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परिवार हो तो ऐसा
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Thread starter
StoryPublisher
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Start date
परिवार हो तो ऐसा-42
गतान्क से आगे...............
देव फिर नीचे खिसका और इस बार उसने अपनी पत्नी की टाँगो को अपने
कंधों पर रख लिया जिससे उसकी चूत थोड़ी हवा मे उठ गयी.. फिर
अपने लंड को चूत से भिड़ा अंदर बाहर करने लगा...
"हाआँ देव ऐसे ही अंदर तक घुसा के धक्के मारो.. ऑश हाां अया
आज तो मज़ा आ गया ऑश हाँ और तेज़ी से मारो.. ओह और ज़ोर ज़ोर से
चोदो... " उसके लंड के साथ साथ अपनी उंगलियों को भी चूत के
अंदर बाहर करते हुए वो जोरों से सिसक जहड़ गयी..
देव ने जब अपनी बीवी को झाड़ता महसूस किया तो उसने दो तीन ज़ोर के
धक्के मारे और अपने लंड को पूरी तरह अंदर तक घुसा उसने भी
उसके रस के साथ अपना रस मिला दिया.....
करीब दो हफ्ते बाद देव को अपने काम से टूर पर जाना पड़ा और
शाम को वासू प्रीति और राज के कमरे मे इकट्ठा हुए....
"प्रीति तुम मम्मी की ये फोटो देखो जो मैने दो दिन पहले खींची
थी... " कहकर राज प्रीति को वासू की फोटो दीखाने लगा जिसमे वासू
पूरी तरह नंगी होकर एक कुर्सी पर बैठी थी और अपनी दोनो टाँगो
को फैलाए एक डिल्डो अपनी चूत मे घुसा रखा था...
"मम्मी क्यों ना हम आज के दिन को यादगार बना दें और जो कुछ हम
तीनो के बीच होने वाला है उसे वेब कॅमरा के ज़रिए कंप्यूटर मे
क़ैद कर लें" राज ने अपने वेब कमेरे को सेट करते हुए कहा....
"जो तुम कहो बेटा मैं सभी बात के लिए तय्यार हूँ" वासू ने
कहा...
"तब तो फिर बहुत मज़ा आ जाएगा" कहकर राज अपनी मम्मी के ब्लाउस के
बटन को खोलने लगा... वासू की सॅटिन की ब्रा में क़ैद चुचियों दीखाई
देने लगी... वासू कॅमरा की तरफ मुँह किए हुए थी.. राज ने पीछे
से उसकी दोनो चुचियों को पकड़ लिया और धीरे धीरे मसल्ने
लगा... फिर उसने ब्रा का हुक खोल दिया.. स्ट्रॅप को कंधों से अलग
कर उसने ब्रा को निकाल दिया.. अब वासू की दोनो चुचियों फड़फदा कर
आज़ाद हो गयी..
राज को इस तरह मम्मी की चुचियों के साथ खेलते देख प्रीति से
रहा नही गया वो अपनी मम्मी के नज़दीक आई और उसके एक निपल को
भींचने लगी.... फिर अपने सिर को उसकी छाती पर रख उसके निपल
को अपने मुँहे मे ले चूसने लगी...
वासू कमरे के बीच खड़ी थी और उसके दोनो बच्चे उसकी एक एक चुचि
को चूस रहे थे.... वो अब अपने दोनो हाथों से उसके बदन को
सहलाने लगी...
अब राज ने अपनी मम्मी को घुमा दिया जिससे उसकी गंद कमेरे के सामने
हो गयी.. उसने उसे अब झुका दिया और और अपनी उंगलियों को उसकी गंद
की दरार मे फिराने लगा..
प्रीति ने ये देख कॅमरा को उठा थोड़ा और नज़दीक किया और राज को
कहा कि वो अपनी जीब का इस्तेमाल करे... राज कपड़े के उपर से अपनी
जीब वासू की गंद और चूत की दरार के बीच फिराने लगा... राज ने
फिर अपनी मम्मी के स्कर्ट को खोल उतार दिया.. वासू अब सिर्फ़ पॅंटी
पहने दोनो बच्चो के बीच खड़ी थी...
राज ने अब प्रीति के हाथों से कॅमरा ले लिया और प्रीति से कहा कि
अब उसकी बारी है.. प्रीति अपनी मा के सामने की ओर बैठ गयी और
उसकी पॅंटी को नीचे खिसकाने लगी.. फिर उसने वासू की टाँगो को थोड़ा
फैलाया और अपनी जीब उसकी साफा चट चूत पर फिराने लगी.. एक
सिसकारी सी उसकी मा के मुँह से फुट पड़ी...
"ओह ओाआहह हाां ऊहह"
वासू से सहन नही हो रहा था और वो वहीं रखी एक कुर्सी पर बैठ
गयी और राज को अपने पास खींच लिया फिर उसकी पॅंट के बटन को
खोल उसने उसके लंड को आज़ाद कर दिया.. राज का लंड पूरी तरह से तन
कर खड़ा था... वासू ने पहले तो लंड को अपनी मुट्ठी मे भर थोड़ी
देर मसला फिर उसे अपने मुँहे मे ले चूसने लगी..
वासू जोरों से अपने ही बेटे के लंड कोचूस्ति रही और उसकी अपनी बेटी
नीचे उसके सामने बैठी उसकी चूत चूस रही थी.. उत्तेजना वासू
पर हावी होती जा रही थी उसने प्रीति को अपनी चूत से अलग किया
और खड़ी हो कुर्सी को पकड़ घोड़ी बन गयी...
राज अब नही रहा जाता तुम पीछे से मेरी चूत मे अपना लंड घुसा
मुझे चोदो" वासू ने कहा.
राज अपनी मा के पीछे आया और अपने लंड को उसकी चूत से सटा थोड़ी
देर घिसने लगा.. फिर उसके दोनो चूतदों को पकड़ उसने एक ज़ोर का
धक्का मारा और उसका लंड वासू की गीली चूत मे घुसता चला
गया... प्रीति ने कॅमरा उठाया और उस द्रिश्य को फ़िल्माने लगी....
प्रीति ने एक हाथ से कॅमरा को पकड़ा हुआ था और दूसरे हाथ की
उंगली को राज के लंड के साथ साथ अपनी मा की चूत मे घुसा दी.. अब
राज का लंड और प्रीति की उंगली वासू की चूत के अंदर बाहर हो रही
थी..
"ऑश राज ओमेरा बेटे ऑश हाआँ ऐसे ही अपना लंड अंदर तक
मेरी चूत मे घुसा मुझे चूओडू ऑश बेटी तुम पीछे क्या कर रही
हूओ यहाँ मेरे सामने आआओ में तुम्हारी चूत को चूसना चाहती
हूओ" वासू ने सिसकते हुए कहा..
प्रीति अपनी मा की आवाज़ सुन वासू के सामने आ गयी और कुर्सी पर
बैठ गयी और अपनी टाँगो को फैला अपनी चूत चौड़ी कर दी.... वासू
ने झुक कर अपना चेहरा उसकी चूत से सताया और उसकी चूत को अपनी
जीब से चाटने लगी.. प्रीति ने अपनी चूत को दोनो हाथों से फैला
दिया और वासू ने अपनी जीब को त्रिकोण का आकार दे दिया.. अब जब भी
राज पीछे से ढकका मारता तो वासू की जीब तेज़ी से प्रीति की चूत
के अंदर घुस जाती.
उत्तेजना मे तीनो पागल हो गये थे.. राज अपनी मा के चूतड़ पकड़
ज़ोर ज़ोर से धक्के मार रहा था और वासू अपनी जीब से अपनी बेटी की
चूत को चोद रही थी.. प्रीति की भी चूत मे गर्मी ज़ोर पकड़ने
लगी थी.. वो अपनी कमर को उठा अपनी मा की जीब को और अंदर तक
ले लेती.. वो भी अपनी मा की तरह सिसक रही थी....
"ऑश माआ हाां ऑश हाआँ और जोरों से चोदो मुझे श हाआँ मा
अपनी जीब को और अंदर तक घुसा दो.. हाआँ चॅटो मेरी चूत को
चूसू"
थोड़ी देर बाद राज ने सभी को आसान बदलने को कहा.. वो अब आकर
कुर्सी पर बैठ गया और उसने प्रीति को उसके लंड पर चढ़ने को कहा...
प्रीति राज की गोद मे चढ़ उसके लंड को अपनी चूत से लगा नीचे
बैठ गयी.. राज का लंड उसकी चूत पूरी तरह समा गया.. फिर उसने
अपनी मा से कहा कि वो अब नीचे आकर प्रीति की चूत के साथ साथ
उसके लंड को भी चाटने को कहा..
वासू अपने बेटे के कहे अनुसार उसकी टाँगो के बीच आ गयी और प्रीति
की चूत से अपनी जीब लगा दी..अब प्रीति उपर को होती तो राज का लंड
वासू के जीब से लगता.. इस तरह वासू अब अपने बेटे के लंड के साथ
साथ अपनी बेटी के चूत को चाट रही थी..
प्रीति ने कॅमरा उठाया और उसे अपनी छाती के पास इस अंदाज़ से रख
दिया कि वासू की जीब और उसकी चूत मे अंदर बाहर होता राज का लंड
सॉफ दीख रहा था..वो उस द्रिश्य को फ़िल्माने लगी..
वासू ने राज के लंड को पकड़ उसे प्रीति की चूत से बाहर निकाला और
अपने मुँह मे ले चूसने लगी.. अपनी ही बेटी के चूत के रस से
भीगे अपने ही बेटे के लंड को वो चटकारे ले कर चूसने लगी....
उसे अपने बेटी की चूत के रस का स्वाद इतना अच्छा लगा कि एक बार फिर
उसने राज के लंड को प्रीति की चूत मे घुसाया और फिर उसे बाहर
निकाल चाटने लगी...
वासू की हालत खराब हो रही थी उसे भी अपनी चूत मे कुछ चाहिए
था.... अपनी ही चूत को अपने हाथों से रगड़ते हुए वो खड़ी हो गयी
राज को और प्रीति को उठने को कहा... प्रीति अपने भाई की गोद से उठ
गयी और राज भी खड़ा हो गया... और वासू जाकर कुर्सी पर बैठ
गयी और अपनी टाँगे फैला दी....
"आआूओ बेटी और अपनी मा की चूओत को अछी तरह चूवसो...ओह देखो
ना कैसे तड़प रही है ये...हां बेटी एयेए जाओ और घुसा दो अपनी
जीएब मेरी चूत मे" वासू उत्तेजना मे सिसक अपनी बेटी से बोली.
प्रीति तो जैसे इसी चीज़ का इंतेज़ार कर रही त.. वो अपनी मा की
टाँगो के बीच आ गयी और उसकी चूत पर अपना चेहरा झुका अपनी
जीभ फिराने लगी.. फिर अपनी उंगलियों से वासू की चूत को फैला उसने
अपनी जीब अंदर घुसा उसे गोल गोल घूमाने लगी.. एक अजीब सी
सनसनी मच गयी वासू की चूत मे वो अपनी कमर उठा अपनी चूत को
और अपनी ही बेटी के मुँह पर दबाने लगी..
राज अपनी मा के पास आ गया और अपने लंड को उसके मुँह के सामने कर
दिया.. वासू एक बार फिर अपने बेटे के लंड को मुँह मे ले चूसने
लगी...
प्रीति ने महसूस किया कि उसकी मा की चूत अकड़ रही है और तभी
रस की धारा बहने लगी जिसे प्रीति खुशी खुशी पी गयी और फिर
अपनी मा के चेहरे से हट वो अपने चेहरे को उठा राज के अंडकोषों को
मुँह मे ले चूसने लगी.. अब मा और बेटी राज के लंड को ज़ोर ज़ोर से
चूस रहे थे..
"ऑश हाआअँ अऊूऊ हाा ओह " एक हुंकार भरते हुए राज के
लंड ने ज़ोर की पिचकारी वासू के गले तक छोड़ी जिसे वासू गीटक
गयी.. वासू उसके लंड को भींच एक एक बूँद निचोड़ निचोड़ कर पीने
लगी...
राज का लंड ढीला पड़ा तो उसने अपने लंड को अपनी मा के मुँह से
बाहर निकाला जिसे प्रीति ने चाट कर सॉफ कर दिया....तीनो पसीने
से लत पथ थके थके वहीं बैठ गये...
पर वासू का दिल अभी कहाँ भरा था वो तो राज के लंड से और
चुदना चाहती थी वो राज के लंड फिर मुँह मे ले चूस कर खड़ा
करने लगी.. थोड़ी ही देर मे राज का लंड फिर खूँटे के तरह तन
गया...
राज ने अपनी मा को कुर्सी के सहारे घोड़ी बना दिया और ठीक वैसे
ही उसने दूसरी कुर्सी पर प्रीति को बना दिया...
"अब में तुम दोनो की गंद मे लंड घुसा चोदुन्गा." राज ने कहा..
प्रीति भी घोड़ी बन गयी तो राज ने एक क्रीम की ट्यूब से ढेर सारी
क्रीम ले दोनो के गंद के छेद पर लगा उसे अच्छी तरह चिकना कर
दिया... फिर अपने लंड को प्रीति की चूत मेघुसा उसे भी अच्छी
तरह गीला कर लिया फिर पहले उसने अपने लंड को अपनी बेहन की गंद
मे घुसा अंदर किया.... एक दर्द की मीठी लहर दौड़ गयी और उसने
अपनी गंद को थोड़ा पीछे कर उसके धक्के का साथ दिया..
"मम्मी तब तक तुम अपनी गंद मे इस डिल्डो को घुसा मज़ा लो" राज ने
कंप्यूटर के बगल मे पड़े डिल्डो को उठा कर देते हुए कहा...
वासू ने अपने बेटे के हाथ से उस नकली लंड को लिया और उसे पीछे से
अपनी गंद के छेद मे घुसा अंदर बाहर करने लगी...
थोड़ी देर अपनी बेहन की गंद मारने के बाद राज अपनी मा के पीछे आ
गया.. वासू ने अपनी गंद से डिल्डो को बाहर निकाला और राज ने उसकी
जगह अपने लंड को घुसा दिया..और अब उसके चूतदों पर ज़ोर ज़ोर के
थप्पड़ मारते हुए ज़ोर ज़ोर के धक्के मारने लगा....
"ऑश हाआँ बेटा ऐसे ही मेरी गंद मे लंड घुसा इसे फाड़ दो.. ओह
साली बहुत तंग करती है हाां फाड़ दो मेरी गंद को ऑश हाां"
नीचे से अपनी चूत मे उंगली करते हुए वासू सिसक पड़ी...
राज अब जगह बदल बदल अपनी बेहन और मा की गंद मार रहा था..
बीच बीच मे वो दोनो की चूत मे भी लंड घुसा धक्के मार
देता....
"हाआँ भैया मेरी भी गंद ऐसे ह्िउ मारो... आज तो मज़ा आ गया....
ऑश हाआँ भैया और अंदर तक घुसा के मारो..." प्रीति भी अपनी
कमर को आगे पीछे कर राज के धक्कों का साथ देते हुए सिसकी..
"हाआँ प्रीति आज तुम्हारी गंद ने तो मज़ा दे दिया... ऑश हाआँ आज
तुम्हारी गंद को मेरे रस से भर दूँगा... " अपने लंड को उसकी गंद
की जड़ तक घुसाते हुए उसने अपना वीर्य अपनी बेहन की गंद मे छोड़
दिया...
वासू और प्रीति अपनी अपनी चूत मे जोरों से उंगली करते हुए झाड़
गयी....
अगले दिन स्वीटी अपने ताऊ जी के घर पहुँची तो प्रीति ने उसे बाहों
मे भर उसका स्वागत किया.. उसके होठों को चूम उसने उसकी लाइक्रा की
टी-शर्ट के उपर से उसकी चुचियों को मसल दिया..
"क्या बात है आज कैसे आना हुआ?" प्रीति ने पूछा...
"सच कहूँ तो आज सुबह से ही चूत मे आग लगी हुई थी.. राज को तो
मेरी चूत का खेहाल रहता नही इसलिए सोचा कि यहाँ आकर देखूं
शायद कोई मेरी चूत की गर्मी को शांत कर सके" स्वीटी ने घर के
अंदर कदम रख हंसते हुए कहा.
"फिर तो तुम सही समय पर आई हो... आज में और राज घर पर
अकेले ही हैं... " प्रीति ने जवाब दिया..
दोनो घर के अंदर आ गये और प्रीति ने दरवाज़ा बंद किया तो उसकी
आवाज़ सुन राज बाहर आ गया....
"हाई स्वीटी कैसी हो?"
"बिल्कुल भी अच्छी नही हूँ.... चूत मे मानो आग लगी हुई है"
स्वीटी ने हंसते हुए कहा..
"तुम्हारी यही अदा तो मुझे पागल कर देती है.. हमेशा चुदवाने को
तय्यार रहती हो"
"ये तो हमेशा चुदास रहती है लेकिन तुम भी तो इनपर पागल हुए
रहते हो" कहकर प्रीति ने स्वीटी के टॉप को उतार दिया.. उसकी दोनो
चुचियाँ फड़ फडा कर आज़ाद हो गयी... उसने आज कोई ब्रा नही पहन
रखी थी.
"हां ये तो है लेकिन तुम जानती हो कि में तुम्हारी इन मस्त गेंदों का
भी कितना दीवाना हूँ" राज ने उनके पास आकर दोनो की चुचियों को
मसल्ते हुए कहा.
प्रीति ने स्वीटी का हाथ पकड़ उसे सोफे पर बिठा दिया... और उसके
एक निपल को मुँह मे ले चूसने लगी.. वहीं राज भी दूसरी ओर से
उसके दूसरे को निपल को मुँह मे ले चुलबुलाने लगा...
"राज आज क्यों ना हम एक खेल खेलते हैं" प्रीति ने स्वीटी की चुचि
को जोरों से मसल्ते हुए कहा..
"ऐसा क्या खेल है?" राज ने पूछा.
"आज इस स्वीटी की बच्ची को पलंग से बाँध देते है और इसके बदन
से खेल इतना उत्तेजित कर देंगे कि ये तड़पने लगेगी चिल्लाने लगेगी..
लेकिन कुछ कर नही पाएगी" प्रीति ने हंसते हुए कहा..
"नही.......... तुम दोनो ऐसा नही कर सकते" स्वीटी ने विरोध करते
हुए कहा. "मुझसे ऐसी ज़्यादती सहन नही होगी.. तुम्हे पता है मेरी
चूत मे कितनी बुरी तरह खुजली मच रही है..."
"अरे क्यों घबरा रही है.. मुझे लगता है कि तुम्हे खूब मज़ा
आएगा" राज ने कहा.
"प्लीज़ राज ऐसा मत करो ना"
"मान भी जाओ स्वीटी हम वादा करते है जब तुम हमे रुकने को कहोगी
हम रुक जाएँगे" प्रीति ने कहा.
"म्म्म्ममम प्लीज़ रुक जाना हां"
क्रमशः..............
Parivar Ho To Aisa-42
gataank se aage...............
Dev fir neeche khiska aur is bar usne apni patni ki tango ko apne
kandhon par rakh liya jisse uski choot thodi hawa me uth gayi.. fir
apne lund ko choot se bhida andar bahar karne laga...
"HAAAN DEV AISE HI ANDAR TAK GHUSA KE DHAKKE MARO.. OHHH HAAAAN AAAH
AAJ TO MAZA AA GAYA OHHH HAN AUR TEJI SE MARO.. OH AUR JOR JOR SE
CHODO... " uske lund ke sath sath apni ungliyon ko bhi choot ke
andar bahar karte hue wo joron se sisak jahd gayi..
Dev ne jab apni biwi ko jhadta mehsus kiya to usne do teen jor ke
dhakke mare aur apne lund ko puri tarah andar tak ghusa usne bhi
uske ras ke sath apna ras mila diya.....
Kareeb do hafte baad Dev ko apne kaam se tour par jana pada aur
shaam ko Vasu Preeti aur Raj ke kamre me ikathaa hua....
"Preeti tum mummy ki ye photo dekho jo maine do din pehle khinchi
thi... " kehkar Raj Preeti ko Vasu ki photo deekhane laga jisme Vasu
puri tarah nangi hokar ek kursi par baithi thi aur apni dono tango
ko failaye ek dildo apni choot me ghusa rakha tha...
"Mummy kyon naa hum aaj ke din ko yaadgar bana den aur jo kuch hum
teeno ke beech hone wala hai use web camera ke jariye computer me
kaid kar len" Raj ne apne web camere ko set karte hue kaha....
"Jo tum kaho beta main sabhi baat ke liye tayyar hoon" Vasu ne
kaha...
"Tab to fir bahut maza aa jayega" kehkar Raj apni mummy ke blouse ke
button ko kholne laga... Vasu ki satin ki bra mein kaid chuchiyon deekhai
dene lagi... Vasu camera ki taraf munh kiye hue thi.. Raj ne peeche
se uski dono chuchiyon ko pakad liya aur dheere dheere masalne
laga... fir usne bra ka hook khol diya.. strap ko kandhon se alag
kar usne bra ko nikal diya.. ab Vasu ki dono chuchiyon fadfada kar
azaad ho gayi..
Raj ko is tarah mummy ki chuchiyon ke sath khelte dekh Preeti se
raha nahi gaya wo apni mummy ke najdeek aayi aur uske ek nipple ko
bheenchne lagi.... fir apne sir ko uski chaati par rakh uske nipple
ko apne munhe me le choosne lagi...
Vasu kamre ke beech khadi thi aur uske dono bacche uski ek ek chuchi
ko choos rahe the.... wo ab apne dono hathon se uske badan ko
sehlane lagi...
Ab Raj ne apni mummy ko ghuma diya jisse uski gand camere ke samne
ho gayi.. usne use ab jhuka diya aur aur apni ungliyon ko uski gand
ki darar me firane laga..
Preeti ne ye dekh camera ko utha thoda aur najdeek kiya aur Raj ko
kaha ki wo apni jeeb ka istamal kare... Raj kapde ke upar se apni
jeeb Vasu ki gand aur choot ki darar ke beech firna laga... Raj ne
fir apni mummy ke skirt ko khol utaar diya.. Vasu ab sirf panty
pehne dono bachon ke beech khadi thi...
Raj ne ab Preeti ke hathon se camera le liya aur Preeti se kaha ki
ab uski bari hai.. Preeti apni maa ke samne ki aur baith gayi aur
uski panty ko neeche khiskane lagi.. fir usne Vasu ki tango ko thoda
failaya aur apni jeeb uski safa chat choot par firane lagi.. ek
siskari si uski maa ke munh se foot padi...
"OHHHHH OHHAAAHHH HAAAAN OOHHHHHHH"
Vasu se sehan nahi ho raha tha aur wo wahin rakhi ek kursi par baith
gayi aur Raj ko apne paas khinch liya fir uski pant ke button ko
khol usne uske lund ko azad kar diya.. Raj ka lund prui tarah se tan
kar khada tha... Vasu ne pehle to lund ko apni mutthi me bhar thodi
der masla fir use apne munhe me le choosne lagi..
Vasu joron se apne hi bete ke lund kochoosti rahi aur uski apni beti
neeche uske samne baithi uski choot choos rahi thi.. uttejna Vasu
par hawi hoti jaa rahi thi usne Preeti ko apni choot se alag kiya
aur khodi ho kursi ko pakad ghodi ban gayi...
Raj ab nahi raha jata tum peeche se meri choot me apna lund ghusa
mujhe chodo" Vasu ne kaha.
Raj apni maa ke peeche aaya aur apne lund ko uski choot se sata thodi
der ghisne laga.. fir uske dono chootadon ko pakad usne ek jor ka
dhakka mara aur uska lund Vasu ki geeli choot me ghusta chala
gaya... Preeti ne camera uthaya aur us drishya ko filmane lagi....
Preeti ne ek hath se camera ko pakda hua tha aur doosre hath ki
ungli ko Raj ke lund ke sath sath apni maa ki choot me ghusa di.. ab
Raj ka lund aur Preeti ki ungli Vasu ki choot ke andar bahar ho rahi
thi..
"OHHHH RAJ OHHHHMERA BETE OHHH HAAAN AISE HI APNA LUND ANDAR TAK
MERI CHOOT ME GHUSA MUJHE CHOOODOO OHHH BETI TUM PEECHE KYA KAR RAHI
HOOO YAHAN MERE SAMNE AAAO MEIN TUMHARI CHOOT KO CHOOSNA CHAHTI
HOOO" Vasu ne sisakte hue kaha..
Preeti apni maa ki awaaz sun Vasu ke samne aa gayi aur kursi par
baith gayi aur apni tango ko faila apni choot chaudi kar di.... Vasu
ne jhuk kar apna chehra uski choot se sataya aur uski choot ko apni
jeeb se chaatne lagi.. Preeti ne apni choot ko dono hathon se faila
diya aur Vasu ne apni jeeb ko trikon ka akaar de diya.. ab jab bhi
Raj peeche se dhakaa marta to Vasu ki jeeb teji se Preeti ki choot
ke andar ghus jati.
Uttejna me teeno pagal ho gaye the.. Raj apni maa ke chutad pakad
jor jor se dhakke mar raha tha aur Vasu apni jeeb se apni beti ki
choot ko chod rahi thi.. Preeti ki bhi choot me garmi jor pakadne
lagi thi.. wo apni kamar ko utha apni maa ki jeeb ko aur andar tak
le leti.. wo bhi apni maa ki tarah sisak rahi thi....
"OHHHH MAAAA HAAAAN OHHH HAAAN AUR JORON SE CHDO MUJHE OHH HAAAN MAA
APNI JEEB KO AUR ANDAR TAK GHUSA DO.. HAAAN CHAATO MERI CHOOT KO
CHOOSOO"
Thodi der baad Raj ne sabhi ko aasan badalne ko kaha.. wo ab aakar
kursi par baith gaya aur usne Preeti ko uske lund par chdhne ko kaha...
Preeti Raj ki god me chadh uske lund ko apni choot se laga neeche
baith gayi.. Raj ka lund uski choot puri tarah sama gaya.. fir usne
apni maa se kaha ki wo ab neeche aakar Preeti ki choot ke sath sath
uske lund ko bhi chaatne ko akha..
Vasu apne bete ke kahe anusar uski tango ke beech aa gayi aur Preeti
ki choot se apni jeeb laga di..ab Preeti upar ko hoti to Raj ka lund
Vasu ke jeeb se lagta.. is tarah Vasu ab apne bete ke lund ke sath
sath apni beti ke choot ko chaat rahi thi..
Preeti ne camera uthaya aur use apni chaati ke paas is andaz se rakh
diya ki Vasu ki jeeb aur uski choot me andar bahar hota Raj ka lund
saaf deekh raha tha..wo us drishya ko filmane lagi..
Vasu ne Raj ke lund ko pakad use Preeti ki choot se bahar nikala aur
apne munh me le choosne lagi.. apni hi beti ke choot ke ras se
bheege apne hi bete ke lund ko wo chatkare le kar choosne lagi....
use apne beti ki choot ke ras ka swad itna achcha laga ki ek bar fir
usne Raj ke lund ko Preeti ki choot me ghusaya aur fir use bahar
nikal chaatne lagi...
Vasu ki halat kharab ho rahi thi use bhi apni choot me kuch chahiye
tha.... apni hi choot ko apne hathon se ragadte hue wo khadi ho gayi
Raj ko aur Preeti ko uthne ko kaha... Preeti apne bhai ki god se uth
gayi aur Raj bhi khada ho gaya... aur Vasu jakar kursi par baith
gayi aur apni tange faila di....
"AAAOOO BETI AUR APNI MAA KI CHOOOT KO ACHI TARAH CHOOOSO...OH DEKHO
NA KAISE TADAP RAHI HAI YE...HAAN BETI AAA JAO AUR GHUSA DO APNI
JEEEB MERI CHOOT ME" Vasu uttejna me sisak apni beti se boli.
Preeti to jaise isi cheez ka intezar kar rahi th.. wo apni maa ki
tango ke beech aa gayi aur uski choot par apna chehra jhuka apni
jeebh firane lagi.. fir apni ungliyon se Vasu ki choot ko faila usne
apni jeeb andar ghusa use gol gol ghoomane lagi.. ek ajeeb si
sansani mach gayi Vasu ki choot me wo apni kamar utha apni choot ko
aur apni hi beti ke munh par dabane lagi..
Raj apni maa ke paas aa gaya aur apne lund ko uske munh ke samne kar
diya.. Vasu ek bar fir apne bete ke lund ko munh me le choosne
lagi...
Preeti ne mehsus kiya ki uski maa ki choot akad rahi hai aur tabhi
ras ki dhara behne lagi jise Preeti khushi khushi pee gayi aur fir
apni maa ke chehre se hat wo apne chehre ko utha Raj ke andkoshon ko
munh me le choosne lagi.. ab maa aur beti Raj ke lund ko jor jor se
choos rahe the..
"OHHHH HAAAAAN AOOOOOO HAAAA OHHHHHH " ek hunkar bharte hue Raj ke
lund ne jor ki pichkari Vasu ke gale tak chodi jise Vasu gitak
gayi.. Vasu uske lund ko bheench ek ek boond nichod nichod kar peene
lagi...
Raj ka lund dheela pada to usne apne lund ko apni maa ke munh se
bahar nikala jise Preeti ne chaat kar saaf kar diya....teeno paseene
se lath path thake thake wahin baith gaye...
Par Vasu ka dil abhi kahan bhara tha wo to Raj ke lund se aur
chudana chahti thi wo Raj ke lund fir munh me le choos kar khada
karne lagi.. thodi hi der me Raj ka lund fir khonnte ke tarah tan
gaya...
Raj ne apni maa ko kursi ke sahare ghodi bana diya aur theek waise
hi usne dusri kursi par Preeti ko bana diya...
"AB MEIN TUM DONO KI GAND ME LUND GHUSA CHODUNGA." Raj ne kaha..
Preeti bhi ghodi ban gayi to Raj ne ek cream ki tube se dher sari
cream le dono ke gand ke ched par laga use achi tarah chikna kar
diya... fir apne lund ko Preeti ki choot meghusa bhi use bhi achi
tarah geela kar liya fir pehle usne apne lund ko apni behan ki gand
me ghusa andar kiya.... ek dard ki meethi lehar daud gayi aur usne
apni gand ko thoda peeche kar uske dhakke ka sath diya..
"MUMMY TAB TAK TUM APNI GAND ME IS DILDO KO GHUSA MAZA LO" Raj ne
computer ke bagal me pade dildo ko utha kar dete hue kaha...
Vasu ne apne bete ke hath se us nakli lund ko liya aur use peeche se
apni gand ke ched me ghusa andar bahar karne lagi...
Thodi der apni behan ki gand marne ke bad Raj apni maa ke peeche aa
gaya.. Vasu ne apni gand se dildo ko bahar nikala aur Raj ne uski
jagah apne lund ko ghusa diya..aur ab uske chootadon par jor jor ke
thappad marte hue jor jor ke dhake marne laga....
"OHHHH HAAAN BETA AISE HI MERI GAND ME LUND GHUSA ISE FAD DO.. OH
SALI BAHUT TANG KARTI HAI HAAAAN FAD DO MERI GAND KO OHHH HAAAAN"
neeche se apni choot me ungli karte hue Vasu sisak padi...
Raj ab jagah badal badal apni behan aur maa ki gand mar raha tha..
beech beech me wo dono ki choot me bhi lund ghusa dhakke mar
deta....
"HAAAN BHAIYA MERI BHI GAND AISE HIU MARO... AAJ TO MAZA AA GAYA....
OHHHH HAAAN BHAIYA AUR ANDAR TAK GHUSA KE MARO..." Preeti bi apni
kamar ko aage peeche kar Raj ke dhakkon ka sath dete hue sisaki..
"HAAAN PREETI AAJ TUMHARI GAND NE TO MAZA DE DIYA... OHHH HAAAN AAJ
TUMHARI GAND KO MERE RAS SE BHAR DOONGA... " apne lund ko uski gand
ki jad tak ghusate hue usne apna viry apni behan ki gand me chod
diya...
Vasu aur Preeti apni apni choot me joron se ungli karte hue jhad
gayi....
Agle din Sweety apne tauji ke ghar pahunchi to Preeti ne use bahon
me bhar uska swagat kiya.. uske hothon ko choomne usne uski lycra ki
t-shirt ke upar se uski chuchiyon ko masal diya..
"kya baat hai aaj kaise aana hua?" Preeti ne pucha...
"Sach kahun to aaj subah se hi choot me aag lagi hui thi.. Raj ko to
meri choot ka khayhal rehta nahi isliye socha ki yahan aakar dekhun
shayad koi meri choot ki garmi ko shant kar sake" Sweety ne ghar ke
andar kadam rakh hanste hue kaha.
"Fir to tum sahi samay par aayi ho... aaj mein aur Raj ghar par
akele hi hain... " Preeti ne jawab diya..
Dono ghar ke andar aa gaye aur Preeti ne darwaza band kiya to uski
awaaz sun Raj bahar aa gaya....
"Hai Sweety kaisi ho?"
"Bilkul bhi achi nahi hoon.... choot me mano aag lagi hui hai"
Sweety ne hanste hue kaha..
"Tumhari yahi ada to mujhe pagal kar deti hai.. hamesha chudawaane ko
tayyar rahti ho"
"Ye to hamesha chudaas rehti hai lekin tum bhi to inpar paagal hue
rehte ho" kehkar Preeti ne Sweety ke top ko utaar diya.. uski dono
chuchiyan fad fada kar azaad ho gayi... usne aaj koi bra nahi pehan
rakhi thi.
"Haan ye to hai lekin tum janti ho ki mein tumhari in mast gendon ka
bhi kitna deewana hoon" Raj ne unke paas aakar dono ki chuchiyon ko
masalte hue kaha.
Preeti ne Sweety ka hath pakad use sofe par bitha diya... aur uske
ek nipple ko munh me le choosne lagi.. wahin Raj bhi doosri aur se
uske doosre ko nipple ko munh me le chulbulane laga...
"Raj aa kyon na hum ek khel khelte hain" Preeti ne Sweety ki chuchi
ko joron se masalte hue kaha..
"Aisa kya khel hai?" Raj ne pucha.
"Aaj is Sweety ki bacchi ko palang se bandh dete hai aur iske badan
se khel itna uttejit kar denge ki ye tadapne lagegi chillane lagi..
lekin kuch kar nahi payegi" Preeti ne hanste hue kaha..
"Nahi.......... tum dono aisa nahi kar sakte" Sweety ne virodh karte
hue kaha. "mujhse aisi jyadti sehan nahi hogi.. tumhe pata hai meri
choot me kitni buri tarah khujli mach rahi hai..."
"Are kyon ghabra rahi hai.. mujhe lagta hai ki tumhe khoob maza
aayega" Raj ne kaha.
"Please Raj aisa mat karo na"
"Man bhi jao Sweety hum wada karte hai jab tum hame rukne ko kahogi
hum ruk jayenge" Preeti ne kaha.
"Mmmmmm please ruk jana haan"
kramashah..............
परिवार हो तो ऐसा-43
गतान्क से आगे...............
राज ने स्वीटी का हाथ पकड़ उसे अपने कंधों पर उठा लिया और
बेडरूम की ओर बढ़ गया..
जैसे ही स्वीटी राज के कंधों पर आई प्रीति ने उसकी शॉर्ट्स के
किनारे को पकड़ उसकी पॅंटी के साथ साथ उसे उतार दिया... अब स्वीटी
नंगी राज के कंधों पर लटकी थी.
राज ने स्वीटी को लेकर अपने मम्मी डॅडी के बेडरूम मे लाकर उसे पलंग
पर डाल दिया.. क्यों कि उनके पलंग के कोने अच्छे थे.. प्रीति भी
उनके पीछे पीछे कमरे मे आ गयी..
प्रीति ने अपनी मम्मी के ड्रॉयर से चार स्कार्फ निकाल लिए जिससे स्वीटी
को बाँधा जा सके.. राज स्वीटी के उपर चढ़ उसके दोनो हाथो को
उसके सिर के उपर कर पकड़ लिया.. और प्रीति उसके हाथों को पलंग
के हत्थे से बाँधने लगी..
फिर प्रीति ने स्वीटी की दोनो टाँगो को फैला दिया और और उन्हे दोनो
किनारों पर बाँध दिया.. अब स्वीटी किसी क़ैदी की तरह पलंग पर
थी और उसकी दोनो टाँगे फैली हुई थी...
"इस तरह पलंग से बँधी हुई सच मे बहुत सेक्सी लग रही हो"
प्रीति अपनी चचेरी बेहन के होठों को चूस्ते हुए बोली.
राज स्वीटी की दूसरी तरफ आ गया और उसके निपल को चूसने लगा..
दोनो भाई बेहन मिलकर अब स्वीटी के बदन को चूमने लगे मसल्ने
लगे... स्वीटी के बदन मे उत्तेजना बढ़ने लगी.. एक मीठी मीठी
गुदगुदी उसके बदन मे छाई थी.. वो भी कुछ करना चाहती थी...
लेकिन बँधी होने से वो मजबूर असहाय उस वेदना को सहने लगी..
"राज एक काम करते है इसे इसी तरह छोड़ देते हैं.. और हम दोनो
चुदाई करते है.. ये हमे देख उत्तेजित होती रहेगी.. इसकी चूत
मच्चल्ने लगेगी.. लेकिन ये सिर्फ़ तड़प के रह जाएगी... " प्रीति ने
कहा.
"हां प्रीति ये सही रहेगा.. इसे जलाने मे बहुत मज़ा आएगा" राज
ने कहा.
"देखो में कहे देती हूँ तुम दोनो ऐसा कुछ मेरे बिना नही करना"
स्वीटी ने कहा.. लेकिन दोनो भाई बेहन उसके बगल से हाथ अब पलंग
के किनारे पर खड़े एक दूसरे के कपड़े उतारने लगे.. स्वीटी मजबूर
लच्चार फटी आँखों से दोनो की हरकतें देखती रही..
प्रीति घुटनो के बल अपने भाई के सामने बैठ गयी और उसके लंड को
पहले तो अपनी मुट्ठी मे भर चूमने लगी.. उसके सूपदे पर अपनी जीब
फिरा स्वीटी की ओर देखते हुए उसने अपना पूरा मुँह खोल उसे अंदर
लिया और किसी लॉलीपोप की तरह चूसने लगी..
स्वीटी ललचाई नज़रों से राज के खड़े लंड को देख रही थी.. मोटा
लंबा लंड प्रीति के मुँह के अंदर बाहर हो रहा था...
"प्रीति और राज देखना में तुम दोनो की जिंदगी झन्नुम बना
दूँगी..मुझे चिढ़ाने मे बहुत मज़ा आ रहा है ना" स्वीटी
चिल्लाई....
प्रीति और जोरों से राज के लंड को चूस्ते हुए उसे चिढ़ाने
लगी,, "म्म्म्ममम क्या स्वाद है... स्वीटी रानी क्या चूसना चाहोगी?"
"हां और नही तो क्या...." स्वीटी ने जवाब दिया.
"तो फिर ज़रा प्यार से गिड़गिदा कर कहो ना" प्रीति ने हंसते हुए कहा.
"राज प्लीज़ मुझे अपना लंड चूसने दो ना... प्लीज़ इसे मेरे मुँह मे
घुसा दो......" स्वीटी गिगीडा उठी.
प्रीति ने राज का लंड चूस्ते हुए अपने हाथ को स्वीटी की चूत पर
रखा और उसे मसल्ने लगी.. स्वीटी तड़प उठी..अपने हाथों को
छुड़ाने के लिए वो मच्छल उठी...
प्रीति ने पानी दो उंगलियाँ उसकी चूत मे घुसा दी और उसे अंदर
बाहर करने लगी.. राज अपने लंड के धक्के अपनी बेहन के मुँह मे
मारने लगा... उसका लंड और अकड़ता जा रहा था...
प्रीति की उंगलियों ने स्वीटी की उत्तेजना को और भड़का दिया.. वो अपनी
कमर को उठा उसकी उंगलियों को और अपनी चूत के अंदर तक लेने
लगी.. प्रीति ने राज के लंड को अपने मुँह से निकाला और अपने मुँह को
स्वीटी की चूत पर लगा दिया.. और चूसने लगी.. तभी स्वीटी की
चूत का बाँध खुल गया.. रस की धारा बहने लगी जिसे प्रीति गटक
गटक कर पीने लगी..
"तुम भी मेरी चूत चूसना चाहोगी ना? " प्रीति ने स्वीटी से पूछा.
"हां प्रीति हाआँ अपनी चूत मुझे दो... " स्वीटी बोल पड़ी.
"राज पहले अपने लंड को मेरी चूत मे घुसा दो और फिर स्वीटी के
मुँह मे देकर उसे मेरी चूत का स्वाद चखाओ" प्रीति ने अपने भाई से
कहा.
राज प्रीति के पीछे आ गया और अपने लंड को उसकी चूत मे घुसा दो
तीन धक्के मारे.. फिर उसकी चूत के रस से भीगे लंड को उसने
स्वीटी के मुँह मे दे दिया...
स्वीटी किसी भूके बच्चे की तरह राज के लंड पर टूट पड़ी और ज़ोर
ज़ोर से उसके लंड को चूसने लगी... राज की उत्तेजना भी अपनी चरम
सीमा पर थी. वो तेज़ी से अपने लंड को उसके मुँह के अंदर बाहर
करने लगा.
"राज बहुत हो गया अब इस छीनाल की चूत मे लंड डाल इसकी चूत को
फाड़ दो" प्रीति ने राज से कहा....
राज स्वीटी की टाँगो के बीच आ गया और अपने लंड को उसकी गीली
चूत पर घिसने लगा... स्वीटी की चूत मे मानो हज़ारों चींतियाँ
एक साथ रेंगने लगी.. वो कमर को उठा राज के लंड को अंदर लेने की
कोशिश करने लगी.. लेकिन राज था कि उसे तो आज स्वीटी को तडपाने
मे मज़ा आ रहा था...
"ऑश राज क्यों तडपा रहे हो...ऑश प्लीज़ डाल दो ना अपना लंड मेरी
चूत मे.... उईईई अब नही रहा जाता राज प्लीज़.ईई " स्वीटी
गिड़गिदा उठी...
आख़िर राज को उसकी हालत पर दया आ गयी उसनेआपने लंड को उसकी
चूत से लगा एक ज़ोर का धक्का मारा... स्रर्र्र्र्र्ररर करता उसका लंड
जड़ तक धँस गया.... अब वो अपने लंड को सूपदे तक बाहर खींच
ज़ोर ज़ोर से धक्के मारने लगा...
"हाआअँ ऐसे ही कस के छोड़ूऊ ऑश हाां मज़ा आ गया.. ऑश
राज क्या लंड है तुम्हारा... चूत को हिला के रख देता है"
प्रीति कहाँ पीछे रहने वाली थी वो इस कदर उस पर झुक गयी कि
उसकी चुचियाँ स्वीटी के चेहरे के सामने थी.. स्वीटी ने उसके निपल
को मुँह मे लिया और दन्तो से काटते हुए चूसने लगी..
राज ने अपनी दो उंगलियाँ लंड के साथ साथ स्वीटी की चूत मे घुसा
दी.. अब लंड और उंगली दोनो उसकी चूत के अंदर बाहर हो रही थी..
स्वीटी की टाँगे और हाथ बँधे हुए थे इसलिए वो अपनी कमर को उठा
उसके लंड के धक्कों का साथ देने लगी और तभी एक बार फिर उसकी
चूत ने अमृत वर्षा कर दी....
"राज अब इसे थोड़ा आराम करने दो.. और तुम अब मेरी चूत चूस मेरी
भी गर्मी शांत कर दो" कहकर प्रीति पलंग के किनारे बैठ गयी
और अपनी टाँगो को फैला दिया...
राज उसके नज़दीक आया और अपनी जीब से उसकी चूत को चाटने लगा
और मुँह मे भर चूसने लगा.... थोड़ी ही देर मे प्रीति की चूत ने
भी पानी छोड़ दिया.
तीनो थोड़ी देर के लिए शांत हो सुसताने लगे.. कि तभी प्रीति उठ
कर कमरे से बाहर चली गयी....
थोड़ी देर बाद प्रीति कमरे मे लौटी तो उसके हाथों मे कुछ चीज़ें
थी जिसे उसने नीचे ज़मीन पर रख दिया... बँधी होने के कारण
स्वीटी को कुछ दीखाई नही दे रहा था...
राज ने नीचे झुक उन चीज़ों को देखा तो पाया कि प्रीति अपने साथ
किचन से दो लंबी गाजर और दो नकली लंड यानी की डिल्डो और एक
क्रीम की ट्यूब लेकर आई थी... राज कुछ कहना चाहता था कि प्रीति
ने इशारे से उसे चुप रहने को कहा.
"राज ज़रा मेरी चूत को एक बार फिर पीछे से चोदो" प्रीति ने राज
से कहा...
राज प्रीति के पीछे आ गया और अपने लंड को उसकी चूत मे घुसा दो
तीन धक्के मारे.. फिर उसकी चूत के रस से भीगे लंड को उसने
स्वीटी के मुँह मे दे दिया...
स्वीटी किसी भूके बच्चे की तरह राज के लंड पर टूट पड़ी और ज़ोर
ज़ोर से उसके लंड को चूसने लगी... राज की उत्तेजना भी अपनी चरम
सीमा पर थी. वो तेज़ी से अपने लंड को उसके मुँह के अंदर बाहर
करने लगा.
"राज बहुत हो गया अब इस छीनाल की चूत मे लंड डाल इसकी चूत को
फाड़ दो" प्रीति ने राज से कहा....
राज स्वीटी की टाँगो के बीच आ गया और अपने लंड को उसकी गीली
चूत पर घिसने लगा... स्वीटी की चूत मे मानो हज़ारों चींतियाँ
एक साथ रेंगने लगी.. वो कमर को उठा राज के लंड को अंदर लेने की
कोशिश करने लगी.. लेकिन राज था कि उसे तो आज स्वीटी को तडपाने
मे मज़ा आ रहा था...
"ऑश राज क्यों तडपा रहे हो...ऑश प्लीज़ डाल दो ना अपना लंड मेरी
चूत मे.... उईईई अब नही रहा जाता राज प्लीज़.ईई " स्वीटी
गिड़गिदा उठी...
आख़िर राज को उसकी हालत पर दया आ गयी उसनेआपने लंड को उसकी
चूत से लगा एक ज़ोर का धक्का मारा... स्रर्र्र्र्र्ररर करता उसका लंड
जड़ तक धँस गया.... अब वो अपने लंड को सूपदे तक बाहर खींच
ज़ोर ज़ोर से धक्के मारने लगा...
"हाआअँ ऐसे ही कस के छोड़ूऊ ऑश हाां मज़ा आ गया.. ऑश
राज क्या लंड है तुम्हारा... चूत को हिला के रख देता है"
प्रीति कहाँ पीछे रहने वाली थी वो इस कदर उस पर झुक गयी कि
उसकी चुचियाँ स्वीटी के चेहरे के सामने थी.. स्वीटी ने उसके निपल
को मुँह मे लिया और दन्तो से काटते हुए चूसने लगी..
राज ने अपनी दो उंगलियाँ लंड के साथ साथ स्वीटी की चूत मे घुसा
दी.. अब लंड और उंगली दोनो उसकी चूत के अंदर बाहर हो रही थी..
स्वीटी की टाँगे और हाथ बँधे हुए थे इसलिए वो अपनी कमर को उठा
उसके लंड के धक्कों का साथ देने लगी और तभी एक बार फिर उसकी
चूत ने अमृत वर्षा कर दी....
"राज अब इसे थोड़ा आराम करने दो.. और तुम अब मेरी चूत चूस मेरी
भी गर्मी शांत कर दो" कहकर प्रीति पलंग के किनारे बैठ गयी
और अपनी टाँगो को फैला दिया...
राज उसके नज़दीक आया और अपनी जीब से उसकी चूत को चाटने लगा
और मुँह मे भर चूसने लगा.... थोड़ी ही देर मे प्रीति की चूत ने
भी पानी छोड़ दिया.
तीनो थोड़ी देर के लिए शांत हो सुसताने लगे.. कि तभी प्रीति उठ
कर कमरे से बाहर चली गयी....
थोड़ी देर बाद प्रीति कमरे मे लौटी तो उसके हाथों मे कुछ चीज़ें
थी जिसे उसने नीचे ज़मीन पर रख दिया... बँधी होने के कारण
स्वीटी को कुछ दीखाई नही दे रहा था...
राज ने नीचे झुक उन चीज़ों को देखा तो पाया कि प्रीति अपने साथ
किचन से दो लंबी गाजर और दो नकली लंड यानी की डिल्डो और एक
क्रीम की ट्यूब लेकर आई थी... राज कुछ कहना चाहता था कि प्रीति
ने इशारे से उसे चुप रहने को कहा.
"राज ज़रा मेरी चूत को एक बार फिर पीछे से चोदो" प्रीति ने राज
से कहा...
राज अपनी बेहन के पीछे आ गया और उसकी चूत मे अपना लंड घुसा
धक्के मारने लगा... कि तभी प्रीति ने उसे लंड बाहर निकालने कहा
और राज ने वैसे ही किया... अब प्रीति स्वीटी की टाँगो के पास आई
और ज़मीन से लंबी वाली गाजर उठा ली और उसकी चूत मे घुसा अंदर
बाहर करने लगी....
"राज ज़रा इसकी टाँगे तो खोल दो" प्रीति ने राज से कहा.
राज ने स्वीटी की टाँगो को खोल दिया.
"स्वीटी अब तुम अपनी टाँगो को अपन छाती से चिपका लो" प्रीति ने कहा.
स्वीटी ने वैसे ही किया. तब प्रीति ने क्रीम की ट्यूब ली और ढेर
सारी क्रीम लेकर स्वीटी की गंद के छेद पर मल दी...और फिर नकली
लंड को उठा उसकी चूत से लेकर उसकी गंद तक घिसने लगी...