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पेइंग गेस्ट से तृप्ति

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Guest
शहर में खुद का घर होना बड़ी मुश्किल की बात है। और जब मैंने और मेरे पति ने शहर में एक बंगलो खरीदने की सोची तो सब हम को पागल समझने लगे। क्योंकि एक तो वो बंगलो तीन बेडरूम का था जो हमारी जरूरत से काफी बड़ा था और अभी अभी शुरू हुई हमारी शादीशुदा जिंदगी में यह बहुत बड़ी इन्वेस्टमेंट थी।

फिर भी बहुत सोच विचार कर के हमारी सारी पूंजी जमा कर के और ऊपर से बहुत बड़ा लोन बैंक से निकालकर हमने वह बंगलो खरीद लिया। इससे पहले हम मेरे पति नितिन के घर उसके माँ बाप के घर रहते थे, और फिर मेरा बेटा अभी भी अब बड़ा होने लगा था तो जगह कम पड़ने लगी थी।

हम अगल रहने वाले हैं, यह पता चलते ही नितिन के माता पिता बहुत नाराज हो गए पर हमने उन्हें समझाया और वह मान गए। आखिरकार 2-3 महीने में हम अपने नए घर रहने आ गए।

मैं नीतू और मेरे पति नितिन, हम दोनों की लव मैरिज थी। हमारी शादी को सात साल हो गए थे और हमारा एक पांच साल का बेटा गोलू है। फिर भी मेरी फिगर वैसी ही है जैसे शादी से पहले थी, हाँ कुछ चीजें बढ़ गयी थी पर उससे मेरी फिगर और भी सेक्सी हो गयी थी।

मेरे स्तन ज्यादा बड़े तो नहीं हैं पर मेरी फिगर को बहुत ही सूट करते हैं और काफी कड़क हैं। मेरा पेट एकदम सपाट है। मैं बाहर जाती हूँ तो अक्सर साड़ी ही पहनती हूँ इसलिए पल्लू की हलचल से दिखने वाली मेरी नाभि सबको आकर्षित करती हैं। मेरी लम्बी टांगों और सुडौल जांघों की वजह से साड़ी में भी मेरी फिगर काफी आकर्षक दिखती है।

मेरे पति भी एक आकर्षक पर्सनालिटी के पुरुष हैं, लव मैरिज होने की वजह से हम दोनों में बहुत जमती है।

और यह नया घर भी हमारे लिए बहुत लकी था। हम मई महीने में घर में रहने गए। मैंने जून में पास के ही एक स्कूल में दुगनी सैलरी की टीचिंग की जॉब जॉइन कर ली, थोड़ी ही दिनों में नितिन ने भी एक बड़ी कंपनी में जॉब जॉइन की।

फिर भी घर की क़िश्त भरने में हमें बहुत परेशानी होती थी। फिर हमने उसका भी उपाय सोचा, पेइंग गेस्ट।

हम दोनों ले लिया अभी सेपरेट रूम थे और एक गेस्ट बेडरूम खाली ही था। वह बैडरूम बाथरूम के साथ था और उस बैडरूम में जाने के लिए घर के अंदर से और बाहर से दो रास्ते थे तो हमें ज्यादा परेशानी नहीं होने वाली थी।

और तभी हम पता चला कि नितिन के गांव के एक दोस्त को हमारे शहर में जॉब मिल गयी थी और उसे पेइंग गेस्ट रहने की जरूरत थी। तो नितिन ने उसको अपने घर बुला लिया।

इस तरह सुहास हमारे घर में पेइंग गेस्ट बन कर आया। सुहास यहाँ एक साल की ट्रेनिंग के लिए आया था। नितिन और सुहास बचपन से दोस्त थे लेकिन सुहास नितिन से पांच साल छोटा था और अभी उसकी शादी भी नहीं हुई थी।

उसकी कंपनी उसे रेंट के लिए बहुत पैसा दे रही थी और कंपनी भी पांच मिनट की दूरी पर थी।

नितिन ने जब पहली बार मुझे पेइंग गेस्ट के बारे में बोला तो मैंने मना नहीं किया क्योंकि एक साल की ही तो बात थी और किराया भी बहुत मिलने वाला था। सुहास भी अकेला ही था तो ज्यादा लोग भी नहीं थे।

हमने किराया थोड़ा ज्यादा ही मांगा पर उसको हमारा लोकेशन बहुत सुविधाजनक था तो वह भी मान गया और दो बैग ले कर के वह रहने के लिए आ गया।

उस रूम में एक बेड था एक अलमारी एक कुर्सी और एक आईना इतना ही फर्नीचर था पर सुहास को कोई परेशानी नहीं थी। हम उसे एक फैमिली मेंबर जैसा ही समझते थे इसलिए वह हमारे हॉल और किचन में भी आ जा सकता था।

सुहास हाल ही में जापान से एक महीने की ट्रेनिंग खत्म करके आया था वापस आते वक्त वो बहुत सारी चीजें लाया था। जब वह घर में आया था तभी उसने मेरे लिए एक मिक्सर और एक इस्तरी लाया था। अशोक के लिए उसने एक ट्रिमर लाकर दिया था। और गोलू को तो बहुत सारे खिलौने और चॉकलेट्स देकर अपना दोस्त बना लिया था।

गोलू उसे सगे चाचा की तरह प्यार करने लगा और सुहास भी उसे अपने भतीजे की तरह प्यार करता था। वह रोज ऑफिस से आते वक्त कुछ न कुछ खाने को लाता, गोलू को तो रोज चॉकलेट्स मिलने लगे थे।

यह अचानक आया हुआ गेस्ट हमारे परिवार में घुल मिल गया था। मैं उसे रोज सुबह चाय के लिए हॉल में बुलाने लगी। नाश्ते के लिए उसने मना किया क्योंकि वह आठ बजे ऑफिस के लिए निकल जाता और ऑफिस में उसके नाश्ते की और लंच की व्यवस्था थी।

फिर हमने रात का खाना हमारे साथ खाने का आग्रह किया, उसे उसने मान लिया, हम चारों रात का खाना एक साथ खाने लगे। सुहास हमारे परिवार वालों के साथ भी अच्छे से घुल मिल गया। इस तरह वह हमारे परिवार का हिस्सा हो गया था।

सुहास पांच फीट दस इंच लंबा था और उसका बदन कसरती था, मैं जब भी उसे देखती तब मुझे अक्षय कुमार की याद आती। बस एक ही कमी थी कि उसका रंग काला था पर वह कमी भी उसके मजाकिया स्वभाव और कोलगेट स्माइल से पूरी होती थी।

 
मैं पहले तो उससे अलग रहती थी पर उसके दिलकश स्वभाव की वजह से मैं भी उससे घुलमिल गयी, मैं भी उसको नाम से बुलाने लगी। वह भी मुझे नीतू भाभी बोलता। नितिन भी कभी कभी कंपनी के काम से बाहर जाता तब सुहास की घर में रहने के वजह से नितिन भी टेंशन फ्री थे और मैं भी।

खाना होने के बाद हम चारों डायनिंग टेबल पर ही बहुत देर तक गप्पें लड़ाते रहते।

सुहास जब रहने आया था तो मैं मैक्सी छोड़ कर साड़ी या ड्रेस पहनने लगी थी पर जब हम घुलमिल गए तब से मैं फिर से मैक्सी पहनने लगी।

मेरा पति का प्यार करने का तरीका बिल्कुल साधारण है, वे ज्यादा फोरप्ले नहीं करते, कभी कभार मन करे तो मेरे स्तन दबाते हैं या फिर चूसते हैं, नहीं तो सीधा कपड़े उतार कर अपना लिंग मेरी चुत में डाल कर झड़ने तक अंदर बाहर करते हैं।

शादी के एक साल के बाद ही हमें गोलू हुआ, उसके पालन पोषण में ही हमारा सारा वक्त जाता था। पर अब वह बड़ा हो गया था पर नितिन के आफिस का काम भी बढ़ गया था। कभी कभी लगता कि जिंदगी में कुछ तो कमी है। उसी वक्त सुहास मेरी जिंदगी में आया, उसका स्वभाव मुझे मेरी जिंदगी की खामियों की याद दिलाने लगा।

कुछ दिन बाद अब सुहास मुझे और भी अच्छा लगने लगा था… एक मर्द की तरह! सुहास में मुझे अपने जीवन की खामियों को भरने के लिए एक पर्याय नजर आ रहा था.

उसकी शुरुआत भी ऐसे ही होती गयी।

उस दिन गोलू का पांचवाँ बर्थडे था, उसने अपने फेवरेट अंकल को पहले ही बता दिया था। उस दिन शनिवार था तो सुहास ने पूरा प्लान बनाकर रखा था। पहले गोलू के फेवरेट हीरो अक्षय कुमार की फ़िल्म देखेंगे, फिर गोलू के लिए शॉपिंग करने के बाद बाहर खाना खा कर घर वापिस आएंगे।

मैं और नितिन मना कर रहे थे पर गोलू की जिद की वजह से हमने हाँ कर दी। पहले तो फ़िल्म देखी, फ़िल्म ज्यादा अच्छी तो नहीं थी पर गोलू ने बहुत एन्जॉय किया।

उसके बाद हम पास के मॉल में गए, हमने गोलू को साईकल गिफ्ट की थी तो मॉल में उसके लिए ड्रेस खरीदी, सुहास ने अभी को एक रिमोट कंट्रोल वाली कार गिफ्ट की। इतना बड़ा सेलिब्रेशन होने के बाद वह बहुत खुश था।

फिर पास के एक होटल में खाना खाया।

रात को घर जाते समय बहुत बारिश हुई, एक भी टैक्सी हमारे एरिया में जाने को तैयार नहीं थी। फिर हम ऑटोरिक्शा कर के घर को जाने को निकले, ट्रैफिक भी बहुत ज्यादा था। नितिन सारे बैग पकड़ कर बैठा था, मैं बीच में सोये हुए गोलू को गोद में ले कर बैठी थी, मेरे साइड में सुहास था। हल्की बारिश हो रही थी, सुहास मुझे ज्यादा जगह मिले, इस तरह से बैठा था।

मुझे सोये हुए गोलू को संभालना मुश्किल हो रहा था तो सुहास मुझे अभी को उसकी गोद में देने को बोला। मैंने हाँ किया तब गोलू को मेरी गोद से उठाते वक्त उसका हाथ मेरे स्तनों पर दब गया। उस एक सेकंड में एक अजीब सा अहसास हुआ, मेरी धड़कनें तेज हो गयी। उसे यह अहसास हुआ या नहीं, यह पता नहीं चला।

बारिश अभी चल रही थी। बाहर से आती बारिश की बूंदों से अभी को बचाने के लिए सुहास अंदर सरकने लगा। मैं भी उसके लिए जगह बनाने के लिए अंदर सरक गयी और आगे की तरफ सरकी। पर मेरे आगे सरकने से मेरा स्तन वापस उसके हाथ से टकराने लगा। मैं एंगल चेंज कर के उसके हाथ से बचने की कोशिश करने लगी पर उस ऑटो में उतनी जगह भी नहीं थी। रिक्शा में लगते झटकों से उसका हाथ बार बार मेरे स्तन से टकरा जाता। मैं हर बार उससे बचने का प्रयास कर रही थी पर वह मुमकिन नहीं था, अंत में मैंने प्रयास छोड़ दिया और मेरे ब्लाऊज़ और ब्रा के नीचे खड़ा हुआ मेरा निप्पल उसको ना छुए, इतनी पीछे हो कर बैठ गई।

घर पहुँचने तक मेरे स्तन में मीठा दर्द हो रहा था, वह दर्द सुहास के हाथ पर घिसने की वजह से था या फिर घिसने की वजह से हो रही उत्तेजना की वजह से था क्या पता। गोलू को इतनी देर पकड़ने की वजह से सुहास का हाथ भी दुख रहा था। उतरने के बाद गोलू को वापस लेते समय सुहास का हाथ फिर से मेरे स्तनों पे लग गया, सुहास ने लेकिन कोई भी प्रतिक्रिया नहीं दी।

उस रात मैं तड़पती रही। नितिन को छोड़कर दूसरे आदमी का स्पर्श मेरे नाजुक अंगों पर हुआ था, पर मुझे उसमें कुछ गलत नहीं लग रहा था। मेरे अंदर दबी भूख अब उभर कर आई थी, और सुहास उसका कारण था।

सुहास जब घर में नहीं होता था, तब वह अपने रूम का दरवाजा खुला ही रखता। मैं कामवाली बाई को सफाई का बताने के लिए कभी कभार उसके रूम में जाती थी। सुहास अपना रूम हमेशा इतना साफ रखता कि मुझे कुछ काम करने की जरूरत भी नहीं थी। पर अब मैं उसके कमरे में हर दिन तीन चार बार जाने लगी।

 
एक दिन मैंने उसके बेड के ऊपर की बेडशीट बदल दी फिर उसकी अलमारी खोली, उसकी अलमारी में भी सभी कपड़े ठीक से रखे हुए थे। पर जब अलमारी खोली तो उसके शर्ट से उसके बदन की खुशबू आने लगी, उस खुशबू से मैं बैचैन होने लगी, ऑटोरिक्शा में हुई उसकी कामुक स्पर्श की यादें मुझे सताने लगी।

मैं वही उसके बेड पर लेट गयी, मैक्सी के ऊपर से ही मैं अपने बायें स्तन को दबाने लगी, ऊपर खड़े हुए मेरे निप्पलों को अपनी उँगलियों में पकड़ कर मसलने लगी, सुहास ही मेरे पूरे बदन पर हाथ घुमा रहा हो, ऐसी कल्पना करते हुए कब मेरा दूसरा हाथ मेरी पैंटी के अंदर मेरी चुत को मसलने लगा, मुझे पता ही नहीं चला।

और फिर अपने कामेच्छा बिंदु पर पहुँचकर झड़ गयी और वही सो गई।

कुछ दिनों से सुहास भी बदला बदला सा लगने लगा था, या फिर मुझे ऐसे लगने लगा था। नितिन के घर ना होते समय वह कुछ ज्यादा ही जॉली हो जाता, अभी जब साथ नहीं होता तब वह मुझे एक दो नॉनवेज जॉक्स भी सुनाता और कभी कभी डबल मीनिंग वाली बाते भी करता। कुछ दिनों से उसकी नजर हमेशा मुझमे कुछ ढूंढती रहती ऐसा मुझे लगता।

उस रिक्शा वाली घटना के बाद उसका मुझे गलती से छूना भी बढ़ गया था, उसका मुझे एतराज नहीं था। उस स्पर्श से मैं अधिक तड़प उठती। उस हफ्ते मेरे स्कूल की छुट्टियाँ चल रही थी तो मैं रोज उसके रूम में जाकर अपने आप को उंगलियों से संतुष्ट करती थी।

मैं शाम को उसके आने की और उससे बातें करने की राह देखने लगी। मैं जानबूझ कर शाम की चाय लेकर उसके रूम में जाने लगी। उसके बेड पर बैठ कर चाय पीते पीते उससे बातें करने लगी। उसकी बातें और उसके जोक्स मुझे बहुत अच्छे लगने लगे थे। सुबह और शाम चाय देते वक्त उसकी उंगलियों का स्पर्श मिले इसके लिए मैं प्रयास करने लगी।

एक बार मैंने साड़ी पहनी थी और वह कुर्सी पर बैठा था, चाय देते वक्त मेरा पल्लू गिर गया पर मैंने उसे उठाने की जल्दी नहीं की और उसे आराम से मेरे स्तनों के बीच की गहराई दिखाई। उसने भी चाय लेने में पहले से ज्यादा वक्त लगाया।

मैंने नजर बचाते हुए उसकी पैंट की ज़िप की तरफ देखा तो वहाँ भी तम्बू बन रहा था।

गोलू का बर्थडे होने के एक हफ्ते बाद की बात है, सुहास शाम को ऑफिस से घर आया और गोलू को साईकल से खेलने के लिए बाहर ले गया। बाद में दोनों घर आये। गोलू ने खुद अपने हाथ पैर धोए और खुद ही होमवर्क करने को बैठ गया, मेरा खाना बनाने तक उसने होमवर्क खत्म किया और आश्यर्य की बात यह थी कि उसने अपने हाथ से खाना खाया।

शायद सुहास ने उसे कुछ देने का प्रोमिस किया था और उसके बदले अच्छा बच्चा बनने को बोला था।

सुहास भी फ्रेश होकर नाईट ड्रेस पहन कर डाइनिंग टेबल पर आ गया। हम खाना खा रहे थे तब भी गोलू हमारे पास ही घूम रहा था। सुहास के हाथ धोते ही गोलू उसे खींच कर सुहास के रूम में ले गया। मैं बर्तन साफ कर के टीवी देखने लगी।

वो दोनों भी बहुत देर हुए रूम से बाहर नहीं आये, तो मैंने रूम में झांककर देखा।

गोलू सुहास के बेड पर लेटा था और एक छोटी डिबिया को इयरफ़ोन जोड़कर गाने सुनते हुए बेड पर नाच रहा था। सुहास कुर्सी पर बैठ कर उसका नाच देख रहा था।

मेरे रूम में आते ही गोलू ने मुझे खींच कर अपने पास बैठा लिया- मम्मी सुनो न… मस्त गाना है!

उसने उसके कानों में से एक इयरफ़ोन निकालकर मेरे कानो में ठूँस दिया। उसमें अक्षय कुमार की फ़िल्म का गाना बड़े ज़ोरों से बज रहा था, मेरे तो कानों के परदे ही फट गए।

मैंने इयरफ़ोन अपने कानों में से निकाल दिया- अरे जरा कम आवाज में सुनो!

तो सुहास ने उसका आवाज को कम किया, गोलू ने फिर से हेडफोन मेरे कानों में डाला। अब सुरीली आवाज में गाना बज रहा था।

“सुहास बड़ी अच्छी आवाज है इसकी, क्या है यह?” मैंने पूछा।

“नीतू भाभी यह आई पोड है, आपको कोई मराठी गाना सुनना है क्या?” उसने तुरंत एक मराठी गाना लगाया।

मुझे आश्चर्य हो रहा था एक छोटी सी डिब्बी में बिना कोई भी सीडी के या पेन ड्राइव के बहुत सुरीले गाने बज रहे थे।

मराठी गाना सुनते ही गोलू ने अपने कां में लगा हुआ इयरफ़ोन भी मेरे कान में डाल दिया। पर वह ठीक से नहीं बैठा, मैं अभी भी गोलू के पास आधी बैठी आधी लेटी अवस्था में थी।

सुहास आगे होकर मेरा इयरफ़ोन ठीक करने लगा तभी मैं ठीक से बैठने लगी। इसी दौरान सुहास का हाथ वायर की जगह मेरे स्तन पर लगा। कुछ ही सेकंड की बात थी पर मेरा दिल जोर से धड़कने लगा।

सुहास ने दूसरे प्रयास में इयरफ़ोन ठीक किये पर कान में गाने नहीं तो सिर्फ मेरे धड़कन की आवाज सुनाई दे रही थी।

इयरफ़ोन कान में ठीक से बिठाने के बाद वायर सही करने के लिए उसका हाथ फिर से नीचे जाने लगा। दोनों वायर्स मेरे छाती पर से ऊपर गयी थी तो उसका हाथ फिर से मेरी छाती को छू गया, पर अब का स्पर्श कुछ सेकंड्स ज्यादा था, ऐसे मुझे लगा।

 
गोलू पास में ही था, वह नाचते हुए सुहास को बोला- चाचा, फिर से अच्छे वाले गाने लगाओ ना, मैं और मम्मी सुनेंगे.

कहकर उसने मेरे कान से एक इयरफ़ोन निकाल कर खुद के कान में डाल दिया। आईपोड मेरे पेट पर था, जब सुहास ने उसे उठाया तब उसका हाथ मेरे पेट से छू गया। मैक्सी के ऊपर से हुए उस स्पर्श से मेरे सारे बदन पर रोंगटे खड़े हो गए।

मैं आंखें बंद करके गाना सुन रही थी, सुहास बीच में ही गाने बदल रहा था। दो चार गाने सुनने के बाद देखा तो गोलू सो गया था। मैंने अपने कान से इयरफोन निकाला और गोलू के कान का भी निकाल दिया।

मैंने गोलू को बांहों में उठाया और सुहास को बोली- सुहास, मैं इसे सुलाकर फिर से आती हूँ गाने सुनने को!

बोलने के बाद मुझे ऐसा लगा कि ऐसा बोलने की बिल्कुल भी जरूरत नहीं थी।

‘मैं वापिस आ रही हूँ.’ सुनकर सुहास के चेहरे पर चमक आ गयी- भाभी, मेरे पास किशोर कुमार के गाने का बहुत बड़ा स्टॉक है.

किशोर कुमार के गाने मेरा वीक पॉइंट है यह उसे ध्यान में आया होगा।

अपने रूम में जाने में मैंने बहुत टाइम लिया। अभी तो सो गया था, पर मेरे मन में उथल पुथल हो रही थी। बहुत देर सोचने के बाद मैंने रूम की लाइट बंद की।

मैं जब वापिस सुहास के रूम के बाहर पहुंची तब मेरी सांस बड़ी तेजी से चल रही थी। वह कुर्सी पर बैठा पेपर पढ़ रहा था, पर उसका पूरा ध्यान दरवाजे पर ही था। मुझे देख कर उसके चेहरे पर स्माइल वापस आ गयी। मैं जब उसके रूम में गयी तब मेरा दिल ज़ोरों से धड़क रहा था।

“भाभी… आईये ना… आप बेड पर दीवार से पीठ टिकाकर बैठ जाइए।”

मुझे उसकी बात सुननी ही पड़ी क्योंकि उस रूम की इकलौती कुर्सी पर वह बैठा था। मैं दीवार पर तकिया लगाकर बैठ गई। मेरे आराम से बैठने पर उसने इयरफ़ोन एक एक कर के मेरे कानों में डाल दिया।

अब आईपोड मेरी जांघों के नीचे लटक रहा था। उसे सुहास ने अपने हाथों में पकड़ा तो उसका हाथ मेरे पेट के ऊपर आ गया। उसका हाथ मेरे पेट को छू तो नहीं रहा था पर इतना नजदीक था कि मेरे पूरे शरीर पर फिर से रोंगटे खड़े हो गए। मैं चेहरे पर कुछ भी भाव न दिखाते हुए आँखें बंद कर के गाना सुनने का नाटक कर रही थी। किशोर कुमार का ‘मेरे सामने वाली खिड़की में’ गाना लगा था पर कानों में कुछ भी नहीं जा रहा था।

फिर सुहास इयरफ़ोन की वायर ठीक करने लगा, वायर मेरी छाती पर थी तो वायर ठीक करते हुए उसका स्पर्श मेरे स्तन पर हुआ तो मुझे करंट सा लगा। पर मैंने ‘कुछ हुआ ही नहीं…’ ऐसा दिखाया, वायर पकड़कर नीचे आते हुए उसकी उंगलियाँ मेरे निप्पल्स से टकरा गई। उस स्पर्श से मेरा दिल ज़ोरों से धड़कने लगा, फिर भी मैं गाने सुनते हुए वैसे ही आंखें बंद रख कर पड़ी रही।

मुझे तो बिल्कुल विश्वास नहीं हो रहा था कि वह मेरे नाजुक अंगों को छू रहा है। पर उसके हौंसले पर मुझे आश्चर्य भी हो रहा था। आँखें बंद करके मैं सोच रही थी कि क्या सुहास और आगे भी बढ़ेगा या मुझे ही पहल करनी पड़ेगी?

पर इयरफ़ोन की ठीक से बैठी वायर भी वह जिस तरह से ठीक कर रहा था उसे देख कर मुझे यह लग रहा था कि जो मुझे चाहिए वह मुझे बिन मांगे मिलने वाला था।

मैं उसको बिल्कुल विरोध नहीं कर रही थी तो सुहास का डर कम हो रहा था। उसका हाथ मेरे कड़े हुए निप्पस को छेड़ रहा था। उसने अपने हाथ से मेरे स्तनों का नाप लेने की तैयारी शुरू कर दी। मुझे समझ में ना आये, इतना वह मेरे दोनों स्तन पर हाथ स्पर्श करने लगा।

 
सुहास इयरफ़ोन की वायर ठीक करने लगा, वायर मेरी छाती पर थी तो वायर ठीक करते हुए उसका स्पर्श मेरे स्तन पर हुआ तो मुझे करंट सा लगा। पर मैंने ‘कुछ हुआ ही नहीं…’ ऐसा दिखाया, वायर पकड़कर नीचे आते हुए उसकी उंगलियाँ मेरे निप्पल्स से टकरा गई। उस स्पर्श से मेरा दिल ज़ोरों से धड़कने लगा, फिर भी मैं गाने सुनते हुए वैसे ही आंखें बंद रख कर पड़ी रही।

मुझे तो बिल्कुल विश्वास नहीं हो रहा था कि वह मेरे नाजुक अंगों को छू रहा है। पर उसके हौंसले पर मुझे आश्चर्य भी हो रहा था। आँखें बंद करके मैं सोच रही थी कि क्या सुहास और आगे भी बढ़ेगा या मुझे ही पहल करनी पड़ेगी?

पर इयरफ़ोन की ठीक से बैठी वायर भी वह जिस तरह से ठीक कर रहा था उसे देख कर मुझे यह लग रहा था कि जो मुझे चाहिए वह मुझे बिन मांगे मिलने वाला था।

मैं उसको बिल्कुल विरोध नहीं कर रही थी तो सुहास का डर कम हो रहा था। उसका हाथ मेरे कड़े हुए निप्पस को छेड़ रहा था। उसने अपने हाथ से मेरे स्तनों का नाप लेने की तैयारी शुरू कर दी। मुझे समझ में ना आये, इतना वह मेरे दोनों स्तन पर हाथ स्पर्श करने लगा।

अब आगे:

बहुत देर से एक ही गाना बज रहा था तो ‘सुहास कोई दूसरा गाना बजाओ ना…’ मैं आँखें बिना खोले बोली। उसने आई पॉड अपने हाथ में लिया और अपना हाथ मेरे पेट पर रख दिया। उसने गाना बदलने में काफी समय लिया, उतनी देर से उसका हाथ मेरे पेट पर ही था। उसके हाथ के स्पर्श से मेरे पेट में भारी उथल पुथल हो रही थी, पर मैं शांत लेटी रही।

“सुहास तुम भी सुनो न गाना!“ वह मेरे बाईं तरफ बैठा था, अगर मैंने उसे मेरे बायें कान का इयरफ़ोन दिया तो उसे मेरे और नजदीक बैठना पड़ेगा, फिर भी मैंने उसे अपने बायें कान का ही इयरफ़ोन दिया।

सुहास अब कुर्सी से उठकर मेरे एकदम नजदीक बैठ गया। मुझे अब उसके बदन की खुशबू महसूस हो रही थी, मैं अभी भी आँखें बंद कर के बैठी थी। मैंने आँखें थोड़ी खोल कर उसकी तरफ देखा तो वो भी मेरे चेहरे की तरफ देख रहा था, शायद मेरे मन में क्या चल रहा है उसका अंदाज ले रहा था। वह मेरे बिल्कुल नजदीक बैठा था फिर भी उसका स्पर्श मुझे ना हो यह सावधानी ले रहा था। और फिर से वह इयरफ़ोन की उलझी वायर ठीक करने लगा।

उसने मेरे कान से वायर ठीक करना शुरु किया, मेरे कानों को छूते हुए उसने मेरे गाल को हल्के से छुआ तो मेरे बदन में बिजलियाँ दौड़ने लगी, उसे भी इस बात का अहसास होने लगा था। उसकी उंगलियां मेरे गर्दन को हल्के से छेड़ते हुए नीचे मेरे सीने जी तरफ जाने लगी। उसकी उंगलियाँ मेरी ब्रा और मैक्सी के होने के बावजूद मेरी उत्तेजना से फूले हुए मेरे निप्पलों को छेड़ते हुए मेरी गोलाई का नाप ले कर नीचे सरकने लगी, फिर ऊपर आकर मेरे ऐरोला पर घूमती हुई दूसरी गोलाई को मापने के लिए बढ़ी।

मेरे मुँह से ‘आहहह हहह…’ करके सिसकारी निकली। मेरी आँखें अभी भी बंद थी, मेरा दिमाग मुझे कोस रहा था, पर मेरा बदन बेशर्मों की तरह उस स्पर्श से खिल उठा था। मैंने उसकी मर्यादा तोड़ने पर कुछ भी रियेक्ट नहीं किया, उल्टा उसकी उंगलियां मेरे कौन कौन से अंगों को छुयेंगी, उसकी बेसब्री से राह देख रही थी।

बहुत देर अपनी उंगलियों से मेरे दोनों स्तनों को टटोलते हुए और अपनी उंगलियों से मेरे निप्पल्स को हल्के से मसलने के बाद उसका हाथ मेरे पेट की तरफ बढ़ा। मेरे पेट पर हाथ घुमाने से आईपॉड सरक कर मेरी जांघों पर चला गया, सुहास ने उसे अपने हाथों से हटाया और अपना हाथ मेरी जांघ पर रखा। उसके हाथों की गर्मी मैं मेरी जांघ पर मैक्सी के ऊपर से ही महसूस कर रही थी।

मेरे मुँह से फिर से एक सीत्कार निकली, मेरी निष्क्रियता को मेरी अनुमति समझकर वह मेरी जांघ पर नक्काशी बनाने लगा। वह धीरे धीरे मेरे करीब आने लगा, उसके होंठ मेरे गालों के बहुत करीब आ गए थे।
 
मैं अपने पैरों को मोड़ कर बैठी थी। उसने बहादुरी से मेरा एक पैर सीधा किया और नीचे कर दिया।

मैं अभी भी आँखें बंद कर के बैठी थी, ‘गाने में कहीं खोई हुई हूँ…’ ऐसा दिखा रही थी।

सुहास की हिम्मत बढ़ रही थी। मेरे मौन को मेरी सहमति मानकर उसने अपना हाथ मेरी टाँगों के बीच के त्रिकोण पर ले आया और मेरे प्रतिक्रिया की राह देखने लगा। मेरी तो उत्तेजना से होंठों से सिसकारी निकल गयी और मैंने अपने दोनों पैर सीधे कर दिए और फैला दिए।

फिर सुहास ने बिना डरे अपने हाथ से मेरी नाजुक चुत को भींच लिया और अपने उंगलियों से मेरी चुत के होंठों को टटोलने लगा। उसके उत्तर मैं मैंने अपने पैर थोड़े और फैला दिए और उसको मदद की, मैंने अभी भी अपनी आंखें बंद ही रखी थी।

वह कपड़ों के ऊपर से ही मेरी नाजुक चुत को मसल रहा था, थोड़ा और आगे बढ़ कर उसकी उंगलियां मेरे चुत के होंठों के बीच चुत के दाने को ढूंढने लगी। मेरे बदन की सबसे कामुक जगह पर हमला होते ही मेरे सब्र का बांध टूटा, मेरी आँखें खुल गयी और मुँह से जोर से सिसकारी निकली।

सुहास ने डरते हुए अपना हाथ मेरी चुत से निकाल लिया, पर जब उसने मेरी आंखों में देखा तो उसे मेरी आंखों में वासना ही नजर आयी और उसके हाथ हटाने से हुई नाराजगी भी।

उसने तुरंत ही अपने होंठ मेरे गालों पर रख दिये और अनगिनत छोटे छोटे चुम्बन करने लगा।

मुझे मेरी मैक्सी ऊपर सरकती महसूस हुई, सुहास मेरी मैक्सी को ऊपर खींच रहा था। पहले पैर फिर धीरे धीरे जांघें उसके सामने नंगी हो रही थी। मैंने शर्म से अपनी आंखें बंद कर दी। उसने अपना हाथ सीधे मेरी नंगी जांघों पर रखा तब मेरे सारे बदन पर बिजली दौड़ गई। मैंने मैक्सी के अंदर कोई पेटीकोट नहीं पहना था। सुहास ने अपना हाथ जांघों से मेरी चुत को ढकती हुई पतली सी पैंटी पर रखा और मेरी फूली हुई चुत की पंखुड़ियों को टटोलने लगा।

मैंने अपनी आँखें ज़ोरों से बंद की थी और मेरी साँसें भी ज़ोरों से चल रही थी। मेरी चुत पर घूम रही उसकी उँगलियों को जगह देने के लिए मैंने अपने पैर फैला दिए और अपनी बड़ी बड़ी जाँघों को अलग किया। सुहास ने प्यार से मेरी जांघों पर हाथ फिराया फिर अपनी उँगलियों को पैंटी के ऊपर से ही मेरी चुत की दरार पर ऊपर से नीचे थोड़ा सा दबाव दे कर घुमाने लगा।

उसकी उंगली अचानक से मेरी चुत के दाने को छू गयी तो मेरे मुख से फिर से सिसकारी निकली, मेरा बदन भी उनके कामुक स्पर्श को प्रतिक्रिया देने लगा, मैं भी अपने नितम्बों को उसकी उंगलियों के विपरीत दिशा में ऊपर नीचे हिलाने लगी।

सुहास ने बहुत देर तक मेरी चुत को उंगलियों से मसला, मेरी चुत अब गीली होने लगी थी, मुझे डर था कि सुहास को भी मेरी चुत के गीला होने का अहसास न हो जाये। पर तभी उसने मेरी पैंटी को उंगली से पकड़ कर चुत के साइड में कर दिया और बिना किसी आवरण के उंगलियों से मेरी चुत को मसलने लगा।

सुहास की उंगलियाँ धीरे धीरे मेरी गीली चुत के अंदर घुसने लगी, उसने अपनी सबसे लंबी उंगली चुत के अंदर बाहर करनी शुरू कर दी, अंदर बाहर करते वक्त वह अंगूठे से मेरी चुत के दाने से खेलता तो कामुक लहरें चुत से होते हुए मेरे सारे बदन में दौड़ती।

अचानक सुहास रुक गया- भाभी, एक मिनट!

उसके बोलने से मैंने आँखें खोली तो देखा कि सुहास उठ कर मेरी जांघों के बीच आ गया था, वो मैक्सी को मेरे पेट के ऊपर तक ले गया फिर मेरी आंखों में देख कर पैंटी के इलास्टिक को पकड़ा। मैंने फिर से शर्म के मारे आँखें बंद कर दी पर सहमति के लिए अपनी कमर उठा दी।

उसने मेरी पैंटी उतारने में बहुत समय लिया और धीरे से मेरी पैंटी को उतार दिया। मेरी चुत जो मेरे पति के सिवाय किसी ने नहीं देखी थी, आज पति के दोस्त के सामने नंगी हो गयी थी। वह आँखें फाड़ कर मेरी गुलाबी चुत और गोरी जांघों को देख रहा था। चुत की दरार के ऊपर छोटे छोटे बाल थे जो बड़े ही आकर्षक लग रहे थे।
 
जब मैं कामुक हो जाती हूँ, तब मेरी चुत की पंखुड़ियाँ अपने आप खुल जाती हैं और अंदर की गुलाबी चमड़ी दिखने लगती है। उस वक्त भी यही हुआ था, मेरी चुत से पानी का रिसाव शुरू हो गया था और पानी की बूंदें मेरी चुत पर चमक रही थी। उसने बहुत देर तक मेरी चुत का आँखों से रसपान किया फिर मेरी टांगें और खोल दी।

मैंने आँखों को थोड़ा सा खोलकर सुहास की तरफ देखा तो उसका पूरा ध्यान मेरी टांगों के बीच में ही था। वह सम्मोहित होकर नीचे झुकने लगा और उसने अपने होंठ मेरी चुत के होंठों पर रख दिये।

मेरा पूरा बदन थरथरा उठा, मेरे उन होंठों को पहली बार किसी ने चूमा था। नितिन ने कभी कभार गलती से मेरी चुत को छुआ होगा… चूमना तो दूर की बात थी।

सुहास ने ऊपर मेरी तरफ देखा तो वह पूरा उत्तेजित हो गया था, उसके साँवले चहरे पर एक अजीब तेज दिखने लगा था। वह फिर अपने होंठ मेरी मुलायम जांघों के बीच ले गया और वहाँ पर अपनी जीभ से चाटने लगा। मेरी जांघों को और अलग करते हुए उसने अपनी उंगलियों से मेरी चुत की पंखुड़ियों को अलग किया और अपनी जीभ अंदर डाल दी, उसकी जीभ मेरी उत्तेजित दाने से जा टकरा गई।

मैंने अपने हाथों से अपने मुँह को ढका फिर भी मेरे मुख से ज़ोरों से सिसकारी निकली, मैंने अपनी जांघें चौड़ी करके कमर को थोड़ा उठा लिया जिससे उसको चूसने में आसानी हो वह बड़े मजे से मेरी चुत को चूसने लगा था। मैंने मेरी सिसकारियाँ दबाने के लिए हाथ अपने मुँह पर रखा था पर अपना ओर्गेज्म को दबाए रखना मेरे लिए मुश्किल हो रहा था।

सुहास ने अब जीभ से मेरे दाने को चूसते हुए एक उंगली मेरी चुत में डाल दी, उसकी उंगली डायरेक्टली मेरी जी स्पॉट को टकराने लगी। मैंने बेडशीट को अपनी मुट्ठी में पकड़ा और अपनी कमर को हवा उठाते हुए सिसकारियाँ लेते हुए जोर से झड़ने लगी।

न जाने कितनी देर मैं झड़ती रही जब होश आया तो मैंने आँखें खोली।

सुहास बेड से नीचे उतरा हुआ था और अपनी टीशर्ट और नाईट पैंट उतार रहा था। मेरे पलक झपकने से पहले उसने अपने कपड़े उतार दिये और मेरे सामने सिर्फ अंडरवियर में खड़ा हो गया। फिर वह मेरे एकदम करीब आ कर खड़ा हो गया, उसके अंडरविअर के अंदर तम्बू बना हुआ था और मेरे हाथ से आधे इंच दूरी पर था।

मुझसे रहा नहीं गया और मैंने उसके तम्बू के अंदर के डंडे को पकड़ लिया। उस पर हाथ घुमाते हुए मैंने उसकी लंबाई और मोटाई को नापा, फिर सोई हुई अवस्था में ही मैंने अपनी उंगलियाँ उसके अंडरवियर की इलास्टिक में डाल दी और उसे नीचे खींचने लगी।

अंडरवियर थोड़ी नीचे हुई, फिर बाकी बची उसने अपने आप ही निकाली और मेरे सामने नंगा हो गया।

मेरी नजर उसके उत्तेजित चेहरे से होते हुए उसके बालों से भरे सीने पर गयी फिर नीचे उसकी जाँघों के बीच डोलते मूसल पर गयी। मेरे लिए वह एक अद्भुत दृश्य था, पहली बार मैं अपने पति का छोड़ कर किसी और का लंड देख रही थी। बालों के बीच खड़े उस बड़े से लंड को देख कर मुझसे रहा नहीं गया और मैंने उसे अपने हाथों में पकड़ लिया, उसकी लंबाई और चौड़ाई मेरे पति से काफी ज्यादा थी।

सुहास मेरे नजदीक आकर लेट गया, मैंने उठकर अपने दोनों हाथों से उसके लंड को पकड़ा। उसका लंड मेरे हाथों में नहीं समा रहा था।

थोड़ी देर उसकी मुठ मार कर देने के बाद मैंने झुककर उसके सुपारे को चूम लिया। उत्तेजना में उसने मुझे अपने करीब खींच लिया और उसका लंड बिल्कुल मेरे मुँह के नजदीक आ गया। मैंने उसके सुपारे के ऊपर की चमड़ी को नीचे किया फिर नीचे जाकर उसकी गंध को सूँघा फिर उसके पूरे सुपारे को चूमकर अपने नाजुक होंठों में पकड़ लिया।
 
मैं अपने हाथ बालों के जंगल में छुपे उसके बॉल्स पर ले गयी और उनको हाथों में पकड़ कर हल्के से दबाने लगी। उसके नींबू जैसे बड़े सुपारे को मैं जुबान से चाटने लगी। फिर उसे मुँह से बाहर निकाल लिया और उसके पैर फैलाते हुए सुपारे की जड़ से बॉल्स तक उसके लंड को चूमने चाटने लगी।

मेरी मैक्सी मेरे पेट तक उठी हुई थी पर मेरी मेरी छाती पर ठीक से बैठी थी। मैक्सी के अंदर ब्रा भी पहनी हुई थी। सुहास ने मैक्सी को और ऊपर ले जाते हुए उसके अंदर हाथ डाला और ब्रा के ऊपर से मेरे स्तन मसलने लगा। धीरे धीरे से स्तन दबाते हुए वह मेरे फूले हुए निप्पल्स को उँगलियों में पकड़ कर मसलने लगा।

थोड़ी देर लंड चूसने के बाद मैंने सुहास को रोका और अपने हाथ पीछे ले जाते हुए अपनी ब्रा का हुक खोल दिया। सुहास को इतना इशारा काफी था, उसने झट से ढीली हुई मेरी ब्रा को और मेरी मैक्सी को ऊपर से उतारते हुए मुझे पूरी नंगी कर दिया, मेरे नाजुक स्तन उसके सामने नंगे हो गए।

उसने मुझे नीचे लिटाया और मेरी गर्दन और स्तनों को चूमने लगा। मैंने अपनी आंखें बंद कर ली अपनी गर्दन को इधर उधर घूमते हुए मैं अपने स्तनों पर सुहास के होंठों का और जीभ के स्पर्श का आनंद लेने लगी।

उसकी जीभ का स्पर्श होते ही मेरे निप्पल्स गुलाब की कली की तरह खिल उठे।

उसने मेरे निप्पलों पर हमला कर दिया, मेरे स्तन उत्तेजना से फूल गए थे, निप्पल भी एक इंच बाहर निकल आये थे। सुहास मेरे निप्पल को चूस रहा था, जितना हो सके उतना स्तन मुँह में लेकर उसे चूसने लगा।

अपने दोस्त की बीवी के स्तन और निप्पलों को जी भर के चूसने के बाद वह मेरे पेट की तरफ बढ़ा स्तनों से नीचे चूमते हुए वो मेरी नाभि तक आ गया।

वह अपनी जीभ को नाभि के छेद में डालकर गोल गोल घुमाने लगा तो मैं उत्तेजना में अपनी कमर को उठाने लगी। उत्तेजना में मेरी गांड ऊपर नीचे होती देख वह और भी जोश में आ गया। उसने मेरी कमर के नीचे तकिया डाल दिया। अब मेरी चुत ऊपर उठ गई थी उसकी जरूरत के मुताबिक़… ज्यादा वक्त न गंवाते हुए वह मेरे चुत की पंखुड़ियों को प्यार से चूमने चाटने लगा।

मेरी चुत चूसना जारी रखते हुए वह घूमा और उसका विशाल लंड और लंड की तरह बालों के जंगल में छुपे विशाल बॉल्स मेरे मुंह के सामने ले आया। उसका लंड देख कर चुत की तरह मेरे मुँह में भी पानी आ गया।

वह अपनी जीभ मेरे चुत के अंदर तक डाल कर चूस रहा था। उसके जीभ का खुरदरा स्पर्श मुझे और पागल कर रहा था। मैं अपनी कमर उठाकर उसको और अंदर लेने की कोशिश करने लगी। उसे और प्रोत्साहित करने के लिए मैं अपने हाथ से उसकी बॉल्स की मालिश करने लगी, मालिश करते वक्त उसका लंड मेरे चेहरे पर टकरा रहा था।

वह थोड़ा और नीचे हो गया तो उसका लंड बराबर मेरे मुँह के सामने आ गया, उसको क्या चाहिए यह मुझे समझ में आ गया। मैंने उसके काले मूसल को अपने हाथ से पकड़ा और अपने मुँह में डाल दिया।

वह मेरी चुत को चूस रहा था और मैं उसका लंड चूस रही थी।

वह अपनी कमर हिलाते हुए मेरे मुँह को चोदने की कोशिश करने लगा। यह मैं मेरी जिंदगी में पहली बार महसूस कर रही थी। उसने फिर से अपनी उंगली को मेरी चुत में घुसा दिया और मेरे जी स्पॉट को ढूंढ कर उसे छेड़ने लगा। उसी टाइम उसकी जीभ मेरे दाने को चूस रही थी।

मेरे अंदर फिर से एक तूफान बनने लगा। मेरे आँखों के सामने तारे चमकने लगे। एक के बाद एक आती हुई कामुक लहरों पे सवार मैं अपने ओर्गेज्म तक पहुंच रही थी। मैं उसका लंड जितना हो सके उतना मुख में लेकर चूस ही रही थी कि मेरा बदन अकड़ने लगा और मैं झड़ने लगी, उसकी तीव्रता इतनी ज्यादा थी कि मुझे चक्कर आ गए और मैं अपनी सुध खो बैठी।

जब मुझे होश आया तब मैंने आँखें खोली। सुहास मेरी एक तरफ करवट लेकर अपने हाथ को मोड़ कर उसपर अपना सिर रखे मुझे देख रहा था। मैंने उसे धक्का दे कर पलंग पर लिटाया और उसके ऊपर आ गयी। आजकल सुख पाने के लिए मैं अपने पति के साथ भी ऐसे ही करती थी। मैं अपनी जांघें उसके जांघों के ऊपर ले आयी तो उसका लंड मेरी चुत के नीचे आ गया।
 
मैंने उसके लंड को हाथों में पकड़ा और उसको अपनी फूली हुई चुत की पंखुड़ियों पर लगा दिया। फिर उसके लंड को अपनी दरार पर पूरा घुमाते हुए मेरी चुत के छेद पर लगा दिया। मेरी चुत कामरस से उसके चूसने से पूरी गीली हो गयी थी तो उसका लंड भी मेरी चुसाई की वजह से गीला था। फिर भी चुत के अंदर जाते समय टाइट जा रहा था।

सुहास को मेरी तकलीफ समझ में आई और उसने भी नीचे से धक्के लगाते हुए धीरे धीरे उसका पूरा मूसल मेरी बच्चेदानी तक घुसा दिया। जैसे जैसे उसका विशाल लंड चुत के अंदर बाहर जो रहा था वैसे वैसे दर्द और उत्तेजना का अहसास जो रहा था। मेरे मुँह से अजीब अजीब आवाजें उम्म्ह… अहह… हय… याह… निकालनी शुरू गयी थी।

जब मैंने थक कर ऊपर नीचे होना बंद किया तो तुरंत सुहास ने नीचे से धक्के लगाने शुरू कर दिए। एक हाथ से उसने मेरे स्तन को पकड़ कर अपने मुँह में डाल दिया तो दूसरे हाथ से मेरी चुत के दाने को छेड़ने लगा।

अचानक ही वो पलट कर मेरे ऊपर आ गया, उसके धक्के अब पहले से तेज होने लगे। हर धक्के के साथ मेरे अंदर भी वासना का तूफान बनने लगा था। वह राजधानी एक्सप्रेस की तरह धक्के देने लगा, थोड़ी देर उसी स्पीड में चोदने के बाद उसका शरीर भी अकड़ गया और गरम वीर्य के धार मेरी अंदर छोड़ दी। वह पूरा लंड चुत की गहराई में डाल कर मेरी बच्चेदानी को अपने वीर्य से भिगो रहा था।

उसकी गर्मी से मेरा भी बांध टूट गया और उसके बाद उठती हर लहरों के साथ मैं पूरी बह गई।

दोस्तो, मेरी हिंदी सेक्स कहानी कैसी लगी?

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