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बजाज का सफरनामा

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दुकान में धमाल

में संजय आपके लिए अपनी एक और कहानी लेकर आया हूँ।

जब ये घटना घटी उस समय मेरी उम्र 20 साल थी और में जब 12वीं क्लास में पढ़ता था। हमारी गली के मोड़ पर एक जनरल स्टोर हुआ करता था।

में वहाँ से सुबह के समय रोज़ कुछ ना कुछ खरीदता था जैसे टोफ़ी चॉकलेट, सुपारी, मैग्गी आदि। सुबह के समय दुकान रेणु आंटी संभालती थी रेणु आंटी एक मजाकिया औरत थी। उनके 2 छोटे छोटे बच्चे थे और उनकी उम्र उस समय लगभग 38 साल होगी। आंटी का रंग एकदम गोरा था और जब भी में सुबह सुबह उनकी दुकान जाता तो उनके बूब्स को नज़र चुरा कर देखता था उनके बूब्स ना ज्यादा बड़े थे और ना बिल्कुल छोटे । वो ज्यादातर साड़ी पहनती थी जिसमें उनकी उठी हुई गांड ज़बरदस्त लगती थी।

जब भी में उनकी दुकान पर जाता था तो उनसे कही देर तक बाते करता कभी कभी में उनको मौका देख के उनकी गांड पर हाथ से स्पर्श सुख भी प्राप्त कर लेता था एक दिन में जब उनकी दुकान पर पहुंचा तो वो सफाई कर रही थी उनके काउंटर के पास एक किताब पड़ी थी अब में उनके सामने खड़ा था, लेकिन उन्होंने मुझे देखा ही नहीं। फिर आज मुझे भी शरारत सूझी तो में चुपचाप दुकान के अंदर पहुँच गया, लेकिन आंटी ने मुझ पर ध्यान नहीं दिया,

मुझे शरारत सूझी और सोचा आज आंटी को डराता हूँ। फिर में जैसे ही आंटी के पीछे से जाकर उन्हें डराने गया तो वो डर के मेरे गले लग गयी उसके बूब्स के स्पर्श से मेरा लण्ड खड़ा हो गया तभी मेरी नज़र उस किताब पर पड़ी जो काउंटर पर पड़ी थी। मेरे तो होश ही उड़ गये, उस किताब में बड़ी-बड़ी नंगी चुदाई की तस्वीरे थी। मेरे जिस्म में कपकपी होने लगी। फिर में चुपचाप कुछ देर तक वहीं खड़ा रहा और फिर ना ज़ाने क्यों मुझे मस्ती सी चढ़ने लगी? इतने में आंटी ने मुझे देख लिया और बोली ओह हो तो पीछे से दूरदर्शन हो रहे है। सुबह-सुबह होने के कारण ग्राहक बहुत ही कम होते है जो एक दो होते भी है वो भी छोटे बच्चे ही होते थे। अब में उनकी बात सुनकर शरमा गया और बोला आंटी गंदी बात मत करो और मुझे चॉकलेट दे दीजिए, मुझे स्कूल जाना है। वो बोली हाँ हाँ जितनी चाहे चॉकलेट ले ले, लेकिन मुझे भी चॉकलेट खिलानी होगी।
 
मैंने कहा नहीं में तो अपनी चॉकलेट नहीं दूँगा, मुझे लगा वो मेरी चॉकलेट में से हिस्सा माँग रही है। फिर वो हंस पड़ी और बोली पागल में तुझे ये वाली 10 चॉकलेट दूँगी, लेकिन तू मुझे अपनी एक चॉकलेट देगा तो। फिर में बड़ा परेशान हो गया। फिर मैंने कहा मेरे पास कहाँ चॉकलेट है आंटी, तो उन्होंने मेरी पेंट पर हाथ रखा और मेरे खड़े लंड को सहलाकर सिसकी भरते हुए कहा ये वाली। फिर मैंने कहा कि छी ये तो गंदी चीज़ है, इससे तो में पेशाब करता हूँ। वो बोली बेटा ये बहुत काम का औजार होता है इसके बहुत सारे काम है। एक काम कर, तू बैग यहाँ रख और ये तीन चॉकलेट अपने बैग में रखकर पीछे वाले बाथरूम में जा, में वहीं आती हूँ।

फिर मैंने कहा कि नहीं मुझे स्कूल जाना है तो उन्होंने कहा कि अरे में तेरे बस 10 मिनट लूँगी और वैसे भी तुझे हर एक मिनट की मैंने एक चॉकलेट दे तो दी है, अब नखरे क्यों कर रहा है? फिर मैंने सोचा चलो 10 मिनट और सही। फिर में चुपचाप उसके बाथरूम में जाकर गया और पीछे-पीछे आंटी भी आ गई। उनके हाथ में वही किताब थी और आते ही उन्होंने मेरी शर्ट और पेंट को उतार दिया। अब में शर्म के मारे पानी-पानी हो गया और अपने लंड को अपने हाथ से छुपा लिया। फिर सुधा आंटी ने अपनी साड़ी और सब कुछ उतार दिया। वो पागलों की तरह जल्दी-जल्दी अपने कपड़े उतार रही थी, मानों जैसे उन्हें बहुत गर्मी लग रही हो। अब में एक कोने में चुपचाप सहमा सा खड़ा था और मुझे बिल्कुल पता नहीं था कि आगे क्या होगा?

फिर आंटी ने अपने कपड़े उतार कर मेरा 6.5 इंच का लंड अपने हाथ में ले लिया। अब में पीछे होने लगा तो वो बोली कि डर मत संजू, में तुझे खा थोड़ी जाऊँगी। बस तेरे लंड को टेस्ट करूँगी। फिर मैंने कहा कि आंटी ये बहुत गंदी है, तो उन्होंने वो किताब खोली और मुझे एक फोटो दिखाया और कहा कि देख ये भी तो यही कर रही है। अब जल्दी कर इतना टाईम नहीं है। फिर में चुप हो गया और उन्होंने मेरा पूरा लंड अपने मुँह में ले लिया और चूसने लगी। अब मुझे अंदाज़ा भी नहीं था कि मुझे इतना मज़ा आयेगा। अब वो भूखी शेरनी की तरह घुटनों के बल बैठी मेरे लंड को चूस रही थी और मेरे आंड भी चाट रही थी और में किताब में छपे फोटो देख रहा था। अब मेरा छोटा सा 6.5 इंच का लंड बिल्कुल तना हुआ उनके मुँह में था। फिर मैंने एक फोटो देखा जिसमें लड़का औरत की चूत चाट रहा था। मैंने आंटी से कहा कि आंटी ऐसे करे, तो आंटी हंसकर बोली कि भोसड़ी के चूत चाटेगा। अभी तो बोल रहा था ये सब गंदा है तो में शरमा गया।
 
अब मेरा पूरा जिस्म अकड़ गया था और इतने में दरवाज़ा किसी ने खटखटाया तो उसने आवाज़ लगाई और बोली कौन है? तो बाहर से उनके पति की आवाज़ आई और वो बोले कि बहनचोद किसकी माँ चोद रही है दरवाज़ा तो खोल, में भी तो देख लूँ। अब में बुरी तरह से डर गया और रोने लग गया। फिर वो बोली कि तू क्यों अपने अंकल से डर रहा है? ये तो खुद मुझे अपने दोस्तों से चुदवाकर बैठकर देखता है। फिर उसने थोड़ा सा दरवाज़ा खोला तो अंकल ने अंदर गर्दन डालकर देखा और मुझे उसके नीचे देखकर बोला क्यों इस बेचारे का दम निकाल रही है? में इतने सारे लंड दिलवाता तो हूँ। अब में अंकल से नज़र नहीं मिला पा रहा था।

फिर वो बोली कि अजी तुम जाओ और मुझे अपना काम करने दो, खुद से तो कुछ ढंग से होता नहीं, में रात से बोल रही हूँ चोद दो चोद दो, फिर किताब देखकर मुझे सेक्स चढ़ा हुआ था तो सोचा कि इससे ही प्यास बुझा लूँ। अब तुम जाओ और दुकान पर बैठो, में 10 मिनट में आ रही हूँ और दरवाज़ा बंद कर दिया। फिर वो मुझसे बोली कि बेटा तू डर मत कोई प्रोब्लम नहीं है तू मजे कर। फिर वो मेरे लंड को सहलाने लगी और अपने बूब्स से रगड़ने लगी। अब मेरा लंड फिर से तन गया। फिर वो हँसकर बोली कि ये तो बड़ी जल्दी तैयार हो गया। चल अब तुझे असली जन्नत की सैर करवाती हूँ। ये कहते हुए वो मेरे लंड पर अपनी गांड पर रखकर बैठ गई और अपनी रोटी जैसी चूत धीरे से मेरे लंड पर सटाकर दबाने लगी। अब मेरा लंड उसकी गीली चूत में पूरा समा गया था। मुझे ऐसा लगा कि मानो जैसे मेरा लंड भट्टी में हो। अब मेरे दोनों हाथों को उसने अपनी चूची पर रखकर उन्हें मेरे हाथों में थमाकर कहा जितनी जान हो उतनी जान लगाकर उन्हें खींच।

फिर में ऐसा ही करने लगा और अब वो ज़ोर-ज़ोर से उछलने लगी और चिल्लाने लगी, आआआई दैयय्या उूउउम्म्म्मममम आआआआआआआ चोद डाल संजू, आआआआआई हाआआआआआआई हाआआआ उूउउइ, मेरी चूत की सारी गर्मी निकाल दे। अब में उनके नीचे पड़ा हुआ उनकी चूत से चुद रहा था, लेकिन उनका वज़न बहुत था तो में नीचे दब भी रहा था। फिर मैंने कहा कि आंटी में नीचे दब गया और मुझे सांस भी नहीं आ रही है हट जाओ, तो वो हंसकर बोली कि रुक जा। फिर वो उठी और घोड़ी बनकर बोली कि बेटा मेरी गांड के छेद में डाल, फिर मैंने कोशिश की तो लंड अन्दर नहीं गया। फिर उन्होंने शैम्पू लिया और मेरे लंड पर लगाया और अपनी गांड पर भी लगाया। फिर अपनी गांड पर मेरा लंड रखकर अपनी गांड पीछे की तो मेरा आधा लंड उनकी गांड में घुस गया। फिर मैंने और ज़ोर लगाया तो मेरा लंड उनकी गांड में पूरा फिट हो गया। अब मुझे उनकी गांड मारने में बहुत मज़ा आ रहा था, क्योंकि चूत के मुक़ाबले गांड ज्यादा टाईट थी। अब वो अपनी गांड पीछे धकेलकर मुझसे अपनी गांड मरवाती रही। फिर वो पलटी और अपनी टाँगे पूरी चोड़ी करके अपने हाथों में पकड़ ली और कहा कि अब नहीं रहा जा रहा है, मुझे भी झाड़ दे राजा।

फिर मैंने अपने धक्को की रफ़्तार तेज़ की, तो वो मछली की तरह नीचे फर्श पर लेटी तड़प रही थी। अब में धक्के मारता हुआ उनके बड़े-बड़े काले निप्पल के दाने चूस रहा था, अब पच पच की आवाजें पूरे बाथरूम में गूँज रही थी। फिर एक चीख के साथ उन्होंने अपनी पिचकारी छोड़ दी और फिर उन्होंने मुझे टावल से साफ करके मेरे कपड़े मुझे पहनाकर और कंघी करके उन्होंने मुझे फिर से तैयार कर दिया। अब में बाहर आया तो अंकल जी मुझे देखकर हंस रहे थे। अब मेरा शरम के मारे बुरा हाल था और मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा था।लकिन अंकल जी ने कुछ नहीं कहा अब में रोज़ स्कूल जाने से पहले रेनू की दुकान पर जाके रोज़ नए अंदाज़ में सेक्स का खेल खेलता हु। कहो दोस्तों कैसे लगी संजय की हे कहानी आप कमेंट जरूर दे।
 
बजाज का सफर

दोस्तों ये कहानी नाहु मेरा सच्चा और हॉट अनुभव है में आशा करता हूँ कि आप लोगों को मेरी यह स्टोरी भी पसंद आयेगी। अब मेरी कहानी शुरू होती है।

मेरा नाम संजय है, मेरे लंड का साईज़ 7 इंच है।

मेरी अजमेर में गिफ्ट शॉप है तो उसी सिलसिले में कुछ सामान खरीदने अजमेर स्व मुंबई जा रहा था। मेरी टिकट एक लग्जरी स्लीपर बस में करवा दी थी, क्योंकि में ट्रेन से जाने के मूड में नहीं था। मैंने शाम को 5 बजे बस पकड़ी, बस में ज़्यादा लोग नहीं बैठे थे, उसमे आगे कुछ कपल बैठे थे और उनके पेरेंट्स थे और बीच में मैं और आख़री सीट में एक छोटी सी फेमिली थी। थोड़ी देर में अगला स्टेशन आया तो कुछ लोग चढ़ने लगे और एक कपल जिसमें एक आदमी, उसकी पत्नी और 2 बच्चे थे, एक लड़का जो 4 साल का था और बहुत ही खूबसूरत था और उसकी एक 3 साल की लड़की थी। उन लोगों की सीट मेरे बाज़ू में थी।

फिर बस स्टार्ट हुई और वो औरत झुककर अपने बैग को सीट के नीचे रख रही थी। उसका आदमी आराम से बैठ गया था और उसके दोनों बच्चे पीछे की सीट पर बैठे थे। फिर अचानक से मेरी नज़र उस पर पड़ी, उसका पल्लू नीचे गिरा था और उसके बूब्स मेरी आँखों में समा गये थे। मैंने एक पल के लिए भी उनसे अपनी निगाह नहीं हटाई, उसने मुझे नोटीस किया और एडजस्ट करते ही बैठ गयी। उसने काले कलर की साड़ी पहनी थी और क़यामत ढा रही थी, उसका फिगर 36-28-36 होगा, स्लिम बॉडी और बहुत गोरी थी और साड़ी भी उसने नाभी के नीचे बांध रखी थी। फिर हम सब बैठे हुए थे और में अपना मोबाईल निकाल कर गाने सुन रहा था। फिर धीरे-धीरे रात होने लगी और फिर रात के 10 बजे बस एक मस्त से ढाबे पर रुकी, में उतरकर वॉशरूम गया और फिर मैंने टाईम पास के लिए कुछ स्नेक्स और कोल्ड ड्रिंक्स ले ली और वो औरत भी अपने बच्चो को लेकर वॉशरूम गयी और उसने कुछ स्नेक्स नहीं लिया, क्योंकि उसका पति बहुत गहरी नींद में सोया हुआ था तो वो ढाबे पर नहीं उतरा था।

फिर बस चलने के लिए तैयार थी और फिर सब आकर बैठ गये, उसका पति खिड़की वाली सीट पर था और वो उसके बाज़ू में और उसके बच्चे पीछे वाली सीट पर थे। फिर अचानक उसकी बच्ची रोने लगी कि उसको विंडो सीट पर बैठना है, लेकिन वो बच्चा नहीं मान रहा था और उसका पति विंडो सीट पर सो गया था, तो मैंने उन्हें कहा कि आप अपनी बच्ची को मेरी विंडो सीट पर बैठा दो, तो उसने पहले मना किया कि आप क्यों हट रहे हो। फिर मैंने उसे समझाया कि बच्चो का दिल नहीं तोड़ते है और में बाज़ू की सीट पर बैठ गया और उसकी बच्ची को विंडो सीट पर बैठा दिया। फिर मैंने उसकी बच्ची को बहुत खुश किया मेरा मतलब स्नेक्स खिलाया, मोबाईल दिया और मुझसे उसकी माँ भी खुश हो गयी। फिर उसने मुझसे पूछा कि आप कहाँ जा रहे हो, तो मैंने कहा मुम्बई तो उसने भी कहा कि वो लोग भी वहीं जा रहे है। फिर मैंने उससे फ्लर्ट करने की सोची और फिर मैंने उससे उसका नाम पूछा तो उसने उसका नाम बिट्टू बताया फिर हमारी बातें शुरू हुई।

बिट्टू : मुम्बईमें कहाँ जा रहे हो?

में : दुकान के सिलसिले में जा रहा हूँ।

बिट्टू: ओह्ह्ह, तो आप क्या करते हो?

में : (मज़ाक से कहा की) खुश करता हूँ।

बिट्टू: उसने मुझे देखते हुए कहा कि कैसे खुश करते हो।

में : अरे, वो तो मैंने आपसे ऐसे ही कहा, मेरी शॉप अजमेर में है, में वो चलाता हूँ।

बिट्टू : अच्छा हुआ कि आपकी कंपनी मिल गयी वरना में तो अकेले बैठे-बैठे बोर हो रही थी, मेरे पति भी सो गये है।

में : हाँ इतना काम, मेहनत जो करते होगे बेचारे।

फिर उसने सेक्सी सी स्माइल दी, शायद वो मेरी बात समझ गयी हो। उतने में उसकी बेटी भी सो गयी थी। फिर मैंने उससे कहा कि आपकी बेटी भी सो चुकी है तो उसने देखा और कहा कि लाओं में उसे पीछे वाली सीट पर सुला देती हूँ। जब में उसे उसकी बेटी दे रहा था, तब मेरा हाथ उसके बूब्स से चिपक गया और मुझे बहुत गर्म-गर्म महसूस हुआ, जैसे वो एकदम गर्म हो चुकी है। फिर उसने भी मेरा हाथ नोटिस किया और बच्ची को लेकर पीछे वाली सीट पर सुला दिया। अब रात बहुत हो चुकी थी और बस की लाईट भी बंद थी और सब सोए हुए थे, तो में अपने मोबाईल में गाने सुनने लगा तो उसने रिक्वेस्ट की कि वो भी गाने सुनना चाहती है, क्योंकि उसे नींद नहीं आ रही थी।

फिर मैंने उसे लेफ्ट साईड का इयरफोन उसको दे दिया, हम लोग थोड़ा दूर-दूर बैठे हुए थे तो इयरफोन बार बार उसके कान से निकल रहा था, तो मैंने उसे अपने बाज़ू वाली सीट पर बैठने को बोला तो उसने हाँ कहा और अपने पति को चेक किया कि वो सो रहा है या नहीं? फिर मेरे बाज़ू में आकर बैठ गयी
 
में बहुत रोमांटिक वीडियो गाने प्ले कर रहा था, जिससे वो और मस्त हो रही थी। फिर मैंने आहिस्ते-आहिस्ते हाथ उसके हाथ पर टच किया, उसने कुछ रिएक्ट नहीं किया, तो मैंने और फ्री होना स्टार्ट किया, मैंने झटके से उसकी जांघ पर हाथ रख दिया, जिससे उसने एतराज़ जताया और एक स्माइल देकर बैठ गयी। फिर थोड़ी देर के बाद वो उठ रही थी तो वैसे ही मैंने उसे पकड़ लिया और प्यार से उसके बूब्स दबाने लगा। उसने मना किया कि प्लीज यहाँ मत करो कोई देख लेगा, प्रोब्लम हो जायेगी। तो मैंने कहा कि यहाँ कोई नहीं देखेगा अंधेरा है और सब सो रहे है तो उसने बस में देखा और हलकी मुसकरा कर मेरे बाजु में मेरे से चिपक के बैठ गयी मेरा हौसला खुल गया । और अब बिना किसी डर से उसके पैरों को मसलने लगा और थोड़ी देर में वो गर्म हो गयी अब मैंने आगे बढ़कर फिर मैंने उसकी साड़ी का पल्लू हटाया और ब्लाउज के ऊपर से ही बूब्स दबाने लगा, तो वो मौन करने लगी। फिर मैंने उसको लिप किस किया। फिर वो भी मेरा साथ देने लगी। तो उसने कहा कि जो करना है जल्दी-जल्दी करो वरना उसका पति उठ जायेगा। फिर मैंने उसे सीट पर बैठाया और उसकी साड़ी ऊपर की और पेंटी को नीचे किया तो देखा कि उसकी चूत तो बिल्कुल गीली हो चुकी थी और चूत पर थोड़े-थोड़े बाल भी थे, तो मैंने सकिंग करना स्टार्ट किया। तो वो मेरे बाल नोचने लगी और मेरा मुँह दबाने लगी, जैसे वो चाह रही हो कि में उसकी चूत को पूरा खा जाऊं, उसने फिर से पानी छोड़ा और मैंने पूरा चाट लिया।

फिर मैंने उससे लंड चूसने को कहा तो उसने मना कर दिया और कहा कि उसको उल्टी आ जायेगी, इसलिए मैंने उसे ज्यादा फोर्स नहीं किया, क्योंकि फोर्स करने से सेक्स करने का मज़ा नहीं आता और कपल उसे इन्जॉय नहीं कर पाता और सेक्स तो नेचुरल ही इन्जॉय करो और फील करो। फिर मैंने उसे नीचे लेटाया और मेरा लंड उसकी चूत पर रगड़ने लगा, जिससे वो पागल सी हो गयी और उसने मुझसे कहा कि प्लीज शिफान अब मत तड़पाओ। फिर मैंने चूत के दरवाजे पर अपना लंड रखा और एक झटका मारा तो चूत गीली होने की वजह से आधा लंड आसानी से अन्दर चला गया और में धक्के लगाने लगा। उसे बहुत मज़ा आ रहा था और मुझे भी बहुत मजा आ रहा था। फिर बिना रुके 15 मिनट चुदाई करने के बाद मैंने उसकी चूत में ही पानी छोड़ दिया और वो तब तक 2 बार झड़ चुकी थी। फिर उसने मुझे स्मूच किया और अपने कपड़े ठीक करके अपनी सीट पर जाकर बैठ गयी और फिर हमने अपने मोबाईल नंबर एक्सचेंज किए। वो बहुत खुश हुई, उसने मुझसे वादा किया है कि हम फिर से मिलेंगे, वैसे तो में उससे अब भी फोन सेक्स करता हूँ ।।और मुम्बई जब भी जाता हूं उसके साथ मिलके फूल मस्ती करता हु ।
 
भाभी

दोस्तों में संजय आपके लिए एक कहानी लेके आया हु। यह कहानी मेरे दोस्त की कहानी उसके ही जुबानी

मेरा नाम तरुण है और मेरी एज 24 साल है ……मैं एक फार्मसेटिकल कंपनी में मेडिकल रेप्रेज़ेंटेटिव का काम कराता हूँ…मेरा शरीर बहुत गठीला और रंग गोरा है मेरी हाइट 6 लीज़ है और मेरा बदन कसराती है…किल मिला के मैं एक खूबसूरात गबरू जवान हूँ,,,हम लोग पश्चिम बंगाल, कलकत्ता के पास एक छोटे शाहर में रहते है….मैं अंकल आंटी के साथ उनके घर पे रहता हूँ……. मेरे अलावा मेरे बड़े भैया देव (अंकल आंटी का बेटा) जिनकी एज अभी 32 साल की है और जो टीचर है और सिलिगुड़ी के पास एक शहर में उनकी पोस्टिंग है जहां से वो महीने या डेढ़ महीने में एक बार दो या तीन दिन के लिए घर आ पाते है……..मेरी शादी नहीं हुई है जब के भैया की शादी अभी दो साल पहले ही हुई है …..भाभी का नाम मौमीता है और उनकी एज 23 साल ही है इस तरह से भैया 32 के और भाभी मुझसे भी छोटी बोले तो ..23 साल की ही है….उनका रंग गोरा है …बारे बड़े मम्मे खूबसूरात होंठ और पीछे की और निकले मोटे चूतड़ हाइट 5‚4″ है.भाभी के गाल छीने और होंठ लाल है.. कुल मिला मिला के वो सेक्स बॉम्ब जैसी है….भाभी मुझे बहुत अच्छे लगती है….

हमारे घर में कुल चार बेड रूम , एक द्रावािंग रूम एक किचन और दो कंबाइंड व्सी बात है ….हमारा घर दो फ्लोर में बना है…ग्राउंड फ्लोर पर किचन के साथ दो बेड रूम और एक ड्रॉयिंग रूम है जब के फर्स्ट फ्लोर पर दो रूम्स है और एक छोटा ओपन टेरेस है ….आंटी अंकल की एज काफी है और उन के घुटनों के दर्द की वजह से वो फर्स्ट फ्लोर पर नहीं आते है इसलिए वो नीचे ही रहते है जब के फर्स्ट फ्लोर पर एक मेरा रूम और एक भैया का रूम है और दोनों रूम्स के बीच में एक कंबाइंड व्सी बात है और उसके दरवाजे दोनों रूम्स में खुलता है…मेरे रूम्स से होकर ही ओपन टेरेस पर भी जा जा सकता है….क्यों के मैं छोटा था इसलिए सब मुझे बहुत प्यार करते थे और भैया बाहर ही रहते थे और अक्सर महीने दो महीने में ही घर आते थे घर का ऊपर वाला टीवी मेरे रूम में ही रहता था भैया की शादी के बाद व्सी बात का मेरे साइड वाला दरवाजा मैं लॉक नहीं कराता था ..भैया[जो कभी कभी ही होते थे]या भाभी[ वो ही अक्सर बाथरूम यूज कराती थी]जब बात उसे कराती थी तो मेरे साइड वाला दरवाजा लोक कर के उसे कराती थी और टेरेस पे जाने के लिए भी वो बात से हो कर मेरे रूम से ही टेरेस पे जाती थी…
 
भाभी का स्वभाव अलग अलग समय पर अलग अलग सा रहता था..नीचे आंटी अंकल के सामने वो घूँघट में और शांत रहती थी जब के भैया के सामने वो गंभीर और शांत रहती थी …जब के भैया की गैर हाज़िरी में और मेरे कमरे में वो बहुत चुलबुली और चंचल तथा शैठान टाइप का बिहेव कराती थी….भाभी को टीवी देखने मेरे रूम में ही आना पड़ता था और रिमोट की लिए अक्सर हम हीना झपटी करते रहते थे इसी दौरान में हम एक दूसरे के बदन को छेड़ते झींझोड़ते थे इस में मुझे तो बहुत मजा आता था और मैं भाभी की कमर चूतड़ और मम्मो को खूब सहलाया और दबाया कराता था ..पर पता नहीं क्यों भाभी ने इसे कभी सिरस्यसली नोट नहीं किया था भाभी जब भी तैयार हो के कही घूमेंे जाती थी तो मुझसे आ के पूछती तिके वो कैसी लग रही थी..हम टीवी पर आपने पसंद के प्रोगार्र्मेस पालन पर साथ साथ लेट कर देखते थे..कभी कभी कोई सेक्सी सीन आने पर हें ..का के वो मुझे आपने से छिपता लेती थी

……भाभी हमेशा मुझसे कहती थी के हम दुनिया वालो के लिए भाभी देवर है पर रियल में हम दोनों फ्रेंड्स है इंटिमेट फ्रेंड्स ..और कभी कभी तो कही थी के मैं उन्हें बहुत अच्छा लगता हूँ और शी लव्स में ..मैंने भी कहा ..ई टू लव यू ..वो बोलती थी के हम दोनों फ्रेंड्स से भी बढ़कर है

एक दिन मैं आपने रूम में अकेला भी केरम बोर्ड पर लाल गोट [क्वीन} को स्ट्राइक कर के अलग अलग पॉकेट्स में डालने की प्रेक्टिस कर रहा था के भाभी ने आ के मेरी क्वीन ले ली ..मैंने भाभी से वो क्वीन लेने की कोशिश की तो वो क्वीन लेकर आपने रूम में भाग गयी और पलंग पर लेट गयी और आपने हाथ और पाइए मोड़ कर लेट गयी मैं क्वीन लेने की कोशिश में पलंग पर चढ़ गया और उनके पैरों को आपने पैरों से दबा के उन के ऊपर सवार सा हो गया इस हालत में मेरा लिंग उनकी गान्ड की दरार से टच हो रहा था ..पर मेरा ध्यान क्वीन पाने में था तो मैंने उन को दबा के हाथ उनके पेट की और ले गया पर भाभी के हिलने डोलने से हर बार उन के मामे ही मेरे हाथ में आ रहे थे तो अबकी मैंने लेफ्ट हॅंड से उन के मामे दबा के आपना राइट हॅंड उन के हठिॉ की और बढ़ाया तो भाभी ने आपने शरीर को फैलाया तो मेरा लिंग उन की गान्ड से रगड़ा रगड़ा के तनने लगा था तो मैंने भी क्वीन की जगह आपना सारा ध्यान भाभी के मम्मो को दबाने सहलाने में लगा दिया और दोनों हाथों से उनके मम्मे सहलाते आपना मुँह नीचे की और ले गया तो भाभी के गालों से मेरे लिप्स टच होने लगे ….अब मेरा लिंग और ज़ोर पकने लगा था …तभी मैंने ज़ोर लगा के भाभी के दोनों हाथ पकड़ के उनको एक पलटी दे दी तो मैं अब उन के ऊपर था और उन के दोनों हाथ मेरे हाथों में थे तभी भाभी ने क्वीन आपने ब्लाउज के अंदर आपने दोनों मम्मो के बीच में डाल दी ……मैं रुक गया ..भाभी भी खड़ी हो गयी ..और विजयी मुद्रा में मेरी और देखने लगी……
 
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