अपने ससुर के होंठो से अपने होंठ मिलते ही नीलम पर अजीब किस्म का नशा छाने लगा और वह अपने ससुर के साथ बुहत लम्बी फ्रेंच किस में खोती चलि गयी । कुछ देर बाद जब दोनों की साँसें फूलने लगी तो दोनों ने अपने होंठ एक दुसरे से अलग किये, नीलम फिर से बुहत ज़ोर से हाँफते हुए साँस लेने लगी।
"आहह बेटी क्या मीठे होंठ हैं तुम्हारे" महेश ने अपने होंठो पर अपनी जीभ फिराते हुए कहा।
"पिता जी चलो मैं आप से बात नहीं करती" नीलम ने शर्म से अपने ससुर के सीने पर मुक्के मारकर वहां से उठते हुए बोली।
"बेटी तुम तो नाराज़ हो गई क्या करूँ तुम्हारी हर चीज़ मुझे इतनी सूंदर लगती है की मैं अपने आप को रोक नहीं पाता" महेश ने अपनी बहु को बाज़ू से पकडते हुए कहा।
"छोड़ो पिता जी इस वक्त यह सब ठीक नहीं है हम रात को मिलेंगे" नीलम ने अपने ससुर को समझाते हुए कहा।
"बेटी यह देखो तुम्हारे साथ थोड़ी देर रहने पर भी यह कैसे उठ जाता है" महेश ने सोफ़े से उठकर अपने खड़े लंड को धोती के ऊपर से ही पकडकर अपनी बहु को दिखाते हुए कहा ।
"पिता जी आप बड़े बेशरम हैं छोड़िये मुझे" अपने ससुर के खड़े लंड को देखकर नीलम का पूरा शरीर सिहर उठा और उसने शर्म से अपना मुँह दूसरी तरफ करते हुए कहा।
"क्यों बेटी तुम्हें यह अच्छा नहीं लगता" महेश ने अपनी बहु के पीछे जाकर उसे अपनी दोनों बाहों में भरकर अपने लंड को उसके चूतडों से रगडते हुए कहा।
"आह्ह्ह्ह पिता जी छोड़िये ना" नीलम ने अपने ससुर के लंड को अपने चूतडों पर लगते ही सिसककर कहा। नीलम को अपने ससुर का लंड अपने चूतडों पर इतना अच्छा लग रहा था की वह उनसे दूर हटने की कोशिश भी नहीं कर रही थी ।
महेश ने अपने दोनों हाथों को अपनी बहु की साड़ी में डालकर उसकी नंगी कमर को पकड़ लिया और उसे पकडकर अपने लंड को दबाव देने लगा।
"आह्ह्ह्ह पिता जी छोड़िये न कोई आ जायेगा" नीलम ने फिर से सिसकते हुए कहा । नीलम को अपने पूरे शरीर में एक अजीब किस्म के मज़े का अहसास हो रहा था, उसे खुद पता नहीं था की उसके ससुर में क्या जादू है जो जब भी वह उसके जिस्म को छूते है तो वह सब कुछ भूलकर उसका साथ देने लगती है ।
महेश अब मज़े से अपने लंड को अपनी बहु के चूतडों में धक्के मार रहा था । ऐसा करते हुए महेश को जन्नत का मज़ा आ रहा था । इधर नीलम की चूत भी गीली हो चुकी थी उसका पूरा शरीर कांप रहा था और उसने मज़े के सागर में डूबकर अपनी आँखें बंद कर ली थी। अचानक महेश अपनी बेटी को दूर से आता देखकर अपनी बहु को छोडकर सोफ़े पर बैठ गया ।
नीलम ने जैसे ही महसूस किया की उसके पीछे कोई भी नहीं है वह होश में आई और अपनी आँखें खोलकर देखने लगी।
"क्या हुआ भाभी खड़े खड़े नींद आ गयी क्या आपको?" नीलम के सामने ज्योति खड़ी थी जो मुसकुराकर उसे टोक रही थी।
"नही तो" नीलम ने अपने आपको संभालते हुए कहा और वहां से अपने कमरे में चलि गयी ।
नीलम के जाते ही ज्योति अपने पिता के सामने सोफ़े पर जा बैठी । महेश चुपचाप सोफ़े पर बैठा हुआ था। उसे पता था की ज्योति ने उसे नीलम के साथ चिपके हुए देख लिया है।
"पिता जी इस वक्त आप यहाँ क्या बात है?" ज्योति ने शरारती मुसकान के साथ अपने पिता को देखते हुए कहा।
"वो बेटी बस ऐसे ही अपने कमरे में बोर हो रहा था तो यहाँ पर टीवी देखने आ गया" महेश ने अपनी बेटी को जवाब देते हुए कहा ।
"ह्म्म्म पिता जी फिर कैसा लगा प्रोग्राम?" ज्योति ने फिर से मुस्कराते हुए कहा।
मैं समझा नहीं बेटी" महेश ने चौकते हुए कहा।
"पिता जी जिस टीवी के प्रोग्राम को आप देख रहे थे वह कैसा लगा" ज्योति ने इस बार अपने सोफ़े से उठकर अपने पिता के साथ बैठते हुए कहा।
"अभी तो प्रोग्राम स्टार्ट ही नहीं हुआ है" महेश ने झेंपते हुए कहा ।
"पिता जी पर जब मैं आई तो उस वक्त तो प्रोग्राम चल रहा था" ज्योति ने अपने पिता को देखते हुए कहा।
"ह्म्म्म तो तुम उस प्रोग्राम की बात कर रही हो उसे तो तुमने बीच में आकर इन्ड कर दिया" महेश ने इस बार अपनी बेटी को देखकर हिम्मत जताते हुए कहा।
"हाँ वह तो है मैं उसके लिए सॉरी कहती हूँ मगर यह प्रोग्राम कब से चल रहा है और कहाँ तक पुहंचा है?" ज्योति ने अपने पिता के खुल जाने पर उससे दूसरा सवाल करते हुए कहा ।
"अभी तो शुरू ही हुआ है और वह भी तुम्हारी मेंहरबानी से" महेश ने अपनी बेटी को गौर से देखते हुए कहा । ज्योति उस वक्त सलवार कमीज में थी । कमीज पुरानी होने की वजह से उसका गला बुहत बड़ा था जिसमें से ज्योति की गोरी गोरी चुचियां आधी नज़र आ रही थी।
"मेरी वजह से पिता जी वह कैसे?" ज्योति ने अपने पिता को अपनी तरफ यो देखता पाकर झेंपते हुए कहा।
"अब बेटी इतनी भी भोली मत बनो उस रात बहु ने तुम्हारा प्रोग्राम समीर के साथ लाइव देख लिया तब से वह समीर से नफरत करने लगी है जिस का कुछ फ़ायदा मैं उठा रहा हू" महेश ने इस बार अपना हाथ अपनी बेटी की जाँघ पर उसके कपड़ों के ऊपर से ही रखते हुए कहा ।
अपने पिता की बात सुनकर ज्योति का सर शर्म से झुक गया और वह बगैर कुछ बोले चुप होकर बैठी रही।
"क्या हुआ बेटी बोलो न तुमने तो अपने भाई के साथ ही प्रोग्राम सेट कर लिया" महेश ने ज्योति की जाँघ पर अपने हाथ को फेरते हुए कहा।
"पिता जी मुझसे गलती हो गई इतने सालों से प्यासी थी और ऊपर से नीलम भाभी भैया को हाथ भी लगाने नहीं दे रही थी इसीलिए हम दोनों जवानी की हवस में अंधे हो गये" ज्योति ने वैसे ही शर्म से अपना कन्धा नीचे किये हुए कहा।
"ह्म्मम्म तुमने ठीक आदमी को चुना अगर तुम यह काम बाहर करती तो हमारी ही बदनामी होती और समीर का भी क्या क़सूर तुम हो ही इतनी ख़ूबसूरत की तुम्हें देखकर किसी भी आदमी का खड़ा हो जाए" महेश ने इस बार अपने हाथ को अपनी बेटी की पेंटी तक लाकर उसे सहलाते हुए कहा ।
"पिता जी आप यह क्या कह रहे हैं मैं आपकी बेटी हूँ" ज्योति अपने पिता के हाथ को अपने हाथ से पकडते हुए बोली। उसे बुहत ज्यादा हैंरानी हो रही थी की उसका बाप भी उसके बारे में ऐसा कह सकता है।
"ता क्या हुआ बेटी जब तुमने अपने भाई का चख लिया है तो फिर मुझसे क्यों शरमाती हो" महेश ने ज्योति के हाथ को अपनी धोती के ऊपर से ही अपने खड़े लंड पर रखते हुए कहा । अपना हाथ अपने पिता के लंड पर लगते ही ज्योति का सारा जिस्म कांप उठा और उसने अपने हाथ को फ़ौरन वहां से हटा दिया।
"क्यों बेटी अच्छा नहीं लगा क्या। तेरे भाई से ज्यादा तगड़ा है" महेश ने हँसते हुए कहा ।
ज्योति का चेहरा शर्म से लाल हो चुका था। उसे कुछ समझ में नहीं आ रहा था की वह क्या करे उसकी साँसें भी बुहत ज़ोर से चल रही थी । ज्योति अचानक वहां से उठकर अपने कमरे में चलि गयी अपने कमरे में आकर ज्योति ने दरवाज़ा अंदर से बंद कर दिया।
ज्योति बेड पर बैठकर ज़ोर से हाँफने लगी उसका पूरा जिस्म गरम हो चुका था । उसे बार बार अपने हाथ पर अपने पिता के लंड का अहसास हो रहा था । ज्योति अपना हाथ अपने पिता के लंड पर लगते ही समझ गयी थी की उसके पिता का लंड बुहत मोटा और लम्बा है मगर वह अपने पिता के साथ यह सब कुछ करने का सोच भी नहीं सकती थी इसीलिए वह वहां से भाग आई थी ।
नीलम ने अपने कमरे में आते ही दरवाज़ा अंदर से बंद कर लिया और सोफ़े पर बैठ गयी । नीलम की साँसें अब भी फूली हुई थी उसे अपने ऊपर बुहत गुस्सा आ रहा था वह खुद नहीं जानती थी की उसके पिता में क्या जादू है की वह उसकी बातों में फँस जाती है और वह सब कर जाती है जिस की वह कल्पना भी नहीं कर सकती, नीलम कुछ देर तक सोचते रहने के बाद यह फैसला कर लिया की चाहे जो भी हो जाये अब वह अपने ससुर को अपने क़रीब नहीं आने देगी ।
दिन ऐसे ही बीत गया । रात हो गई सभी खाना खाने के बाद अपने कमरों में जाकर सोने की कोशिश कर रहे थे।
"डालिंग क्या अब भी नाराज़ हो" समीर ने नीलम को पीछे से अपनी बाहों में भरते हुए कहा।
"ह्म्म्म तुम जब तक अपनी बहन का साथ नहीं छोडते मैं तुमसे बात नहीं करने वाली" नीलम ने ख्यालों से निकलते हुए अपने पति से कहा और उसकी बाहों से जुदा होते हुए आगे होकर लेट गयी ।
समीर कुछ देर तक चुप होकर वहीँ बैठा रहा और फिर वहां से उठकर अपनी बहन के कमरे में चला गया । समीर ने अंदर दाखिल होते ही दरवाज़ा अंदर से बंद कर दिया।
"भइया आप आ गये" समीर के क़रीब आते ही ज्योति ने बेड से उठकर उसके गले से लगकर रोते हुए कहा।
"क्यों पगली क्या हुआ तुम्हें?" समीर ने हैंरान होते हुए कहा। उसे शक हो रहा था की कहीं नीलम ने तो उसे कुछ नहीं कहा।
"भइया कुछ नही" ज्योति ने अपनी आँखों से ऑंसू को पोछते हुए कहा वह अपने पिता के बारे में समीर को बताने से डर रही थी ।
"सच बताओ दीदी क्या हुआ। तुम्हें मेरी कसम मैं तुम्हें दुखि नहीं देख सकता?" समीर ने अपनी बहन को बेड पर बिठाते हुए कहा।
"भइया आपने यह क्या कर दिया" ज्योति ने अपने भाई की कसम को सुनकर उसके होंठो पर अपना हाथ रखते हुए कहा और फिर सारी बात समीर को बता दिया।
"दीदी इसी बात से तो मैं भी परेशान हूँ मैंने ऑफिस से लौटते हुए अपनी बीवी और बापू को एक दुसरे के साथ नंगा सोते हुए देखा था" समीर ने मायूस होते हुए कहा।
"भइया आप चिंता मत करो सब कुछ ठीक हो जायेगा" ज्योति से अपने भैया का गम देखा नहीं गया इसीलिए उसने अपनी नाइटी को उतारकर अपने भैया को अपनी गोद में लिटा दिया ।
समीर ने अपनी बहन के सर को पकड़कर उसके होंठो पर अपने होंठो पर रख दिया और दोनों भाई बहन सारी बाते भूलकर एक दुसरे के आग़ोश में खो गये । इधर महेश अपनी पत्नी के सोते ही अपने कमरे से निकलकर अपनी बहु के पास उसके कमरे में जाने लगा, महेश ने कमरे मे दाखिल होते ही दरवाज़ा अंदर से बंद कर दिया ।
नीलम उस वक़त सिर्फ नाईट ड्रेस पहनकर लेटी हुई थी वह अपने ससुर को देखकर सीधी होकर बैठ गई।
"बेटी तुम लेटी रहो क्या हुआ उठ क्यों गयी?" महेश ने भी बेड पर चढकर अपनी बहु के साथ बैठते उसकी पीठ पर अपना हाथ रखते हुए कहा।
"वो पिता जी मैं आपसे कुछ कहना चाहती हू" नीलम ने अपने ससुर के क़रीब आते ही उससे थोडा दूर होते हुए कहा।
"हाँ कहो बेटी पर तुम मुझसे दूर क्यों हो रही हो?" महेश ने हैंरान होते हुए कहा ।
"पिता जी मुझे कुछ अच्छा नहीं लग रहा है प्लीज आप मुझे अकेला छोड दो। मैं आपके साथ यह सब नहीं कर सकती" नीलम ने रोने जैसे सूरत बनाते हुए अपने ससुर से कहा।
"पर बेटी मैंने वादा किया है की तुम्हारी इच्छा के सिवा मैं कुछ नहीं करूंगा" महेश ने अपनी बहु के बदलाब को देखकर परेशान होते हुए कहा।
"हाँ पिता जी आपका कोई क़सूर नहीं है सारा क़सूर मेरा ही है आपके क़रीब आते ही मैं अपना कण्ट्रोल खो देती हूँ इसीलिए मैंने फैसला किया है की आज के बाद मैं आपके क़रीब नहीं आऊँगी" नीलम ने अपने ससुर को देखते हुए कहा ।
"ठीक है बेटी जैसे तुम्हारी मर्ज़ी मैं तो सिर्फ तुम्हें खुश देखना चाहता हूँ" महेश ने अपना मूह लटकाते हुए कहा।
"थैंक्स पिता जी मगर आप मुझसे ख़फ़ा तो नहीं हैं?" नीलम ने अपने ससुर का लटका हुआ मुँह देखकर कहा।
"नही बेटी मैं भला तुमसे कैसे नाराज़ हो सकता हू" महेश ने अपनी बहु को देखते हुए कहा।
"फिर बापू जी आपने अपना मूह क्यों लटकाया हुआ है" नीलम ने अपने ससुर को टोकते हुए कहा।
"वो बेटी मैंने आज सोचा था की तुम्हारे ख़ूबसूरत जिस्म को देखकर मैं इसे अपने हाथ से ही शांत कर दूंगा मगर मेरा नसीब ही ख़राब है" महेश ने अपने खड़े लंड के ऊपर से धोती को हटाते हुए कहा ।
"पिता जी आप भी" नीलम ने अपने ससुर के खडे मुसल लंड को इतना क़रीब से देखकर शरमाते हुए अपनी नज़रें नीचे झुककर बोली।
"बेटी क्या मेरे लिए तुम मेरा एक काम कर सकती हो?" महेश ने अपने शैतानी दिमाग से अखीरी बार कोशिश करते हुए कहा।
"क्या पिता जी?" नीलम ने वैसे ही अपनी नज़रें झुकाये हुए कहा।
"बेटी तुम कहीं नाराज़ तो नहीं होगी" महेश ने अपनी बहु से कहा ।
पिता जी आपने मेरे लिए इतना कुछ किया है मैं भला आपसे नाराज़ कैसे हो सकती हुँ" नीलम ने अपने ससुर की बात का जवाब देते हुए कहा।
"बेटी सिर्फ एक बार तुम मेरे सामने बिलकुल नंगी हो जाओ। मैं तुम्हारे सारे जिस्म को एक बार गौर से अपनी आँखों में समेटना चाहता हूँ मेरा तुमसे वादा है की इसके बाद मैं कभी भी तुम्हारे क़रीब नहीं आउंगा" महेश ने अपना आखरी पता फ़ेंकते हुए कहा।
"पिता जी आप यह क्या कह रहे हो?" नीलम का पूरा शरीर अपने ससुर की बात को सुनकर सिहर उठा ।।।।। और उसने शर्म से दबी हुयी आवाज़ में कहा ।
मुझे पता था बेटी तुम इन्कार कर दोगी इसीलिए तो मैं तुमसे यह सब नहीं कहना चाहता था। खवामखाह तुम्हारी नज़रों में मेरी इज्ज़त और कम हो गयी" महेश ने अपनी बहु की बात सुनकर ज़ोर से चिल्लाते हुए कहा।
"नही पिता जी आपकी इज्ज़त मेरे सामने कभी नहीं घट सकती" नीलम ने अपने ससुर को समझाते हुए कहा।
"मैं जानता हूँ की तुम यह सब मुझे दिलासा देने के लिए कह रही हो वरना क्या मेरी इतनी सी बात को तुम नहीं मानती" महेश ने अपनी बहु की बात को सुनकर गुस्सा होते हुए कहा ।
नीलम को कुछ समझ में नहीं आ रहा था की वह क्या करे उसका दिमाग ज़ोर से चकरा रहा था।
"ठीक है पिता जी मैं तैयार हूँ मगर आप मेरे जिस्म को सिर्फ देखेंगे उसपर अपना हाथ नहीं लगाएँगे" अखिरकार नीलम ने हार मानते हुए कहा क्योंकी वह अपने ससुर को किसी कीमत पर भी दुखि नहीं करना चाहती थी । नीलम ने सोचा एक बार अपना जिस्म दिखाने में भला उसका क्या बिगड जाएगा उसके बाद तो सारी ज़िंदगी उसकी जान छूट जायेगी।
ओहहहह बेटी मुझे अपने कानों पर यकीन नहीं हो रहा है। तुमने मेरी बात मान ली थैंक्स बेटी मैं तुम्हारा अहसान सारी ज़िंदगी याद रखूँगा" महेश ने अपनी बहु की बात सुनकर खुश होते हुए कहा।
"पिता जी मैं आपको दुखि नहीं देख सकती मगर आजके बाद आप मुझे कभी कुछ करने को नहीं कहोगे" नीलम ने अपने ससुर की बात सुनकर बेड से नीचे उतरते हुए कहा।
"नही बेटी मैं तुमसे कभी कुछ नहीं कहूँगा अब जल्दी से तुम मेरी बात को पूरा करो" महेश ने अपनी बहु की तरफ देखते हुए कहा उसका लंड अपनी बहु से बात करते ही ज़ोर से उछल रहा था ।
"पिता जी आप अपना मुँह उस तरफ कर लो मुझे आपके सामने कपडे उतारने में शर्म आती है" नीलम ने शर्म से अपना सर झुकाये हुए कहा।
"अरे बेटी जब मैं तुम्हें नंगा देखने ही वाला हूँ तो फिर तुम ऐसे क्यों शर्मा रही हो" महेश ने अपनी बहु को देखते हुए कहा।
"पिता जी शायद आप ठीक कह रहे हैं" नीलम ने अपने ससुर से कहा और अपनी साड़ी को अपने जिस्म से उतारने लगी । नीलम कपडे उतारते हुए अपने ससुर की तरफ नहीं देख रही थी क्योंकी उसे बुहत शर्म आ रही थी ।
नीलम ने साड़ी के उतारने के बाद अपने ब्लाउज और पेटिकोट को भी खोल दिया । इधर अपनी बहु को सिर्फ एक छोटी सी पेंटी और ब्रा में देखकर महेश का बुरा हाल था वह अपनी धोती को उतारकर अपने मुसल लंड को सहला रहा था, नीलम ने अपनी ब्रा को आगे से नीचे सरका दिया और उसके हुक्स को आगे करके खोलकर नीचे फ़ेंक दिया ।
"आह्ह्ह्ह बेटी दुनिया की सब से हसीन लड़की हो तुम" अपनी बहु की ब्रा के उतरते ही उसकी गोरी गोरी चूचियों को देखकर महेश के मुँह से निकल गया।
"पिता जी आप क्यों नंगे हो गये?" अचानक अपने ससुर की आवज़ सुनकर नीलम ने उसकी तरफ देखा मगर अगले ही पल वह अपने ससुर के मुसल लंड को देखकर शर्म के मारे अपनी नज़रें नीची करते हुए बोली,
"ओहहहह बेटी क्या करुं तुम्हारे जिस्म को देखकर यह ज्यादा उतावला हो जाता है मगर तुम ऐसे शर्माओ मत। जिस तरह मैं तुम्हारे जिस्म को अपनी आँखों में समाना चाहता हूँ वैसे ही तुम भी आज अपने इस दीवाने की तस्वीर अपनी आँखों में क़ैद कर लो" महेश ने अपनी बहु को देखते हुए कहा ।
"पिता जी बस कीजिये" नीलम ने शर्म से लाल होते हुए कहा और वह अपनी पेंटी में हाथ डालकर अपने जिस्म से उतारने लगी । पेंटी के उतरते ही नीलम बिलकुल नंगी अपने ससुर के सामने खड़ी थी।
"वाह बेटी क्या जिस्म है मैं तो सच में तुम्हारे सारे जिस्म को देखकर पागल हो गया हूँ" महेश ने अपनी बहु की हलके बालों वाली भूरी चूत को घूरते हुए कहा।
"पिता जी जल्दी से हमें देख लो। हम ज्यादा देर तक आपके सामने नंगी नहीं रह सकती" नीलम ने अपने ससुर की बात सुनकर कहा । नीलम का जिस्म अपने ससुर की बातों को सुनकर गरम हो रहा था। इसीलिए वह जल्दी से कपडे पहनना चाहती थी ।
"अरे यह क्या बात हुई बेटी इससे अच्छा था की तुम मेरी बात मानती ही नही" महेश ने नाराज़ होने का नाटक करते हुए कहा।
"क्यों पिता जी क्या हुआ आप तो नाराज़ हो गये। अच्छा सॉरी आप तसल्ली से मुझे देख लो मुझे कोई जल्दी नही" नीलम ने अपने ससुर की बात को सुनकर कहा क्योंकी वह उनके सामने नंगी तो हो चुकी थी। इसीलिए उसने सोचा अब उसे नाराज़ करने का क्या फ़ायदा थोड़ी देर में भला उसका क्या बिगड जाएगा।
"सच बेटी तुम बुहत अच्छी हो मगर तुम शरमाती बुहत हो जब तक मैं तुम्हें देख रहा हूँ तुम भी मुझे देखो ना" महेश ने बेड से उठकर अपनी बहु के सामने खड़ा होते हुए कहा ।
नीलम का सर झुका हुआ था इसीलिए जैसे ही महेश उसके सामने जाकर खड़ा हुआ उसका फनफनाता हुआ लंड सीधा नीलम की आँखों के सामने आ गया । नीलम की साँसें अपने ससुर के लंड को इतना क़रीब से देखकर उखडने लगी और उसका पूरा जिस्म गरम होने लगा, महेश का लंड बुहत ज़ोर से झटके खा रहा था। नीलम की आँखें अब भी अपने ससुर के लंड पर टीकी हुयी थी उसे अपने ससुर का मुसल लंड उछलते हुए बुहत अच्छा लग रहा था ।
"क्यों बेटी कैसा लगा तुम्हें मेरा यह बदमाश?" महेश ने अपनी बहु को यो अपने लंड की तरफ घूरते हुए देखकर अपने हाथ से अपने लंड को पकडते हुए कहा।
"पिता जी बुहत हो चुका । मैं अब कपडे पहनना चाहती हू" अपने ससुर की बात को सुनकर अचानक नीलम को होश आया और वह अपने ससुर से थोडा दूर हटकर बोली।
"बेटी तुम बुहत शरमीली हो इसीलिए मुझे ही कुछ करना होगा" यह कहते हुए महेश ने अपनी बहु को अपनी बाँहों में उठाकर बेड पर ले जाकर लिटा दिया।
"पिता जी आप यह क्या कर रहे हैं आपने वादा किया था" नीलम ने बेड पर लेटते ही जोर से चिल्लाते हुए कहा उसकी साँसे बुहत ज़ोर से चल रही थी। महेश के हाथ का स्पर्श अब भी नीलम को अब भी अपनी कमर और जांघों पर पर महसूस हो रहा था।