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निकुंज ने उसके नीचे वाले होंठ को भी चूसना शुरू कर दिया .... उसकी बहेन की चूचियाँ फूल कर उसके हाथों में नही समा पा रही थी .... फॉरन वह जान गया, निक्की पूर्णरूप से उसके बस में आ चुकी है और अब उसे अपने लंड के बारे में सोचना चाहिए.
" निक्की !!! " ..... निकुंज ने उसके बूब्स मसलना छोड़ दिए और अपनी उंगली से उसके गीले होंठ छुते हुए बोला ...... " एक बात कहूँ .. बुरा तो नही मानेगी ? " ...... उसकी वाय्स में रिक्वेसटिंग भाव थे.
सब कुछ सामान्य होते ही निक्की ने अपनी आँखें खोल दी और अपने भाई के चेहरे को देखने लगी ...... " बोलो भाई !!! आप की किसी भी बात का मुझे बुरा नही लगेगा " ....... आख़िर निकुंज ने आज उसे इतना मज़ा दिलवाया था, जिसकी कभी उसने कल्पना भी नही की थी .... फिर वह हां कैसे ना करती और अब वाह अपनी चोर नज़रों का दोबारा इस्तेमाल करने लगी थी निकुंज का लंड देखने के लिए.
निकुंज अपनी उंगलियों से उसके होंठों को दबाते हुए सोचने लगा .... उसकी हिम्मत नही हो रही थी, कैसे वह निक्की के सामने अपनी इच्छा ज़ाहिर करे .... बात ही कुछ ऐसी थी जिसे सोच सोच कर उसके पसीने छूट रहे थे.
वह अपनी बहेन से ब्लोवजोब चाहता था .... वह चाहता था, उसकी मोम की तरह उसकी बेहन भी अपने गरम होंठों से उसके मर्दाने अंग को प्यार करे .... उसका लंड बहुत ज़्यादा सख़्त हो चुका था और जिसे अब वह निक्की के मूँह से चुस्वा कर शांत करवाना चाहता था .... लेकिन निकुंज के लिए यह सोचना जितना आसान काम था, कहना उतना ही मुश्किल.
" क्या हुआ भाई ? " ...... निक्की ने अपने भाई को खामोश देखकर पूछा ..... " आप बोलो तो सही !!! मैं आप की किसी भी बात का बुरा नही मानूँगी " ....... उसने अपनी बात दोहराई.
निक्की का पॉज़िटिव रिक्षन देखने के बाद निकुंज ने साहस कर के .... अपने धड़कते दिल के साथ अपना मूँह खोला ....... " म .. मुझे ब्लोवजोब देगी ? "
इसके बाद तो जैसे कार में सन्नाटा छा गया .... निक्की कोई दूध पीती बच्ची तो थी नही जिसे ब्लोवजोब का मतलब पता नही होता लेकिन उसने खुद पर काबू किया ...... " ब्लोवजोब क्या होता है भाई ? " ...... वह बड़ी मासूमियत से बोली जबकि उसकी चढ़ती सासे .... उसके झूठ को सॉफ बयान कर रही थी.
वहीं अब निकुंज की हालत और ज़्यादा खराब होने लगी कि कैसे वह अपनी बहेन को ब्लोवजोब का मीनिंग समझाए .... वह बेचैनी से खिड़की के बाहर देखने लगा और फिर धीरे से फुसफुसाया ...... " मेरा लंड चूसेगी ? " ...... इतना कहने के बाद वह चुप हो गया और उसकी आँखें शरमिंदा होकर खुद ब खुद बंद हो गयी .... शायद उसकी हिम्मत जवाब दे चुकी थी.
अपने भाई के मूँह से ऐसी अश्लील बात सुनकर निक्की का शरम से बुरा हाल था .... उसने अपने भाई के चेहरे को देखा, वह अपनी आँखें मून्दे पड़ा था .... फिर निक्की की लस्टी आँखें निकुंज के विशाल लंड पर पहुच गयी और इस बार उसे अपने भाई का लंड पहले से कहीं ज़्यादा भायानकर दिखाई दिया .... लंड की नसो को देख कर लग रहा था जैसे वह अभी फटने वाला हो और मोटा मिज़ाइल जैसा गुलाबी टॉप लगातार गाढ़ा लिक्विड बाहर उगल रहा था .... सच तो यह था, निक्की की चूत भी इतना पानी छोड़ रही थी कि बॉटल भर जाए.
" क्या यह सच में रियल है .. क्या मैं इसे चूस पाउन्गि ? " ....... उसने लंड की विशाल लंबाई और भयानक मोटाई देखते हुए अपने मन में सोचा .... निकुंज की बातों को याद करके निक्की के शरीर में वासना, मस्ती बनकर दौड़ रही थी .... उसके होंठ स्वतः ही खुलने की कोशिश करने लगे और जल्द ही वह अपने भाई की कमर पर झुकती चली गयी.
निकुंज की आँखें तो बंद थी लेकिन ज्यों ही उसने निक्की की गरम साँसें अपने लंड के सुपाडे पर महसूस की वह खुद एग्ज़ाइट्मेंट और उत्तेजना में गहरी साँसें लेने लगा .... निक्की अपने भाई के लंड से उठती मादक मर्दाना सुगंध सूंघ सूंघ कर पागल हुई जा रही थी ........ " इतनी भी बुरा नही है " ........ यह सोचते हुए वह अपने कंट्रोल से, आपे से बाहर हो गयी और अती कामुकतावश उसके सुपाडे पर एक छोटा सा किस कर दिया.
" अहह " ....... झट से निकुंज की बंद आँखें खुल गयी .... उसने देखा निक्की उसके विकराल लंड को बेहद नशीली आँखों से घुरती हुई, अपने सॉफ्ट और जुवैसी लिप्स पर अपनी जीभ घुमा रही है और यह सीन देखकर निकुंज की नसे फडक उठी.
" प्लज़्ज़्ज़ ... निक्की इसे अपने मूँह के अंदर लेकर चूस .. इसे अपने होंठो से प्यार कर .. मैं बहुत बेचैन हूँ " ......... निकुंज एक कराह ले कर बोला.
अपने सगे भाई के मूँह से उसके लंड को चूसने और होंठो से प्यार करने की बात सुनकर निक्की की आँखें भारी होने लगी .... एक नशा, एक सनक उस पर सवार हो गयी .... अपने आप उसके लिप्स खुले या पूरी शक्ति के साथ फट पड़े और अगले ही पल निकुंज का गीला छोटे सेब जैसा सुपाड़ा, निक्की के गरम व मुलायम होंठो के घेरे में क़ैद हो गया.
"ऊओह.....!!! निक्की चूस बेटा " ........ निकुंज के मूँह से लंबी आह निकली और वह अपना एक हाथ अपनी बहेन के सर पर रखकर, उसके सिल्की बाल सहलाने लगा ..... साथ ही साथ अपने दूसरे हाथ से उसकी राइट चूची पकड़ ली और ज़ोरों से मसल्ने लगा.
निकुंज का मर्दाना अंग अपने मूँह के अंदर लेते ही निक्की की आँखें मस्ती से बंद हो गयी .... उसे एक अजीब सा नशा होने लगा .... जाने क्या बात थी लेकिन उसे एक अलग ही आनंद का अनुभव हुआ और जो अब तक उसने कभी महसूस नही किया था .... वह पूरी तरह से अपने भाई के आगे समर्पित होती चली गयी.
" निक्की !!! " ..... निकुंज ने उसके बूब्स मसलना छोड़ दिए और अपनी उंगली से उसके गीले होंठ छुते हुए बोला ...... " एक बात कहूँ .. बुरा तो नही मानेगी ? " ...... उसकी वाय्स में रिक्वेसटिंग भाव थे.
सब कुछ सामान्य होते ही निक्की ने अपनी आँखें खोल दी और अपने भाई के चेहरे को देखने लगी ...... " बोलो भाई !!! आप की किसी भी बात का मुझे बुरा नही लगेगा " ....... आख़िर निकुंज ने आज उसे इतना मज़ा दिलवाया था, जिसकी कभी उसने कल्पना भी नही की थी .... फिर वह हां कैसे ना करती और अब वाह अपनी चोर नज़रों का दोबारा इस्तेमाल करने लगी थी निकुंज का लंड देखने के लिए.
निकुंज अपनी उंगलियों से उसके होंठों को दबाते हुए सोचने लगा .... उसकी हिम्मत नही हो रही थी, कैसे वह निक्की के सामने अपनी इच्छा ज़ाहिर करे .... बात ही कुछ ऐसी थी जिसे सोच सोच कर उसके पसीने छूट रहे थे.
वह अपनी बहेन से ब्लोवजोब चाहता था .... वह चाहता था, उसकी मोम की तरह उसकी बेहन भी अपने गरम होंठों से उसके मर्दाने अंग को प्यार करे .... उसका लंड बहुत ज़्यादा सख़्त हो चुका था और जिसे अब वह निक्की के मूँह से चुस्वा कर शांत करवाना चाहता था .... लेकिन निकुंज के लिए यह सोचना जितना आसान काम था, कहना उतना ही मुश्किल.
" क्या हुआ भाई ? " ...... निक्की ने अपने भाई को खामोश देखकर पूछा ..... " आप बोलो तो सही !!! मैं आप की किसी भी बात का बुरा नही मानूँगी " ....... उसने अपनी बात दोहराई.
निक्की का पॉज़िटिव रिक्षन देखने के बाद निकुंज ने साहस कर के .... अपने धड़कते दिल के साथ अपना मूँह खोला ....... " म .. मुझे ब्लोवजोब देगी ? "
इसके बाद तो जैसे कार में सन्नाटा छा गया .... निक्की कोई दूध पीती बच्ची तो थी नही जिसे ब्लोवजोब का मतलब पता नही होता लेकिन उसने खुद पर काबू किया ...... " ब्लोवजोब क्या होता है भाई ? " ...... वह बड़ी मासूमियत से बोली जबकि उसकी चढ़ती सासे .... उसके झूठ को सॉफ बयान कर रही थी.
वहीं अब निकुंज की हालत और ज़्यादा खराब होने लगी कि कैसे वह अपनी बहेन को ब्लोवजोब का मीनिंग समझाए .... वह बेचैनी से खिड़की के बाहर देखने लगा और फिर धीरे से फुसफुसाया ...... " मेरा लंड चूसेगी ? " ...... इतना कहने के बाद वह चुप हो गया और उसकी आँखें शरमिंदा होकर खुद ब खुद बंद हो गयी .... शायद उसकी हिम्मत जवाब दे चुकी थी.
अपने भाई के मूँह से ऐसी अश्लील बात सुनकर निक्की का शरम से बुरा हाल था .... उसने अपने भाई के चेहरे को देखा, वह अपनी आँखें मून्दे पड़ा था .... फिर निक्की की लस्टी आँखें निकुंज के विशाल लंड पर पहुच गयी और इस बार उसे अपने भाई का लंड पहले से कहीं ज़्यादा भायानकर दिखाई दिया .... लंड की नसो को देख कर लग रहा था जैसे वह अभी फटने वाला हो और मोटा मिज़ाइल जैसा गुलाबी टॉप लगातार गाढ़ा लिक्विड बाहर उगल रहा था .... सच तो यह था, निक्की की चूत भी इतना पानी छोड़ रही थी कि बॉटल भर जाए.
" क्या यह सच में रियल है .. क्या मैं इसे चूस पाउन्गि ? " ....... उसने लंड की विशाल लंबाई और भयानक मोटाई देखते हुए अपने मन में सोचा .... निकुंज की बातों को याद करके निक्की के शरीर में वासना, मस्ती बनकर दौड़ रही थी .... उसके होंठ स्वतः ही खुलने की कोशिश करने लगे और जल्द ही वह अपने भाई की कमर पर झुकती चली गयी.
निकुंज की आँखें तो बंद थी लेकिन ज्यों ही उसने निक्की की गरम साँसें अपने लंड के सुपाडे पर महसूस की वह खुद एग्ज़ाइट्मेंट और उत्तेजना में गहरी साँसें लेने लगा .... निक्की अपने भाई के लंड से उठती मादक मर्दाना सुगंध सूंघ सूंघ कर पागल हुई जा रही थी ........ " इतनी भी बुरा नही है " ........ यह सोचते हुए वह अपने कंट्रोल से, आपे से बाहर हो गयी और अती कामुकतावश उसके सुपाडे पर एक छोटा सा किस कर दिया.
" अहह " ....... झट से निकुंज की बंद आँखें खुल गयी .... उसने देखा निक्की उसके विकराल लंड को बेहद नशीली आँखों से घुरती हुई, अपने सॉफ्ट और जुवैसी लिप्स पर अपनी जीभ घुमा रही है और यह सीन देखकर निकुंज की नसे फडक उठी.
" प्लज़्ज़्ज़ ... निक्की इसे अपने मूँह के अंदर लेकर चूस .. इसे अपने होंठो से प्यार कर .. मैं बहुत बेचैन हूँ " ......... निकुंज एक कराह ले कर बोला.
अपने सगे भाई के मूँह से उसके लंड को चूसने और होंठो से प्यार करने की बात सुनकर निक्की की आँखें भारी होने लगी .... एक नशा, एक सनक उस पर सवार हो गयी .... अपने आप उसके लिप्स खुले या पूरी शक्ति के साथ फट पड़े और अगले ही पल निकुंज का गीला छोटे सेब जैसा सुपाड़ा, निक्की के गरम व मुलायम होंठो के घेरे में क़ैद हो गया.
"ऊओह.....!!! निक्की चूस बेटा " ........ निकुंज के मूँह से लंबी आह निकली और वह अपना एक हाथ अपनी बहेन के सर पर रखकर, उसके सिल्की बाल सहलाने लगा ..... साथ ही साथ अपने दूसरे हाथ से उसकी राइट चूची पकड़ ली और ज़ोरों से मसल्ने लगा.
निकुंज का मर्दाना अंग अपने मूँह के अंदर लेते ही निक्की की आँखें मस्ती से बंद हो गयी .... उसे एक अजीब सा नशा होने लगा .... जाने क्या बात थी लेकिन उसे एक अलग ही आनंद का अनुभव हुआ और जो अब तक उसने कभी महसूस नही किया था .... वह पूरी तरह से अपने भाई के आगे समर्पित होती चली गयी.