मेरे पूरे बदन मे सुरसुरी ही होने लगी....मैने बेल बजाई.
दो बार और बजाने पर दरवाजा खुला और हाथ मे थाली लिए चाची दिखी.
ये थाली का क्या लोचा है भेन्चोद ?
चाची बोली, “राम....अच्छा हुआ तू आ गया.....जा ये थाली सामने शर्मा जी के यहाँ लेजा.....इसमे बाबाजी का खाना है"
बाबाजी....?
अच्छा वो बाबाजी.....चाची ने कहा था.
मैं शर्मा जी के यहा गया. दरवाजा खुला था.....
पहले कमरे मे 7-8 औरते बैठी थी....मैने आवाज़ लगाई..
“लता आंटी.....? “ ( शर्मा आंटी का नाम लता था.”
आंटी एक कमरे से बाहर निकली और मेरे हाथ मे थाली देख कर बोली, “अरे वाह....ले आया खाना....वाह...वाह.....ला....दे.....अब तो अनिता (नीलू चाची) की मुराद ज़रूर पूरी होगी....ला बेटा ला.....अच्छा सुन.....अनिता को याद दिला देना....उपवास का......और परहेज का.....”
उपवास ....? परहेज.....?
क्या चुतियाई है ?
मैं घर पहुँचा...चाची बाहर ही खड़ी थी.....
“दे आया.....वाह....लल्ला......ला दे....यह थाली मुझे दे दे....”
मुझे याद आया की शर्मा आंटी ने कुछ कहा था....
“चाची.....वो शर्मा आंटी ने कहा था.....की...उपवास और.....वो....हा....परहेज पूरा रखना “
चाची मुस्कुरई और बोली, “हन....रे.....रखूँगी रे.......गोद भर जाए बस...”
अच्छा तो यह लोचा है.....बाबाजी ने नया नुस्ख़ा दिया है. चलो बढ़िया है..
मगर मुझे तो चाची से कुछ काम था ना....
चाची किचन मे गयी और सींक मे थाली धोने लगी, मैं धीरे से उनके पीछे गया और अपने बाबूराव उनकी गांड पर चिपका कर आगे झुक कर पानी का ग्लास उठाने लगा. चाची एक दम से चिहुकि और अलग हट गयी, मैने पानी पिया और ग्लास रखने के लिए आगे बढ़ते हुए फिर से बाबूराव को चाची की गांड पर चिपका दिया...
“लल्ला......”, चाची चिल्लई.
मैने अपने हाथ चाची की कमर मे डालने की कोशिश की.
चाची फिर ज़ोर से चिल्लई, “अरे हट परे.......”
इसकी मा की चूत....
चाची हमको ही छका रही थी....
वही पुराना चूहे बिल्ली का खेल
मगर आज तो हम बिल्ली मारिबे
सालीयूँ इतनी गरम है की हाथ लगाओ तो कसमसने लगती है .....
सीन क्या है ?
चाची पीछे मूडी, उनका चेहरा बिल्कुल तमतमाया हुआ था....
मैने हाथ आगे बढ़ाया.,
चाची फिर बोली, “न..न...न.....नही.....मत कर हरामी.......”
फटफटी ......धीरे....धीरे.....चली.....रे.......
“क....क.....क.....क्या हुआ चाची......”
“मैने मना किया ना....अरे तेरी मोटी बुदधि मे कुछ आता नही है क्या रे.....अरे बाबाजी ने परहेज रखने को कहा है......नासपीटे ...उपवास तुडा देगा तू.......”
“हैं..... क…क…..क्या….?”