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Guest
आयशा भाभी- अच्छा. तुझे तो बहुत जल्दी है हर बात जान-ने की. पहले तुम अपनी बात बताओगि उसके बाद ही मैं तुझे अपनी बातें बताऊंगी.
मैं- मुझे कोई शौक नही है आपकी बात सुन-ने का और अपनी बात बताने का. आप अपने पास ही रखिए.
अभी हम बात कर ही रहे थे की अम्मी किचन मे आ गयी. जिसके कारण हमे शांत होना पड़ा. अम्मी ने आकर फ्रिज से एक बोतल पानी लिया और बाहर चली गयी. उनके जाते ही आयशा भाभी ने फिर से बोलना शुरू कर दिया.
आयशा भाभी- बता ना शाजिया क्या क्या हुआ तुम दोनो के बीच.
मैं- क्या भाभी आप भी. यहाँ अब्बू बिस्तर पर पड़े हुए हैं और आपको मस्ती सूझ रही है. जाओ मैं नही बताती कुच्छ भी.
आयशा भाभी- ठीक है. फिर मुझसे बात मत करना अब तुम.
उसके बाद हम दोनो मे कोई बातचीत नही हुई. आयशा भाभी ने चुपचाप रोटी बनाना शुरू कर दिया. मैं भी किचन मे ही खड़ी रही, लेकिन उन्होने पूरी रोटी बनाने के दौरान एक शब्द भी मुझसे नही बोला. मुझे लगा शायद मैने अच्छा नहीं किया. भाभी को बिना मतलब नाराज़ कर दिया. मैने भाभी से कहा.
मैं- आयशा भाभी. भाभी.
लेकिन भाभी कुच्छ नही बोली. भाभी वाकई मुझसे नाराज़ हो गयी थी. मैं सोचने लगी की बाय्फ्रेंड गर्लफ्रेंड साथ मे अकेले क्या करते हैं ये सभी को पता रहता है. ये भाभी को भी पता है. तो अगर उन्होने पूछ ही लिया तो क्या बुरा कर दिया उन्होने. मुझे ऐसा नही करना चाहतिए था भाभी के साथ. मैने फिर से भाभी को आवाज़ लगाई.
मैं- भाभी. भाभी. क्या आप नाराज़ हैं मुझसे.
भाभी ने मेरी बात का कोई जवाब नही दिया. अब तक खाना बन गया तो हबीबा भाभी ने मुझसे कहा.
हबीबा भाभी- शाजिया जा अम्मी को बोल दे की खाना रेडी हो गया है. लगाऊ अभी या कुच्छ देर मे.
हबीबा भाभी की बात सुनकर मैं अम्मी अब्बू के कमरे मे गयी और उनसे खाने के लिए पूछा. अम्मी अब्बू के हाँ कहने पर मैं किचन मे गयी और हबीबा भाभी से कहा.
मैं- हबीबा भाभी. खाना लगा दीजिए. अम्मी आ रही हैं खाना लेने के लिए.
मेरी अम्मी भले ही अधिकतर घर से बाहर रहती थी, लेकिन जब भी घर मे रहती. अब्बू की अधिक से अधिक सेवा करती थी. थोड़ी देर बाद अम्मी किचन मे आ गयी और दो थाली खाना लेकर किचन से जाते हुए बोली.
अम्मी- अब तुम लोग भी खाना खा लो.
अम्मी के जाने के बाद मैने आयशा भाभी का हाथ पकड़ लिया और उनसे कहा.
मैं- मुझे माफ़ कर दो भाभी. मैं आपका दिल नही दुखाना चाहती थी. आप मुझसे नाराज़ मत होइए.
मेरी बात सुनकर आयशा भाभी मुस्कुरा पड़ी और बोली.
आयशा भाभी- अब आई ना लाइन पर. अरे मैं तुझसे नाराज़ थोड़ी ना हूँ. मैं तो बस नाटक कर रही थी.
मैने आयशा भाभी को गले से लगा लिया. फिर हम तीनो ने मिलकर खाना खाया. दोनो भाभी बर्तन और किचन साफ करने लगी तो मैं दो ग्लास दूध लेकर अब्बू के कमरे मे चली गयी और उन्हे दूध दिया. फिर वापस आकर एक जाग पानी ले जाकर अब्बू के कमरे मे रखा और कुच्छ देर वहाँ बैठने के बाद अपने कमरे मे सोन एके लिए चली गयी. दोनो भाभी भी साफ सफाई के बाद अपने कमरे मे चली गयी. मैं बिस्तर पर लेटकर सो गयी. सोने के लगभग 1 अवर्स बाद मेरी आँख खुली तो मैं बाथरूम जाने के लिए उठी.
बाथरूम करने के बाद मैं अपने कमरे मे जाने लगी. तभी मुझे कल रात की घटना याद आई. मेरे बदन मे झुरजुरी होने लगी. मैने पिच्छले एक हफ्ते से चुदाई नही की थी और आज जब चुदवाने का मौका आया था और जिस समय मैं बहुत गरम हो गयी थी चुदवाने के लिए उसी समय भाभी का फोन आ गया था. जिसके कारण मैं प्यासी रह गयी थी और मेरा बदन जल रहा था, इसीलिए ना चाहते हुए भी अनायास ही मेरे कदम अब्बू के कमरे की तरफ चल पड़े.
मैं- मुझे कोई शौक नही है आपकी बात सुन-ने का और अपनी बात बताने का. आप अपने पास ही रखिए.
अभी हम बात कर ही रहे थे की अम्मी किचन मे आ गयी. जिसके कारण हमे शांत होना पड़ा. अम्मी ने आकर फ्रिज से एक बोतल पानी लिया और बाहर चली गयी. उनके जाते ही आयशा भाभी ने फिर से बोलना शुरू कर दिया.
आयशा भाभी- बता ना शाजिया क्या क्या हुआ तुम दोनो के बीच.
मैं- क्या भाभी आप भी. यहाँ अब्बू बिस्तर पर पड़े हुए हैं और आपको मस्ती सूझ रही है. जाओ मैं नही बताती कुच्छ भी.
आयशा भाभी- ठीक है. फिर मुझसे बात मत करना अब तुम.
उसके बाद हम दोनो मे कोई बातचीत नही हुई. आयशा भाभी ने चुपचाप रोटी बनाना शुरू कर दिया. मैं भी किचन मे ही खड़ी रही, लेकिन उन्होने पूरी रोटी बनाने के दौरान एक शब्द भी मुझसे नही बोला. मुझे लगा शायद मैने अच्छा नहीं किया. भाभी को बिना मतलब नाराज़ कर दिया. मैने भाभी से कहा.
मैं- आयशा भाभी. भाभी.
लेकिन भाभी कुच्छ नही बोली. भाभी वाकई मुझसे नाराज़ हो गयी थी. मैं सोचने लगी की बाय्फ्रेंड गर्लफ्रेंड साथ मे अकेले क्या करते हैं ये सभी को पता रहता है. ये भाभी को भी पता है. तो अगर उन्होने पूछ ही लिया तो क्या बुरा कर दिया उन्होने. मुझे ऐसा नही करना चाहतिए था भाभी के साथ. मैने फिर से भाभी को आवाज़ लगाई.
मैं- भाभी. भाभी. क्या आप नाराज़ हैं मुझसे.
भाभी ने मेरी बात का कोई जवाब नही दिया. अब तक खाना बन गया तो हबीबा भाभी ने मुझसे कहा.
हबीबा भाभी- शाजिया जा अम्मी को बोल दे की खाना रेडी हो गया है. लगाऊ अभी या कुच्छ देर मे.
हबीबा भाभी की बात सुनकर मैं अम्मी अब्बू के कमरे मे गयी और उनसे खाने के लिए पूछा. अम्मी अब्बू के हाँ कहने पर मैं किचन मे गयी और हबीबा भाभी से कहा.
मैं- हबीबा भाभी. खाना लगा दीजिए. अम्मी आ रही हैं खाना लेने के लिए.
मेरी अम्मी भले ही अधिकतर घर से बाहर रहती थी, लेकिन जब भी घर मे रहती. अब्बू की अधिक से अधिक सेवा करती थी. थोड़ी देर बाद अम्मी किचन मे आ गयी और दो थाली खाना लेकर किचन से जाते हुए बोली.
अम्मी- अब तुम लोग भी खाना खा लो.
अम्मी के जाने के बाद मैने आयशा भाभी का हाथ पकड़ लिया और उनसे कहा.
मैं- मुझे माफ़ कर दो भाभी. मैं आपका दिल नही दुखाना चाहती थी. आप मुझसे नाराज़ मत होइए.
मेरी बात सुनकर आयशा भाभी मुस्कुरा पड़ी और बोली.
आयशा भाभी- अब आई ना लाइन पर. अरे मैं तुझसे नाराज़ थोड़ी ना हूँ. मैं तो बस नाटक कर रही थी.
मैने आयशा भाभी को गले से लगा लिया. फिर हम तीनो ने मिलकर खाना खाया. दोनो भाभी बर्तन और किचन साफ करने लगी तो मैं दो ग्लास दूध लेकर अब्बू के कमरे मे चली गयी और उन्हे दूध दिया. फिर वापस आकर एक जाग पानी ले जाकर अब्बू के कमरे मे रखा और कुच्छ देर वहाँ बैठने के बाद अपने कमरे मे सोन एके लिए चली गयी. दोनो भाभी भी साफ सफाई के बाद अपने कमरे मे चली गयी. मैं बिस्तर पर लेटकर सो गयी. सोने के लगभग 1 अवर्स बाद मेरी आँख खुली तो मैं बाथरूम जाने के लिए उठी.
बाथरूम करने के बाद मैं अपने कमरे मे जाने लगी. तभी मुझे कल रात की घटना याद आई. मेरे बदन मे झुरजुरी होने लगी. मैने पिच्छले एक हफ्ते से चुदाई नही की थी और आज जब चुदवाने का मौका आया था और जिस समय मैं बहुत गरम हो गयी थी चुदवाने के लिए उसी समय भाभी का फोन आ गया था. जिसके कारण मैं प्यासी रह गयी थी और मेरा बदन जल रहा था, इसीलिए ना चाहते हुए भी अनायास ही मेरे कदम अब्बू के कमरे की तरफ चल पड़े.