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कम्मो तू यकीन नही करेगी, विक्की का ऐसा वहशी रूप मैने 1स्ट टाइम देखा ..अब तक जो भी होता आया था, मेरी मर्ज़ी से ..मैं रोज़ उसके कमरे मे उसे ब्लोवजोब देती, और वो चुपचाप अपनी आँखें बंद किए लेटा रहता था ..काई - काई बार मन के हाथो विवश हो कर मैं घंटे भर तक उसके लंड से खेलती रहती, बिना परवाह किए कि मेरा बेटा उस दौरान कितनी बार झाड़ा और कितनी बार उसकी मा ने उसके वीर्य से अपना गला तर किया ..जब अत्यधिक दर्द से वो बहाल जो जाता, मैं उसे छोड़ देती ..पर एक बार भी उसने मुझसे कोई ज़्यादती नही की ..उस दिन तेरे सामने जो मैं रोई थी, ये उसका ही परिणाम था ..मैं अपनी चूत मे उठती अगन को ज़रा भी शांत नही कर पा रही थी, लग रहा था शूसाइड कर लूँ और सब यहीं ख़तम हो जाए
तूने मुझे साहस तो दिया पर मेरी जगह अगर तू खुद इस जंग से लड़ रही होती ..मजबूरन तुझे भी वही करना पड़ता जो मैने किया
कम्मो विक्की लगातार मेरे मूँह को चोद्ता रहा, मैने भी हार नही मानी और अपना दर्द चूत को सहलाने मे बात लिए ..यहाँ उसकी कमर का एक झटका लगता और वहाँ मेरी उंगलियाँ चूत के और भी ज़्यादा अंदर हो जाती
कुछ देर बाद विक्की झुंझलाने लगा और मैं समझ गयी, मेरा काम अब आसान है ..मैने इशारों से उसे बेड पर चलने को कहा ..फॉरन उसने अपना लंड मेरे मूँह से बाहर निकाला और मेरा हाथ पकड़ कर मुझे बेड की तरफ ले गया ..अपनी पीठ के बल लेट कर विक्की ने मेरे उसी हाथ को वापस अपने लंड पर रख दिया और एक ऐसी नज़र से मुझे देखा .. ' जिसमे सिर्फ़ और सिर्फ़ वासना भरी थी, तड़प भरी थी ' ..वो कह तो नही पाया पर उसका आशय मुझे पता था ..यक़ीनन वो चाहता था जल्द ही उसे, उसके लंड के तनाव से मुक्ति मिल जाए ..मैने मुस्कुरा कर अपना ढेर सारा थूक लंड पर छोड़ दिया और जीभ से फैला कर उसे चिकनाई से भरने लगी
बस कम्मो यही वो पल था जब मेरे अंदर की मा मर गयी और उसके तुरंत बाद ही मैं अपनी मर्ज़ी से उसके खड़े लंड पर बैठती चली गयी ..शुरूवात मे कयि मुश्क़िलें आई, हज़ार सवालो से विक्की का चेहरा घंभीर होता गया ..लेकिन मैने काम ज़ारी रखते हुए, अपनी कमर उसके लंड पर ज़ोरो से पटाकने लगी ..सही मायने मे दर्द तो उस वक़्त मुझे महसूस हो रहा था, इन 10 महीनो मे मेरी चूत सिकुड कर काफ़ी टाइट जो हो गयी थी
थोड़ी देर बाद विक्की की कमर भी मेरी ताल से ताल मिलाने लगी और बीती रात पूरे 6 दफ़ा हमने अपने रिश्ते को दागदार किया ..या शायद हमेशा करते रहेंगे, अब ये पाप हमे कहाँ तक ले जाएगा पता नही ..पर मुझे सब मज़ूर है "
इतना कह कर नीमा शांत हो गयी, इन आख़िरी दो पंक्तियों मे उसने असल जीवन के सारे राज़ खोल दिए ..माना उसने 10 महीने बाद अपनी चूत मे आराम पाया था, लेकिन वो जानती थी ये आराम जल्द हराम मे बदल जाना है ..जब मा के साथ बेटे ने संसर्ग स्थापित कर लिया, तो यक़ीनन अपनी बहेन के लिए भी उसके विचार मैले हुए बिना नही रह पाएँगे
वहीं होटेल के कमरे मे तो जैसे भूचाल मच गया ..ब्लाउस के ऊपर कम्मो की गीली महरूण पैंटी पड़ी थी और साड़ी अपने पेट पर लेपेटे उसकी उंगलियाँ, अपनी सूजी चूत को और सुजाने मे व्यस्त थी ..वो ज़रा भी होश मे नही थी, एक हाथ से सेल अपने कान पर लगाए और दूसरे की 3 उंगलियों से योनि का मर्दन करते हुए उसे यह भी ध्यान नही रहा, कॉल पर नीमा उसकी आहों को बखूबी सुन रही होगी
" कहाँ खो गयी कम्मो, और तेरी आवाज़ को क्या हुआ ? "
आख़िरकार नीमा ने पूछ लिया, कम्मो की बंद आँखें एक झटके मे खुल गयी ..खुद की हालात देख उसे अचरज तो हुआ पर उसकी उंगलियाँ ज्यों की त्यों चूत के अंदर - बाहर होती रही ..मदहोशी का आलम उस पर ऐसा छाया की अचानक से उसने कॉल पर ऐसी बात कह दी जिसे सुन कर नीमा के भी होश उड़ गये
" अहह !!!! नीमा तूने मेरी चूत मे आग लगा कर रख दी ..खुद तो अपने बेटे से चुद कर शांत हो गयी, अब मैं क्या करूँ ? "
बात कहने के बाद भी कम्मो नही जान पाई उसके मूँह से क्या निकल गया ..वहीं कॉल की दूसरी तरफ नीमा मुस्कुरा दी, वजह कल तक वो खुद इस आग को मिटाने मे असमर्थ थी
" कम्मो बुरा मत मान ना ..पर क्या दीप जी तेरी प्यास नही बुझा पाते ? "
नीमा ने सवाल किया ..हलाकी उसके सवाल का आशय दीप के ऊपर सीधा - सीधा इल्ज़ाम लगाना था, नामार्दी का ..पर फिर भी कम्मो की आहों ने उसका धैर्य तोड़ दिया ..आख़िर लंड की प्यास क्या होती है ये नीमा से बेहतर कौन जान सकता था
" ऐसी बात नही है नीमा, वो तो चाहते हैं रोज़ मुझे चोदे ..पर मैं ही कमज़ोर पड़ जाती हूँ ..आज पहली बार मुझे एहसास हो रहा है कि मैं भी एक औरत हूँ ..चाहती हूँ वो जी भर के मुझे चोदे "
कामो का ये रूप बड़ा भयानक बन गया ..बिखरे बाल, आँखों मे सुर्खियाँ, ब्रा से बाहर निकली दोनो चूचियाँ, पेट पर लिपटी सारी, भारी साँसें ..यक़ीनन वो तड़प रही थी ..अगर इस वक़्त निकुंज कमरे मे आ जाता, तो भी उसे कोई ख़ास फरक नही पड़ना था, वो पूरी तरह अपने होश से बाहर निकल चुकी थी
" कम्मो औरत चाहे लाख अपनी चूत को खुजा ले पर असल खुजली लंड ही मिटा पाता है ..फिर चाहे उस लंड के अनेकों नाम हों ..अच्छा तूने किसी सवाल के मक़सद से कॉल किया था ..बातों मे इतनी उलझ गयी, ध्यान ही नही रहा "
नीमा को उसकी तड़प मे अपनी तड़प का एहसास हुआ, दोनो मे दोस्ती बहुत गहरी थी ..खेर इस मामले मे वो उसकी ज़्यादा कोई मदद तो नही कर पाती ..लेकिन आश्वासन ज़रूर दिया
" कुछ नही नीमा मेरे सारे सवालो के जवाब मिल गये ..मगर ये निगोडी झड़ने का नाम ही नही ले रही ..देख ना पिच्छले 15 मिनट से उंगली कर रही हूँ ..पानी तो बह रहा है, पर जलन नही जा रही "
कम्मो ने बेशर्मी से जवाब दिया, ऐसी तो वो कभी नही थी ..लेकिन इन दो दिनो मे उसके मश्तिश्क मे सिवाए उथल - पुतल के कुछ नही हुआ था
" चल रखती हूँ ..दीप जी का इंतज़ार कर ले, फिर जी भर के शांत कर लेना अपनी निगोडी को ..विक्की भी लौट आया है ..एक आख़िरी राउंड के बाद हम भी सोएंगे ..अपना ख़याल रखना, और निगोडी चूत का भी "
इतना कह कर हँसते हुए नीमा ने कॉल कट कर दिया, पर बेचारी कम्मो की हालत मे सुधार की गुंजाइश ना के बराबर थी ..अगले 15 मिनट तक उसने बिना रुके पूरी तेज़ी से अपनी चूत को रोंदा ..पर चूत का झड़ना नही हो पाया ..मन मसोस कर उसने अपनी साड़ी को घुटनो से नीचे कर दिया और आँखें बंद कर के लेट गयी ..उसका दिमाग़ तो अशांत था ही, शरीर की सारी ताक़त भी अब पस्त हो चुकी थी
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रिसेप्षन पर पहुच कर निकुंज ने आस पास के किसी पार्क की इन्फर्मेशन ली और सफ़ारी से वहाँ के लिए निकल पड़ा
अभी वो आधे रास्ते पहुचा ही था कि उसके सेल की मसेज टोन बीप हुई, देखा तो मसेज निक्की का था ..फॉरन उसने मसेज ओपन किया, लेकिन मसेज ब्लॅंक निकला
दो पल मे उसके चेहरे पर आई सारी मुस्कान मानो झाड़ सी गयी, कितना सुकून मिला था सिर्फ़ ये देख कर की उसके सेल पर आया मसेज उसकी प्यारी बहेन निक्की का है, पर मसेज के ब्लॅंक होने की वजह उससे छुपि नही थी ..वो जानता था घर पर उसकी बहेन सिर्फ़ अपनी भाई के बारे मे ही सोच रही होगी और बिना कुछ लिखे ही, ब्लॅंक मसेज के ज़रिए उसने अपने सूनेपन को निकुंज पर ज़ाहिर कर दिया
" मैने कल रात से एक पल को भी उसे याद नही किया ..और वो मुझे हर पल याद करती होगी "
खुद को दोषी करार देने के बाद उसने निक्की का नंबर सेल स्क्रीन पर ला दिया ..पर उसके अंगूठे मे ज़रा भी दम नही आ पाया ..बस ये सोच कर, बात होने के बाद दोनो की तड़प कम होने के बजाए बढ़ेगी ही, वो कॉल बटन प्रेस नही का पा रहा था
कुछ देर बाद निकले सल्यूशन मे उसने भी एक ब्लॅंक मसेज निक्की के सेल पर सेंड कर दिया और ड्राइव करते हुए जल्द ही पार्क पहुच गया
तूने मुझे साहस तो दिया पर मेरी जगह अगर तू खुद इस जंग से लड़ रही होती ..मजबूरन तुझे भी वही करना पड़ता जो मैने किया
कम्मो विक्की लगातार मेरे मूँह को चोद्ता रहा, मैने भी हार नही मानी और अपना दर्द चूत को सहलाने मे बात लिए ..यहाँ उसकी कमर का एक झटका लगता और वहाँ मेरी उंगलियाँ चूत के और भी ज़्यादा अंदर हो जाती
कुछ देर बाद विक्की झुंझलाने लगा और मैं समझ गयी, मेरा काम अब आसान है ..मैने इशारों से उसे बेड पर चलने को कहा ..फॉरन उसने अपना लंड मेरे मूँह से बाहर निकाला और मेरा हाथ पकड़ कर मुझे बेड की तरफ ले गया ..अपनी पीठ के बल लेट कर विक्की ने मेरे उसी हाथ को वापस अपने लंड पर रख दिया और एक ऐसी नज़र से मुझे देखा .. ' जिसमे सिर्फ़ और सिर्फ़ वासना भरी थी, तड़प भरी थी ' ..वो कह तो नही पाया पर उसका आशय मुझे पता था ..यक़ीनन वो चाहता था जल्द ही उसे, उसके लंड के तनाव से मुक्ति मिल जाए ..मैने मुस्कुरा कर अपना ढेर सारा थूक लंड पर छोड़ दिया और जीभ से फैला कर उसे चिकनाई से भरने लगी
बस कम्मो यही वो पल था जब मेरे अंदर की मा मर गयी और उसके तुरंत बाद ही मैं अपनी मर्ज़ी से उसके खड़े लंड पर बैठती चली गयी ..शुरूवात मे कयि मुश्क़िलें आई, हज़ार सवालो से विक्की का चेहरा घंभीर होता गया ..लेकिन मैने काम ज़ारी रखते हुए, अपनी कमर उसके लंड पर ज़ोरो से पटाकने लगी ..सही मायने मे दर्द तो उस वक़्त मुझे महसूस हो रहा था, इन 10 महीनो मे मेरी चूत सिकुड कर काफ़ी टाइट जो हो गयी थी
थोड़ी देर बाद विक्की की कमर भी मेरी ताल से ताल मिलाने लगी और बीती रात पूरे 6 दफ़ा हमने अपने रिश्ते को दागदार किया ..या शायद हमेशा करते रहेंगे, अब ये पाप हमे कहाँ तक ले जाएगा पता नही ..पर मुझे सब मज़ूर है "
इतना कह कर नीमा शांत हो गयी, इन आख़िरी दो पंक्तियों मे उसने असल जीवन के सारे राज़ खोल दिए ..माना उसने 10 महीने बाद अपनी चूत मे आराम पाया था, लेकिन वो जानती थी ये आराम जल्द हराम मे बदल जाना है ..जब मा के साथ बेटे ने संसर्ग स्थापित कर लिया, तो यक़ीनन अपनी बहेन के लिए भी उसके विचार मैले हुए बिना नही रह पाएँगे
वहीं होटेल के कमरे मे तो जैसे भूचाल मच गया ..ब्लाउस के ऊपर कम्मो की गीली महरूण पैंटी पड़ी थी और साड़ी अपने पेट पर लेपेटे उसकी उंगलियाँ, अपनी सूजी चूत को और सुजाने मे व्यस्त थी ..वो ज़रा भी होश मे नही थी, एक हाथ से सेल अपने कान पर लगाए और दूसरे की 3 उंगलियों से योनि का मर्दन करते हुए उसे यह भी ध्यान नही रहा, कॉल पर नीमा उसकी आहों को बखूबी सुन रही होगी
" कहाँ खो गयी कम्मो, और तेरी आवाज़ को क्या हुआ ? "
आख़िरकार नीमा ने पूछ लिया, कम्मो की बंद आँखें एक झटके मे खुल गयी ..खुद की हालात देख उसे अचरज तो हुआ पर उसकी उंगलियाँ ज्यों की त्यों चूत के अंदर - बाहर होती रही ..मदहोशी का आलम उस पर ऐसा छाया की अचानक से उसने कॉल पर ऐसी बात कह दी जिसे सुन कर नीमा के भी होश उड़ गये
" अहह !!!! नीमा तूने मेरी चूत मे आग लगा कर रख दी ..खुद तो अपने बेटे से चुद कर शांत हो गयी, अब मैं क्या करूँ ? "
बात कहने के बाद भी कम्मो नही जान पाई उसके मूँह से क्या निकल गया ..वहीं कॉल की दूसरी तरफ नीमा मुस्कुरा दी, वजह कल तक वो खुद इस आग को मिटाने मे असमर्थ थी
" कम्मो बुरा मत मान ना ..पर क्या दीप जी तेरी प्यास नही बुझा पाते ? "
नीमा ने सवाल किया ..हलाकी उसके सवाल का आशय दीप के ऊपर सीधा - सीधा इल्ज़ाम लगाना था, नामार्दी का ..पर फिर भी कम्मो की आहों ने उसका धैर्य तोड़ दिया ..आख़िर लंड की प्यास क्या होती है ये नीमा से बेहतर कौन जान सकता था
" ऐसी बात नही है नीमा, वो तो चाहते हैं रोज़ मुझे चोदे ..पर मैं ही कमज़ोर पड़ जाती हूँ ..आज पहली बार मुझे एहसास हो रहा है कि मैं भी एक औरत हूँ ..चाहती हूँ वो जी भर के मुझे चोदे "
कामो का ये रूप बड़ा भयानक बन गया ..बिखरे बाल, आँखों मे सुर्खियाँ, ब्रा से बाहर निकली दोनो चूचियाँ, पेट पर लिपटी सारी, भारी साँसें ..यक़ीनन वो तड़प रही थी ..अगर इस वक़्त निकुंज कमरे मे आ जाता, तो भी उसे कोई ख़ास फरक नही पड़ना था, वो पूरी तरह अपने होश से बाहर निकल चुकी थी
" कम्मो औरत चाहे लाख अपनी चूत को खुजा ले पर असल खुजली लंड ही मिटा पाता है ..फिर चाहे उस लंड के अनेकों नाम हों ..अच्छा तूने किसी सवाल के मक़सद से कॉल किया था ..बातों मे इतनी उलझ गयी, ध्यान ही नही रहा "
नीमा को उसकी तड़प मे अपनी तड़प का एहसास हुआ, दोनो मे दोस्ती बहुत गहरी थी ..खेर इस मामले मे वो उसकी ज़्यादा कोई मदद तो नही कर पाती ..लेकिन आश्वासन ज़रूर दिया
" कुछ नही नीमा मेरे सारे सवालो के जवाब मिल गये ..मगर ये निगोडी झड़ने का नाम ही नही ले रही ..देख ना पिच्छले 15 मिनट से उंगली कर रही हूँ ..पानी तो बह रहा है, पर जलन नही जा रही "
कम्मो ने बेशर्मी से जवाब दिया, ऐसी तो वो कभी नही थी ..लेकिन इन दो दिनो मे उसके मश्तिश्क मे सिवाए उथल - पुतल के कुछ नही हुआ था
" चल रखती हूँ ..दीप जी का इंतज़ार कर ले, फिर जी भर के शांत कर लेना अपनी निगोडी को ..विक्की भी लौट आया है ..एक आख़िरी राउंड के बाद हम भी सोएंगे ..अपना ख़याल रखना, और निगोडी चूत का भी "
इतना कह कर हँसते हुए नीमा ने कॉल कट कर दिया, पर बेचारी कम्मो की हालत मे सुधार की गुंजाइश ना के बराबर थी ..अगले 15 मिनट तक उसने बिना रुके पूरी तेज़ी से अपनी चूत को रोंदा ..पर चूत का झड़ना नही हो पाया ..मन मसोस कर उसने अपनी साड़ी को घुटनो से नीचे कर दिया और आँखें बंद कर के लेट गयी ..उसका दिमाग़ तो अशांत था ही, शरीर की सारी ताक़त भी अब पस्त हो चुकी थी
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रिसेप्षन पर पहुच कर निकुंज ने आस पास के किसी पार्क की इन्फर्मेशन ली और सफ़ारी से वहाँ के लिए निकल पड़ा
अभी वो आधे रास्ते पहुचा ही था कि उसके सेल की मसेज टोन बीप हुई, देखा तो मसेज निक्की का था ..फॉरन उसने मसेज ओपन किया, लेकिन मसेज ब्लॅंक निकला
दो पल मे उसके चेहरे पर आई सारी मुस्कान मानो झाड़ सी गयी, कितना सुकून मिला था सिर्फ़ ये देख कर की उसके सेल पर आया मसेज उसकी प्यारी बहेन निक्की का है, पर मसेज के ब्लॅंक होने की वजह उससे छुपि नही थी ..वो जानता था घर पर उसकी बहेन सिर्फ़ अपनी भाई के बारे मे ही सोच रही होगी और बिना कुछ लिखे ही, ब्लॅंक मसेज के ज़रिए उसने अपने सूनेपन को निकुंज पर ज़ाहिर कर दिया
" मैने कल रात से एक पल को भी उसे याद नही किया ..और वो मुझे हर पल याद करती होगी "
खुद को दोषी करार देने के बाद उसने निक्की का नंबर सेल स्क्रीन पर ला दिया ..पर उसके अंगूठे मे ज़रा भी दम नही आ पाया ..बस ये सोच कर, बात होने के बाद दोनो की तड़प कम होने के बजाए बढ़ेगी ही, वो कॉल बटन प्रेस नही का पा रहा था
कुछ देर बाद निकले सल्यूशन मे उसने भी एक ब्लॅंक मसेज निक्की के सेल पर सेंड कर दिया और ड्राइव करते हुए जल्द ही पार्क पहुच गया