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बजाज का सफरनामा

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मैंने शाम को उसे लिफ्ट ऑफर की और उसे मेरे साथ कॉफी पीने के लिए कहा.. तो वो तैयार हो गई। हम नॉएडा गये हमने कॉफी पी और वो मेरी फैमिली और गर्लफ्रेंड के बारे में पूछती रही। मैंने कहा कि मेरी कोई गर्लफ्रेंड नहीं है उसने फिर पूछा कि कभी सेक्स किया है। मैंने कहा कि नहीं बस तुम्हारा ही इंतज़ार कर रहा था.. वो ज़ोर-ज़ोर से हँसने लगी। अब मेरी भी हिम्मत बड़ने लगी थी। मैंने भी उसकी सेक्स लाईफ के बारे में पूछा.. तो उसने कहा कि उसकी सेक्स लाइफ नॉर्मल नहीं है.. वो 2-3 महीने में एक बार सेक्स करते है.. उसका पति घर के बाहर रंडियों को चोदता है। मैंने कहा कि तुम क्यों नहीं करती.. तो फिर ये सुनकर वो मेरी और अजीब से देखने लगी और कहा कि चलो.. मुझे लगा कि वो बुरा मान गई है खैर में चुप रहा और कार में बैठ गया। हम घर की और चल दिये.. हम घर पहुँचने ही वाले थे कि उसने कार एक सुनसान रास्ते की और मुड़वाई और वहीं रूकने को कहा तो मैंने कार रोक दी। एकदम अंधेरा और सुनसान रोड था.. उसने कार अंदर से बंद की और लाइट भी ऑफ कर दी.. वो मेरे करीब आई और बोली कभी किसी औरत को किस किया है.. तो मैंने कहा कि नहीं। वो मेरे और करीब आई और बोली तो फिर करो।

मैंने कहा मतलब.. तो वो बोली मुझे किस करो। मैंने जल्दी से छोटा सा किस कर दिया.. वो मुस्कुराई और बोली शायद तुम सच कह रहे हो.. तुमने अभी तक किसी लड़की को नहीं छुआ है.. वो बोली में बताती हूँ कि किस कैसे करते है। उसने अपने दोनों हाथ मेरे होठों पर रख दिए और जीभ को अंदर बाहर करने लगी। वो ऐसे कर रही थी कि मेरा लंड एकदम तन गया और उसे चोदने को बेताब होने लगा। वो भी ये सब भांप चुकी थी। उसने कहा की अभी तो तुम मुझे नहीं चोद सकते हो.. क्योंकि घर जल्दी जाना है.. लेकिन में तुम्हे जल्द ही जन्नत दिखाउंगी। उसने मेरी चैन खोली और अंडरवेयर से लंड को बाहर निकाला.. तो लंड को देखकर वो बोली कि काफ़ी बड़ा है तुम्हारा लंड। फिर उसने लंड की खाल नीचे की.. फिर उसने प्यार से थप्पड़ मारकर बोला कि झूठ बोलते हो.. तुम्हारा लंड पहले भी चूत चोद चुका है। मैंने कहा हाँ एक दो बार.. फिर वो मेरे लंड को सहलाने लगी और फिर उसे मुँह में ले लिया और लंड को चूसने लगी।
 
में इतना ज्यादा उत्तेजित था कि कुछ ही देर में उसके मुँह में झड़ गया। उसने पूछा कि मज़ा आया.. तो मैंने कहा कि मज़ा तो आया.. लेकिन अधूरा। वो हँसी और बोली कि कल सुबह हम दोनों ऑफीस नहीं जायेंगे और वो मेरे घर 9 बजे आ जायेगी और पूरे दिन हम साथ रहेंगे। फिर जितना चाहो चूत की पूजा और दर्शन करना। मैंने फिर उसे घर छोड़ दिया और घर पहुँच कर में सुबह का ही इंतज़ार कर रहा था। में सुबह 6 बजे ही जाग गया और उसे फोन किया तो वो बोली कि अभी तो 6 ही बजे है। मैंने कहा कि बस जल्दी आ जाओ बस.. अब इंतजार ही नहीं हो रहा है। सुबह करीब 8:30 बजे बेल बजी और मैंने दरवाज़ा खोला.. तो सामने वो खड़ी थी।

उसने एक सिल्क की साड़ी पहन रखी थी और वो ग़ज़ब का माल लग रही थी। वो अंदर आई और बात करने लगी। में उसके पास गया और उसे किस करना शुरू कर दिया। उसने कहा कि आराम से और में किस किये जा रहा था। फिर में एक हाथ से उसकी निप्पल और दूसरे हाथ से उसकी चूत रगड़ रहा था। अब वो भी धीरे-धीरे गर्म हो रही थी। मैंने उसे बेड पर लेटाया और नंगा कर दिया.. फिर मैंने अपने भी सारे कपड़े उतार दिए। अब हम दोनों बिल्कुल नंगे थे और चोदन क्रिया को तैयार थे। मैंने लंड को पकड़ा और उसकी चूत में लंड डाला.. काफ़ी टाईट चूत थी उसकी.. लगता था कि बहुत कम चुदी हुई है। में धीरे-धीरे धक्के मार रहा था और वो भी धीरे-धीरे मधहोश हुये जा रही थी। उसकी चूत एकदम साफ थी.. मैंने पूछा कि बड़ी चिकनी है तेरी चूत.. तो वो बोली सुबह-सुबह तेरे लिए ही साफ की है.. वरना कल तो बालों से भरी हुई थी। अब मैंने धक्को की स्पीड बड़ा दी.. वो कहने लगी कि चूत के बाहर झड़ना.. वरना कहीं बाद में गड़बड़ ना हो जाये। में इतनी ज़ोर-ज़ोर से धक्के मार रहा था कि साला लंड अंदर ही झड़ गया.. वो एकदम उठी और भागी और मूतने लगी। में बाहर खड़ा हो कर उसे मूतते हुए देख रहा था।

मैंने कहा कि इतनी जल्दी क्या थी मूतने की.. तो वो बोली ताकि बाद में ज्यादा गड़बड़ ना हो.. वो खड़े होकर मेरे पास आई और मेरे लंड को पकड़कर बोली.. अब तो भूख मिट गई होगी तेरे लंड की। मैंने उसके दोनों बूब्स पकड़ लिए और दबाने लगा। पहला सेक्स किये हुये हमे 15 मिनट ही हुए थे और में दूसरे राउंड के लिये तैयार था। हम बाथरूम में ही थे.. में उसके पीछे गया और उसके बूब्स बहुत ज़ोर से दबाने लगा। उसके निप्पल रगड़ने में तो बहुत ही मज़ा आ रहा था। उसके बूब्स भी एकदम तन गये थे। अब मैंने उसे आगे की और झुकाया और पीछे से लंड उसकी चूत में प्रवेश कराया.. जैसे जैसे लंड अंदर जा रहा था वैसे वैसे उसकी सिसकियाँ तेज हो रही थी। में धक्के पर धक्के मारे जा रहा था और वो सिसकियाँ लेती जा रही थी। लगभग 15-20 मिनट के बाद लंड झड़ने को तैयार था और इस बार मैंने लंड उसके बूब्स पर झाड़ दिया।
 
अब करीब 10 बजे थे। मैंने उससे कुछ नाश्ता बनाने को कहा और उसने ब्रेड-आमलेट बना दिया। मैंने वो खा लिया और अब 11 बज चुके थे.. मैंने उससे पूछा कि तुम क्या खाओगी? तो वो बोली जो तुम खिलाओ। मैंने कहा कि जेम रोल बनाकर खिलाता हूँ.. वो बोली कि ये क्या है? मैंने कहा थोड़ा इन्तजार करो.. में किचन में गया और 2 मिनट बाद वापस आया। मैंने अपने लंड को पेपर से ढक रखा था.. वो बोली क्या है दिखाओ? मैंने पेपर हटाया और वो देखकर वो ज़ोर-ज़ोर से हँसने लगी। मैंने अपने लंड पर जेम और बटर लगा रखा था। मैंने कहा कि नाश्ता तैयार है खा लीजिये.. वो हंसते हुए लंड को हाथ में लेकर चाटने लगी और फिर चूसने लगी.. क्योंकि हम 3 घंटे में 2 बार पहले ही सेक्स कर चुके थे.. इसलिये लंड अब जल्दी नहीं झड़ा। उसने आराम से लंड को चाटा और चूसा.. लेकिन लंड नहीं झड़ा।

अब फिर से बारी थी उसे चोदने की.. एक बार उसे डॉगी स्टाइल में चोदना था। वो डॉगी स्टाइल में बैठ गई.. फिर मैंने लंड चूत में ना डालकर उसकी गांड में डाल दिया.. अरे क्या ग़ज़ब का टाईट छेद था, मज़ा आ गया.. लेकिन उसकी तो चीख निकल गई। मैंने कहा कि कुछ देर सहन कर लो फिर मज़ा आयेगा। 10 मिनट चोदने के बाद लंड को उसकी गांड में ही झाड़ दिया। अब हम नहाकर कुछ देर बाहर घूमने मार्केट में गये। मैंने उससे कहा कि घर पहुँचकर और भी स्टाईल ट्राई करेंगे.. तो वो मुस्कुराने लगी।

उस दिन हम पहले ही 3 बार सेक्स कर चुके थे और घर पहुँचकर हमने 3 बार फिर से सेक्स किया और अब रात के 8 बज चुके थे और उसके घर जाने का टाईम हो चुका था। वो घर जाने लगी तो मैंने कहा कि एक बार आखरी बार और कर लो.. तो अब उसने मुझे लेटाया, मेरी चैन खोली और लंड निकाला। उसने अपनी पेंटी उतारी साड़ी ऊपर की और वो लंड पर बैठ गई। अब हम कपड़े पहनकर ही सेक्स कर रहे थे.. वो लंड चूत के अंदर लेकर उछले जा रही थी। कुछ देर बाद में झड़ गया.. लेकिन कुछ बूंदे उसकी साड़ी पर भी गिर गई। उस पूरे दिन हमने 7 बार सेक्स किया और शाम तक में पूरी तरह से थक चुका था। मैंने 2 ग्लास जूस पिया। फिर कुछ जान में जान आई.. उसके बाद हमने ना जाने कितनी बार सेक्स किया ।।
 
दोस्तों कैसे लगी कहानी जरूर बताना
 
ऋतू के साथ

ऋतु गावं में रहने के कारण बस 10वीं तक ही पढ़ी थी और फिर उसके घरवालों ने उसकी पढ़ाई रुकवा दी.. क्योंकि गावं का माहोल काफ़ी खराब था और इसलिये ऋतु को वो हमेशा घर में ही रखते थे.. इसलिये वो शायद इतनी गोरी थी। ऋतु और मेरी खूब जमती थी और हम बेस्ट फ्रेंड्स थे और ना उसके कोई बॉयफ्रेंड था और ना मेरे कोई गर्लफ्रेंड थी और हर साल की तरह जब वो मेरे घर आई.. तो में खुश हो गया.. क्योंकि मुझे अकेलापन बिल्कुल पसंद नहीं था.. पर इस साल ऋतु पर कुछ ख़ास नज़र पड़ रही थी। उसके बूब्स और गांड हद से ज़्यादा बड़े लग रहे थे और उसकी अदायें भी कामुक थी और यह बाते मेरे दिमाग़ में चुम्बक जैसे चिपक गई थी और मेरे दिमाग पर उसे चोदने का भूत सवार होने लगा.. वो मम्मी के कामों में अक्सर मदद किया करती और में उसे देखा करता। जब वो कपड़े धोती.. तो उसका सलवार और आधा बदन गीला हो जाता और उसकी गांड की दरार साफ दिखती और जब वो झाडू लगाती और बर्तन धोती.. तो मुझे उसके बूब्स के दर्शन हो जाते और में ये सब देखकर मूठ मार लिया करता था।

हम दोनों एक ही रूम में सोते थे और सोने से पहले देर रात तक बातें करते और बताते कि मुझसे क्या हुआ? किसने क्या किया और हम कभी किसी से बातें नहीं छुपाते.. जैसे अक्सर भाई बहन में लिमिट होती है.. हमारे बीच वो बहुत कम थी। एक दिन जब में सोकर उठा.. तो मैंने देखा कि पापा और मम्मी कही जाने की तैयारी कर रहे है और यही जानने के लिए जब में मम्मी के पास गया.. तो मम्मी ऋतु को बता रही थी कि खाना गर्म ही खाना और दोनों बाहर भी नहीं जाना और जाओ और लॉक को दो बार चेक करना।

तभी मैंने मम्मी को बीच में टोकते हुये पूछा कि बात क्या है पैकिंग क्यों की जा रही है.. तो मम्मी ने कहा कि हमारे दूर के चाचा जी की डेथ हो गई है। मुझे कोई प्रोब्लम ना हो इसलिये मम्मी ने मुझे और ऋतु को घर पर ही रहने को कहा और ऋतु को कुछ पैसे दे दिये। फिर दोपहर को में उन्हे रेलवे स्टेशन पर ड्रॉप कर वापस घर आया। फिर मैंने जब डोर बेल बजाई.. तो ऋतु ने दरवाज़ा खोला और उसकी आँखों में एक चमक नज़र आ रही थी और फिर ऋतु ने खाना लगाया और हमने खा लिया।

फिर ऋतु उसकी साईड से ही मेरे बर्तन उठाने लगी और उसकी कमीज़ से उसके बूब्स नज़र आने लगे। मेरी पूरी नज़र वही थी और ऐसा लग रहा था कि सब कुछ स्लो मोशन में हो रहा है। फिर वो बर्तन किचन में रखकर धोने लगी और में उसी को देख रहा था और बर्तन धोते हुये उसकी कमीज़ ऊपर से गीली हो गई और में नज़ारा देखने के लिये चला गया। पानी पीने के बहाने में पानी पीते समय उसके बूब्स को देख रहा था। उसकी कमीज़ पूरी तरह से बूब्स से चिपक गई थी और में उसे देख ही रहा था कि उसकी नज़र मुझ पर पड़ी और मैंने नज़र हटाई और पतली गली से निकलने की सोची। फिर में जा ही रहा था कि उसने मुझे रोकते हुये पूछा। (गुस्से में नहीं नॉर्मली और नॉटी स्टाईल से)
 
ऋतु : तुम दिनभर मुझे क्यों घूरते रहते हो? (मेरी तो आधी फट गई थी)

में : नहीं तो मेडम.. कब घूरता हूँ? ऐसा तो कुछ नहीं है।

ऋतु : अच्छा जब में बर्तन धोती हूँ.. कपड़े धोती हूँ और बाकि काम करती हूँ। फिर मैंने सोचा कि झूठ बोलूँगा.. तो और फंस जाऊंगा और मैंने सामने रखे बर्तनो को देखकर कहा।

में : में तो बस सोच में डूब जाता हूँ कि तुम सारा काम इतनी अच्छे से कैसे कर लेती हो.. अगर मैंने ट्राई किया.. तो नज़ारा कुछ और ही रहेगा।

ऋतु : ओह.. तो तुम्हे मेरा काम इतना अच्छा लगता है। (और फिर उसने मेरा हाथ पकड़ लिया)

में : और नहीं तो क्या? तुम्हारे बर्तन कितने अच्छे से चमकते रहते है।

ऋतु : ओह रियली.. कौनसे ऊपर वाले या नीचे वाले?

में : मुझे सारे पसंद है.. पर काम ऊपर से नीचे हो तो अच्छा लगता है ना।

ऋतु : बाप रे तुमसे इन बातों में कोई नहीं जीत सकता.. राहुल मेरा एक काम करोगे?

में : हाँ बोलो मेडम जी।

ऋतु : पीछे से मेरी ब्रा का हुक ठीक कर दो ना.. पता नहीं क्यों 5-10 मिनट से चुभ रहा है और फिर मैंने उसकी कमीज़ उठाई.. तो वो उसके शरीर से बिल्कुल चिपक रही थी.. इसलिये मैंने उसे पूरा उतारना चाहा। फिर मैंने सोचा कि वो विरोध करेगी.. पर उसने खुद अपने हाथ ऊपर करके मुझे कमीज़ निकालने में हेल्प की.. और अब वो मेरी तरफ पीठ करके सिर्फ़ ब्रा में थी। उउउफ़फ्फ़ क्या बदन था उसका और बिना कमीज़ के उसकी उभरी हुई गांड भी कमाल की लग रही थी.. आपको क्या बताऊँ? उसकी दूध के रंग की पीठ को देखकर में किसी और दुनिया में पहुँच गया। फिर तभी वो बोली कि क्या हुआ? जल्दी करो। फिर मैंने उसका हुक ठीक करने के बजाये पूरा हुक खोल दिया और अब उसकी ब्रा उसके हाथ में थी और में धीरे धीरे उसकी पीठ को एक उंगली से सहलाने लगा और अब वो भी बड़ी अजीब आवाजें हम्मम्म अहह निकाल रही थी और मुँह इधर उधर कर रही थी।

फिर मैंने उसे अपनी तरफ मोड़ा और वो मुझसे चिपक गई.. मतलब गले लग गई। उसके नंगे बूब्स जब मेरी छाती से टच हुये.. तो मेरे अंदर सनसनी होने लगी और मेरा लंड लोहे की राड़ की तरह खड़ा हो गया और उसकी चूत पर मेरा लंड रगड़ने लगा। फिर हमने एक किस किया और में उस समय एक अलग ही दुनिया में था। 15-20 मिनट तक मेरे लिये तो समय रुक ही गया था और में जन्नत में पहुँच चुका था। हमने अपना थूक एक्सचेंज किया और हम एक दूसरे की जीभ चूस रहे थे.. क्या बताऊँ यारों? में तो जन्नत में था और वो मेरी अप्सरा थी। फिर मुझे थोड़ा होश आया और में किस करते करते उसके बूब्स दबाने लगा और फिर उसे वही पर लेटा दिया और उसकी सलवार और पेंटी उतारकर अपने भी कपड़े उतार दिये।

फिर मैंने सोचा कि लेटकर उसकी चूचीयां दबाऊँ.. लेकिन मेरे लेटने से पहले ही उसने मेरा लंड जो कि पूरा 7 इंच का हो गया था और उसको पकड़कर आगे पीछे करने लगी और सारा मज़ा अकेले ही लूटेगा क्या? ऐसा बोलकर मेरा लंड चूसने लगी। वो तो जानवर जैसे मेरे लंड को चूस रही थी। में तो सातवें आसमान पर था और फिर 5 मिनट तक लंड चूसने के बाद वो मेरे अंडो को चूसने लगी और फिर बोली कि आज तो तोड़ दे मेरी सील और बन जा बहनचोद और फाड़ डाल मेरी चूत। वो भी पूरे जोश में थी और फिर में उसके ऊपर लेटा। (ये सब किचन में ही हुआ) फिर उसके एक बूब्स को आम जैसे चूसने लगा.. साथ ही साथ एक हाथ से दूसरा बूब्स मसलने लगा और दूसरे हाथ की उंगली को चूत में डालकर रगड़ने लगा.. वो पूरी उछल रही थी और चिल्लाने लगी.. हमम्म आहह उउउहह ससस्स और बोली और ना तड़पा मार दे मेरी चूत और अगर अब नहीं डाला.. तो में तड़पते तड़पते मर जाउंगी।

फिर मैंने अपना मुँह उसकी गुलाबी चूत के पास किया.. वहां पर एक भी बाल नहीं था और हल्का हल्का पानी निकल रहा था और उसकी खूशबु मेरी नाक में जा रही थी। फिर मैंने हल्की सी जीभ उसकी चूत पर लगाई.. क्या गर्म चूत थी और फिर में उसे चाटने लगा और वो आअहह उम्म्म ह्म्म्मम्म जैसी आवाजें निकालने लगी। फिर मैंने अपने हाथ के बीच की उंगली उसकी चूत में डाली.. वो बहुत टाईट थी। उसकी सील भी टूटी हुई नहीं थी.. वो वर्जिन थी और में भी अब मैंने अपनी उंगली पूरी तरह से उसकी चूत में डाल दी और आगे पीछे करने लगा और वो सिसकियां भरती रही। फिर मैंने अपना लंड उसकी चूत के दरवाज़े पर रखा और डालने की कोशिश की और वो आधे से थोड़ा कम चूत में चला गया.. तभी वो ज़ोर से चिल्लाई आआहाआ और उसकी आँखों से आँसू आने लगे और वो छटपटाने लगी.. लेकिन मैंने ध्यान नहीं देते हुये पूरा लंड उसकी चूत में घुसा दिया। मुझे भी थोड़ा दर्द महसूस हुआ.. क्योंकि उसकी चूत काफ़ी टाईट थी और इस बार वो फिर चिल्लाने लगी।

फिर मैंने उसे किस करने की सोची और दोनों तरफ काम जारी रखा और दो तीन झटके और दे दिये और होंठ हटाकर उसके बूब्स चूसने लगा.. वो आह आ आ हम्म्म्म करने लगी। फिर 5 सेकंड के ब्रेक के बाद फिर मैंने जब उसकी चूत में लंड डाला और स्पीड बढ़ा कर चोदने लगा.. तो में 5 मिनट तक रुका ही नहीं और अब वो भी गर्म हो गई थी और गांड उछाल उछाल कर चुदवा रही थी और आआहह सस्स्सस्स उम्म आअहह करके सिसकियां ले रही थी। इससे मेरा कॉन्फिडेन्स और बढ़ रहा था और अब उसकी गुलाबी रंग की चूत लाल रंग की चूत हो चुकी थी। फिर मैंने उसे घोड़ी बनाया और लंड चूत में डाल दिया.. इस बार लंड जल्दी अंदर चला गया.. क्योंकि वो चुदाई के दौरान दो तीन बार झड़ चुकी थी और में अब तक इसलिये नहीं झड़ा.. क्योंकि मैंने सुबह ही मम्मी और उसके नाम की मूठ मारी थी।
 
फिर अब मैंने उसे घोड़ी बनाकर चोदने के बाद उसे खड़ा करके डाइनिंग टेबल पर बिठाकर उसकी एक टाँग ऊपर अपने कंधे पर रख दी और उसे किस करते करते चोदा और फिर 5 मिनट बाद में भी झड़ गया। फिर चोदते चोदते पता ही नहीं चला कि कब दोपहर से शाम हो गई और फिर हम वही किचन में एक दूसरे की बाहों में लेट गये और फिर हम 7 बजे उठे। तब ऋतु और मैंने खाने की तैयारी की.. क्योंकि पूरे हफ्ते भर के लिए भी तो एनर्जी चाहिये थी। उसने खाना बनाया और हमने एक ही थाली में खाना खाया और पानी की जगह दूध पिया वो भी एक ही ग्लास में.. क्योंकि मुझे पता था कि उससे ताकत मिलती है। फिर रात को मैंने उसकी बहुत जमकर चुदाई की ।।
 
भाइयो कुछ कमेंट नहीं आ रहे लगता है मेरी कहानिया आप लोगो को कम पसंद आ रही ह अगर आपको मेरी कहानी में कुछ गलत लगे तो जरूर बताना ताकि में वैसी गलती दुबारा न कर
 
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