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Guest
शहर में खुद का घर होना बड़ी मुश्किल की बात है। और जब मैंने और मेरे पति ने शहर में एक बंगलो खरीदने की सोची तो सब हम को पागल समझने लगे। क्योंकि एक तो वो बंगलो तीन बेडरूम का था जो हमारी जरूरत से काफी बड़ा था और अभी अभी शुरू हुई हमारी शादीशुदा जिंदगी में यह बहुत बड़ी इन्वेस्टमेंट थी।
फिर भी बहुत सोच विचार कर के हमारी सारी पूंजी जमा कर के और ऊपर से बहुत बड़ा लोन बैंक से निकालकर हमने वह बंगलो खरीद लिया। इससे पहले हम मेरे पति नितिन के घर उसके माँ बाप के घर रहते थे, और फिर मेरा बेटा अभी भी अब बड़ा होने लगा था तो जगह कम पड़ने लगी थी।
हम अगल रहने वाले हैं, यह पता चलते ही नितिन के माता पिता बहुत नाराज हो गए पर हमने उन्हें समझाया और वह मान गए। आखिरकार 2-3 महीने में हम अपने नए घर रहने आ गए।
मैं नीतू और मेरे पति नितिन, हम दोनों की लव मैरिज थी। हमारी शादी को सात साल हो गए थे और हमारा एक पांच साल का बेटा गोलू है। फिर भी मेरी फिगर वैसी ही है जैसे शादी से पहले थी, हाँ कुछ चीजें बढ़ गयी थी पर उससे मेरी फिगर और भी सेक्सी हो गयी थी।
मेरे स्तन ज्यादा बड़े तो नहीं हैं पर मेरी फिगर को बहुत ही सूट करते हैं और काफी कड़क हैं। मेरा पेट एकदम सपाट है। मैं बाहर जाती हूँ तो अक्सर साड़ी ही पहनती हूँ इसलिए पल्लू की हलचल से दिखने वाली मेरी नाभि सबको आकर्षित करती हैं। मेरी लम्बी टांगों और सुडौल जांघों की वजह से साड़ी में भी मेरी फिगर काफी आकर्षक दिखती है।
मेरे पति भी एक आकर्षक पर्सनालिटी के पुरुष हैं, लव मैरिज होने की वजह से हम दोनों में बहुत जमती है।
और यह नया घर भी हमारे लिए बहुत लकी था। हम मई महीने में घर में रहने गए। मैंने जून में पास के ही एक स्कूल में दुगनी सैलरी की टीचिंग की जॉब जॉइन कर ली, थोड़ी ही दिनों में नितिन ने भी एक बड़ी कंपनी में जॉब जॉइन की।
फिर भी घर की क़िश्त भरने में हमें बहुत परेशानी होती थी। फिर हमने उसका भी उपाय सोचा, पेइंग गेस्ट।
हम दोनों ले लिया अभी सेपरेट रूम थे और एक गेस्ट बेडरूम खाली ही था। वह बैडरूम बाथरूम के साथ था और उस बैडरूम में जाने के लिए घर के अंदर से और बाहर से दो रास्ते थे तो हमें ज्यादा परेशानी नहीं होने वाली थी।
और तभी हम पता चला कि नितिन के गांव के एक दोस्त को हमारे शहर में जॉब मिल गयी थी और उसे पेइंग गेस्ट रहने की जरूरत थी। तो नितिन ने उसको अपने घर बुला लिया।
इस तरह सुहास हमारे घर में पेइंग गेस्ट बन कर आया। सुहास यहाँ एक साल की ट्रेनिंग के लिए आया था। नितिन और सुहास बचपन से दोस्त थे लेकिन सुहास नितिन से पांच साल छोटा था और अभी उसकी शादी भी नहीं हुई थी।
उसकी कंपनी उसे रेंट के लिए बहुत पैसा दे रही थी और कंपनी भी पांच मिनट की दूरी पर थी।
नितिन ने जब पहली बार मुझे पेइंग गेस्ट के बारे में बोला तो मैंने मना नहीं किया क्योंकि एक साल की ही तो बात थी और किराया भी बहुत मिलने वाला था। सुहास भी अकेला ही था तो ज्यादा लोग भी नहीं थे।
हमने किराया थोड़ा ज्यादा ही मांगा पर उसको हमारा लोकेशन बहुत सुविधाजनक था तो वह भी मान गया और दो बैग ले कर के वह रहने के लिए आ गया।
उस रूम में एक बेड था एक अलमारी एक कुर्सी और एक आईना इतना ही फर्नीचर था पर सुहास को कोई परेशानी नहीं थी। हम उसे एक फैमिली मेंबर जैसा ही समझते थे इसलिए वह हमारे हॉल और किचन में भी आ जा सकता था।
सुहास हाल ही में जापान से एक महीने की ट्रेनिंग खत्म करके आया था वापस आते वक्त वो बहुत सारी चीजें लाया था। जब वह घर में आया था तभी उसने मेरे लिए एक मिक्सर और एक इस्तरी लाया था। अशोक के लिए उसने एक ट्रिमर लाकर दिया था। और गोलू को तो बहुत सारे खिलौने और चॉकलेट्स देकर अपना दोस्त बना लिया था।
गोलू उसे सगे चाचा की तरह प्यार करने लगा और सुहास भी उसे अपने भतीजे की तरह प्यार करता था। वह रोज ऑफिस से आते वक्त कुछ न कुछ खाने को लाता, गोलू को तो रोज चॉकलेट्स मिलने लगे थे।
यह अचानक आया हुआ गेस्ट हमारे परिवार में घुल मिल गया था। मैं उसे रोज सुबह चाय के लिए हॉल में बुलाने लगी। नाश्ते के लिए उसने मना किया क्योंकि वह आठ बजे ऑफिस के लिए निकल जाता और ऑफिस में उसके नाश्ते की और लंच की व्यवस्था थी।
फिर हमने रात का खाना हमारे साथ खाने का आग्रह किया, उसे उसने मान लिया, हम चारों रात का खाना एक साथ खाने लगे। सुहास हमारे परिवार वालों के साथ भी अच्छे से घुल मिल गया। इस तरह वह हमारे परिवार का हिस्सा हो गया था।
सुहास पांच फीट दस इंच लंबा था और उसका बदन कसरती था, मैं जब भी उसे देखती तब मुझे अक्षय कुमार की याद आती। बस एक ही कमी थी कि उसका रंग काला था पर वह कमी भी उसके मजाकिया स्वभाव और कोलगेट स्माइल से पूरी होती थी।
फिर भी बहुत सोच विचार कर के हमारी सारी पूंजी जमा कर के और ऊपर से बहुत बड़ा लोन बैंक से निकालकर हमने वह बंगलो खरीद लिया। इससे पहले हम मेरे पति नितिन के घर उसके माँ बाप के घर रहते थे, और फिर मेरा बेटा अभी भी अब बड़ा होने लगा था तो जगह कम पड़ने लगी थी।
हम अगल रहने वाले हैं, यह पता चलते ही नितिन के माता पिता बहुत नाराज हो गए पर हमने उन्हें समझाया और वह मान गए। आखिरकार 2-3 महीने में हम अपने नए घर रहने आ गए।
मैं नीतू और मेरे पति नितिन, हम दोनों की लव मैरिज थी। हमारी शादी को सात साल हो गए थे और हमारा एक पांच साल का बेटा गोलू है। फिर भी मेरी फिगर वैसी ही है जैसे शादी से पहले थी, हाँ कुछ चीजें बढ़ गयी थी पर उससे मेरी फिगर और भी सेक्सी हो गयी थी।
मेरे स्तन ज्यादा बड़े तो नहीं हैं पर मेरी फिगर को बहुत ही सूट करते हैं और काफी कड़क हैं। मेरा पेट एकदम सपाट है। मैं बाहर जाती हूँ तो अक्सर साड़ी ही पहनती हूँ इसलिए पल्लू की हलचल से दिखने वाली मेरी नाभि सबको आकर्षित करती हैं। मेरी लम्बी टांगों और सुडौल जांघों की वजह से साड़ी में भी मेरी फिगर काफी आकर्षक दिखती है।
मेरे पति भी एक आकर्षक पर्सनालिटी के पुरुष हैं, लव मैरिज होने की वजह से हम दोनों में बहुत जमती है।
और यह नया घर भी हमारे लिए बहुत लकी था। हम मई महीने में घर में रहने गए। मैंने जून में पास के ही एक स्कूल में दुगनी सैलरी की टीचिंग की जॉब जॉइन कर ली, थोड़ी ही दिनों में नितिन ने भी एक बड़ी कंपनी में जॉब जॉइन की।
फिर भी घर की क़िश्त भरने में हमें बहुत परेशानी होती थी। फिर हमने उसका भी उपाय सोचा, पेइंग गेस्ट।
हम दोनों ले लिया अभी सेपरेट रूम थे और एक गेस्ट बेडरूम खाली ही था। वह बैडरूम बाथरूम के साथ था और उस बैडरूम में जाने के लिए घर के अंदर से और बाहर से दो रास्ते थे तो हमें ज्यादा परेशानी नहीं होने वाली थी।
और तभी हम पता चला कि नितिन के गांव के एक दोस्त को हमारे शहर में जॉब मिल गयी थी और उसे पेइंग गेस्ट रहने की जरूरत थी। तो नितिन ने उसको अपने घर बुला लिया।
इस तरह सुहास हमारे घर में पेइंग गेस्ट बन कर आया। सुहास यहाँ एक साल की ट्रेनिंग के लिए आया था। नितिन और सुहास बचपन से दोस्त थे लेकिन सुहास नितिन से पांच साल छोटा था और अभी उसकी शादी भी नहीं हुई थी।
उसकी कंपनी उसे रेंट के लिए बहुत पैसा दे रही थी और कंपनी भी पांच मिनट की दूरी पर थी।
नितिन ने जब पहली बार मुझे पेइंग गेस्ट के बारे में बोला तो मैंने मना नहीं किया क्योंकि एक साल की ही तो बात थी और किराया भी बहुत मिलने वाला था। सुहास भी अकेला ही था तो ज्यादा लोग भी नहीं थे।
हमने किराया थोड़ा ज्यादा ही मांगा पर उसको हमारा लोकेशन बहुत सुविधाजनक था तो वह भी मान गया और दो बैग ले कर के वह रहने के लिए आ गया।
उस रूम में एक बेड था एक अलमारी एक कुर्सी और एक आईना इतना ही फर्नीचर था पर सुहास को कोई परेशानी नहीं थी। हम उसे एक फैमिली मेंबर जैसा ही समझते थे इसलिए वह हमारे हॉल और किचन में भी आ जा सकता था।
सुहास हाल ही में जापान से एक महीने की ट्रेनिंग खत्म करके आया था वापस आते वक्त वो बहुत सारी चीजें लाया था। जब वह घर में आया था तभी उसने मेरे लिए एक मिक्सर और एक इस्तरी लाया था। अशोक के लिए उसने एक ट्रिमर लाकर दिया था। और गोलू को तो बहुत सारे खिलौने और चॉकलेट्स देकर अपना दोस्त बना लिया था।
गोलू उसे सगे चाचा की तरह प्यार करने लगा और सुहास भी उसे अपने भतीजे की तरह प्यार करता था। वह रोज ऑफिस से आते वक्त कुछ न कुछ खाने को लाता, गोलू को तो रोज चॉकलेट्स मिलने लगे थे।
यह अचानक आया हुआ गेस्ट हमारे परिवार में घुल मिल गया था। मैं उसे रोज सुबह चाय के लिए हॉल में बुलाने लगी। नाश्ते के लिए उसने मना किया क्योंकि वह आठ बजे ऑफिस के लिए निकल जाता और ऑफिस में उसके नाश्ते की और लंच की व्यवस्था थी।
फिर हमने रात का खाना हमारे साथ खाने का आग्रह किया, उसे उसने मान लिया, हम चारों रात का खाना एक साथ खाने लगे। सुहास हमारे परिवार वालों के साथ भी अच्छे से घुल मिल गया। इस तरह वह हमारे परिवार का हिस्सा हो गया था।
सुहास पांच फीट दस इंच लंबा था और उसका बदन कसरती था, मैं जब भी उसे देखती तब मुझे अक्षय कुमार की याद आती। बस एक ही कमी थी कि उसका रंग काला था पर वह कमी भी उसके मजाकिया स्वभाव और कोलगेट स्माइल से पूरी होती थी।