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माथुर - (शालू को पीछे से देख अपने लंड को सहलाते हुए) साली क्या माल है, इतनी मस्त गांड है इसकी, मेरा तो लंड खड़ा हो गया।एक बार अगर मिल गई तो इसकी गांड भी मारूँगा जरूर।
थोड़ी देर में शालु सबके लिए ड्रिंक बना कर ले आयी, और सब एक साथ बैठ शराब पीने लगे। माथुर शालु की उभरी चूचि को अपनी गन्दी नज़र से देख रहा था।
गुप्ता और बंसल शराब पीते हुए एक किनारे आकर खड़े हो गए और बात करने लगे।
गुप्ता जी - बंसल मुझे माफ़ कर दो, माथुर तुम्हारी बेटी के बारे में न जाने क्या-क्या कह रहा था।
बंसल - इटस ओके सर।
गुप्ता जी - माथुर ने हद पार कर दी उसने तुम्हे भी शालु को चोदने की बात कहलवाई। लेकिन उसे क्या मालूम की जिस लड़की के बारे में वो बात कर रहा है वो तुम्हारी बेटी है।
बंसल - इटस ओके सर नो प्रॉब्लम ।
गुप्ता बंसल को और शराब पिलाने लगा, बंसल की तरफ से कोई ऑब्जेक्शन न करता देख गुप्ता भी शालु के बारे में गन्दी बातें करने लगा।
गुप्ता जी - वैसे माथुर बेचारा भी क्या करे, तेरी बेटी है ही इतनी माल की किसी का भी लंड खड़ा हो जाए।
बंसल - हाँ।
गुप्ता जी - देख उधर बंसल कैसे तेरी बेटी माथुर के पास बैठी है। और माथुर उसकी जाँघ पे हाथ रख कर बात कर रहा है। ऐसा लगता है जैसे तेरी बेटी खुद माथुर से चुदना चाहती हो।
बंसल - नहीं मेरी बेटी ऐसी नहीं है।
गुप्ता जी - तेरी बेटी ने तो मेरा लंड भी खड़ा कर दिया। चलो माथुर के पास चल कर बैठते है।
सोफे पे माथुर और बंसल एक साथ बैठ गए और दूसरी तरफ शालु और गुप्ता जी बैठ गये। सोफ़े के बीच में एक टेबल रखी थी जिसपे शराब की कुछ बोतलें रखी थी।
माथुर की नज़र शालु की बड़ी-बड़ी चूचियों पे थी। शालु को धीरे धीरे नशा चढ रहा था, और इस बात का फ़ायदा उठाते हुए गुप्ता शालु की कमर में हाथ डाल अपनी तरफ सम्भाले हुए था। साइड से गुप्ता ने शालु की टॉप उठा दी और उसकी नंगी कमर को सहलाने लगा।
थोड़ी देर में शालु सबके लिए ड्रिंक बना कर ले आयी, और सब एक साथ बैठ शराब पीने लगे। माथुर शालु की उभरी चूचि को अपनी गन्दी नज़र से देख रहा था।
गुप्ता और बंसल शराब पीते हुए एक किनारे आकर खड़े हो गए और बात करने लगे।
गुप्ता जी - बंसल मुझे माफ़ कर दो, माथुर तुम्हारी बेटी के बारे में न जाने क्या-क्या कह रहा था।
बंसल - इटस ओके सर।
गुप्ता जी - माथुर ने हद पार कर दी उसने तुम्हे भी शालु को चोदने की बात कहलवाई। लेकिन उसे क्या मालूम की जिस लड़की के बारे में वो बात कर रहा है वो तुम्हारी बेटी है।
बंसल - इटस ओके सर नो प्रॉब्लम ।
गुप्ता बंसल को और शराब पिलाने लगा, बंसल की तरफ से कोई ऑब्जेक्शन न करता देख गुप्ता भी शालु के बारे में गन्दी बातें करने लगा।
गुप्ता जी - वैसे माथुर बेचारा भी क्या करे, तेरी बेटी है ही इतनी माल की किसी का भी लंड खड़ा हो जाए।
बंसल - हाँ।
गुप्ता जी - देख उधर बंसल कैसे तेरी बेटी माथुर के पास बैठी है। और माथुर उसकी जाँघ पे हाथ रख कर बात कर रहा है। ऐसा लगता है जैसे तेरी बेटी खुद माथुर से चुदना चाहती हो।
बंसल - नहीं मेरी बेटी ऐसी नहीं है।
गुप्ता जी - तेरी बेटी ने तो मेरा लंड भी खड़ा कर दिया। चलो माथुर के पास चल कर बैठते है।
सोफे पे माथुर और बंसल एक साथ बैठ गए और दूसरी तरफ शालु और गुप्ता जी बैठ गये। सोफ़े के बीच में एक टेबल रखी थी जिसपे शराब की कुछ बोतलें रखी थी।
माथुर की नज़र शालु की बड़ी-बड़ी चूचियों पे थी। शालु को धीरे धीरे नशा चढ रहा था, और इस बात का फ़ायदा उठाते हुए गुप्ता शालु की कमर में हाथ डाल अपनी तरफ सम्भाले हुए था। साइड से गुप्ता ने शालु की टॉप उठा दी और उसकी नंगी कमर को सहलाने लगा।