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'हलो केसरी?'
'कौन? मेयर साहब।'
'आज सुबह का अखबार देखा?'
'इस जंगल में इतनी सुबह अखबार कहां?'
'कल की तुम्हारी प्रेस कांफ्रेस की रिपोर्ट छपी है। तो मुझे जरा कर्तव्य निष्ठ फारेस्ट आफिसर को निहित स्वार्थ सम्पन्न' लोगों द्वारा धमनियां, वन जनता की सम्पत्ति है और फारेस्ट आफिसर जनता की उस सम्पत्ति का रखवाला है, लेकिन शहर के कुछ प्रभावशाली लोग जो कि बास्तब में थमता की इस सम्पत्ति के लुटेरे हैं, इस कर्तव्यनिष्ठ फारेस्ट आफिसर को अपनी लूट चालू रखने के लिए तरह-तरह की धमकियां दे रहे हैं, लेकिन फारस्ट आफिसर उन लुटेरों के सामने झुकने के लिए कतई तैयार नहीं है त्रौर इस मामले में वह जनता के महयोग की प्रार्थना करना है। इसी सिलसिले में वह शहर की जनता वो प्रतिनिधि मेजर थी गिरीश चन्द्र शर्मा से भी मिला। श्री शर्मा ने फारेस्ट आफिसर को हर सम्भव सहायता देने का वचन दिया है कि उन लुटेरों के विरुद्ध शहर की जनता हर तरह का सहयोग देने के लिए तैयौर है। नवगठित वन रक्षा समिति ने आज शहर में एक व्यापक जलूस निकालने का निश्चय किया है। ताकि उन सफेद पोश लटेरो को शान्ति पूर्ण प्रदर्शन से समझाया जा सके कि अगर उन्होंने अपनी नीचतापूर्ण हरकतें बन्द नहीं की तो जनता उसे सबक सिखाने के लिए और कड़े कदम उठाने से नही हिचकेगी, कहो सब अभियान ठीक है ना?'
'लेकिन इसमें कालिया का तो कही कोई जिक्र नहीं है?'
'इतनी जल्दी नहीं। अभी देखते हैं कि इस सबका क्या असर पड़ता है और वह पलटकर क्या कार्यवाही करता है। उसके बाद धीरे-धीरे कालिया और उसके सहयोगियों का पर्दापाश किया जाएगा।'
'लेकिन वे अभी अपने हरकतों से बाज तो नहीं आ रहे। कल रात भी उसके आदमियों ने हमला किया था।'
'अच्छा कितने आदमी थे?'
'अन्धेरे में गिन तो नहीं सका लेकिन दस-बारह आदमी तो थे।'
'अरे रे रे 'जरा खुलकर बताओ क्या हुआ था।'
केसरी ने सारा किस्सा सुनाया। 'ज्यादा चोट तो नहीं आई?'
'जी नहीं। सिर में मामूली सा जख्म है और कनपटी पर थोड़ी सूजन।' 'खैर तुमने और तुम्हारे बहन ने काफी हिम्मत दिखाई।
शाबासी है तुम्हें। तुम्हें। लेकिन वह दूसरा आदमी कौन था?'
'मालूम नहीं सर।' वह बोला-'दरअसल सिर पर चोट लगने की वजह से मैं बेहोश हो गया था। हो सकता हैं कि जंगल का ही कोई मजदूर हो जो इतने आदमियों से अकेले लड़ते देख कर मदद के लिए आ गया हो।'
"उसका पता करो भाई। ऐसे बहादुर मजदूरों को तो तुम्हें अपने साथ रखना चाहिए। चार-रांच आदमी भी अगर ऐसे मिल गए तो कालिया की याधी हिम्मत तो वैसे ही टूट जाएगी। और हां इस घटना की रिपोर्ट पुलिस में जरूर कराना। या ठहरो मैं खुद ही पुलिस कमिश्नर से बात करके तुम्हारी सुरक्षा का प्रबन्ध करवाता हूं।'
फोन रखकर वह उठा। चोटें जरूर चसक रही थी। लेकिन वैसे वह अपने आपको स्वस्थ्य ही महसूस कर रहा था।
साधना से उस अजनबी के बारे में पूछा। उसने जो हुलिया वताया वह जगतार से मिलता था। निश्चित रूप से जगनार ही होगा। उसे ही तो उसने कल काम पर से हटाया था कालिया का आदमी समझ कर।
'अगर वह ऐन वक्त पर सहायता के लिए न आ जाता तो इतने बदमाशों को सम्हालना मुश्किल हो जाता हमारे लिए।'
'इसीलिए तो कह रहा हूं दीदी कि जब तक यह किस्सा न निबटे तुम शहर चली जाओगी।'
'नहीं।' हठपूर्वक बोली साधना।
'आखिर तुम समझती क्यों नहीं...'
'हर बात समझ सकती हूं लेकिन अन्याय के आगे मे हट जाना नहीं समझ सकती और आगे से यह मुझे सममाने की कोशिश भी मत करना।'
"लेकिन दीदी।'
'तुम जानते हो केशो कि मैं अन्याय का मुकाबला करते-करते मर जाना तो पसन्द करूंगी लेकिन उसके सामने सिर प्रका कर हट जाना नहीं।'
कहकर साधना रसोईघर में घुस गई। उसने असहाय भाव से आने कन्धों के। झटका दिया।
तैयार होकर काम पर जाने के लिए निकला ही था कि तभी अधेड़ सुपरवाईनर आ गया। हाथ में अखबार लिए हुए।
'आपने तो सर कमाल कर दिया। इस सारे मामले को अखबार में उछाल दिया।'
'हां मेयर साहब से मिला था। उनसे बातचीत करके इसी नतीजे पर पहुंचा कि कालिया जैसे लुटेरों का मुकाबला करने के लिए जनचेतना जगानी जरूरी है। आपका क्या ख्याल है कि इस सबका कुछ प्रभाव पड़ेगा जनता पर।'
'प्रभाव तो निश्चित रूप से पड़ेगा सर। अखवार में पढ़कर ही आज मेरे मुहल्ले के चार पांच आदमी मेरे पास आए और पूछने लगे कि जंगल में ऐसी कौन सी सम्पत्ति होती हुऐ जिसके लुटने का खतरा है। जब मैंने उन्हें बताया तो बोले कि उन्हें तो आज तक यह सब कुछ मालूम ही नहीं था। एक ने तो साफ मेरे मुंह पर कह दिया कि उसे यह तो मालूम था कि मैं जंगल विभाग में नौकरी करता हूं लेकिन वह अब तक यही समझता था कि सरसर ने फालतू का खर्चा पाल रखा है। यह तो उसे आज मालूम हुआ कि मेरा काम भी अन्य लोगो जैसा महत्व का काम है। सो यह तो जाहिर हो ही गया कि लोगों मे चेतना तो जाग रही है।'
इसका मतलब है जनचेतना जागनी तो शुरू हो गई। मेयर साहब ने जो लाईन बाफ एक्शन चुनी वह ठीक ही है। अब शहर जाकर कल रात की घटना की पुलिस मे रिपोर्ट लिखा आए। लेकिन मेयर साहब ने मना करा है। पहले पुलिस कमिश्नर से बात करेंगे। ठीक है माथे की पट्टी तो करवा आए।'
'कौन? मेयर साहब।'
'आज सुबह का अखबार देखा?'
'इस जंगल में इतनी सुबह अखबार कहां?'
'कल की तुम्हारी प्रेस कांफ्रेस की रिपोर्ट छपी है। तो मुझे जरा कर्तव्य निष्ठ फारेस्ट आफिसर को निहित स्वार्थ सम्पन्न' लोगों द्वारा धमनियां, वन जनता की सम्पत्ति है और फारेस्ट आफिसर जनता की उस सम्पत्ति का रखवाला है, लेकिन शहर के कुछ प्रभावशाली लोग जो कि बास्तब में थमता की इस सम्पत्ति के लुटेरे हैं, इस कर्तव्यनिष्ठ फारेस्ट आफिसर को अपनी लूट चालू रखने के लिए तरह-तरह की धमकियां दे रहे हैं, लेकिन फारस्ट आफिसर उन लुटेरों के सामने झुकने के लिए कतई तैयार नहीं है त्रौर इस मामले में वह जनता के महयोग की प्रार्थना करना है। इसी सिलसिले में वह शहर की जनता वो प्रतिनिधि मेजर थी गिरीश चन्द्र शर्मा से भी मिला। श्री शर्मा ने फारेस्ट आफिसर को हर सम्भव सहायता देने का वचन दिया है कि उन लुटेरों के विरुद्ध शहर की जनता हर तरह का सहयोग देने के लिए तैयौर है। नवगठित वन रक्षा समिति ने आज शहर में एक व्यापक जलूस निकालने का निश्चय किया है। ताकि उन सफेद पोश लटेरो को शान्ति पूर्ण प्रदर्शन से समझाया जा सके कि अगर उन्होंने अपनी नीचतापूर्ण हरकतें बन्द नहीं की तो जनता उसे सबक सिखाने के लिए और कड़े कदम उठाने से नही हिचकेगी, कहो सब अभियान ठीक है ना?'
'लेकिन इसमें कालिया का तो कही कोई जिक्र नहीं है?'
'इतनी जल्दी नहीं। अभी देखते हैं कि इस सबका क्या असर पड़ता है और वह पलटकर क्या कार्यवाही करता है। उसके बाद धीरे-धीरे कालिया और उसके सहयोगियों का पर्दापाश किया जाएगा।'
'लेकिन वे अभी अपने हरकतों से बाज तो नहीं आ रहे। कल रात भी उसके आदमियों ने हमला किया था।'
'अच्छा कितने आदमी थे?'
'अन्धेरे में गिन तो नहीं सका लेकिन दस-बारह आदमी तो थे।'
'अरे रे रे 'जरा खुलकर बताओ क्या हुआ था।'
केसरी ने सारा किस्सा सुनाया। 'ज्यादा चोट तो नहीं आई?'
'जी नहीं। सिर में मामूली सा जख्म है और कनपटी पर थोड़ी सूजन।' 'खैर तुमने और तुम्हारे बहन ने काफी हिम्मत दिखाई।
शाबासी है तुम्हें। तुम्हें। लेकिन वह दूसरा आदमी कौन था?'
'मालूम नहीं सर।' वह बोला-'दरअसल सिर पर चोट लगने की वजह से मैं बेहोश हो गया था। हो सकता हैं कि जंगल का ही कोई मजदूर हो जो इतने आदमियों से अकेले लड़ते देख कर मदद के लिए आ गया हो।'
"उसका पता करो भाई। ऐसे बहादुर मजदूरों को तो तुम्हें अपने साथ रखना चाहिए। चार-रांच आदमी भी अगर ऐसे मिल गए तो कालिया की याधी हिम्मत तो वैसे ही टूट जाएगी। और हां इस घटना की रिपोर्ट पुलिस में जरूर कराना। या ठहरो मैं खुद ही पुलिस कमिश्नर से बात करके तुम्हारी सुरक्षा का प्रबन्ध करवाता हूं।'
फोन रखकर वह उठा। चोटें जरूर चसक रही थी। लेकिन वैसे वह अपने आपको स्वस्थ्य ही महसूस कर रहा था।
साधना से उस अजनबी के बारे में पूछा। उसने जो हुलिया वताया वह जगतार से मिलता था। निश्चित रूप से जगनार ही होगा। उसे ही तो उसने कल काम पर से हटाया था कालिया का आदमी समझ कर।
'अगर वह ऐन वक्त पर सहायता के लिए न आ जाता तो इतने बदमाशों को सम्हालना मुश्किल हो जाता हमारे लिए।'
'इसीलिए तो कह रहा हूं दीदी कि जब तक यह किस्सा न निबटे तुम शहर चली जाओगी।'
'नहीं।' हठपूर्वक बोली साधना।
'आखिर तुम समझती क्यों नहीं...'
'हर बात समझ सकती हूं लेकिन अन्याय के आगे मे हट जाना नहीं समझ सकती और आगे से यह मुझे सममाने की कोशिश भी मत करना।'
"लेकिन दीदी।'
'तुम जानते हो केशो कि मैं अन्याय का मुकाबला करते-करते मर जाना तो पसन्द करूंगी लेकिन उसके सामने सिर प्रका कर हट जाना नहीं।'
कहकर साधना रसोईघर में घुस गई। उसने असहाय भाव से आने कन्धों के। झटका दिया।
तैयार होकर काम पर जाने के लिए निकला ही था कि तभी अधेड़ सुपरवाईनर आ गया। हाथ में अखबार लिए हुए।
'आपने तो सर कमाल कर दिया। इस सारे मामले को अखबार में उछाल दिया।'
'हां मेयर साहब से मिला था। उनसे बातचीत करके इसी नतीजे पर पहुंचा कि कालिया जैसे लुटेरों का मुकाबला करने के लिए जनचेतना जगानी जरूरी है। आपका क्या ख्याल है कि इस सबका कुछ प्रभाव पड़ेगा जनता पर।'
'प्रभाव तो निश्चित रूप से पड़ेगा सर। अखवार में पढ़कर ही आज मेरे मुहल्ले के चार पांच आदमी मेरे पास आए और पूछने लगे कि जंगल में ऐसी कौन सी सम्पत्ति होती हुऐ जिसके लुटने का खतरा है। जब मैंने उन्हें बताया तो बोले कि उन्हें तो आज तक यह सब कुछ मालूम ही नहीं था। एक ने तो साफ मेरे मुंह पर कह दिया कि उसे यह तो मालूम था कि मैं जंगल विभाग में नौकरी करता हूं लेकिन वह अब तक यही समझता था कि सरसर ने फालतू का खर्चा पाल रखा है। यह तो उसे आज मालूम हुआ कि मेरा काम भी अन्य लोगो जैसा महत्व का काम है। सो यह तो जाहिर हो ही गया कि लोगों मे चेतना तो जाग रही है।'
इसका मतलब है जनचेतना जागनी तो शुरू हो गई। मेयर साहब ने जो लाईन बाफ एक्शन चुनी वह ठीक ही है। अब शहर जाकर कल रात की घटना की पुलिस मे रिपोर्ट लिखा आए। लेकिन मेयर साहब ने मना करा है। पहले पुलिस कमिश्नर से बात करेंगे। ठीक है माथे की पट्टी तो करवा आए।'