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बगिया के माली ने सारी भोग डाली

आयशा भाभी- अच्छा. तुझे तो बहुत जल्दी है हर बात जान-ने की. पहले तुम अपनी बात बताओगि उसके बाद ही मैं तुझे अपनी बातें बताऊंगी.

मैं- मुझे कोई शौक नही है आपकी बात सुन-ने का और अपनी बात बताने का. आप अपने पास ही रखिए.

अभी हम बात कर ही रहे थे की अम्मी किचन मे आ गयी. जिसके कारण हमे शांत होना पड़ा. अम्मी ने आकर फ्रिज से एक बोतल पानी लिया और बाहर चली गयी. उनके जाते ही आयशा भाभी ने फिर से बोलना शुरू कर दिया.

आयशा भाभी- बता ना शाजिया क्या क्या हुआ तुम दोनो के बीच.

मैं- क्या भाभी आप भी. यहाँ अब्बू बिस्तर पर पड़े हुए हैं और आपको मस्ती सूझ रही है. जाओ मैं नही बताती कुच्छ भी.

आयशा भाभी- ठीक है. फिर मुझसे बात मत करना अब तुम.

उसके बाद हम दोनो मे कोई बातचीत नही हुई. आयशा भाभी ने चुपचाप रोटी बनाना शुरू कर दिया. मैं भी किचन मे ही खड़ी रही, लेकिन उन्होने पूरी रोटी बनाने के दौरान एक शब्द भी मुझसे नही बोला. मुझे लगा शायद मैने अच्छा नहीं किया. भाभी को बिना मतलब नाराज़ कर दिया. मैने भाभी से कहा.

मैं- आयशा भाभी. भाभी.

लेकिन भाभी कुच्छ नही बोली. भाभी वाकई मुझसे नाराज़ हो गयी थी. मैं सोचने लगी की बाय्फ्रेंड गर्लफ्रेंड साथ मे अकेले क्या करते हैं ये सभी को पता रहता है. ये भाभी को भी पता है. तो अगर उन्होने पूछ ही लिया तो क्या बुरा कर दिया उन्होने. मुझे ऐसा नही करना चाहतिए था भाभी के साथ. मैने फिर से भाभी को आवाज़ लगाई.

मैं- भाभी. भाभी. क्या आप नाराज़ हैं मुझसे.

भाभी ने मेरी बात का कोई जवाब नही दिया. अब तक खाना बन गया तो हबीबा भाभी ने मुझसे कहा.

हबीबा भाभी- शाजिया जा अम्मी को बोल दे की खाना रेडी हो गया है. लगाऊ अभी या कुच्छ देर मे.

हबीबा भाभी की बात सुनकर मैं अम्मी अब्बू के कमरे मे गयी और उनसे खाने के लिए पूछा. अम्मी अब्बू के हाँ कहने पर मैं किचन मे गयी और हबीबा भाभी से कहा.

मैं- हबीबा भाभी. खाना लगा दीजिए. अम्मी आ रही हैं खाना लेने के लिए.

मेरी अम्मी भले ही अधिकतर घर से बाहर रहती थी, लेकिन जब भी घर मे रहती. अब्बू की अधिक से अधिक सेवा करती थी. थोड़ी देर बाद अम्मी किचन मे आ गयी और दो थाली खाना लेकर किचन से जाते हुए बोली.

अम्मी- अब तुम लोग भी खाना खा लो.

अम्मी के जाने के बाद मैने आयशा भाभी का हाथ पकड़ लिया और उनसे कहा.

मैं- मुझे माफ़ कर दो भाभी. मैं आपका दिल नही दुखाना चाहती थी. आप मुझसे नाराज़ मत होइए.

मेरी बात सुनकर आयशा भाभी मुस्कुरा पड़ी और बोली.

आयशा भाभी- अब आई ना लाइन पर. अरे मैं तुझसे नाराज़ थोड़ी ना हूँ. मैं तो बस नाटक कर रही थी.

मैने आयशा भाभी को गले से लगा लिया. फिर हम तीनो ने मिलकर खाना खाया. दोनो भाभी बर्तन और किचन साफ करने लगी तो मैं दो ग्लास दूध लेकर अब्बू के कमरे मे चली गयी और उन्हे दूध दिया. फिर वापस आकर एक जाग पानी ले जाकर अब्बू के कमरे मे रखा और कुच्छ देर वहाँ बैठने के बाद अपने कमरे मे सोन एके लिए चली गयी. दोनो भाभी भी साफ सफाई के बाद अपने कमरे मे चली गयी. मैं बिस्तर पर लेटकर सो गयी. सोने के लगभग 1 अवर्स बाद मेरी आँख खुली तो मैं बाथरूम जाने के लिए उठी.

बाथरूम करने के बाद मैं अपने कमरे मे जाने लगी. तभी मुझे कल रात की घटना याद आई. मेरे बदन मे झुरजुरी होने लगी. मैने पिच्छले एक हफ्ते से चुदाई नही की थी और आज जब चुदवाने का मौका आया था और जिस समय मैं बहुत गरम हो गयी थी चुदवाने के लिए उसी समय भाभी का फोन आ गया था. जिसके कारण मैं प्यासी रह गयी थी और मेरा बदन जल रहा था, इसीलिए ना चाहते हुए भी अनायास ही मेरे कदम अब्बू के कमरे की तरफ चल पड़े.
 
अब्बू के कमरे के पास पहूचकर मैने देखा की लाइट अभी भी जल रही है मतलब अब्बू और अम्मी अभी भी जाग रहे हैं. तभी मेरी नज़र खिड़की की तरफ गयी तो मैं उत्सुकतावश खिड़की पर चली गयी और अंदर देखने लगी. जैसे ही मैने अंदर देखा मेरे होश उड़ गये. अंदर अब्बू और अम्मी एकदम नंगे थे. अब्बू अम्मी के उपर चढ़े हुए थे और धक्के लगा रहे थे. और अम्मी कराह रही थी. थोड़ी देर बाद अम्मी अब्बू को अपने उपर से हटाकर उठकर बैठ गई और अब्बू से बोली.

अम्मी- अब बहुत हुआ . मेरे बस का नही है आपके गधे जैसा लंड झेलना. मेरी जान निकल जाती है.

अब्बू- लेकिन ज़ुबैदा मेरा तो अभी तक हुआ ही नही. मैं तो प्यासा ही रह गया.

अम्मी- आप की प्यास कभी नही बुझने वाली. एक तो टाँग मे चोट लगी है. लंगड़ा रहे हो. टाँग काम नही कर रही है, लेकिन चुदाई का भूत है. की आपके उपर से उतर ही नही रहा है.

अब्बू- (अम्मी को बाहों मे भरकर). अरे जानेमन मेरी तीसरी टाँग बिल्कुल ठीक है. उसमे तो कोई चोट नही लगी ना. वो लंगड़ाकर नही चलता बल्कि झटपट दौड़ लगाकर गुफा के अंदर बाहर होता रहता है. जो अभी तुमने देखा ही होगा. मेरी तीसरी टाँग बहुत मजबूत है जानेमन. ये कभी घायल नही हो सकती, बल्कि तुमको घायल कर सकती है. ये देखो कैसे अपनी गुफा मे जाने के लिए बेकरार है.

अम्मी- हटो जी. आपको तो हर समय मस्ती करने की आदत हो गई है. आपको तो पता है की मेरी शुरू से ही चुदाई मे रूचि कम ही रही है, तो इस बुढ़ापे मे मैं चुदाई मे इंटरेस्ट लेने लगू. ये तो होने से रहा. आप समझ रहे हैं ना मैं क्या कह रही हूँ.

अब्बू- हाँ मैं सब समझ रहा हूँ. मुझे पता है की तुम्हारा इंटरेस्ट चुदाई मे हमेशा से कम ही रहा है, लेकिन मेरा तो हमेशा से चुदाई मे इंटरेस्ट बहुत ज़्यादा रहा है. और तुमसे किसने कह दिया की तुम बूढ़ी हो गयी हो. देखो मेरे रामलाल को. तुम्हारी जवानी को देखकर कैसे फनफना रहा है.

अब्बू की बात सुनकर अम्मी शर्मा गयी. अब्बू की बात सुनकर मेरी नज़र उनके लंड पर चली गयी. अब्बू का लंड अभी भी तना हुआ छत की तरफ घूर रहा था. अब्बू का लंड देखकर मेरी साँसे ज़ोर ज़ोर से चलने लगी. मैं तुरंत वहां से हटना चाहती थी. इसलिए मैने अपनी नज़रें कमरे से हटाई और जैसे ही मैने अपना कदम बढ़ाया वैसे ही अम्मी ने वो कह दिया. जिसे सुनकर मेरे कदम वही के वही जाम हो गये.

अम्मी- आप का तो हमेशा का यही रहता है. आपने आज तक कभी नही बोला है की आपकी प्यास बुझ गयी है. आप हमेशा प्यासे ही रहते हैं. इस बुढ़ापे मे भी आपके उपर जवानी छाइ है. मेरे बस का नही है आपको संभालना. आपको तो कोई जवान लौडिया ही संभाल सकती है. मेरी मानो तो कोई लड़की पटा लो (हंसते हुए )

अब्बू- अरे भाग्यवान. जो मेरी है वो तो मुझसे ठीक से चुदवाती ही नही है. और इस उमर मे कहा कोई लड़की मुझे मिलेगी. और अगर कोई मिल भी गयी तो तुम चुप रहने वाली हो. आ जाओगी सबको लेकर और बैठ जाओगी धरने पर. की मैने तुम्हारे रहते किसी और के साथ मुँह काला किया है. महिला उत्पीड़न के मामले मे मुझे जेल भिजवा दोगी और मैं इस उमर मे पोलीस के डंडे नही खाना चाहता.

अब्बू की बात सुनकर मुझे हँसी आ गयी. मुझे अब्बू पर आश्चर्य हो रहा था की अब्बू ऐसी सिचुएशन मे भी कॉमेडी कर रहे हैं. तभी अम्मी की आवाज़ सुनाई पड़ी.

अम्मी- मैं धरने पर नही बैठूँगी पतिदेव. आख़िर मेरे पति को सुख मिले और उनकी जन्मो की प्यास बुझ जाए. मुझे और क्या चाहिए.

अब्बू- तुमने कभी मेरी फीलिंग नही समझी ज़ुबैदा. मैं हमेशा प्यासा ही रह गया. तुमने मुझे कभी संतुष्ट नही किया, लेकिन उसके बाद भी मैं तुमसे बहुत प्यार करता हूँ. चलो अब छोड़ो इस बात को. अब सो जाओ. रात बहुत हो गयी है.

अब्बू की बात सुनकर मैं तुरंत वहां से भागकर अपने कमरे मे आ गयी और अभी जो कुच्छ भी मैने देखा उसके बारे मे सोचने लगी. मतलब अब्बू वर्षो से प्यासे हैं. लेकिन अम्मी को बहुत प्यार करते हैं. तभी तो अम्मी को अब्बू पर इतना विश्वास है की उन्होने बोल दिया की कोई जवान लड़की पटा लो, अगर भरोसा नही होता अब्बू पर अम्मी को तो अम्मी कभी भी ऐसा नही बोलती. मगर अम्मी ने आज तक अब्बू की प्यास कभी नही बुझाई और अब्बू वर्षो से प्यासे हैं तो फिर सवाल ये है की अब्बू अपनी प्यास बुझाते कैसे हैं. कही अब्बू का बाहर किसी के साथ चक्कर तो नही. लेकिन अब्बू तो ऐसे नही हैं. तो क्या अब्बू हमेशा मुट्ठ मारकर अपनी प्यास बुझाते हैं. अगर ऐसा है तो अब्बू के साथ बहुत बुरा हो रहा है. अम्मी बहुत ग़लत कर रही हैं अब्बू के साथ.

ये सब सोचते हुए मेरे दोनो हाथ मेरी चुचियो पर चले गये और मैं अपनी चुचियो को दबाने लगी. मुझे कुच्छ होश नही था. कुच्छ देर बाद अधिक उत्तेजना मे मैने अपनी एक चुचि को ज़ोर से मसल दिया. तो मेरे मुँह से सिसकी निकल गयी और मैं होश मे आई. होश मे आने के बाद मुझे पता चला की मैं क्या सोच रही हूँ. और क्या कर रही हूँ. मुझे अपनी सोच पर गुस्सा आने लगा. मैं बुदबुदाने लगी.

मैं- छि मैं क्या सोचने लगी. वो दोनो मेरे माँ बाप हैं. मुझे उनके बारे मे ऐसा नही सोचना चाहिए. ये मुझे क्या हो गया है. मेरे बदन की आग पता नही मुझसे क्या क्या करवाएगी. अब मुझे ये सब नही सोचना है. शाजिया तुझे ये सब नही सोचना है ये ग़लत है.

उसके बाद मैने अपनी आँखे बंद कर ली और सोने की कोशिश करने लगी. थोड़ी देर बाद मैं नींद की वादियों में खो गयी.
 
सुबह किसी के जगाने से मेरी नींद खुली. मैने समय देखा तो सुबह के 7 बज चुके थे. मैं उठकर फ्रेश होने के बाद घर के काम मे भाभी का हाथ बंटाने बताने लगी. इसी तरह दिन गुज़रते रहे. अम्मी पूरे 3 दिन रही. और हर रात मैं खिड़की से अम्मी और अब्बू की रासलीला देखती थी. अब आप इसे मेरी आदत कह लीजिए या मेरे बदन की गर्मी की मजबूरी या मेरी मानसिक विकृति.

मैं हर रोज देखती की अम्मी ने अब्बू को अधूरा छोड़ दिया है. मुझे अब्बू के स्टॅमिना पर बहुत आश्चर्य होता और अम्मी पर तरस आता की उन्हे इतना दमदार पति मिला है, लेकिन अब्बू के लिए थोड़ा सॅड फील होता की वो हर रात प्यासे रह जाते हैं. 3 दिन के बाद अम्मी फिर अपने काम से बाहर चली गयी. इन 3 दीनो मे उन्होने अब्बू के खूब सेवा की. अब्बू के पैरो की मालिश से लेकर उनके खाने पीने का ध्यान सब अम्मी ने ही किया. अब्बू अब ठीक ही हो गये थे. ठीक इसलिए बोल रही हूँ की जो आदमी चोट लगने के बाद भी रात मे अपनी बीबी की जबरदस्त चुदाई करता हो उसे बीमार ये अस्वस्थ कहना बेवकूफी होगी. अम्मी ने जाते हुए मुझे सख़्त हिदायत देते हुए कहा.

अम्मी- शाजिया. तुम अपने अब्बू का ख्याल अच्छे से रखना. और इनकी चोट पर मलम समय से लगा देना.

मैं- जी अम्मी . आप बिल्कुल भी फिकर मत करिए. मैं अब्बू का अच्छे से ख्याल रखूँगी

मुझे हिदायत देकर अम्मी चली गयी. मैं अम्मी को बस स्टॉप तक छोड़ने गयी. जब मैं उन्हे छोड़कर वापस आई तो अब्बू कही बाहर जाने के लिए घर के दरवाज़े पर खड़े थे. मैने अब्बू से कहा.

मैं- आप यहाँ क्या कर रहे हैं अब्बू. चलिए अंदर आराम करिए.

अब्बू- मुझे अपने अखाड़े तक जाना है. बहुत जल्दी मैं वापस आ जाउन्गा. बहुत ज़रूरी है.

मैं- नही अब्बू. आपको कही नही जाने दूँगी मैं. अम्मी को पता चलेगा तो वो मुझे डाटेंगी.

अब्बू- मुझे बहुत ज़रूरी काम है. 4 दिन हो गये हैं मैं वहां गया ही नही. पता नही वहां का क्या हाल होगा. बच्चे आते हैं प्रॅक्टीस करने. उन्हे थोड़ा गाइड की ज़रूरत पड़ती है. समझा करो बेटी.

मैं- वहाँ का तो पता नही. लेकिन यहा आपका हाल ठीक नही है अब्बू. आप को कही नही जाना. आप भले ही कह दें की आपकी चोट ठीक हो गयी है लेकिन आपकी चोट अभी भी ठीक नही हुई है. आपको कम से कम 3-4 दिन मालिस की सख़्त ज़रूरत है. इसलिए कमरे मे चलिए. मुझे मालिश करना है आपके पैरो की.

अब्बू- मुझे बहुत ज़रूरी है जाना शाजिया. अच्छा एक काम करो तुम. तुम भी मेरे साथ चलो. मुझे अपनी स्कूटी से वहां तक ले चलना और फिर लेकर आना.

मैं- आप नही मानेंगे ना. चलो ठीक है फिर. यही ठीक रहेगा. आइए फिर चलते हैं.

मैं अब्बू को स्कूटी पर बैठकर अखाड़े की तरफ चल पड़ी. अखाड़ा मेरे घर से लगभग 1 किमी दूरी पर था. ये मेरे खेत मे बना हुआ था. थोड़ी देर मे मैं और अब्बू वहां पहुच गये. मैने देखा की 10-12 लोग अखाड़े मे प्रॅक्टीस कर रहे थे और एक आदमी उन्हे गाइड कर रहा है. अब्बू के वहां पहुचने के बाद उस आदमी ने अब्बू को सलाम किया. अब्बू ने उससे पूछा.

अब्बू- और बताओ राघव. सब ठीक चल रहा है ना. आज कम लोग आए हुए हैं अखाड़े पर.

राघव- जी गुरु जी. सब ठीक चल रहा है. बस आपके अस्वस्थ्य होने के कारण लोग नही आ रहे हैं. बोल रहे थे की जब गुरुजी ठीक हो जाएँगे तो फिर से वो लोग आएँगे.

फिर अब्बू वहां पर बने हुए कमरे मे जाने लगे. अब्बू के पीछे पीछे मैं भी कमरे मे आ गयी.
 
यहा मैं कुच्छ जानकारी देना चाहती हूँ. क्योंकि इस कहानी मे इस अखाड़े की भी महत्वपूर्ण भूमिका है तो इसका विस्तृत जिकर होना लाजिमी है. तो मैं बता रही थी की जहा पर अब्बू ने ये अखाड़ा खोला है वो मेरा ही खेत है जो मेरे घर से लगभग 1 किलोमीटेर की दूरी पर है.

मेरा खेत लगभग 20 एकड़ मे है. जो लिंक रोड से जुड़ा हुआ है. जिसमे खेती होती थी. रोड के दूसरे कोने पर अब्बू ने अखाड़ा बनाया हुआ हैं ताकि प्रॅक्टीस करने वालों को गाड़ियों की आवाज़ से कोई दिक्कत ना हो. लिंक रोड से ज़्यादा दूरी होने के कारण यहाँ पर शांति रहती है. खेत की फसल को जानवरों से बचाने के लिए लिंक रोड की तरफ 4 इंच मोटी 6 फिट की ऊँचाई की दीवाल पिल्लर के सहारे उठाई गयी है. ठीक वैसी ही दीवाल उसके सामने दूसरे छोर पर उठाई गयी है. बाकी दोनो तरफ काटीले तार से घेराव करके खेत को सुरक्षित किया गया है.

अखाड़े के पास मे 3 बड़े बड़े कमरे बनाए गये हैं. एक कमरे मे ट्यूबवेल लगी हुई है जिससे पूरे खेत की सिचाई की जाती है. उसी कमरे मे एक बड़ी सी टंकी बनी हुई है जिसमे ट्यूबवेल का पानी गिरता है. कमरे से बाहर एक और टंकी बनी हुई है अंदर वाली टंकी से थोड़ी छोटी . जिसमे अंदर वाली टंकी का पानी गिरता है. उसी कमरे मे खेती से संबंधित सभी समान (फावड़ा, खुरपि, हांसिया, दराती, बोरी एट्सेटरा.) रखे हुए हैं. दूसरे कमरे मे कुश्ती सीखने वालो के लिए कपड़े बदलने के लिए है. मतलब लंगोट पहन -ने के लिए हैं. और सबसे बड़े वाले कमरे मे जो 16/20 का है उसमे एक 4/6 का बेड और एक तख्त रखा है. दीवार पर टीवी लगी हुई है. इसके साथ ही टीवी की तरफ वाली दीवाल पर एक सोफा लगा हुआ है. कपड़े बदलने वाले कमरे मे और इस बड़े वाले कमरे मे एक कॉमन डोर है जो दोनो कमरे को आपस मे जोड़ता है.

कुश्ती सीखने का समय सुबह 6 बजे से 10 बजे तक था, लेकिन अब्बू लगभग पूरा दिन यहीं बिताते थे और शाम को घर जाते थे. तो ये था यहा का इंट्रोडक्षन.

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मैं अब्बू के साथ अंदर आकर बैठ गयी. अब्बू ने टीवी लगा दी और हम दोनो टीवी देखने लगे. थोड़ी देर बाद अब्बू ने कहा.

अब्बू- तुझे पता है मैं यहाँ क्यों रोज आता हूँ. क्योंकि मुझे यहा पर बहुत सुकून मिलता है.

मैं-लेकिन अब तो आपको घर मे ज़्यादा समय बिताना पड़ेगा. तो फिर आपको कैसे सुकून मिलेगा.

अब्बू- जब मुझे घर मे समय बिताना है तो मुझे अब सुकून घर मे ढूँढना पड़ेगा.

अब्बू की बात सुनकर मेरी हँसी छूट गयी. अब्बू भी मेरे साथ मुस्कुरा दिए. तभी अब्बू को कुच्छ याद आता है तो अब्बू मुझसे बोलते हैं.

अब्बू- शाजिया बेटी. मेरा एक काम कर दे. मेरा मोबाइल घर पर छूट गया है. क्या तू उसे लेकर आ सकती है.

मैं-क्या अब्बू. मोबाइल ही तो है. रहने दीजिए ना. कुच्छ देर बाद घर तो चलना ही है. फिर क्यों.

अब्बू- अरे उसमे मेरे कुच्छ इंपॉर्टेंट डाटा हैं. जो मुझे किसी को भेजने थे. जा तू उसे लेकर आ जा बेटी. मैं आज दिन यही खेत मे गुजारना चाहता हूँ. तू मुझे मोबाइल देकर चली जाना. शाम को जब मैं फोन करूँगा तब आना तुम मुझे लेने के लिए.

मैं- ऐसे कैसे. आप यहा पर रहेंगे. फिर आपकी मालिश कौन करेगा. मालिश कैसे होगी फिर आपकी.

अब्बू- तुम मालिश यही पर कर देना शाजिया. लेकिन अभी मेरा मोबाइल जाकर ले आओ. मुझे ज़रूरी काम है

मैं- अरे अब्बू. ये लीजिए मेरा फोन और जिसको आपको भेजना है उसे फोन करके बोल दीजिए उसे की शाम तक वो डाटा आप भेजेंगे.

अब्बू- तू समझ नही रही है बेटी. बहुत ज़रूरी है भेजना. अगर तुझे नही जाना तो मैं खुद चला जाता हूँ.

मैं- नही अब्बू आप रहने दीजिए मैं जाती हूँ लाने.

इतना कहकर मैं वहां से अब्बू का फोन लाने के लिए निकल पड़ी. मैने वैल बजाई तो हबीबा भाभी ने दरवाज़ा खोला उनका चेहरा पसीने से भीगा हुआ था. उनकी साड़ी थोड़ा अस्त व्यस्त थी. मुझे देखकर भाभी बोली.

हबीबा भाभी- तू अकेले आई है अब्बू को कहाँ छोड़ दिया तुमने.

मैं- अब्बू वहीं पर हैं जहाँ वो होते थे. मैं कुच्छ काम था अब्बू का वही करने आई हूँ. और आपके कपड़ों को क्या हुआ , आपको पसीना क्यों आया हुआ है. आयशा भाभी कहाँ पर हैं

हबीबा भाभी- कुच्छ नही मैं साफ सफाई कर रही थी. अब नहाने जा रही थी तभी तुम आ गयी. और भाभी बाहर गयी हैं पड़ोसी के यहा कुच्छ कम से कुच्छ देर मे आ जाएँगी.

भाभी की बात सुनकर मैं अब्बू के कमरे मे चली गयी. और भाभी बाथरूम मे घुस गयी. अब्बू का मोबाइल मुझे तकिया के नीचे रखा हुआ मिला. मोबाइल उठा कर मैं अपने कमरे मे आ गयी और भाभी के बाथरूम से बाहर आने का इंतज़ार करने लगी. मैने अनायास ही अब्बू के फोन का लॉक खोल दिया. लॉक खुलते ही मेरी नज़र स्क्रीन पर पड़ी तो वहां कुच्छ सर्च किया गया था, सर्च को पढ़ते ही मेरी आँखे बड़ी हो गयी.

ये तो राजशर्मास्टोरीज डॉटकॉम की सेक्सी कहानिया थी. मैने बहुत बार अपने दोस्तों के मुँह से इन राजशर्मास्टोरीज डॉटकॉम की कहानियों के बारे मे सुना था. ख़ासकर इन्सेस्ट कहानियों के बारे मे जो वो बहुत चटकारे ले लेकर सुनाती थी. लेकिन मुझे कभी भी इन बातों पर विस्वास नही होता था. की ऐसी कोई कहानी भी होती होगी. इसलिए मैने कभी अपने मोबाइल मे ऐसी कहानियो को सर्च ही नही किया था. तो क्या इसीलिए अब्बू ने अपना मोबाइल मुझसे मँगवाया था की कही भाभियों के हाथ ना लग जाए उनका मोबाइल और उनका राज़ सामने आ जाए. लेकिन भाभियों के तो नही लेकिन उनकी बटी के सामने उनका राज़ तो आ ही गया था. तो क्या अब्बू अपनी प्यास ऐसी कहानिया पढ़कर बुझाते हैं.

अब्बू के मोबाइल पर गूगल सर्च चुदाई की लंबी कहानिया राजशर्मास्टोरीज डॉटकॉम नाम लिखा था और उसके नीचे उसका सर्च रिज़ल्ट था. जिसमे अड्ल्टरी से लेकर इन्सेस्ट तक की कहानिया थी. अब मेरा दिमाग़ काम करना बंद कर दिया था. मतलब अब्बू ये गंदी गंदी कहानिया पढ़ते हैं. मैं तुरंत सर्च हिस्टरी पर क्लिक किया तो वहां का नज़ारा देखकर मेरी आँखे बड़ी हो गयी. हिस्टरी मे तो अब्बू ने बेटी और बहू की चुदाई की कहानी ज़्यादा पढ़ी थी. मेरा दिमाग़ ही चकरा गया की अब्बू को इन्सेस्ट मे रूचि है. अब्बू इन्सेस्ट कहानिया भी पढ़ते हैं. मैने तुरंत सर्च हिस्टरी से बाहर आ गयी और मोबाइल साइड मे रख कर बैठ गयी. तभी बाहर हबीबा भाभी का मोबाइल बजने की आवाज़ सुनाई दी.

मैं अपने कमरे से बाहर आई और भाभी को आवाज़ दी की उनका फोन आया है तो भाभी ने मुझे फोन उठाने के लिए कहा. मैने फोन देखा तो भाई जान का फोन था. मैने फोन उठाया और भाई जान से कहा.

मैं- हेलो भाई जान.

भाई जान- हा शाजिया कैसी हो. और हबीबा कहाँ हैं.

मैं- मैं ठीक हूँ भाई जान. भाभी बाथरूम मे हैं.

उसके बाद भाई जान से मेरी इधर उधर की बात हुई और फिर मैने फोन रख दिया. फोन डिसकनेक्ट होने के बाद मैने भाभी के फोन की स्क्रीन स्वेप की तो मुझे एक और झटका लगा. भाभी के मोबाइल मे रेखा मोना सरकार और सिमरन ख़ान की हिन्दी पॉर्न वेबसीरीज़ केर्टेकर की वीडियो प्ले हो गयी. मैने ऐसी वीडियो कभी नही देखी थी. उस वीडियो मे आख़िरी सीन चल रहा था जब मोना केर्टेकर सिमरन के जाने के बाद अपने ससुर से चुदाई करवा रही थी. उस समय मुझे ये नही पता था की उस वेबसीरीज़ की स्टोरी क्या है और उसमे किसने कौन सा कॅरक्टर प्ले किया है. ये तो मुझे बाद मे पता चला जब मैं ऐसी वीडियो देखने लगी.

वैसे भाभी के मन मे अब्बू के लिए अभी कोई ग़लत भावना नहीं थी. वो तो बस अपना समय पास करने के लिए ये वीडियो देख रही थी. अगर मैं 2 मिनिट और ना आती तो वो वीडियो ख़त्म हो चुकी होती. हबीबा भाभी ऑनलाइन ही ये वेब सीरीस देख रही थी.

मुझे आज दो दो झटके एकसाथ लगे थे. पहला अब्बू के मोबाइल मे इन्सेस्ट कहानियो की हिस्टरी और दूसरा हबीबा भाभी के मोबाइल मे पॉर्न वीडियो. मेरा तो दिमाग़ ही काम करना बंद कर दिया. मैने चुपचाप भाभी का मोबाइल उसी जगह रख दिया और अपने कमरे मे आकर बैठ गयी. मेरा चेहरा भावहीन हो गया था. मुझे कुच्छ समझ मे नही आ रहा था की ये सब क्या हो रहा है मेरे साथ. अभी तक मेरी लाइफ ठीक चल रही थी, लेकिन राज का मेरी लाइफ से जाने के बाद कुच्छ भी ठीक नही हो रहा था मेरे साथ. मैं अभी ऐसे ही अपने कमरे मे बैठी हुई थी की तभी भाभी बाथरूम से बाहर आई और मुझसे बोली.

हबीबा भाभी- क्या हुआ शाजिया तू ऐसे क्यों बैठी हुई है और कुच्छ परेशान सी लग रही है. तुझे अब्बू को लाने के लिए भी जाना था.तू अभी तक गई नही.

मैं- नही भाभी ऐसा कुच्छ नही है. आप स्नान कर रही थी तो मैने सोच पहले आप नहा ले उसके बाद मैं चली जाउन्गी. अच्छा मैं जा रही हूँ अब आप दरवाज़ा बंद कर देना.

इतना कहकर मैं अब्बू के कमरे मे गयी और उनका मोबाइल चद्दर के नीचे रखकर उसके उपर तकिया रख दिया और बाहर आकर अब्बू के पास चली गयी. रास्ते भर मैं सोच रही थी की ये सब क्या हो रहा है. रास्ते मे मैने एक काम किया था की अब्बू का नंबर डाइयल करके काट दिया था. मैं इसी सोच के साथ अब्बू के पास पहुच गयी. अब्बू मुझे देखते हुए बोले.

अब्बू- ले आई मेरा मोबाइल शाजिया.

मैं- नही अब्बू. मैने बहुत ढूँढा लेकिन आपका मोबाइल मुझे मिला ही नही. आपने कहाँ रखा था.

अब्बू- वही मेरे बिस्तर पर ही तो रखा था. क्या तुमने बिस्तर उलट पुलट कर देखा ढूँढा था.

मैं- नही अब्बू मैं तो बस बिस्तर पर और मेज़ पर देखी. जब मोबाइल नही मिला तो वापस चली आई.

अब्बू- तुम्हे एक बार मेरे नंबर पर फोन करना चाहिए था. बेल बजने पर पता चल जाता की मेरा मोबाइल कहाँ पर रखा है.

मैं- मैने आपका नंबर डाइयल किया था, लेकिन नोट रीचबल बता रहा था. इसलिए मैं नही ढूँढ पाई आपका मोबाइल. आप मेरा मोबाइल लीजिए और जिसे बात करनी है बात कर लीजिए.

अब्बू- अब उसका नंबर मुझे याद थोड़े ही है. वो तो मोबाइल मे ही था.

अब मैं अब्बू को क्या बताती की मुझे उनका मोबाइल भी मिला और मोबाइल के अंदर भी बहुत कुच्छ देखने को मिला. मेरी बात सुनकर अब्बू के अंदर मोबाइल भाभियो के हाथ मे लगने का जो डर था वो कुच्छ हद तक ख़तम हो गया था. अब तक सभी अखाड़े से अपने घर जा चुके थे. कुच्छ देर बैठने के बाद मैने अब्बू से कहा.

मैं- अब्बू अब चलिए ना घर मुझे बहुत भूख लग रही है.

अब्बू- तुम बोल रही थी ना मेरी मालिश करने को. तो वो अलमारी मे तेल की शीशी रखी है. तुम पहले मेरी मालिश कर दो. उसके बाद मैं यही पर स्नान कर लूँ. फिर चलता हूँ. अगर तुम्हे भूख ज़्यादा ना लगी हो तो.

मैं- जैसा आप ठीक समझे अब्बू. लेकिन आपने लोवर पहनी हुई है तो आपके पैरो की मालिश कैसे करूँगी मैं. या तो लोवर घुटने तक उपर कर लीजिए या फिर आप इसे उतार कर लूँगी पहन लीजिए.

ये कहते हुए मेरे मन मे अब्बू को लेकर तनिक भी ग़लत भावना नही थी. इस समय मैं बस एक बेटी की तरह अब्बू के पैरो को मालिश करना चाहती थी. ताकि उनके पैर मे जो भी दर्द हो वो ख़तम हो जाए. मेरी बात अब्बू को भी सही लगी. इसलिए अब्बू उठकर दूसरे कमरे मे चले गये और कुच्छ देर बाद अब्बू जब वापस आए तो अब्बू ने अपनी लोवर उतारकर एक गमछा अपनी कमरे पर लप्पेट रखा था. अब्बू आकर तखत पर बैठ गये और बोले.

अब्बू- शाजिया. मैं तखत पर लेट जाता हूँ. तुम आराम से मेरे पैर की मालिश करना.

मैं- नही अब्बू आप लेटो मत. आप ताक़त पर आराम से बैठ जाइए और अपने पैर इस पीढ़े (लकड़ी का 1-1.5 फिर लंबा और चौड़ा टुकड़ा जिसे गाँव देहात मे बैठने के लिए उसे किया जाता है) पर रख दीजिए. मैं आपके पैरो की मालिश कर देता देती हूँ.
 
मैने भले ही अब्बू का लंड देखा था. अब्बू के मोबाइल मे अभी कुच्छ देख कर आ रही थी. लेकिन फिर भी मेरे मन मे अब्बू के के लिए कोई ग़लत भावना नही थी. अब्बू के प्रति सहानुभूति थी. अब्बू के उपर तरस आ रहा था मुझे की वो अपनी प्यास उल्टे सीधे तरीके से बुझाते हैं, लेकिन अब्बू से चुदवाने का ख्याल दूर दूर तक मेरे दिलो- दिमाग़ मे नही था. लेकिन यही पर मैने बहुत बड़ी ग़लती कर दी थी. मेरी यही वो ग़लती थी जिसकी वजह से मेरे कदम इन्सेस्ट चुदाई की तरफ चल पड़े..मेरा कहने के बाद अब्बू तखत पर आराम से बैठ गये और अपना पैर नीचे पीढ़े पर रख लिया. मैं अलमारी से तेल की शीशी लेकर आई और ज़मीन पर अपने पंजों के बल बैठ गयी और अपने हाथ मे तेल की शीशी गिरकर अब्बू के पैर और पंजो पर लगाने लगी.

मैने आज सलवार और कमीज़ पहनी हुई थी मेरी कमीज़ एक दम चुस्त नही थी. हल्की ढीली ढाली थी. मैने अपने सीने पर दुपट्टा लिया हुआ था. नीचे बैठकर तेल लगा कर मालिश करने के कारण मेरा शरीर हिल रहा था जिसके कारण मेरा दुपट्टा बार बार मेरे कंधे से सरक कर नीचे गिर रहा था. तो मैने अब्बू से कहा.

मैं- अब्बू. मेरा दुपट्टा बार बार नीचे गिर रहा है. जिससे इसमे तेल लग रहा है. आप मेरा दुपट्टा हटा कर तखत पर रख दीजिए या फिर पीछे दुपट्टे के दोनो छोर को गाँठ देकर बाँध दीजिए.

मेरी बात सुनकर अब्बू ने मेरा दुपट्टा मेरे गले पर से पकड़ा और उसे उतारकर तखत पर रख दिया. दुपट्टा उतारते हुए अब्बू के हाथ की उंगलिया मेरी चुचियो के उभारों तक महसूस की लेकिन मैने इस बात पर ज़्यादा ध्यान नही दिया. दुपट्टा उतारने के बाद मैं अब्बू के पैरो की मालिश करने मे बिज़ी हो गयी. लेकिन दुपट्टा हट जाने के बाद मेरी चुचियो की घाटी अंदर तक अब्बू को नज़र आने लगी.

मालिश करते हुए मेरी जब मैं अपने घुटने अपनी चुचियो पर लगाती तो मेरी चुचिया मेरे घुटने से दब जाती. जिससे मेरी चुचिया घुटने के दबाव के कारण उपर की तरफ निकल आती थी. अब्बू की नज़र एक बार मेरी चुचियो पर पड़ी तो मेरी चुचियो पर ही जमी रह गयी. मैं अपनी मालिश मे बिज़ी थी तो अब्बू बिंदास मेरी चुचियो को देख रहे थे.

मेरी चुचिया 36 इंच की थी. मतलब की बहुत बड़ी बोली जा सकती हैं. तो मेरी कमीज़ मे चुचियो का उभार पहले से ही ज़्यादा दिख रहा था. नीचे बैठने की वजह से मेरी कमीज़ के गले से अंदर तक चुचिया दिखाई दे रही थी अब्बू को और मेरे घुटने से दबने के बाद मेरी लगभग आधी चुचिया अब्बू के नज़रों के सामने थी. मैं अब्बू के पैरो की मालिश करते हुए अब्बू से इधर उधर की बात कर रही थी और अब्बू कभी कभी जवाब देते थे वो भी दो-तीन बार पूछने पर, क्योंकि वो मेरी चुचियो को देखने मे खोए हुए थे. जिसका मुझे तनिक भी आभास नही था. अब्बू का लंड मेरी चुचियो को देखकर एकदम तनकर खड़ा हो गया था. जिसने अब्बू के गमछे को काफ़ी हद तक तनकर उपर उठा दिया था और अपना भरपूर नज़ारा करवा रहा था. मैं मालिश करते हुए अचानक से अब्बू से पूछा.

मैं- अब्बू. मेरी मालिश कैसी है. आपको कुच्छ आराम लग रहा है या मैं वैसे ही मेहनत कर रही हूँ.

मेरी बात सुनकर अब्बू ने कोई जवाब नही दिया. बस मेरी चुचियो को ही देखते रहे. मैने फिर से अब्बू से पूछा, लेकिन अब्बू ने जब इस बार भी कोई जवाब नही दिया तो मैने अपनी नज़र उपर की तरफ उठाई. तो मेरी नज़र अब्बू के लंड पर पड़ी. जो अब्बू का गमछा तनकर खड़ा हुआ दिखाई दे रहा था. मैं अब्बू के लंड का उभार देखकर ही चौंक गयी. मैं सोच मे पड़ गयी की अब्बू का लंड इस वक्त कैसे खड़ा हो सकता है. क्या मेरे छूने से. फिर मैने अपने दिमाग़ को झटका दिया की मैं ये क्या सोच रही हूँ.

फिर मैने अब्बू के लंड से नज़र हटाकर उपर की तरफ देखा तो अब्बू को एकटक किसी चीज़ को देखते हुए पाया. मैने अब्बू की नज़रो का पिच्छा किया तो मैं चौंक गयी. मेरी चुचिया मेरे घुटने से दबे होने के कारण लगभग 1/3 भाग गले से बाहर दिखाई पड़ रही थी. मुझे समझते देर ना लगी की अब्बू का लंड मेरी चुचिया देखकर खड़ा हो गया. ये ख़याल मन मे आते ही मेरे शरीर मे झुरजुरी सी दौड़ गयी. और मेरे हाथ वही पर रुक गये

मैं बहुत उहापोह की स्थिति मे इस समय थी. कही ना कही इसमे ग़लती मेरी ही थी. अब्बू ने मुझे बिस्तर पर लेटने के बाद मालिश करने के लिए कहा था. अगर मैं उस समय मालिश करती तो ये सिचुएशन सामने नही आती. मैने ही अब्बू से बैठकर मालिश करने के लिया कहा था. अब्बू तखत पर बैठे हुए थे और मैं ज़मीन पर बैठी हुई थी. मेरी चुचिया भी बहुत बड़ी थी तो ये सिचुएशन तो आनी ही थी.

जिसका मुझे पहले से भान नही था. अब मैं बहुत बुरी तरह फँस गयी थी. मेरी समझ मे नही आ रहा था की मैं क्या करू. अगर मैं अब्बू से कुच्छ कहूँगी या अपना दुपट्टा लेने की कोशिश या अपना कपड़ा ठीक करने की कोशिश करूँगी तो अब्बू ये जान जाएँगे की मैने उन्हे अपनी चुचिया देखते हुए पकड़ लिया है, तो अब्बू शर्मिंदा हो जाएँगे. हो सकता है वो अपनी इस ग़लती के लिए मुझसे नज़र ना मिला पाए. और अगर मैं कुच्छ भी नही कहूँगी और कुच्छ नही कारणगाई तो मेरी चुचिया ऐसे ही अब्बू के सामने रहेंगी और अब्बू मेरी चुचियो को देखते रहेंगे.
 
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