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आयशा भाभी अपने कमरे मे भाग गयी. उनके जाने के बाद कुच्छ देर मैं और हबीबा भाभी ने इधर उधर की बाते की. उसके बाद मैं अपने कमरे मे चली गाही. इसी तरह आज का दिन गुजर गया और शाम हो गयी. शाम को हम तीनो ननद भाभियों ने मिलकर खाना बनाया और अब्बू को खाने के लिए आवाज़ दी.
मैं- अब्बू आकर खाना खा लीजिए. आपको भूख लगी होगी ना.
अब्बू- हाँ बस आ रहा हूँ, बहुत भूख लगी है.
अब्बू की बात सुनकर हबीबा भाभी आयशा भाभी के कान मे मजाकिया लहजे मे धीरे से बोली.
हबीबा भाभी- इस बुड्ढे को बहुत भूख लगती है. इन्हे कुच्छ ऐसा खिलाना पड़ेगा की इनकी जन्मों की भूक और प्यास मिट जाए.
आयशा भाभी- तू चुप कर छोटी . हमेशा अब्बू को ऐसे बोलती रहती हो. अगर किसी दिन अब्बू ने सुन लिया तो उस दिन तुम्हे ही खा डालेंगे. फिर देखती हूँ क्या करती हो तुम.
मैं- आप दोनो हर समय अब्बू की तान ही क्यों छेड़े रहती हैं. कोई और नही मिलता क्या.
हबीबा भाभी- तुम्हे क्यों जलन हो रही है अगर हम दोनो अब्बू के बारे मे बात करते हैं. तुम ही बताओ किसके बारे मे बात करें. एक तुम्हारे भाई जान हैं जो पता नही कब घर आएँगे. तो घर मे बचा कौन तुम और अब्बू. तुम्हारे बारे मे क्या बात करू. तुम भी कम नही हो. पता नही क्या क्या गुल खिलाती रहती हो. वैसे भी अब्बू की बात करने मे मज़ा बहुत आता है.
मैं- क्या कहा. मैने क्या गुल खिलाए हैं. मैं तो हमेशा आप लोगो के साथ ही रहती हूँ.
आयशा भाभी- अच्च्छा. तूने कोई गुल नही खिलाया है. बिना गुल खिलाए ही ये पहाड़ जैसी चुचिया और ये गुब्बारे जैसी गांड हो गई है. तुम्हारे बाय्फ्रेंड ने बहुत अच्छे से इस्तेमाल किया है तुम्हारे शरीर के हर एक अंग का. तुम्हारा हर एक अंग फूला दिया है उसने. बस ये ध्यान रहे की कही किसी दिन तुम्हारा पेट ना फूला दे.
आयशा भाभी ने ये बात हंसते हुए कही. उनकी बात सुनकर मैं बुरी तरह झेंप गई. भाभी की बात सही थी. मेरा बाय्फ्रेंड बहुत बुरी तरह चुदाई करता था मेरे साथ. एक एक अंग मसल देता था. रगड़ रगड़ कर चोदता था मुझे. उसी का नतीज़ा था की मेरा फिगर शादी के पहले ही 36 30 38 हो गया था. जिसे भाभी की अनुभवी आँखो ने पहचान लिया था, लेकिन मैं भाभी से इस बारे मे एक परदा रखना चाहती थी, इसलिए मैने भाभी की बात का जवाब देते हुए कहा.
मैं- ये कैसी बात कर रही हो भाभी, ऐसा कुच्छ नही है जैसा आप सोच रही हैं, ये सब तो नॅचुरल है. जैसे किसी किसी का उमर के हिसाब से ज़्यादा बड़ा हो जाता है उसी तरह मेरा भी कुच्छ बड़ा हो गया है, लेकिन इसका मतलब ये नही है की मैं बाहर किसी के साथ ये काम करती हूँ.
आयशा भाभी- अब ज़्यादा बहाने बनाने की कोशिश मत करो. मुझे मालूम है की ये नॅचुरल है या आर्टिफिशियल. तुम्हे ना बताना हो तो मत बताओ, लेकिन जो भी तुम्हे देखेगा वो तुरंत जान जाएगा की ये लड़की दिल खोल कर ठुकवाती है. आख़िर अनुभव नाम की भी कोई चीज़ होती है.
मैं- क्या भाभी आप भी ना कुच्छ भी बोलती रहती हैं. ऐसा कुच्छ नही है जैसा आपने कहा. और आप जैसे बात कर रही हैं. उस हिसाब से तो मुझे लगता है की आपने भी कुच्छ कम नही हैं भाभी.
अभी हम बात कर ही रहे थे की अब्बू ने हमे आवाज़ लगाई.
अब्बू- अरे बहू खाना तो खिलाओ, बहुत जोरो की भूख लगी है.
हबीबा भाभी - हाँ अब्बू लाई.
अब्बू के आने के बाद हमने चार थाली मे खाना लगाया और मैने अब्बू की थाली उठाकर अब्बू के सामने रखा, थाली रखने के लिए मुझे झुकना पड़ा, मैं घर मे अक्सर सलवार कमीज़ ही पहन ती हूँ, और दुपट्टा नही लेती हूँ, लेकिन मैने हमेशा एहतियात बरतती हूँ की अब्बू के सामने अच्छे से जाऊं. और आज मैने जो कमीज़ पहनी थी उसका गला हल्का सा डीप था, तो जैसे ही मैं झुकी, मेरी चुचियो के बीच की दरार अब्बू के सामने आ गयी.
अब्बू की नज़र जैसे ही मेरी चुचियो की घाटी पर पड़ी. तो कुच्छ सेकेंड तक उनकी नज़र वही पर ज़ाम हो गयी. लेकिन अब्बू जल्दी से होश मे आ गये और अपनी नज़र झट से परे फेर ली. ये सब बस कुच्छ ही सेकेंड मे हो गया था. जिसके बारे मे मुझे कुच्छ भी पता नही था. लेकिन आयशा भाभी ने ये नज़ारा देख लिया था. मैं अब्बू को खाना देकर वापस किचन मे आई तो आयशा भाभी ने फुसफुसाते हुए मुझसे कहा.
आयशा भाभी- क्यो शाजिया. दिखा आई अपने फूटबाल अपने अब्बू को.
मैं- (भाभी की बात ना समझते हुए ) कौन सा फूटबाल दिखाया मैने अब्बू को. मैने तो खाना दिया अभी.
मेरी बात सुनकर आयशा भाभी ने अपने हाथ मेरी चुचियो पर रखकर सहलाते हुए कहा.
आयशा भाभी- मैं इस फुटबॉल की बात कर रही हूँ. जो अभी अभी तू अब्बू को दिखा कर आ रही है.
भाभी की बात सुनकर मैने अपनी चुचियों की तरफ देखा तो मुझे एहसास हुआ की झुकने की वजह से मेरी चुचिया इस समीज़ से ज़रूर अब्बू को दिख गयी होंगी. मैने अपनी उंगली अपने मुँह मे दबाते हुए कहा.
मैं- ऑश दैयाअ. ये कैसी ग़लती हो गयी मुझसे. अब पता नही अब्बू क्या सोच रहे होंगे मेरे बारे मे.
हबीबा भाभी- क्या सोच रहे होंगे. यही सोच रहे होंगे की उनकी बेटी अब भरपूर जवान हो गयी है और कुच्छ लेने और कुच्छ देने के लायक हो गयी है.
मैं- चिईिइ. आप कितनी बेशरम हो भाभी. वो अब्बू हैं हमारे. उनके बारे मे तो इतना गंदा सोचते हुए शर्म आनी चाहिए आपको.
आयशा भाभी- शाजिया सही कह रही है. अब्बू के बारे मे ऐसा मत कहो, वैसे भी शाजिया का लेन देनका प्रोग्राम तो कब से चल रहा है अपने बाय्फ्रेंड के साथ. क्यो शाजिया सही कह रही हूँ ना मैं.
भाभी ने ये बात मुस्कुराते हुए कही थी. जिसे सुनकर हबीबा भाभी और मैं भी मुस्कुराने लगी. माने भाभी को कोहनी मारते हुए कहा.
मैं- आप ना भाभी. कभी नही सुधर सकती. हमेशा मुझे छेड़ ती रहती हो. मैने आपसे पहले भी कहा है की ऐसा कुच्छ भी नही है. जैसा आप सोच रही हैं लेकिन आप मेरी बात मानती ही नही.
लेकिन मेरी कोहनी शायद भाभी को थोड़ा ज़ोर से लग गयी, जिससे भाभी के मुँह से आआहह निकल गयी. जिसे शायद अब्बू ने सुन लिया. तभी अब्बू की आवाज़ आई.
अब्बू- तुम तीनो किचन मे क्या ख़ुसर फुसर कर रही हो. और ये आवाज़ कैसी है. तुम लोगो को खाना नही खाना है क्या जो अभी तक किचन मे ही हो. कम से कम मेरा साथ तो दे दिया करो खाने में. तुम्हारी सास तो रहती नही घर मे. और तुम सब अपने मे ही मस्त रहती हो. अब मुझे रोका है घर मे तो कम से कम मेरे साथ खाना तो खा ही सकती हो तुम लोग.
मैं- अब्बू आकर खाना खा लीजिए. आपको भूख लगी होगी ना.
अब्बू- हाँ बस आ रहा हूँ, बहुत भूख लगी है.
अब्बू की बात सुनकर हबीबा भाभी आयशा भाभी के कान मे मजाकिया लहजे मे धीरे से बोली.
हबीबा भाभी- इस बुड्ढे को बहुत भूख लगती है. इन्हे कुच्छ ऐसा खिलाना पड़ेगा की इनकी जन्मों की भूक और प्यास मिट जाए.
आयशा भाभी- तू चुप कर छोटी . हमेशा अब्बू को ऐसे बोलती रहती हो. अगर किसी दिन अब्बू ने सुन लिया तो उस दिन तुम्हे ही खा डालेंगे. फिर देखती हूँ क्या करती हो तुम.
मैं- आप दोनो हर समय अब्बू की तान ही क्यों छेड़े रहती हैं. कोई और नही मिलता क्या.
हबीबा भाभी- तुम्हे क्यों जलन हो रही है अगर हम दोनो अब्बू के बारे मे बात करते हैं. तुम ही बताओ किसके बारे मे बात करें. एक तुम्हारे भाई जान हैं जो पता नही कब घर आएँगे. तो घर मे बचा कौन तुम और अब्बू. तुम्हारे बारे मे क्या बात करू. तुम भी कम नही हो. पता नही क्या क्या गुल खिलाती रहती हो. वैसे भी अब्बू की बात करने मे मज़ा बहुत आता है.
मैं- क्या कहा. मैने क्या गुल खिलाए हैं. मैं तो हमेशा आप लोगो के साथ ही रहती हूँ.
आयशा भाभी- अच्च्छा. तूने कोई गुल नही खिलाया है. बिना गुल खिलाए ही ये पहाड़ जैसी चुचिया और ये गुब्बारे जैसी गांड हो गई है. तुम्हारे बाय्फ्रेंड ने बहुत अच्छे से इस्तेमाल किया है तुम्हारे शरीर के हर एक अंग का. तुम्हारा हर एक अंग फूला दिया है उसने. बस ये ध्यान रहे की कही किसी दिन तुम्हारा पेट ना फूला दे.
आयशा भाभी ने ये बात हंसते हुए कही. उनकी बात सुनकर मैं बुरी तरह झेंप गई. भाभी की बात सही थी. मेरा बाय्फ्रेंड बहुत बुरी तरह चुदाई करता था मेरे साथ. एक एक अंग मसल देता था. रगड़ रगड़ कर चोदता था मुझे. उसी का नतीज़ा था की मेरा फिगर शादी के पहले ही 36 30 38 हो गया था. जिसे भाभी की अनुभवी आँखो ने पहचान लिया था, लेकिन मैं भाभी से इस बारे मे एक परदा रखना चाहती थी, इसलिए मैने भाभी की बात का जवाब देते हुए कहा.
मैं- ये कैसी बात कर रही हो भाभी, ऐसा कुच्छ नही है जैसा आप सोच रही हैं, ये सब तो नॅचुरल है. जैसे किसी किसी का उमर के हिसाब से ज़्यादा बड़ा हो जाता है उसी तरह मेरा भी कुच्छ बड़ा हो गया है, लेकिन इसका मतलब ये नही है की मैं बाहर किसी के साथ ये काम करती हूँ.
आयशा भाभी- अब ज़्यादा बहाने बनाने की कोशिश मत करो. मुझे मालूम है की ये नॅचुरल है या आर्टिफिशियल. तुम्हे ना बताना हो तो मत बताओ, लेकिन जो भी तुम्हे देखेगा वो तुरंत जान जाएगा की ये लड़की दिल खोल कर ठुकवाती है. आख़िर अनुभव नाम की भी कोई चीज़ होती है.
मैं- क्या भाभी आप भी ना कुच्छ भी बोलती रहती हैं. ऐसा कुच्छ नही है जैसा आपने कहा. और आप जैसे बात कर रही हैं. उस हिसाब से तो मुझे लगता है की आपने भी कुच्छ कम नही हैं भाभी.
अभी हम बात कर ही रहे थे की अब्बू ने हमे आवाज़ लगाई.
अब्बू- अरे बहू खाना तो खिलाओ, बहुत जोरो की भूख लगी है.
हबीबा भाभी - हाँ अब्बू लाई.
अब्बू के आने के बाद हमने चार थाली मे खाना लगाया और मैने अब्बू की थाली उठाकर अब्बू के सामने रखा, थाली रखने के लिए मुझे झुकना पड़ा, मैं घर मे अक्सर सलवार कमीज़ ही पहन ती हूँ, और दुपट्टा नही लेती हूँ, लेकिन मैने हमेशा एहतियात बरतती हूँ की अब्बू के सामने अच्छे से जाऊं. और आज मैने जो कमीज़ पहनी थी उसका गला हल्का सा डीप था, तो जैसे ही मैं झुकी, मेरी चुचियो के बीच की दरार अब्बू के सामने आ गयी.
अब्बू की नज़र जैसे ही मेरी चुचियो की घाटी पर पड़ी. तो कुच्छ सेकेंड तक उनकी नज़र वही पर ज़ाम हो गयी. लेकिन अब्बू जल्दी से होश मे आ गये और अपनी नज़र झट से परे फेर ली. ये सब बस कुच्छ ही सेकेंड मे हो गया था. जिसके बारे मे मुझे कुच्छ भी पता नही था. लेकिन आयशा भाभी ने ये नज़ारा देख लिया था. मैं अब्बू को खाना देकर वापस किचन मे आई तो आयशा भाभी ने फुसफुसाते हुए मुझसे कहा.
आयशा भाभी- क्यो शाजिया. दिखा आई अपने फूटबाल अपने अब्बू को.
मैं- (भाभी की बात ना समझते हुए ) कौन सा फूटबाल दिखाया मैने अब्बू को. मैने तो खाना दिया अभी.
मेरी बात सुनकर आयशा भाभी ने अपने हाथ मेरी चुचियो पर रखकर सहलाते हुए कहा.
आयशा भाभी- मैं इस फुटबॉल की बात कर रही हूँ. जो अभी अभी तू अब्बू को दिखा कर आ रही है.
भाभी की बात सुनकर मैने अपनी चुचियों की तरफ देखा तो मुझे एहसास हुआ की झुकने की वजह से मेरी चुचिया इस समीज़ से ज़रूर अब्बू को दिख गयी होंगी. मैने अपनी उंगली अपने मुँह मे दबाते हुए कहा.
मैं- ऑश दैयाअ. ये कैसी ग़लती हो गयी मुझसे. अब पता नही अब्बू क्या सोच रहे होंगे मेरे बारे मे.
हबीबा भाभी- क्या सोच रहे होंगे. यही सोच रहे होंगे की उनकी बेटी अब भरपूर जवान हो गयी है और कुच्छ लेने और कुच्छ देने के लायक हो गयी है.
मैं- चिईिइ. आप कितनी बेशरम हो भाभी. वो अब्बू हैं हमारे. उनके बारे मे तो इतना गंदा सोचते हुए शर्म आनी चाहिए आपको.
आयशा भाभी- शाजिया सही कह रही है. अब्बू के बारे मे ऐसा मत कहो, वैसे भी शाजिया का लेन देनका प्रोग्राम तो कब से चल रहा है अपने बाय्फ्रेंड के साथ. क्यो शाजिया सही कह रही हूँ ना मैं.
भाभी ने ये बात मुस्कुराते हुए कही थी. जिसे सुनकर हबीबा भाभी और मैं भी मुस्कुराने लगी. माने भाभी को कोहनी मारते हुए कहा.
मैं- आप ना भाभी. कभी नही सुधर सकती. हमेशा मुझे छेड़ ती रहती हो. मैने आपसे पहले भी कहा है की ऐसा कुच्छ भी नही है. जैसा आप सोच रही हैं लेकिन आप मेरी बात मानती ही नही.
लेकिन मेरी कोहनी शायद भाभी को थोड़ा ज़ोर से लग गयी, जिससे भाभी के मुँह से आआहह निकल गयी. जिसे शायद अब्बू ने सुन लिया. तभी अब्बू की आवाज़ आई.
अब्बू- तुम तीनो किचन मे क्या ख़ुसर फुसर कर रही हो. और ये आवाज़ कैसी है. तुम लोगो को खाना नही खाना है क्या जो अभी तक किचन मे ही हो. कम से कम मेरा साथ तो दे दिया करो खाने में. तुम्हारी सास तो रहती नही घर मे. और तुम सब अपने मे ही मस्त रहती हो. अब मुझे रोका है घर मे तो कम से कम मेरे साथ खाना तो खा ही सकती हो तुम लोग.