बेटे तुम ज्यादा चिंता मत करो यह हवस की आग होती ही अंधी है बस इस बात का पता तुम्हारी माँ को मत पडने देना और तुम्हारी सजा यह है की अगर मैंने अपनी बहु और बेटी को पटा लिया तो तुझे कोई ऐतराज़ नहीं होगा" महेश ने अपने दिल की बात बताते हुए कहा ।

"बापु आप यह क्या कह रहे हो?" समीर ने हैंरान होते हुए कहा।

"हाँ बेटे बिलकुल सही कह रहा हूँ मैं। तुम्हारी माँ तो मुझे नज़दीक आने नहीं देती और मेरा यह नालायक सारा दिन मुझे तँग करता रहता है इसीलिए अगर हमें घर में ही कोई चूत मिल जाए तो बाहर जाने की क्या ज़रूरत" महेश ने अपने बेटे का जवाब देते हुए कहा।

"ठीक है पिता जैसे आपकी मर्ज़ी। मैं आपके बीच कभी नहीं आऊंगा" समीर ने थोड़ी देर सोचने के बाद कहा ।

"ठीक है बेटे अब मैं चलता हूँ अपनी पत्नी को साफ़ कर देना" महेश ने अपने बेटे से कहा और वहां से चला गया।
 
समीर अपने पिता के जाने के बाद एक गीला कपड़ा उठाकर अपनी पत्नी को साफ़ करने लगा ताकी उसे कोई शक न हो । समीर अपनी पत्नी के मुँह पर पानी के कुछ छींटे उसके मारकर उसे उठाने लगा ।

समीर की थोड़ी कोशिश के बाद ही नीलम को होश आ गया।

"समीर तुम निकल जाओ यहाँ से मुझे तुमसे बात नहीं करनी बापू कहाँ है?" नीलम ने होश में आते ही फिर से रोते हुए कहा।

"नीलम संभालो अपने आपको वह चले गए हैं यहाँ से" समीर ने अपने पत्नी को समझाते हुए कहा।

"तुम मुझे सँभलने के लिए कह रहे हो अब बचा क्या है मेरे लिये" नीलम ने फिर से रोते हुए कहा ।

"नीलम वह सब तुम्हारी ही गलती की वजह से हुआ है अगर तुम मुझे हर चीज़ का सुख देती तो मैं कभी दूसरी तरफ नहीं जाता" समीर ने नीलम से कहा।

"हाँ मेरा ही क़सूर है मगर तुम अपनी बहन के साथ छी छी मुझे सोचते हुए भी शर्म आती है" नीलम ने चिल्लाते हुए कहा ।

"नीलम तुम समझने की कोशिश करो अगर मैं बाहर जाता तो घर की बदनामी होती और दीदी भी कब से प्यासी थी अगर वह किसी गैर मरद से नाता जोड़ती तो भी हमारे लिए शर्म का सबब बनती" समीर ने अपनी पत्नी को समझाते हुए कहा।

"समीर मैं अगर तुम्हें प्यार दूं तो तुम उसके साथ कोई सम्बन्ध नहीं रखोगे" नीलम ने अपने पति की बात सुनकर उसे गले से लगाते हुए कहा ।

"देखो नीलम वह भी एक औरत है अगर मैंने उसे छोड़ दिया तो वह किसी न किसी से सम्बन्ध बनाने की कोशिश करेगी जो हमारे घर के लिए बदनामी का सबब बनेगा इसीलिए मैं उसे नहीं छोड़ सकता" समीर ने अपनी पत्नी को समझाते हुए कहा।

"समीर अगर तुमने उसे नहीं छोडा तो मैं भी तुम्हारे अलावा किसी गैर मरद से सम्बन्ध बना लूंगी" नीलम ने गुस्से से समीर की तरफ देखते हुए कहा ।
 
"हाहाहा तुम और दुसरे मरद से ठीक है अगर मेरी तरह तुमने अपने ही किसी घर के शख्स से सम्बन्ध बनाया तो मुझे कोई एतराज़ नही" समीर ने हँसते हुए कहा क्योंकी वह जानता था की नीलम को सेक्स पसंद नहीं इसीलिए वह कभी किसी से सम्बन्ध नहीं बना सकती मगर वह एक औरत की ज़िद को नहीं जानता था।

"ठीक है समीर अब मैं तुम्हें बताऊँगी के औरत क्या कर सकती है" नीलम ने गुस्से में कहा और अपना मूह दूसरी तरफ करके सो गयी ।

नीलम ने फैसला कर लिया था की वह खुद को पूरी तरह चेंज करेगी और अपने पति को बतायेगी की अगर औरत कुछ करने पे आये तो वह कुछ भी कर सकती है ।हर रोज़ की तरह सुबह उठते ही समीर नाश्ता करने के बाद ऑफिस के लिए निकल गया। नीलम नाश्ता करने के बाद सारा सामन किचन में रखकर खुद अपने कमरे में चलि गयी क्योंकी बर्तन धोने का काम ज्योति करती थी ।

नीलम अभी अपने कमरे आकर बैठी ही थी की उसका ससुर महेश कमरे में दाखिल हुआ जिसे देखकर वह बेड से उठकर खड़ी हो गयी।

"बैठो बेटी तुम खड़ी क्यों हो गयी" महेश ने अपनी बहु को खड़ा देखकर कहा और खुद सामने पड़े सोफ़े की के कुर्सी पर बैठ गया, नीलम अपने ससुर के बैठते ही खुद भी बेड पर बैठ गयी।

"बेटी रात को क्या हुआ था जो तुम बेहोश हो गई । मैंने जब तुमको कमरे में जाकर सुलाया तो समीर भी वहां नहीं था?" महेश ने अन्जान बनने का नाटक करते हुए अपनी बहु से पुछा ।

नीलम अपने पिता की बात सुनकर कुछ देर खामोश रही और फिर सारी बात उसे बता दी।

"बेटी मुझे अपने कानों पर यकीन नहीं हो रहा है फिर समीर से तुम्हारी बात हुई?" महेश ने दूसरा सवाल किया।

"पिता जी" नीलम ने रोते हुए अपने ससुर को सारी बात बता दी।

"बेटी अपने आपको सम्भालो तुम्हें अगर अपने पति को वापस पाना है तो उसे जलाना होगा" महेश ने नीलम को सलाह देते हुए कहा ।
 
"मगर कैसे पिताजी?" नीलम ने अपने ससुर की बात सुनकर कहा।

"बेटी अगर वह अपनी बहन के साथ यह सब कर सकता है तो तुम्हें भी कुछ ऐसा करना होगा जिससे उसे जलन होने लगे" महेश ने अपनी बहु को रास्ता दिखाते हुए कहा।

"पिता जी मगर यहाँ पर तो समीर के सिवा कोई और है ही नही" नीलम ने सोचते हुए कहा।

"बेटी तुम बुहत पगली हो मैं तुम्हारे पिता सामान हूँ मगर में तुम्हारा साथ दे सकता हू" महेश ने सीधा सीधा अपनी बहु से कहा ।

"पिता जी मगर आपके साथ नहीं मैं सोच भी नहीं सकती" नीलम ने शर्म से पानी पानी होते हुए कहा।

"बेटी मैं कुछ करने की नहीं सिर्फ नाटक करने की बात कर रहा हू" महेश ने अपनी बहु को समझाते हुए कहा।

"नाटक हाँ पिता जी आप सही कह रहे हैं अगर मैं समीर के सामने आपके साथ नाटक करुं तो वह ज़रूर गुस्सा होंगे" नीलम ने खुश होते हुए कहा ।

"बेटी शुकर है तुम्हें समझ में तो आया मगर यह इतना आसान भी नहीं है इसके लिए तुम्हें सारी शरम छोडनी होगी" महेश ने अपना प्लान कामयाब होता देखकर खुश होते हुए कहा।

"हाँ पिता जी मैं कुछ भी करने के लिए तैयार हुँ" नीलम ने अपने ससुर को यकीन दिलाते हुए कहा।

"ठीक है बेटी फिर आज के लिए कोई प्लान बनाते हैं" महेश ने अपनी बहु की बात को सुनते हुए कहा ।

"बेटी एक बार और सोच लो। हो सकता है तुम्हें यह सब अच्छा न लगे क्योंकी तुम्हें मेरे साथ बुहत कुछ करना होगा। हो सकता है तुम्हें मेरे सामने नंगा भी होना पड़े या उससे ज्यादा कुछ गंदा" महेश ने अपनी बहु की आँखों में देखते हुए कहा।

"नही पिता जी मैं तैयार हुँ" नीलम ने शर्म से अपनी नज़रों को झुकाते हुए कहा।

"ठीक है बेटी मेरे पास आजके लिए एक प्लान है" महेश ने नीलम को देखते हुए कहा ।
 
"बेटी जब समीर ऑफिस से घर आता है तो तेरी सास और ज्योति सोयी हुयी होती हैं हमें उस वक्त कुछ ऐसा करना होगा जिससे समीर हैंरान हो जाए" महेश ने अपनी बहु को आइडिया देते हुए कहा।

"हाँ पिता जी आपकी बात तो बिलकुल ठीक है मगर हमें क्या करना होगा?" नीलम ने अपने ससुर की तरफ देखते हुए कहा।

"बेटी मैंने पहले ही कहा था की तुम्हें यह सब करने में बुहत बोल्ड होना पड़ेगा हमें समीर को ऐसे दिखाना है जैसे हमारे बीच जिस्मानी सम्बन्ध चल रहा है" महेश ने अपनी बहु की तरफ देखते हुए कहा ।

"पिता जी मैं तैयार हूँ मगर हमें करना क्या होगा?" नीलम ने अपने ससुर से कहा।

"बेटी जब समीर घर में दाखिल होता है तो वह सीधे अपने कमरे में आता है हमें उसके आने से पहले उस कमरे में बिलकुल नंगा होकर एक दुसरे की बाहों में सोना होगा और जैसे ही वह दाखिल हो तुम्हें उठकर यह कहना होगा अरे बापू आपने दरवाज़ा भी बंद नही किया। आज यह टाइम इतनी जल्दी कैसे बीत गया" महेश ने अपना प्लान अपनी बहु से समझाते हुए कहा।

"पिता जी आपने सही कहा था मेरे लिए यह बुहत मुश्किल है मगर मैं अपने पति को पाने के लिए कुछ भी कर सकती हू" नीलम ने अपने ससुर की पूरी बात सुनकर शर्म से अपनी नज़रें नीचि करते हुए कहा।

"वेरी गुड बेटी ऐसे ही तुम्हें अपने ऊपर पूरा आत्मविश्वास रखना होगा" महेश ने अपने बहु की तारीफ करते हुए कहा।

"ठीक है पिताजी आप ४-३० बजे आ जाना। वह ५ बजे आते हैं तब तक हम बंदोबस्त कर लेंगे" नीलम ने अपनी नज़रें नीचे किये हुए ही कहा ।

"ठीक है बेटी अब मैं चलता हूँ" महेश ने अपनी बहु की बात सुनकर वहां से जाते हुए कहा । महेश कमरे से निकलकर ख़ुशी से उछल पड़ा कितनी आसानी से उसने अपनी बहु को बेवक़ूफ़ बना लिया था, अब वह अपने कमरे में आकर बेसब्री से शाम का इंतज़ार करने लगा । आने वाले टाइम का सोचते हुए ही उसका लौडा तेज़ी से उछल रहा था ।
 
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