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पहले सिस्टर फिर मम्मी complete

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उसकी मखमली चूत से गाढ़ा द्रव्य निकलने लगा। वो मेरे चेहरे को अपनी चूत और चूतड़ों के बीच दबाये हुए, बिस्तर पर अपनी गाण्ड को नचाते हुए गिर गई। उसकी चूत अभी भी फड़फड़ा रही थी, और उसकी गाण्ड में भी कंपन हो रहा था। मैंने उसकी चूत से निकले हुए रस की एक-एक बूंद को चाट लिया, और अपने सिर को उसकी मांसल जांघों के बीच से निकाल लिया।

मेरी बहन बिस्तर पर पेट के बल लेटी हुई थी। कमर के नीचे वो पूरी नंगी थी। झड़ जाने के कारण उसकी आँखें बंद थी, और उसके गुलाबी होंठ हल्के-से खुले हुए थे। वो बहुत गहरी सांसें ले रही थी। उसने अपने एक पैर को घुटनों के पास से मोड़ा हुआ था और दूसरे पैर को फैलाया हुआ था। उसके लेटने की ये स्थिति बहुत ही कामुक । थी। इस स्थिति में उसकी सुनहरी, गुलाबी चूत, गाण्ड का भूरे रंग का छेद और उसके गुदाज चूतड़ मेरी आँखों के सामने खुले पड़े थे और मुझे अपनी ओर खींच रहे थे। मेरा खड़ा लौड़ा, अब दर्द करने लगा था। मेरे लण्ड का सुपाड़ा, एक लाल टमाटर के जैसा दिख रहा था।

मेरे लण्ड को किसी छेद की सख्त जरूरत महसूस हो रही थी। मैं गहरी सांसें खींचता हुआ, अपनी उत्तेजना पर काबू पाने की कोशिश कर रहा था। मेरे हाथ मेरी दीदी के नंगे चूतड़ों के साथ खेलने के लिये बेताब हो रहे थे। मैं अपने अंडकोषों को सहलाते हुए, सुपाड़े के छेद पर जमा हुई पानी की बूंदों को देखते हुए, अपनी प्यारी नंगी बहन के बगल में बेड पर बैठ गया।

मेरे बेड पर बैठते ही दीदी ने अपनी आँखें खोल दी। ऐसा लग रहा था, जैसे वो एक बहुत ही गहरी निंद से जागी हो। जब उसने मुझे और मेरे खड़े लण्ड को देखा तो, जैसे उसे सब कुछ याद आ गया और उसने अपने होंठों पर जीभ फेरते हुए, मेरे खड़े लण्ड को अपने हाथों में भर लिया और बोली- “ओह्ह... प्यारे, सच में तुमने मुझे बहुत सूख दिया है। ओहह... भाई, तुमने जो किया है, वो सच में बहुत खुशनुमा था। मैं बहुत दिनों के बाद इस प्रकार से झड़ी हूँ... ओहह... प्यारे, तुम्हारा लण्ड तो एकदम खड़ा है। ओह्ह... मुझे ध्यान ही नहीं रहा कि मेरे प्यारे भाई का डण्डा खड़ा होगा और उसे भी एक छेद की जरूरत होगी। ओह्ह... डार्लिंग आओ, जल्दी आओ, तुम्हारे लण्ड में खुजली हो रही होगी। मैं भी तैयार हूँ, तुम्हारा खड़ा लण्ड देखकर मुझे भी उत्तेजना हो रही है, और मेरी बुर भी अब खुजलाने लगी है..."

“ऐसा नहीं है दीदी, अगर इस समय तुम्हारी इच्छा नहीं है तो कोई बात नहीं है। मैं अपने लण्ड को हाथ से झाड़ लूंगा...”

नहीं भाई, तुम अपनी बहन के होते हुए ऐसा कभी नहीं कर सकते, अगर कुछ करना होगा तो मैं करूंगी। भाई, मैं इतनी स्वार्थी नहीं हूँ कि, अपने प्यारे सगे भाई को ऐसे तड़पता हुआ छोड़ दें। आओ भाई, चढ़ जाओ अपनी बहन पर और जल्दी से चोदो, चलो, जल्दी से चुदाई का खेल शुरू करें...”

मैंने उसके होंठों पर एक जोरदार चुंबन जड़ दिया। और उसके मांसल, मलाईदार चूतड़ों को अपने हाथों से मसलते हुए, उससे कहा- “दीदी, तुम फिर से घुटनों के बल हो जाओ, मैं तुम्हें पीछे से चोदना चाहता हूँ.."

मेरी बात सुनकर मेरी प्यारी सिस्टर ने बिना एक पल गंवाये, फिर से वही पोजीशन बना ली। उसने घुटनों के बल होकर, अपनी गरदन को पीछे घुमाकर मुश्कुराते हुए, मुझे अपनी बड़ी-बड़ी आँखों को नचाते हुए आमंत्रण दिया। उसने अपने पैरों को फैलाकर, अपने खजाने को मेरे लिये पूरा खोल दिया।

मैंने फिर से अपने चेहरे को उसकी जांघों के बीच घुसा दिया, और उसकी चूत को चाटने लगा। चूत चाटते हुए अपनी जीभ को ऊपर की तरफ ले गया, और उसकी खूबसूरत और मांसल गाण्ड की दरार में अपनी जीभ को घुसा दिया और जीभ निकालकर उसकी गाण्ड को चाटने लगा। मैंने अपने दोनों हाथों से उसके चूतड़ों को फैलाकर, उसकी गाण्ड के छेद को चौड़ा कर दिया। फिर अपनी जीभ को कड़ा करके, उसकी गाण्ड में धकेलने की कोशिश करने लगा। उसकी गाण्ड बहुत टाईट थी और इसे मैं अपनी जीभ से नहीं चोद पाया।

मगर मैं उसकी गाण्ड को तब तक चाटता रहा, जब तक कि दीदी चिल्लाने नहीं लगी और सिसयाते हुए मुझे बोलने लगी- “ओह्ह... ब्रदर, अब देर मत करो। मैं अब गरम हो गई हैं। अब जल्दी से अपनी प्यारी बहन को चोद दो, और अपनी प्यास बुझा लो। मैं समझती हूँ, अब हमारा ज्यादा देर करना उचित नहीं होगा। ओह्ह... भाई, जल्दी करो और अपने लण्ड को मेरी चूत में पेल दो..”

 
मैंने अपने खड़े लण्ड को उसकी गीली चूत के छेद पर लगा दिया। फिर एक जोरदार धक्के के साथ अपना पूरा लण्ड उसकी बुर में, एक ही बार में पेल दिया। ओह्ह... क्या अदभुत अहसास था, यह। इसका वर्णन शब्दों में करना संभव नहीं है। उसकी रस से भरी, पनियाई हुई चूत ने, मेरे लौड़े को अपनी गरम आगोश में ले लिया। उसकी मखमली चूत ने मेरे लण्ड को पूरी तरह से कस लिया। मैं धक्के लगाने लगा। मेरी प्यारी बहन ने भी अपनी गाण्ड को पीछे की तरफ धकेलते हुए, मेरे लण्ड को अपनी चूत में लेना शुरू कर दिया। हम दोनों भाईबहन, अब पूरी तरह से मदहोश होकर मजे की दुनियां में उतर चुके थे।

मैं आगे झुक कर, उसकी कांख की तरफ से अपने हाथ को बाहर निकालकर उसकी गुदाज चूचियों को, उसके ब्लाउज़ के ऊपर से ही दबाने लगा। उसकी चूचियां एकदम कठोर हो गई थी। उसकी ठोस चूचियों को दबाते हुए मैं अब तेजी से धक्के लगाने लगा था, और मेरी दीदी के मुँह से सिसकारियां फूटने लगी थी।

दीदी सिसकाते हुए बोल रही थी- “ओह्ह... भाई, ऐसे ही, ऐसे ही चोदो, हाँ हाँ इसी तरह से जोर-जोर से धक्का लगाओ, भाई। इसी प्रकार से चोदो, मुझे...”

आह, शीईई, दीदी तुम्हारी चूत कितनी टाईट और गरम है। ओह्ह... मेरी प्यारी बहना, लो अपनी चूत में मेरे लण्ड को, ऐसे ही लो। देखो, ये लो मेरा लण्ड अपनी चूत में, ये लो, फिर से लो, क्या एक और दूं... ले लो, मेरी रानी बहन, हाये दीदी...”

मैं उसकी चूत की चुदाई, अब पूरी ताकत और तेजी के साथ कर रहा था। हम दोनों की उत्तेजना बढ़ती जा रही थी। ऐसा लग रहा था कि, किसी भी पल मेरे लौड़े से गरम लावा निकल पड़ेगा।

“ओह्ह... चोदू, चोदो, और जोर से चोदो। ओह्ह... कसकर मारो और जोर लगाकर धक्का मारो। ओह्ह... मेरा निकल जायेगा, उईई... कुत्ते और जोर से चोद मुझे। बड़ी बहन की बुर चोदने वाले, चोदू हरामी, और जोर से मारो, अपना पूरा लण्ड मेरी चूत में घुसाकर चोद, कुतिया के बच्चे, ३१शीईई, मेरा निकल जायेगा...”

मैं अब और जोर-जोर से धक्के मारने लगा। मैं अपने लण्ड को पूरा बाहर निकलकर, फिर से उसकी गीली चूत में पेल देता। दीदी की चूचियों को दबाते हुए, उसके चूतड़ों पर हाथ फेरते और मसलते हुए, मैं बहुत तेजी के साथ दीदी को चोद रहा था।

मेरी बहन, अब किसी कुतिया की तरह कुकिया रही थी और वो अपने चूतड़ों को नचा-नचा कर, आगे-पीछे धकेलते हुए, मेरे लण्ड को अपनी चूत में लेते हुए, सिसिया रही थी- “ओह... चोदो, मेरे चोदू भाई, और जोर से चोदो। ओह्ह... मेरे चुदक्कड़ बलमा, श्श्शीईई, हरामजादे और जोर से मारो मेरी चूत को, ओहह... ओह... ईईस्स्स, आआहह, बहनचोद मेरा अब निकल रहा है, ओहहह, श्श्शीईई...” कहते हुए, अपने दांतों को पीसते हुए, और चूतड़ों को उचकाते हुए, वो झड़ने लगी।

मैं भी झड़ने ही वाला था। इसलिये चिल्लाकर उसको बोला- “ओह... कुतिया, लण्डखोर, साल्ली मेरे लिये रुको। मेरा भी अब निकलने वाला है, ओह्ह... रानी, मेरे लण्ड का पानी भी, अपनी बुर में लो, ओह... लो, लो, ओह्ह... ऊउफ्फ्फ ...”

 
ठीक उसी समय मुझे ऐसा लगा, जैसे मैं किसी के जोर से बोलने और चिल्लाने की आवाज सुन रहा हूँ। जब मैंने दरवाजे की तरफ मुड़ कर देखा तो... ओहह... ये मैं क्या देखा रहा हूँ? मेरे अंदर की सांस, अंदर ही रह गई।

सामने दरवाजे पर मेरी मम्मी खड़ी थी। उनका चेहरा गुस्से से लाल हो रहा था। वो क्रोध में अपने होंठों को काट रही थी और अपने कूल्हे पर अपने हाथ रखकर चिल्ला रही थी। उसका चिल्लाना तो एक पल के लिये हम दोनों भाई-बहन को कुछ समझ में नहीं आया। थोड़ी देर बाद हमें उसकी स्पष्ट आवाज सुनाई दे रही थी।

ओहह... तुम दोनों बिल्कुल अच्छे बच्चे नहीं हो, पापियों खड़े हो जाओ। क्या मैंने तुम्हें यही शिक्षा दी थी? ओह... तुमने मेरा दिमाग खराब कर दिया। एक भाई-बहन होकर...” इसके आगे वो कुछ भी नहीं बोल पाई।

मैं एकदम भोंचक्का रह गया था, और शीघ्रता से अपने लण्ड को अपनी बहन की चत में से निकाल लिया। मेरे लण्ड का पानी अभी नहीं निकला था। वो निकलने ही वाला था, पर बीच में मम्मी के आ जाने के कारण रुक गया था। इसलिये मेरा लण्ड दर्द कर रहा था। मेरे दिमाग को शायद अभी भी हमारी पूरी स्थिति की गंभीरता का अहसास नहीं हुआ था। इसलिये मेरा लण्ड अभी भी खड़ा और उत्तेजित था। फिर अचानक से एक झटके के साथ, उसमें से एक तेज धार के साथ पानी निकल गया। मेरे वीर्य की कुछ बूंदें उछलकर सीधी मम्मी के ऊपर, उसकी साड़ी और पेट पर जा गिरी। ये सब कुछ एक क्षण में हो गया था।

झड़ जाने के बाद, मेरे सामने खड़ी मम्मी को देखकर, मेरे दिमाग में डर हावी हो गया और मैं डरकर अपनी पैन्ट को खोजने लगा। मैं अपनी कमर के नीचे पूरी तरह से नंगा था। मेरा लण्ड अब पानी छोड़कर लटक गया था। मेरी बहन तेजी के साथ बिस्तर पर से उतर गई और अपनी स्कर्ट को उसने चूतड़ों से नीचे गिरा लिया था। मेरी मम्मी कुछ नहीं बोल पाई और मेरे वीर्य को अपनी साड़ी और पेट पर से साफ करने लगी।

छीईई, छीईई...” कहते हुए, वो कमरे से बाहर बिना कोई शब्द बोले, हम दोनों को अकेला छोड़कर, निकल गई।

 
हम दोनों एकदम अचंभित होकर कुछ देर वहीं पर खड़े रहे, फिर हमने अपने कपड़े पहन लिये। हम दोनों के । अंदर इतनी हिम्मत नहीं थी कि हम कमरे से बाहर जा सकें। मेरी बहन बहुत उदास थी और मैं बहुत डरा हुआ था।

दीदी ने कहा- “चलो जो हुआ, सो हुआ। अब हमारे हाथ में कुछ भी नहीं है। हम इस स्थिति का सामना करतेकरीब एक घंटे के बाद हम दोनों नीचे गये, और फ्रेश होकर अपना लंच लिया। हम दोनों ठीक तरह से खा भी। नहीं पा रहे थे, क्योंकी हमारे दिल में डर भरा हुआ था। हम नहीं जानते थे कि, हमारे साथ क्या होने वाला है? फिर हम अपने कमरे में आ गये, मम्मी अपने कमरे में ही थी।

हमने दोनों थोड़ी देर तक पढ़ाई की। फिर नीचे उतरकर नौकरानी से मम्मी के बारे में पूछा, तो उसने बताया कि मम्मी अपने कमरे में हैं, और उन्होंने कहा है कि उन्हें डिस्टर्ब न किया जाये। तभी कालबेल बज उठी। दरवाजे पर डैडी के ओफिस का चपरासी था, जो कि पापा का सूटकेस लेने के लिये आया था। पापा शायद चार दिनों के लिये बाहर जा रहे थे। मैंने हिम्मत करके मम्मी के कमरे का दरवाजा खटखटाया, और उसे इस बारे में बताया।

मम्मी ने सामने रखे हुए एक सूटकेस की ओर इशारा किया। मैंने चुपचाप उस सूटकेस को उठा लिया, और बाहर आकर उसे चपरासी को दे दिया। फिर हम दोनों भाई-बहन ने डिनर लिया और दीदी वापस कमरे में चली गई। मैं हिम्मत करके मम्मी के कमरे की ओर चला गया। दरवाजा खुला था और मैं सीधा मम्मी के पास इस तरह से गया, जैसे कुछ हुआ ही नहीं है और पूछा- “क्या आपने डिनर कर लिया है? क्योंकी नौकरानी अब घर जाना चाहती है..."

उसने कोई जवाब नहीं दिया और मैंने बाहर आकर नौकरानी को घर जाने के लिये कह दिया। हम दोनों भाईबहन, अब भी अपने अंदर काफी ग्लानि महसूस कर रहे थे। हमने एक-दूसरे से कोई ज्यादा बातचीत भी नहीं की। चूंकी हमारा कमरा एक था, इसलिये हम दोनों चुपचाप आकर सो गये। बेड के एक छोर पर वो और दूसरे छोर पर मैं लेट गया। हम दोनों ने एक-दूसरे को छुआ भी नहीं। दरवाजा भी खुला हुआ ही था। रात के 12:00 बजे के आस-पास अचानक मेरी नींद खुली। मुझे प्यास लगी थी।

मुझे महसूस हुआ कि, मेरी कमर के ऊपर कोई भी चीज रखी है। मैंने सोचा हो सकता है, ये मेरी दीदी का पैर हो। मगर जब मैंने उसे अपनी कमर के ऊपर से हटाने की कोशिश की, तो मुझे भारी महसूस हुआ। ऐसा लगा जैसे ये मेरी बहन के पैर नहीं है। मेरी आँखें खुल गई, और कमरे की मधिम रोशनी में मैंने जो देखा, उसने मेरे दिल की धड़कनें बढ़ा दीं। मेरा तो गला ही सूख गया।

ओह... ये मैं क्या देखा रहा था... मेरे और मेरी दीदी के बीच में हमारी मम्मी सोई हुई थी। एक पल के लिये तो मेरी समझ में कुछ नहीं आया, मगर फिर मैं टायलेट जाने के लिये बेड से नीचे उतर गया। मैं एक या दो कदम ही आगे बढ़ा पाया था।

तभि मम्मी की फुसफुसाहट भरी आवाज सुनाई दी- “कहां जा रहे हो, तुम?”

 
ओह्ह... मम्मी तुम जाग रही हो... मैं ये नहीं जानता था। मैं टायलेट जा रहा हूँ..”

“ठीक है... जरा रुको, मुझे भी वहीं जाना है...” कहते हुए, वो भी बेड से नीचे उतर गई।

जब वो खड़ी हो गई, तो मैंने उसे पूरी तरह से देखा। उसके बाल बिखरे हुए थे, उसने केवल ब्लाउज़ और पेटीकोट पहन रखा था। उसका गोरा चेहरा थोड़ा फूला हुआ-सा लग रहा था, मगर फिर भी उसकी सुंदरता में कोई कमी नहीं आई थी। वो गजब की जानमारू लग रही थी। जहां मैं खड़ा था, वहां तक आने के लिये उसने कदम बढ़ाये। जब वो चलने लगी तो, उसके कदम डगमगा गये और उसके मुँह से हल्की-हल्की बदबू भी आने लगी। थी। मुझे लग रहा था, शायद मम्मी ने घर में डैडी की शराब में से कुछ पी ली था।

जो भी हो, उसने मेरे नजदिक आकर, अपना हाथ मेरे कंधे पर रख दिया और आगे बढ़ते हुए मुझे अपने से सटा लिया। मैंने भी अपना एक हाथ उसकी कमर में डाल दिया।

मेरे ऐसा करने से मेरे बदन में एक हल्की सिहरन-सी हुई, और इस बात से मैं इनकार नहीं कर सकता था। मगर दोपहर की घटनाओं की रोशनी में, इस समय इस तरह का कोई भी ख्याल, मैं अपने दिमाग से कोसों दूर झटक देना चाहता था। टायलेट की तरफ जाते हुए, मम्मी का बदन मेरे बदन से रगड़ खा रहा था और उसकी एक चूची मेरे चेहरे पर दबाव डाल रही थी। इन सब कारणों से मेरे हाथ एकदम ठण्डे हो गये थे, और कमर से नीचे खिसक कर उसके चूतड़ों पर चला गया था।

टायलेट में पहुँच कर मम्मी ने लाइट ओन कर दी। तेज चमकदार रोशनी में वो बहुत खूबसूरत लग रही थी। गोरा चेहरा, तीखे नाक-नक्श, बिखरे बाल, बड़ी-बड़ी नशे के कारण गुलाबी हुई आँखें और थोड़ा-सा फूला हुआ चेहरा, कुल मिलाकर उसे खूबसूरत ही बना रहे थे। उसकी सांसें बहुत तेज चल रही थीं, जिसके कारण उसकी ब्लाउज़ में कैद चूचियां तेजी से उठ-बैठ रही थीं। उसने मेरी ओर देखा और मुश्कुराते हुए मुझसे पेशाब करने के लिये कहा। मैंने थोड़ा हिचकिचाते हुए मम्मी कि ओर देखा तो, वो मुश्कुराते हुए आगे बढ़ी और मेरे पीछे आकर, मुझे पीछे से अपनी बांहों में भर लिया। फिर मेरे पजामे के नाड़े को खोलकर, उसे नीचे करके, मुझे पेशाब करने के लिये कहा।

 
मुझे बहुत शर्म आ रही थी, मगर साथ ही साथ मैं धीरे-धीरे उत्तेजित भी हो रहा था। क्योंकी मम्मी का मांसल बदन मेरी पीठ से चिपका हुआ था। मुझे महसूस हुआ कि उसकी चूचियां, मेरी पीठ से चिपकी हुई हैं और मेरे चूतड़ उसकी मांसल जांघों के बीच के गड्ढे में, उसकी चूत के ऊपर चिपके हुए हैं। मेरा लण्ड पूरी तरह से खड़ा हो गया और मेरे लिये पेशाब करना बहुत मुश्किल हो चुका था।

मम्मी अपनी गरदन को मेरे कंधे पर रखते हुए, अपने गाल को मेरे चेहरे से सटाकर, रगड़ते हुए बोली- “ओहह.. लड़के, क्या तुम्हें पेशाब नहीं आ रहा है... पेशाब करो, दिखाओ मुझे तुम कैसे पेशाब करते हो? मैंने तुम्हें चोदते हुए तो देखा ही है...”

मेरे पास इसका कोई जवाब नहीं था और मेरा लण्ड अब अपनी पूरी औकात पर आ गया था। यानी कि 7 इंच लम्बा हो गया था।

मेरे लण्ड को देखते हुए उसने कहा- “ओह्ह.. कितना बड़ा डण्डा है, तुम्हारा? तुम्हारी उमर के लिये तो ये बहुत बड़ा है, लेकिन बहुत अच्छा भी है...” इतना कहते हुए उसने अपने मुँह से चटकारे की आवाज निकाली। जैसे की खाने की कोई बहुत स्वादिष्ट चीज, उसे मिल गई हो। उसने मेरे लण्ड को अपने हाथों से पकड़ लिया।

मैंने इससे बचने की कोशिश की, मगर कोई फायदा नहीं हुआ। जब मैंने उसकी ओर पलटकर देखा तो, उसने सीधा मेरे होंठों पर अपने गरम मुलायम होंठ रख दिये और अपनी जीभ को मेरे मुँह में पेलने की कोशिश की। मुझे उसके मुँह से शराब का टेस्ट महसूस हुआ।

मम्मी मेरे लण्ड को थोड़ी देर तक सहलाती रही, फिर बोली- “ठीक है, अगर तुम पेशाब नहीं करना चाहते तो । कोई बात नहीं। मुझे पेशाब आ रही है, और मैं सोचती हूँ मुझे कर ही लेना चाहिए...” इतना कहने के बाद वो मेरे आगे आई और अपने पेटीकोट को अपने चूतड़ों के ऊपर उठाकर, घुटनों को मोड़कर, वहीं पर बैठ गई। ओहह... कितना मनोहर दृश्य मेरी आँखों के सामने था।

ओह दोस्तों, उसके खूबसूरत गोलाकार चूतड़, जो कि सफेद संगमरमर के जैसे थे और भूरे रंग की खाई के द्वारा अलग-अलग बंटे हुए थे, जिनके बीच में सिकुड़ा हुआ, छोटा-सा भूरे रंग का छेद था। ये सब देखते ही मेरी आँखें फैल गईं। मेरा मुँह और गला दोनों ही सूख गये, जब मैंने उसकी चूत को पीछे से देखा।

 
उसकी पेशाब करने की आवाज ने मुझे और भी ज्यादा उत्तेजित कर दिया था। पेशाब की तीखी गंध ने मेरे नथुनों को भर दिया और मेरे बदन में दौड़ते खून ने मेरे चेहरे पर आकर उसका रंग बदल दिया।

थोड़ी देर तक पेशाब करने और मुझे इस खूबसूरत, दिल को घायल कर देने वाला नजारा दिखाने के बाद, वो उठी और पेटीकोट को नीचे करके मेरी ओर देखते हुए प्यार से मुश्कुराते हुए बोली- “बेटे, अगर तुम्हें पेशाब लगी है तो तुम कर लो। मैं अपने कमरे में जा रही हैं और वहीं तुम्हारा इन्तेजार करूंगी...” कहकर वो बाथरूम से निकल गई।

मैं थोड़ी देर तक वहीं खड़ा सोचता रहा। इस बीच मेरा लण्ड थोड़ा ढीला हो गया था, इसलिये मैंने भी पेशाब कर लिया। बाथरूम से निकलकर जब मैं मम्मी के कमरे में पहुँचा, तो मैंने देखा कि डबल बेड पर मम्मी तकिये के सहारे पीठ टिकाकर बैठी थी। उसके सामने एक छोटी टेबल पर ग्लास में ड्रिंक रखा हुआ था। उसने इस समय अपने बालों को संवार लिया था। उसका पेटीकोट, उसकी नाभि से नीचे बंधा हुआ था। जिसके कारण उसका गोरा, मांसल पेट और नाभि दिख रहे थे। उसके ब्लाउज़ के आगे का एक बटन खुला हुआ था, जिसके कारण उसकी चूचियां एकदम बाहर की ओर निकली हुई दिख रही थीं। मैं धीमे कदमों से चलते हुए उसके पास पहुँचा।

उसने मुझे बेड पर बैठने का इशारा करते हुए पूछा- “क्या तुम ड्रिक लेना पसंद करोगे?”

मैं कुछ नहीं बोला, और चुपचाप उसकी तरफ देखता रहा।

उसने एक दूसरे ग्लास में ड्रिक डाल दी और थोड़ा मुश्कुराते हुए बोली- “लो पी लो, मैं समझती हूँ कि इसको लेने के बाद तुम अच्छा महसूस करोगे। फिर हम दोनों आराम से बात कर सकेंगे...”

मैंने देखा कि जब वो खुद ही मुझे ड्रिक ओफर कर रही है, तो मैंने उसे उठा लिया और एक ही सांस में पी गया।

उसने भी अपने ड्रिक को खाली कर दिया और फिर मेरी तरफ घूमकर बोली- “लड़के, तुम ऐसा कब से कर रहे हो?"

मैं चुप रहा।

देखो, मैं तुम्हें डांट नहीं रही हूँ। मैं सिर्फ इतना पूछना चाहती हूँ कि तुम ऐसा कैसे कर सकते हो? क्या तुम्हें डर नहीं लगा?”

मैंने बात को थोड़ा घुमाने के इरादे से, हिम्मत करके जवाब दिया- “तुम क्या बात कर रही हो, मम्मी... मैं चाहता हूँ कि तुम थोड़ा खुलकर बताओ...”

मुझे आश्चर्य है कि तुम दोपहर की घटना को इतनी जल्दी भूल गये। फिर भी मैं तुमसे खुलकर पूछती हूँ कि तुम ऐसा, यानी कि अपनी बहन को कब से चोद रहे हो?”

मुझे ड्रिंक और उसके खुले व्यवहार ने थोड़ा साहसी बना दिया था, लेकिन मैंने डरने और शर्माने का नाटक किया और हल्के से बड़बड़ाते हुए हाँ.. हूँ बोलकर चुप हो गया।

 
वह मुझसे लगातार पूछ रही थी- “बताओ मुझे, क्या तुम्हें जरा भी शर्म नहीं महसूस नहीं हुई, या पाप का एहसास नहीं हुआ, अपनी बहन को चोदते हुए?”

मैंने अपना सिर नीचे झुक लिया और कोई जवाब नहीं दिया। तब उसने मुझे अपने पास खींच लिया और मेरे चेहरे को कोमलता से अपने हाथों में लेकर, मेरी आँखों में झांकते हुए कहा- “बेटे, मुझे विस्तार से बताओ, तुम दोनों के बीच ये सब कैसे हुआ?”

मैंने बड़े ही मासूमियत के साथ उससे माफी मांगी और उसकी आँखों में झांकते हुए, उससे वादा लिया कि वो नाराज नहीं होगी। उसके बाद मैंने उसे पूरी कहानी सुनाई।

मम्मी, यह लगभग 3 महीने पहले की बात है। एक दिन जब अचानक, मेरी नींद रात के करिब 12:00 या 12:30 बजे के आस-पास खुली। मैं बाथरूम जाने के लिये उठा। बाथरूम करने के बाद जब मैं वापस लौट रहा था, तब मैंने देखा कि आपके कमरे की लाइट जल रही थी और दरवाजा थोड़ा-सा खुला हुआ था। मैं अपने कमरे में घुसकर पर्दे के पीछे छिप गया और देखने लगा।

मैंने देखा कि तुम केवल पेटीकोट में ही कमरे के बाहर आ गई थी और तुम्हारी छातियां पूरी तरह से नंगी थी। फिर तुम अपने बालों का जूड़ा बनाते बनाते हुए सीधा बाथरूम के अंदर घुस गई थी। तुम्हारे खूबसूरत और नग्न बदन को देखाकर मेरे पैर जैसे जमीन से गड़ गये थे। मेरा मुँह सूख गया और मेरी रीढ़ कि हइडियों में एक कंपन दौड़ गई। तुम्हारी छातियां बड़ी ही कामुक अंदाज से हिल रही थीं। दम साधे मैं तुम्हें देखता रहा, तुम बिना बाथरूम का दरवाजा बंद किये, अपने पेटीकोट को ऊपर उठाकर पेशाब करने बैठ गई...”

पेशाब करने के बाद तुम सीधा अपने कमरे में गई और दरवाजा बंद कर लिया। मैं हिम्मत करके तुम्हारे कमरे कि खिड़की के पास चला गया। पिताजी बिस्तर पर तकिये के सहारे नंगे लेटे हुए थे और सिगरेट पी रहे थे। उनका डण्डा लटका हुआ और भीगा हुआ लग रहा था। तुमने पिताजी के पास पहुँचकर उनसे कुछ कहा और उनके हाथ से सिगरेट ले ली। फिर तुमने अपने पेटीकोट को खोलकर फेंक दिया और अपने एक पैर को उनके चेहरे के दूसरी तरफ डाल दिया। तुम्हारा एक पैर अभी भी जमीन पर ही था, ऐसा करके तुमने अपनी फुद्दी को पिताजी के मुँह से लगा दिया। उन्होंने तुम्हारे खूबसूरत चूतड़ों को अपने हाथों में भर लिया और तुम्हारी फुद्दीको चाटने लगे। तुम बहुत खुश लग रही थी, और अपने एक हाथ से अपनी छातियों को मसलते हुए सिगरेट भी पी रही थी। कुछ देर बाद तुमने सिगरेट फेंक दी और नीचे झुक कर पिताजी के डण्डे को अपने मुँह में लेकर चूसने लगी...”

 
साथ बने रहने के लिए धन्यवाद दोस्तो
 
साथ बने रहने के लिए धन्यवाद दोस्तो
 
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