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बर्बादी को निमंत्रण

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अपडेट - 15

समीर: डरो मत ! मैं जानता हूँ मेरी स्लेव इस सब से आसानी से गुजर सकती है। इसलिए इनमे से तुम्हारे काम का कुछ नहीं। ये तो मेरी उन स्लेव के लिए है जो तुम्हारी तरह मेरी अपनी नहीं है। अच्छा एक काम करो। बाहर एक सूटकेस है सोफे के पीछे उसे लेकर घर चली जाना। आज के बाद तुम वही पहनोगी जो मैं कहुंगा और वही खाओगी जिसके लिए तुम्हे मेरी इजाज़त होगी। अगर उसके अलावा कुछ किया तो ध्यान रखना तुम्हे उसकी पनिशमेंट मिलेगी। और पनिशमेंट ऐसी होगी जिसके बारे में तुम कभी सोच भी नहीं सकती।

चंचल एक टक समीर को देखती रह जाती है। लेकिन समीर बस मुस्कुराता हुआ चंचल को देखता रहता है। चंचल धीरे धीरे उस कमरे से बाहर निकल जाती है और समीर का बताया हुआ सूटकेस उठा कर घर निकल जाती है।


अब आगे.....



चंचल ड्राइवर के साथ अपने घर को निकल जाती है। चंचल घर पहुँचती है मगर सारे रास्ते बड़ी बैचैन रहती है। उसे बार - बार अपने अंदर एक अजीब सी बैचैनी महसूस हो रही थी। उसके ललाट पर पसीना था जिसकी वजह से उसकी गर्दन पर उसके बाल चिपके पड़े थे। जब चंचल अपने घर पहुँचती है तो समीर का दिया हुआ सूटकेस उठाकर सीधे अपने कमरे की और जाने लगती है।

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सरिता भी चंचल को इस तरह से पसीने में देख लेती है। लेकिन सरिता इस बात को सीरियस ना लेकर के नार्मल समझ कर टाल देती है।

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चंचल जैसे ही अपने कमरे में पहुंचती है। दरवाजा बंद करके बाथरूम में चली जाती है। चंचल अपना मुंह धोती है। और नहाने की तैयारी करती है। इस वक़्त चंचल के पसीने सुख चुके थे। चंचल अपनी ड्रॉर से कपड़े निकल रही थी कि कोई सरिता चंचल के लिए कॉफी लेकर दरवाजा नॉक करती है। चंचल जल्दी से दरवाजा खोलती है।

सरिता: दीदी मुझे आपसे कुछ बात करनी थी।

चंचल: क्यों नही आओ ना । अंदर आ जाओ।

सरिता चंचल के रूम में आजाती है। चंचल अपने रूम कर दरवाजा बंद करके अपने बैड पर बैठ जाती है। और साथ ही सरिता भी बैड पर बैठ जाती है।

चंचल: आज क्या बात है? तुमने कॉफ़ी बनाई है? नौकरानी कहाँ है?

सरिता : दीदी कॉफ़ी तो उसने ही बनाई है मैं तो बस आपके लिए लेकर आई हूँ। मुझे आपसे बात भी तो करनी थी।

चंचल: (मुस्कुराते हुए) अच्छा । कहो क्या बात करनी है। (कॉफ़ी की चुस्की लेते हुए)

सरिता: वो दीदी...... (घर्रर्रर्रर्रर्रर्रर, घर्रर्रर्रर्रर्ररर, घर्रर्रर्रर्रर, घर्रर्रर्रर्ररर)

चंचल का मोबाइल वाइब्रेट होता है। जैसे ही चंचल का मोबाइल वाइब्रेट होता है चंचल एक लंबी सी सिसकारी के साथ कांपने लगती है। चंचल की जाँघे ऐसे कांप रही थी जैसे वाइब्रेशन मोड पर चली गयी हो। चंचल की आंखें बंद हो गयी थी।

सरिता: (चंचल के पैरों को हिलाते हुए) दीदी ? दीदी? आप ठीक तो है ना। बाप रे आपके पैर तो बुरी तरह से तप रहे है।

चंचल: (कांपती आवाज में) हम्म हाँ.... नहीं वो मैं.... मैं.... मैं ठीक हूँ।

सरिता : दीदी डॉक्टर को बुला लेती हूं। मुझे नहीं लगता आप ठीक है। मुझे लगता है आपको बुखार है।

चंचल: नहीं वो सरिता बुखार नहीं है। ये तो नॉर्मली ऐसा ही होता है। चलो मेयो बाद में बात करती हूं फिलहाल मुझे नहाने जाना है।

सरिता: जी ठीक है। फिर में बाद में बात करती हूँ।

सरिता चंचल के रूम से बाहर निकल जाती है लेकिन चंचल एक अजीब सी सोच में डूब जाती है। चंचल जब खड़ी होती है तो देखती है कि वो जहां बैठी थी वहां बैड शीट पूरी तरह से गीली हो चुकी है। चंचल की साड़ी भी पीछे से पूरी गीली है। मतलब फ़ोन के वाइब्रेशन से जो चंचल के बैड में वाइब्रेशन हुआ उस से चंचल अभी अभी झड़ गयी थी। चंचल को यकीन नहीं हो रहा था कि ऐसा भी कुछ उसके साथ हो सकता है।

चंचल जब फ़ोन देखती है तो सुरेश का कॉल था। चंचल सुरेश को कॉल लगाती है। 2- 3 बेल् बजने के बाद सुरेश तुरन्त कॉल अटेंड करता है।

सुरेश: हेलो चंचल!

चंचल: हेलो सुरेश। कैसे हो?

सुरेश: आई एम गुड जान। तुम कैसी हो? और सरिता कैसी है?

चंचल: नॉट गुड। आई मिस यू अलॉट। बाकी सब बढ़िया है।

सुरेश: मिस यू टू यार। बस दस पन्द्रह दिन की बात और है फिर लौट रहा हूँ।

चंचल: तुम्हारा इंतजार रहेगा।

सुरेश: अच्छा चलो मेरे आफिस जाने का वक़्त हो गया है। मैं तुम्हे बाद में कॉल करता हूँ।

चंचल: ओके जान

फ़ोन कट जाता है....

चंचल एक मिनेट तक फ़ोन को देखती रहती है फिर उठ कर नहाने के लिए बाथरूम में चली जाती है। चंचल करीब आधे घण्टे बाद नहा कर बाहर निकलती है।

चंचल एक नाइटी पहन लेती है। नाइटी के नीचे कुछ भी नहीं पहनती। इस वक़्त चंचल की चुंचिया एक दम कड़क तने हुए थी। और चूत भी हल्की हल्की बारिश कर रही थी। दरअसल ये सब चंचल के साथ समीर के दिये हुए APHRODISIAC का कमाल था। ये किसी भी ठंडी ठण्डी से औरत में भी सेक्स के प्रति तलब बढ़ा देता है। इसकी ज्यादा मात्रा एक तरफ जान ले सकती है तो दूसरी और सेक्स की इच्छा को प्रबल कर देती है।

चंचल अपने रूम का दरवाजा खोलने ही वाली थी कि चंचल का फ़ोन बजने लगता है। चंचल जैसे ही बैड की और जाती है और अपने फोन को देखती है तो पाती है कि समीर का कॉल है।

चंचल फ़ोन अटेंड करती है।

समीर: हेsssलो sssss चंचल

चंचल: हेलो समीर....

समीर: वीडियो कॉल करो अभी!

चंचल: अभी??? लेकिन..... (फ़ोन कट)

चंचल कुछ सोचती है लेकिन फिर तुरंत समीर को वीडियो कॉल करती है।

समीर: वाह क्या बात है! यू आर लुकिंग सो गोर्जीयस।

चंचल शरमा जाती है

समीर : अच्छा सुनो काल तुम्हे क्या ड्रेस पहननी है वो तुम्हे कल बात दूंगा। और हाँ एक बात और तुम काल मेरी बताई हुई ड्रेस के सिवा कुछ नहीं पहनोगी वरना पनिशमेंट.... समझी

चंचल: हम्म

फ़ोन कट...

अब चंचल की हालत में पहले से सुधार था। चंचल नीचे हाल में जाति है और सरिता के साथ मिलकर खाना खाने लगती है।

सरिता: दीदी आपसे बहुत ज़रूरी बात करनी है!

चंचल: हाँ तुम कुछ बोल भी रही थी। बताओ ना क्या बात है?

सरिता: दीदी ये जो अपनी पड़ोसन आंटी है ना आपको लेकर बहुत गलत ओर गन्दी बातें करती है। हमारी नौकरानी बात रही थी कि वो आंटी बोल रही थी कि " ये जो इस घर की बड़ी बहू है ना चंचल जब तक नौकरी पर नहीं जाती थी और इसकी सात्ज और पति यहां थे तब तक बहुत संस्कारी बनती थी। इसके संस्कारों को लेकर इसकी सास कई बार हमें बहुत कुछ सुना देती थी। लेकिन अभी देखो इसके संस्कार। अजीब से कपड़े पहन ने लगी है। मुझे तो लगता है इसका किसी के साथ चक्कर भी है...."

चंचल: व्हाट???? इस बुढ़िया की इतनी हिम्मत, मेरे कैरेक्टर पर उंगली उठा रही है। उसने इतना भी नहीं सोचा कि उसकी भी एक बेटी है।

सरिता: दीदी शांत हो जाओ। अगर हमने कुछ उनको बोला तो हम ही गक्त लगेंगे। और वैसे भी उसकी बेटी की अभी उम्र ही क्या है आठवीं या नवीं मैं पढ़ रही है। बच्ची है अभी तो...

चंचल: बच्ची माय फूट.... आजकल उसकी उम्र की लड़कियां बच्चे निकालती घूमती है।

सरिता: (पूरी तरह से शॉक्ड) दीदी आप क्या बोल रही है। आपको मालूम भी है।

चंचल: ( अपनी कही बात का एहसास करते हुए) आई डोंट नॉ।

सरिता: है है है है लेकिन जो भी बोल मस्त था। दीदी आपका गुस्सा मैंने आज पहली बार देखा।

सरिता को हंसता देख कर चंचल भी हसने लगती है।

चंचल: अभी तूने गुस्सा देखा कहाँ है सरिता अभी तो तुम देखोगी की चंचल से उस आंटी ने उलझ कर गलती कर दी।

सरिता: क्या करने का इरादा है दीदी?

चंचल : कुछ नहीं बस.... ऐसे ही.... चलो फिलहाल तो सोते है।

चंचल उठ कर अपने कमरे में चली जाती है और सरिता अपने कमरे में...

चंचल: हेलो समीर....

समीर: क्या बात है मेरी स्लेव मुझे अब नाम से बुलाएगी?

चंचल: सॉरी...... मास्टर मुझे आपकी मदद चाहिए। चंचल समीर को कुछ बताती है।

समीर: ठीक है मैं देख लूंगा लेकिन तुम्हे मेरी मदद करनी होगी।

चंचल: ठीक है । डन....

समीर: कल मिलते है बाय...
 
आप सभी का बहुत बहुत शुक्रिया।।

इसी प्रकार से मेरे साथ बने रहिये और अपना प्यार देते रहिये।।।
 
अपडेट - 17

समीर: एक औरत होकर तुम ऐसी बात.... खेर जाने दो । मैं इसे ऐसा उइ बनाऊंगा। लेकिन तुम्हे मेरी मदद करनी होगी इसे कल तीन घंटों के लिए मेरे पास ले आना।

चंचल : लेकिन मैं कैसे?

समीर: ( चंचल की बात काटते हुए) वो सब तुम जानो। मैं तीन घंटों में इसे ऐसी बना दूंगा की 24 घंटे लुंड मांगेगी। और हां 2 घंटे बाद तुम तैयार रहना। क्योंकि अगले 2 घंटे बाद जो तुमसे मिलेगा वो समीर नहीं बल्कि तुम्हारा मालिक होगा।

समीर अपनी बात खत्म करके वहां से चल देता है।


अब आगे....

समीर अपने फार्महाउस पर पहुंच कर एक कॉल करता है।

समीर: हेलो , हाँ मैं बोल रहा हूँ। मुझे 1 घंटे में सारा सामान चाहिए। मैंने तुझे मेल किया है। और हाँ इस बात की भनक किसी को भी ना लगे। किसीको भी मतलब किसी को भी नहीं।

समीर कॉल काट देता है। और उस फ़ोन की सिम तोड़ कर एसिड से जला देता है।

वहीं दूसरी और चंचल परेशान हो रही थी। उसे समझ नही आ रहा था कि आखिर समीर क्या करेगा। लेकिन मन ही मन वो आने वाले लम्हों के लिए तैयार थी। सबसे बड़ी बात सुबह से चंचल की चूत से पानी टपक रहा था। ऐसा होना लाजमी भी था। आखिर कर सेक्स ड्रग का असर तो होना ही था।

करीब दो घंटों में चंचल का आफिस पूरी तरह से खाली हो जाता है।

करीब पंद्रह मिनट बाद चंचल के पास एक कॉल आता है।

चंचल: हेलो.... हाँ समीर....

समीर: हरामजादी, रंडी मुझे नाम से बुलाने की हिम्मत कैसे की तूने। मालिक बोल.... (चिल्ला कर)

चंचल: जी मालिक माफ कर दीजिए।

समीर: मैं आ रहा हूँ

चंचल: जी आजाइये।

फ़ोन कट.....

करीब 30 मिनट बाद समीर चंचल के आफिस में जाता है।

समीर: हेलो ब्यूटीफुल.... कैसी हो? अपने मालिक की याद आयी..

चंचल: (मुस्कुराते हुए) जी मालिक बहुत याद आयी। आपने बताया नही आप को जो मैंने कहा था कब और कैसे करेंगे?

समीर: वो सब तुझे जानने की ज़रूरत नहीं उसका में हमेशा के लिए इंतेजाम कर दूंगा। लेकिन फिलहाल तो तेरे साथ मजे करने है।

चंचल: क्या मतलब?

समीर: तेरे पति का केबिन कहाँ है ?

चंचल: जी उस तरफ..

समीर: तो फिर चलो... मुझे तुम्हारे पति का आफिस देखना है।

चंचल: हम्म तो ये लीजिये ये है मेरे हस्बैंड का केबिन।

समीर :(अपनी पॉकेट से कुछ निकाल कर चंचल को बोलता है) इसकी महक देखो कैसी है?

चंचल : क्या मतलब?

समीर उस चीज को चंचल की नाक के पास करके उसे सांस लेने को बोलता है। चंचल भी डरते हुए उसे हल्के से सूंघ ने लगती है। चंचल को उसकी खुशबू हल्की अजीब से सेंट जैसी लगती है लेकिन अच्छी लगती है।

समीर चंचल के चेहरे को देखते हुए उसे कमर से उठा कर सुरेश की टेबल पर बिठा डेता है। चंचल कुछ समझपाती उस से पहले अचानक से चंचल के निप्पल हार्ड होने लगते है। उसके दिल में अजीब सी बैचैनी उठने लगती है। समीर अपने हाथों को हल्के से जैसे गुदगुदा रहा हो , इस तरह से चंचल के पूरे शरीर पर घुमाने लगता है। चंचल अपनी आंखें बंद करके उस लम्हे को एन्जॉय कर रही थी। उसका दिमाग सोचने समझने की शक्ति उस क्षण के लिए पूरी तरह से कहो चुका था। समीर उसी वक़्त चंचल के पैरों को हवा में उठा कर चंचल की पेंटी निकालने लगता है। चंचल का इस पर बिल्कुल भी विरोध नहीं था। वो तो बस खामोशी स्व आंखें बंद किये जो हो रहा था उसे होने दे रही थी। समीर होले होले बड़े ही प्यार से चंचल की पेंटी निकाल देता है।

चंचल की पेंटी जैसे ही उसके पैरों से बाहर निकलती है समीर चंचल को धक्का दे कर उसी टेबल पर लिटा देता है और चंचल की दोनों टांगों को अपने कंधों पर रख कर चंचल की टांगों के बीच चला जाता है।

समीर: वाह ! बेहद खूब सूरत नज़ारा है। ऊपर वाले ने जन्नत की सारी खूबसूरती शायद यही डाल दी। हल्के हल्के रोएं से ढकी रेशम की चादर जैसे चूत की फांकें। आपस मे जुड़ी हुई जैसे जन्मों से मिली हो। समीर मुस्कुराता हुआ एक किश चंचल की चूत पर करता है।

समीर के चूमते ही चंचल की चूत से हल्का सा पानी छलक आया। समीर ने जो चंचल को सुंघाया था वो एक ड्रग था aphrodisiac . चंचल ना चाहते हुए भी गर्म हुए जा रही थी। अचानक से समीर चंचल की चूत पर टूट पड़ता है। उसे बुरी तरह से चाटने लगता है।

लेकिन अपने हाथ चंचल की चूत को स्पर्श तक नही करता। सिर्फ अपनी जुबान को चंचल की चूत के जायके से जान पहचान करवा रहा था।

चंचल की आहें ,सिसकारियां और चरमोत्सर्ग का सबूत इस समय चंचल की गहरी मगर अटकती हुई सांसें दे रही थी। तकरीबन दस मिनट तक चंचल की चूत चुसाई के साथ जोबन मर्दन चलता रहा इस दौरान चंचल ने बहुत पानी बहाया। ज्यादा पानी बहने के कारण से चंचल की जांघें कांप रही थी।

समीर के चंचल की टांगों के बीच से हट जाने के बाद भी चंचल की कमर हवा में ऊपर की तरफ उछल थी और टांगे खुद ब खुद खुल रही थी। चंचल अभी तक अपने आनन्द से उभरी भी नही थी कि समीर अपने कपड़े निकाल देता है।

चंचल की आंखें अभी भी बंद थी। समीर चुपचाप चंचल के3 सर की तरफ चल जाता है जहां चंचल का सर सुरेश की टेबल से नीचे की और झुका हुआ था। और चंचल अभी भी पीठ के बल ही लेटी हुई थी। समीर बिना देर किए अपने लन्ड को सीधा चँचल के मुह में घुसा देता है।

चँचल इसके लिए तैयार नहीं थी। समीर का लंड चँचल के हलक तक जा रहा था जो कि साफ नजर आ रहा था। चँचल अचानक हुए इस हमले से बोखला कर आंखें खोलते है तो उसे सिर्फ समीर के आंड और गांड ही नज़र आती है। चँचल के हाथ पैरों में इतनी जान भी नहीं थी कि वो समीर को रोक सके। चँचल की आंखों से आंसू निकल आये थे। चँचल इस समय उस दौर से गुजर रही थी जहां नीचे तो आग लगी थी और ऊपर लंड पड़ रहा था।

समीर बीच बीच में लन्ड बाहर निकाल कर चँचल को सांस लेने तक का मौका दे रहा था । करीब दस मिनट की इस हार्डकोर डीप थ्रोट के बाद समीर गहरे धक्के लगाते हुए चँचल के हलक में अपने माल की बरसात करने लगता है। चँचल को इस वक़्त ऐसा लग रहा था जैसे कोई सीधा उसके पेट मे कुछ डाल रहा हो। समीर का माल चँचल के हलक से होते हुए सीधे उसके पेट मे जा रहा था।

समीर अपना माल खाली करके एक क्रीम निकालता है और उसे अपने लंड पर मलने लगता है। देखते ही देखते समीर का लन्ड एक बार फिर से खड़ा हो जाता है। लेकिन इस बार उसका लन्ड अजीब सा लग रहा था। दरअसल ये भी एक ड्रग ही था। ये लन्ड को ड्राई करने के साथ साथ सेक्सुअल इरेक्शन भी देता है। समीर अपने लंड को हल्का सा लुब्रिकेटे करता है तो देखता है कि 5 से 8 सेकंड मैं उसका लन्ड फिर से ड्राई हो जाता है।

समीर हल्की सी मुस्कान के साथ चनाचल कि दोनों टांगों के बीच जाकर अपने लन्ड को चँचल की चूत पर रगड़ने लगता है। ड्रग के कारण चँचल की चूत बार बार पानी छोड़ रही थी। और समीर के लैंड को गीला कर रही थी। समीर भी देख रहा था कि उसका लन्ड गीला होने के बाद फिर से धीरे धीरे सुख रहा है। समीर चँचल की गर्दन ऊपर उठा कर उसकी आँखों मे आंखें डाल कर देखता है। चँचल की आंखें इस वक़्त सुर्ख लाल थी। ऐसा लग रहा था जैसे चँचल आने वाले लम्हों के लिए पूरी तरह से तैयार थी। समीर ने अपने लन्ड के सुपडे को चँचल की पानी छोड़ती चूत के मुंह पर लगा दिया। चँचल की कमर समीर के लन्ड के स्पर्श मात्र से हवा में उठ गई।
 
अपडेट - 18

समीर अपना माल खाली करके एक क्रीम निकालता है और उसे अपने लंड पर मलने लगता है। देखते ही देखते समीर का लन्ड एक बार फिर से खड़ा हो जाता है। लेकिन इस बार उसका लन्ड अजीब सा लग रहा था। दरअसल ये भी एक ड्रग ही था। ये लन्ड को ड्राई करने के साथ साथ सेक्सुअल इरेक्शन भी देता है। समीर अपने लंड को हल्का सा लुब्रिकेटे करता है तो देखता है कि 5 से 8 सेकंड मैं उसका लन्ड फिर से ड्राई हो जाता है।

समीर हल्की सी मुस्कान के साथ चनाचल कि दोनों टांगों के बीच जाकर अपने लन्ड को चँचल की चूत पर रगड़ने लगता है। ड्रग के कारण चँचल की चूत बार बार पानी छोड़ रही थी। और समीर के लैंड को गीला कर रही थी। समीर भी देख रहा था कि उसका लन्ड गीला होने के बाद फिर से धीरे धीरे सुख रहा है। समीर चँचल की गर्दन ऊपर उठा कर उसकी आँखों मे आंखें डाल कर देखता है। चँचल की आंखें इस वक़्त सुर्ख लाल थी। ऐसा लग रहा था जैसे चँचल आने वाले लम्हों के लिए पूरी तरह से तैयार थी। समीर ने अपने लन्ड के सुपडे को चँचल की पानी छोड़ती चूत के मुंह पर लगा दिया। चँचल की कमर समीर के लन्ड के स्पर्श मात्र से हवा में उठ गई।

अब आगे......

समीर बार - बार चंचल की चूत पर अपना लन्ड रगड़ता है। समीर लन्ड के सुपडे को चंचल की चूत के मुहाने से उसके क्लीट तक रगड़ता है।

समीर के बार बार ऐसा करने पर चंचल परेशान हो जाती है। चंचल को इस वक़्त सिर्फ और सिर्फ सेक्स की चाहत थी।

चंचल एक पल को अपनी आंखें खोल कर समीर को देखती है। समीर भी चंचल की आंखों में झांक कर देखता है। चंचल की आंखें इस वक़्त सुर्ख लाल थी। चंचल इस वक़्त पूरी तरह से होश में भी नही थी। चंचल की ये हालत ड्रग के कारण थी।

समीर थोड़ी देर इंतजार करके चंचल की आंखों में देखते हुए अपने लन्ड के सुपडे को चंचल की चूत के मुह पर टिका कर हल्के हल्के की और खिसकने लगता है। समीर चंचल की चूत में कोई धक्का नहीं मरता बल्कि अपने लन्ड को धीरे धीरे चंचल की चूत में स्लिप करवा रहा था जिस से चंचल की चूत की दीवारें रगड़ खा रही थी।

समीर की इस हरकत से चंचल की जांघें कांप जाती है और चंचल का पानी छूट जाता है। चंचल की चूत झड़ते वक़्त समीर के लन्ड को ऐसे जकड़ रखी थी जैसे शेर हिरनी को अपने जबड़े मैं फंसा लेता है।

तकरीब डेड मिनट तक चंचल झड़ती रही। चंचल जैसे ही झाड़ कर शांत हुई समीर के लन्ड ने अपना काम करना शुरू कर दिया। समीर के लन्ड पर जो ड्रग लगा था उसकी वजह से चंचल की चूत का चिकना पानी अब धीरे धीरे गाड़ा होता जा रहा था। या फिर यूँ कहूँ की अब चंचल की चूत हल्की हल्की ड्राई हो गयी थी। समीर को ऐसा महसूस होती है एक हल्की सी मुस्कान के साथ समीर अपना लन्ड ठीक वैसे ही धीरे धीरे बाहर की और खींचता है। इस बार जब समीर ने अपना लैंड बाहर की और खींचा तो चंचल की चूत भी जैसे बाहर को आने को हो गयी। एक दम समीर के लन्ड के चिपक कर।

ये ड्रग जो समीर के लन्ड पर लगा था ये एक्सट्रा टाइटनेस का काम करता है। लन्ड में भी और चूत में भी। चंचल को हल्की सी जलन होती है लेकिन सेक्स के नशे में चूर चंचल को बस सेक्स चाहिए था। एक बार झड़ने के बाद चंचल फिर से गर्म हो चुकी थी।

समीर चंचल के चेहरे की तरफ झुक कर चंचल से बोलता है।

समीर: तो मेरी स्लेव को कैसा लग रहा है?

चंचल: उम्मम आह कैसे बताऊ। बस करते रहो।

समीर: फिर आज के बाद तो ऐसा मौका नही मिलेगा ना।

चंचल कोई जवाब नही देती। ड्रग के कारण चंचल का शरीर उसके बस में नहीं था लेकिन दिमाग समीर की हर बात समझ रहा था।

समीर एक गहरा धक्का चंचल की चूत में मारता है और पूछता है।

समीर: बोलो ना?

चंचल: क्या पता शायद मिल जाये।

समीर चंचल के ये बात सुन कर 3-4 गहरे धक्के चंचल की चूत में लगाता है। इन धक्कों के कारण चंचल पूरी तरह से सेक्स के नशे में डूब जाती है। चंचल को समीर और अपने पति के बीच हुई चुदाई याद आती है। लेकिन उसे हर बार सिर्फ और सिर्फ समीर ही दिखाई देता है।

अब समीर चंचल को बुरी तरह से चोदने लगता है। जिस से चंचल की सिसकारियां सुरेश के ऑफिस को पूरी तरह से गुंजा देती है।

समीर बुरी तरह से चंचल की चूत को चोद रहा था। और चंचल समीर के हर प्रहार का जवाब दे रही थी। अचानक से चंचल का बदन अकड़ने लगता है और चंचल झड़ जाती है। चंचल झड़ने के साथ ही एक डूबी हुई सी चीख मारती है जो उस आफिस की चार दिवारी में ही कहीं गुम हो जाती है।

चंचल की यह आह से पूरा आफिस गूंज उठा था। तभी समीर अपना लन्ड बाहर निकाल कर चंचल के चेहरे के ऊपर अपना माल खाली करने लगता। अब समीर का भी काम हो चुका था। चंचल गहरी गहरी सांस ले रही थी। इसी बीच समीर के लन्ड से माल निकलना शुरू हुआ तो ऐसा लग रहा था जैसे वीर्य की बरसात हो रही हो। चंचल का पूरा चेहरा समीर के वीर्य से भर चुका था।

चंचल और समीर दोनों वही करीब 20 मिनट तक आराम करके अपनी सांसे दुरुस्त करते है। चंचल का पूरा बदन पूरी तरह से टूट रहा था। और समीर भी लगभग थक चुका था। समीर चंचल को पकड़ कर बाथरूम में ले जाता है। और चंचल के पूरे बदन को साफ करता है। ठंडे पानी के स्पर्श से चंचल को हल्का सा होश आता है। चंचल को अब एहसास हो चुका था कि उसका सब कुछ लूट लिया गया है। लेकिन चंचल इस के लिए खुद को जिम्मेदार मान रही थी।

हालांकि चंचल को इस बात का एहसास तक नही था कि चंचल की समीर ने सेक्स ड्रग दिया था। इसी लिए चंचल खुद को इसके लिए माफ नही कर पा रही थी। और वहीं शावर की बूंदों में उसके आंसू बह गए। समीर चंचल का बदन पौंछ कर चंचल को कपड़े पहनने में मदद करता है और खुद भी तैयार हो जाता है। चंचल को चलने में हल्की सी तकलीफ हो रही थी ।

चंचल आफिस से बाहर निकलने लगती है समीर चंचल का हाथ पकड़ कर चंचल को सोफे पर बिठा देता है। चंचल समीर से नज़रें नहीं मिला पा रही थी। समीर अपनी कोट की जेब से 2 टेबलेट निकाल कर चंचल को देता है।

समीर: ये ले लो । पेनकिलर है। दर्द ठीक हो जाएगा। और चलने में तकलीफ नहीं होगी। वरना इस हालत में बाहर निकलोगी तो लोग सब समझ जाएंगे।

चंचल को समीर का ऐसा सोचना अच्छा लगता है। चंचल को यकीन हो गया था कि समीर चंचल की इज्जत की बहोत परवाह करता है। चंचल चुपचाप वो गोलिया पानी के साथ ले लेती है।

समीर: और हां , कल उस लड़की की बारी है। वैसे तुमने मुझे सिर्फ उसकी फोटो दिखाई है उसके बारे में कुछ बताया नहीं। इसलिए मुझे खुलकर उसके परिवार के बारे में सब बताओ।

चंचल और समीर दोनो क़रीब 30 मिनट तक उस कच्ची कली के बारे में बातें करते है। समीर उसके बारे में सब कुछ जान लेता है।

समीर: तुम देखना चाहोगी उस लड़की को कैसा तैयार करता हूँ इस शहर की टॉप माल बनने में?

चंचल: हाँ....

ये पहला शब्द था जो समीर के साथ हुई चुदाई के बाद चंचल में नार्मल हाव भाव में दिया था। ना तो चंचल इस वक़्त समीर के साथ हुई चुदाई के ग़म में थी और ना ही अपने बदले की भावना से ग्रस्त। वो इस समय फिर से तड़प रही थी।

समीर : तो फिर ठीक है , कल तुम आफिस नहीं जाओगी बल्कि मेरे फार्म हाउस पर मिलोगी। और हां उस लड़की को तुम ही अपने साथ लाओगी वो भी सुबह जल्दी ठीक उसके स्कूल के टाइम में। मुझे काम से कम 8 घंटे चाहिए। और हां रही बात उसकी स्कूल की और किसी की तो तुम उसकी टेंशन मत करना बस काल से किसी भी हाल में फार्म हाउस ले आना । उसे लेकर आने की जिम्मेदारी तुम्हारी है। बाकी सब मैं देख लूंगा।

अचानक से घड़ी की बेल बज पड़ती है। शाम के 7.30 बज रहे है।

समीर: लो तुम्हारा घर जाने का वक़्त हो गया। और तुम्हारा दर्द भी अब तो 100%, सही हो गया होगा। है ना?

चंचल: (शर्म से ) हम्म

समीर: तो चलो मैं निकलता हूँ। मेरे जाने के ठीक 10 मिनट बाद तुम निकल जाना।

समीर निकल जाता है आने फार्महाउस ओर चंचल निकल जाती हैअपने घर।
 
माफी चाहता हूं दोस्तों दरअसल इस साइट का मेरा id password वर्क नही कर रहा था। अब सत्य लॉगिन कर दिया है।।

जिन्होंने भी मेरे अभी के नए अपडेट जो इस स्टोरी मैं डालें है उनका बहुत बहुत शुक्रिया।। आपकी वजह से मेरे रीडर्स को मुझसे कोई शिकायत नहीं रहेगी। raaj sharma भाई आपको भी धन्यवाद आपने मुझ जैसे छोटे राइटर को कहानी लिखने का मौका दिया।।
 
माफी चाहता हूं दोस्तों दरअसल इस साइट का मेरा id password वर्क नही कर रहा था। अब सत्य लॉगिन कर दिया है।।

जिन्होंने भी मेरे अभी के नए अपडेट जो इस स्टोरी मैं डालें है उनका बहुत बहुत शुक्रिया।। आपकी वजह से मेरे रीडर्स को मुझसे कोई शिकायत नहीं रहेगी। raaj sharma भाई आपको भी धन्यवाद आपने मुझ जैसे छोटे राइटर को कहानी लिखने का मौका दिया।।
 
अपडेट - 24

दरअसल रिया की पेंटी रिया के चलते ही रिया के क्लीट को अंदर की और दबा रही थी जिससे उसकी पैंटी एक बार फिर से गीली हो जाती है वही उसकी ब्रा हल्की टाइट हो गयी थी जो उसके निप्पल को बार बार रगड़ कर रिया को एक नया मज़ा दे रही थी। लेकिन रिया इस तरह के हालात में पूरा दिन तो नहीं निकाल सकती थी।

चँचल समीर से कपड़े लेकर शाम को करीब 5 बजे अपने घर की और निकलती है। लेकिन उस से पहले ज़रा समीर और चँचल के बीच की कहानी तो जान ले।


अब आगे....

समीर: (चँचल जब समीर के दिये हुए कपड़े लेकर निकलने लगती है तब) अच्छा सुनो....

चँचल:- (चोंक कर) ह्म्म.... क्या हुआ?

समीर: एक बात पूछूँ?

चँचल: ( आंखों के इशारे से हाँ बोलती है)

समीर: क्या तुम..... अम्म्म क्या तुम मेरी गर्ल फ्रेंड बनोगी, मेरी स्लेव न बनकर....

चँचल समीर के इस सवाल पर एक टक समीर को देखती रहती है....

समीर : देखो उस दिन जो कुछ भी हमारे बीच हुआ उसे लेकर तुम गिल्ट फील मत करना। उसमे तुम्हारी कोई गलती नही है। सारा दोष मेरा ही था।

चँचल : (हाथ कर इशारे से समीर को बोलने से रुकने का इशारा करती है) देखो उस दिन के बारे में मुझे कोई बात नही करनी। और रही गलती की बात तो हम दोनों ही गलत थे। कुछ मेरी गलती थी और कुछ तुम्हारी। अब हमें वो सब कुछ भुला देना चाहिए।

समीर : (तुरंत अपने घुटनों पर बैठ कर) चँचल अब ये नही हो सकता। मैं तुम्हे नहीं भुला सकता और उस दिन को तो बिल्कुल नहीं।

चँचल : (समीर को उसके घुटनों से खड़ा करते हुए) ये क्या कर रहे हो समीर.... प्लीज गेट अप....

समीर: नो ई वोंट... यु हैव टू ऐसेप्ट मी....

चँचल: समीर तुम समझते क्यों नहीं मैं शादीशुदा औरत हूँ। मेरा एक परिवार है। मेरी ज़िंदगी के साथ साथ मेरे पूरे परिवार के साथ खिलवाड़ होगा।

समीर: ( चँचल की बात खत्म होने से पहले) और मेरे परिवार में सिर्फ तुम हो!

चँचल समीर का जवाब सुन कर एक टक समीर की आंखों में देखने लगती है और समीर एक टक चँचल की आंखों में देखता रहता। करीब 3 -4 मिनट तक दोनों में से कोई कुछ नहीं बोलता तभी....

समीर: ( चनाचल का हाथ पकड़ कर उसे अपने फार्म हाउस से बाहर करते हुए) तुम चली जाओ चँचल आज के बाद तुम मुझे कभी भी अपनी शक्ल मत दिखाना। और तुम्हारा काम, वो रिया वाला, मैं कर दूँगा। आज के बाद फिर कभी भी मुझसे मत मिलना।

चँचल : समीर हुम् दोस्त भी तो बनकर रह सकते है।

समीर चँचल की बात सुन कर भी अनसुनी कर देता है और दरवाजा बंद कर लेता है। चँचल करीब 5 मिनट तक बाहर इंतजार करती रहती है। दो तीन दफा डोर बेल भी बजाती है लेकिन समीर दरवाजा नहीं खोलता।

थक हार कर चँचल वापस अपने घर की और निकल जाती है।

वहीं दूसरी और रिया सुबह उठ कर नहाने के बाद नाश्ता करके बाहर जाना चाहती थी लेकिन वो नहीं गयी और घर पर ही सो गई।

72 घंटों बाद....

सुबह 7.30

चँचल रिया के घर के बाहर...

चँचल: आओ जल्दी गाड़ी में बैठ जाओ। तुम्हारी हिटलर मम्मी ने देख लिया तो लेने के देने पड़ जाएंगे।

रिया तुरंत चँचल की कार में बैठ जाती है और चंचल रिया को लेकर अपने आफिस में पहुंच जाती है।

चँचल रिया को आफिस में आने के बाद तकरीबन 5 मिनट तक देखती ही रहती है। इस वक़्त जो रिया खड़ी थी वो आज से 3 दिन पहले मिली रिया से बिल्कुल अलग थी।

रिया: भाभी ऐसे क्या देख रही हो? मुझे शर्म आ रही है।

चँचल: देख रही हूं तुम पर दवा का कुछ ज्यादा ही असर हुआ है। तुम्हारा बदन तो एक दम से भर से गया है।

रिया: भाभी मेरे सारे कपड़े टाइट हो गए है। मैंने अपना साइज दुबारा चेक किया है?

चँचल: अच्छा ? तो क्या ही तुम्हारा साइज....

रिया: 28 वेस्ट, 34 एंड हाफ ब्रेस्ट, 38 हिप्स... भाभी पहले मैं आयी थी तब मेरे ब्रेस्ट 30, वेस्ट 28 और हिप्स 34 या 32 होंगे।

चँचल: कुछ भी हो रिया तुम लग बेहद खूबसूरत रही हो।

रिया : लेकिन भाभी मेरे साथ एक प्रॉब्लम भी हो गयी।

चँचल : क्या ? कैसी प्रॉब्लम? कोई साइड इफ़ेक्ट?

रिया : पता नहीं भाभी लेकिन मेरे प्राइवेट पार्ट्स मैं कुछ बदलाव आए है जो मुझे बेहद परेशान करते है। दिल करता है कि ब्रा और पेंटी पहनू ही नहीं।

चँचल : क्या? ऐसा क्या हो गया..

रिया: भाभी मुझे शर्म आ रही है बताने में।

चँचल : रिया देख हम दोनों लडकिया है यहां पर , फिर मुझे बताने में कैसी शर्म।

करीब 10 - 15 मिनट तक रिया को कन्वेंस करने के बाद रिया रिया अपनी स्कर्ट ऊपर करके चँचल को अपना क्लीट दिखाती है। जो तकरीबन डेड़ से दो इंच तक बढ़ गया था। रिया के क्लीट को देख कर चँचल पूरी तरह से चोंक जाती है।

रिया : भाभी जब मैं पेंटी पहनती हूँ तो ये इतनी बुरी तरह से रगड़ खाता है कि मेरा पिशाब निकल जाता है।

चँचल समझ गयी थी कि रिया पेंटी पहनने पर गीली हो जाती है। फिर रिया अपनी टी शर्ट ऊपर करके अपने उरोजों को चँचल को दिखाती है। रिया के निप्पल तकरीबन दो से ढाई इंच तो बड़े और पूरे एक इंच मोठे हो गए थे।

रिया: देखिये भाभी मेरे निप्पल को इनमे हर वक़्त एक अजीब सी गुदगुदी होती है। दिल करता है इन्हें दबाती रहूँ लेकिन दर्द होता है।

चँचल: रिया रिया रिया। डॉक्टर ने कहा था मॉडल बनने के बाद तुम्हे अपना ड्रेस कोड बदलना होगा। तुम्हे क्या लगता है मॉडल्स की लाइफ इतनी आसान होती है।

रिया : तो अब मैं क्या करूँ भाभी। मम्मा भी बोल रही थी कि तू बहुत जल्दी बड़ी हो रही है। अक्ल से कब बड़ी होगी गॉड जाने।

चँचल : देख कुछ कपड़े है मेरे पास जो मुझे समीर ने दिए है। वो बोल रहे थे कि तुम्हे अब ये पहनने चाहिए।

चँचल रिया को कपड़ो का सूट केस देते हुए.... रिया चँचल के हाथ से सूट केस ले लेती है।

रिया: भाभी कैसे कपड़े है। क्या मैं इन्हें पहन सकती हूँ।

चँचल: हाँ रिया! ये तुम्हारे लिए ही तो है।

रिया तुरंत सूट केस को टेबल पर रख कर खोलती है और कपड़े देखने लगती है।

सूटकेस खुलते ही रिया और चँचल कपड़ो को देखती है तो दोनों के मुठ खुल जाते है। इस बार तो रिया के साथ साथ चँचल भी शर्मा जाती है।

रिया : ये..... ये क्या है भाssभी....

चँचल: (खुद को संभालते हुए नार्मल होकर रिप्लाई देती है।) ये विक्टोरिया सीक्रेट के लेटेस्ट डिज़ाइनिंग क्लॉथ है।

रिया: लेकिन भाभी मैं इन्हें घर पर क्या बाहर भी कैसे पहनूँगी।

चँचल: रिया डॉक्टर ने और समीर में पहले ही बताया था कि तुम्हे ये सब घर पर धीरे धीरे पहनना शुरू करना होगा।

रिया: लेकिन भाभी मैं कैसे?

चँचल: रिया देखो समीर में ये कपड़े मुझे दिये है। और तुम जानती हो इन कपड़ो की मार्केट मे कीमत लाखोँ रुपये है। अगर ये तुम्हे फ्री में मिल रहे है तो तुम्हे क्या एतराज है। दूसरी बात तुम एक मॉडल हो तुम्हे कपड़ो को लेकर इतना नहीं सोचना चाहिए।

रिया: लेकिन भाभी मैं तो इनके नाम भी नहीं जानती और इन्हें पहनूँगी किसे?

चँचल: एक मिनट।

कॉल करती है। मुझे तुम अभी आफिस में चाहिए । जो रायता तुमने यहां फैलाया है उसे मेरे सर मत जड़ो। कॉल कट।

तकरीबन 20 मिनट बाद समीर आफिस में आता है। जी हां चँचल ने समीर को ही कॉल किया था।

समीर: हेलो चँचल जी, हेलो रिया।

रिया: हेलो समीर सर...

चँचल: समीर जी क्या आप रिया को इन कपड़ो के उसे और ना बताएंगे।

समीर: जी क्यों नहीं।।

रिया और चँचल समीर को रिया की बॉडी में होने वाले बदलाव के बारे में बता देती है उसके बाद समीर रिया को कपड़े बताता है।

समीर रिया को कुछ ब्रा दिखाते हुए ....

देखो रिया ये सब ओपन कप ब्रा और क्वार्टर कप ब्रा है। इनमें तुम्हारे निप्पल को ज्यादा प्रॉब्लम नहीं होगी और तुम्हारे बूब्स नीचे की तरफ नहीं लटकेंगे। लेकिन हां एक बात है इन्हें पहनने के बाद कोई भी मर्द तुमसे अपनी नज़र नहीं हटाएगा। क्योंकि अब तुम्हारे निप्पल हमेशा कड़े रहेंगे तो तुम जो भी कपड़े पहनोगी उनमे से ये बाहर की और झलकेंगे और फुल कप ब्रा नही होने से तुम्हे ऐसा लगेगा जैसे तुमने कपड़े पहने ही ना हो। लेकिन धीरे धीरे इन सब की तुम्हे आदत पड़ जाएगी

ये है तुम्हारे लिए लेटेस्ट डिज़ाइन थोंग। अब तुम पेंटी तो भूल ही जाओ। वो अब तुम नही पहन पाओगी।वो अब तुम नही पहन पाओगी। क्योंकि अब तुम्हारा क्लीट तुम्हारी उम्र से पहले ही बड़ी होगयी है तो तुम्हे क्लीट थोंग पहनने होंगे। ये थोंग केवल तुम्हारे क्लीट को कवर करेंगे। और कुछ भी नहीं इससे तुम्हे क्लीट ज्यादा परेशान नहीं करेगा। लेकिन थोड़ी बहुत परेशानी तो होगी ही। ये थोंग मेटल के बने है । क्लीट के टच होते ही ये हल्का सा वाइब्रेशन क्लीट को देते रहेंगे।
 
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