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परिवार हो तो ऐसा

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परिवार हो तो ऐसा - पार्ट--19

गतान्क से आगे........

प्रीति एक बार फिर झुक कर अपने चाचा के आन्डो को चूसने लगी.... मोहन ने अपनी भतीजी की चुचियों को पकड़ा और मरोड़ मरोड़ कर मसल्नेलगा. .. और फिर आगे बढ़ कर उसने उसके खड़े निपल को पाने मुँह मे लिया और चूसने लगा... प्रीति पर उत्तेजना हावी थी वो अपने चाचा के होठों को चूस्ते हुए ज़ोर ज़ोर्से अपनी चूत को रगड़ने लगी.. वो चाहती थी कि अभी इसी वक्त अपने चाचा पर चढ़ उसके लंड को अपनी चूत मे ले ले लेकिन उसे अपने चाचा को तड़पाने मे मज़ा आ रहा था.. वो और ज़ोर से होठों को चूस्ते हुए अपनी चूत रगड़ने लगी और तभी उसकी चूत मे जैसे कोई भूचाल आ गया हो और अंदर से लावा फुट पड़ा.. उसकी चूत झाड़ कर उसके चाचा की जांघों को भिगोने लगी.... प्रीति झुक कर अपनी पॅंटी उठाने लगी जिससे पीछे से उसके चाचा को उसकी नंगी चूत दीख जाए... और इससे पहले की मोहन उसे पकड़ता वो हवा मे एक चुंबन उछालते हुए दरवाज़े से बाहर हो गयी.. जाते जाते वो अपनी टी-शर्ट ज़मीन पर से उठाना नही भूली....

मोहन हैरत अंगेज़ सा कुर्सी पर बैठा था.. जो कुछ भी हुआ उस पर उसे विश्वास नही हो रहा था.. उसे अफ़सोस हो रहा था कि प्रीति की चूत उसके इतने नज़दीक होते हुए भी वो उसमे अपना लंड नही घुसा पाया.. वो बेसाहाय सा उठा और अपने कमरे मे आकर बिस्तर पर लुढ़क गया.. प्रीति के मुँह की गर्मी अब भी वो अपने लंड पर महसूस कर रहा था... क्या पता आगे क्या क्या होने वाला था..

कुछ दीनो बाद की बात है एक दिन शमा ने बाथरूम का दरवाज़ा खटखटाया तो स्वीटी ने दरवाज़ा खोल उसे अंदर आने को कहा... "सॉरी स्वीटी. वो क्या है ना में अपने मेकप का कुछ समान अंदर भूल गयी थी.." शमा ने अंदर आते हुए कहा जहाँ उसकी बेहन शवर के नीचे स्नान कर रही थी... शमा अपने आप को रोक नही पाई और उसकी निगाह अपनी बेहन के नंगे बदन पर टीक गयी...

"ऐसे क्या देख रही हो.. क्या पहली बार मुझे नंगी देख रही हो?" स्वीटी ने हंसते हुए कहा.. उसका दिल तो कर रहा था कि हाथ पकड़ वो शमा को भी शवर के नीचे खींच लेती.. लेकिन ऐसा हो नही

सकता था इसलिए उसने पानी बंद किया और इससे पहले की शमा बाथरूम से बाहर जाती उससे बोली, "ज़रा मुझे टवल पकड़ाना" शमा ने खूँटि पर टंगा टवल उठाया और अपनी बेहन को पकड़ाने के

लिए घूमी तो उसकी निगाह स्वीटी के नंगे बदन पर ठहरी पानी बूँदों पर पड़ी.. जो नीचे बह रही थी..शमा की निगाहों ने बूँदों का पीछा किया... पानी की बूँद जब उसकी चुचियों से नीचे

खिसकाते हुए सपाट पेट से होते हुए उसकी चूत पर पहुँची तो शमा चौंक पड़ी..

"स्वीटी तुमने तो अपनी चूत के सारे बाल सॉफ किए हुए है?" "हां" स्वीटी ने मुकुराते हुए कहा, "वो क्या है ना कि मुझे प्रीति की बिना बालों की चूत इतनी प्यारी लगी कि मेने सोचा कि क्यों ना में भी अपनी चूत की झांते हमेशा सॉफ रखूं" स्वीटी ने कहा और देखा की शमा प्रीति का नाम सुनकर चौंक पड़ी थी.. "और प्रीति ने ये भी कहा था कि राज को बिना बालों की चूत बहोत पसंद

है" शमा ने फिर से कहा. "क्या तुम सच कह रही हो?" "हां" स्वीटी ने कहा, "और उसे बिना बालों की चूत के साथ साथ पॅंटी भी बहोत पसंद है.. और सच कहूँ इस बिना बालों की चूत

मे जब उसका लंड घुसता है तो बहोत मज़ा आता है" "स्वीटी एक बात सच सच बताना.. क्या तुम्हे प्रीति और राज के साथ चुदाई करने मे मज़ा आता है" शमा ने अपनी छोटी बेहन से पूछा...जो अपने गीले बदन से टवल से पौंछ रही थी.. "हां दोनो की अपनी अपनी कला है और दोनो के साथ मुझे एक अलग ही मज़ा आता है" स्वीटी ने जवाब दिया. "अगर कभी तुम्हे दोनो मे से एक को चुनना पड़े तो तुम किसे चुनोगी?" शमा ने आगे पूछा.

"मुझे पता नही शमा.. हां अगर कभी ऐसा हुआ तो उसका जवाब में तभी दे सकूँगी.. लेकिन तुम ये क्यों पूछ रही हो? "बस में ये जानने की कोशिश कर रही थी कि तुम दोनो ये काम अपनी अपनी मर्ज़ी से करती हो या फिर कोई ज़बरदस्ती करता है" शमा ने जवाब दिया. "क्या तुम्हे ऐसा लगता है कि प्रीति मेरे साथ ज़बरदस्ती करती है?" "पता नही पर हमेशा मेने देखा कि वो हमेशा मुझे नंगी देखना चाहती है या फिर मुझे छूना चाहती है जिससे में कभी कभी नर्वस हो जाती हूँ" शमा ने जवाब दिया. "किस बात से नर्वस हो जाती हो.. उसके छूने से या फिर ये सोच कर कि एक लड़की के साथ सेक्स करना उचित नही है" स्वीटी ने पूछा.

'शायद दोनो से.. पर ज़्यादा मुझे छूने से.. वो मुझे सोचने या संभलने का मौका ही नही देती हमेशा मुझपे चढ़ि आती है" शमा ने कहा. "हो सकता है कि तुम्हारा सोचना सही हो... पर इसका मतलब ये हुआ कि अगर कोई लड़की तुम्हारे हिसाब से और तुम्हारी मर्ज़ी से तुम्हारे साथ सेक्स करना चाहे तो तुम्हे कोई ऐतराज़ नही है" स्वीटी ने शमा से कहा. "हां मुझे लगता है कि ऐसे हालत मे कोई बुराई नही है" शमा ने अपनी छोटी बेहन से कहा. वो समझ रही थी कि उसकी बेहन क्या कहना

चाह रही है. "क्या तुम मेरे साथ सेक्स करना पसंद करोगी?" स्वीटी ने शमा से पूछा.. उसकी चूत मे खुजली बढ़ने लगी थी.. "अगर में तुम्हारे हिसाब से पेश आउ तो" "ठीक है" शमा ने कहा उसकी निगाह एक बार फिर अपनी छोटी बेहन के नंगे जिस्म पर घूमने लगी..

"ठीक है हमे जब भी मौका मिला तो हम ज़रूर इस खेल का मज़ा लेंगे" कहते हुए स्वीटी बाथरूम से बाहर चली गयी..
 
प्रीति अपने भाई के पलंग पर बैठी उसका बाथरूम से बाहर आने का इंतेज़ार कर रही थी... जैसे ही वो बाहर आया वो खड़ी हुई और उसे अपनी बाहों मे भर लिया.. दोनो एक दूसरे के होठों को चूसने

लगे... और एक दूसरे के बदन को सहलाने लगे.. राज एक हाथ अपनी बेहन की चुचियो पर पहुँचे और वो उन्हे मसल्ने लगा.. प्रीति ने अपना हाथ नीचे किया और उसकी जीन्स की ज़िप नीचे खिसकाने लगी...और उसके खड़े लंड को आज़ाद कर दिया... प्रीति फिर नीचे बैठी गयी उसे पता था कि राज को लंड चुसवाने मे बहोत मज़ा आता था और वो चाहती थी की राज का लंड पूरी तरह तन जाए और वो उसे अपनी चूत मे ले ले.. राज देख रहा था कि किस तरह उसकी बेहन उसके लंड को मुँह उपर नीचे कर चूस रही है... "तुम कितना अछा लंड चूस्ति हो प्रीति" राज ने उसे अपने कपड़े उतारने को कहा जिससे वो उसे कुछ दीखा सके.. प्रीति ने खुशी खुशी अपने कपड़े उतारे और पलंग पर लेट गयी..

राज ने पहले अपने कपड़े उतारे और फिर अलमारी से कुछ निकालने लगा... फिर वो प्रीति की तरफ पलटा.. प्रीति की निगाह अपने भाई के खड़े लंड पर पड़ी.. फिर उसने देखा कि उसके भाई ने हाथों मे कुछ पकड़ रखा है....वो एक गुलाबी रंग का डिल्डो था...

"मेने मम्मी के रूम की तलाशी ली थी. वहाँ तो कई तरह के खिलोने है" राज ने कहा. "हे भगवान.. मेने तो उस दिन ऐसे ही मज़ाक मे कहा था" "हां पर तुम्हारी सोच सही थी..." राज ने कहा, "और अब में इसे तुम पर आजमाना चाहता हूँ" "और अगर में तुम्हे ऐसा ना करने दूँ तो?" प्रीति ने उससे पूछा.. लेकिन राज जानता था कि वो उसे सिर्फ़ चिढ़ा रही है.. "तुम्हारी मर्ज़ी फिर में कपड़े पहन यहाँ से चला जाउन्गा" राज ने भी उसे चिढ़ाते हुए कहा. "जैसे कि तुम मुझे इस हालत मे छोड़ के जा सकते हो मार नही डालूंगी" कहकर प्रीति ने अपनी टाँगे और फैला दी.... राज उसकी टाँगों के बीच आ गया और और उस नकली लंड को उसकी चूत पर रख रगड़ने लगा..

"राज पहले मेरी चूत को अपनी जीब से अछी तरह चाट कर गीला कर दो फिर इसे अंदर घुसाना" प्रीति ने अपने भाई से कहा. राज नीचे झुका और अपनी जीब से प्रीति की चूत को चूसने और चाटने लगा.. थोड़ी ही देर मे उसकी चूत अछी तरह गीली हो गयी और रस अब उसकी चूत से बह उसकी गंद के छेद को गीला करने लगा.. राज फिर रुक गया और उसने वो डिल्डो फिर से उठा लिया और धीरे धीरे प्रीति की चूत मे घुसाने लगा.. धीरे अंदर बाहर करते हुए वो हर बार उस नकली लंड को ज़यादा अंदर तक घुसा देता... प्रीति थोड़ा उठ कर बैठ गयी जिससे वो नकली लंड को अपनी चूत के अंदर बाहर होता देख सके.. प्रीति वापस पीछेको लेट गयी और राज अब ज़ोर ज़ोर से उस नकली लंड को उसकी चूत के अंदर बाहर करने लगा.... प्रीति के मुँह से सिसकारियाँ निकल रही थी... "ऑश राज बहुत अछा लग रहा है.. ओह... इस रब्बर के खिलोने मे भी मज़ाअ आता है.. ओ हां और अंदर तक घुसा डालो.. ऑश" "राज अपनी टाँगो को मेरे चेहरे की तरफ कर दो.. में तुम्हारा लंड चूसना चाहती हू" प्रीति ने अपने भाई से कहा... राज ने अपनी पोज़िशन बदली और प्रीति के चेहरे के अगल बगल अपनी टाँगे रख दी...और फिर से उस लंड को उसकी चूत के अंदर बाहर करने लगा.... प्रीति ने उसके लंड को पकड़ अपने मुँहे मे लिया और चूसने लगी....

"ओ राज इससे तो मेरे दिल मे दो मर्दों से चुदवाने की इच्छा जाग उठी है...." प्रीति ने कहा और उसके लंड को और ज़ोर ज़ोर से चूसने लगी.. "लाओ ये नकली लंड मुझे दो.." कहकर प्रीति ने राज के हाथों से वो खिलोना ले लिया और फिर उसे अपनी चूत के अंदर बाहर करने लगी.. अब वो राज के लंड को चूस भी रही थी और अपनी चूत को भी लंड का मज़ा दे रही थी.. ज़ोर ज़ोर से लंड को अंदर बाहर करती रही और थोड़ी ही देर मे उसकी चूत ने पानी छोड़ दिया...

प्रीति ने राज के लंड को चूसना बंद कर दिया और उससे कहा कि वो उसके लंड पर चढ़ उसे चोदना चाहती है.. राज ने कोई ऐतराज़ नही किया और वो पलंग पर चित लेट गया... प्रीति उसकी टाँगों पर चढ़

उसकी तरफ पीठ किए उसके लंड को अपनी चूत मे लिया और उछल उछल कर चोदने लगी... प्रीति जब भी उपर को उठती और नीचे बैठी तो उसकी गंद का छेद खोल बंद होता.. राज की आँखें उसकी गंद के छेद पर टिकी हुई थी... राज ने अपनी एक उंगली उसकी गंद के छेद पर रखी और घूमाने लगा.. फिर धीरे से उसने उंगली को अंदर घुसा दिया...

प्रीति ने जब अपन भाई की उंगली अपनी गंद के अंदर महसूस की तो एक बार के लिए रुक गयी और फिर और थोड़ा झुकते हुए धक्के लगाने लगी.. राज की उंगली अब और उसकी गंद के अंदर तक अंदर बाहर होने

लगी... प्रीति जब नीचे बैठती तो राज की उंगली गंद के बाहर होती और जब वो उपर को उठती तो राज की उंगली उसकी गन्ड के और अंदर तक घुस जाती.. उसे अब चूत और गंद दोनो मे मज़ा आने लगा था..
 
राज ने अपनी उंगली उसकी गंद से बाहर निकाली तो प्रीति ने एक राहट की सांस ली लेकिन राज ने पलंग पर पड़े उस नकली लंड को उठाया और उसकी गंद के छेद से लगा दिया... प्रीति को जब नकली लंड का एहसास अपनी गंद पर हुआ तो उसे समझ नही आया कि राज को मना करे या फिर इसका भी मज़ा ले.. लेकिन उसने मज़ा लेने की सोची और थोड़ा उपर को उठ गयी.. और फिर नीचे बैठी... गुलाबी रंग का डिल्डो उसकी गंद की दीवारो को चीरता हुआ अंदर घुसा... दर्द की एक तीव्र लहर सी दौड़ गयी पूरे बदन मे... राज ने प्रीति को जब डिल्डो अपनी गंद मे लेते देखा तो उसने ज़ोर लगाया और अंदर तक घुसाने लगा...

"ऑश राज ज़रा धीरे धीरे कितना दर्द हो रहा है.. लग रहा है जैसे मेरी गंद फट ही जाएगी प्लीज़ आराम से करो.. " प्रीति दर्द से करहा उठी..

"ठीक है पर क्या तुम्हे अछा लग रहा है?" राज ने प्रीति से पूछा. "ऑश हा बता नही सकती... " प्रीति ने कहा और इस दौरान डिल्डो और दो इंच उसकी गंद के अंदर घुस गया.... "बस अब और मत करना कुछ देर के लिए ऐसे ही पकड़े रहो" प्रीति ने कहा.

राज ने उसकी बात मान ली और प्रीति अपनी गंद को हिला हिला कर उस डिल्डो को अपनी गंद मे अड़जस्ट करने लगी.. राज कुछ देर तक तो देखता रहा फिर जब उसे लगा कि अब प्रीति की गंद उस डिल्डो के सहने के

काबिल होगी है तो वो उसे अंदर बाहर करने लगा और वो नकली लंड अब ठीक किसी दूसरे लंड के जैसे बड़े आराम से उसकी गंद के अंदर बाहर हो रहा था....

प्रीति की उत्तेजना का तो कोई हिसाब ही नही था.. वो सिसक रही बड़बड़ा रही थी... "ऑश राज ऑश ये तुमने क्या कर दिया ऑश मेरी पूरे बदन मे आग लग रही है.. ऑश हां घुसा दो अब पूरा ये लंड मेरी गंद मे घुसा दो..... ऑश हाआँ और अंदर तक घुसा दो"

प्रीति अब जोरों से राज के लंड को अपनी चूत मे भी ले रही थी और साथ ही उस डिल्डो को अपनी गंद के अंदर तक भी लेने लगी.. थोड़ी ही देर मे उसकी चूत ने पानी छोड़ दिया.... और वो राज के लंड से उत्तर

उसके बगल मे लेट गयी... "मज़ा आ गया राज मुझे नही पता था कि दो लंड का एहसास इतना मज़ा देगा" प्रीति ने कहते हुए राज की ओर देखा जो अपने गीले और चिकने लंड को मसल रहा था... प्रीति फिर उठी और झुक कर उसके लंड को पकड़ अपने मुँह मे ले चूसने लगी...

"राज तुम मुझे वो जागह दीखा दो जहाँ मम्मी ये खिलोने छुपा के रखती है जिससे अगर तुम ना हो तो ये मेरे काम आ सके.. " प्रीति ने कहा.

अपने कमरे मे आते ही स्वीटी को अपने पीछे दरवाज़ा बंद होने की आवाज़ सुनाई पड़ी तो उसने पलट के देखा.. शमा उसके पीछे पीछे कमरे मे आकर दरवाज़ा बंद कर दिया था... "क्या बात है शमा?" स्वीटी ने अपनी बड़ी बेहन से पूछा. "बस में तुम्हारे और मेरे बीच हुई बात के बारे मे सोच रही थी.. और......" शमा ने कहा. "और?" स्वीटी ने पूछा. "कुछ नही में सोच रही थी कि तुम्हे और प्रीति को आपस मे ऐसा क्या मज़ा आता है.. इसलिए आज में तुम्हे चूम कर देखना चाहती हूँ...." शमा ने जवाब दिया. "ओह्ह तो ये बात है.. तो इतना शर्मा क्यों रही हो" स्वीटी ने उसके नज़दीक आते हुए कहा..
 


शमा की निगाह अपनी छोटी बेहन के चेहरे और होठों पर टीकी हुई थी.... स्वीटी ने अपने सूखे होठों पर ज़ुबान घूमा उन्हे गीला किया... शमा हिम्मत जुटा कर आगे बढ़ी और उसने अपने होठों को अपनी बेहन के होठों पर रख दिया..

शमा तो काम विभोर हो गयी.. उसे इस बात का एहसास ही नही था कि लड़कों के मुक़ाबले लड़कियों के होंठ इतने मुलायम और मीठे हो सकते है.... उसने अपनी जीब से अपनी बेहन के होठों को खोला और अपनी जीब उसके मुँह मे दे दी.. स्वीटी ने भी उसकी जीब से अपनी जीब मिला दी...

स्वीटी ने अपनी बेहन को और अपने नज़दीक खींचा और अपना हाथ पीछे से उसकी टी-शर्ट के अंदर डालते हुए उसके बदन को सहलाने लगी... शमा और उतीजित हो गयी और जोरों से उसके होठों के

चूसने लगी.. थोड़ी देर मे अपनी साँसे संभालने के लिए वो उस से अलग हुई....

"स्वीटी में तुम्हारे निपल चूसना चाहती हूँ" शमा ने अपने हाथ स्वीटी की चुचियों पर फिराते हुए कहा... स्वीटी अपनी बेहन की हालत को समझ रही थी.. उसने अपनी टी-शर्ट उतार दी... आज उसने ब्रा नही पहन रखी थी... शमा ने हाथ बढ़ा कर उसकी चुचियों को पकड़ा और धीरे धीरे सहलाने लगी... फिर उसने एक चुचि को अपने हाथों से पकड़ अपना चेहरा झुकाया और निप्पली को अपने मुँह मे ले लिया... और ठीक वैसे ही चूसने लगी जैसे की उसे चूसवाने मे मज़ा आता... दूसरे हाथ से वो दूसरी चुचि को मसल्ने लगी और स्वीटी अपनी बेहन के बालों मे अपनी

उंगलियाँ घूमा उसे उकसाने लगी.... "शमा मुझे तुम्हारी चुचियों को चूसने दो" स्वीटी ने उत्तेजना मे फुसफुसाते हुए कहा... और उसकी टी-शर्ट को उतारने लगी... वो तो अपनी जीब उसकी चूत मे घुसाना चाहती थी लेकिन अपनी बेहन के स्वाभाव से चूप रही... शमा ने स्वीटी को उसकी टी-शर्ट उतारने दी और फिर स्वीटी ने उसकी ब्रा खोल उसे भी निकाल दिया... स्वीटी ने उसे पलंग पर लीटा दिया..

और फिर उसकी चुचियों को अपने मुँह मे ले चूसने लगी..

स्वीटी अपनी बेहन की चुचियों को चूस्ते हुए अपने हाथों से उसके सपाट पेट को सहलाती रही फिर धीरे से हाथ को नीचे खिसकाते हुए उसकी शॉर्ट्स पर ले आई... फिर शॉर्ट्स के बगल से हाथ अंदर डाल उसकी

चूत के बालों से खेलने लगी.. काम उत्तेजना मे शमा तो जैसे पागल सी हो गई थी.. उसने अपनी टाँगे

फैला दी और स्वीटी ने उसकी पॅंटी के बगल से अपना हाथ उसकी चूत पर रख दिया.. शमा का शरीर कांप उठा.. जैसे ही स्वीटी ने उसकी चूत को फैला अपनी उंगली से उसकी चूत के दाने को कुरेदा उसके मुँह से एक आग सी निकल गयी... शमा देखती रही उसकी बेहन ने अपनी उंगलियों को पॅंटी से बाहर निकाल लिया था और अब उसी उंगली को मुँह मे ले चूस रही थी.. उसमे अब अपनी छोटी बेहन के साथ खुल कर

मज़ा लेने की ठान ली.. "ऑश स्वीटी ये क्या कर दिया तुमने.... ऐसा करो मेरी शॉर्ट्स उतार

दो... अछी तरह मेरी चूत को छुओ में तुम्हारे स्पर्श को मेरी चूत पर महसूस करना चाहती हू"

क्रमशः.......

 
PARIVAR HO TO AISA - paart--19



gataank se aage........

Preeti ek bar fir jhuk kar apne chacha ke thothon ko choosne lagi.... Mohan ne apni bhatiji ki chuchiyon ko pakda aur marod marod kar masalnelaga. .. aur fir aage badh kar usne uske khade nipple ko pane munh me liya aur choosne laga... Preeti par uttejna havi thi wo apne chacha ke hothon ko chooste hue jor jorse apni choot ko ragadne lagi.. wo chahti thi ki abhi isi wakt apne chacha par chadh uske lund ko apni choot me le le lekin use apne chacha ko tadpane me maza aa raha tha.. wo aur jor se hothon ko chooste hue apni choot ragadne lagi aur tabhi uski choot me jaise koi bhuchal aa gaya ho aur andar se lava foot pada.. uski choot jhad kar uske chacha ki janghon ko beeghone lagi.... Preeti jhuk kar apni panty uthane lagi jisse peeche se uske chacha ko uski nagni choot deekh jaye... aur isse pehle ki Mohan use pakadta wo hawa me ek chumban uchalte hue darwaze se bahar ho gayi.. jate jate wo apni t-shirt jameen par se uthana nai bhuli....

Mohan hairat angez sa kursi par baitha tha.. jo kuch bhi hua us par use vishwas nahi ho raha tha.. use afsos ho raha tha ki Preeti ki choot uske itne nazdeek hote hue bhi wo usme apna lund nahi ghusa paya.. wo besahay sa utha aur apne kamre me aakar bistar par ludhak gaya.. Preeti ke munh ke garmi ab bhi wo apne lund par mehsus kar raha tha... kya pata aage kya kya hone wala tha..

Kuch dino baad ki baat hai ek din Shama ne bathroom ka darwaza khatkhtaya to Sweety ne darwaza khol use andar aane ko kaha... "Sorry Sweety. wo kya hai na mein apne makeup ka kuch saman andar bhool gayi thi.." Shama ne andar aate hue kaha jahan uski behan shower ke neeche snan kar rahi thi... Shama apne aap ko rok nahi payi aur uski nigah apni behan ke nange badan par teek gayi...

"Aise kya dekh rahi ho.. kya pehli bar mujhe nangi dekh rahi ho?" Sweety ne hanste hue kaha.. uska dil to kar raha tha ki hath pakad wo Shama ko bhi shower ke neeche khinch leti.. lekin aisa ho nahi

sakta tha isliye usne pani band kiya aur isse pehel ki Shama bothroom se bahar jati usse boli, "jara mujhe towel pakdana" Shama ne khoonti par tanga towel uthaya aur apni behan ko pakdane ke

liye ghoomi to uski nigah Sweety ke nange badan par thehri pani boondon par padi.. jo neeche beh rahi thi..shama ki nigahon ne boondon ka peecha kiya... pani ki boond jab uski chuchiyon se neeche

khisakte hue sapat pet se hote hue uski choot par pahunchi to Shama chaunk padi..

"Sweety tumne to apni choot ke sare baal saaf kiye hue hai?" "Haan" Sweety ne mukurate hue kaha, "wo kya hai na ki mujhe Preeti ki bina balon ki choot itni pyaari lagi ki meine socha ki kyon na mein bhhi apni choot ki jhante hamesha saaf rakhun" Sweety ne kaha aur dekha ki Shama Preeti ka naam sunkar chuank padi thi.. "Aur Preeti ne ye bhi kaha tha ki Raj ko bina balon ki choot bahot pasand

hai" Shama ne phir se kaha. "Kya tum sach keh rahi ho?" "Haan" Sweety ne kaha, "Aur use bina balon ki choot ke sath sath panty bhi bahot pasand hai.. aur sach kahun is bina balon ki choot

me jab uska lund ghusta hai to bahot mazaa aata hai" "Sweety ek baat sach sach batana.. kya tumhe Preeti aur Raj ke sath chudai karne me mazaa aata hai" Shama ne apni choti behan se pucha...jo apne geele badan se towel se paunch rahi thi.. "Haan dono ki apni apni kala hai aur dono ke sath mujhe ek alag hi maza aata hai" Sweety ne jawab diya. "Agar kabhi tumhe dono me se ek ko chunna pade to tum kise chunogi?" Shama ne aage pucha.

"Mujhe pata nahi Shama.. haan agar kabhi aisa hua to uska jawab mein tabhi de sakungi.. lekin tum ye kyon puch rahi ho? "Bas mein ye janne ki koshish kar rahi thi ki tum dono ye kam apni apni marzi se karti ho ya fir koi zabardasti karta hai" Shama ne jawab diya. "Kya tumhe aisa lagta hai ki Preeti mere sath jabardasti karti hai?" "Pata nahi par hamesha meine dekha ki wo hamesha mujhe nangi dekhna chahti hai ya fir mujhe chuna chahti hai jisse mein kabhi kabhi nervous ho jati hoon" Shama ne jawab diya. "Kis baat se nervous ho jati ho.. uske chune se ya fir ye soch kar ki ek ladki ke sath sex karna uchit nahi hai" Sweety ne pucha.

'Shayad dono se.. par jyada mujhe chune se.. wo mujhe sochne ya sambhalne ka mauka hi nahi deti hamesha mujhe chadhi aati hai" Shama ne kaha. "Ho sakta hai ki tumhara sochna sahi ho... par iska matlab ye hua ki agar koi ladki tumhare hisab se aur tumhari marzi se tumhare sath sex karna chahe to tumhe koi aitraaz nahi ho" Sweety ne Shama se kaha. "Haan mujhe lagta hai ki aise halat me koi burai nahi hai" Shama ne apni choti behan se kaha. Wo samajh rahi thi ki uski behan kya kehna

chah rahi hai. "Kya tum mere sath sex karna pasand karogi?" Sweety ne Shama se pucha.. uski choot me khujli badhne lagi thi.. "agar mein tumhare hisab se pesh aaun to" "Theek hai" Shama ne kaha uski nigah ek bar fir apni choti behan ke nange jism par ghoomne lagi..

"Theek hai hame jab bhi mauka mila to hum jaroor is khel ka maza lenge" kehte hue Sweety bathroom se bahar chali gayi..

Preeti apne bahi ke palang par baithi uska bathroom se bahar aane ka intezar kar rahi thi... jaise hi wo bahar aaya wo khadi hui aur use apni bahon me bhar liya.. dono ek doosre ke hothon ko choosne

lage... aur ek doosre ke badan ko sehlane lage.. Raj ek hath apni behan ki chuchiyo par pahunche aur wo unhe masalne laga.. Preeti ne apna hath neeche kiya aur uski jeans ki zip neeche khiskane lagi...aur uske khade lund ko azad kar diya... Preeti fir neeche baithi gayi use pata tha ki Raj ko lund chuswane me bahot maza aata tha aur wo chahti thi ki Raj ka lund puri tarah tan jaye aur wo use apni choot me le le.. Raj dekh raha tha ki kis tarah uski behan uske lund ko munh upar neeche kar choos rahi hai... "tum kitna acha lund choosti ho Preeti" Raj ne use apne kapde uttarne ko kaha jisse wo use kuch deekha sake.. Preeti ne khushi khushi apne kapde uttare aur palang par let gayi..

Raj ne pehle apne kapde uttare aur fir almari se kuch nikalne laga... fir wo Preeti ki taraf palta.. Preeti ki nigah apne bhai ke khade lund par padi.. fir usne dekha ki uske bhai ne hathon me kuch pakad rakha hai....wo ek gulabi rang ka dildo tha...

"Meine mummy ke room ki talashi li thi. wahan to kai tarah ke khilone hai" Raj ne kaha. "Hey bhagwan.. meine to us din aise hi mazak me kaha tha" "Haan par tumhari soch sahi thi..." Raj ne kaha, "aur ab mein ise tum par ajmana chahta hun" "Aur agar meint umhe aisa na karne doon to?" Preeti ne usse pucha.. lekin Raj janta tha ki wo use sirf chidha rahi hai.. "Tumhari marzi fir mein kapde pehan yahan se chala jaunga" Raj ne bhi use chidhate hue kaha. "Jaise ki tum mujhe is halat me chod ke ja sakte ho mar nahi dalungi" kehkar Preeti ne apni tange aur faila di.... Raj uski tangon ke beech aa gaya aur aur us nakli lund ko uski choot par rakh ragadne laga..

"Raj pehel meri choot ko apni jeeb se achi tarah chaat kar geela kar do fir ise andar ghusana" Preeti ne apne bhai se kaha. Raj neeche jhuka aur apni jeeb se Preeti ki choot ko choosne aur chaatne laga.. thodi hi der me uski choot achi tarah geeli ho gayi aur ras ab uski choot se beh uski gand ke ched ko geela karne laga.. Raj fir ruk gaya aur usne wo dildo fir se utha liya aur dheere dheere Preeti ki choot me ghusane laga.. dheere andar bahar karte hue wo har bar us nakli lund ko jayada andar tak ghusa deta... Preeti thoda uth kar baith gayi jisse wo nakli lund ko apni choot ke andar bahar hota dekh sake.. Preeti wapas peecheko let gayi aur Raj ab jor jor se us nakli lund ko uski choot ke andar bahar karne laga.... Preeti ke munh se siskariyan nikal rahi thi... "OHHH RAJ BAHOT ACHA LAG RAHA HAI.. OH... IS RUBBER KE KHILONE ME BHI MAZAAA AATA HAI.. OHH HAAN AUR ANDAR TAK GHUSA DALO.. OHHH" "Raj apni tango ko meri chehre ki taraf kar do.. mein tumhara lund choosna chahti hooon" Preeti ne apne bhai se kaha... Raj ne apni position badli aur Preeti ke chehre ke agal baga apni tange rakh di...aur fir se us lund ko uski choot ke andar bahar karne laga.... Preeti ne uske lund ko pakad apne munhe me liya aur choosne lagi....
 


"OHH RAJ ISSE TO MERE DIL ME DO MARDON SE CHUDANE KI ICHHA JAG UTHI HAI...." Preeti ne kaha aur uske lund ko aur jor jor se choosne lagi.. "Lao ye nakli lund mujhe do.." kehkar Preeti ne Raj ke hathon se wo khilona le liya aur fir use apni choot ke andar bahr karne lagi.. ab wo Raj ke lund ko choos bhi rahi thi aur apni choot ko bhi lund ka maza de rahi thi.. jor jor se lund ko andar bahar karti rahi aur thodi hi der me uski choot ne pani chod diya...

Preeti ne Raj ke lund ko choosna band kar diya aur usse kaha ki wo uske lund par chadh use chodna chahti hai.. Raj ne koi aitaraz nahi kiya aur wo palang par chit let gaya... Preeti uski tangon par chadh

uski taraf peeth kiye uske lund ko apni choot me liya aur uchal uchal kar chodne lagi... Preeti jab bhi upar ko uthti aur neeche baithi to uski gand ka ched khol band hota.. Raj ki aankhen uski gand ke ched par tiki hui thi... Raj ne apni ek ungli uski gand ke ched par rakhi aur ghoomane laga.. fir dheere se usne ungli ko andar ghusa diya...

Preeti ne jab apn bhai ki ungli apni gand ke andar mehsus ki to ek bar ke liye ruk gayi aur fir aur thoda jhukte hue dhakke lagane lagi.. Raj ki ungli ab aur uski gand ke andar tak andar bahar hone

lagi... Preeti jab neeche baithti to Raj ki ungli gand ke bahar hoti aur jab wo upar ko uthti to Raj ki ungli uski gane ke aur andar tak ghus jaati.. use ab choot aur gand dono me maza aane laga tha..

Raj ne apni ungli uski gand se bahar nikali to Preeti ne ek rahat ki sans le lekin Raj ne palang par pade us nakli lund ko uthaya aur uski gand ke ched se laga diya... Preeti ko jab ankli lund ka ehsas apni gand par hua to use samajh nahi aaya ki Raj ko mana kare ya fir iska bhi maza le.. lekin usne maza lene ki sochi aur thoda upar ko uth gayi.. aur fir nieeceh baithi... gulabi rang ka dildo uski gand ki deewraon ko cheerta hua andar ghusa... dard ki ek triv lehar si daud gayi pure badan me... Raj ne Preeti ko jab dildo apni gand em lete dekha to usne jor laga ki aur andar tak ghusane laga...

"OHHH RAJ JARA DHEERE DHEERE KITNA DARD HO RAHA HAI.. LAG RAHA HAI JAISE MERI GAND FAT HI JAYEGI PLEASE ARAAAM SE KARO.. " Preeti dard se karha uthi..

"Theek hai par kya tumhe acha lag raha hai?" Raj ne Preeti se pucha. "OHHHH HAAAAN BATA NAHI SAKTI... " Preeti ne kaha aur is dauran dildo aur do inch uski gand ke andar ghus gaya.... "Bas ab aur mat karna kuch der ke liye aise hi pakde raho" Preeti ne kaha.

Raj ne uski baat man lee aur Preeti apni gand ko hila hila kar us dildo ko apni gand me adujst karne lagi.. Raj kuch der tak to dekhta raha fir jab use laga ki ab Preeti ki gand us dildo ke sehne ke

kabil hogi hai to wo use andar bahar karne laga aur wo nakli lund ab theek kisi doosre lund ke jaise bade araam se uski gand ke andar bahar ho raha tha....

Preeti ki uttejna ka to koi hisaab hi nahi tha.. wo sisak rahi badabada rahi thi... "OHHH RAJ OHHH YE TUMNE KYA KAR DIYA OHHH MERI PURE BADAN ME AAG LAG RAHI HAI.. OHHH HAAN GHUSA DO AB PURA YE LUND MERI GAND ME GHUSA DO..... OHHH HAAAN AUR ANDAR TAK GHUSA DO"

preeti ab joron se Raj ke lund ko apni choot me bhi le rahi thi aur sath hi us dildo ko apni gand ke andar tak bhi lene lagi.. thodi hi der me uski choot ne pani chod diya.... aur wo Raj ke lund se uttar

uske bagal me let gayi... "Maza aa gaya Raj mujhe nahi pata tha ki do lund ke ehsas itna mazaa dega" Preeti ne khete hue Raj ki aur dekha jo apne geele aur chikne lund ko masal raha tha... Preeti fir uthi aur jhuk kar uske lund ko pakad apne munh me le choosne lagi...

"Raj tum mujhe wo jaagah deekha do jahan mummy ye khilone chupa ke rakhti hai jisse agar tum na ho to ye mere kaam aa sake.. " Preeti ne kaha.

Apne kamre me aate hi Sweety ko apne peeche darwaza band hone ki awaaz sunai padi to usne palat ke dekha.. Shama uske peeche peeche kamre me aakar darwaza band kar diya tha... "Kya baat hai Shama?" Sweety ne apni badi behan se pucha. "Bas mein tumhare aur mere beech hui baat ke bare me soch rahi thi.. aur......" Shama ne kaha. "Aur?" Sweety ne pucha. "Kuch nahi mein soch rahi thi ki tumhe aur Preeti ko apas me aisa kya maza aata hai.. isliye aaj mein tumhe choom kar dekhna chahti hoon...." Shama ne jawab diya. "Ohh to ye baat hai.. to itna sharma kyon rahi ho" Sweety ne uske nazdeek aate hue kaha..

Shama ki nigah apni choti behan ke chehre aur hothon par teeki hui thi.... Sweety ne apne sukhe hothon par juban ghooma unhe geela kiya... Shama himmat juta kar aage badhi aur usne apne hothon ko apni behan ke hothon par rakh diya..

Shama to kaam vibhor ho gayi.. use is baat ka ehsas hi nahi tha ki ladkon ke mukable ladkiyon ke honth itne mulayam aur meethe ho sakte hai.... usne apni jeeb se apni behan ke hothon ko khola aur apni jeeb uske munh me de di.. Sweety ne bhi uski jeeb se apni jeeb mila di...

Sweety ne apni behan ko aur apne nazdeek khincha aur apna hath peeceh se uski t-shirt ke andar dalte hue uske badan ko sehalne lagi... Shama aur uteejit ho gayi aur joron se uske hothon ke

choosne lagi.. thodi der me apni sanse sambhalne ke liye wo us se alag hui....

"Sweety mein tumhare nipple choosna chahti hoon" Shama ne apne hath Sweety ki chuchiyon par firate hue kaha... Sweety apni behan ki halat ko samajh rahi thi.. usne apni t-shirt uttar di... aaj sune bra nahi pehan rakhit thi... Shama ne hath badha kar uski chuchiyon ko pakda aur dheere dheere sehalne lagi... fir usne ek chuchi ko apne hathon se pakad apna chehra juhkaya aur nippli ko apne munh me le liya... aur theek waise hi choosne lagi jaise ki use chooswane me maza aata... doosre hath se wo doosri chuchi ko masalne lagi aur Sweety apni behan ke balon me apni

ungliyan ghoom use uksane lagi.... "Shama mujhe tumhari chuchiyon ko choosne do" Sweety ne uttejna me phusphusate hue kaha... aur uski t-shirt ko uttarne lagi... wo to apni jeeb uski choot me ghusana chahti thi lekin apni behan ke swabhav se choop rahi... Shama ne Sweety ko uski t-shirt uttarne di aur fir Sweety ne uski bra khol use bhi nikal diya... Sweety ne use palang par leeta diya..

aur fir uski chuchiyon ko apne munh me le choosne lagi..

Sweety apni behan ki chuchiyon ko chooste hue apne hathon se uske sapat ke sehlati rahi fir dheere se hath ko neeche khiskate hue uski shorts par le aayi... fir shorts ke bagal se hath andar dal uski

choot ke balon se khelne lagi.. Kam uttejna me Shama to jaise pagal si ho gai thi.. usne apni tange

faila di aur Sweety ne uski panty ke bagal se apna hath uski choot par rakh diya.. Shama ka sharir kanp utha.. jaise hi Sweety ne uski choot ko faila apni ungli se uski choot ke dane ko kureda uske munh se ek aag si nikal gayi... shama dekhti rahi uski behan ne apni ungliyon ko panty se bahar nikal liya tha aur ab usi ungli ko munh me le choos rahi thi.. usme ab apni choti behan ke sath khul kar

maza lene ki than leee.. "Ohhh Sweety ye kya kar diya tumne.... aisa karo meri shorts uttar

do... achi tarah meri choot ko chuoo mein tumhare sparsh ko meri choot par mehsus karna chahti hooon"

kramashah.......

 


परिवार हो तो ऐसा - पार्ट--20


गतान्क से आगे........

स्वीटी को उम्मीद तो थी कि ऐसा ही होगा.. उसने फिर भी काँपते हाथों से अपनी बेहन की शॉर्ट्स खोली और नीचे खिसका कर उतार दी... उसने देखा कि उसकी नीले रंग की पॅंटी बीच मे से गीली हो कर उसकी

चूत से चिपक गयी थी... उसने पॅंटी के एलास्टिक मे उंगलियाँ फँसाई और उसकी पॅंटी को नीचे खिसका उतार दी.. और फिर उसकी टाँगो को सहलाते हुए अपने हाथ उपर को ले आई... उसने देखा कि उसकी तराशी हुए झांते रस से भीग चमक रही थी.. स्वीटी का दिल तो किया कि वो तभी उसकी चूत पर टूट पड़े और उसकी चूत का रस पी जाए लेकिन एक बार के लिए उसने इस ख्याल को झटक दिया और उसपर लेट गयी... अपनी चुचियों को उसकी चुचियों से मसल्ते हुए वो उसके होठों को चूसने लगी.. अपनी जांघों को उसकी

टाँगों के बीच फँसा वो उसकी चूत को अपनी जांघों से रगड़ने लगी.. शमा के मुँह से कराह फुट रही थी..

तभी अपनी बेहन के बदन को चाट्ती और चूमती हुई नीचे को बढ़ी और जैसे ही उसके अपनी जीब उसकी चूत पर रखी शमा के बदन मे एक करेंट सा दौड़ गया उसे लगा कि उसकी चूत पर किसी ने बिजली का नंगा तार रख दिया.. स्वीटी की नुकीली और गरम जीब उसे बहोत अछी लगी..

स्वीटी ने पहले अपनी जीब को उसकी चूत पर उपर से नीचे फिराते हुए बहते रस को चाटती रही फिर उसकी चूत को अपनी उंगीयों से फैला उसने अपनी जीब अंदर घुसा दी.. कामविभोर हो उसने अपन हाथ अपनी

छोटी बेहन के सिर पर रखा और उसके बालों मे अपनी उंगलियाँ फिराने लगी...

स्वीटी अब अपनी जीब को उसकी चूत के अंदर बाहर करने लगी.. शमा की चूत मे बहाव तेज हो गया वो अपनी कमर उठा अपनी चूत को और उसके मुँह पर रगड़ने लगी.. और सिसकने लगी.. "ऑश स्वीटी ऑश हाआँ और अंदर तक घूसा के चूस ओ हां और अंदर तक चूस ओ चूस" स्वीटी ने अपनी जीब की रफतार बढ़ा दी और एक चीख के साथ शमा झाड़ गयी.. स्वीटी वापस अपनी बेहन के बदन पर चढ़ गयी और उसकी चुचि को मसल्ते हुए उसके होठों को चूम लिया..

शमा ने अपनी छोटी बेहन के होंठो को चूम उसे थॅंक्स कहा और वादा किया कि भविश्य मे उसकी चूत चूस वो इस मज़े का बदला ज़रूर चुकाएगी..

राज नंगा अपने कंप्यूटर के सामने कुर्सी पर बैठा था और अपने खड़े लंड को मुट्ठी मे भींच मसल रहा था.. स्क्रीन पर गीली चूत अपनी पॅंटी के बगल से हाथ डाल अपनी चूत से खेल रही थी...

राज मस्ताना} आज में चाहता हूँ कि तुम अपनी चूत मे वो नकली लंड घुसाओ.

गीली चूत} ठीक है जैसी तुम्हारी इच्छा.. ज़रा रूको में अभी आई.

राज मसाना} ओके

गीली चूत} क्या ये वाला चलेगा.

राज तो जैसे कुर्सी पर गिर पड़ा... उसकी आँखे फटी रह गयी. गीली चूत के हाथ मे वही गुलाबी रंग का डिल्डो था जो कि पिछली रात राज ने प्रीति की चूत और गंद मे घुसाया था.. और उसे पक्का यकीन था कि ये वही खिलोना था जो गीली चूत ने पकड़ रखा था.. और फिर उसे याद आया कि मम्मी के कलेक्षन मे एक वैसा ही डिल्डो उसने देखा था जो एक बार गीली चूत ने अपनी चूत और गंद मे घुसा

कर उसे दीखाया था..
 


राज को अब भी यकीन था था कि जो औरत वेब कॅम पर उसके सामने अपनी चूत से खेलती है.. जो औरत एक होटेल मे चादर के पीछे उसे चोदने दे सकती है.. अपनी गंद मे उसका लंड ले सकती है वो किसी भी हालत मे उसकी मा नही हो सकती लेकिन प्रमाण को झुटलाया भी तो नही जा सकता था.

राज को पता था कि इस समय वो और उसकी मा ही घर पर है. पर उसे लगा था कि उसकी मम्मी सोने चली गयी है.. अब उसे एक ही काम करना था.. उसे पता लगाना था.. ये औरत उसकी मम्मी हो सकती है इस ख्याल से ही वो और उत्तेजित होने लगा.. उसके ख़याल मे पहले की सब घटनाए आने लगी..

कैसे उसने अपनी मम्मी की बिना बालों की चूत देखी थी और फिर कैसे उसने उनकी पॅंटी को अपने लंड पर लपेट मूठ मारी थी... और अगर सही मे ये औरत उसकी मम्मी निकली तो जिंदगी मे तो जैसे चार चाँद लग जाएँगे... राज अब अपने लंड को स्क्रीन पर देखते हुए मसल रहा था जहाँ वो नकली लंड अब गीली चूत की चूत के अंदर बाहर हो रहा था..

राज मस्ताना} अब इस डिल्डो को मेरे लिए अपनी गंद मे घुसा दो.

गीली चूत} जैसे तुम कहो डार्लिंग.

राज मस्ताना} अपने घुटनो पर होकर.

गीली चूत}ओ के

राज ने देखा कि वो खड़ी होकर अपने आप को वेब कॅम के सामने अड्जस्ट करने लगी जिससे वो आछी तरह से देख सके और फिर उस डिल्डो को वो अपनी गंद के अंदर बाहर करने लगी.. और दूसरे हाथ की उंगली को

अपनी चूत के अंदर बाहर कर रही थी.. फिर उसे उससे कहा कि वो थोडा मोइस्तेरुzइएर लेकर अभी वापस आता है..

राज दबे पावं अपने कमरे से बाहर निकल अपने मम्मी डॅडी के बेडरूम की ओर बढ़ा.. और धीरे से कमरे के हॅंडल को खोला जिससे की कोई आवाज़ ना हो उसे यकीन था कि उसकी मम्मी इस वक्त सो रही होगी और वो उन्हे डिस्टर्ब नही करना चाहता था.. पर जैसे ही थोडा दरवाज़ा खुला उसकी तो साँसे जैसे हलक मे ही अटक गयी.. कमरे के अंदर उसकी मम्मी वेब कॅम के सामने अपनी गंद मे नकली लंड को अंदर बाहर कर रही थी और साथ ही अपनी चूत मे अपनी उंलगी को..

राज का तो शरीर जैसे सुन्न पड़ गया उसकी समझ मे नही आ रहा था कि क्या करे.. क्या वो अपनी मम्मी को बता दे कि उसे सब पता चल गया? के वो इसी समय कमरे के अंदर जा कर उनकी चूत मे उंगलियों की जागह अपना लंड डाल उनकी चुदाई कर दे.... उसके दीमाग मे यही सब ख़याल दौड़ रहे थे.. लेकिन अपने ख़यालों को झटक वो चुपचाप वहाँ से खिसक वापस अपने कमरे मे आ गया..

वो चुप चाप कंप्यूटर स्क्रीन के सामने अपनी कुर्सी पर बैठ गया.. और स्क्रीन पर देखने लगा.. जहाँ उसकी मम्मी उसे खुश करने के लिए अपनी गंद मे उस डिल्डो को घुसा अंदर बाहर कर रही थी..

राज का लंड अब भी पूरी तरह तना हुआ था.. उसका दीमाग काम नही कर रहा था वो सोच रहा था कि उसकी मा को उसके बारे मे पता कैसा चला और ऐसी क्या बात हुई कि उसकी मम्मी ने उससे मूठ मारने की फरमाइश की और फिर बाद मे उससे होटेल मे छुप कर चुदवाया भी...और गंद भी मरवाई..

गीली चूत} राज अपने लंड को ज़ोर ज़ोर से मस्लो में तुम्हारे लंड से वीर्य की पिचकारी छूटते हुए देखना चाहती हूँ.

राज मस्ताना} हां क्यों नही

राज ने अपने लंड पर थोड़ा माय्स्टयरिसर लगाया और अपने लंड को मूठ मारने लगा... और उसकी मम्मी ज़ोर ज़ोर से डिल्डो को अपनी गंद के अंदर बाहर करने लगी..

तभी उसे याद आया कि उसकी मम्मी ने अपनी सहेली को भी उसे मुट्ठी मारते दीखाया था.. और उसे यकीन था कि वो सहेली और कोई नही उसकी चाची ही होगी.... और तभी उसके लंड ने ज़ोर की पिचकारी हवा

मे छोड़ी...

राज सोच रहा था कि अब उसे क्या करना चाहिए? उसे अपनी मम्मी की चुदाई करने मे तकलीफ़ नही थी पर अगर उन्हे पता चल गया कि वो सब जानता है तो उनका रिक्षन क्या होगा वो यही सोच रहा था.. और अगर साथ ही प्रीति को सब पता चल गया तो कैसे बिहेव करेगी.. इन सब बातों का उसे हल निकालना ही होगा...
 
एक शाम नेहा के घर पर वसुंधरा और नेहा दोनो शाम की चाइ पी रहे थे.... "नेहा बहोत दीनो से मैं तुमसे कुछ कहना चाहती हूँ" वासू ने अपनी देवरानी और सहेली से कहा... "हां कहो" नेहा ने कहा.. वो अचानक वासू की बात से चौंक पड़ी थी

"तुम तो जानती ही हो कि हम दोनो ने साथ साथ राज को वेब कॅम पर मूठ मारते हुए देखा था.." वासू ने कहा. "हां वो रात मैं कैसे भूल सकती हूँ आज जब उसके मोटे लंबा लंड मेरी आँखों के सामने आता है तो मेरी चूत गीली हो जाती है" नेहा ने जवाब दिया. "में ये कहना चाहती हूँ कि मेने उसके लंड को जीता जागता इन आँखों से देखा है" कहकर वासू ने अपना मुँह भींच लिया.. और अपनी देवरानी के चेहरे को घूर्ने लगी..

"ये क्या कह रही हो दीदी.. क्या तुम उसके कमरे के दरवाज़े के पीछे खड़ी रहती हो या फिर वो जब नहाने जाता है तो बाथरूम मे ताक झाँक करती रहती हो" नेहा ने कुर्सी पर आगे झुकते हुए कहा.. उसकी चूत मे खुजली मचने लगी थी.. और वो अपनी जेठानी से और जानकारी पाना चाहती थी..

"तुझे बुरा तो नही लग रहा ना?" वासू ने अपनी देवरानी से पूछा. "मुझे क्यों बुरा लगेगा.. क्या हम दोनो आपस मे सेक्स का खेल नही खेलते.. फिर हम दोनो ने साथ साथ राज को हमारे लिए मूठ मारते भी

देखा है.. पर हां मुझे असचर्या ज़रूर हो रहा है कि तुममे इतनी हिम्मत आ गयी कि तुम अपने ही बेटे का लंड हक़ीकत मे देख सको" नेहा ने जवाब दिया..

"मेने जो किया वो कमरे या बाथरूम मे ताक झाँक करने से भी ज़्यादा ख़तरनाक था.." वासू ने कहा. "तो क्या तुमने उसके कमरे मे वीडियो कॅमरा छुपाया था..?" नेहा ने खिलखलाते हुए पूछा..

"नही ऐसा कुछ नही बल्कि इससे भी ज़्यादा ख़तरनाक.. ठीक है में तुम्हे बताती हूँ..." वासू ने कहा.. फिर वसुंधरा ने शुरू से पूरी बात उसे बताई कि किस तरह उसने अपने ही बेटे को होटेल के बंद

कमरे मे मिलने के लिए बुलाया और अपनी आवाज़ बदल कमरे के बीच मे एक चादर बाँध दी जिससे वो अपने ही बेटे के लंड को चूस सके और उसके लंड को अपनी चूत मे ले मज़ा कर सके.. "

नेहा अपनी जेठानी के हर शब्द को बड़ी ध्यान से सुन रही थी.. उसका हाथ खुद बा खुद उसकी चूत पर पहुँच गया था और वो अपनी चूत को रगड़ने लगी थी... आख़िर वासू ने अपनी कहानी ख़तम की..

"तुमने तो कमाल ही कर दिया वासू.. तुम तो बहोत बड़ी छिनाल निकली... " नेहा ने कहा... तुम्हारी सिर्फ़ बात सुनकर मेरी हालत खराब हो गयी है... मन कर रहा है कि अभी कोई चीज़ अपनी चूत मे घुसा लूँ.. लेकिन एक बात मेरी समझ मे नही आ रही ये सब तुमने मुझे क्यों बताया?" नेहा ने पूछा...

"वो इसलिए कि जिस दिन तुम उसके लंड को वेब कॅम पर देख रही थी तो मुझे लगा कि शायद तुम भी उसके लंड को अपनी चूत मे लेना चाहती हो... उससे चुदवाना चाहती हो" वासू ने जवाब दिया... "क्या तुम सही मे सच कह रही हो?" नेहा ने पूछा.. उसे अपनी जेठानी की बात पर विश्वास नही हो रहा था...
 


"हां नेहा मैं सच कह रही हूँ... तुम नही जानती ये सोच कर ही की मेरी अपनी सहेली मेरी देवरानी अपने ही भतीजे से चुडवाएगी मुझे कुछ होने लगता है... और अगर मौका लगा तो साथ मे चुदवा कर कितना मज़ा आएगा.. है ना?" वासू ने जवाब दिया..

"एक बात कहूँ अगर तुम्हे बुरा ना लगे तो.. अगर तुम इतनी बड़ी छिनाल हो सकती हो कि अपने ही बेटे से चुदवा लो तो में भी कम छीनाल नही हू.... अपने ही भतीजे का लंड अपनी चूत मे लेने के

ख़याल से ही कुछ होता है.. और अगर उसका लंड मेरी चूत मे और तुम्हारी बिना बालों की चूत मेरे मुँह पर तो मज़ा और बढ़ जाएगा है ना?" नेहा ने कहा. "पर तुम ये सब करोगी कैसे?" "वो क्या है ना नेहा.. राज ये नही जानता कि गीली चूत कौन है.. इसलिए में उससे पूछूंगी कि क्या वो दो औरतों की चूत एक साथ मे मारना चाहेगा... और में जहाँ समझती हूँ वो मना नही करेगा...

क्यों कि वो यही समझेगा कि वो दूसरी औरत मेरी सहेली है जिससने उसे मूठ मारते देखा था" वासू ने जवाब दिया..

"मुझे तो विश्वास नही हो रहा कि तुम ये सब कर पावगी?" नेहा ने खुश होते हुए कहा.

"वो तो मैं सब कुछ संभाल लूँगी लेकिन एक ही अड़चन है....." वासू ने अपनी बात बीच मे ही छोड़ दी.. "और वो अड़चन क्या है?" नेहा ने अपनी जेठानी से पूछा. "वो क्या है ना चुदाई के मामले मे राज थोड़ा अलग है...जैसे उसे बिना बालों की चूत बहोत अछी लगती है.. और उसे गंद मारने मे बहोत मज़ा आता है... इसलिए मेने उसे पहले ही बता दिया था कि तुम्हारी चूत पर बाल का नामो निशान नही है और तुम्हे भी अपनी गंद मे लंड लेने मे बहोत मज़ा आता है... वैसे तो उसने आज तक

सिर्फ़ मेरी ही गंद मे अपना लंड घुसाया है लेकिन वो एक नई गंद मे अपना लंड घुसाने के लिए बेकरार है" वासू ने कहा.

"वो सब तो ठीक है लेकिन में उसका इतना मोटा और लंबा लंड अपनी गंद मे कैसे ले पाउन्गि.. कितना मोटा है मेरी तो गंद ही फॅट जाएगी... और दूसरी बात मेने आज तक अपनी चूत की झांते सॉफ नही की है.. में मोहन से क्या कहूँगी.. उसने कई बार मुझे चूत के बाल सॉफ करने को कहा लेकिन मेने हर बार मना कर दिया... और अब में अपनी झांते सॉफ करूँगी तो उसे शक़ हो सकता है" नेहा ने

कहा..

"अरे इस बात को लेकर तुम चिंता मत करो.. तुम मर्दों की फ़ितरत को नही जानती.. जब वो तुम्हारी बिना बालों की चूत देखा तो तुम्हे पूछेगा भी नही की तुम्हारा इरादा कैसे बदल गया.. वो तुम्हारी

चूत चूसने मे लगा रहेगा... और जहाँ तक गंद मे लंड लेने का सवाल है.. तुम एक काम करो मोहन से रोज़ गंद मराओ जिससे तुम्हारी गंद थोड़ी फैल जाए... फिर तुम्हे कोई तकलीएफ नही होगी" वासू ने जवाब दिया...

"ठीक है फिर एक काम करते है.. तुम मेरी चूत के बाल सॉफ कर दो और में मोहन का लंड अपनी गंद मे लेकर अपनी गंद को राज के लंड के लिए तय्यार करती हूँ" नेहा ने कहा..

"ठीक है" वासू ने कहा "क्या में तुम्हारी चूत के बाल अभी सॉफ कर दूं?" वासू ने पूछा..

"हां और क्या? शुभ काम मे देरी क्यों" नेहा ने हंसते हुए कहा...दोनो सहेलियाँ खड़ी हुई और बाथरूम की ओर बढ़ गयी...

बाथरूम मे पहुँच कर वासू ने पहले तो सभी समान इकट्ठा किया जो झांते सॉफ करने के काम मे आता है और फिर एक टवल बिछा कर अपनी देवरानी को उसपर लेट जाने को कहा. नेहा अपने कपड़े उतार कर टॉवेरल पर लेट गयी... वासू उस के सामने खड़ी हो गयी और उसके नंगे बदन को निहारने लगी... फिर उसके पास झुकते हुए उसने नेहा के होठों पर एक चुंबन जड़ दिया... और दूसरे हाथ से उसकी चुचीय को मसल्ते हुए उसकी निपल को चिकोटी काट दी..

क्रमशः.......
 
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