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बड़ा परिवार सुखी परिवार

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कहानी के किरदार

राहुल - इस कहानी का मुख्या किरदार, ग्रेजुएशन में पढता है, और अपनी पापा (मनोज), माँ (सरिता) और बड़ी बेहेन (स्वीटी) के साथ रहता है. गोरा रंग, गठीला शरीर और ६ फुट हाइट है.

मनोज - राहुल के पापा जो खानदानी बिज़नेस सँभालते है, उनकी उम्र करीब ४५ साल है. वो हमेशा बिज़नेस के सिलसिले में बहार गाओं जाते रहते है. पर वो भी काफी हैंडसम है, राहुल को ये क्वालिटी उन्ही से मिली है.

सरिता - राहुल के माँ, इनकी उम्र करीब ४२ साल है, पर वो दिखने में उससे काम उम्र की लगती है. गोरा रंग है और भरा हुआ शरीर है. इनके बड़े बड़े बूब्स और गांड देख के किसी का भी दिल मचल जायेगा. ये घर का काम संभालती है.

स्वीटी - राहुल की बड़ी बेहेन, इसकी उम्र २५ साल है. और ये पूरी तरह से मॉडर्न रहना पसंद करती है, पढाई ख़तम कर ली है और अभी घर में ही रहती है, इसके लिए घरवाले रिश्ता खोज रहे है. ये भी अपनी माँ की तरह भरे हुए शरीर की मालकिन है. गोरा चिटा रंग, पतली कमर और बड़े बूब्स. कॉलेज में इसके कई बॉयफ्रेंड रह चुके है, और न जाने कितने पीछे पड़े हुए होंगे.

इन लोगो के आलावा राहुल के दादा (कमलेश) और दादी (विमला) भी पड़ोस के बंगले में रहते है

कमलेश - बचपन से घर का बिज़नेस करते हुए अब रिटायर हो गये है, अब ज़िन्दगी का पूरा मज़ा लेने में लगे हुए है. जो जवानी में नहीं कर पाए वो अभी करना चाहते है.

विमला - इन की उम्र करीब ५८ साल है, पर ये भी दिखने में अभी भी बोहोत हॉट है, मॉडर्न लाइफस्टाइल में रहती है, अक्सर उनके बंगले पे किटी पार्टीज होती रहती है. गोरा रंग और बड़े बड़े बूब्स और गांड है, जो जब वो चलती है तो झूलते रहते है.

दादा और दादी के घर में एक नौकरानी भी रहती है जिस के उम्र करीब ३५ साल होगी. उसके पति का देहांत हो गया है, और वो अब दादा और दादी के घर में रहती है और घर का सारा काम संभालती है. उसका नाम कांताबाई है.

 


कहानी मेरी खुद की नही है, इसलिए मैंने सिर्फ कॉपी की है, जब तक तक ओरिजिनल राइटर अपडेट नही देगा यह भी अपडेट नही आ पाएगी।

राहुल और उसका परिवार सूरत में रहते थे. खानदानी बिज़नेस था, आलीशान २ बंगले थे, २ गाड़िया थी और साडी सुख सुविधाएं थी. कहानी शुरू होती है जब राहुल 12th क्लास की एग्जाम देने के बाद उसकी छुट्टिया चल रही थी. इस उम्र में बाकि नौजवानो के तरह राहुल को सेक्स के बारे में जानकारी हो गयी थी. उसने ब्लू फिल्म वगेरा देख राखी थी, पर कभी लड़की के साथ उसका कुछ ज्यादा सम्बन्ध नहीं आया, कॉलेज में भी उसकी कभी गिर्ल्फ्रिएड पटाने की हिम्मत नहीं हुई.

छुट्टियों का आलम था तोह राहुल और उसके दोस्तों ने मूवी देखने का प्लान बनाया. उस दिन घर पापा में ही थे और उसकी बेहेन हमेशा की तरह अपने रूम में अपनी सहेलियों से फ़ोन पे गप्पे लड़ा रही थी. राहुल सुबह तैयार हो के रूम से निचे आया, वहां उसके माँ किचेन में ब्रेकफास्ट की तैयारी कर रही थी, और पापा टीवी पे न्यूज़ देख रहे थे.

राहुल सीधा आया और किचेन में घुस गया. वहां सरिता पतला सा नाईट गाउन पेहेन के काम कर रही थी, गाउन पूरा बदन से चिपका हुआ था और सरिता हे गांड के उभर क्लियर दिख रहे थे. राहुल जो देख रहा था उससे अच्छा तो लगा पर, पर तुरंत उसके दिमाग में ख्याल आया के वो मेरी माँ है, ऐसी नज़र से नहीं देखना चाहिए और उसे ने मन से ख्याल निकाला और बोला..

राहुल - माँ मैं आज मूवी देखने जा रहा हूँ , वहां से घूम घाम के शाम में ही आऊंगा. दोपहर में खाना खाने के लिए नहीं आऊंगा.

सरिता ने काम करते करते ही जवाब दे दिया..

सरिता - (टेढ़ा जवाब देते हुए) है ठीक है चले जाना, पर अपने पापा को बता के जाना वार्ना जब वो घर पे रहते है तो मुझे पूछते रहते है की राहुल कहा चला गया घूमने..और तू तेरा फ़ोन भी नहीं उठता..अपने आवारा दोस्तों के साथ घूमते समय घर वालो को भूल जाता है.

राहुल - है माँ..बोल दूंगा पापा को..

सरिता - (डटते हुए) और मेरा फ़ोन रिसीव कर लिया कर..

राहुल - है माँ कर लूंगा..अब मैं जाऊ ..

सरिता - अरे नास्ता तो कर के जा..

पर राहुल ने बात सुनी नहीं और कीचन से भागते हुए..

राहुल - नहीं माँ...बहार कर लूंगा...मुझे देर हो रही है..

सरिता - (बाप ने बिगड़ रखा है..) - सोचते हुए.

राहुल वहां से ड्राइंग रूम में पापा के पास गया और बोला..

राहुल - पापा मैं दोस्तों के साथ मूवी देखने जा रहा हूँ...शाम में आऊंगा..

मनोज - ठीक है बीटा आराम से जाओ..एन्जॉय करो...चाहिए तो गाडी लेकर चला जा..मैं आज दिन भर घर में ही हूँ..मुझे कही नहीं जाना..

राहुल - नहीं पापा..हम सारे दोस्त की गाडी से जा रहे है..

मनोज - ओके डिअर..बाए.

राहुल फिर घर से चला गया..और उतने में स्वीटी रूम से निचे आयी..वो पूरी सज धज के आयी थी..पीला सलवार सूट पहना था जो पुरा बॉडी फिट था..उसके बदन के सारे उभर दिख रहे थे...स्वीटी निचे आयी और सीधे ड्राइंग रूम में गयी. वहां अपने पापा से बोली

स्वीटी - पापा मैं सहेलियों के साथ शॉपिंग करने जा रही हूँ..कुछ पैसे चाहिए..

मनोज - कितने चाहिए बीटा..

स्वीटी - दस हज़ार..

मनोज - इतने रुपये ..क्या खरीदना है...

स्वीटी - पापा बहुत कुछ खरीदना है...कपडे, शूज,मेक उप ...आप को नहीं समजेगा..

मनोज - अच्छा अच्छा..

और कहते मनोज ने जेब से दस हज़ार निकल के दे दिए

मनोज - अब इतनी खरीदारी करनी है तो तुम समय तो बहुत लगेगा..

स्वीटी - है वो तो है पापा..पर आप भी घर पे ज्यादा नहीं रहते..आज मौका मिला तो मैंने सोचा आज ही आप से पैसे ले के शॉपिंग कर आउ..

मनोज - वो सब ठीक है..पर शाम तक घर आ जाना..

स्वीटी - है पापा ..शाम के पहले तो आराम से आ जाउंगी..

और ये कहते ही घर रे बहार निकली..

उतने में सरिता किचेन से नास्ता ले कर बहार निकली...और बोली..

सरिता - अब ये कहा जा रही है..

मनोज - अरे जानेदो उससे..वो शॉपिंग करने जा रही है अपने साहिलियो के साथ..

सरिता - (नाराज होते हुए) आप ने दोनों को बिगड़ रखा है..आप तो घर पे रहते नहीं मुझे ही इन्हे संभालना पड़ता है...

मनोज उठ के डाइनिंग टेबल पे आ गया और सरिता ने नास्ता उसके सामने रख दिया...और सरिता बगल वाले चेयर पे बैठ गयी..

मनोज ने एक निवाला उठाया और सरिता की और करते हुए कहा..

मनोज - इतना नाराज़ न हो मेरी जान..(और उसे वो निवाला खिला दिया)..आज तुम्हारी सारी शिकायतों का समाधान कर दुनगा तुम चिंता मत करो..

सरिता - (नटखट नदज में) आज बड़ा प्यार आ रहा है..क्या बात है..

मनोज ने सरिता का हाथ पकड़ के उसके तरफ खींच लिया और अपने गोद में बैठा लिया..

सरिता - (अचंभित होते हुए) अरेरे क्या कर रहे है आप...कोई देख आ जायेगा...

मनोज - कोई नहीं आयेगा मेरी जान..आज दोनों बच्चे शाम तक बहार एन्जॉय करेंगे..और हम घर में..

सरिता - (शरमाते हुए) क्या आप भी...इसीलिए आप ने दोनों बच्चो को बहार जाने से रोका नहीं.

मनोज - हां मेरी जान..बहुत दिनों बाद ऐसा मौका मिला है तुम से खुले हुए दिन में तुम से मोहब्बत करने का..आज तुम्हारे दो महीनो की प्यास मैं बुझा दूंगा...

ये कहते ही...दोनों के होठ एक दूसरे से मिल गये और वो किश करने लगे....सरिता भी पूरा साथ दे रही थी और सिसकिया निकाल रही ...फिर कुछ मिंटो के बाद उनके होठ जुदा हुए और मनोज ने उसके हाथो से सरिता के बूब्स दबाना शुरू किया...और उसकइ गर्दन पे अपने होतो से हमला बोल दिया...इस से सरिता पूरी गरम हो गयी और लम्बी सिसकिया भरने लगी ..

सरिता - ओह्ह्ह .... हम्म्म्म...आह्ह्ह्ह ...रूम में चलिए नहहहह...यहाँ कोई आ जायेगा ओह्ह्ह्ह ...

मनोज - डरो मत जानेमन कोई नहीं आएगा...

और उसने अपना हाथो से गाउन के सामबे के बटन खोल दिए (सरिता ने अंदर ब्रा नहीं पहना था)...और सरिता के एक मुम्मे को बहार निकल के बेतहाशा चूसने लगा... सरिता के दोनों निप्पल एकदम सख्त हो गये थे..

सरिता अब मनोज के गोद में से थोड़ा सा उठी...तो मनोज भी उसके साथ उठ जाया पर उसने उसके मुम्मे को चूस न बंद नहीं किया..सरिता थोड़ी पीछे हटी और मनोज का हाथ पकड़ा और आगे की तरफ चलने लगी...

सरिता - चलिए अब...आगे के प्रोग्राम रूम में होगा..

सरिता ने फिर मनोज का हाथ पकड़ के गेस्ट रूम के तरफ चल दी जो ग्राउंड फ्लोर पे ही था...मनोज उसके पीछे चलते हुए दूसरे हाथ से सरिता की गांड सेहला रहा था..और पीछे से गर्दन को किस कर रहा था...

रूम में जाते ही...सरिता ने मनोज को बेड पर ढाका मर दिया...और अपना गाउन पूरा उतर के फेक दिया..मनोज ने भी झट से अपने कपडे उतर दिए...और पुर नंगा होक बेड पे लेट गया उसका 7 इंच का लंड फनफना रहा था ...फिर सरिता ने अपनी पैंटी उतरी और उसे मनोज के लंड में अटका दी..फिर सामने पड़ी चेयर पे बैठे हुए आगे की तरग झुक गयी....और दोनों हटो से अपनी गांड पहला ली...

मनोज को सरिता के चुत के दर्शन हो गये...और वो झट से उठा और सरिता के गांड के सामने जा के घुटनो के बल बैठ गया..उसने फिर सरिता की गांड को दोनों हाथो से सहलाया..गांड पे दोनों तरफ चूमा और फिर धीरे से अपना हाथ रखा..और धीरे धीरे चुत रगड़ने लगा...

मनोज का हाथ लगते ही सरिता अचानक चहक उठी..और उसकी मुँह से उउउउउहहहह..की सिसकी निकली...फिर मनोज ने अपना हाथ हटाया और चुत को कुत्ते की तरह चाटने लगा...वो निचे से शुरू करता और गांड के छेद तक चाटता ...मनोज ऐसे लम्बे लम्बे स्ट्रोक से उसकी छूट चाट रहा था..

उधर सरिता को करीब दो महीनो बाद चुत में हलचल हुई थी तो उससे चुत में कपकपी महसूस हो रही थी और वो सिसकिया भर रही थी..

सरिता - ऊह्ह्ह्ह...चाटो इसी तरहहहह...आअह्ह्ह्हह....बड़ा मज़ा आ रहा है...

सरिता का पानी अब निकलने वाला था पर मनोज पीछे से लम्बा लम्बा चाट रहा था...तो सरिता पलट गयी और मनोज का सर सीधे चुत में धसा दिया...मनोज उसकी जबान चुत के अंदर दाल के हिला रहा था...और सरिता ने अपने हाथ से अपने क्लीट जो जोर जोर से रगड़ना शुरू किया...

कुछ ही देर में सरिता झड़ गयी और मनोज उसका पूरा पानी चाट गया...सरिता के चेहरे पे संतुष्टि के मुस्कान आ आयी...

वो चायर रे उत्तरी और मनोज को फिर बेड पे लिटा दिया..मनोज के लंड को अपने हाथो से हिला ने लगी..और फिर अपने मुँह में पूरा लंड दाल लिया...

मनोज का पुरा लंड मुँह में अंदर बहार कर के जम के चूस रही थी..मनोज लेट के मज़े ले रहा था...लंड चाट के अपने मुँह के थूक से पूरा लंड गिला कर दिया...जब मुँह से लंड निकला तो मुँह में जमे हुए थूक को लंड के ऊपर थूक दिया और पुरे लंड के ऊपर फैला दिया...

सरिता अब उठी और मनोज के ऊपर आ के बैठ गई..मनोज ने दोनों हाथो से उसके बूब्स पकड़ के मसलने लगा..सरिता ने अपनी चुत मनोज के लंड पे रगड़ने लगी...फिर मनोज थोड़ा सा ऊपर उठा और दोनों ने एक दूसरे को चूमना शुरू करदिया...मनोज ने एक हाथ पीछे लेकर सरिता की गांड सहलाने लगा ...फिर धीरे धीरे हाथ आगे बढ़ा के गांड के छेद को अपने ऊँगली से सहलाने लगा...सरिता के सासे तेज हो गयी थी...और वो पुरे मज़े में थी...

सरिता - जानू छोड़ो न उससे..क्यों बार बार मेरी गांड को छेड़ते रहते हो..

मनोज - कभी तो मान जा मेरी जान ...एक बार तो तेरे गांड में मेरा लंड डालने दे....

सरिता - छी कैसी बातें करते हो..वो भी कोई लंड डालने की जगह है...वहां चीज़े डाली नहीं निकली जाती है...

और खिलखिला के हसने लगी....फिर सरिता ने अपनी गांड थोड़ी उठाई और धीरे धीरे लंड को चुत में दाल ने लगी...जैसे जैसे उसकी गांड निचे जा रही थी उसकी सिसकी निकल रही थी..

सरिता - आह्ह्ह्हह.....जानू ......तुम इस लंड के लिए बड़ा तरसाते हो....

अभी पूरा लंड एंड डाला नहीं था की...मनोज ने निचे से एक जोर से झटका लगाया...और सरिता चहक उठी...उसकी जोर से चेक निकली....

सरिता - उउउउइइइइइ माहहहहह....धिरहहहहह जनुआअह्ह्ह....

मनोज ने धका मरते ही सरिता की एक चुची को मुँह में भर लिया और जोर से चूस ने लगा...

सरिता अपनी गांड धीरे धीरे ऊपर निचे कर रही थी...रूम पूरा सिसकियों से भर गया था..

सरिता - अह्ह्ह...अह्ह्ह...अह्ह्ह...उईईईमाआहहह....ओह्ह्ह्हह...

कुछ देर ऐसे ही सरिता अपनी गांड हिला के छोड़ रही थी...फिर उसकी सांसे भरी हो गयी...और उसकी तेज़ी काम होगयी....फिर मनोज ने अपने दोनों हाथ उसके गांड के निचे से दाल के सरिता को थोड़ा ऊपर उठा लिया और तेज़ी से निचे से झटके लगाने लगा...पुरे रूम में फच्च फच्च की आवाज़ आ रही थी ..

सरिता - हययययय....जनुआहहहहह...धीरे करो नहहहहहह...

मनोज ने और तेज़ी बढ़ा दी....फिर सरिता का मुँह खुला ही रह गया.....और सांसे बहुत तेज़ होगी..५-६ झटको के बाद सरिता जोर से चीखी (ओह्ह्ह्हह माहहहहहह....) और पूरा बदन उसका कापने लगा और वो मनोज के ऊपर लेट गयी और मनोज को बेतहाशा किस करने गयी... सरिता झड़ गयी थी...

मनोज ने धीरे धीरे झटके लग्न जारी रखा...

उधर दूसरी तरफ राहुल दोस्तों के साथ मूवी हॉल में पंहुचा और वहां उसे और उसके दोस्तों को पता चला की जो ऑनलाइन बुकिंग उन्होंने की थी वो गलती से अगले डेट की कर दी थी ...तो सब दोस्तों ने फैसला किया के अभी निकल जाते है..धुप भी बढ़ रही है...शाम में मिलते है उनके रोज के अड्डे पे...

तो इस वजह से राहुल घर की तरफ चल पड़ा...

इधर घर में अब मनोज ने सरिता को बेड पे लिटा दिया था और उसके साइड में आ के लेट गया ..उसने सरिता के एक तंग अपने हाथो से उठाई और अपना लंड चुत में घुसा दिया और पीछे से चोदने लगा..सरिता सिसकिया भरते हुए पुरे मज़े ले रही थी...

इतने में राहुल घर पहुंच गया...उसने पाया के घर का दरवाज़ा खुला ही है..तो वो अंदर आ के पानी पिने के लिए किचेन के तरफ चल दिया...जैसे ही वो आगे बढ़ा तो उसको सरिता की आवाज़े आई...अब राहुल इतना नादाँ नहीं था की उसको ये मालूम न हो की ये आवाज़े कहा रे और क्यों आ रही है...उसका मन ललचा गया और उसका मन में आया के जा कर देख लेते है शायद कुछ शो मिल जाये...राहुल का नसीब अच्छा था की दरवाज़ा पूरा बंद किया हुआ नहीं था ...बिच में थोड़ी सी जगह थी झाकने के लिए..वो अंदर का खेल देखके एकदम मचल उठा...उसने पहली बार असलियत में एक नंगी औरत देखि थी और सोने पे सुहागा वो की भी चोदते हुए...

राहुल का लंड झट से खड़ा हो गया...एकदम लोहे के रोड जैसा हो गया...उसकी जीन्स में समां नहीं प् रहा था...वो जीन्स पे से ही अपना लंड रगड़ रहा था...

सरिता का चेहरा दरवाजे के तरफ ही था और मनोज उसको पीछे से छोड़ रहा रहा इसलिए उसको दरवाजे की तरफ का कुछ दिख नहीं रहा था..पर

अंदर सरिता जोर जोर से आँखे बंद कर के सिसकिया भर रही थी...इधर राहुल अपनी माँ की चूचियों को हिलता हुआ देख के अपना लंड सेहला रहा था..फिर राहुल को रहा नहीं गया और उस ने अपनी पंत की ज़िप खोल के लंड बहार निकल लिया और जोर जोर से हिलने लगा...

एकाएक सरिता ने आखे खोली तो उसे सामने राहुल दिखाई दिया जो अपना लंड को हाथ में लेके खड़ा है..राहुल को पता नहीं चला को उसके माँ ने उसे देख लिया..

मनोज पीछे से लगातार चोद रहा था...सरिता ने उसे रोकने की कोशिश की...

सरिता - आअह्हह्ह्ह्ह......जानू..अह्ह्ह्हह...रुक जाओ ओह्ह्ह्हह्ह....रुक जाओ नाहहहह..जनऊहहहह...प्लीज़स्स्स आअह्ह्ह.....जानू रुको नाहहहहहह....उउउइइइइइ माहहहहहह...

ये सुन के मनोज ने झटके एकदम तेज़ कर दिए, अब मनोज झड़ने के करीब आ गया था तोह वो रुकने वाला तो था नहीं.

राहुल ये नज़ारा देख ले अपना लंड जोर जोर से हिलने लगा...अचानक सरिता और राहुल की आँखे मिली तो राहुल के पैरो टेल ज़मीं खिसक गयी...वो वहां से ऐसा भगा जैसे कोई शेर उसके पीछे लगा हो...सीधे भाग के अपने कमरे में घुस गया...

इधर मनोज भी झड़ गया और अपना पूरा पानी उसने सरिता के चुत में चोद दिया...

मनोज ने अपना लंड जब चुत से बहार निकला तो उसका वीर्य सरिता के चुत से बहने लगा...सरिता मुस्कुराने लगी और अपने हाथो से वो वीर्य को उंगलियों पे लिया और चाटने लगी...

सरिता - बड़ा मीठा है आपका पानी..और मुस्कुराने लगी..

मनोज - अच्छा ...आज खाना खाने के बाद स्वीट डिश खिलाता हूँ...

.दोनों वही हफ्ते हुए कुछ देर पड़े रहे...फिर मनोज साइड में होक लेट गया और सरिता उसके ऊपर आके लेट गयी और दोनों किस करने लगे..सरिता ने मनोज को राहुल के बारे में कुछ नहीं बोला...वो मन ही मन मुस्कुरा रही थी..उसने राहुल का हथिया देख लिया था जो मनोज से बड़ा लग रहा था...सरिता को भी राहुल का लंड फिर से देखने की इच्छा हो रही थी...कुछ देर किस करने के बाद सरिता बोली.

सरिता - जानू मुझ में पानी क्यों छोड दिया...मेरे वो वाले दिन चल रहे है...कुछ हो गया तो..

मनोज - अरे जान तो पहले बता देती...कंडोम लगा लेता..

सरिता - ना बाबा वो कंडोम के साथ मुझे अजीब सा लगता है...

दोनों जोर जोर से हसने लगे...कुछ देर बाद दोनों उठे और फ्रेश होक कपडे पेहेन के ड्राइंग रूम में आ के बैठ गये....

 


मनोज और सरिता ड्राइंग रूम में आकर बैठ गए थे. सरिता जानती थी के राहुल घर आ गया है और वो यही कही होगा पर उसने मनोज को नहीं बताया..क्युकी जब घर में जब बच्चे होते तो मनोज सेक्स करने में दिलचस्पी नहीं दिखता था...सरिता की भूक अभी मिटी नहीं थी....सरिता के दिमाग में कुछ अलग ही था....

दूसरी तरफ राहुल अपने रूम में भाग कर घुसा और दरवाज़ा बंद कर दिया...राहुल बहुत घबरा गया था और सोच रहा था ये मैंने क्या कर दिया....ऐसा नहीं करना चाहिए था ...माँ क्या सोचेगी और वो पापा के ये बात बताएगी तो वो क्या सोचेंगे...अब वो माँ के सामने कैसे मुँह दिखायेगा...

ये ख्याल तो उसके मन में चल ही रहा था पर फिर उसके दिमाग से वो दृश्य नहीं निकल रहा था जो उसने देखा था ...जैसे वो आँखे बंद करता तो उसको सरिता की नंगी तरवीर दिमाग में आ जाती...उसका मन कर रहा था की काश माँ ने मुझे देखा न होता तो मैं उनके चुदाई का पूरा आनंद ले पता...ये सोचते सोचते वो बेड पे लेट गया और मुठ मरने लगा...उसकी आँखे बंद थी और वो अपनी माँ को चोदते हुआ दृश्य मन में ला कर मुठ मर रहा था....कुछ देर बाद उसका सारा पानी निकल गया...उसने पहली बार अपनी माँ के बारे में सोच कर मुठ मरी थी...

मनोज और सरिता कुछ देर बैठ कर इधर उधर की गप्प मरते रहे ...फिर सरिता खाना बनाने के लिए किचेन में चली गयी....राहुल अपने कमरे से निकलने का कोई विचार था नहीं ...वो इतना घबरा गया था..वो वैसे ही बेड पे लेटे लेटे सो गया....उधर सरिता ने खाना बनाया और दोनों ने खाना खा लेने के बाद अपने रूम में चले गए....राहुल का रूम सरिता और मनोज के रूम के बिलकुल अपोजिट में था...राहुल का दरवाजा खोलने पे सीधे सरिता के रूम का दरवाजा दिखाई देता था....

सरिता तो को जब राहुल कमरे बहार से देख रहा था तोह न जाने क्यों उसे अच्छा लग रहा था...उसे चुदाई में और मज़ा आ रहा था....अपना ही बेटा अपनी ही माँ को चुदते हुए देख रहा था...सरिता के मन में बहुत शरारत चल रही थी...वो जान गयी थी के राहुल अपने कमरे में ही है....

दोनों जब कमरे में गए तो मनोज जेक बेड पे बैठ गया और सरिता ने धीरे धीरे अपने सरे कपडे उतर के फेक दिए...दोनों रूम में दाखिल थे पर अपने पीछे दरवाजा खुला ही छोड़ दिया था....मनोज तोह समाज रहा था की घर में कोई है ही नहीं तो किस बात की चिंता...पर सरिता जानती थी की राहुल अपने कमरे में ही है....ये सरिता के दिमाग की ही शरारत थी...उसने जान बुज के कमरा खुला छोड़ दिया था.....वो चाहती थी की राहुल इस बार पूरी फिल्म देखे....उधर मनोज ने भी अपने सरे कपडे उतर दिए....कुछ ही देर में दोनों की कामक्रीड़ा पुरे जोश में शुरू हो गयी....

सरिता जोर जोर से सिसकिया भर रही थी और चिल्ला रही थी... और बार बार दरवाजे के तरफ देखती थी...की सामने के दरवाजे में कुछ हल चल होती है के नहीं.....और जो उसकी इच्छा थी वो पूरी हुई....सरिता के जोर जोर से चीखने ने पे राहुल की नींद खुल गयी....और राहुल समाज गया की अब सरिता और मनोज सामने वाले कमरे में ही चुदाई कर रहे है....

राहुल की दरवाजा खोलने की हिम्मत तो हो रही थी नहीं....पर उसके अंदर की वासना उसको कह रही थी की एक बार देख लू खोल के दरवाजा.....

और बोहोत हिम्मत कर के राहुल ने धीरे से दरवाजा खोला और छोटी सी सुराख़ में से देखा....तो सामने देखा की मनोज निचे लेता हुआ है और सरिता उसके ऊपर चढ़ी हुई है और अपनी गांड हिला हिला के पूरा लंड अपने चुत में ले रही है.....ये देख के राहुल का हथिया लोहे के रोड जैसा तन गया और पंत में ही झटके मर ने लगा....अभी सरिता का चेहरा दरवाजे की तरफ नहीं था और न ही मनोज उसको देख पा रहा था.....पीछे से इस नज़ारे को देख राहुल पुरे मज़े में आ गया और अपना लंड पैंट से बहार निकल के मुठ मरने लगा....राहुल ने ये सन पहले सिर्फ पोर्न मूवीज में देखा था...पर पहली बार वो लाइव देख रहा था वो भी अपनी माँ को....और सरिता की बड़ी गांड जैसे ही ऊपर निचे होते तो उसके चुतर पुरे हरकत के साथ हिलते थे...

राहुल मज़े ले ही रहा था की सरिता फिर पीछे मुड़ गयी...उसको भी राहुल का इंतज़ार था....

जब सरिता ने पीछे देखा तो वो समाज गयी की उसका बेटा फिर उनकी चुदाई के मज़े ले रहा है....उसने दरवाजे की और देख एक कामुक मुस्कराहट दी....और इस बार उसने मनोज को रुकने के लिए नहीं कहा पर और जोर से अपनी गांड लंड के ऊपर पटकने लगी इस से पुरे कमरे में फचक फचक फचक.....की आवाज गूंजने लगी.....राहुल को लगा की माँ ने फिर उसे देख लिया है....तोह उस ने फिर अपना दरवाजा बंद कर दिया....उधर सरिता अब जोर जोर से चीखे भरने लगी थी...

सरिता - आअह्ह्ह्हह...अह्ह्ह्ह...अह्ह्ह...चोदो मुझे..ओह्ह्ह्हह....आअह्ह्ह्ह....

राहुल ने फिर सोचा के शायद माँ ने उसे नहीं देखा नहीं तो फिर पिछली बार की तरह मनोज को रुकने के लिए कहती....अब राहुल की हिम्मत और बढ़ गयी...फिर उसने फिर दरवाजा खोलने का सोचा...तो अचानक से आवाज बंद हो गयी....राहुल का मन बैठ गया...उसे लगा की फिर इस बार पूरा खेल नहीं देख पाया.....और वो बेड की तरफ बढ़ ही रहा था की फिर सरिता की आवाज आयी...

सरिता - मुझे ये लंड दे दो ओह्ह्ह्ह....डालो मेरी चुत में तुम्हारा प्यारा लंड....आह्हः डालो ना...

सरिता अब कड़ी हो गयी थी और बेड पे झुक कर अपनी गांड आगे कर दी थी...मनोज पीछे से अपना लंड सरिता के चुत पे रगड़ रहा था और उसे तैसे कर रहा था....

इतने में राहुल ने दरवाजा थोडसा फिर खोला...अब उसे पूरा नज़ारा क्लियर दिख रहा था...अपनी माँ का पूरा चिकना बदन....उसकी लटकते हुई आम जैसी चूचिया...ये देख के राहुल का लंड फिर जोश में आ गया....

सरिता - (सीधे दरवाजे की तरफ देख के) डालो न अपना लंड मेरी चुत में....इतना मत तरसाओ न..आह्ह्ह्ह... डालो न....छोड़ दो मुझे अपने प्यारे लंड से....आह्हः...डालो न...

अब सरिता मनोज को जानू कह के नहीं बुला रही थी...और वो लगातार दरवाजे के तरफ ही देख रही थी...जैसे राहुल से ही कह रही हो.....राहुल ये देख के रोमांचित हो गया और अपना लुंड जोर जोर से हिलने लगा.....उसे ये देख के बहुत मज़ा आ रहा था....

मनोज ने फिर एक झटके के साथ पूरा लुंड सरिता के चुत में दर दिया....वो जोर से चीखी...

सरिता - आअह्ह्ह्ह.....तुम्हारा लंड कितना बड़ा है....अह्ह्ह....चोदो अपने लंड से मेरी चुत को....ओह्ह्ह्हह....ओह्ह्ह्हह्ह.....ओह्ह्ह्हह्हह माहहहहह....जोर से चोदो ओह्ह्ह्हह....

सरिता ये सब सामने राहुल की तरफ देख के कह रही थी....राहुल भी अपने मन में सोच रहा था की मैं ही अपने माँ को चोद रहा हु....और मुठ मरता रहा....

फिर २०-२५ झटके लगाने के बाद सरिता पलट के बेड के कोने पे लेट गयी....अब तो राहुल को पूरा व्यू दिख रहा था....उसकी माँ का पूरा चिकना बदन वो निहारता नहीं थक रहा था....

मनोज ने फिर १०-१५ झटके लगाए तो उसको महसूस हुआ के उसका पानी निकने वाला है....उसने अपना लंड बहार निकला और सरिता झट से अपने घुटनो पे बैठ गयी और अपना मुँह खोल दिया ....मनोज ने फिर ४-५ बार अपना लुंड हिलाया और अपना पूरा पानी सरिता के मुँह में चोद दिया.....सरिता ने भी पूरा पानी अपने मुँह में लेके जातक गयी....और मनोज को देख के मुस्कुराने लगी....ये देख के राहुल का पानी छूठ गया.....और वो जोर जोर से हाफने लगा....

मनोज - कैसा लगा स्वीट डिश..

सरिता ने मनोज के लंड को पूरा चाट के उसको पूरा साफ़ कर दिया....फिर उसने दरवाजे की तरफ देख एक कामुक मुस्कान देते हुए कहा...

सरिता - तुम्हारा ये पानी कितना मीठा है....काश मैं इसे रोज पी सकती

फिर सरिता कड़ी हो के मनोज को किश करने लगी...२ मिनट किश करनेके बाद मनोज अपने कपडे पेहेन के बेड पे लेट गया और सरिता ने भी अपने कपडे पेहेन लिए और वो सीधा चल के दरवाजे के पास आयी और दरवाजे की तरग देख के बड़ी कामुक स्वर में बोली...

सरिता - तुम्हे मज़ा आया ना.....

सरिता जानती थी के दरवाजे के उस पार से राहुल झक रहा है...

उधर मनोज बोल पड़ा.

मनोज - तुम्हे चोदने का सुख के सामने कुछ नहीं मेरी जान....

सरिता खिल खिला के हस पड़ी.....और दरवाजा बंद कर दिया....

राहुल मुठ मर के थक चूका था...और उसे भूक भी बहुत लगी थी...तो उसने mauke का फ़ायदा उठा के रूम से निकला और चुप छप से किचेन में चला गया....वह उसने फ्रिज में से केक निकल के खा लिया और अपने रूम में आ के सो गया....

शाम के ६ बज रहे थे...मनोज ड्राइंग रूम में आ के बैठ गया था और सरिता किचेन में चाय बना रही थी की उतने में स्वीटी घर में आयी...और लाया हुआ सामान दिखने लगी...सरिता भी चाय बना के ड्राइंग रूम में आ गयी...और तीनो स्वीटी ने लाया हुआ सामान देख रहे थे की उतने में राहुल अपने कमरे से निचे आया....मनोज ने पूछा

मनोज - अरे तू कब आया....??

राहुल हक्का बक्का रह गया...उसके मेह से आवाज नहीं निकल रही थी...

राहुल - मैं वो..मैं वो...मैं.....

उतने में सरिता मनोज से बोल पड़ी...

सरिता - हम सो रहे थे तब आया होगा...(राहुल के तरफ एक मुस्कान देते हुए) तेरे लिए कुछ खाने के लिए लाऊ...थक गया होगा न..और मंद मंद हसने लसते हुए किचन में जाने लगी...

सरिता ने स्लीवलेस्स गाउन पहना हुआ था जो वो रोज पहनती थी...पर राहुल की नज़र अब उसमे भी अपने माँ को देख रहा था तो उसका दिल मचलने लगा था...सरिता जब मुड़ के किचन की तरफ जा रही थी तो ...राहुल अपनी नज़रे सरिता की मटकती हुई गांड से नहीं हटा पा रहा था...और एकटक निहारता जा रहा था.

.उतने में मनोज ने आवाज लगाई...

मनोज - अरे राहुल खड़ा क्यों है..इधर आजा..बैठ जा...साथ में चाय पिएंगे...सुबह तो तू था नहीं...शाम में सही...वैसे भी ज्यादा मौका मिलता नहीं मुज़हे तुम लोगो के साथ समय बिताने का...

राहुल - (सोफे पे बैठे हुआ) तो क्या हुआ पापा अब तो आप घर पे ही है और मैं भी घर पे ही हु...और कल मैच भी है....साथ में देखते है...

मनोज - अरे कहा....मेरी आज रात ही फ्लाइट है यूरोप की...इम्पोर्टेन्ट बिज़नेस डील है....काम से काम दो मानिने लग जायेंगे आने में....

राहुल - (मन में सोच रहा था...अब तो दो महीने का समय है...माँ को किसी तरह रिज़ा ने का प्लान बनाना पड़ेगा....अब तो मैं माँ को चोदे बिना नहीं रह सकता....मेरे दिमाग में अब सिर्फ माँ की नंगी तस्वीरी घूम रही है....क्या बदन है हहहाइए ....)

मनोज - अरे कहा खो गया फिर से....

राहुल - कुछ नहीं पापा....वो बस यु ही...वो आप जा रहे है फिर से तो अच्छा नहीं लग रहा...

उधर किचेन में सरिता सोच रही थी...

सरिता - (मेरे घर में इतना जवान लंड है फिर भी मैं इतने दिन चुदाई के लिए तड़पती रही...न जाने कितने गाजर मूली बर्बाद हो गए इस चक्कर में....पर राहुल को मुझ में इंट्रेस्ट है या बस दो लोगो की चुदाई देखना चाहता था....वैसे भी वो जवान खून ...उसे तो कॉलेज की लड़किया पसंद होंगी...मुझ में क्यों इंट्रेस्ट होगा...पहले कभी वैसी नज़र से देखा नहीं उसने मुझे ...और न ही मैंने सोचा की .....वैसे कोशिश करने में क्या हर्ज है...शायद कुछ काम बन जाये...और मुझे रोज़ रात को लंड का इंतेज़ाम हो जाये...)

दोनों माँ बेटे के दिल में व्यसना जग चुकी थी एक दूसरे को चोदने की...पर अब पहल कौन करेगा...सरिता या राहुल ये सवाल था.....

 


रात को सभी ने साथ मे बैठ के खाना खाया । पूरे समय राहुल अपनी माँ को ताड रहा था। कभी सरिता की बड़ी बड़ी चुचियों को देखता तो कभी उसकी मटकती हुई गांड को निहारता। सरिता भी जान गयी थी उसका बेटा अपनी ही माँ को गंदी नज़रो से देख रहा। ये सोच सोच के उसके बदन में भी अजीब सी हलचल हो रही थी। वो भी अपने बेटे को पुरे नज़ारे दिखा रही थी। अपनी गांड को मटका मटका के चलती ...मनोज को खाना परोस ते समय थोड़ा ज्यादा ही झुक जाती थी उससे राहुल को सरिता के चुचियों के बीच की गहरी खाई दिखाई दे जाती थी। राहुल के पैंट में तम्बू बन चुका था और वो किसी तरह अपने खड़े लंड को छुपा के डाइनिंग टेबल पे बैठा हुआ था। उसको डर था कही पापा ने देख ले उसे इस हालत में।

कहना खत्म होते ही राहुल झट से अपने रूम में भाग गया । दूसरी तरफ सरिता और मनोज अपने रूम में चले गए और मनोज के लिए पैकिंग करने लगे । स्वीटी नीचे ही बैठी थी और tv देख रही थी।

राहुल ने रूम बंद कर के अपने लंड को अपने पैंट से मुक्त कर दिया। उसका लंड फन फना रहा था। फिर उसने आंखे बंद कर के मुठ मारना शुरू किया। उसके सामने अपनी माँ की तस्वीर दिखाई दे रही थी। वो दिन में पहले ही 2 बार मुठ मार चुका था इसलिए इस बार उसे झड़ने में ज़्यादा टाइम लग रहा था । और पिछली बार की तरह उसके पास लाइव शो भी तो नही चालू था..

कुछ ही देर में नीचे से सरिता ने राहुल को आवाज़ लगाई

सरिता - राहुल...जल्दी नीचे आ जा ...पापा निकल रहे है।

राहुल अचानक से चौक गया। उसके सामने उसका पैजामा पड़ा था वो पेहेन के नीचे भगा । पैजामा पतला होने के वजह से उसके पैंट में का तम्बू साफ दिखाई दे रहा। वो जब तक नीचे आता टैब तक मनोज गाड़ी में बैठ गया था...राहुल ने मनोज को दरवाजे से विदा किया ...फिर सरिता स्वीटी और राहुल मुड़ के घर मे घुसे और दरवाजा बंद कर दिया। जैसे ही सरिता और स्वीटी दरवाजा बंद कर के पलटे तो उनके की नज़र सीधे राहुल के पैंट में बने तम्बू पर गिरी। वो देख के स्वीटी तो शॉक लगा और वो झट से राहुल को डाँटते हुए बोली

राहुल - ओये हीरो ...कपड़े तो ठीक से पेहेन लिया कर..(पर नज़र नही हटाई )

सरिता - (मुस्कुराते हुए) स्वीटी शायद कोई काम अधूरा छोड़ के आया है तेरा भाई... अब तो बड़ा हो गया है ना

और दोनो जोर जोर से हँसने लगे..

राहुल शर्मा के सीधा रूम में भाग गया...

सरिता को राहुल का तम्बू देख के अंदाजा हो गया था कि उसका हथियार अपने बाप से बड़ा है...और स्वीटी ने तो अभी तक पोर्न मूवीज के अलावा असलियत में लंड देखा ही नही था। उसके बोयफ़्रेंडस तो कई हुए पर स्वीटी उनको कभी कुछ उल्टा सीधा करने देती नही थी।

राहुल रूम में जेक सोच रहा था कि आज ये क्या ही रह है मेरे साथ...सुबह से अजीब अजीब घटनाए हो रही है।

एक ही दिन में राहुल के साथ बहुत कुछ हो गया था..नीचे हुए एम्बर्समेंट के बाद राहुल का लंड भी सो गया..और राहुल भी जाके अपने बेड पे सो गया..

सरिता और स्वीटी भी अपने अपने कमरे में चले गए। सरिता तो लेटे लेटे सोच रही थी ...राहुल को अगर किसी तरह सिड्यूस कर लिया तो मेरी चूत की तड़प हमेशा के लिए मिट जाएगी ....और ये सेक्स टॉयज की जरूरत भी नही पड़ेगी..पर अब राहुल को सिड्यूस करे तो कैसे...स्वीटी भी आज कल घर मे ही रहती है...उसको कुछ शक हो गया तो ...वी तो मनोज को जरूर बतायेगी..बाप की लाडली बेटी जो ठहरी...ये सोचते सोचते सरिता को नींद लग गयी।

अगले दिन सुबह सरिता रोज की तरह जल्दी उठ गई ..अपने कमरे से निकलते ही उसने देखा कि राहुल का कमरा खुला ही है और वो अभी सो रहा है था। वो धीरे से रूम में घुस गई..राहुल गहरी नींद में था..सरिता राहुल के करीब जा के बैठ गयी...राहुल चादर ओढ़ के सोया हुआ था। सरिता ने धीरे से चादर नीचे खीची... उसको राहुल का लंड देखना था ...राहुल का लंड भी अभी सोया हुआ ही था पर फिर भी सरिता को आकर्षक लग रहा था...सरिता को राहुल का लंड छुनेकी बड़ी इच्छा हो रही थी पर फिर उसने सोचा कि शायद राहुल जग जाएगा..

अपना मन मार के फिर सरिता वह से उठ गई ...और दरवाज़ा खोल के वह से निकल गयी..निकलते समय जब उसने दरवाज़ा बन्द किया तो दरवाज़े की आवाज़ से राहुल की नींद खुल गयी...उसने इधर उधर देखा...इसको कुछ होश ही नही था और कुछ खबर ही नही थी अभी अभी कमरे में क्या हुआ है।

राहुल फिर चादर ओढ़ के सो गया...

सरिता को कुछ प्लान नही सुच रहा था राहुल को सिड्यूस करनेका...उसने सोचा पहले स्वीटी को घर से भागना पड़ेगा...तो वो स्वीटी के कमरे की तरफ गयी..उसने देखा कि स्वीटी अभी बेड में ही थी उठी नही थी पर जगी हुई थी और पड़े पड़े ही मोबाइल में कुछ कर रही थी। सरिता कमरे में दाखिल हो गयी और स्वीटी से बोली..

सरिता - क्या सुबह सुबह मोबाइल में लगी हुई हो..

स्वीटी - कुछ नही बस फेसबुक देख रही थी...कुछ कम था क्या इतनी सुबह सुबह मेरे कमरे में ?

सरिता - नही नही..में तो युही आयी थी...और क्या चल रहा तुम्हारे फेसबुक पे आज कल ...

स्वीटी - कुछ खास नही..कोई शादी कर रहा है...कोई घूमने जा रहा है...सब अपनी फोटो शेयर करे जा रहे है..बस यही चल रहा है और क्या...

दरअसल स्वीटी को भी शादी करनेकी बहुत इच्छा थी पर सीधे सीधे बोल तो सकती नही..तो जहा चांस मिला वह कुछ तो टोंट मार देती थी..उसके भी शरीर मे वासना के कीड़े दौड़ रहे थे...

सरिता - (मौके का फायदा उठाते हुए)अच्छा...तो तुम क्यों नही जाती घूमने कही..

स्वीटी - हम्म्म्म ...जा तो सकती हूं पर कहा जाऊ ..

सरिता - अरे उसमे कौनसी बड़ी बात है..अपनी मौसी के पास चली जा ...तेरे मूड भी थोड़ा फ्रेश हो जाएगा और तेरे मौसी को भी कोई मिल जाएगा शॉपिंग में कंपनी जे लिए...

शॉपिंग का नाम लिया नही तो स्वीटी उछाल पड़ी...और उठ के बैठ गयी...

स्वीटी - है ये सही है...और मौसी का घर है भी कितना दूर ...दी तीन दिन रह के वापस आ जाउंगी...

सरिता - हा तो बात कर लो अपने मौसी से ..

स्वीटी - अभी लगती हु फ़ोन..

स्वीटी ने मौसी से 2 मिनट बात की और बोली...

स्वीटी - क्या आईडिया दिया है माँ... मौसी भी फ्री ही है..में फिर कल चली जाउंगी...

सरिता - (ये तो अब कल जाने की बात कर रही है..अब क्या करे) अरे बीटा कल क्यों आज ही निकल जा...कार घर पे ही है...और वैसे भी यहाँ कोनसा काम है तुझे ...

स्वीटी - है ये भी ठीक है..यहां क्या ही करना है मुझे...ये बोल के बेड से उठी और बाथरूम की तरफ चल पड़ी...और जाते जाते सरिता से बोली

स्वीटी - माँ में तैयार होके आती हु...आप कुछ बढ़िया से नास्ता बनाओ जब तक...

सरिता का प्लान चल गया..

सरिता - (अब स्वीटी काम से कम दो दिन तो नही आएगी...)

और सरिता नीचे किचेन में चली गयी...उसने फिर स्वीटी का फेवरेट नास्ता बनाने में लग गयी...राहुल अभी सोया हुआ ही था..कुछ देर बाद स्वीटी तैयार हो के नीचे आयी..सरिता ने नास्ता बना के टेबल पर लेक रखा था...

सरिता - तेरा फेवरेट नास्ता बनाया है आज...

स्वीटी - ओहो ...क्या बात है...मज़ा आ गया...माँ आज तो दिन ही बना दिया आप ने सवेरे आईडिया और अब बढ़िया नास्ता ..आज इतनी मेहरबान कैसे हो रही हो मुझ पे

सरिता - (तू क्या जाने तेरे जाने से मेरा कौनसा काम बनने वाला है) अरे बीटा इस मे कौनसी बड़ी बात है..आखिर माँ हु तेरी...

स्वीटी ने फिर फटाफट नास्ता खत्म किया और निकल गयी...अब सरिता ऊपर अपने कमरे में गयी और उसकी पुराना नाईट गाउन निकाला जो मनोज ने उसे गिफ्ट दिया कई सालों पहले..वो बोहुत डीप कट वाली थी और उचाई में केवल सरिता के जांघो तक आती थी...सरिता नाहा के निकली और वो गाउन पेहेन लिया...

वो वह के उसने अपने आप को मिरर में देखा और अपने ही सुडौल बदन को देख के शर्मा गयी और मुस्कुराने लगी...आगे तो उसका मैदान साफ था...

सरिता सीधा राहुल के कमरे में दाखिल हो गयी ...वी सोया हुआ ही था ...उसने दरवाजे पे ही खड़े हुए राहुल को आवाज़ लगाई

सरिता- राहुल बेटा ...और कितनी देर तक सोयेगा ..उठ जा ...

राहुल - राहुल अंगड़ाई ले के आंखे खोलता है...और सामने देख के दंग रह जाता है...उसको सामने का दृश्य सपना लगता है ...तो वो अपनी आंखें फिर से मसलता है...और देखता है...वो बेड से उठ के बैठ जाता है...उसीकी आंखे एक पल के लिए भी सरिता से नही हटाती ..वी उसको सरिता को घूरे जाता...उसके लन्ड पंत में से सलामी देने लगता है...वो देख के सरिता मन ही मन मुस्कुराती है।

सरिता - राहुल क्या हुआ बेटा... चल उठ जा अब...जल्दी से तैयार हो जा और नास्ता कर ले...

और सरिता वह से निकल जाती है..राहुल का हाल कुछ ठीक नही था अब..वो सीधा बाथरूम में जाता है और अपनी माँ के नाम से मुठ मारने लगता है...थोड़ी देर में उसका पानी छूट जाता है....फिर वो तैयार हो के नीचे आता है...

सरिता वह पे नास्ता लगा के टेबल के पास बैठी थी...राहुल को विश्वास नही हो रहा था जो वो देख रहा था...वो सरिता को घूरता जा रहा था...ये देख के सरिता का मन खुश ही रह था...उसका प्लान काम कर रहा था..

राहुल टेबल के पास आ के बैठ जाता है...

सरिता - क्या हुआ राहुल ..सब ठीक तो है

राहुल की तो आवाज़ ही अटैक गयी थी...

राहुल - (लड़खड़ाते हुए) हा ...हा ...सब ठीक …है

सरिता- तो फिर ऐसे क्या देख रहा है

राहुल - (आंखे नीचे कर के ) नही माँ कुछ नही...वो तो बस युही...

सरिता - (बड़ी मसुमियात से)आज बोहुत दिनों बाद मैंने न ये ड्रेस निकली है..तेरे पापा ने मुझे गिफ्ट दी थी बोहुत सालो पहले...तो सोचा ट्राय कर के देख लो अभी भी फिट होती है या नही...आ तो गयी है ड्रेस पर थोड़ी टाइट हो गयी है..अभी थोड़ी मोटी हो गयी हु ना...

राहुल - (फिर घूरते हुए ) नही नही माँ...

सरिता - क्या नही नही ...अछि नही लगी तुझी ये ड्रेस...

राहुल - नही माँ वो बात नही..

सरिता - फिर...

राहुल - वो ..वो...

सरिता - क्या वो वो ...

राहुल - (आप बड़ी सेक्सी दिख रही हो) वो माँ आप अभी काफी फिट हो...

सरिता - अच्छा वैसे...

और सरिता टेबल से खड़ी हो गयी...घूम के राहुल की तरफ से उल्टी घूम गयी...सजे चुटर हल्के हल्के से दिख रहे थे...राहुल की आंखे फटी की वहति रह गयी...

सरिता - (उत्साहित हो के)और ये ड्रेस कैसी लगी तुझे...

राहुल - (कहना तो चाहता था कि तुम बड़ी हिट लग रही हो इस ड्रेस में पर....) अछि है माँ

सरिता - (शरारती आवाज़ में)ड्रेस अछि है या मैं अछि लग रही हु इस ड्रेस में....

राहुल - माँ आप भी अच्छी लग रही हो...

सरिता - (कामुकता से ) बस अछि लग रही हु...तो पहले नही लगती थी...

राहुल - वैसी बात नही है माँ...

सरिता - तो कैसी बात है...

राहुल - नही वो..वो...

सरिता - फिर वो वो शुरू हो गया तेरा...मै इस ड्रेस में सेक्सी लग रही हु के नही...

राहुल ऐसी बात सुन के दंग रह गया..फिर होश संभाल के बोला...

राहुल - हा माँ

सरिता - क्या हा ..

राहुल - (लड़खड़ाते हुए ) आप वो ...सेक्सी लग रही हो इस ड्रेस में...

सरिता - अरे बुद्धू तो इतनी देर लगते है ये बोलने में...

राहुल - नही माँ वो बस युही...

सरिता - अच्छा चल ठीक है...नास्ता खत्म कर ले और प्लेट्स किचेन में लेकर आजा ..मैं किचन में ही हु...और वो वह से निकल गयी...

राहुल की नज़र सरिता के गांड के तरफ ही थी...वो जैसा चल रही थी...वैसे उसके चुतर हिल रहे थे...

राहुल फिर नास्ता खत्म कर के प्लेट किचेन में लेकर गया...वह सरिता सिंक में प्लेट्स धो रही थी...

राहुल - इसे कहा राखु

सरिता - एक काम कर ...यहां सिंक में डाल दे...

वो सिंक की तरफ बढा और प्लेट सिंक में रखने ही वाला था के...सरिता उसकी तरफ पलट गई...इसे सरिता के चुचिया राहुल के छाती से टकरा गए...राहुल के शरीर मे करंट जैसा दौड़ गया ...वो हिला नही बस पुतले जैसा खड़ा हो गया...सरिता पीछे नही हटी...वो और पास आ गयी और अब उसकी चुचिया पूरी तरह से राहुल की छाती से सट्टे हुए थे...दोनो की सांस तेज़ हो गयी थी...राहुल होड़ घबराया हुआ भी था...

सरिता ने कुछ नही कहा और धीरे से अपनी एड़ियों पे कड़ी हो गयी...जिस से उसका बैलेंस थोड़ा बिगड़ा तो उसने अपना एक हाथ राहुल के कंधे पे दाल दिया...राहुल ने भी उसको संभल ने के लिए एक हाथ कमर के तरफ से पकड़ लिया...दोनों कुछ नहीं बोल रहे थे...बस एक दूसरे के सांसो को महसूस कर रहे थे...कमरे में पूरा सन्नाटा छाया हुआ था....सरिता ने अपनी आँखे बंद कर ली और धीरे से अपने होंठ राहुल के होंठो की तरफ बढ़ाना शुरू किया....राहुल का भी अभी कॉन्फिडेंस बढ़ गया था ...वो थोड़ा सा झुकने लगा...अब दोनों के होंठो के बिच में बहुत काम फैसला रह गया था...तो सरिता ने आँखे खोली और राहुल की तरफ देख के एक कामुक मुस्कान दे दी

...अब राहुल पुरे कॉन्फिडेंस में आ गया....फिर सरिता ने तेजी से अपने होंठ राहुल के होठों के तरफ बढ़ाये...दोनों के होंठ मिलने वाले ही थे की......

डोर बेल्ल बज गयी....दोनों घबरा गए और झट से अलग हो गए...राहु पीछे सरक गया....दोनों ने अपने होश संभाले...

राहुल - मैं देखता हु...कौन है...

सरिता - है है देख जा...

जैसे ही राहुल किचेन से बहार निकला ...उतने में सरिता बाजु वाले कमरे में चली गयी और एक लम्बा सा जैकेट जैसा पेहेन लिया जो नाईट गाउन के साथ आता है...

बहार राहुल ने दरवाजा खोला तो पड़ोस में काम करनेवाली कांता बाई दरवाजे पे कड़ी थी...

राहुल - (बड़े उखड़े हुए स्वर में ) क्या काम है...

कांताबाई - वो बड़ी मालकिन ने छोटी मालकिन को घर पे बुलाया है...

उतने में सरिता कमरे से बहार निकली...

सरिता - कौन है राहुल...

राहुल - कांताबाई आयी है...दादी ने आपको बुलाया है घर पे...

ये सुनते ही सरिता दरवाजे पे आ गयी....

सरिता - क्या हुआ कुछ काम है क्या....

कांताबाई - पता नहीं छोटी मालकिन...बस मुझे बोलै की आप को बुला के लेकर आने...

सरिता - अभी बुलाया है क्या....

कांताबाई - है मालकिन...अभी बुलाया है.....

सरिता - अच्छा तू चल मैं आती हु...

राहुल ने फिर दरवाजा लगा दिया ....और सरिता ऊपर के कमरे के तरफ जाते हुए बोली...

सरिता - राहुल मैं जरा जेक आती हु दादी के पास....पता नहीं क्या काम निकल आया है....

राहुल - (उदास होते हुए) है माँ ठीक है....

सरिता और राहुल दोनों को मलाल हो रहा था....इतना अच्छा मौका हाथ लगा था...पर जो भी आज हुआ उससे राहुल का कॉन्फिडेंस बहुत बढ़ गया था....और उसे अब लगने लगा था की....जो उसने अपनी माँ को चोदने का ख्वाब देखा था वो सच हो सकता है....आज नहीं कभी और सही....

उधर सरिता भी मायूसी से ऊपर कमरे में गयी और अपने कपडे बदल के साड़ी पेहेन ली...सरिता को भी लग रहा था की उसका प्लान तो चल गया था...पर कम्बख्त सास बिच में आ गयी...फिर उसने सोचा ...अभी नहीं तो क्या हुआ...आज रात को तो हम दोनों ही घर में है....

राहुल ने फिर बैठे बैठे टीवी देख रहा था....और ऊपर से माँ निचे आयी....साड़ी पेहेन के....माँ की साड़ी नहीं के निचे बंधी हुई थी... और वो बिलकुल कामसूत्र की मूरत की तरह दिख रही थी....

सरिता निचे आयी और बोली...

सरिता - साड़ी ठीक तो दिख रही है न...

राहुल - है माँ अछि दिख रही है....

सरिता - (शरारती स्वर में) क्यों इसमें सेक्सी नहीं लग रही मैं....

राहुल इस बार नहीं डरा ...उसका डर ख़तम हो गया था...

राहुल - वो तो आप ही सेक्सी हो....तो कुछ भी पेहेन लो सेक्सी ही लगोगी न....

सरिता - (खिलखिलाते हुए) अच्छा...बड़ा बदमाश हो गया है तू ....तू ठहर मैं तुझे आ के दिखती हु....

और ये कह के निकल गयी घर से...

 


सरिता अपने घर से निकल के अपनी सास के घर जाने के लिए निकल गयी ...रास्ते मे वो सोच रही थी कि जैसै उसने प्लान में सोचा था वैसा ही हुआ पर कमबखत कांता ने रायता फैला दिया...आज राहुल बराबर मेरे प्लान के मुताबिक फस गया और उसे शक भी नही हुआ कि ये सब उसकी माँ ने उससे जान बूझ के करवाया था (और मन ही मन हस देती है)...अब कुछ नई तरकीब सोचनी पड़ेगी..

राहुल घर में tv शुरू कर के सोफे पे बैठा था...पर उसके दिमाग के tv पे एक ही सीन रिपीट पे चल रहा था जिस में उस के होठ अपने माँ के होठों से छूने वाले थे...उसको विश्वास ही नही हो रहा था कि उसकी माँ उसको फ्रेंच किस करने वाली थी...फिर उसके मन मे आया कि शायद ये एक एक्सीडेंट था और मैं फालतू मैं इमोशंस में बह रहा हु...पर मा की आंखे बंद की हुई तस्वीर उसके आंखों से जा नही रही थी...फिर वो सोचने लगा क्यों न एक बार ट्राय करके देखा जाए कि माँ को मुझ में इंटरेस्ट है या सुबह जो हुआ वो बस एक एक्सीडेंट था...

सरिता अपनी सास के घर पहुच गयी...विमला हॉल में ही बैठी थी...

सरिता - प्रणाम सासुमा...आपने बुलाया था?

विमला - जीती रहो बेटी...आओ बैठो...दरअसल में कल विजया (मनोज की छोटी बेहेन) के पास जाने वाली थी ...सोच रही हु कुछ दिन उसके पास रह के आउ...

सरिता - अच्छी बात है सासुमा...

विमला - तो एक काम है...जाना ही है तो मैंने सोचा उसके लिए एक दो साड़िया लेकर जाती हु...तो तुम बाजार से जा के आज कुछ अच्छी साड़िया लेकर आ जाओ...हम रात में निकल जायेंगे...

सरिता - क्या ससुरजी भी आ रहे हैं...

विमला - हाँ फिर ...वैसे यहाँ क्या ही करना है उनको...

सरिता - ये भी सही बात है...ठीक है मैं अभी राहुल को लेकर बाजार जाती हु और अच्छी सी साड़िया खरीद के लाती हु....

विमला - हा ठीक है....सीधे घर पे ही आ जाना...मैं दिन भर घर पे ही रहूंगी...

सरिता - ठीक है सासुमा...मैं चालू...

विमला - हा ठीक है...

विमला ने ये बताया ही नहीं के वो विजया के पास क्यों जा रहे है ना सरिता ने पूछा...सरिता अब अपने घर के तरफ जाने के लिए निकल गयी.....जाते जाते उसके दिमाग की घंटी बज गयी...वो घर पहुंची तो राहुल टीवी देख रहा था....वो सीधे राहुल के पास गयी तो राहुल ने पूछा...

राहुल - क्या हुआ माँ ....दादी ने क्यों बुलाया था...

सरिता - अरे कुछ नहीं....वो दादी और दादाजी तुम्हारे ...तुम्हारी बुआ के पास जा रहे ....उनके लिए कुछ खरीदना है...

राहुल - अच्छा...

सरिता - चल तुझे ही लेकर जाना पड़ेगा मुझे मार्किट...कार तो स्वीटी लेकर गयी है...अब तेरी बाइक पे ही जाना पड़ेगा...

राहुल तुरंत खड़ा हो गया...

राहुल - हा चलो माँ चलते है...

राहुल ने बाइक निकली और बहार तैयार खड़ा था...सरिता उतने में अपना पर्स लेकर आयी...डोर लॉक किया और राहुल के पास आ के...

सरिता - तू ठीक से चला तो लेगा ना....

राहुल - हा माँ ....मैं रोज चलता हु...

सरिता - हा वो मुझे पता है...पर मैं नहीं रोज बैठती ना बाइक पे....ना जाने कितने साल हो गए मुझे बाइक पे बैठे हुए...और तू कौनसा औरतो को लेकर घूमता है...

राहुल - औरतो को लेकर मतलब...

सरिता - अरे बीटा...मैं दोनों पाऊँ एक तरफ कर के बैठूंगी ना....तो तू बैलेंस कर लेगा...

राहुल - (शरारती अंदाज में) आप चिंता मत करो...आप मुझे कास के पकड़ लेना बाकि मैं संभल लूंगा...

सरिता - ठीक है तब...

और वो बाइक पे बैठ गयी...सरिता के दोनों हाथ राहुल के कमर से लिपटे हुए थे...राहुल के तो रोंगटे खड़े हो रहे थे...औरत को क्या किसी लड़की को भी अभी तक राहुल ने अपनी बाइक पे नहीं बिठाया था....जैसे वो ब्रेक मरता....सरिता आगे की तरफ हो जाती और उसकी बड़ी बड़ी चूचिया राहुल ले पीठ पे टकरा जाती....राहुल को बड़ा मज़ा आ रहा था....और उसका हथियार भी पैंट में सलामी दे रहा था...वो तो अच्छा है की उसने जीन्स पहनी थी...तो ज्यादा कुछ दिखाई नहीं पड़ रहा था....सरिता पीछे से सब पहचान गयी थी..की राहुल इतने ब्रेक क्यों मार रहा था....दो तीन बार उसने जब ब्रेक मारा तो उसके बाद सरिता राहुल को पीछे से कस के बैठ गयी...उसकी दोनों चूचिया राहुल की पीठ से पूरी तरह दबी हुई थी...दोनों के बिच में से हवा जाने की भी जगा नहीं बची थी....राहुल को तो जैसे बदलो में से गाडी चलने का एहसास हो रहा था....दोनों मज़े ले रहे थे...कुछ देर में मार्किट आ गया....

राहुल - कहा चलना है...

सरिता - वो साड़ी की दुकान में ....

दोनों साडी की दुकान में गए....सरिता ने फटाफट से दो सरिया खरीद ली और वो दुकान से निकल गए...

राहुल - अब कहा जाना है माँ....

सरिता - अब मार्किट में आये ही है तो मैं भी कुछ खरीद लेती हु मेरे लिया...

राहुल - हा ये ठीक है...कहा चलना है...

सरिता ने उसे इशारे से बताया...

सरिता - उस दुकान में चलते है...

वो अंडरगारमेंट्स की दुकान थी....बहार सभी पुतलो पे अंडरगारमेंट्स चढ़े हुए थे...कुछ एक औरतो के पुतले पे लिंगेरी चढ़ी हुई थी ....राहुल और सरिता दुकान में चले गए....

सेल्सगर्ल - क्या दिखाऊ मैडम...

सरिता - वो स्पेशल नाईट वाला चाहिए...

सेल्सगर्ल - मैडम ट्रांसपेरेंट में दिखाऊ ..नया कलेक्शन है...

सरिता - हा दिखाओ...

सेल्स गर्ल - मैडम साइज ...३४ डी ..

राहुल उधर खड़े हो के सब सुन रहा था पर उसके पल्ले कुछ नहीं पड़ रहा था क्युकी दोनों पुरे कोड लैंग्वेज में बात कर रहे थे....फिर सेल्स गर्ल ने एक बॉक्स सरिता को दिया और कहा मैडम आप चेक कर लीजिये...वहां सामने चेंजिंग रूम है...

सरिता चेंजिंग रूम में घुस गयी.....थोड़ी देर बाद उस ने राहुल को अंदर से आवाज़ लगायी...

सरिता - राहुल....राहुल बीटा....जरा इधर आना तो...

राहुल - (बहार खड़े खड़े) क्या हुआ माँ सब ठीक तो है ना...

सरिता - अंदर आ जाओ...कुछ काम है तुमसे...

राहुल - ठीक है माँ...आया...

कहते ही वो अंदर घुस जाता है...वह अंदर घुस था है...अंदर का सीन देख के उसकी हालत ख़राब हो जाती है...उसको पसीने छूट ने लगते है...पैंट के अंदर का मोटा लंड अचानक से पुरे जोश में आ जाता है....

अंदर सरिता ने अपना ब्लाउज उतर दिया था और अपनी पीठ दरवाजे की तरफ कर के कड़ी थी....जैसे राहुल अनादर घुसा तो उसको सरिता की नंगी पीठ के दर्शन हो गए...उस से उसकी हालत ख़राब हो गयी...

सरिता - बीटा मेरी थोड़ी मदद कर दे....

राहुल - हा माँ बोलो ना...क्या करना है...

सरिता - मेरे ब्रा का हुक शायद अटक गया है....थोड़ा खोल दे तो ...

राहुल धीरे धीरे आगे बढ़ा....उसके हाथ काँप रहे थे...फिर उसने अपने हाथ आगे बढ़ाये और ब्रा के हुक को छुआ....जैसे ही उसने वो खोलने की कोशिश की तो उसके हाथ सरिता की नंगी पीठ को छू गए जिससे राहुल के बदन में करंट दौड़ गया...सरिता समाज गयी की राहुल अभी नया खिलाडी है...और इस से पहले कभी किसी औरत को छुआ नहीं है...इसलिए इतना घबरा रहा है और उसके हाथ काँप रहे है....कुछ देर कोशिश करने के बाद ..

सरिता - क्या हुआ बीटा....नहीं खुल रहा है क्या...(अपनी गर्दन निचे दाल के धीरे से हसने लगती है)

राहुल - कोशिश कर रहा हु माँ...पर ये पता नहीं कैसे खुलता है...

सरिता - क्या तुमने कभी किसी लड़की का ब्रा नहीं खोला क्या...और खिलखिला के हस पड़ती है..

राहुल शर्मा जाता है...और कहता है...

राहुल - नहीं माँ...हुक तो छोड़िये मैं तो ब्रा को पहली बार छू रहा हु....

सरिता - (खिखिलाते हुए ) अच्छा...चल छोड़ दे ...मैं कर लुंगी..

इतना कहते ही ब्रा का हुक खुल जाता है...और आगे गिर जाता है...सरिता अपनी चूचियों को सदी के पल्लू से धक् लेती है और राहुल की तरफ पीछे मुद के कामुक सी मुस्कान देते हुए कहती है..

सरिता - थैंक्स बीटा...तू तो बड़ी जल्दी ब्रा खोलना सिख गया...तू बहार रुक मैं आती हु....

राहुल का मन वैसे कर नहीं रहा था वहां से निकलने का....वो अपनी माँ की नंगी पीठ के चमक को देख के पागल हो गया था...उसकी त्वचा बड़ी कोमल थी...जो मंद लाइट में चमक रही थी...दिल की इच्छा मार के राहुल वहां से निकल गया....

फिर कुछ देर बाद...सरिता चेंजिंग रूम से बहार आ गयी...और दो बॉक्स पैक करने केह दिया..फिर दोनों वहां से निकले और घर चले गए....

 


घर पहुचने पे सरिता ने कमरे में जाके ख़ुद के लिए ख़रीदे हुए कपड़ों का बॉक्स अल्मारी में छुपा के रख दिया और साड़ियाँ लेकर अपने साँस के घर चली गयी…घर से निकलते वक़्त राहुल से कहा….

सरिता - मैं ज़रा सासुमा के पास जाके ये साड़ियाँ देकर आती हु..

राहुल - अरे तो पहले बोल देती आप…सीधे वह ही जाते हम गाड़ी पे…

सरिता - कोई बात नहीं बेटा….मैं चली जाऊँगी…बग़ल में तो जाना है…

डरअसल सरिता को अपने लाए हुए कपड़े जो घर पे रखने थे…वो कपड़े अपनी साँस के पास कैसे लेकर जाती…कही ग़लती से साँस वो दिखाने के लिए बोल देती तो…

सरिता फिर विमला के पास आ के वो साड़ियाँ दे दी…विमल को भी साड़ियाँ पसंद आयी…

विमल - मुझे पता था…तेरा चोईस बढ़िया रहता है…इसीलिए तुझे ही ये साड़ियाँ लाने को कहा मैंने…बोहत सुंदर कलर है…विजया को ज़रूर पसंद आएगी ये साड़ियाँ…

सरिता - हाँ ये तो है…मेरी और विजया की पसंद भी काफ़ी मिलती जुलती है…

दोपहर का समय हो गया था…तो विमल ने पूछ लिया…

विमल - अरे तुने खाना खाया के नहीं…

सरिता - अरे अभी कहाँ सासुमा…अभी तो मार्केट से आयी हु…अब घर जाके खाना पकाऊँगी…राहुल भी तो घर पे ही है ना…

विमला – तो एक काम कर ना…यह कांता खाना बना ही रही है…तू राहुल को भी यही बुला ले…हमारे साथ ही खाना खा लेना…

सरिता - हाँ ठीक है…और मुझे भी अब घर जाके काम करने का मन नहीं कर रहा….

ये कहते ही सरिता ने राहुल को फ़ोन किया…

सरिता - राहुल बेटा…तू दादी के घर आ जा…लंच यही कर लेंगे आज…

राहुल को अपने दादा दादी के घर पे जाना पसंद नहीं था क्यूँकी जब भी वो उनके घर जाता तो दादाजी उसको पकड़ के अपनी पुरानी कहानिया घंटो तक सुनते बैठ जाते….तो राहुल ने सरिता को टालते हुए कहा…

राहुल - माँ मुझे तो अभी भूँक नहीं लगी है…आप घर आते समय…कुछ पैक करवा के लेके आना…भूँक लगने पे खा लूँगा…

सरिता - अच्छा ठीक है…मैं तेरा खाना पैक करवा लाती हु…

फिर राहुल अपने कमरे में चला गया…उसका लंड सवेरे से कंट्रोल में नहीं था….एक के बाद एक ऐसी घटनाए घाट रही थी कि जो उसके लंड को एकदम गरम कर रही थी…तो राहुल ने सोचा अब घर में कोई आने वाला तो है नहीं…जाके अपने रूम में पोर्न मूवी देखता हु…और अपने लंड को शांत करता हु….

राहुल अपने कमरे में गया और अपना अकड़ा हुआ लंड को आज़ाद कर दिया…उसने लैप्टॉप पे पोर्न चलाया और अपनी मूठ मरने लगा…

वह दूसरी तरफ़ सरिता ने सोचा की राहुल के साथ ही खाना खाया जाए तो उसने दोनो खाना पैक करवा लिया और घर की तरफ़ निकल गयी…घर पहुचने पे उसने देखा की राहुल हॉल में तो नहीं है…तो वो अपने कमरे में जाने के लिए ऊपर जाने लगी…ऊपर जाते हुए उसे किसी की आवाज़ आयी तो वो धीरे धीरे आगे बढ़ी तो उसे फिर समाज आया की उसका बेटा पोर्न देख रहा है और वो भी बिना हेड्फ़ोंन के….

सरिता धीरे से बिना कोई आवाज़ किए राहुल के कमरे के बाहर पहुँची..वह उसने देखा की राहुल का कमरा खुला ही है…उसने धीरे से राहुल के कमरे में झाँकके देखा तो उसके सामने का दृश्य देख के वो सिहर उठी….उसके बेटे का लम्बा और मोटा नंगा लंड सरिता ने पहली बार देखा था…उसके चुत गिली होने लगी…सरिता को होश ही नहीं रहा की कब वो अपनी चुत अपने हाथो से सहलाने लगी…

एक तरफ़ राहुल अपने मोटे लंड को ज़ोर ज़ोर से हिलाए जा रहा था….और दूसरी तरफ़ सरिता अपनी चुत को ज़ोर ज़ोर से रगड़ रही थी…

सरिता ने पहली बार अपने बेटे का लम्बा और मोटा लंड देखा था…

सरिता - (सोचते हुए) राहुल का लंड तो उसके पापा से भी बड़ा और मोटा है….हाए क्या लंड है…ये लंड चुत में जब जाएगा तो क्या मज़ा आएगा….

राहुल दूसरी तरफ़ पूरा अनजान था की…उसकी माँ उसको मूठ मरते हुए देख के अपनी चुत रगड़ रही थी….

जैसे जैसे राहुल ने ज़ोर ज़ोर से मूठ मारना शुरू किया तो वहाँ सरिता ने भी ज़ोर ज़ोर से अपनी चुत को रगड़ रही थी….

फिर राहुल ने झड़ने ही वाला था की उसके मुँह से आवाज़ निकली…

राहुल - (मधोशि में) आह्ह्ह….माँ….ओह मेरी माँ…मैं गया…..

ये सुन के सरिता भी झाड़ गयी….और उसकी चीख़ निकालने ही वाली थी के उसके अपना मुँह अपने दूसरे हाथ से धाक लिया..

राहुल ने अपना सारा ३-४ फ़वरे के साथ अपना सारा पानी छोड़ दिया….उसका सारा माल उसकी छाती पे उड़ गया था….राहुल की साँसे तेज़ हो गयी थी…

वहाँ सरिता भी झाड़ गयी थी और उसकी थंगे काँप रही थी…उसको खड़े रहने को भी तकलीफ़ हो रही थी…..फिर भी सरिता का मन प्रफुलीत हो गया था….उसको ये जान के ख़ुशी हो रही थी कि उसका बेटा…अपनी माँ के बारे में सोच के मूठ मार रहा था…ना की किसी जवान लौंडिया के बारे में सोच के …आगे का प्लान तो सरिता का सेट था…बस अमल में लाने की देरी थी…

सरिता झट से वह से निकल के हॉल में चली गयी और थोड़ी देर जा के थोड़ी दे सोफ़े पे जा के लेट गयी….राहुल भी थक के नींद के आग़ोश में आ गया था…

फिर सरिता ने खाना प्लेट्स में लगाया और राहुल को आवाज़ दिया…

सरिता - राहुल….राहुल बेटा….

राहुल ये सुन के अचानक से नींद से झाग गया और अपने होश में आए हुए कहा….

राहुल - हाँ माँ….मैं अपने कमरे में हु….क्या हुआ…

सरिता - अरे तुझे भूँक नहीं लगी क्या…आज कुछ खा ले…तेरे चक्कर में में भी भूकी हु…

राहुल - आया माँ ….बस दो मिनट…

और झट से राहुल ने अपने कपड़े पहनते हुए नीचे भगा…

नीचे सरिता ने सारा खाना डाइनिंग तबले पे लगा रखा था और साइड के चेर पे बैठ के राहुल का इंटेज़ार कर रही थी….राहुल दौड़ता हुआ नीचे आया…

राहुल - अरे माँ…तुम ने क्यूँ तकलीफ़ उठाई…मैं अपने आप खा लेता था खाना…

सरिता - अरे मेरा राजा बेटा….मैंने तो अपना खाना भी पैक करवा लिया…सोचा आज तू घर पे है तो क्यूँ ना तेरे साथ ही खाना खउ….वैसे भी तू घर पे रहेत किधर है…(मायूसी दिखाते हुए) और तू अपनी बूढ़ी माँ के साथ रहना भी क्यूँ चाहेगा…

राहुल - नहीं नहीं माँ… ऐसी बात नहीं है…

सरिता - कैसी बात…

राहुल - नहीं वो बस…वो….आप के साथ…वो…

सरिता - अरे तू फिर शुरू हो गया….वो वो….

ये वो…वो ..का क्या चक्कर क्या है…चल आ जा अब खाना खा ले…

उतने में राहुल डाइनिंग तबले बी आ के बैठ गया…

राहुल - नहीं माँ..वो बस मैं कह रहा तह की…आप अभी बूढ़ी थोड़ी ना हुई हो…और आप के साथ मुझे टाइम बिताना अच्छा लगता है…पर…..वो…

सरिता - क्या वो…

राहुल - बस वो…आप ना…..वो…

सरिता - अरे फिर वो …वो…लगा दी तूने…

राहुल - वो ना…आप हर बात पे टोकती रहती हो ना…तो इसीलिए…

सरिता - अच्छा…इतनी सी बात….अब से मैं ना…अपने प्यारे राजा बेटे को कोई बात पे नहीं टोकोंगी…बस अब ख़ुश…

राहुल - (मुस्कुराते हुए) हाँ…माँ…

फिर सरिता और राहुल दोनो ने साथ में खाना खाया….और फिर…

सरिता- अब मुझे तो नींद आ रही है…

राहुल - हाँ माँ….खाना आज ज़्यादा ही हो गया….मैं भी सोच रहा हु के एक झपकी मार लू…

दोनो फिर अपने अपने कमरे में जा के सो गए….सरिता ने भी सोचा की राहुल को आज रात बहुत काम करवाना है..तो अभी उसको आराम करने दिया जाए…

शाम हो चुकी थी…सरिता उठ के नीचे आ चुकी थी….उसने अपने कपड़े बदल लिए थी…उसने फिर वोहि सवेरे वाला गाउन पहन लिया था….

सरिता - राहुल…..राहुल बेटा….उठ जा बेटा…अब शाम हो गयी…कितनी देर सोएगा….उठ जा…तेरे लिए गरमा गरम कोफ़ी बनती हु….

राहुल की नींद खुल गयी…और वो अपनी आँखे मसलते हुए…..

राहुल - हाँ आया माँ…

राहुल फिर कुछ देर बाद नीचे गया…और फिर उसने देखा की सरिता ने सवेरे वाले कपड़े पहन के सोफ़े पे बैठी थी….राहुल की आँखे बस उसके माँ की नंगी जाँघे और चूचियो की दरार को ताक रहे थे….जैसे ही राहुल नीचे आया…

सरिता - उठ गया तू…आ जा तुझे गरमा गरम कोफ़ी पिलाती हु…

ये कहते हुए सरिता अपनी गंद मटकते हुए किचन में चली गयी….और कोफ़ी ले कर आयी….तब तक राहुल सोफ़े पे जा के बैठ गया था…

डोनो ने कोफ़ी पे साथ में….पर राहुल की नज़र अपनी माँ के बदन से हठ नहीं रही थी….और ये बात सरिता को पता थी की उसका बेटा उसके पूरे बदन को ताड़ रहा है….

सरिता - क्या हुआ राहुल….ऐसे क्या देख रहे हो…

राहुल अचानक से अपने नज़र फेरते हुए…

राहुल - कुछ नहीं माँ…बस यही…

सरिता - (हँसते हुए) अरे बेटा…इतना शर्माएगा तो तेरा कैसा होगा….

राहुल - (लड़खड़ाते हुए) नहीं माँ बस वो आज…आप बड़ी अच्छी लग रही हो…

सरिता - (झटा गुसा दिखाते हुए) हाँ बस बस…तुझे मैं इन कपड़ों में ही अच्छी लगती हु…दोफ़र में जब सडी पहनी थी…तब अच्छी नहीं लग रही थी ना…

राहुल - नहीं माँ वैसी बात नहीं है…

सरिता - (राहुल को चिढ़ाते हुए) हाँ तो फिर कैसी बात है…

राहुल - आप तो सड़ी में अच्छी लग रही थी….

सरिता - अच्छा…तो बता क्या अच्छा लगा तुझे आज अचानक अपनी बूढ़ी माँ को देख के…

राहुल - (घबरा ते हुए) नहीं माँ आप बूढ़ी कहा लगती हो….

सरिता - (मादक सवार में) तो कैसी लगती हु मेरे राजा….

राहुल - (लड़खड़ाते हुए) आप ना…आप ना….बड़ी सेक्सी लगती हो…

सरिता - क्या सेक्सी लगता है मेरे राजा तुझे अपनी बूढ़ी माँ में….

राहुल - वो माँ…वो…

सरिता - तू इतना शर्माता क्यूँ है…क्या मैं तुझे खा जाऊँगी क्या…बोल दे अपने मन की बात…

राहुल ने सरिता के चूचियो के तरफ़ इशारा करते हुए कहा…

राहुल - वो माँ..

सरिता- (खिलखिलाते हुए) अच्छा…ये…मेरी चूचिया…इसमें इतना क्या शर्माना….(दोनो चूचियो को अपने हाथो से उठते हुए) बच्चपन में तो तू इनको छोड़ता ही नहीं था….

सरिता खिल खिला के हंस रही थी और…राहुल का शर्म के मारे बुरा हाल था…

राहुल के मन में इच्चाए धो बोहत हो रही थी पर हिम्मत उतनी ही कम…

सरिता - और क्या पसंद है मेरे राजा बेटे को…

राहुल - (धीमी आवाज़ में) आप तो पूरे के पूरे पसंद हो माँ…

सरिता - (शर्माते हुए) ओह ....मेरा लाल…

और प्यार से सरिता ने राहुल को गले लगा लिया…राहुल का सर सीधे सरिता की चूचियो पे ठीक हुआ था…राहुल ने किसी औरत की चूचिया इतने पास से पहली बार देखी थी…उसका लंड पैंट में सलामी दे रहा था….

सरिता ने फिर राहुल को अपने से अलग करते हुए…

सरिता - अरे तुझे मैं तो वो जो हम मार्केट से ख़रीद के लाए थे वो दिखाना भूल ही गयी…चल तुझे दिखती हु…

और सरिता ने हाथ पकड़ के राहुल को उठाया और अपने कमरे की तरफ़ ले कर चली गयी…कमरे में जाते ही…

सरिता - तू यह ही रुक…(राहुल को बेड बी बैठा दिया) मैं अभी आयी…

सरिता मार्केट से लाए हुए बॉक्स को बाथरूम में लेकर गयी….और कुछ देर बार बाहर आयी…

तो सामने का नज़र देख के राहुल की आँखे और मुँह खुले के खुले रह गए…

 


राहुल सरिता के रूप को देखने के बाद उसकी आँखे फटी की फटी रह गयी....उसकी आँखे अपने माँ के बदन को ऊपर से नीचे तक ताड़ रही थी...सरिता की बड़ी बड़ी चूचियो को देख के उसका लंड पूरे उफान में आ गया था...राहुल का लंड झटके मरने लगा ऐसा लग रहा था के उसके शॉर्ट्स को चिर के बाहर निकालने के कोशिश कर रहा हो....सरिता ने राहुल के शॉर्ट्स में बने तंबू को देख लिया था....और वो मन ही मन मुस्कुराते हुए बोली...

सरिता - क्या हुआ ...कोई साँप संघ गया क्या...

राहुल - (अपना होश सम्भालके लड़खड़ाते हुए बोला) हम्म...नहीं नहीं...वो कुछ नहीं...बस ..यूँही

सरिता - तो बात ना कैसी लग रही हु मैं....

ये कहते हुए सरिता थोडस मुड़ते हुए राहुल को अपना बदन दिखा रही थी..फिर सरिता थोड़ा सा आगे की तरफ़ झुक गयी और ऊपर से जो लम्बा ओपन गाउन पहन था वो एक तरफ़ सरका लिया अपनी मोटी और सुडौल गांड का दर्शन राहुल को दे दिया.....

राहुल के समाज में नहीं आ रहा था की अचानक ये सब क्या हो रहा है...उसका मन तो कर रहा था के जा के अपनी माँ को जाके लिपट जौ और उसकी मोटी गांड को और बड़ी बड़ी चूचियो को मसल डालू....पर राहुल जो अपने सामने जो नज़र देख रहा था वैसा नज़रा उसने उसके ज़िंदगी में पहली बार देखा था....उसने कभी किसी औरत को इतने क़रीब से ऐसी हालत में नहीं देखा था...तो मन चाहे जितना हो रहा था पर हिम्मत नहीं हो रही थी कुछ बोलने की...फिर भी सरिता के सवाल का जवाब देते हुए उसने कहा...

राहुल - माँ तुम इन कपड़ों में बहुल ख़ूबसूरत लग रही हो...

सरिता - (कामुक आवाज़ में) बस ख़ूबसूरत लग रही हु की कुछ और....

राहुल समाज गया की सरिता क्या सुन ना चाहती है...

राहुल - माँ तुम बड़ी हॉट और सेक्सी लग रही हो....(राहुल से रहा नहीं गाय और उसने पूछ लिया) पर माँ अचानक ये कपड़े क्यूँ पहने आज तुमने...

सरिता - अरे बेटा तू तो जनता है के कितनी गरमी बढ़ गयी है तो मैंने सोचा के रात में सोने के वक़्त पहंने के लिए अच्छे रहेंगे, रात में नींद अच्छी आएगी.....मैं तो कहती हु तू भी घर में शर्ट पहन मत कर...गरमी में पसीने से बोहत स्किन प्रोब्लेमस हो जाती है...

राहुल - हाँ ठीक है माँ...

सरिता - हाँ तो निकल दे शर्ट अपना....

राहुल - क्या अभी ...नहीं माँ वो सोते वक़्त निकल लूँगा....

सरिता - (राहुल के पास आते हुए) अरे मेरे राजा इतना क्यूँ शर्मा रहा है....तू इतना शर्माएगा तो मेरा काम कैसे चलेगा...(उसको कहना तो यही था की...ये इतना शर्माएगा तो मुझे चोदेगा कैसे मुझे अपने बड़े लंड से)

राहुल - मतलब...

सरिता - (बात सम्भालते हुए) मतलब कुछ नहीं....अपनी माँ से क्या शर्माना...मुझे तो सब पता है…(राहुल के लंड के तरफ़ देखते हुए) तू क्या समझता है तुझे ऐसे ही इतना बड़ा हो गया है तू …चल निकल दे अपना शर्ट

राहुल किसी तरह अपने शॉर्ट्स में बने तंबू को छुपाते हुए अपना शर्ट निकलता है…और उतने में सरिता के पास जा के बैठ जाती है….

सरिता - ओहो कितना बड़ा हो गया मेरा राजा बेटा…

कहते ही एक हाथ राहुल के गालों पे से फेरते हुए नीचे गर्दन पर लेकर जाती है….राहुल के गर्दन के पिछले हिस्से को थोदसा सहलाने के बाद…अपना हाथ नीचे राहुल के छाती पे फेरने लगती है….राहुल के मन में तो लड्डू फूट रहे थे…सरिता राहुल के तरफ़ झुकते हुए कहती है…

सरिता - (मुस्कुराते हुए) तुझको ऐसा देख के कितना समय हो गया…अब तो तू पूरा मर्द बन गया है…तेरे पे तो बोहत सी लड़कियाँ डोरे डालती होंगी…तेरे गर्ल फ़्रेंड के तो मज़े ही मज़े हैं..

सरिता का हाथ अब राहुल पेट तक आ पहुँचा था और वो राहुल के बदन को सहलाये जा रही थी…

राहुल - नहीं माँ मेरी कोई गर्ल फ़्रेंड नहीं है…

सरिता - अच्छा…इसीलिए ये तुम्हारा छोटा जवान हमेशा सलामी देता रहता है (कहते कहते ही एकाएक सरिता ने राहुल के लंड को शॉर्ट्स के ऊपर से पकड़ लिया)

राहुल अचानक से चौक गया और थोड़ा पीछे सरकने की कोशिश करने लगा…तो सरिता ने अपनी पकड़ मज़बूत करडी…राहुल की साँसे तेज़ हो गयी थी और उसको पसीना चुत रहा था…पर सरिता को तो अपने ही बेटे को रिझाने में बड़ा मज़ा आ रहा था…

राहुल - वैसी बात नहीं है माँ…

सरिता - तो कैसी बात है बेटा…अपनी बूढ़ी माँ को इस्स ड्रेस में देख के ये तुम्हारा नाग फ़न फ़ना रहा है क्या…

राहुल - नहीं माँ आप कौनसी अभी बूढ़ी हुई हो…अभी तो बोहत हॉट हो इसलिए ये थोड़ा….हो गया…

सरिता - (शर्मा के हँसते हुए) ये थोड़ा है…इतना बड़ा हथियार तो मैंने अब तक नहीं देखा….

राहुल का लंड सरिता के हाथ में झटके मार रहा था…तो सरिता ने लंड तो थोड़ा और दबाते हुए राहुल के कान में कहा…

सरिता - छोटे राहुल तो माँ को पूरा नंगा देखने के लिए उतावल हुआ जा रहा है….क्या कहते हो देखा दूँ….(और ये कह के राहुल के कान को धीरे से काट लिए)

राहुल - (लड़खड़ाते हुए बोलता है) हाँ माँ….

सरिता राहुल के सामने आ के खाड़ी हो जाती है और अपना लम्बा गाउन निकल के ज़मीन पे छोड़ देती है…फिर सरिता राहुल की तरफ़ पीठ कर के अपने बदन पे धीरे धीरे हाथ फेर थे हुए…पीछे से अपने बरा का हुक खोल देती और बरा निकल देती है….राहुल को साइड से अपने माँ के नंगी चूचियो के दर्शन हुए… फिर सरिता ने अपनी पैंटी को अपने बड़े बड़े चुत्तरो से धीरे धीरे नीचे सरकना चालू किया….और फिर चुत्तरो के नीचे अटका दी…सरिता ने अपनी गांड पीछे के तरफ़ उठ…इससे सरिता की मोटी गांड राहुल के सामने थी और सरिता की चुत की झलक भी दिखाई दे रही थी….

सरिता ने अपनी गांड २-३ बार हवा में लहराई और फिर अपनी पैंटी उतर दी…फिर पलट के राहुल के सामने खाड़ी हो गयी….

राहुल को अपने आँखो बी भरोसा नहीं हो रहा था के उसकी माँ जिसको चोडने के सपने देख रहा था कल तक वो आज ख़ुद ही उसके सामने पूरी नंगी खाड़ी है…वो भी ख़ुद के ख़ुशी से…

सरिता - (कामुकता से) कैसी लगती हु मैं…बिना कपड़ों के..

राहुल - माँ आपके जैसा और कोई इतना हॉट और सेक्सी नहीं है…

सरिता - पर तू अपने छोटे राहुल को चुप के रखेगा तो वो मुझको कैसे देखेगा…उसको आज़ाद कर दे….बड़ा परेशान हो रखा है वो तेरे शॉर्ट्स में….

राहुल समाज गया था सरिता क्या कहना चाह रही थी…तो राहुल खड़ा हुआ और अपने शॉर्ट्स उतर दिए और अपनी अंडर्वेर भी उतर दिया…अब दोनो माँ बेटा रूम में पूरे नंगे खड़े थे …राहुल का लम्बा और मोटा लंड देख के सरिता असचर्यचकित रह गयी….राहुल का लंड देखते ही सरिता ने उसको अपनी मुट्ठी में पकड़ के बोली

सरिता - ओह माह्ह….इतना बड़ा…इतना बड़ा लंड मैंने पहली बार देखा है…(और ये कहते ही धीरे धीरे राहुल के लंड को सहलाने लगी)

राहुल को मज़ा आ रहा था…

राहुल - ऊहह….आह्ह्ह…अपने माँ के मुँह से पहली बार लंड शब्द सुनके उसका मज़ा दुगन हो गया था..

सरिता फिर राहुल का हाथ पकड़ और अपनी चूचियो पे रख दिया…और कहा…

राहुल - तुझे मेरे ये चूचिया बहुत पसंद है ना….

राहुल - हाँ माँ…

कहते ही ज़ोर ज़ोर से सरिता की चूचियो को मसल ने लगा…सरिता के निपल सक्त हो गए थे….सरिता को भी मज़ा आ रहा था…वो भी हल्के हल्के कर्राह रही थी…

सरिता - हम्म…ऊहह….खेल बेटा मेरी चूचियो से…आज से तेरी हुई…जो करना है कर ले..

ये सुनते ही राहुल ने सरिता की एक चुचि को अपने मुँह में ले लिया और ज़ोर ज़ोर से चूस ने लगा…दूसरे हाथ से वो दूसरी चुचि को मसल रहा था..और बीच बीच में उसके निपल को ज़ोर से दबा देता अपनी उँगलियो के बीच में….सरिता मज़े ले रही थी और एक हाथ से राहुल के लंड को आगे पीछे कर के मूठ मार रही थी….

राहुल ने ५-७ मिनट सरिता की दोनो चूचियो को बारी बारी चूसा….

तो सरिता ने अचानक से राहुल के चेहरे को दोनो हाथो से पकड़ और उसके होंठों पे अपने हाठो पे गड़ा दिए….दोनो एक दूसरे को धीरे धीरे किस करने लगे …सरिता के दोनो हाथ राहुल के गर्दन के पीछे थे…और राहुल के हाथ सरिता के चूचियो को दबा रहे थे….फिर सरिता ने एक हाथ से राहुल का हाथ पकड़ के अपनी चुत्तर पे रख दिया…राहुल ने पहले चुत्तरो को प्यार से सहलाया और फिर ज़ोर ज़ोर से सरिता के चूतरो को मसलने लगा….दोनो का किस भी अब बोहोत तेज़ हो गया और सरिता अपनी ज़बान राहुल के मुँह में डाल डाल के किस कर रही थी…और राहुल भी जवाब में सरिता की ज़बान को चूसता जा रहा था….दोनो की साँसे तेज़ हो गयी थी और दोनो पसीने से लात पात हो गए थे….१० मिनट ऐसे ही किस करने के बाद दोनो के होंठ अलग हुए..तो सरिता हफ़्ते हुए बोली

सरिता - हह्हा…ओहह्हाह…कहा से सिखा ये सब तूने…हम्म….

राहुल - वो जो मूवीज़ में दिखाते है ना माँ…तो वही से….

सरिता - अच्छा जी…बोहोत तेज़ है सिखने में तू तो फिर….देखते है और क्या क्या सिखा है तूने…

सरिता जा के बेड पे लेट गयी और अपनी टाँगे खोल दी…और अपनी चुत पे हाथ फेरते हुए बोली

सरिता - चुत चाटना जानते हो….चुत चाटेगा अपनी माँ की…देख कितनी गिली कर दी है तूने…ये पानी चाट के साफ़ कर दे…

राहुल - जनता तो नहीं माँ…पर आप सिखाओगी तो ज़रूर सिख जाऊँगा…

सरिता - आजा मेरे लाल…आज अपनी ही माँ की चुत चाट ले….

राहुल आके सरिता के टांगो के बीच में आ के बैठ गया…और क़रीब से सरिता के चुत को देखने लगा… चुत की नशीली महक से रोमांचित हो गया था….

सरिता - क्या हुआ ऐसे क्या देख रहा है मेरी चुत को…

राहुल - माँ मैंने पहली बार किसी की चुत देखी है…और वो भी अपनी ही माँ की…

सरिता - (राहुल के बालों पे से हाथ फेरते हुए) हाँ मेरे राजा…१८ साल पहले यही से तू आया था दुनिया में…(कह के हसने लगी)…कैसी लगी अपनी माँ की चुत…

राहुल - एक दम मस्त माँ…एक दम लाल और रसिलि है माँ…

सरिता - चल अब और मत तरसा मुझको…(अपनी चुत फाँको को फैलाते हुए) …चाट ले अपनी माँ की चुत और पी ले सारा चुतरस…

राहुल ने फिर सरिता की चुत पे अपने ज़बान से हमला बोल दिया…और कुत्ते की तरह चाटने लगा…सरिता का बुरा हाल था वो ज़ोर ज़ोर से सिसकियाँ भरने लगी और एक हाथ से अपने दाने को रगड़ने लगी…

सरिता - स्स्स्स्ह्ह…..आऽऽह्ह्ह…माह्ह्ह…….हाँ मेरे लाल…चाट ले अपने माँ की चुत गिली चुत…

सरिता अपने दूसरे हाथ से राहुल के सर को अपने चुत पे दबा रही…थी…

सरिता - ओहह्हमा…अपनी ज़बान से चोद दे बेटा मेरी चुत को…

राहुल ने अपनी ज़बान अब सरिता के चुत में अंदर बाहर करना शुरू कर दिया….सरिता नीचे से अपनी गांड उछाल रही थी और अपने बेटे के ज़बान से चुदवा रही थी…

सरिता - ओह्ह्ह….आहह्हाम्माहह….हाँ बेटा ऐसे ही…चोद अपनी माँ की चुत को…..रुकना मत…करता रह…मैं कभी भी झाड़ सकती हु…….आह्ह्ह…आह्ह्ह…

राहुल अब ज़ोर ज़ोर से अपनी ज़बान अंदर बाहर कर रहा था…कुछ देर बाद सरिता की टाँगे काँपने लगी…और ज़ोर से चीख़ पड़ी…

सरिता - आह्ह्ह्ह्ह……माह्ह्ह……

सरिता झाड़ गयी थी…और उसने अपना सारा पानी राहुल के मुँह में छोड़ दिया था….राहुल भी सारा पानी चाट के साफ़ कर दिया…

सरिता हफ़्ते हुए उठ के बैठी और बोली…

सरिता - (कामुकता से) कैसा लगा बेटा अपनी माँ के चुत का स्वाद…

राहुल - तुम्हारे चुत का रस मुझे मेरा इतना भा गया है..के अब इसके बिना अब रह नहीं पाउँगा..

राहुल के कहते ही सरिता ने आगे बढ़ के राहुल के होंठों पे किस जड़ दिया…और वो उसके पूरे मुँह को आपने ज़बान से चाट रही थी….और दोनो होंठों को बेरहमी से चूस रही थी…अछी तरह से चाटने के बाद…

सरिता - तेरे होंठों से और भी मीठा लगता है…मुझे ख़ुशी है के तुझे मेरा चुतरस पसंद आया…

ये कह के सरिता ने राहुल का मोटा लंड हाथ में लिया और ज़ोर ज़ोर मूठ मरने लगी…

सरिता - अब तेरे मोटे लंड का भी स्वाद मुझे चखा दे…

कहते ही नीचे बैठ के राहुल का लंड मुँह में ले लिया….राहुल तो जैसे सातवें आसमान में चला गया हो….

राहुल - ओह्ह्ह माँ….बहुत अच्छा लग रहा है…ऐसे ही करती रहो….

सरिता राहुल का लंड ज़ोर ज़ोर से अपने मुँह में ले रही थी…. राहुल को तो स्वर्ग में होने का अनुभव हो रहा था…

राहुल - माँ…ये सब मेरे सपनो की तरह हो रहा है…

सरिता असचर्या से लंड मुँह से निकलती है और पूछती है…

सरिता - सपनो जैसा मतलब…

और फिर लंड मुँह में लेके चूस ने लगती है…

राहुल - सॉरी माँ….मैंने तुम्हें कभी बताया नहीं….मैं तुम्हें अपने सपनो मेरा लंड चूसते हुए देखता ता था….और आप के नाम की मूठ मार करता था…मैं आपके हर चीज़ का दीवाना हु माँ…आपकी चूचिया..अपनिक भारी हुई गांड…आपके कोमल हाथ…आपकी रसिलि चुत जो मैं सिर्फ़ सपनो में देखा करता था…

सरिता - तूने कभी बताया क्यूँ नहीं…

राहुल - सॉरी माँ पर आप मुझे बड़ी ख़ूबसूरत लगती हो….आय लव यू माँ….

सरिता - ओह मेरा राजा बेटा…आय लव यू तू बेटा..तेरे ये लंड का सुख लेने के लिए कितने पापड़ बेले ये मुझे ही मालूम है…

इस बार अब शॉक लगने की बारी राहुल की थी…

राहुल - क्या…मैं समझा नहीं माँ.

सरिता - हाँ बेटा मैंने तुझे तेरे पापा से चुदते हुए हमारे कमरे में झाँकते हुए देख लिया था…और अगले दिन जब तू मूठ मर रहा था तब तेरा ये बड़े लंड को भी देख लिया था…तबसे मेरे चुत में खुजली हो रही ही …अब ये खुजली तेरे लंड से ही मिटेगी….

राहुल - सॉरी माँ…मैंने आपको पापा के साथ सेक्स करते हुए देख लिया…आपके रूम में ऐसे नहीं झाँकना चाहिए था मैंने…

सरिता - कोई बात नहीं मेरे लाल…तू ना झाँकता तो आज ये लंड नहीं मिलता मुझे…और तो और तेरे चक्कर में मैंने स्वीटी को भी फ़रेब से तेरे मौसी के पास भिजवाना पड़ा…

ये कह के फिर राहुल का लंड मुँह में डाल के चूस ना शुरू कर दिया…

राहुल से अब ज़्यादा कंट्रोल नहीं हो रहा था….वो जल्दी ही झड़ने वाला था….

राहुल - माँ मेरा पानी चुतने वाला है….

सरिता ने अपने मुँह से राहुल लंड निकल दिया और बोली…

सरिता - अभी नहीं मेरे लाल….अभी तो इसको मेरी चुत की प्यास बुझानी है…और राहुल को बेड पे धका मार दिया…राहुल बी जा के गिरा…और पलट के अपने पीठ के बल लेट गया…उसका लंड पूरे उफान में सलामी दे रहा था….सरिता अब राहुल के ऊपर आ के खड़ी हो गयी…और दोनो टाँगे राहुल के दोनो तरफ़ दल के बोली…

सरिता - आज मेरे चुत की प्यास बुझा दे बेटा…

ये कह के सरिता धीरे से नीचे झुकी और अपनी चुत पे लंड लगते ही रुक गयी…

सरिता - तेरा लंड इतना बड़ा है….मुझे डर है कही मेरी चुत ना फाड़ दे….

कहते ही अपनी गांड को धीरे धीरे नीचे करने लगी…पहले राहुल का लंड का सूपड़ा अंदर घुसा तो राहुल को एकदम से सरिता के चुत के गरमी का एहसास….उसने अपनी आँखे बंद कर ली और मज़ा ले रहा था….फिर सरिता और थोड़ा नीचे हुई….सरिता के लिए राहुल का लंड बोहत बड़ा था….वो सिसकियाँ भरने लगी…अभी तो आधा लंड भी अंदर नहीं गया था…फिर सरिता ने लंड को बाहर निकाला और बोहत सारा थूक अपने हाथ पे लगा के अपने चुत पे रगड़ लिया और फिर लंड को चुत पे सेट किया…इस बार सरिता ने एक ही बार में गांड को झटके से नीचे किया के पूरा लंड चुत को चिरता हुआ अंदर घुस गया….सरिता और राहुल दोनो चीख़ पड़े..

सरिता - हाय्ययय…..मार गयी…..

राहुल - माह्ह्ह…आपकी चुत कितनी गरम और टाइट है…..

दो पल सरिता हिली ही नहीं…फिर जब उसकी साँस में साँस आयी तो उसकने एकाएक राहुल को किस करना शुरू कर दिया…और धीरे धीरे अपनी गांड हिलने लगी…राहुल सरिता के चूचियो के साथ खेल रहा था सरिता को किस करे जा रहा था…सरिता ने कुछ देर बाद अपनी रफ़्तार बड़ा दी और राहुल के छाती के ऊपर हाथ रख के अब अपनी गांड ऊपर नीचे कर रही थी….रूम में फ़च फ़च…की आवाज़ें गूँज रही थी…

.

सरिता - आह्ह्ह….आह्ह्ह…..हम्म….उफ़्फ़्फ़्फ…..बेटा तेरा लंड आज मेरी चुत फाड़ देगाआह्ह्ह…….ओह्ह्ह..माह्ह्ह….

कुछ देर सरिता ऐसे ही अपनी गांड हिला हिला के राहुल के लंड से चुदवा रही थी…राहुल कुछ देर बाद झड़ने के क़रीब आ गया….तो उसने भी नीचे से झटके लगना शुरू कर दिया….सरिता अब थोड़ी थक सी गयी थी….तो वो अब अपने दोनो पैरों के बल अपनी गांड थोड़ी हवा में उठा के बैठ गयी….और नीचे से राहुल ने ज़ोर डर हमला करना शुरू किया….राहुल के ये हमले से सरिता फिर एक बार झाड़ गयी….तो राहुल के लंड पे सरिता के चुत के पानी प्रेशर आया और उसका लंड स्लिप हो गया और सरिता के चुत से उसके पानी की एक धार निकली…और सरिता अपने दाने को ज़ोर ज़ोर से रगड़ रही थी …उसका सारा पानी राहुल के लंड को सरबोर कर गया….

सरिता - हाय्ययए…मई गयी….ऊह्ह्ह माह्ह्ह…..बेटा छोड़ मुझे……फाड़ दे आज अपने माँ की चुत…..

ये कहके फिर सरिता ने राहुल का लंड अपने चुत पे रख और राहुल ज़ोर डर झटका लगा के पूरा लंड चुत में घुसेद दिया…फिर उसने १०-१५ ज़ोरदार तेज़ झटके लगाए….और चिलाया….

राहुल - माँ….मेरा पानी चुतने वाला हैं

सरिता - नहीं बेटा मेरी चुत मे नहीं…..

और सरिता उठ खादी हुई….और झट से राहुल का लंड अपने मुँह में ले लिया….कुछ ही देर में राहुल ने अपना सारा पानी सरिता के मुँह में छोड़ दिया…सरिता ने कोशिश की के सारा पानी पी जाए पर..राहुल ने इतना पानी छोड़ था के उसको मुँह में भी नहीं समय और कुछ बंदे उसके मुँह से टपक के उसकी चूचियो पे गिर गयी….राहुल ज़ोर ज़ोर से हाफ़ रहा था…सरिता की भी साँसे तेज़ हो रखी थी…

राहुल - माँ…आप दुनिया की सबसे अछी माँ हो….

सरिता - और तू भी दुनिया का सबसे अच्छा बेटा है….मेरा राजा बेटा….आज तो तूने सालों बाद मेरी चुत को संतुष्ट कर दिया…

कह के सरिता ने राहुल के ढीले लंड पे एक प्यारा चुम्बन जड़ दिया…

उतने में मोबाइल की घंटी बजती है…दोनो तबले पे पड़े मोबाइल की तरफ़ देखते है…..

 


उतने में मोबाइल की घंटी बजती है…दोनो टेबल पे पड़े मोबाइल की तरफ़ देखते है…..

सरिता बेड पे से उठती है और टेबल के तरफ़ अपनी नंगी गांड हिलते हुए जाती है…ये देख के राहुल का लंड फिर से खड़ा होने लगता है…

सरिता मोबाइल उठा के देखती है…राहुल की तरफ़ चुप रहने का इशारा करते हुए कहती है…

सरिता - तुम्हारे पापा का फ़ोन है…

राहुल हाँ में सर हिलता है….

सरिता - (फ़ोन पे) हेलो जानू…कैसे हो…

मनोज - मैं तो ठीक हु…पर मेरी जान कैसी है….

सरिता - मैं तो बड़े मज़े में हु….(राहुल के तरफ़ देख के मुस्कुरा देती है)

मनोज - चलो अच्छा है…हमारी ऐसी क़िस्मत कहा…पर तुम्हारी आवाज़ को क्या हुआ…थकी हुई लग रही हो…

सरिता - वो तो तुम अपने लाड़ले बेटे से पूछो….उसी ने थका दिया है…

मनोज - अब क्या किया उसने ऐसा…

सरिता जा के बेड पे बैठ जाती है…

सरिता - बोहत शरारती हो गया है….(राहुल के जाँघो पे हाथ फेरते हुए) अब बड़ा हो गया है ना….बड़ी बड़ी शरारते करने लगा है….(ये कहते ही राहुल का लंड अपने मुठी में पकड़ लेती है)

मनोज हसने लगता है…

सरिता - और तुम बताओ कहा हो….

मनोज - अरे अभी तो मैं काम ख़त्म कर के निकल रहा हु…अभी होटेल पे जाऊँगा…

सरिता के लंड को पकड़ने के वजह से राहुल का लंड एकदम तन के खड़ा हो गया और उसके हाथो में फ़न फ़नाने लगा…उतने में सरिता ने अपना हाथ हटा दिया….

सरिता - तुम और तुम्हारा काम….बाक़ी कुछ नहीं दिखाई देता है तुम्हें…एक तुम हो और एक तुम्हारा बेटा है…वो भी घर में टिकता ही…अपने दोस्तों के साथ लगा रहता है…

मनोज - अरे वैसी बात नहीं…और राहुल के अब मज़े करने के दिन है…करने दो मज़े….

सरिता - मज़े करने में कौनसी मनहाई है….पर घर में मिलने वाले मज़े शायद ही कही और मिलते होंगे उसे…(ये कहते हुए राहुल की तरफ़ देख के एक मादक सी मुस्कान देती है)

राहुल को सरिता के बातें सुन के मन उछालने लगा…और ज़्यादा कंट्रोल नहीं हो रहा था उसको….तो राहुल उठ के बेड पे खड़ा हो जाता है और अपना मोटा लंड सरिता के चेहरे के सामने लेकर जाता है….उसका लंड सरिता के चेहरे के सामने फ़न फ़ना रहा था…

तो सरिता उसके तरफ़ देखती है और अपने हाथ से हल्का सा लंड के ऊपर झटका मार के साइड में कर देती है…तो राहुल सरिता के सामने जा के लेट जाता है…और सरिता उसके लंड को पकड़ के मूठ मरने लगती है….

मनोज - तुम्हारी भी बात सही है….अभी जवानी जीने दो बेचारे को…

सरिता - (राहुल के लंड के तरफ़ देखते हुए) जवानी तो उफान मार रही है उसकी…

मनोज - मतलब…

सरिता - (बात सम्भालते हुए) मतलब…अभी तो पूरा जवान हो गया है…थोड़ी ज़िम्मेदारियाँ भी सिख ले…

मनोज - सिख जाएगा…इतनी भी क्या जल्दी है…

उतने में राहुल अपना हाथ सरिता के गर्दन पर लेकर जाता है…और नीचे अपने लंड पे झुकने की कोशिश करता है….मानो कह रहा हो “मेरा लंड चूसो माँ” …सरिता बड़ी आँखे कर के उसको नहीं में सर हिला के माना कर देती है… राहुल फिर मासूम सा चेहरा बनता है और हल्के से “प्लीज़” कहता है….

सरिता - बड़ा ज़िद्दी हो गया है तू…

मनोज - क्या…???

सरिता - तुम्हें नहीं…मैं तुम्हारे लाड़ले से कह रही हु…बड़ा ज़िद्दी हो गया है…

मनोज - अब क्या ज़िद कर दी…

सरिता - मुझे ये लोलिपोप चूसने को कह रहा है….मैं कब से माना कर रही हु…सुनता ही नहीं मेरी बात….

मनोज - अरे इसमें कोनसी बड़ी बात है…चूस लो ना…प्यार से लाया होगा तुम्हारे लिए…अच्छा लगेगा उसको..

सरिता - अच्छा तो लगेगा ही…और तुम कहते हो तो चूस लेती हु….

ये कह के सरिता राहुल का लंड मुँह में ले लेती है….और राहुल नीचे से धीरे धीरे अपनी कमर हिलने लगता है…

सरिता के मुँह से आवाज़ें आने लगती है….उसने राहुल का पूरा लंड मुँह में भर लिया था…

मनोज - क्यूँ कैसा है …लोलिपोप..

सरिता राहुल का लंड मुँह से निकलते हुए….उसकी साँसे तेज़ हो गयी थी…

सरिता - उम्मम….बड़ा मीठा है….(कहते थोड़ा सा खाँसती है..)

मनोज - क्या हुआ…

सरिता - कुछ नहीं….बहुत बड़ा लोलिपोप है…पर अच्छा है…मुझे बोहत पसंद आया…

ये कह के फिर राहुल का लंड मुँह में डाल लेती है..

मनोज - देखो…पसंद आया ना तुम्हें…खामखां माना कर रही थी तुम…

सरिता मुँह से फिर लंड निकल के सीधे बैठ जाती है….

सरिता - हाँ हाँ…तुम तो अपने बेटे की ही साइड लोगे….

राहुल पीछे से आता है और सरिता की चूचियो से खेलने लगता है…उसको गर्दन पे चूमने लगता है…सरिता को मज़ा आ रहा था…और हल्की हल्की सिसक भी निकल रही थी…पर वो कंट्रोल कर रही थी…और अपनी आवाज़ दबा रही थी….

सरिता - म्म्म….और तुम्हारा दिन कैसा था….क्या क्या किया आज…

मनोज अपनी कहानी सुनाने में लग जाता है….पर सरिता का ध्यान कही और ही था….वो फ़ोन पे सिर्फ़ “हम्म…हम्म” करती है…राहुल दोनो हाथो से ज़ोरों से सरिता के चूचियो को मसल रहा था…सरिता राहुल के सरपे से हाथ फेर रही थी और आनंद उठा रही..थी…उतने में मनोज कहता है…

मनोज - हेलो…सरिता…कहा खो गयी…

सरिता - (होश सम्भालते हुए) कुछ नहीं…बस यूँही…क्या कह रहे थे तू…

फिर मनोज अपने काम के बारे में सुनाने लग जाता है….और सरिता बीच बीच में उसको कुछ कह देती…ताकि मनोज को कुछ शक ना हो..

राहुल अपना मुँह चूचियो से हटता है और सरिता के होंठों पे एक चुम्बन जड़ देता है….सरिता भी बड़े प्यार से उसके होतों को चूसने लगती है…कुछ देर ऐसे ही एक दूसरे को चूमने के बाद….फिरसे राहुल सरिता के चूचियो से खेलने लगता है एर एक एक कर के दोनो चूचियो को अपने मुँह में भर के चूसने लगता है और दोनो निपल को अपने दाँतो से हल्का हल्का काट ता है…..

सरिता को बड़ा मज़ा आता है…और वो राहुल के चूतड पे एक चमट रख देती है और उसकी तरफ़ देख के मुस्कुरति है.…..कुछ देर बाद सरिता की चूत गिली हो जाती है…तो सरिता बेड पे लेट जाती है….और अपनी टाँगे फैला देती है….

सरिता अपनी चुत्त के तरफ़ इशारा करती है…और अपनी उँगलियो पे चुत्त का पानी लगा के अपने मुँह में डाल लेती है…राहुल इशारा समाज जाता है…सीधे जाके सरिता के चुत्त के सामने लेट जाता है….और अपनी ज़बान सरिता की गिली चत्त में भिड़ा देता है….

ये हमले से सरिता के मुँह से आह्ह निकलती है…तो वो अपने हाथ से अपना मुँह ढक लेती है…

मनोज - क्या हुआ…

सरिता - नहीं कुछ नहीं….वो थोड़ी पाव में माच सी आ गयी…हाँ तो क्या कह रहे थे तुम….

सरिता किसी तरह अपने आप को कंट्रोल कर रही थी…उसको बड़ा मज़ा आ रहा था….उसका मुँह खुल जाता था पर वो आवाज़ नहीं निकालने देती थी….अपने होतों को दबा के किसी तरह कंट्रोल कर रही….राहुल तेज़ी से चाटने लगता है….सरिता बोल पड़ती है…

सरिता - मैं आ रही हु बेटा….

सरिता का पानी छूटने वाला था….

मनोज - कहा जा रही हो….

सरिता - नहीं वो नीचे…नीचे…उम्मम्म….नीचे जा रही थी….

इतने में सरिता राहुल के मुँह में ही झाड़ जाती है…और राहुल सारा चूतरस चाट जाता है…

मनोज - तुम्हारी तबियत तो ठीक है ना…

सरिता - हाँ हाँ…सब ठीक है…

राहुल फिर सरिता के चुत्त में अपनी ऊँगली घुसा देता है….सरिता सीहर उठती है….दो पल में ही राहुल अपनी दूसरी ऊँगली भी सरिता के चुत्त में घुसा देता है और ज़ोर ज़ोर से अंदर बाहर करने लगता है….सरिता पूरी कोशिश कर रही थी कंट्रोल करने की पर उसके मुँह से आवाज़ निकल जाती है…

सरिता - हाय्यय राम….बेटा बस कर….उम्मम ह्म्म्म्म्म्म…

मनोज - क्या कर दिया अब राहुल ने…

सरिता - नहीं कुछ नहीं…मुझे काम नहीं करने दे रह है….मुझे खाना बनाना है ना…..उम्मम….

मनोज - अच्छा…क्या बना रही हो…

उतने में राहुल उठ के अपने लंड का सूपड़ा सरिता के चुत्त पे रगड़ने लगता है….सरिता को राहुल के इरादे समाज आ जाते है तो वो अपना सर हिला के नहीं के इशारे करती है….

सरिता - मैं राहुल का फ़ेवरेट ही बना रही हु…..पर वो बनने दे तब ना….उम्म्म्म्म…..

मनोज - अच्छा चलो फिर तुम खाना बना लो…बाद में बात करते है….

ये कह के मनोज फ़ोन काट ता है…और उसी पल राहुल अपना सूपड़ा सरिता के चुत्त में घुसा देता है….उसका मोटा लंड आधे से ज़्यादा सरिता के चुत्त में घुस जाता है…..सरिता के मुँह से ज़ोर से चीख़ निकलती है….

सरिता - ओह्ह्ह माह्ह्ह……मार गयीईई……..आह्ह्ह बेटा……चोद बेटा……आऽऽह्ह्ह्ह…..चोददे अपनी माँ की चुत्त……आह्ह्ह…आह्ह्ह…..

राहुल अगले झटके में पूरा के पूरा लंड सरिता के चुत्त में घुसा देता है….और तेज़ी से झटके लगने लगता है….राहुल पूरा लंड बाहर खिंचता और ज़ोर से अंदर पेल देता था….दो चार ऐसे झटके लगने के बाद उसका लंड चुत्त से फिसल गया…फिर उसने लंड चुत्त पे टिक्का के ज़ोर से धक्का लगाया…ऐसा दो तीन बार हुआ के राहुल का लंड फिसल गया….सरिता को पता था…की राहुल को चोद्दने का अनुभव नहीं है इस लिए वो ऐसा कर रहा है……सरिता का भी मज़ा किर किर हो रहा था …और हर बार वो अपना मोटा लंड बाहर निकल के गुसता था तो सरिता को दर्द भी बहुत होता था…..तो सरिता ने राहुल से कहा…

सरिता - आह्ह्ह….आह्ह्ह….बेटा…..पूरा मत किच..बाहर….ओह्ह्ह…ओह्ह्ह…..अंदर ही रख…..आह्ह्ह….आह्ह्ह…

राहुल - हाँ माँ…..उम्मम्म…हाऽऽ…..

सरिता ने अपने दोनो पैर राहुल के गांड पे अटका लिए और उसको अपनी तरंग खिच लिए….सरिता भी धीरे धीरे नीचे से अपनी कमर हिला के राहुल का साथ दे रही थी….थोड़ी दे बाद राहुल थोडस थक गया तो उसके झटके भी धीमे हो गए…..सरिता समाज गयी थी….

सरिता - रुक जा मेरे लाल…..मुझे अपने चूतरस को तेरे लंड पे से चकने दे ज़रा….

राहुल ने नीचे झुक के सरिता को होंठों पे जमके किस किया….कुछ देर दोनो ने एक दूसरे ने होटो को चूसने लगे…

फिर राहुल ने अपना लंड चुत्त से बाहर निकला और बेड के किनारे जा ने खड़ा हो गया… सरिता लपक के बैठ गयी और राहुल का लंड मुँह में भर के चूसने लगी….अपनी थक से पूरा लंड गीला कर दिया…फिर अपने मुँह में भरे पूरे थक को लंड के ऊपर थूकते हुए बोली…

सरिता - तेरे लंड पे से मेरा चूतरस चकने का मज़ा ही कुछ और है…चल आजा….अभी मुझे एक और बार झड़ना है….मेरा पानी नक़ली बिना आज तुझे खाना नहीं मिलेगा…चोद अपनी माँ को…

कह के राहुल को बेड पे धकेल दिया…और दोनो टाँगे फैला के उसके ऊपर जा के बैठ गयी….

सरिता ने धीरे से फिर राहुल का लंड अपने चुत्त पे टिकाया और धीरे धीरे अपनी गांड नीचे करने लगी…..पूरा लंड अंदर घुसने के बाद….सरिता धीरे धीरे अपनी गांड हिलने लगी…..राहुल भी नीचे से अपनी गांड हिलने लगा….सरिता आगे झुकी और राहुल के होटो को चूसने लगी….दोनो एक दूसरे को बेताहशा किस करने लगे…सरिता राहुल के ज़बान को अपने मुँह में ले ले कर चूसे जा रही थी…..

सरिता - उम्मम…..उम्म्म्म्म…ओह्ह्ह…ओह्ह्ह….मेरे राजा…..माँ को चोदने में मज़ा आ रहा ना…..उम्म्म्म्म…..ओह्ह्ह….ओह….

राहुल - हाँ माँ….बहुत मज़ा आ रहा है….

सरिता - हम्म…..आह्ह्ह….आह्ह्ह…..माँ को ऐसे ही रोज़ चोदेगा मेरे लाल…

राहुल - हाँ माँ….मेरा बस चले तो आप को मुझसे अलग ही ना होने दूँ….

सरिता - हाय्ययय….मेरा राजा बेटा….चोद दे मेरी चुत्त….चोद अपने माँ की चुत्त…..

कह के सरिता ने अपनी गांड ऊपर कर के हवा में रोक दी….और राहुल ने नीचे से हमला करना शुरू कर दिया….कमरे में फ़च फ़च की आवाज़ें गूँज रही थी….और सरिता की सिसकियाँ..

सरिता - आह्ह….आह्ह्ह…..हाय्ययय माह्ह्ह…..आह्ह…आह्ह्ह….ऐसी ही चोदता जा बेटा……चोद अपने माँ की चूत…..बुझा दे मेरी प्यास…..मेरे राजा….आह्ह्ह……

सरिता झड़ने वाली थी….उसने राहुल को कस के पकड़ लिया……राहुल भी तेज़ी से झटके मार मार के सरिता को चोद रहा था….उतने में सरिता झाड़ गयी…..और ज़ोर से छींक पड़ी…..

सरिता - ओह्ह्ह्ह….माह्ह्ह्ह…..मैं गयीईई…….आह्ह्ह्ह्ह…..बेटह्ह्ह…..

कहते ही सरिता ने अपनी गांड हवा में उठा ली….उसकी टाँगे काँप रही थी…..सरिता ने अपने हाथ से चुत्त ज़ोर से थाप थापा ने लगी…उसकी चुत्त से २ सेकंड के लिए एक फ़वर निकला….जैसे के वो मुत रही हो….सारा पानी उसने राहुल के लंड के ऊपर छोड़ दिया….फिर सरिता राहुल के ऊपर नीधल हो के गिर गयी….और हाँफने लगी….

सरिता - हाय मेरा राजा बेटा…..उम्मम….आह्ह्ह…ऐसा तो मुझे पहली बार चुदते समय हुआ था.बेस…..उम्मम…..उसके बाद आज इतना…पानी निकला है……उम्मम….

फिर सरिता ने राहुल का लंड चुत्त पे टिकाया और धीरे धीरे गांड हिलने लगी….और राहुल के कानो में कहने लगी..

सरिता - तेरा लंड का पानी पिला दे प्यासी माँ को….तेरा सारा पानी पी जाऊँगी मैं….तेरा मीठा मीठा रस पिलाएगा ना अपनी माँ को…

राहुल नीचे से तेज़ी से झटके मरने लगा…..कुछ दे बाद…

राहुल - आह्ह….माँ..मैं झड़ने वाला हु….

सरिता राहुल के लंड पे से उठ गयी और ज़मीन पे घुटनो बल बैठ गयी….राहुल बेड से उठ के सीधे अपना लंड सरिता के मुँह के सामने ले गया….सरिता ने अपना मुँह खोल लिया और राहुल के लंड की मूठ मरने लगी….कुछ ही झटको में राहुल ने अपना सारा माल सरिता के मुँह में छोड़ दिया….सरिता ने भी बड़े प्यार से वो पूरा के पूरा निगल गयी….और राहुल के तरफ़ देख के मुस्कुराते हुए बोली…

सरिता - चलो अब खाना खा लेते है….रात में तुमको बोहत काम करना है…

कुछ देर दोनो बेड पे पड़े रहे एक दूरसे के आग़ोश में….राहुल सरिता के नंगे बदन पे अपने हाथ फेर रहा था….और सरिता राहुल के सिने को चूम रही थी….कुछ देर बाद सरिता उठी ऊपर का लम्बा वाला गाउन पहन के नीचे किचें में खाना बनने के लिए चली गयी….दोंनो ने खाना खाया और फिर रात में फिर दो राउंड चुदाई की….

 
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