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शालु - ओह पापा यू आर ग्रेट। मेरी जॉब लग गई।।वाऊ।।
(शालू कस कर अपने पापा के गले लगी रही, उसके भारी बूब्स बंसल के सीने पे दब रहे थे। बंसल पहली बार अपनी जवान बेटी को इस तरह हग किया था, आज से पहले कभी भी उसने कभी अपनी बेटी के यौवन को अपने सीने पे महसूस नहीं किया था। उसने अपना हाथ आगे बढा कर अपनी बेटी की गोरी कमर में डाल दिया)
अपनी बेटी की सॉफ्ट कमर को छु कर बंसल को जैसे नशा सा छ गया। शालु ने जब अपने कमर पे पापा की उँगलियों को महसूस किया तो उसका ध्यान टूटा और वो अलग हो गई। शालु को अपने पापा के गले लगकर कुछ अजीब सा महसूस हो रहा था। उधर बंसल का लंड खड़ा हो चूका था, वो अपना इरेक्शन छुपाने के लिए बिस्तर पे बैठ गया।
शाम को बंसल और शालु साथ में डिनर करते है, शालु डिनर करने के बाद अपने कपडे चेंज कर लेती है। कपडे चेंज कर जब शालु पापा के सामने आती है तो, बंसल की हालत खराब हो जाती है। इतना पतला कपडा जिसमें उसकी बेटी की बूब्स और उसकी चूत की उभार साफ़ नज़र आ रही थी। शालु बिस्तर में अपने पापा के ब्लैंकेट में घुस जाती है।
शालु - गुड नाईट पापा।
बंसल - गुड नाईट बेटा।
बंसल, लगातार अपनी बेटी के जिस्म को घूर रहा था, आज वो पहली बार अपनी जवान बेटी के साथ एक ही बिस्तर में एक ही ब्लैंकेट के अंदर सो रहा था। उसका लंड अब पूरी तरह खड़ा हो चूका था। उससे अब इरेक्शन बर्दाश्त नहीं हो रहा था और उसने उसी ब्लैंकेट के अंदर मुट्ठ मार लिया। बंसल मुट्ठ मार कर सो गया। सुबह उसकी नींद खुली तो सामने उसकी बेटी बिस्तर पे बैठी टीवी देख रही थी।
शालु - गुड मॉर्निंग पापा।
बंसल - गुड मॉर्निंग बेटी।
शालु - क्या ऑफिस नहीं जाना पापा?
बंसल - जाना है बेटी? तुम नहा ली?
शालु - हाँ मैं नहा भी ली और तैयार भी हो गई।
बंसल - ठीक है मैं जल्दी से नहा कर आता हू।
बनसल बाथरूम में जाता है तो उसको वहां पे शालु के यूजड ब्रा और पेंटी पड़ी मिलति है जिसे शालू शायद कल रात पहनी थी। बंसल शालु की पेंटी हाथ में लेता है और उसे ध्यान से देखने लगता है। उसे ध्यान आता है की ये वही पेंटी है जो शायद ५ मिनट पहले शालु के चूत को ढकी रही थी। इतना सोचते ही बंसल की उंगलियाँ पेंटी के सामने वाली जगह में चली जाती है। बंसल को वहां कुछ गिला -गिला सा लगता है। शायद ये शालु की पेशाब थी या फिर उसकी चूत की रस। न जाने कब बंसल शालु के पेंटी को नाक से लगा कर सूँघने लगता है और अपने दुसरे हाथ से लंड बाहर निकाल कर मसलने लगता है। बंसल पगलों की तरह अपनी बेटी के पेंटी को चाटने लगता है और फिर उसका मुट्ठ निकल आता है। बंसल अपने आप को शांत कर बाथरूम से बाहर आ जाता है और फिर दोनों ऑफिस को निकल जाते है।
ओफिस में दोनों गुप्ता जी से मिलते है। गुप्ता जी शालु से बहुत प्रभावित होते हैं और उसको और बंसल को अपने चैम्बर में शिफ्ट करा लेते है। अब बॉस के चैम्बर में 3 लोग काम कर रहे थे गुप्ता जी, बंसल और शालु।
(शालू कस कर अपने पापा के गले लगी रही, उसके भारी बूब्स बंसल के सीने पे दब रहे थे। बंसल पहली बार अपनी जवान बेटी को इस तरह हग किया था, आज से पहले कभी भी उसने कभी अपनी बेटी के यौवन को अपने सीने पे महसूस नहीं किया था। उसने अपना हाथ आगे बढा कर अपनी बेटी की गोरी कमर में डाल दिया)
अपनी बेटी की सॉफ्ट कमर को छु कर बंसल को जैसे नशा सा छ गया। शालु ने जब अपने कमर पे पापा की उँगलियों को महसूस किया तो उसका ध्यान टूटा और वो अलग हो गई। शालु को अपने पापा के गले लगकर कुछ अजीब सा महसूस हो रहा था। उधर बंसल का लंड खड़ा हो चूका था, वो अपना इरेक्शन छुपाने के लिए बिस्तर पे बैठ गया।
शाम को बंसल और शालु साथ में डिनर करते है, शालु डिनर करने के बाद अपने कपडे चेंज कर लेती है। कपडे चेंज कर जब शालु पापा के सामने आती है तो, बंसल की हालत खराब हो जाती है। इतना पतला कपडा जिसमें उसकी बेटी की बूब्स और उसकी चूत की उभार साफ़ नज़र आ रही थी। शालु बिस्तर में अपने पापा के ब्लैंकेट में घुस जाती है।
शालु - गुड नाईट पापा।
बंसल - गुड नाईट बेटा।
बंसल, लगातार अपनी बेटी के जिस्म को घूर रहा था, आज वो पहली बार अपनी जवान बेटी के साथ एक ही बिस्तर में एक ही ब्लैंकेट के अंदर सो रहा था। उसका लंड अब पूरी तरह खड़ा हो चूका था। उससे अब इरेक्शन बर्दाश्त नहीं हो रहा था और उसने उसी ब्लैंकेट के अंदर मुट्ठ मार लिया। बंसल मुट्ठ मार कर सो गया। सुबह उसकी नींद खुली तो सामने उसकी बेटी बिस्तर पे बैठी टीवी देख रही थी।
शालु - गुड मॉर्निंग पापा।
बंसल - गुड मॉर्निंग बेटी।
शालु - क्या ऑफिस नहीं जाना पापा?
बंसल - जाना है बेटी? तुम नहा ली?
शालु - हाँ मैं नहा भी ली और तैयार भी हो गई।
बंसल - ठीक है मैं जल्दी से नहा कर आता हू।
बनसल बाथरूम में जाता है तो उसको वहां पे शालु के यूजड ब्रा और पेंटी पड़ी मिलति है जिसे शालू शायद कल रात पहनी थी। बंसल शालु की पेंटी हाथ में लेता है और उसे ध्यान से देखने लगता है। उसे ध्यान आता है की ये वही पेंटी है जो शायद ५ मिनट पहले शालु के चूत को ढकी रही थी। इतना सोचते ही बंसल की उंगलियाँ पेंटी के सामने वाली जगह में चली जाती है। बंसल को वहां कुछ गिला -गिला सा लगता है। शायद ये शालु की पेशाब थी या फिर उसकी चूत की रस। न जाने कब बंसल शालु के पेंटी को नाक से लगा कर सूँघने लगता है और अपने दुसरे हाथ से लंड बाहर निकाल कर मसलने लगता है। बंसल पगलों की तरह अपनी बेटी के पेंटी को चाटने लगता है और फिर उसका मुट्ठ निकल आता है। बंसल अपने आप को शांत कर बाथरूम से बाहर आ जाता है और फिर दोनों ऑफिस को निकल जाते है।
ओफिस में दोनों गुप्ता जी से मिलते है। गुप्ता जी शालु से बहुत प्रभावित होते हैं और उसको और बंसल को अपने चैम्बर में शिफ्ट करा लेते है। अब बॉस के चैम्बर में 3 लोग काम कर रहे थे गुप्ता जी, बंसल और शालु।