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Guest
" नीमा की बात इस टॉपिक से हट कर तो है ..लेकिन जहाँ मैं अपनी बेटियों के खातिर मजबूर हुई ..वही उसे अपने बेटे विक्रम के हाथो मजबूर होना पड़ा ..ये इस बात का सबूत है कि एक मा के लिए अपने बच्चे कभी पराए नही होते ..बस कभी - कभी हालात ऐसे बन जाते हैं ..जब मा को झुकना पड़ता है ..जान कर कि ये कार्य कितना घिनोना है, उसे करना पड़ता है "
[ अब जो बात कम्मो ने शुरू की वो 100 % सत्य थी, और सारे फ़सादो की जड़ भी ..नीमा उसकी एक मात्र फ्रेंड, जिसके साथ उठना बैठना कम्मो बरसो से करती आई है, दोनो बेहद घनिष्ट हैं ..जिस दिन निम्मी के साथ कम्मो का उसके घर जाना हुआ, उसी दिन निकुंज अपनी बहेन निक्की को माल ले कर गया था .. ( पिच्छले अपडेट्स मे आप पढ़ सकते है ) ..नीमा के घर से लौटने के बाद कम्मो के रूम का ए/सी शॉर्ट-सर्क्यूट करने लगा, और इससे डर कर उसने निकुंज को आवाज़ दी, जो उस वक़्त निक्की के कमरे मे मौजूद था ..सारे शक़ों की शुरूवात की यहीं से हुई ..निकुंज ध्यान नही दे पाया कि उसका लंड शॉर्ट्स मे तना सॉफ दिखाई दे रहा है और जल्दबाज़ी मे वो कम्मो के रूम मे पहुच गया ..ए/सी सुधारने के लिए उसे चेर पर चढ़ना पड़ा और नीचे कम्मो उसके पैरों को थामे खड़ी थी, ताकि वो गिर ना जाए ..इसी जद्दो-जेहद मे उसके गाल पर निकुंज के खड़े लंड ने ठोकर मार दी ..और इसके बाद के सारे हालात आप सब पढ़ ही चुके हैं ]
शक़ करना कम्मो ने उसी हादसे के बाद शुरू किया ..और जिसका अंत अब तक नही हो पाया था
" मैं जो बताने जा रही हूँ, वादा चाहूँगी हमारे बीच मे रहेगा "
कम्मो ने कहा ..और निकुंज ने अपना सर हां मे हिला कर, अपनी अनुमति प्रदान कर दी
" उस दिन मैं निम्मी के प्रॉजेक्ट को रेडी करवाने के लिए नीमा के घर गयी ..तेरी जानकारी के लिए बता दूं उसकी बेटी भी अपनी निम्मी के ही इन्स्टिट्यूट मे पढ़ती है ..आक्चुयल बात ये है, केयी दिनो से नीमा मुझसे मिलना चाह रही थी, बट मुझे घर के कामो से फ़ुर्सत नही तो वक़्त निकाल पाना बेहद मुश्क़िल था ..निम्मी का उसके घर जाना हुआ तो मैं भी साथ चली गयी ..जब दोनो लड़कियाँ स्टडी रूम मे एंटर हो गयी तब नीमा ने मुझे अपने बेड रूम मे बुलाया "
......................फ्लेश बैक ............................
मैं :- " क्या बात है, तू बहुत परेशान दिख रही है ? "
मैने उसके चेहरे पर तनाव साफ देखा ..मेरे पूछ्ते ही उसने रोना शुरू कर दिया और मजबूरन मुझे उसे सहारा देने के लिए, अपने गले से लगा पड़ा
नीमा :- " कम्मो मैं मर जाना चाहती हूँ "
उसके इतना कहते ही मैने उसके मूँह पर अपना हाथ रख दिया
मैं :- " कैसी बात करती है ..मुझे बता आख़िर बात क्या है "
कुछ देर तो उसने कुछ नही कहा ..लेकिन फिर उसके सबर का बाँध टूटने लगा और उसने जो बातें मुझे बताईं ..निकुंज मैं सच कहती हूँ, उस औरत मे बहुत शक्ति है, बहुत सेहेन्शीलता है ..उसकी जगह अगर मैं होती, तो शायद हड़बड़ाहट मे खुद को नष्ट कर लेती या पागल हो जाती
पूरी बात-चीत के दौरान पहली बार निकुंज ने अपनी मोम को इतना सीरीयस देखा, या यूँ कहें बीती ज़िंदगी मे पहली बार ..उसके लंड मे आया कॅडॅक्पन अब कम होने लगा और उसने राहत की साँस ली ..कम्मो ने फिर से बोलना शुरू किया
नीमा :- " कम्मो मैं विक्रम ( विक्की ) की वजह से बहुत दुखी हूँ .. ( विक्की उसका छोटा बेटा है ..जिसकी उमर ** है ) ..तुझे तो पता है मेरे हज़्बेंड पिच्छले 10 सालो से सिंगपुर मे पोस्टेड हैं ..साल मे एक बार घर आते भी हैं, तो सिर्फ़ 20-25 दिनो के लिए ..उनके जॉब ने उन्हे कभी फ्री नही छोड़ा ..अब मैं मुद्दे पर आती हूँ
मैं पढ़ी-लिखी हूँ तो टीचर जॉब जाय्न कर लिया, क्यों कि बच्चो के स्कूल जाने के बाद अक्सर बोरियत महसूस होने लगी थी, फिर कुछ एक्सट्रा इनकम घर मे आना बुरा भी तो नही ..एक दिन रात मे मेरी नींद खुली, हॉल मे टीवी का साउंड ज़्यादा था तो बच्चो को डाँटने की गर्ज से मैं हॉल मे चली आई ..पर जो नज़ारा मैं उस वक़्त देखा मेरी रूह काँप उठी ..विक्की सोफे की आड मे लेटा मास्टरबेट कर रहा था, टीवी पर कोई इंग्लीश मूवी देखते हुए ..हलाकी सोफे की आड़ मे वो मुझे नही दिख पाया, लेकिन उसके हाथ की पोज़िशन ऐसी थी जिससे क्लियर हो गया, वो क्या कर रहा है
मुझे गुस्सा आ गया और मैं उसे डाटने के लिए अपने कदम आगे बढ़ाने लगी ..लेकिन तभी उसके मूँह से मोनिंग साउंड्स निकलने लगे और मेरे कदम फॉरन पीछे हट गये ..मैं समझ गयी वो स्खलित हो गया है
जाने क्यों मैं अपने कमरे मे वापस लौट आई, मन तो किया विक्की को अभी जा कर थप्पड़ लगाऊ ..लेकिन अगर शोर होता तो मेरी बेटी उठ जाती ..फिर मैं उसे क्या जवाब देती, मैं क्यों मार रही हूँ उसके भाई को ..मेरी बेटी जवान हो चुकी है, बेटा अब जवान हो रहा है ..लेकिन उस रात के बाद से, मैं आज तक चैन की एक नींद नही सो पाई
अगले दिन बच्चो को स्कूल भेजने के बाद मैं भी अपने जॉब पर चली गयी ..लेकिन रह - रह कर मेरे दिमाग़ मे विक्की का हाथ, टीवी पर चलती इंग्लीश मूवी और उस वक़्त मेरे बेटे के मूँह से निकली आवाज़ें, मुझे परेशान करने लगी ..मेरा सर दर्द से फटने लगा ..और फाइनली मैने अपने हज़्बेंड को कॉल करने का सोचा
मैं कॉल कर ही रही थी तभी मुझे वो दिन याद आ गया, जब मेरे हज़्बेंड ने सिंगपुर जाने से पहले बच्चो की केर करने की ज़िम्मेदारी मुझे सौंपी थी ..हलाकी बात तो मेरी उनसे वीक्ली होती है, लेकिन चाह कर भी मैं उन्हे कॉल नही कर पाई, क्यों कि मैं अपनी ज़िम्मेदारियों पर खरा नही उतर पाई थी
अगले काई दिन तक मैने विक्की की दिनचर्या पर गौर किया तो पता चला, उसने खुद को बर्बाद करने की ठान रखी है ..दिन मे एक बार नही, दो बार नही ..जब जी मे आया मास्टरबेट शुरू कर देता ..केयी - कयि दफ़ा तो मैने दिन भर मे 7-8 बार उसे ऐसा करते देखा ..लेकिन अब तक उसे ये पता नही चलने दिया कि उसकी मा को उस पर किसी भी प्रकार का कोई शक़ है "
निकुंज की आँखें तो सड़क देख रही थी लेकिन कान बिल्कुल कम्मो के होंठो से सटे थे ..इस तरह की बातें मा- बेटे मे कभी नही हो पाती ..अगर कल रात उसने कम्मो को अपनी बहेन के कमरे मे नही देखा होता ..उसका दिल तो चीख-चीख कर कह रहा था .. ' मोम बस करो ' ..लेकिन सोच गहरी और जिग्यासा इतनी बढ़ गयी .. ' नीमा की जगह उसने कम्मो को इमॅजिन करना शुरू कर दिया और विक्की की जगह खुद को ' ..बस अब देखना यह था यहाँ जीत किस की होती .. एक बेटे की या एक मर्द की, खेर उसका पुरुषांग तो यही बता रहा था, कि वो विजय मनाने को बेहद उत्सुक है
[ अब जो बात कम्मो ने शुरू की वो 100 % सत्य थी, और सारे फ़सादो की जड़ भी ..नीमा उसकी एक मात्र फ्रेंड, जिसके साथ उठना बैठना कम्मो बरसो से करती आई है, दोनो बेहद घनिष्ट हैं ..जिस दिन निम्मी के साथ कम्मो का उसके घर जाना हुआ, उसी दिन निकुंज अपनी बहेन निक्की को माल ले कर गया था .. ( पिच्छले अपडेट्स मे आप पढ़ सकते है ) ..नीमा के घर से लौटने के बाद कम्मो के रूम का ए/सी शॉर्ट-सर्क्यूट करने लगा, और इससे डर कर उसने निकुंज को आवाज़ दी, जो उस वक़्त निक्की के कमरे मे मौजूद था ..सारे शक़ों की शुरूवात की यहीं से हुई ..निकुंज ध्यान नही दे पाया कि उसका लंड शॉर्ट्स मे तना सॉफ दिखाई दे रहा है और जल्दबाज़ी मे वो कम्मो के रूम मे पहुच गया ..ए/सी सुधारने के लिए उसे चेर पर चढ़ना पड़ा और नीचे कम्मो उसके पैरों को थामे खड़ी थी, ताकि वो गिर ना जाए ..इसी जद्दो-जेहद मे उसके गाल पर निकुंज के खड़े लंड ने ठोकर मार दी ..और इसके बाद के सारे हालात आप सब पढ़ ही चुके हैं ]
शक़ करना कम्मो ने उसी हादसे के बाद शुरू किया ..और जिसका अंत अब तक नही हो पाया था
" मैं जो बताने जा रही हूँ, वादा चाहूँगी हमारे बीच मे रहेगा "
कम्मो ने कहा ..और निकुंज ने अपना सर हां मे हिला कर, अपनी अनुमति प्रदान कर दी
" उस दिन मैं निम्मी के प्रॉजेक्ट को रेडी करवाने के लिए नीमा के घर गयी ..तेरी जानकारी के लिए बता दूं उसकी बेटी भी अपनी निम्मी के ही इन्स्टिट्यूट मे पढ़ती है ..आक्चुयल बात ये है, केयी दिनो से नीमा मुझसे मिलना चाह रही थी, बट मुझे घर के कामो से फ़ुर्सत नही तो वक़्त निकाल पाना बेहद मुश्क़िल था ..निम्मी का उसके घर जाना हुआ तो मैं भी साथ चली गयी ..जब दोनो लड़कियाँ स्टडी रूम मे एंटर हो गयी तब नीमा ने मुझे अपने बेड रूम मे बुलाया "
......................फ्लेश बैक ............................
मैं :- " क्या बात है, तू बहुत परेशान दिख रही है ? "
मैने उसके चेहरे पर तनाव साफ देखा ..मेरे पूछ्ते ही उसने रोना शुरू कर दिया और मजबूरन मुझे उसे सहारा देने के लिए, अपने गले से लगा पड़ा
नीमा :- " कम्मो मैं मर जाना चाहती हूँ "
उसके इतना कहते ही मैने उसके मूँह पर अपना हाथ रख दिया
मैं :- " कैसी बात करती है ..मुझे बता आख़िर बात क्या है "
कुछ देर तो उसने कुछ नही कहा ..लेकिन फिर उसके सबर का बाँध टूटने लगा और उसने जो बातें मुझे बताईं ..निकुंज मैं सच कहती हूँ, उस औरत मे बहुत शक्ति है, बहुत सेहेन्शीलता है ..उसकी जगह अगर मैं होती, तो शायद हड़बड़ाहट मे खुद को नष्ट कर लेती या पागल हो जाती
पूरी बात-चीत के दौरान पहली बार निकुंज ने अपनी मोम को इतना सीरीयस देखा, या यूँ कहें बीती ज़िंदगी मे पहली बार ..उसके लंड मे आया कॅडॅक्पन अब कम होने लगा और उसने राहत की साँस ली ..कम्मो ने फिर से बोलना शुरू किया
नीमा :- " कम्मो मैं विक्रम ( विक्की ) की वजह से बहुत दुखी हूँ .. ( विक्की उसका छोटा बेटा है ..जिसकी उमर ** है ) ..तुझे तो पता है मेरे हज़्बेंड पिच्छले 10 सालो से सिंगपुर मे पोस्टेड हैं ..साल मे एक बार घर आते भी हैं, तो सिर्फ़ 20-25 दिनो के लिए ..उनके जॉब ने उन्हे कभी फ्री नही छोड़ा ..अब मैं मुद्दे पर आती हूँ
मैं पढ़ी-लिखी हूँ तो टीचर जॉब जाय्न कर लिया, क्यों कि बच्चो के स्कूल जाने के बाद अक्सर बोरियत महसूस होने लगी थी, फिर कुछ एक्सट्रा इनकम घर मे आना बुरा भी तो नही ..एक दिन रात मे मेरी नींद खुली, हॉल मे टीवी का साउंड ज़्यादा था तो बच्चो को डाँटने की गर्ज से मैं हॉल मे चली आई ..पर जो नज़ारा मैं उस वक़्त देखा मेरी रूह काँप उठी ..विक्की सोफे की आड मे लेटा मास्टरबेट कर रहा था, टीवी पर कोई इंग्लीश मूवी देखते हुए ..हलाकी सोफे की आड़ मे वो मुझे नही दिख पाया, लेकिन उसके हाथ की पोज़िशन ऐसी थी जिससे क्लियर हो गया, वो क्या कर रहा है
मुझे गुस्सा आ गया और मैं उसे डाटने के लिए अपने कदम आगे बढ़ाने लगी ..लेकिन तभी उसके मूँह से मोनिंग साउंड्स निकलने लगे और मेरे कदम फॉरन पीछे हट गये ..मैं समझ गयी वो स्खलित हो गया है
जाने क्यों मैं अपने कमरे मे वापस लौट आई, मन तो किया विक्की को अभी जा कर थप्पड़ लगाऊ ..लेकिन अगर शोर होता तो मेरी बेटी उठ जाती ..फिर मैं उसे क्या जवाब देती, मैं क्यों मार रही हूँ उसके भाई को ..मेरी बेटी जवान हो चुकी है, बेटा अब जवान हो रहा है ..लेकिन उस रात के बाद से, मैं आज तक चैन की एक नींद नही सो पाई
अगले दिन बच्चो को स्कूल भेजने के बाद मैं भी अपने जॉब पर चली गयी ..लेकिन रह - रह कर मेरे दिमाग़ मे विक्की का हाथ, टीवी पर चलती इंग्लीश मूवी और उस वक़्त मेरे बेटे के मूँह से निकली आवाज़ें, मुझे परेशान करने लगी ..मेरा सर दर्द से फटने लगा ..और फाइनली मैने अपने हज़्बेंड को कॉल करने का सोचा
मैं कॉल कर ही रही थी तभी मुझे वो दिन याद आ गया, जब मेरे हज़्बेंड ने सिंगपुर जाने से पहले बच्चो की केर करने की ज़िम्मेदारी मुझे सौंपी थी ..हलाकी बात तो मेरी उनसे वीक्ली होती है, लेकिन चाह कर भी मैं उन्हे कॉल नही कर पाई, क्यों कि मैं अपनी ज़िम्मेदारियों पर खरा नही उतर पाई थी
अगले काई दिन तक मैने विक्की की दिनचर्या पर गौर किया तो पता चला, उसने खुद को बर्बाद करने की ठान रखी है ..दिन मे एक बार नही, दो बार नही ..जब जी मे आया मास्टरबेट शुरू कर देता ..केयी - कयि दफ़ा तो मैने दिन भर मे 7-8 बार उसे ऐसा करते देखा ..लेकिन अब तक उसे ये पता नही चलने दिया कि उसकी मा को उस पर किसी भी प्रकार का कोई शक़ है "
निकुंज की आँखें तो सड़क देख रही थी लेकिन कान बिल्कुल कम्मो के होंठो से सटे थे ..इस तरह की बातें मा- बेटे मे कभी नही हो पाती ..अगर कल रात उसने कम्मो को अपनी बहेन के कमरे मे नही देखा होता ..उसका दिल तो चीख-चीख कर कह रहा था .. ' मोम बस करो ' ..लेकिन सोच गहरी और जिग्यासा इतनी बढ़ गयी .. ' नीमा की जगह उसने कम्मो को इमॅजिन करना शुरू कर दिया और विक्की की जगह खुद को ' ..बस अब देखना यह था यहाँ जीत किस की होती .. एक बेटे की या एक मर्द की, खेर उसका पुरुषांग तो यही बता रहा था, कि वो विजय मनाने को बेहद उत्सुक है