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पापी परिवार

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कम्मो तू यकीन नही करेगी, विक्की का ऐसा वहशी रूप मैने 1स्ट टाइम देखा ..अब तक जो भी होता आया था, मेरी मर्ज़ी से ..मैं रोज़ उसके कमरे मे उसे ब्लोवजोब देती, और वो चुपचाप अपनी आँखें बंद किए लेटा रहता था ..काई - काई बार मन के हाथो विवश हो कर मैं घंटे भर तक उसके लंड से खेलती रहती, बिना परवाह किए कि मेरा बेटा उस दौरान कितनी बार झाड़ा और कितनी बार उसकी मा ने उसके वीर्य से अपना गला तर किया ..जब अत्यधिक दर्द से वो बहाल जो जाता, मैं उसे छोड़ देती ..पर एक बार भी उसने मुझसे कोई ज़्यादती नही की ..उस दिन तेरे सामने जो मैं रोई थी, ये उसका ही परिणाम था ..मैं अपनी चूत मे उठती अगन को ज़रा भी शांत नही कर पा रही थी, लग रहा था शूसाइड कर लूँ और सब यहीं ख़तम हो जाए

तूने मुझे साहस तो दिया पर मेरी जगह अगर तू खुद इस जंग से लड़ रही होती ..मजबूरन तुझे भी वही करना पड़ता जो मैने किया

कम्मो विक्की लगातार मेरे मूँह को चोद्ता रहा, मैने भी हार नही मानी और अपना दर्द चूत को सहलाने मे बात लिए ..यहाँ उसकी कमर का एक झटका लगता और वहाँ मेरी उंगलियाँ चूत के और भी ज़्यादा अंदर हो जाती

कुछ देर बाद विक्की झुंझलाने लगा और मैं समझ गयी, मेरा काम अब आसान है ..मैने इशारों से उसे बेड पर चलने को कहा ..फॉरन उसने अपना लंड मेरे मूँह से बाहर निकाला और मेरा हाथ पकड़ कर मुझे बेड की तरफ ले गया ..अपनी पीठ के बल लेट कर विक्की ने मेरे उसी हाथ को वापस अपने लंड पर रख दिया और एक ऐसी नज़र से मुझे देखा .. ' जिसमे सिर्फ़ और सिर्फ़ वासना भरी थी, तड़प भरी थी ' ..वो कह तो नही पाया पर उसका आशय मुझे पता था ..यक़ीनन वो चाहता था जल्द ही उसे, उसके लंड के तनाव से मुक्ति मिल जाए ..मैने मुस्कुरा कर अपना ढेर सारा थूक लंड पर छोड़ दिया और जीभ से फैला कर उसे चिकनाई से भरने लगी

बस कम्मो यही वो पल था जब मेरे अंदर की मा मर गयी और उसके तुरंत बाद ही मैं अपनी मर्ज़ी से उसके खड़े लंड पर बैठती चली गयी ..शुरूवात मे कयि मुश्क़िलें आई, हज़ार सवालो से विक्की का चेहरा घंभीर होता गया ..लेकिन मैने काम ज़ारी रखते हुए, अपनी कमर उसके लंड पर ज़ोरो से पटाकने लगी ..सही मायने मे दर्द तो उस वक़्त मुझे महसूस हो रहा था, इन 10 महीनो मे मेरी चूत सिकुड कर काफ़ी टाइट जो हो गयी थी

थोड़ी देर बाद विक्की की कमर भी मेरी ताल से ताल मिलाने लगी और बीती रात पूरे 6 दफ़ा हमने अपने रिश्ते को दागदार किया ..या शायद हमेशा करते रहेंगे, अब ये पाप हमे कहाँ तक ले जाएगा पता नही ..पर मुझे सब मज़ूर है "

इतना कह कर नीमा शांत हो गयी, इन आख़िरी दो पंक्तियों मे उसने असल जीवन के सारे राज़ खोल दिए ..माना उसने 10 महीने बाद अपनी चूत मे आराम पाया था, लेकिन वो जानती थी ये आराम जल्द हराम मे बदल जाना है ..जब मा के साथ बेटे ने संसर्ग स्थापित कर लिया, तो यक़ीनन अपनी बहेन के लिए भी उसके विचार मैले हुए बिना नही रह पाएँगे

वहीं होटेल के कमरे मे तो जैसे भूचाल मच गया ..ब्लाउस के ऊपर कम्मो की गीली महरूण पैंटी पड़ी थी और साड़ी अपने पेट पर लेपेटे उसकी उंगलियाँ, अपनी सूजी चूत को और सुजाने मे व्यस्त थी ..वो ज़रा भी होश मे नही थी, एक हाथ से सेल अपने कान पर लगाए और दूसरे की 3 उंगलियों से योनि का मर्दन करते हुए उसे यह भी ध्यान नही रहा, कॉल पर नीमा उसकी आहों को बखूबी सुन रही होगी

" कहाँ खो गयी कम्मो, और तेरी आवाज़ को क्या हुआ ? "

आख़िरकार नीमा ने पूछ लिया, कम्मो की बंद आँखें एक झटके मे खुल गयी ..खुद की हालात देख उसे अचरज तो हुआ पर उसकी उंगलियाँ ज्यों की त्यों चूत के अंदर - बाहर होती रही ..मदहोशी का आलम उस पर ऐसा छाया की अचानक से उसने कॉल पर ऐसी बात कह दी जिसे सुन कर नीमा के भी होश उड़ गये

" अहह !!!! नीमा तूने मेरी चूत मे आग लगा कर रख दी ..खुद तो अपने बेटे से चुद कर शांत हो गयी, अब मैं क्या करूँ ? "

बात कहने के बाद भी कम्मो नही जान पाई उसके मूँह से क्या निकल गया ..वहीं कॉल की दूसरी तरफ नीमा मुस्कुरा दी, वजह कल तक वो खुद इस आग को मिटाने मे असमर्थ थी

" कम्मो बुरा मत मान ना ..पर क्या दीप जी तेरी प्यास नही बुझा पाते ? "

नीमा ने सवाल किया ..हलाकी उसके सवाल का आशय दीप के ऊपर सीधा - सीधा इल्ज़ाम लगाना था, नामार्दी का ..पर फिर भी कम्मो की आहों ने उसका धैर्य तोड़ दिया ..आख़िर लंड की प्यास क्या होती है ये नीमा से बेहतर कौन जान सकता था

" ऐसी बात नही है नीमा, वो तो चाहते हैं रोज़ मुझे चोदे ..पर मैं ही कमज़ोर पड़ जाती हूँ ..आज पहली बार मुझे एहसास हो रहा है कि मैं भी एक औरत हूँ ..चाहती हूँ वो जी भर के मुझे चोदे "

कामो का ये रूप बड़ा भयानक बन गया ..बिखरे बाल, आँखों मे सुर्खियाँ, ब्रा से बाहर निकली दोनो चूचियाँ, पेट पर लिपटी सारी, भारी साँसें ..यक़ीनन वो तड़प रही थी ..अगर इस वक़्त निकुंज कमरे मे आ जाता, तो भी उसे कोई ख़ास फरक नही पड़ना था, वो पूरी तरह अपने होश से बाहर निकल चुकी थी

" कम्मो औरत चाहे लाख अपनी चूत को खुजा ले पर असल खुजली लंड ही मिटा पाता है ..फिर चाहे उस लंड के अनेकों नाम हों ..अच्छा तूने किसी सवाल के मक़सद से कॉल किया था ..बातों मे इतनी उलझ गयी, ध्यान ही नही रहा "

नीमा को उसकी तड़प मे अपनी तड़प का एहसास हुआ, दोनो मे दोस्ती बहुत गहरी थी ..खेर इस मामले मे वो उसकी ज़्यादा कोई मदद तो नही कर पाती ..लेकिन आश्वासन ज़रूर दिया

" कुछ नही नीमा मेरे सारे सवालो के जवाब मिल गये ..मगर ये निगोडी झड़ने का नाम ही नही ले रही ..देख ना पिच्छले 15 मिनट से उंगली कर रही हूँ ..पानी तो बह रहा है, पर जलन नही जा रही "

कम्मो ने बेशर्मी से जवाब दिया, ऐसी तो वो कभी नही थी ..लेकिन इन दो दिनो मे उसके मश्तिश्क मे सिवाए उथल - पुतल के कुछ नही हुआ था

" चल रखती हूँ ..दीप जी का इंतज़ार कर ले, फिर जी भर के शांत कर लेना अपनी निगोडी को ..विक्की भी लौट आया है ..एक आख़िरी राउंड के बाद हम भी सोएंगे ..अपना ख़याल रखना, और निगोडी चूत का भी "

इतना कह कर हँसते हुए नीमा ने कॉल कट कर दिया, पर बेचारी कम्मो की हालत मे सुधार की गुंजाइश ना के बराबर थी ..अगले 15 मिनट तक उसने बिना रुके पूरी तेज़ी से अपनी चूत को रोंदा ..पर चूत का झड़ना नही हो पाया ..मन मसोस कर उसने अपनी साड़ी को घुटनो से नीचे कर दिया और आँखें बंद कर के लेट गयी ..उसका दिमाग़ तो अशांत था ही, शरीर की सारी ताक़त भी अब पस्त हो चुकी थी

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रिसेप्षन पर पहुच कर निकुंज ने आस पास के किसी पार्क की इन्फर्मेशन ली और सफ़ारी से वहाँ के लिए निकल पड़ा

अभी वो आधे रास्ते पहुचा ही था कि उसके सेल की मसेज टोन बीप हुई, देखा तो मसेज निक्की का था ..फॉरन उसने मसेज ओपन किया, लेकिन मसेज ब्लॅंक निकला

दो पल मे उसके चेहरे पर आई सारी मुस्कान मानो झाड़ सी गयी, कितना सुकून मिला था सिर्फ़ ये देख कर की उसके सेल पर आया मसेज उसकी प्यारी बहेन निक्की का है, पर मसेज के ब्लॅंक होने की वजह उससे छुपि नही थी ..वो जानता था घर पर उसकी बहेन सिर्फ़ अपनी भाई के बारे मे ही सोच रही होगी और बिना कुछ लिखे ही, ब्लॅंक मसेज के ज़रिए उसने अपने सूनेपन को निकुंज पर ज़ाहिर कर दिया

" मैने कल रात से एक पल को भी उसे याद नही किया ..और वो मुझे हर पल याद करती होगी "

खुद को दोषी करार देने के बाद उसने निक्की का नंबर सेल स्क्रीन पर ला दिया ..पर उसके अंगूठे मे ज़रा भी दम नही आ पाया ..बस ये सोच कर, बात होने के बाद दोनो की तड़प कम होने के बजाए बढ़ेगी ही, वो कॉल बटन प्रेस नही का पा रहा था

कुछ देर बाद निकले सल्यूशन मे उसने भी एक ब्लॅंक मसेज निक्की के सेल पर सेंड कर दिया और ड्राइव करते हुए जल्द ही पार्क पहुच गया
 
घूमने का रियल मक़सद था, थोड़ी देर फ्रेश एर मे साँसे ले सके पर पार्क मे आ कर तो जैसे उसकी घुटन और बढ़ गयी ..मुंबई मे तो हर रोज़ सुबह वो इस वक़्त निक्की के साथ होता था पर आज जैसे किस्मत ने दोनो को कोसो दूर फेक दिया ..निकुंज से सबर नही हो पाया, वो निक्की की आवाज़ सुनने को मचल उठा और इसके फॉरन बाद उसके हाथो ने वापस उसका नंबर डाइयल किया

" हेलो निक्की "

पहली रिंग मे ही उसकी बहेन ने कॉल पिक कर लिया जैसे इसी बात के इंतज़ार मे बैठी हो ..निकुंज ने बात शुरू की

" कैसे हो भाई ..मों कैसी हैं ..भैया से मिले की नही ..सब ठीक है ना वहाँ ? "

एक के बाद एक सवालो की झड़ी लगाते हुए निक्की ने रिटर्न मे पूछा ..लेकिन इन सब सवालो के बीच वो असली सवाल नही पूच्छ पाई .. ' आप को मेरी ज़रा सी भी याद नही आई, हमे बिछड़े पूरे 12 घंटे से ज़्यादा बीत चुके हैं "

" यहाँ सब ठीक है निक्की ..हम रात मे पुणे पहुच गये थे, मोम अभी होटेल मे हैं ..रघु से मिलने 11 के बाद जाएँगे ..तब तक डॉक्टर्स भी हॉस्पिटल आ चुके होंगे "

सेम टोन मे निकुंज बोला ..दोनो की आवाज़ो मे तड़प सॉफ दिखाई पड़ रही थी

निक्की :- " आप कहाँ हो अभी ? "

निकुंज :- " बस ऐसे ही थोड़ा टहलने के लिए होटेल से बाहर निकल आया था "

" किसी पार्क मे बैठे हो ना ? "

अचानक से पूच्छे सवाल से निकुंज घबडा गया, उसकी निगाहें गार्डेन के चारो तरफ घूमने लगी जैसे सच मे उसकी बहेन यही आस - पास कहीं छुपि हो

" तुझे तो सब पता है "

अपनी हरकत पर मुस्कुराते हुए निकुंज ने कहा

" आप को ये पूच्छना चाहिए था था .. ' मुझे कैसे पता आप अभी पार्क मे हो ' ..भाई क्या आप नही जानते मुझे आप की सांसो की रफ़्तार तक का पता है, फिर छोटी-मोटी बातें तो इसकी गिनती मे आती ही नही हैं "

निक्की बोलते-बोलते रुक गयी, उसका गला शायद बहुत ज़्यादा भारी हो गया था

" बस कर बेटा ..मैं और सुन नही पाउन्गा, और ध्यान रखना मैं रो भी सकता हूँ "

बोलते वक़्त सच मे निकुंज की आँखें भर आई ..अब तक उसने खुद को बहुत स्ट्रॉंग किया हुआ था, बट कल रात अपनी मोम के साथ हुई कॉन्वर्सेशन से वो अंदर तक टूट चुका था ..रोने के लिए उसे अपने किसी ख़ास के कंधे की ज़रूरत महसूस हुई, पर वो कंधा उससे मीलों दूर मुंबई मे था

" आप क्यों रोते हो ..रोना तो मुझे चाहिए ..दो दिन पहले मैने अपने प्यार का इज़हार किया था, पर जिससे किया ..उसने अब तक कोई जवाब नही दिया ..मुझे तो लगता है उसे मुझसे प्यार है ही नही, वरना अब तक मुझसे रूठा नही रहता ..भाई मैने जो शर्मनाक हरक़त की थी बाथ-रूम मे ..उसके लिए माफी चाहती हूँ ..अपना ख़याल रखना "

इतना कह कर निक्की ने कॉल कट कर दिया ..अब वो खुल कर रो भी सकती थी और उसके भाई को पता भी नही चलता

" हेलो ..हेलो ..हेलो ..... निक्की मेरी बात सुन "

जान कर, की कॉल कट हो चुका है, निकुंज चिल्लाता रहा ..निक्की ने जो भी बात कही, 100 फीसदी सच थी ..उसे बाथ-रूम वाली बात पर दुख था, जो निकुंज को उसकी बातों से समझ आ गया ..लेकिन जो बात उसके दिल मे टीस कर गयी ..वो थी निक्की का कहना .. ' निकुंज को उससे प्यार नही है "

" अब मैं तुझे कैसे बताऊ बेटा ..मुझसे ज़्यादा प्यार तुझे ना कभी किसी ने किया होगा ..ना कर पाया है ..और ना कभी कर पाएगा ..लेकिन चाह कर भी मैं अपनी नीयत मे खोट नही ला पा रहा हूँ ..और वैसे भी जिस तरह का प्यार तू मुझसे चाहती है ..मैं उस प्यार के काबिल नही रहा, नामार्द हो गया है तेरा भाई "

निकुंज रोने लगा ..किसी मर्द के लिए ये बात कितनी घृणा पैदा करने वाली होगी, की भरी जवानी मे उसका लंड काम करना बंद कर दे

वहीं निक्की खुद की हालत को सुधार कर हॉल मे आई, वो कॉलेज के लिए निकल ही रही थी कि दीप केवल स्टॉर्ट्स &; टी-शर्ट मे ऑफीस जाने का बोल कर घर से बाहर चला गया ..कुछ पल के लिए जैसे निक्की के उदास चेहरे पर स्माइल आ गयी और सोफे पर बैठ कर वो निम्मी के साथ बातें करने मे व्यस्त हो गयी .....

 
Bed par achet leti Kammo bade pasho-pesh me fasi thi, rote huye sirf use wahi baat yaad aati rahi jo uske bete ne bath-room me call cut karte huye kahi thi .. ' Aage jo bhi hoga akhir bhugatna to mujhe hi hai '

Doosra jhatka use Neema se baat-cheet ke dauraan laga ..uski dost ke moonh se us waQt zordaar siskiyaan nikal rahi thi, jaise uski dhuwaandhaar chaaudayi chal rahi ho ..aur shayad Tabhi Neema ne use 30 min. se return call karne ko kaha hoga

Ek ek pal sadiyon sa beetne laga, halaaki Kammo ne call par jo bhi jaankaari poochhi ..wo uski ghabraahat ya jalbaazi keh sakte hain, wo chaah kar bhi Nikunj ke dukh me shareek nahi ho paati ..bete ke lund ko chhuna ya choosna to bahut door ki baat ..uske liye to aisa sochna tak PAAP tha

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30 min. pashchyaat usne apne cell ko dekha, bejaan haath use uthane tak ko majboor lage ..jis khatarnaak mod par Kammo khadi thi ..uske ek taraf khaai ( Nikunj ) aur ab doosri taraf kunwa ( Neema ) thi

" Call par usse kya kahoongi, main ye jaankaariyaan kis liye le rahi hoon ? "

Khud ke sawaal par uski ankhen band ho gayi, jinki kinoro se ansuo ki boondo ka nikalna fir se jaari ho gaya ..lajja ka anubhav zaroori nahi tab hi ho, jab koi aap ke moonh par thappad maar jaaye ..Asal bezjati to tab mehsoos hoti hai jab aap ka mann baar-baar usi baat ka chintan kare

" Maana usne mujhe apne bete ke vishaye me bata diya tha, par main nahi bata sakti ..ek to umar me wo mujhse choti hai, fir ghar samhaalne waali bhi to khud wahi hai ..Agar uska pati door na hota to yakeenan wo vartmaan halaat ke aage kabhi nahi jhukti "

Kammo sochne me vyast thi tabhi uska cell bajne laga ..usne palken khol kar screen ki taraf dekha ..Calling Neema likha aa raha tha

" Inke ( Deep ) baare me bol doongi "

Ansu ponch kar usne apne bhare gale ko khakaara, taaki call par uske rone ka Neema ko anumaan na ho sake

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" Hello "

Kammo ne call pick kiya

" Haan Kammo ..Sorry yaar us waQt thoda busy thi ..Haan ab free hoon ..Bol kya baat poochhna tha ? "

Neema ne jawaab me kaha ..Foran Kammo ki bhoyen tann gayi ..Beete chaar din pehle Neema kitni gumsum thi, agar Kammo use samjhaane nahi jaati, yakeenan usne sucide kar liya hota ..lekin abhi call ke waQt uski awaaz me behad utsaah tha, chehek thi, khushi thi

Kammo ( apne mann me ) :- " Do hi kaaran ho sakte hain ..Ya to Vikk poori tarah se theek ho gaya hai, Ya to Neema halaat ke haatho haar gayi hai ..Thodi der pehle jo siskiyaan maine suni thi, Pramaan swaroop kaafi hai "

" Tujhe sach me nahi pata maine kya poochha tha ..Aisa kya zaroori kaam kar rahi thi us waQt ? "

Kammo ne sawaal kiya

" Tujhse kuch chhupa nahi rahi, par ye sach hai us time main apne hosh me nahi thi ..Kya poochha tha ab bol ? "

Neema ne jawaab diya

" Pehle bata hosh kahan tha tera ..Mujhe kuch ajeebo-gareeb awaayen bhi sunaayi de rahi thi "

Kammo ne uski chutki li, Ab ye clear ho gaya us waQt Neema chudaayi me busy thi

" Kammo maine tujhse kaha tha na, main jyada din zinda nahi rahungi, haan Maine apne andar ki maa ko Vikk ke liye maar liya hai ..Jab tera call aaya, hum sex kar rahe the "

Neema ne jawaab diya but is baar uski awaaz me kampan tha, glaani thi ..fir bhi bina kisi hichkichaahat ke usne sach bol diya

" Hmmmm !!!! Teri awaaz jab mere kaano me padi, main tabhi samajh gayi thi, call ki doosri taraf kya chal raha hoga ..Abhi kahan hain dono bachhe ? "

Kammo ne bhi normally jawaab diya ..Agar wo shocked ho ka reply karti, Neema ko zaroor hurt ho jaata

Neema :- " Sneha to apni mausi ke ghar gayi hai aur Vikk abhi-abhi medical gaya hai ..Mere liye pain killer lene "

Kammo :- " Pain killer ..Kisliye ? "

" Ab jab raat bhar me 6 baar chudaayi huyi hogi ..To pain killer to khaani hi padegi "

Neema ne dheeme swar me kaha, bolte waQt uske gaalo par laali chha gayi

" 6 baar ..Kya baat kar rahi hai ..Teri ch ..ch ..choot to buri tarah fat gayi hogi "

Is baar kammo bed par uchhal padi ..' ek raat me 6 baar chudaayi ' ..sun kar uske tote udd gaye ..sex me interest na ke baraabar hone se wo sirf ek round me hi past ho jaati thi, aur Neema ne ek hi raat me ' 6 baar ' sex kar liya wo bhi apne sage bete Vikk ke saath

Kammo ko mehsoos hua kal raat se uski choochiyon me bhaari pann aaya hai, nipple bhi kal raat se hi tane the, blouse ke andar sirf paseena hi paseena bhara hua tha , ajeeb si ghutan mehsoos kar foran usne blouse ke oopari do buttono ko khol diya ..asar pada lekin naam maatra ka

" Kya hua tu chup kyon ho gayi ? "

Neema haste huye boli ..Dono dost ke beech sex topic kabhi kabhaar hi hua hoga ..lekin ek limit se baahar dono hi nahi nikal paaye ..Par aaj to jaise kamaal hi ho gaya tha ..Choot, chudaayi jaise shabd khul kar moonh se bole ja rahe the

" Kuch nahi thoda blouse adjust kar rahi thi ..Kher tu bol kya bol rahi thi ? "

Kammo ki chadhti saanse Neema se nahi chup saki ..Baat wo apne bete ke saath huye sex ki kar rahi thi, aur uska asar Kammo par dikhayi de raha tha ..Shaitani me bhar kar turant Neema ne uske mann ki thaah lena ka socha

" To utaar de na blouse ko, kaun sa tujhe koi dekh raha hoga ..Main to abhi bhi nangi padi hoon bed par, utha tak nahi jaa raha, vikk ne haddi - haddi ka choorma bana kar rakh diya hai ..aur choot to jaise fat kar bhosda ban gayi hai "

Neema ne use chhedte huye kaha, wo jaanti thi ek maa ke liye ye sab sunna kitna strange feeling se bhara ho sakta hai ..kuch waQt pehle tak to wo khud bhi yahi soch kar paani ho jati thi, lekin aaj kayi mahino baad use aseem anand ki prapti huyi hai, uska rom - rom pulkit tha

" Bas kar Neema sharam nahi aati tujhe, meri umar ka to khayaal kar "

Kammo se raha nahi gaya usne do pal ko cell haath se chhod kar, furti se apna blouse utaar kar bed par gira diya ..kuch gehri saansen lene ke baad usne wapas cell apne kaan se chipkaya

" Kya karoon Kammo, aaj to jaise main swarg me pahuch gayi hoon ..kal tak siwaaye kismat ko dosh dene ke alawa mere paas koi doosra chaara nahi tha, lekin aaj main usi kismat ki shukraguzaar hoon, jo mujhe chand ghanto me hi itna sukh mil gaya "
 


Neema bolti rahi, aur Kammo bade gaur se uski baaton ko sunne me vyast ho gayi ..uski choot me sikudan aana laazmi tha, aur hua bhi yahi ..Apni taango ko poora failaa kar bhi Kammo ko chain nahi mil paaya

" Jaanti hai Kammo, 3 dino se Vikk apne school practical me busy raha, main jab bhi uske kamre me jaati, use kitaabo me uljha paati ..ek pal ko to mujhe lagta jaise maine is jung ko jeet liya hai, mera beta ab mastubate ki buri lat se azaad ho gaya hai ..lekin doosre hi pal main udaas ho jaati, sharam nahi karoongi bataane me ..par meri udaasi ki asli wajah thi uska lund, jise maine beete 5 mahino me lagataar dekha tha ..ek tarah se use choosna mere jeeven ki dinchraya me shaamil ho gaya tha ..kayi - kayi baar to raat - raat bhar mujhe neend nahi aati thi, bas jee me aata abhi uske kamre me jaau aur saari raat maze se choosu, usse khelu ..akhir kab tak ek aurat pyaasi reh sakti hai ..Mere husband ke saath last chudaayi maine 10 mahine pehle ki thi, wo bhi sirf ek chota sa round

Kammo pichhle kayi mahino se meri choot me bhayaanak aag lagi thi, aisi aag jo ab sirf lund se hi bujh paati ..Maine bahut socha par apna mann nahi badal saki ..Kal jab Vikki school se lautne wala tha, maine apne room ka gate khula chhod diya aur saare kapde utaar kar khud ko sanwaarne lagi, maine failsa kar liya tha aaj raat main usse se chud kar hi dum loongi

Wo ghar aane ke foran baad mere kamre me aa gaya, gate se andar jhankte hi main use nangi sheeshe ke saamne baithi dikhaayi di, jaane kyon uske kadam peechhe hatne lage aur wo mere kamre se baahar jaane laga ..lekin tabhi maine use roka aur apne paas bulaya, haule haule kadmo se chalta hua wo mere saamne aa kar khada ho gaya, Humaari nazren mili ..hum dono ki dhadkane tez raftaar se chal rahi thi, Kammo us waQt mere haath me kainchi thi, main apni jhaante kaat rahi thi

Main :- " Beta kuch kaam tha kya ? "

" No mom, main to...... "

Wo isse jyada kuch nahi bol paaya, lekin uski nazar jald hi meri taango ki jad ko ghoorne lagi ..maine lajaakar uski ankhon me dekha, jinme badi utsukta thi, uski laal ankhon me ajeeb si baichaini dikhaayi de rahi thi ..pehli baar apni maa ko nanga dekh raha tha, Ya shayad kisi bhi aurat ko

Wo khada tha aur main chair par baithi thi, pant ke andar khade lund ka fulaav dekhte hi meri choot ne paani chhodna shuru kar diya, maine der na karte huye uske pant ki belt kholi di, aur agle hi pal mere haatho me wapas mera khilauna laut aaya, jise main 3 dino se bahut miss kar rahi thi

Vikk ke lund me itna jyada tanaav shayad hi maine kabhi dekha hoga, Ya yun keh le ..use apni ma ka nanga badan pasand aaya ..fati ankhon se ab bhi wo sirf meri choot ko hi nihaar raha tha

Maine apne khushk honth uske sooje supaade par rakh diye, dono hi cheezen us waQt angaar thi ..wo sisak utha, aur foran maine apni do ungliyaan choot ke andar ghusa li, saath hi supaade ke chhed par apni pointed jeebh chubhaate huye, use tadpaane lagi ..kal tak jo lund mere liye bete ka tha, aaj mujhe wo kisi gabru jawaan ladke ka dikhaayi de raha tha

Usse sehen nahi ho paaya aur uske haatho ne mere baalo ko apni muthhi me bhar liya ..wo chaahta tha, main foran lund choosne lagu par main agle 5 min tak sirf use uksaati rahi ..aaj shayad uske moonh se sunne ko betaab thi ' Mom chooso na '

Jald hi uska sabar toot gaya aur chillate huye usne jabardasti adha lund mere moonh ke andar kar diya ..mujhe apna bachaav karne ki koi azaadi nahi mil paayi, jyada waQt nahi laga aur wo lagbhag poora lund mere gale ke aar - paar nikaalne ki koshish karne laga ..main baar-baar choke ho jaati, moonh se behkar laar meri chuchiyon tak pahuch gayi thi ..Aaj pehli baar maine khud se sawaal kiya .. ' uska lund mere moonh me samaa kyon nahi pa raha ..jise main asaani se poora nigal leti thi, aaj bada kastkaari kyon lag raha tha '

Kammo tu yakeen nahi karegi, Vikki ka aisa wahshi roop maine 1st time dekha ..ab tak jo bhi hota aaya tha, meri marzi se ..main roz uske kamre me use blowjob deti, aur wo chupchaap apni ankhen band kiye leta rehta tha ..Kayi - kayi baar mann ke haatho vivash ho kar main ghante bhar tak uske lund se kehli rehti, bina parwaah kiye ki mera beta us dauraan kitni baar jhada aur kitni baar uski maa ne uske virya se apna gala tar kiya ..jab atyadhik dard se wo behaal jo jata, main use chhod deti ..par ek baar bhi usne mujhse koi jyaadati nahi ki ..us din tere saamne jo main royi thi, ye uska hi parinaam tha ..main apni choot me uthti agan ko zara bhi shaant nahi kar pa rahi thi, lag raha tha sucide kar loon aur sab yahin khatam ho jaaye

Tune mujhe saahas to diya par meri jagah agar tu khud is jang se lad rahi hoti ..majbooran tujhe bhi wahi karna padta jo maine kiya

Kammo Vikk lagataar mere moonh ko chodta raha, maine bhi haar nahi maani aur apna dard choot ko sehlaane me baat liye ..Yahan uski kamar ka ek jhatka lagta aur wahan meri ungliyaan choot ke aur bhi jyada andar ho jaati

Kuch der baad Vikk jhunjhlaane laga aur main samajh gayi, mera kaam ab asaan hai ..maine ishaaron se use bed par chalne ko kaha ..foran usne apna lund mere moonh se baahar nikaala aur mera haath pakad kar mujhe bed ki taraf le gaya ..apni peeth ke bal let kar Vikk ne mere usi haath ko wapas apne lund par rakh diya aur ek aisi nazar se mujhe dekha .. ' jisme sirf aur sirf vaasna bhari thi, tadap bhari thi ' ..wo keh to nahi paaya par uska aashay mujhe pata tha ..Yakeenan wo chaahta tha jald hi use, uske lund ke tanaav se mukti mil jaaye ..maine muskura kar apna dher saara thook lund par chhod diya aur jeebh se faila kar use chiknaayi se bharne lagi

Bas Kammo yahi wo pal tha jab mere andar ki maa mar gayi aur uske turant baad hi main apni marzi se uske khade lund par baithti chali gayi ..shuruwaat me kayi mushQilen aayi, hazaar sawaalo se Vikk ka chehra ghambheer hota gaya ..lekin maine kaam zaari rakte huye, apni kamar uske lund par zoro se patakne lagi ..sahi maayne me dard to us waQt mujhe mehsoos ho raha tha, in 10 mahino me meri choot sikud kar kaafi tight jo ho gayi thi

Thodi der baad Vikk ki kamar bhi meri taal se taal milaane lagi aur beeti raat poore 6 dafa hume apne rishte ko daagdaar kiya ..Ya shayad hamesha karte rahenge, ab ye PAAP hume kahan tak le jayega pata nahi ..par mujhe sab mazoor hai "

Itna keh kar Neema shant ho gayi, in aakhiri do panktiyon me usne asal jeevan ke saare raaz khol diye ..Maana usne 10 mahine baad apni choot me aaraam paya tha, lekin wo jaanti thi ye aaraam jald haraam me badal jaana hai ..jab maa ke saath bete ne sansarg sthaapit kar liya, to yakeenan apni behen ke liye bhi uske vichaar maile huye bina nahi reh paayenge

Wahin hotel ke kamre me to jaise bhoochaal mach gaya ..blouse ke oopar Kammo ki geeli mehroon panty padi thi aur saree apne pet par lepete uski ungliyan, apni sooji choot ko aur sujaane me vyast thi ..wo zara bhi hosh me nahi thi, ek haath se cell apne kaan par lagaaye aur doosre ki 3 ungliyon se yoni ka mardan karte huye use yah bhi dhyaan nahi raha, call par Neema uski aahon ko bakhubi sun rahi hogi

" Kahan kho gayi Kammo, aur teri awaaz ko kya hua ? "

Akirkaar Neema ne poochh liya, Kammo ki band ankhen ek jhatke me khul gayi ..Khud ki halaat dekh use achraj to hua par uski ungliyaan jyon ki tyon choot ke andar - baahar hoti rahi ..madhoshi ka aalam us par aisa chhaya ki achaanak se usne call par aisi baat keh di jise sun kar Neema ke bhi hosh udd gaye

" Ahhhhhhhh !!!! Neema toone meri choot me aag laga kar rakh di ..Khud to apne bete se chud kar shaant ho gayi, ab main kya karoon ? "

Baat kehne ke baad bhi Kammo nahi jaan paayi uske moonh se kya nikal gaya ..wahin call ki doosri taraf Neema muskura di, wajah kal tak wo khud is aag ko mitaane me asmarth thi

" Kammo bura mat maan na ..par kya Deep ji teri pyaas nahi bujha paate ? "

Neema ne sawaal kiya ..halaaki uske sawaal ka aashay Deep ke oopar seedha - seedha ilzaam lagaana tha, naamardi ka ..par fir bhi Kammo ki aahon ne uska dhairya tod diya ..akhir lund ki pyaas kya hoti hai ye Neema se behtar kaun jaan sakta tha

" Aisi baat nahi hai Neema, wo to chaahte hain roz mujhe choden ..par main hi kamzor pad jaati hoon ..aaj pehli baar mujhe ehsaas ho raha hai ki main bhi ek aurat hoon ..Chaahti hoon wo jee bhar ke mujhe choden "

Kaamo ka ye roop bada bhayaanak bann gaya ..bikhre baal, ankhon me sukrkhiyat, bra se baahar nikli dono choochiyaan, pet par lipti saree, bhaari saansen ..Yakeenan wo tadap rahi thi ..agar is waQt Nikunj kamre me aa jaata, to bhi use koi khaas farak nahi padna tha, wo poori tarah apne hosh se baahar nikal chuki thi

" Kammo aurat chaahe laakh apni choot ko khuja le par asal khujli lund hi mita paata hai ..fir chaahe us lund ke anekon naam hon ..achha toone kisi sawaal ke maQsad se call kiya tha ..baaton me itni ulajh gayi, dhyaan hi nahi raha "

Neema ko uski tadap me apni tadap ka ehsaas hua, dono me dosti bahut gehri thi ..kher is maamle me wo uski jyada koi madad to nahi kar paati ..lekin ashvaasan zaroor diya

" Kuch nahi Neema mere saare sawaalo ke jawaab mil gaye ..Magar ye nigodi jhadne ka naam hi nahi le rahi ..dekh na pichhle 15 min se ungli kar rahi hoon ..Paani to beh raha hai, par jalan nahi ja rahi "

Kammo ne besharmi se jawaab diya, aisi to wo kabhi nahi thi ..lekin in do dino me uske mashtishk me siwaaye uthal - putal ke kuch nahi hua tha

" Chal rakhti hoon ..Deep ji ka intzaar kar le, fir jee bhar ke shaant kar lena apni nigodi ko ..Vikk bhi laut aaya hai ..ek akhiri round ke baad hum bhi soyenge ..Apna khayaal rakhana, aur nigodi choot ka bhi "

Itna keh kar haste huye Neema ne call cut kar diya, par bechaari Kammo ki haalat me sudhaar ki gunjaaish na ke baraabar thi ..agle 15 min tak usne bina ruke poori tezi se apni choot ko ronda ..par choot ka jhadna nahi ho paya ..mann masos kar usne apni saree ko ghutno se neeche kar diya aur ankhen band kar ke let gayi ..uska dimaag to ashant tha hi, shareer ki saari taaQat bhi ab past ho chuki thi

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Reception par pahuch kar Nikunj ne aas paas ke kisi park ki information li aur safari se wahan ke liye nikal pada

Abhi wo aadhe raste pahucha hi tha ki uske cell ki msg tone beep huyi, dekha to msg Nikki ka tha ..foran usne msg open kiya, lekin msg blank nikla

Do pal me uske chehre par aayi saari muskaan maano jhad si gayi, kitna sukoon mila tha sirf ye dekh kar ki uske cell par aaya msg uski pyari behen Nikki ka hai, par msg ke blank hone ki wajah usse chhupi nahi thi ..wo jaanta tha ghar par uski behen sirf apni bhai ke baare me hi soch rahi hogi aur bina kuch likhe hi, blank msg ke zariye usne apne soonepann ko Nikunj par zaahir kar diya

" Maine kal raat se ek pal ko bhi use yaad nahi kiya ..aur wo mujhe har pal yaad karti hogi "

Khud ko doshi karaar dene ke baad usne Nikki ka number cell screen par la diya ..par uske angoonthe me zara bhi dam nahi aa paaya ..bas ye soch kar, baat hone ke baad dono ki tadap kam hone ke bajaaye badhegi hi, wo call button press nahi ka pa raha tha

Kuch der baad nikle solution me usne bhi ek blank msg Nikki ke cell par send kar diya aur drive karte huye jald hi park pahuch gaya

Ghoome ka real maQsad tha, thodi der fresh air me saanse le sake par park me aa kar to jaise uski ghutaan aur badh gayi ..Mumbai me to har roz subah wo is waQt Nikki ke saath hota tha par aaj jaise kismat ne dono ko koso door fek diya ..Nikunj se sabar nahi ho paya, wo Nikki ki awaaz sunne ko machal utha aur iske foran baad uske haatho ne waapas uska number dial kiya

" Hello Nikki "

Pehli ring me hi uski behen ne call pick kar liya jaise isi baat ke intzaar me baithi ho ..Nikunj ne baat shuru ki

" Kaise ho bhai ..Mom kaisi hain ..Bhaiya se mile ki nahi ..Sab theek hai na wahan ? "

Ek ke baad ek sawaalo ki jhadi lagaate huye Nikki ne return me poochha ..lekin in sab sawaalo ke beech wo asli sawaal nahi poochh paayi .. ' Aap ko meri zara si bhi yaad nahi aayi, hume bichhde poore 12 ghante se jyada beet chuke hain "

" Yahan sab theek hai Nikki ..Hum raat me Pune pahuch gaye the, mom abhi hotel me hain ..Raghu se milne 11 ke baad jayenge ..Tab tak doctors bhi hospital aa chuke honge "

Same tone me Nikunj bola ..Dono ki awaazo me tadap saaf dikhaayi padh rahi thi

Nikki :- " Aap kahan ho abhi ? "

Nikunj :- " Bas aise hi thoda tehelne ke liye hotel se baahar nikal aaya tha "

" Kisi park me baithe ho na ? "

Achaanak se poochhe sawaal se Nikunj ghabda gaya, uski nigaahen garden ke chaaro taraf ghoomne lagi jaise sach me uski behen yahi aas - paas kahin chhupi ho

" Tujhe to sab pata hai "

Apni harkat par muskuraate huye Nikunj ne kaha

" Aap ko ye poochhna chaahiye tha tha .. ' Mujhe kaise pata aap abhi park me ho ' ..Bhai kya aap nahi jaante mujhe aap ki saanso ki raftaar tak ka pata hai, fir chhoti-moti baatein to iski ginti me aati hi nahi hain "

Nikki bolte-bolte ruk gayi, uska gala shayad bahut zyada bhari ho gaya tha

" Bas kar beta ..Main aur sunn nahi paunga, aur dhayan rakhna main ro bhi skata hoon "

Bolte waQt sach me Nikunj ki ankhen bhar aayi ..ab tak usne khud ko bahut strong kiya hua tha, but kal raat apni mom ke saath huyi conversation se wo andar tak toot chuka tha ..Rone ke liye use apne kisi khaas ke kandhe ki zaroorat mehsoos huyi, par wo kandha usse meelon door Mumbai me tha

" Aap kyon rote ho ..rona to mujhe chaahiye ..Do din pehle maine apne pyar ka izhaar kiya tha, par jisse kiya ..usne ab tak koi jawaab nahi diya ..Mujhe to lagta hai use mujhse pyar hai hi nahi, warna ab tak mujhse rootha nahi rehta ..Bhai maine jo sharmnaak harQat ki thi bath-room me ..uske liye Maafi chaahti hoon ..Apna khayaal rakhna "

Itna keh kar Nikki ne call cut kar diya ..Ab wo khul kar ro bhi sakti thi aur uske bhai ko pata bhi nahi chalta

" Hello ..hello ..hello ..... Nikki meri baat sun "

Jaan kar, ki call cut ho chuka hai, Nikunj chillata raha ..Nikki ne jo bhi baat kahi, 100 feesadi sach thi ..use bath-room waali baat par dukh tha, jo Nikunj ko uski baaton se samajh aa gaya ..lekin jo baat uske dil me tees kar gayi ..wo thi Nikki ka kehana .. ' Nikunj ko usse pyar nahi hai "

" Ab main tujhe kaise bataau beta ..Mujhse jyada pyar tujhe na kabhi kisi ne kiya hoga ..Na kar paaya hai ..aur na kabhi kar paayega ..lekin chaah kar bhi main apni neeyat me khot nahi la pa raha hoon ..aur waise bhi jis tarah ka pyar tu mujhse chaahti hai ..Main us pyar ke kaabil nahi raha, naamard ho gaya hai tera bhai "

Nikunj rone laga ..kisi mard ke liye ye baat kitni gharna paida karne waali hogi, ki bhari jawaani me uska lund kaam karna band kar de

Wahin Nikki khud ki haalat ko sudhaar kar hall me aayi, wo college ke liye nikal hi rahi thi ki Deep kewal storts & t-shirt me office jaane ka bol kar ghar se baahar chala gaya ..Kuch pal ke liye jaise Nikki ke udaas chehre par smile aa gayi aur sofe par baith kar wo Nimmi ke saath baatein karne me vyast ho gayi .....

 
पापी परिवार--41

इन पुणे :-

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काफ़ी देर तक पार्क में समय बिताने के बाद निकुंज वापस होटेल की तरफ लौटने लगा ...हॉस्पिटल जाने का टाइम नज़दीक था और शायद उससे पहले कम्मो शॉपिंग करने जाती.

कार में बैठ कर वो मेन रोड पर आ गया, उसका पीड़ित मन बार - बार उससे कह रहा था ...... " मत जा होटेल !!! कहीं भाग जा, तेरी पूरी फ्यूचर लाइफ स्पायिल हो गयी है ..अब तू किसी काम का नही रहा " ......सहसा उसे गालो पर आँसुओ की धार बहने लगी ...जिनमे कुछ बूँदें उसकी बहेन निक्की के पागलपन की भी साक्षी थी.

" तनवी से शादी के लिए मना करना पड़ेगा, वरना उस बेचारी की ज़िंदगी भी नर्क में तब्दील हो जाएगी ..बहुत बड़ा अन्याय हो जाएगा उसके साथ " ........निकुंज सोचने लगा, जब वो उससे पहली बार मिला था ...कितना मासूम भोला चेहरा, शरारती आँखें ...कैसे उसने निकुंज की बोलती बंद कर दी थी यह कह कर कि ...... " उसे खाना बनाना तो नही आता पर बना खाना ज़रूर आता है " ........उसकी बात सुनकर तो जैसे निकुंज के कानो से धुआ निकल गया था, एक पल तो लगा वहाँ से भाग जाए ...पर अगले ही पल जब वो ज़ोरो से हसी, निकुंज उसकी मुस्कुराहट पर मर मिटा था.

बाद में वे दोनो ज्यूयलरी शॉप पहुचे, तनवी के लाख मना करने के बावजूद उसने उसे कर्ध्नी गिफ्ट की ...यहाँ तक कि अपने हाथो से पहनाई भी, कितना कोमल बदन है उसका ...सोचने मात्र से भी मैला हो जाने वाला जिस्म और तो और शॉप से बाहर आते वक़्त कैसे उस अंजान लड़की ने, उसके डॅड के दोस्त के पैर छु कर आशीर्वाद माँगा था ...वो नज़ारा देख कर वाकाई निकुंज का सीना फक्र से चौड़ा हो गया था.

वहाँ से निकलने के बाद तनवी ने उसे बताया कि यह उनकी आख़िरी मुलाक़ात है ...अब वो सीधे शादी के मंडप में मिलेंगे, उससे पहले ना कोई फोन कॉल ना कोई डेट ...सिर्फ़ हिचक़ियों में एक दूसरे को याद करेंगे.

" मगर मैने उसे याद ही कहाँ किया, कभी निक्की और कभी मोम ..इनसे उबर पाउ तो याद करू भी " ......एक चिड के साथ निकुंज ने खुद से कहा, निक्की के रूप में उसकी एक परेशानी ख़तम नही हो पाई थी कि दूसरी ... कम्मो के रूप में चली आई.

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इन्ही सोचो के बीच वो होटेल पहुच गया ...लगभग 15 मिनिट तक खुद को नॉर्मल करने के बाद, लिफ्ट से वो अपने रूम कॉरिडर में आया और 2न्ड के से दरवाज़ा खोलने लगा.

गेट अनलॉक कर वो कमरे में एंटर हुआ, पर अंदर का नज़ारा देखते ही उसकी आँखें चौंधिया गयी, उसकी मा बेड पर करवट लिए लेटी थी और उसकी पीठ निकुंज की तरफ थी ...इस वक़्त कम्मो के ऊपरी बदन पर सिवाए ब्रा के कुछ और नही था, एक पतली सी स्ट्रीप के अलावा उसकी पूरी पीठ नेकेड थी ... 1स्ट टाइम ऐसा मौका आया जब निकुंज ने अपनी मोम की अधनंगी बॅक का दीदार किया, चाह कर भी कुछ पल के लिए उसकी निगाहें मा के गोरे बदन से ना हट सकी ... ब्रा स्ट्रीप ब्लॅक थी और अस्तव्यस्त साड़ी में कम्मो के चूतड़ो की स्टार्टिंग दरार सॉफ दिखाई पड़ रही थी ... एक भारी औरत के बदन में जितनी कशिश और सुदोलता होती है उतनी नौजवान लड़कियों में कहाँ, निकुंज के कदम जहाँ थे वही जमे रह गये.

अचानक से कम्मो ने करवट बदली और अपनी पीठ के बल लेट गयी, पिछले 1 घंटे से सिवाए करवट बदलने के वो और कर भी क्या रही थी ... हड़बड़ा कर निकुंज फॉरन फ्लोर पर लेट गया ताकि कम्मो, कमरे में उसकी मौजूदगी को महसूस ना कर सके ...डर तो आख़िर डर होता है, निकुंज की सोच में अगर मोम जान जाती, उनका बेटा इस वक़्त कमरे में उनके साथ मौजूद है ... वाकाई वो उससे और भी ज़्यादा खफा हो जाती और ऐसा सोचने के बाद निकुंज के माइंड में छुप्ने के अलावा और कोई बात नही आ सकी.

5 मिनिट तक वो ज़मीन पर ऐसे लेटा रहा जैसे कमरे में कोई बॉम्ब लगा हो ...साँसे तक थम सी गयी थी, जब उसने कोई और हरक़त की आवाज़ नही सुनी ...उठ कर वापस खड़ा हुआ, पर इस बार का नज़ारा तो कामुक़पन्न की सारी हदें पार करने लायक था.
 


पीठ के बल लेटी उसकी मा इस वक़्त तेज़ी से अपनी साँसे अंदर बाहर कर रही थी, जैसे नींद में कोई डरावना सपना देख रही हो, उसके ऐसा करने से ब्रा में क़ैद उसकी पहाड़ सी चूचियों का यौवन चरम पर पहुच कर वापस लौट आता ...निकुंज तो जैसे पत्थर बन गया और आँखों के साथ मूँह फेड एक - टक उसकी चूचियों में खो कर रह गया, अपने आप उसकी नज़र फिसलती हुई मा के नंगे पेट पर पहुचि, जो थोड़ा उभरा था और दूर से भी उसकी नाभि का गहरापन सॉफ दिखाई पड़ रहा था.

निकुंज को यह सीन देखते हुए पसीने आ रहे थे उसे यह भी ग्यान नही रहा ....... " अगर मा उठ गयी तो उसकी आँखों में उतरा वहशिपन देख सकती है "

उसे असली झटका तब लगा जब उसने बेड पर उतरे पड़े ब्लाउस को देखा और इसके साथ ही उसका हाथ अपने खुले मूँह को बंद करने की गर्ज से चेहरे पर पहुच गया ...वजह वो ब्लाउस ना हो कर उसके ऊपर पड़ी महरूण पैंटी थी, जो कम्मो ने नीमा से बातें करने के दौरान उतार कर फैंक दी थी.

" मोम ने ब्लाउस के साथ पैंटी भी उतार दी " .........उसके मूँह से यह शब्द निकले और ठीक इसी वक़्त कम्मो ने साड़ी के ऊपर से अपनी चूत को खुजाना शुरू कर दिया ...उसके चेहरे को देख कर लग रहा था वो कितनी प्यासी है, निकुंज किसी हरक़त में आ पाता इससे पहले ही कम्मो ने एक मादक सिसकी ली और जुंझलाहट भरा चेहरा बना कर अपना एक हाथ पेट पर रगड़ते हुए साड़ी के अंदर डाल दिया.

" नही !!! यह सरासर ग़लत है " ........फॉरन निकुंज पलटा और अपना मोबाइल सोफे पर फैकते हुए बाथरूम की तरफ जाने लगा ...मगर जाते - जाते उसने एक नज़र कम्मो को फिर से देखा, अब उसके चेहरे के हाव - भाव पूरी तरह बदल चुके थे और साड़ी के अंदर उसका हिलता हुआ हाथ यह ज़ाहिर करने को काफ़ी था कि वो अपनी चूत से खेल रही है, उसे मसल रही है और इसके साथ ही बौखलाया निकुंज बाथ - रूम में परवेश कर गया.

बाथ - रूम का गेट बंद हुआ ...हैरान - परेशान निकुंज हथ्प्रद बस अपनी मा और उसकी हरक़तों से झूझे जा रहा था ...बोझिल कदमो से वो आगे बढ़ा और सीध शवर के नीचे खड़ा हो गया, एक पल की भी देरी नही हुई और भर - भर करता पानी उसके कपड़ो को भिगोने लगा.

" डॅड के बगैर मोम परेशान होंगी " ........उसने खुद को सांत्वना दी, ठंडे पानी के प्रेशर ने उसके पूरे बदन की गर्मी बहा दी थी ...अब वो काफ़ी नॉर्मल हो गया था और किसी तरह का कोई रोमांच बाकी नही रहा, उसकी नज़रो में कम्मो ने जो किया हर औरत की नीद होती है ...यही सोचते - सोचते उसने अपने भीगे कपड़े उतार दिए और जैसे ही उसकी नज़र छुहारे की भाँति ढीले पड़े अपने लंड पर गयी ....वापस उसके दिल में पीड़ा का ज्वर समाया और वो दीवार के सहारे फ्लोर पर बैठ कर आँसू बहाने लगा.

वहीं दूसरी तरफ कम्मो अपने कान बाथ - रूम के गेट से टिकाए खड़ी थी ...आक्चुयल में जब उसका बेटा कमरे का गेट अनलॉक कर रहा था उसकी आहट से कम्मो की नींद टूट गयी और उसने यह सब निकुंज को उत्तेजित करने के लिए किया था ...या शायद इस चक्कर में उसने अपनी उत्तेजना को बढ़ा लिया, अब वो की होल से बाथ - रूम के वर्तमान हालात जान'ना चाहती थी ...पर यह उसकी हिम्मत से परे जान पड़ा.

" मुझे यह तो जान'ना पड़ेगा कि निकुंज के लंड में तनाव आया या नही ...क्यों कि मैने एक नज़र भी उसकी हरक़त पर गौर नही कर पाई थी " ........आख़िर उसके मन ने उसे मजबूर कर ही दिया और वो घुटने के बल बैठ कर के होल से अंदर झाँकने लगी.

निकुंज उसे अपना सर नीचे झुकाए बैठा दिखाई दिया ...होल से कम्मो बेहद क्लियर व्यू से उसे देख पा रही थी ...अब बारी थी अपने सगे बेटे की टाँगो की जड़ में तान्क - झाक करने की ...कम्मो ने अपना थूक गट्का और होंठो को तीव्रता से चबाने लगी, परंतु उसकी नज़र अपने बेटे के झुके सर से नीचे जाने को तैयार नही हुई ...शवर ठीक दरवाज़े के सामने था और कम्मो किसी दूरदर्शी यन्त्र की तरह अपनी दाँयी आँख के होल से चिपकाई बैठी थी.

" कम्मो !!! सोच क्या रही है, यह सब तेरी ही ग़लती का नतीज़ा है ..जो निकुंज को जीवन पर्यंत भुगतना पड़ेगा " ........अंतर्मन की तोचना उससे सहन ना हो सकी और आँख की पुतली हौले - हालूए नीचे झुकती चली गयी.

" इचह !!! " ......एक ज़ोरदार हिचकी से उसका सामना हुआ और उसके होश उड़ गये ...निकुंज पूर्न नागन हालत में अपनी गान्ड ज़मीन पर टिकाए बैठा था साथ ही उसकी टांगे विपरीत दिशा मैं फैली थी ...उसका झुका सर इस बात का सबूत था, वो अपने ढीले लंड को देख कर उदासी में कुछ बड़बड़ा रहा है ...हलाकी कम्मो को उसके मूँह से निकलते स्वर शवर की तेज़ आवाज़ में सुनाई नही दे पाए, परंतु वा अंजान नही थी ....... " ज़रूर इसी बात से दुखी होगा कि भरी जवानी में यह अन्याय झेलना पड़ रहा है " .......मन मसोस कर कम्मो ने उसके लंड पर अपनी नज़रें गढ़ा दी, इस वक़्त यदि कोई और औरत यह नज़ारा देख रही होती, ज़रूर इस अकल्पनीया दृश्य में खोकर अपनी योनि सहलाने लगती ...अपने खुश्क होंठो पर जीब फेरने लगती पर ना तो कम्मो को कोई हैरानी हुई और ना ही उसे उत्तेजना का कोई अनुभव हुआ ...क्यों कि यहाँ बात दिल से जुड़ी थी ना कि किसी वासना के.

कम्मो ने सॉफ देखा उसके बेटे के लंड में कोई उबाल नही था ...उसके बड़े - बड़े परंतु ढीले अंडकोष ज़मीन पर टिके हुए थे, एक वक़्त को तो उसके ज़ख़्मी दिल में आया, इसी वक़्त दरवाज़ खटखटा दे और अंदर जा कर कोई भी ऐसा जतन करे जिससे उसके बेटे की बर्बाद ज़िंदगी में वापस रंग उमड़ पड़ें.
 


लंड के आस पास बालो का कोई नाम - ओ - निशान नही था ...ढीले पन में भी उसकी लंबाई और गोलाई दीप के लंड से बड़ी आसानी से मान्पि जा सकती थी ...अग्र भाग की खाल से बाहर को निकलता सुपाडा बेहद गुलाबी और एक - दम छोटे आलू बुखारे की भाँति नज़र आ रहा था.

" नीमा ने कहा था, उसे अपने बेटे का लंड चूसने में बहुत मज़ा आता है ...पर जब उसे इतना मज़ा आता है तो फिर उसके बेटे विक्की को कितना मज़ा आता होगा " .......यह बात सोचते ही कम्मो का चेहरा फीका पड़ गया ...उसने फॉरन अपनी आँख के होल से हटाई और अपनी उखड़ती सांसो पर क़ब्ज़ा करने लगी ...यहाँ लंड चुसाई के मज़े से उसका तात्पर्य कुछ भी कर अपने बेटे के ढीले व मृत लंड को खड़ा करना था, फिर चाहे इस कुकर्म को करने के बाद वो कभी अपना सर उठा कर खड़ी ना रह पाती ...परंतु उसके बेटे के दुखी चेहरे पर लौट'ती मुस्कुराहट की मात्र एक झलक देखने के लिए वह आज हर हद्द से गुज़रने को तैयार जान पड़ी.

" मुझे करना होगा ...वो भी इसी पल " .........कम्मो खड़ी हो गयी ...दो चार बार अपने सुन्न हाथो को झटकने के उपरांत उसने दरवाज़े को खटखटाने की गार्ज से हाथ ऊपर उठाया और तभी सोफे पर पड़ा निकुंज का सेल फोन बजने लगा.

कम्मो फॉरन पलटी और दौड़ कर सीधे बेड पर लेटने लगी ...उसे डर महसूस हुआ कि निकुंज कमरे में ना आ जाए, यहाँ एक बात तो थी ....... " औरत चाहे कितना भी कठोर दिल पा ले, परंतु एक वक़्त उसे नरम होना ही पड़ता है ..ऐसा कतयि नही कि जिगरे वाली औरतें संसार में पैदा नही होती, लेकिन कहीं ना कहीं उनके मन में भी डर व्याप्त होता है " ......कम्मो !!! जो अभी थोड़ी देर पहले बाथ - रूम के अंदर जाने का पक्का मन बना चुकी थी ...और अभी एक हल्की से आहट पर कैसे दम - दबाकर बेड पर वापस लेट गयी कि कहीं उसका बेटा उसे बाथ - रूम के इर्द - गिर्द, तान्क - झाँक करते ना देख ले.

सेल पूरी रिंग दे कर बंद हो गया ...निकुंज बाथ - रूम दरवाज़े पर ही खड़ा था, पर उसके पास ना तो सूखे कपड़े थे और ना ही जल्दबाज़ी में टवल अपने साथ ले गया था ...कम्मो भी इस बात को समझ गयी और फॉरन बेड से नीचे उतर कर उसने आए कॉल का नंबर देखने की कोशिश की ...मगर सेल हाथो में उठाते ही वो वापस रिंग करने लगा और इस बार कम्मो ने बिना नंबर या नाम देखे कॉल पिक कर लिया.

" हेलो !!! साले अभी भी मूठ मा रहा है क्या ...अच्छा सुन, मैने मेरी एक पुरानी गर्ल फ्रेंड को पटा लिया है और वो तेरी मदद करने को तैयार भी हो गयी है ..भेन्चोद !!! ग़ज़ब की गर्मी है उसमें, और क्या मस्त लंड चूस्ति है यार ..मैं तो कहता हूँ, खड़ा होते ही पटक लेना साली को ..रुक मैं नंबर देता हूँ, लाइन होल्ड कर निकालने में टाइम लगेगा " ........कम्मो ने स्पीकार पर अपना हाथ रख रखा था ...तभी बाथ - रूम का गेट खुला और निकुंज गीले निक्कर में बाहर आ गया ...उसकी मा बिना किसी पल्लू के केवल ब्लॅक ब्रा में सोफे पर बैठी दिखाई दी, थिटाक कर वो वापस बाथ - रूम के अंदर जाने लगा.

" सुन बेटा !!! तेरे किसी दोस्त का फोन है और वो तुझसे कुछ ज़रूरी बातें करना चाहता है " .......कम्मो ने कोई भी अजीब रिक्षन नही दिया बल्कि मुस्कुराती हुई सेम पोज़ीशन में बैठी रही ...मजबूरन निकुंज को ही उसके पास आना पड़ा ...उसकी मा ने अपना हाथ स्पीकर से हटाया और ऊपर उठाते हुए निकुंज के सामने कर दिया ...इसी के साथ कुछ पल के लिए दोनो आमने सामने आ गये.

" उफ्फ !!! क्या नज़ारा था " .......कम्मो अपना एक हाथ ऊपर उठाए हुए थी जिससे कुछ पल के लिए निकुंज को उसका नेकेड आर्म्पाइट काफ़ी क्लियर दिखाई दिया ...वहाँ बालो का अंबार था और ब्रा में क़ैद उसकी बड़ी - बड़ी चूचियाँ मानो ब्रा को फाड़ बाहर आने के लिए मचल रही थी.

उस दौरान कम्मो ने यह सॉफ महसूस किया ...जितना वो अपने अंदर साहस समेटे हुए थी, इस वक़्त उसका बेटा उतने ही डर में उसे अधनंगा देख रहा था ...अपनी भोयें उछालते हुए उसने निकुंज को होश में लाया और अपनी ग़लती पर शर्मिंदा होते हुए निकुंज बाथ - रूम की तरफ मूड गया.

" मैं जाउन्गि !!! " .......कम्मो ने उसका हाथ पकड़ कर उसे रोक लिया, उसने ध्यान रखा था कि फोन के दूसरी तरफ उसकी आवाज़ ना जा सके ...निकुंज वहीं रुक गया और उसकी मा सोफे से उठ कर बेड पर पहुच गयी.

" हां लिख !!! " .......नंबर मिलते ही फोन पर निकुंज को यह आवाज़ सुनाई थी और आवाज़ पहचानते ही वो बुरी तरह से घबरा गया ....... " कहीं मोम ने ? " .......एक अंजाने डर के साथ उसका हाथ अपने दिल पर पहुच गया, पर फोन पर आती लगातार आवाज़ें सुनकर उसे बोलना ही पड़ा.

" कहाँ खो जाता है चूतिए ..ले नंबर लिख " .........उसके दोस्त ने उसे डाँट लगाते हुए कहा.

" किसका नंबर ? " ........निकुंज को पता तो था नही आख़िर बात क्या है और उसके इस रिप्लाइ को सुन कर ...जहाँ उसका दोस्त उसे गालियाँ बकने लगा वहीं कम्मो के चेहरे पर स्माइल आ गयी ...वो बेड पर पड़ी अपनी पैंटी उठाने का नाटक कर रही थी और उसके झुकने मात्र से निकुंज को उसके चूतड़ो का सही आकार दिखाई देने लगा, फुल नेकेड बॅक के साथ, कुछ सोच कर उसने खुद पर कंट्रोल किया और पलट कर खड़ा हो गया ...वो अकेले में अपने दोस्त से बातें करना चाहता था पर कम्मो थी, जो लागातार देरी किए जा रही थी.
 


" फिर खो गया भेन्चोद !!! " .......एक और गाली सुनने के बाद निकुंज ने हार मान ली ....... " पहले बता तो सही नंबर किस का है " .......तैश में आ कर निकुंज ने जवाब दिया.

" गान्डू हो गया है तू !!! लंड की चोट कहीं दिमाग़ पर तो नही पहुच गयी ना ..साले अभी तो बताया, मेरी एक्स गर्ल फ्रेंड है, जो तेरी हेल्प करने के लिए राज़ी हो गयी है ..वो लंड भी चूसेगी और उसके बाद चुदवायेगि भी ..अब नंबर लिखेगा या कॉल कट कर दूं " ........यह बात सुनते ही निकुंज की गान्ड फट गयी ..... " यानी मोम को पता है " ......इस बार वो जान कर कम्मो की तरफ पलटा, उसकी मा अपनी पैंटी हाथ में पकड़े बाथ - रूम की तरफ बढ़ चुकी थी ..... नही चाहिए " ......एका - एक उसके मूँह से ना शब्द निकले और कम्मो जहाँ तक पहुचि थी झटके के साथ वहीं रुक गयी ...निकुंज ने कॉल कट कर दिया.

" बेटा !!! मेरी साड़ी और अंडरगार्मेंट्स खराब हो चुके हैं, अब मैं क्या पहन कर हॉस्पिटल जाउन्गि ? " ......कम्मो ने बिना किसी हिचकिचाट के यह बात कही और निकुंज के जवाब का इंतज़ार करने लगी ...हाथ में पकड़ी पैंटी छुपाने की कोई कोशिश ना करते हुए उसने मुस्कुराहट के साथ उससे पूछा, शायद यह वो खुशी थी जो उसके बेटे ने किसी अंजान रंडी का सहारा लेने से मना करने के बाद उसे पहुचाई थी.

" ह्म्म्म !!! आप पहले फ्रेश हो जाइए बाद में सोचेंगे " .......कोई जवाब ना सूझा तो निकुंज के मूँह से यही बात निकली ...... " ठीक है " ......और इतना कह कर कम्मो बाथ - रूम के अंदर चली गयी.

" ये क्या किया मैने ..मोम क्या सोच रही होंगी मेरे बारे में " .......किस्मत के हाथो हर बार चुतियापा झेलने से निकुंज थक चुका था ...गीले निक्कर में सोफे पर बैठने के बाद उसे कुछ भान नही रहा और रह - रह कर उसके दिमाग़ में उसकी मा का नया चरित्र घूमे लगा ...... " इतनी ओपन तो मोम कभी ना थी " .......एक प्रश्नवाचक एक्सप्रेशन चेहरे पर लाते हुए वो बीते 10 - 12 दिनो के हलातो पर गौर फरमाने लगा.

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बाथ - रूम में जल्द ही कम्मो नहा धो कर फ़ुर्सत हो गयी ...पिच्छले कयि सालो बाद उसने अपने बदन को इस तरह रगड़ - रगड़ कर धोया था, जैसे आज उसकी चुदाई निश्चित हो ...... " टवल !!! " ......उसने हर तरफ नज़र दौड़ाई पर टवल होती तो निकुंज नही पहन लेता.

" बेटा !!! अपना टवल पास कर दे ..मेरा बेग तो घर पर ही छूट गया था " ........हल्का सा गेट खोल कर उसने निकुंज को सपने की दुनिया से बाहर लाया ...वो तुरंत सोफे से उठा और बेग से अपना टवल निकाल कर गेट के नज़दीक पहुचा ...दरवाज़े से बाहर निकला कम्मो का हाथ शोल्डर तक नंगा था, निकुंज ने तेज़ी से उसके हाथ में टवल थमाया और पलट गया.

" बस एक आख़िरी ट्राइ करूँगी ..अगर हुआ तो ठीक वरना मुझे " ........कम्मो इससे ज़्यादा कुछ और ना सोच सकी, अपने बदन को पोंच्छ कर उसने निचले धड़ पर टवल लपेट लिया और ब्रा से चूचियों को कवर करने के बाद निकुंज को फिर से आवाज़ दी ...... " बेटा टवल तो बहुत छ्होटा है, अगर तुझे दिक्कत ना हो तो बाहर आ जाउ " .......उसके गाल टमाटर से लाल हुए जा रहे थे.
 


" ब ..ब ..बाहर !!! लेकिन मोम आप ने कुछ पहना तो है ना ? " .........निकुंज घबरा गया, उसे अपनी मा के इतने खुले पन की आशा बिल्कुल नही थी ...वहीं कम्मो ने उसकी आवाज़ में सॉफ कंपन महसूस किया और कहा ....... " हां पहेन रखा है ..आ जाउ बाहर " ......कम्मो के जवाब देते ही निकुंज अपने बेग की तरफ दौड़ा, शायद खुद का बदन ढँकने के पश्चात वो कमरे से बाहर जाना चाहता था.

" बोल ना !!! फिर मुझे तैयार भी तो होना है ? " ......इस सवाल को कहने के बाद कम्मो ने जवाब का कोई इंतज़ार नही किया और बाथ - रूम से बाहर आ गयी.

" तू इतना छोटा टवल क्यों यूज़ करता है ? " .......बेटे को अपनी तरफ देखने की गरज से मजबूर करते हुए कम्मो बोली ...पलट कर निकुंज ने देखा, उसे तो झटके पर झटके लग रहे थे ....... " वो मोम !!! मेल टवल इसी साइज़ के आते हैं " ......इसके फॉरन बाद उसने अपनी नज़रें मा के बदन से दूसरी तरफ मोड़ ली, पर आँखों में उतरा सीन नही भूल पाया.

कम्मो केवल ब्रा और टवल में उसके सामने खड़ी थी, ऐसा लग रहा था जैसे ब्रा के साथ उसने स्कर्ट पहेन रखी हो ...खुले गीले बालो से टपकता पानी हौले - हौले ब्रा को भिगोता जा रहा था.

" अब बोल क्या करना है ..मैं तो मार्केट जाने से रही " .......बार - बार कम्मो वही हरक़त दोहरा देती और ना चाहते हुए भी निकुंज को उसकी तरफ देखना पड़ता ...उसकी कमर पर लिपटी टवल मात्र घुटनो तक सीमित थी और ऊपरी बदन तो लगभग पूरा नंगा था.

" आप मुझे बता दो ..मैं ले आउन्गा " ......निकुंज शर्ट पहेन कर बोला और गीले निक्कर पर जीन्स चढ़ाते देख कम्मो ने उसे टोक दिया ....... " तो अंडरवेर साथ नही लाया क्या, जो इस पर जीन्स पहेन रहा है ? " .....बोलने के साथ ही वो ज़ोरो से हंस दी, उसका मैं मोटो माहौल को खुशनुमा बनाना और हैरत पन दूर करना था.

" हां लाया हूँ ..सॉरी " .....एका - एक निकुंज को भी इस बात का एहसास हो गया कि वो क्या ग़लती करने जा रहा था और उसके उदास चेहरे पर भी कुछ पॅलो के लिए मुस्कुराहट तैर गयी.

" जा बाथ रूम फ्री है और मेरा ब्लाउस साथ लेते जाना, दुकान दार सेम नाप का ब्लाउस दे देगा ..बाकी साड़ी अपनी पसंद की ले आना " ......कम्मो की बात सुन वो बाथ - रूम चला गया ..अंडरवेर पहेन कर जल्दी से जीन्स डाला और फिर बिना पिछे मुड़े, ब्लाउस हाथ में पकड़े तेज़ी से कमरे के बाहर निकल गया.

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इन मुंबई :-

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घर से निकल कर दीप सीधा मेन रोड पर आ गया ...ना तो उसके पास कार थी ना ही पहन'ने को फॉर्मल कपड़े, बस पागलो की तरह भटकता हुआ चला जा रहा था ...तभी उसे सरकारी ( नगर निगम उद्द्यान ) पार्क दिखाई पड़ा और खुद ब खुद उसके कदम पार्क के अंदर जाने के लिए बढ़ गये.

हलाकी अभी इतनी धूप नही निकली थी कि पार्क टोटल खाली होता ...कुछ इकके - दुक्के कपल और आस - पड़ोस की गलियों के लड़के उसे वहाँ उच्छल खूद करते हुए दिखाई पड़े, वो पार्क के सेंटर में लगी सेमेंट की पट्टी पर बैठ गया.

" साला !!! ये बैठ क्यों नही रहा ? " ........निक्कर में बने तंबू को कोसते हुए उसने उस पर हल्के हाथ की चपत लगा दी, यकीन से परे था ...अभी थोड़ी देर पहले उसकी सग़ी छोटी बेटी उसका लंड चूसने वाली थी.

" सब उल्टा - पुल्टा मेरे साथ ही क्यों होता है ? " ......उसने खुद से सवाल किया और तभी उसे कम्मो की कही बात याद आ गयी ...... " निम्मी आज कल बहुत गरम रहने लगी है " .......फॉरन दीप झुंझला गया ...... " अगर गरम रहती है तो क्या अपनी गर्मी बाप के हाथो ख़तम करवाएगी ..पूरी दुनिया पड़ी है, जिससे चाहे ..उससे चुदवा ले "

कुछ देर इसी उधेड़ बुन में लगे रहने के बाद उसके दिमाग़ की बत्ती जली ....... " तौबा !!! यह गुस्से में मैं क्या बोल गया ..वो मेरी बेटी है, ऐसे तो समाज में मेरी नाक कट जाएगी और उसकी लाइफ खराब होगी सो अलग ..नही - नही मैं ऐसा कभी नही होने दूँगा, सम्झाउन्गा उसे ..लेकिन कैसे ? " .......दीप का दिमाग़ घूमने लगा, उसकी आँखें अब भी वही सीन देख रही थी ...जब निम्मी ने उसके लंड को नेकेड देखा था, वो एक - दम से कितना डर गयी थी ...लेकिन बाद में उसी लंड को चूसने के लिए मचल उठी, वो तो भला हो निक्की का जिसकी आवाज़ सुनने के बाद निम्मी ने उसे बक्श दिया ...वरना आज अनर्थ हो जाता.

" मैं खुद भी तो पापी हूँ, ज़रा भी सहेन नही कर पाया ..अकेले निम्मी की ग़लती नही, मैं तो खुद चाह रहा था वो मेरा लंड चूसे " .....आख़िरकार सच बात दीप के होंठो पर आ ही गयी ...उसकी के इशारे पर तो निम्मी ने लंड के सुपाडे को चूमा था, यदि वो उस वक़्त खुद पर कंट्रोल कर लेता ...तो शायद अभी चूतियों जैसा पार्क मे नही बैठा होता.

" मैं अब कहाँ जाो, घर जा नही सकता ..जेब भी खाली पड़ी है, भिखारी बन गया हूँ आज तो " .......पार्क के बीचों - बीच सूर्यादेव का प्रकोप बढ़ा और दीप तुरंत पसीने से तर - बतर होने लगा.

" फोन होता तो निक्की का पता कर लेता, भरोसा नही निम्मी का ..कहीं उसी के सामने मेरा रेप ना कर दे " .........चिलचिलाती धूप दीप की सहेंशक्ति से बाहर हो गयी, थक हार कर वो बैंच से उठा और वापस घर की तरफ जाने लगा.

" अब जो होगा देखा जाएगा ..घर पहुचते ही चुपके से अपने कमरे में घुस जाउन्गा, निम्मी लाख दरवाज़ा पीटे ..गेट नही खोलूँगा " .......दीप के बढ़ते कदम बार - बार लड़खड़ा कर उसे घर ना जाने की चेतावनी दे रहे थे ...पर उसके लिए एक - एक पल की गर्मी बर्दास्त से बाहर होती जा रही थी, जैसे - तैसे वो घर के बाहरी कॉंपाउंड तक आया और सबसे पहले उसने निक्की की अक्तिवा चेक ही ...जो वहाँ मौजूद नही थी.

" उफफफफफ्फ़ !!! बच गया " ......इसके बाद उसके कदम घर की चौखट तक पहुचे, किसी चोर की भाँति उसने अंदर झाक कर निम्मी की वर्तमान स्थिति का जायज़ा लिया ...लेकिन महारानी हॉल में बिछे सोफे पर आँखें मूंद कर लेटी दिखाई दी.

वो दबे पाओ घर के अंदर आया और बिना कोई खटपट किए हौले - हौले सीढ़ियों तक पहुच गया ...लेकिन यहाँ उसकी किस्मत खराब रही, जो स्लीपर पहने सीढ़ियाँ चढ़ने लगा था ...ज़रा सी आहट से निम्मी उठ कर बैठ गयी.

" डॅड सुनो तो सही ..मुझे आप से ज़रूरी काम है " .......एक कामुक अंगड़ाई लेते हुए निम्मी ने कहा और सोफे से नीचे उतरने लगी ......" अभी कोई काम नही ..मुझे नींद आ रही है " ........बेटी के सोफे से फ्लोर पर पाओ रखते ही दीप ने दौड़ लगा दी, जैसे कोई पागल कुत्ता उसके पीछे छोड़ दिया गया हो और सीधा वो अपने कमरे में एंटर हो गया ...उतनी ही तेज़ी से उसने गाते भी अंदर से बोल्ट कर लिया.

" हहेहहे !!! कब तक बचोगे डॅड " .......एक चिर - परिचित कमीनी मुस्कान छोड़ते हुए निम्मी वापस सोफे पर ढेर हो गयी ...... " मैं भी थोड़ा सो लेती हूँ ..रात में डॅड की नींद जो हराम करनी है " .......थोड़ी देर तक अपनी कुँवारी चूत को सहलाने के बाद उसने भी आँखें मूंद ली और नींद के आगोश में जाने लगी.

इन पुणे :-

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निकुंज के कमरे से बाहर जाते ही कम्मो ने गेट को अंदर से बोल्ट कर लिया और कुछ गहरी साँसें लेने के बाद, सामने लगे बड़े से मिरर में अपना अक्स देखने लगी.

" हे भगवान !!! यह मैं कितना नीचे गिरती जा रही हूँ " .......ब्रा और टवल नुमा स्कर्ट में खुद का उघरा बदन देखते ही कम्मो की सिट्टी पिटी गुम हो गयी और वो तेज़ कदमो से शीशे के सामने आ कर खड़ी हो गयी.

" औरत चाहे 100 साल की उमर पार क्यों ना कर ले पर शीशा उसे कभी बूढ़ा नही होने देता " ........यही इस वक़्त कम्मो के साथ भी हुआ, दो चार पल अपने बदन को निहारने के बाद उसे कुछ कमी सी दिखाई पड़ी ...एक लंबी साँस खिचते हुए उसने अपना पेट अंदर को सिकोडा और खुद ब खुद उसका सीना बाहर की तरफ निकल आया, फॉरन उसके होंठ फैल गये ...वो मुस्कुरा उठी.

गीले बालों का जूड़ा बनाने के बाद उसने ड्रेसिंग टेबल का पहला ड्रॉयर खोला और जिस चीज़ के मिलने की उसे आशा थी ...वो उसके हाथो के क़ब्ज़े में आ गयी.

होटेल काफ़ी महँगा था और अक्सर वहाँ रुकने वाले गेस्ट भी वीआइपी ही आते थे, शायद किसी ने रूम छोड़ने से पहले ध्यान ना दे पाया हो और जो मेक - अप कीट कम्मो के हाथ लगी ...वो ज़रूर किसी गेस्ट की भूल का नतीजा जान पड़ी.

" इसमें तो सब कुछ है " ........वो खुशी से झूमते हुए बोली और इसके तुरंत बाद उसने अपना चेहरा सजाना शुरू कर दिया.

कम्मो ने जी जान लगा दी, जैसे आज के बाद उसे अपने प्रेमी को रिझाने का मौका दोबारा नही मिलने वाला ...पर वह प्रेमी है कौन, कहीं स्वयं उसका लाड़ला निकुंज तो नही ...वो इस बात से भी अंजान नही थी, बस उसे तो सनक चढ़ि थी अपने बेटे को उत्तेजित करने की ...वो चाहती थी आज उसे कुछ भी करना पड़ जाए लेकिन बेटे का लिंग तनाव में आना चाहिए.

" बस एक बार मैं अपनी आँखों से उसका वीर्य - पात देख लूँ ...फिर अपने कदम वापस पीछे खीच लूँगी, जानती हूँ यह सरासर ग़लत है ...एक मा हो कर मेरे मन में अपने सगे बेटे के लिए इस तरह की पापी भावना नही आनी चाहिए, पर मैं उसका उदास चेहरा और उदास नही देख सकती ...मेरे बेटे को ज़रूर न्याय मिलेगा और मेरी बहू तनवी को भी, फिर चाहे जीवन पर्यंत मुझे अपनी नज़रो से नीचे गिरना क्यों ना पड़े ...मुझे मज़ूर है " ...कम्मो ने प्रन करते हुए कहा, उसका दृढ़ - संकल्प देखने लायक था ...फिर अपने बालो को संवार कर वो सोफे पर बैठ गयी और निकुंज के लौट आने का इंतज़ार शुरू हो गया.

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कमरे से बाहर निकल कर निकुंज लिफ्ट तक पहुचा जो टॉप फ्लोर से नीचे लौट रही थी, बटन प्रेस करने के 10 सेकेंड्स बाद उसका डोर ओपन हुआ और वह उसके अंदर एंटर कर गया.

कुछ ही पल बीत पाए होंगे, उसे अपने पीछे से ख़ुसर - फुसर की आवाज़ें सुनाई देने लगी, ऐसा लगा जैसे कोई हंस रहा हो ...उसने पलट कर देखा तो अपने पीछे एक यंग कपल खड़ा पाया, थोड़ा नाराज़गी भरा फेस एक्सप्रेशन देते हुए वो अपनी पहली पोज़िशन में मुड़ा ही था कि उसकी नज़र उन दोनो के चेहरे पर पड़ी और उनकी आँखों का पीछा करते हुए वह अपने हाथ तक पहुच गया ...तुरंत उसे मालूम पड़ गया, वह हसी का पात्र क्यों बना.
 
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