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बहन की करवाई चुदाई

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Guest
हेलो दोस्तों मेरा नाम मोनू है. मेरी उम्र १८ साल है और मैं लखनऊ में रहता हूँ और इस कहानी में मैं आप को बताऊँगा की कैसे मेरी बड़ी बेहेन की चुदाई मेरे जिगरी दोस्त से मैंने करवाई. मेरे दोस्त का नाम रिशु है और वोह पहले मेरे पडोस में रहता था. हमारी दोस्ती बचपन की है. उसके घर पर उसके मम्मी पापा और वो रहते है. हमारे घरेलु रिश्ते थे मेरी दीदी उसको भी राखी बंधती थी और छोटा भाई समझती थी पर वो मेरी दीदी को चोदना चाहता था और मुझे उसकी मम्मी बहुत अच्छी लगती थी. हम होमोसेक्स भी करते थे इसीलिए हम एक दुसरे से कुछ नहीं छुपाते थे. उसके पापा का १ साल के लिए अचानक दिल्ली ट्रान्सफर हो जाने से अब वो और उसकी मम्मी ही वहाँ रहते है पर अब उन्होंने अपना घर मेरे घर से ४ किलो मीटर की दूरी पर बनवा लिया है और कुछ दिन पहले वो शिफ्ट हो गए है. मेरे घर पर भी मेरे माँ पापा और मेरी बेहेन रश्मि रहते है. मेरे माँ पापा दोनों नौकरी करते है और रश्मि कालेज में पड़ती है. रश्मि की उम्र १९ साल है.

एक दिन मैं रिशु के घर गया. उसकी माँ ने दरवाजा खोला और मुझे अंदर बुलाया. मैंने उनसे पुछा, “कामिनी आंटी, रिशु कहाँ है. कई दिनों से मिला ही नहीं और कालेज भी नहीं आ रहा है.”

कामिनी: “उसकी तो तबियत बहुत खराब है”

“क्या हो गया आंटी” मैंने पूंछा.

कामिनी: अब तुमसे क्या छिपाऊ जब से इस घर में शिफ्ट हुए है अचानक उसको दौरे पड़ने लगे है, वैसे तो एकदम ठीक रहता है पर अचानक चक्कर आ कर गिर पड़ता है.

तब तक रिशु भी आ गया. मैंने देखा तो दिखने से वो एकदम फिट लगा रहा था. मैंने उससे पूंछा की आंटी क्या कह रही है. किसी डॉक्टर को दिखाया या नहीं.

रिशु: यार सभी बड़े डॉ को दिखा लिया एक महीने से दवा खा रहा हूँ पर कुछ फरक की नहीं पड़ता है. अचानक चक्कर आ जाता है और १ से २ मिनट के लिए मैं बेहोश हो जाता हूँ. इसीलिए गाड़ी भी नहीं चला रहा और घर से बाहर भी नहीं जा रहा हूँ.
 
मैंने आंटी से कहा के आप मेरे साथ चलिए और रिशु की कुंडली ले लीजिए. मेरे एक गुरु जी है जो की ज्योतिष के अच्छे जानकर है और कई लोगो की मदद कर चुके है वोह बता सकते है की रिशु को क्या दिकत है. आंटी भी साधू लोगो को बहुत मानती थी तो वो उसी समय मेरे साथ चल दी. रिशु को हमने घर पर ही छोड़ दिया की कहीं रस्ते में तबियत न खराब हो जाये. गुरु जी के आश्रम पहुच कर हमने अपने आने की खबर करवाई. काफी भीड़ होने के बावजूद गुरु जी ने हमें पहले ही बुलवा लिया.

गुरु जी: आओ बेटा मोनू, सब कुशल मंगल तो है

“नहीं गुरु जी, ये मेरे दोस्त की माता जी है. अचानक मेरे दोस्त को दौरे पड़ने लगे है जिससे हम बहुत परेशान हैं.”

गुरु जी: क्या नाम है बेटी तुम्हारे पुत्र का.

कामिनी: जी रिशु

गुरु जी: अरे बहुत ही सुन्दर और गुडी बालक है, कई बार मोनू के घर पर उससे मुलाकात हो चुकी है मेरी.

कामिनी: जी कई डॉ को दिखाया पर कुछ नहीं हुआ, अब तो आपका की सहारा है.

गुरु जी: बेटी तुम्हारे पुत्र की जन्म कुंडली ली हो क्या.

कामिनी: जी महाराज, ये लीजये.

ये कह कर कामिनी ने रिशु की कुंडली स्वामी जी को दे दी. करीब १ घंटे तक स्वामी जी ने उसको पड़ा.

गुरु जी: बेटी, अब तक जीवन मैं मैंने ऐसा दोष नहीं देखा. इसका ठीक होना असंभव है.

यह सुन कर कामिनी आंटी जोर से रोने लगी और कहने लगी “ नहीं महाराज, ऐसे मत कहिये रिशु मेरा एक ही बेटा है, उसके लिए जो भी करना होगा वो मैं करूंगी पर आप मुझे निराश न करे.

गुरु जी: धीरज रखो बेटी

कामिनी: नहीं महाराज, अब अगर मेरा बेटा ठीक नहीं हुआ तो मैं अपनी जान दे दूँगी.

गुरु जी: मोनू बेटा, तुम जरा बाहर जाओ, मुझे कामिनी से अकेले में कुछ बात करनी है.

मैं उठ कर बाहर आ गया और दरवाजे से कान लगा कर खड़ा हो गया
 
अंदर गुरु जी आंटी से कह रहे थे “ देखो बेटी मैं वैसे तो ये उपाय बताने वाला नहीं था पर तुम्हारी हालत मुझे मजबूर कर रही है. पर ये उपाय भी आसान नहीं है और धर्म संगत भी नहीं है.”

कामिनी: ऐसी क्या बात है स्वामी जी.

गुरु जी: बेटी रिशु की कुंडली में एक भयानक दोष है जो सिर्फ एक हालत मैं ही हट सकता है. मुझसे तो कहा भी नहीं जा रहा.

कामिनी: बताइए स्वामी जी. जो भी उपाय होगा मैं करने के लिए तैयार हूँ.

गुरु जी: बेटी, रिशु एक ही दशा मैं ठीक हो सकता है. यदि वो एक ही सप्ताह के भीतर किसी अविवाहित कुवारी ब्राम्हण कन्या से तीन बार सम्भोग करे.

यह सुन कर मुझे तो झटका लग गया और आंटी भी चौक गयी.

“यह आप क्या कह रहे है गुरु जी, इस बात की संबावना तो बहुत कम है की कोई ब्रह्मिन अपनी बेटी की शादी रिशु से करे जबकि हम ब्राम्हण नहीं है” कामिनी बोली

गुरु जी: मैंने कहा है अविवाहित कन्या, यह नहीं कहा की उसका रिशु से विवाह हो, यदि विवाह हो गया तो वो कन्या भी कायस्थ हो जायेगी और यह उपाय विफल हो जायेगा. साथ ही इस बात का ध्यान भी रखना होगा की पहले सम्भोग के वक्त उसकी योनी अक्षत हो और कन्या के मासिकधर्म होते हो अर्थात आयु १६ वर्ष से अधिक हो और पूरे सप्ताह वो सिर्फ रिशु के साथ ही सम्भोग करे किसी और के साथ नहीं और कम से कम तीन बार सम्भोग करे ही. इस उपाय के बाद रिशु चाहे तो उस कन्या से विवाह कर सकता है.

“ मुझे तो यह असंभव लगता है, भला कौन लड़की तैयार होगी इस तरह से और जो किस लालच मैं तैयार हो जायेगी तो वो कुवारी तो नहीं ही होगी. वैसे भी आज कल तो लड़किया कम उम्र में ही अपना कुवारापन खो देती है.” कामिनी ने कहा.

गुरु जी ने कहा “ जरूरी नहीं की कन्या तैयार हो, बात सम्भोग की है प्रेम की नहीं. और मैंने कहा ही था की उपाय कठिन है. पर इसके सिवाय कोई दूसरा रास्ता नहीं है. और अगर रिशु इस बीमारी से निकल जाता है तो ८० वर्ष का आरोग्य जीवन होगा.”
 
ये सुन कर कामिनी आंटी ने गुरु जी को प्रणाम किया और बाहर आ गयी. हम वापस घर चल पड़े. इतनी देर में मैंने अपना प्लान बनाया और अनजान बनते हुए आंटी से पुछा की स्वामी जी ने क्या कहा और आप इतनी परेशान क्यों है. तो कामिनी आंटी ने मुझसे कहा की बात तुम्हारे लायक नहीं है. अभी तुम छोटे हो.

मैंने कहा आंटी आप मुझे नहीं बताना चाहती तो कोई बात नहीं पर मैंने सब कुछ सुन लिया है.

कामिनी “ जब तुमने सब कुछ अपने कानो से सुन लिया है तो मुझसे क्या पूछ रहे हो, स्वामी जी ने जो कहा है वो तो हो नहीं सकता”

मैंने कहा’ “ आंटी, इतनी जल्दी हार नहीं मानिए, मैं काफी देर से येही सोच रहा था की आपके घर जो काम वाली है वो तो ब्राम्हण है और उसकी बेटी अभी १६ साल की हुई है, अगर उसको ५-१०००० हजार रुपये दे दिए जाये तो वो शायद तैयार हो जाये”

कामिनी “अरे वो कुंवारी नहीं है, जब १५ साल की थी तभी एक लौंडे के साथ भाग गयी थी. ४ महीने बाद लौट कर घर आई थी और मान लो की अगर वो कुवारी होती भी तो कौन सी माँ मान जायेगी. तुम भी तो ब्राम्हण हो तुम्ही कोई लड़की बताओ. अरे अगर कोई तुम्हे १०००० रुपये दे तो क्या तुम अपने घर की लड़की किसी को दे दोगे.”

मैंने कहा “ आंटी आप तो नाराज़ हो रही है, रिशु को मैं अपने भाई से बढकर मानता हूँ और जरूरत पड़े तो रश्मि को भी इस काम के लिए दे सकता हूँ और वोह भी बिना किसी पैसे के.”

मेरी बात सुन कर कामिनी के तो होश ही उड़ गए. वो बोली “ सच मोनू, अगर यह तुम सच कह रहे हो तो तुम रिशु को वाकई भाई मानते हो और रश्मि है तो १८ की पर इतनी सीधी है की पक्का कुवारी ही होगी. तुम अगर ऐसा कर दोगे तो मैं तुम्हारा एहसान जिंदगी भार नहीं भूलूंगी और रश्मि की शादी भी रिशु से कर दूँगी. पर रश्मि तैयार हो जायेगी”

मैंने कहा “ देखिये स्वामी जी ने कहा था की सम्भोग बिना कन्या की स्वीकृति से भी हो सकता है. और दूसरी बात मेरे घर वाले नहीं मानेगे की उसकी शादी किसी गैर ब्रह्मिन के यहाँ हो इसीलिए मुझे इस बात का वादा चाहिए की यह बात बाहर नहीं जायेगी ताकि रश्मि की बदनामी न हो.”

कामिनी “ मैं जबान देती हूँ “

“जबान से काम नहीं चलेगा, आज हमारे सम्बन्ध अच्छे है कल कौन जाने क्या हो जाये, आप कुछ नहीं कहेगी पर अगर मेरी रिशु से लड़ाई हो जाये और वो सबको बोल दे” मैंने कहा

कामिनी “ तो तुम क्या चाहते हो”

“देखिये मेरी सगी बेहेन की इज्जत का सवाल है तो दूसरी तरफ रिशु की भी किसी सगी रिश्तेदार का सवाल होना चाहिए.”

कामिनी “ देखो मोनू, अगर मेरे कोई बेटी होती तो मैं उसे तुम्हारे हवाले कर देती, पर मेरा एक ही बेटा है रिशु”
 
“बेटी न सही माँ ही सही” मैंने कहा.

मेरी बात सुन कर कामिनी चौक गयी. मैं कहा “ चौकिये मत आंटी जी, देखिये अगर रश्मि के साथ रिशु ने सम्भोग किया और आपने मेरे साथ तो ना मैं किसि से कहूँगा ना आप लोग. रिशु की बीमारी भी ठीक हो जायेगी और मेरी चिंता भी दूर हो जायेगी जो मुझे रश्मि की बदनामी को लेकर है. अरे अब सोच क्या रही हैं मैं अपने दोस्त के लिए अपनी सगी बेहेन की क़ुरबानी दे सकता हूँ और आप अपने एकलौते बेटे के लिए अपनी क़ुरबानी नहीं दे सकती”

कामिनी बोली “मैं यह नहीं सोच रही हूँ क्योंकि मेरे पास तैयार होने के अलावा कोई रास्ता नहीं है बल्कि यह सोच रही हूँ की तुम्हे एक ३७ साल की औरत में इतनी दिलचस्पी क्यों है”

मैंने कहा “अरे आंटी हीरे की कदर तो जौहरी ही जनता है, तो बताइए बात पक्की.”

“पक्की” कामिनी बोली और मैंने प्यार से आंटी के एक होठों पर एक पप्पी ले ली.

उनके घर पहुच कर मैंने गाड़ी रोकी और बोला “आंटी आप रिशु को बाहर भेज दीजिए ताकि उसे भी मैं समझा दूं .”

कामिनी बोली “उसे यह भी बताओगे क्या की रश्मि के बदले तुम मुझसे सम्भोग करोगे”.

“जितना जरूरी होगा उतना ही बताऊँगा, आप उसे बाहर तो भेजिए” कामिनी अंदर गयी और रिशु बाहर आ गया. उसे गाड़ी में बिठा कर हम वह से चल दिए थोड़ी दूर जाकर मैंने गाड़ी साइड मैं रोकी और उसे गले लगा कर कहा “हमारा प्लान कामयाब हो गया, तुम्हारे चक्कर का चक्कर चल गया और तुम्हारी माँ मुझसे चुदने के लिए तैयार है और रश्मि की चुदाई तुमसे करवाने के लिए तो वोह कुछ भी करेगी. स्वामी जी ने क्या एक्टिंग की है मज़ा आ गया”.

रिशु “अरे इतना बढ़िया प्लान बनाया था की फ्लॉप कैसे होता, चलो घर चलो और आगे की तैय्यारी करते है.”

घर पहुँच कर मैंने रिशु को इशारा किया और वोह अंदर चला गया और मैंने कामिनी से कहा “चलिए आंटी, रिशु को सब समझा दिया है, थोडा नाराज़ था पर मैंने उसे समझा दिया की ये बहुत जरूरी है. चलिए बेड रूम में चल कर आगे की बात करते है”

कामिनी “हाय तुमने रिशु को बता दिया की तुम मेरे साथ क्या करोगे”

“अब वो घर पर है और हम सेक्स करेंगे तो उसे पता नहीं चलेगा?” मैंने कहा और कामिनी को बेड रूम में ले जाकर दरवाजा बंद कर लिया.

कामिनी ने कहा “अभी ये करना जरूरी है जब रिशु रश्मि से कर ले तब हम करेंगे.”

मैंने कहा “अरे यार रिशु तो कल रश्मि के साथ पहली बार करेगा, सुनो तुम आज रात को मेरे घर फोन करना और रश्मि से कहना की कल तुम्हारे यहाँ पूजा है और सरे लोग आ जाये. मम्मी पापा ३ दिन के लए बाहर गए है तो रश्मि मेरे साथ यहाँ आएगी तब तुम कह देना की पंडित नहीं आया और पूजा कैंसल हो गयी. सबको फोन करके मन कर दिया पर हमारा फोन नहीं लगा रहा था. फिर रश्मि को तुम कोल्डड्रिंक देना जिसमे एक दवा होगी जो मैंने रिशु के पास रखवा दी है. वोह पिटे ही रश्मि बेसुध हो जायेगी और उसके बाद रिशु का काम हो जायेगा. कहो मेरी जान कैसा लगा प्लान.”

ये बोल कर मैंने कामिनी की साढी खोल दी और अब वो ब्लाउज और पेटीकोट में मेरे सामने खड़ी थी.

कामिनी “इतनी जल्दी आंटी से जान और आप से तुम पर आ गए, मानती हूँ पक्के बेहेंचोद हो, बहुत बढ़िया प्लान बनाया है रश्मि को चुदवाने का. आओ और अब मेरी प्यास बुझाओ”

मुझे उम्मीद नहीं थी की कामिनी इतनी जल्दी खुल जायेगी पर उसके मुह से गलिया सुन कर मजा आ गया. लम्बी, गोरी चिटटी कामिनी का भरा बदन, चौड़ी कमर, बाहर निकले उत्तेजक हिप्स और ब्लाउज से बाहर झांकते बड़े-बड़े स्तन मेरे मन में हलचल मचाने लगे। मेरे मन में उनको नंगा देखने का ख्याल आने लगा। फिर हम दोनों बिस्तर पर लेट गए. कामिनी एक दम मुझ से लिपट गयी, मुझे करंट सा लगा जब उनके बूब्स मेरी छाती से छुये। उसकी एक टांग मेरे उपर थी। मैने भी उसकी टांग पर एक पैर रख दिया और उसकी पीठ पर हाथ रखते हुए कहा- आओ मेरी जान, कामिनी धीरे धीरे मेरी बाहों मे सिमटती जा रही थी और मुझे मजा आ रहा था। धीरे से मैने उनके हिप्स पर हाथ रखा और धीरे धीरे सहलाने लगा। कामिनी को मजा आ रहा था। फ़िर कामिनी सीधी लेट गयी । अब मै भी उससे चिपट गया और उसके बूब्स पर सिर रख लिया। मेरा लन्ड खड़ा हो चुका था। मै धीरे धीरे उनका पेट औए फ़िर जांघ सहलाने लगा।

तभी कामिनी ने अपने ब्लाउज के कुछ हुक खोल दिये यह कह कर कि बहुत गर्मी लग रही है। अब उनके निप्पल साफ़ नज़र आ रहे थे। मैने बूब्स पर हाथ रख लिया और सहलाने लगा। मैने उनके बूब्स को ब्लाउज से निकाल कर मुंह मे ले लिया और दोनो हाथों से पकड़ कर मसलते हुए उनका पेटीकोट अपने पैर से उपर करना शुरु कर दिया। उसकी गोरी गोरी जांघों को देख कर मै एक दम जोश मे आ चुका था। उसकी चूत नशीली लग रही थी। मैने उसकी चूत को चाटना शुरु कर दिया। मै पागल हो चुका था। आज मेरा बहुत पूरा सपना पूरा होने वाला था

मैने अपने पैर कामिनी के सिर की तरफ़ कर लिये थे। कामिनी भी मेरा लन्ड निकाल कर चूसने लगी। वह मुझे भरपूर मजा दे रही रही थी। कुछ देर बाद कामिनी मेरे उपर आ गयी और मै नीचे से चूत चाटने के साथ साथ उनके गोरे और बड़े बड़े हिप्स सहलाने लगा। कामिनी की चूत पानी छोड़ गयी। अब मै और नहीं रह सकता था, मै उठा और कामिनी को लिटा कर, उसकी टांगें चौड़ी करके चूत में लन्ड डाल दिया और कामिनी कराहने लगी। मै जोर जोर से धक्के लगाने लगा। कामिनी ने मुझे कस के पकड़ लिया और कहने लगी- मोनू एसे ही करो, बहुत मजा आ रहा है, आज मै तुम्हारी हो गयी, अब मुझे रोज़ तुम्हारा लन्ड अपनी चूत में चहिये एएऊउ स्स स्सी स्स्स आह्ह्ह ह्म्म आय हां हां च्च उई म्म मा। कुछ देर बाद मेरे लन्ड ने पानी छोड़ दिया और कामिनी भी कई बार डिस्चार्ज हो चुकी थी। उस दिन मैने तीन बार अलग अलग ऐन्गल से कामिनी को चोदा। कामिनी ने भी मस्त हो कर पूरा साथ दिया। उसके बाद हमने कपडे पहने और बाहर ड्राइंग रूम में आ गए, रिशु वहाँ टीवी देख रहा था, उसको देख कर कामिनी थोडा शर्मा गयी और मैंने घर का नंबर मिलाया और फोन कामिनी को दे दिया. फोन रश्मि ने उठाया और वोही बात हुई जो तय हुई थी रश्मि ने कह दिया की वोह कल १०-११ तक आ जायेगी.

मैंने कामिनी को एक किस किया तो रिशु मुस्कुराने लगा और मैं वह से चला आया.
 
घर पंहुचा तो रश्मि बोली “भैया, कामिनी आंटी का फोन आया था कल सुबह १० बजे उनके यहाँ जाना है, पूजा है”

मैंने कहा ठीक है ९ बजे तक तैयार हो जाना और मन ही मन सोचा की पूजा तो तुम्हारी होगी कल की जिंदगी भर नहीं भूलोगी.

अगले दिन हम सुबह ९.३० बजे घर से निकले और १० बजे रिशु के घर पहुच गए. अंदर गए तो रश्मि ने पुछा “आंटी क्या हमलोग सबसे पहले आ गए है”

कामिनी “अरे नहीं, असल में पूजा कैंसल हो गयी क्योंकि पंडित जी बीमार हो गए सबको तो मैंने फोन करके मना कर दिया पर तुम्हारा फोन लग ही नहीं रहा था, अच्छा ही हुआ की तुम आ गयी, पहली बार आई हो इस घर में, मोनू तो आता रहता हैं पर तुम तो शकल ही नहीं दिखाती. अब खाना खा कर ही जाना”

रश्मि “नहीं आंटी ऐसी बात नहीं है पर कॉलेज के बाद टाइम ही नहीं मिलता”

“अरे ऐसी भी क्या पढाई, येही तो उम्र है खेलने खाने की क्यों मोनू”

मैंने शरारत से कहा “जी मैं तो खूब खेलता खाता हूँ आप तो जानती ही है, रिशु कहाँ है”

कामिनी “नहा रहा है”

तब तक रिशु नहा कर आ गया और उसने सिर्फ एक टावेल लपेट रखी थी. उसको देख कर रश्मि शर्मा गयी तो रिशु बोला “अरे क्या दीदी, बचपन में हम दोनों नंगे खेलते थे और अभी तो टावेल पहनी है मैंने तब भी सरमा गयी”

रश्मि बोली “हट बदमाश”

कामिनी ने मुझसे पुछा “मोनू कोल्डड्रिंक या चाय” प्लान के हिसाब से मैंने कहा कोल्डड्रिंक. रिशु ने भी कोल्ड ड्रिंक माँगा तब कामिनी ने रश्मि से कहा तो वो बोली जब ये लोग कोल्ड ड्रिंक पियेंगे तो मैं भी वोही ले लूंगी.

“क्या लोगी, लिम्का, फांटा या पेप्सी” कामिनी ने रश्मि से पुछा

“जी फांटा” रश्मि बोली

“और तुम दोनों” कामिनी ने अब हमसे पुछा

“पेप्सी” हमदोनो एक साथ बोले ताकि रश्मि की ड्रिंक में कुछ मिलाना आसान हो जाये.

५ मिनट में कोल्ड्रिंक आ गयी और हमने अपने अपने ग्लास खली कर दिए. १० मिनट ता हम यूं ही बातें करते रहे उसके बाद जैसा तय हुआ था रिशु ने रश्मि के ऊपर पानी की बोतल गिरा दी और वो पूरी भीग गयी. कामिनी को मैंने इशारा किया और वोह रिशु के ऊपर चिल्लाने लगी. मैंने कहा और उसने जान बूझ कर तो नहीं गिराया पानी, अगर आपके पास कोई कपडे हो तो रश्मि दे दीजिए थोड़ी देर में सूख जायेगे ये कपडे धुप में. कामिनी ने कहा आओ रश्मि कपडे बदल लो. रश्मि उठी और थोडा लड़खड़ाते हुए कामिनी के साथ अंदर चली गयी. रिशु बोला नशा तो हो गया साली को. मैंने कहा थोड़ी देर और देख ले एक दम टल्ली हो जायेगी. थोड़ी देर बाद रश्मि और कामिनी वापस आ गए अब रश्मि के सलवार सूट की जगह उसने एक टी शर्ट और शोर्ट स्कर्ट पहनी थी जो मैंने पहले ही रिशु से खरीदने को बोल दिया था और वो लाया भी बहुत सेक्सी ड्रेस था. रश्मि को पहली बार ऐसे कपड़ो में देख कर मेरा तो लन्ड खड़ा हो गया और रिशु का तो बुरा हाल था.

अब कामिनी खुद मेरे सोफे पर आ कर मेरे बगल में बैठ गयी तो रश्मि को रिशु के बगल में बैठना पड़ा. मेरे सामने वो बैठी थी और उसकी छोटी स्कर्ट से उसकी लाल पैंटी बाहर झांक रही थी. वोह रिशु को देख कर हसने लगी और बोली अरे तुमने अभी तक कपडे नहीं पहने. तो रिशु बोला कहो तो तुम्हारे भी उतार दूं. ये कह कर रिशु ने अपना हाथ उसकी चिकनी जांघ पर रख दिया। कुछ देर बाद रिशु उसकी भरी-भरी मासंल जांघ पर हाथ फिराने लगा। रश्मि इतने नशे में आ चुकी थी की उसे कुछ पता ही नहीं चल रहा था और उसने कोई विरोध नहीं किया फिर रिशु ने अपना हाथ उसकी लाल पैंटी के ऊपर उसकी फूली हुई चूत पर रख दिया। उसकी फूली हुई चूत रिशु की हथेली के गड्डे में सैट हो गई। फिर रिशु अपनी हथेली से उसकी फूली हुई को चूत हल्के-हलके से दबाने लगा। रश्मि उसी तरह से बैठी रही। रिशु की हिम्मत बढ़ती जा रही थी। रिशु उसकी पैन्टी के अन्दर हाथ डालने की कोशिश करने लगा। मगर उसकी स्कर्ट की वजह से पैन्टी के अन्दर हाथ घुस नहीं पा रहा था। रिशु ने सावधानी से उसकी स्कर्ट का हुक और साईड चेन खोल दी। फिर रिशु उसकी पैन्टी के अन्दर से हाथ डाल कर उसकी चूत के बालों पर हाथ फिराने लगा।रश्मि कुछ नहीं बोली और रिशु की हिम्मत लगातार बढ़ती जा रही थी।

अब मुझे भी जोश आ गया और मैंने कामिनी की जांघ पर हाथ रख दिया। वोह भी यह सीन देख कर मस्त हो चुकी थी। हम दोनों ने अपना प्रोग्राम चालू किया पर कामिनी बोली अभी नहीं, अभी तो ये नशे में है पर जब होश आयेगा तब, इसीलिए ये विडियो कैमरा लो और इसका विडियो बनाओ, इसे अभी दो बार और चुदना है रिशु से। तब मैंने कैमरा उठा कर रिकॉर्डिंग चालू की और उधर रिशु रश्मि की चूत के बालों में हाथ फिराते-फिराते अपनी उँगली रश्मि की चूत के फाँक के ऊपर फेरने लगा। फिर उंगलियों से रश्मि की चूत के फाँक को खोलने और बन्द करने लगा। कुछ देर बाद रिशु ने अपनी एक उँगली रश्मि की चूत के फाँक के अन्दर घुसा कर रश्मि की चूत के जी पॉयंट को हल्के-हल्के रगड़ने लगा।

उसकी पैन्टी की वजह से मुझे अपनी उँगली रश्मि की चूत के अन्दर डालने और रश्मि की चूत के जी-पॉयंट को रगड़ने में दिक्कत हो रही थी। इसलिये रिशु ने उसकी पैन्टी को धीरे-धीरे से नीचे खींच कर उसके घुटनों पर कर दी। फिर रिशु ने अपनी एक उँगली रश्मि की चूत के अन्दर घुसा उसकी चूत को हल्के-हल्के रगड़ने लगा। कुछ देर बाद रिशु ने उसकी पैन्टी भी उसकी टांगों से जुदा कर दी और सावधानी से उसकी दोनों टांगों को अलग कर दिया। अब रिशु उसकी चूत के घने बालों पर हाथ फिराने लगा। फिर रिशु ने अपना हाथ उसकी चूत पर रख दिया और ऊपर से ही रगड़ने लगा। फिर रिशु रश्मि की चूत की फांक पर हाथ फिराने लगा। फिर हाथ फिराते-फिराते रिशु ने अपनी उँगलियाँ रश्मि की चूत के अन्दर डाल दी। फिर उंगलियों को रश्मि की चूत के फाँको में डाल कर रगडने लगा और उसकी चूत के जी-पॉयंट को अपनी उंगलियों से दबाने और हल्के-हल्के रगड़ने लगा। लगभग 5-7 मिनट बाद रश्मि की चूत से कुछ बहुत चिकना सा निकलने लगा।

अचानक रश्मि के मुँह से सिसकियाँ निकलने लगी और उसने अपनी आँखें खोल दी और नशे में बोली, "रिशु क्या कर रहे हो?"

रिशु ने कहा "बस सोचा कि आज अपनी रश्मि को कुछ मजा कराया जाये। सच बताओ, क्या मजा नहीं आ रहा हैं? मुझे पता है तुम मजे ले रही थी। वरना तुम्हारे नीचे से चिकना-चिकना सा नहीं निकलता।"

रश्मि नशे में मुस्कुराईं और बोली," सच रिशु, मुझे नहीं पता तुम क्या कर रहे थे पर मज़ा आ रहा था।"

रिशु बोला,"रश्मि, मेरा साथ दो। हम दोनों मिलकर खूब मजा करेंगे।"

रश्मि बोली,"क्या साथ दूँ और क्या दोनों मिलकर मजा करेंगे। और मेरी पैंटी क्यो उतार रखी है और पैंटी के अन्दर क्या मजा ढूंढ रहे थे।"

रिशु ने कहा,"बताऊँ कि रश्मि तुम्हारी पैंटी के अन्दर क्या मजा ढूंढ रहा था।" कह कर रिशु ने उसे अपने सीने से चिपका लिया और फिर रिशु ने अपने जलते हुऐ होंठ रश्मि के होंठों पर रख दिए।

फिर रिशु उसके नरम-नरम होंठों को अपने होंठों में भर कर चूसने लगा। रश्मि ने भी नशे में उसे अपनी बाँहो में कस लिया। फिर रिशु रश्मि को किस करते-करते अपने हाथ को नीचे ले जाकर उसकी टी-शर्ट के उपर से उसके स्तनों को दबाने लगा। फिर कुछ देर बाद रिशु उसकी टी-शर्ट के गले के अन्दर से हाथ डाल कर उसके सख्त हो चुके वक्ष को दबाने लगा।

फिर रिशु उसकी टी-शर्ट को उतारने लगा तो रश्मि बोली,"रिशु, क्या करते हो।"

रिशु ने कहा,"चिंता मत करो।"

यह कह कर रिशु फिर उसकी टी-शर्ट को उतारने लगा। एक तो नशा उस पर रिशु ने इतना गरम कर दिया था तो अब रश्मि ने कोई विरोध नहीं किया। रिशु ने उसकी टी-शर्ट उतार कर सोफे पर फैंक दी और उसे गोद में उठा कर बेड पर ले गया। रश्मि के बड़े-बड़े और गोरे-गोरे स्तन सफेद ब्रा में फँसे हुए थे। रिशु उसकी ब्रा के ऊपर से उसके स्तनों को दबाने लगा। रश्मि ने अपनी आंखे बंद कर ली।

कुछ देर बाद रिशु उसकी ब्रा के हुक खोल कर उसकी नंगी पीठ पर हाथ फिराने लगा। फिर कुछ देर रिशु ने उसकी ब्रा भी उसके तन से जुदा कर दी और दोनों कबूतरों को आज़ाद कर दिया और उन्हें पकड़ कर मसलने लगा। रिशु उसके गोरे-गोरे सख्त स्तनों को दबाने लगा और साथ-साथ उसके भूरे चुचूकों को हल्के-हल्के मसलने लगा। फिर रिशु उसके नरम-नरम गोरे-गोरे स्तनों को अपने होंठों में भर कर चूसने लगा। रश्मि के मुँह से सिसकियाँ निकलने लगी। फिर रिशु ने उसकी खुली पड़ी स्कर्ट को भी उतार कर फैंक दिया। रश्मि का नंगा, गोरा और चिकना बदन रिशु के सामने था।

फिर रिशु ने रश्मि से अलग हो कर अपना टावेल भी उतार दिया और पूरी नंगा होकर रश्मि से लिपट गया और रिशु ने रश्मि को अपने साथ सटा कर लिटा लिया। उसका लण्ड तन कर रश्मि की चिकनी टांगों से टकरा रहा था। रिशु रश्मि की चिकनी टांगों पर हाथ फिराने लगा। उसकी पाव रोटी की तरह उभरी हुई उसकी चूत पर हाथ फेरने लगा। फिर कुछ देर तक उसकी चूत पर हाथ फेरने के बाद रिशु अपनी हथेली से उसकी चूत को दबाने लगा।

वो बहुत गरम हो चुकी और जोर-जोर से सिस्कारियां ले रही थी और रिशु के बालों पर हाथ फेर रही थी और अपने होंठ चूस रही थी। रिशु ने उसे धीरे से बिस्तर पर सीधा लिटा दिया और उसकी बगल में लेट कर रिशु रश्मि की चूत के कट पर हाथ फिराने लगा। फिर हाथ फिराते-फिराते रिशु ने अपनी उँगलियाँ रश्मि की चूत के अन्दर डाल दी। फिर उंगलियों से रश्मि की चूत के फाँको को खोलने और बन्द करने लगा। फिर रिशु रश्मि की चूत के जी पॉयंट को रगड़ने लगा। रश्मि के मुँह से सिसकियाँ निकलने लगी। रश्मि ने मस्त होकर अपनी आंखें बंद कर ली। कुछ देर बाद रश्मि की चूत से कुछ चिकना-चिकना सा निकलने लगा था।

रिशु का लण्ड रश्मि की जांघों से रगड़ खा रहा था। रिशु ने रश्मि का हाथ पकड़ कर अपने लण्ड पर रख दिया। रश्मि ने बिना झिझके रिशु का लण्ड अपने हाथ में थाम लिया। वो लण्ड को अपने हाथ में दबाने लगी। रिशु का लण्ड तन कर और भी सख्त हो गया था। रश्मि लण्ड को मुठ्ठी में भर कर आगे-पीछे करने लगी। फिर वो रिशु का लण्ड पकड़ कर जोर-जोर से हिलाने लगी।

अब रिशु रश्मि की चूत मारने को बेताब हो रहा था। रिशु रश्मि के ऊपर आकर लेट गया। रश्मि का नंगा जिस्म रिशु के नंगे जिस्म के नीचे दब गया। रिशु का लण्ड रश्मि की जांघों के बीच में रगड़ खा रहा था।
 
रिशु उसके उपर लेट कर उसके चुचूक को चूसने लगा। वो बस सिस्करियां ले रही थी। फिर रिशु एक हाथ नीचे ले जा कर उसकी चूत पर रख कर रगड़ने लगा और फिर एक उंगली उसकी चूत में डाल दी। वो मछली की तरह छटपटाने लगी और अपने हाथों से रिशु का लण्ड को टटोलने लगी। रिशु का लण्ड पूरे जोश में आ गया था और पूरा तरह खड़ा हो कर लोहे जैसा सख्त हो गया था।

रश्मि रिशु के कान के पास फुसफसा कर बोली,"ओह रिशु। प्लीज़ ! कुछ करो ना। रिशु के तन-बदन में आग सी लग रही हैं।"

ये सुन कर अब रिशु ने उसकी टांगें थोड़ी ओर चौड़ी की और उसके ऊपर चढ़ गया। फिर अपने लण्ड का सुपाड़ा उसकी चूत पर रख कर रगड़ने लगा। फिर रिशु ने अपने लण्ड का सुपाड़ा उसकी चूत पर टिका कर एक जोरदार धक्का मारा जिससे लण्ड का सुपाड़ा रश्मि की कुंवारी चूत को फाड़ता हुआ अन्दर चला गया। लण्ड के अन्दर जाते ही नशे में होने बावजूद रश्मि के मुँह से चीख निकल गई और वो अपने हाथ पाँव बैड पर पटकने लगी और रिशु को अपने ऊपर से धकेलने की कोशिश करने लगी। लेकिन रिशु ने उसे कस कर पकड़ा था।

वो रिशु के सामने गिड़गिड़ाने लगी, "प्लीज़ रिशु, मुझे छोड़ दीजिए, रिशु मर जाऊंगी, बहुत दर्द हो रहा है।

रिशु ने कहा "रश्मि तुम ही तो कह रही थी कि रिशु, प्लीज़ ! कुछ करो ना। तन-बदन में आग सी लग रही हैं। इसलिये तो तुम्हारे अन्दर डाला है। रश्मि तुम चिन्ता मत करो, पहली बार में ऐसा होता है, एक बार पूरा अन्दर जाने के बाद तुम्हें मज़ा ही मज़ा आएगा।"

रश्मि को गिडगिडाता देख कर कामिनी हसने लगी और बोली अरे पूरा डालो तब इसे असली मज़ा आयेगा. यह सुन कर रिशु ने एक और धक्का लगा कर उसकी चूत में अपना आधा लण्ड घुसा दिया। रश्मि तड़पने लगी। रिशु उसके ऊपर लेट कर उसके उरोज़ों को दबाने लगा और उसके होठों को अपने होठों से रगड़ने लगा। इससे रश्मि की तकलीफ़ कुछ कम हुई। अब रिशु ने एक जोरदार धक्के से अपना पूरा का पूरा लण्ड उसकी चूत के अन्दर कर दिया। रिशु का 8" लम्बा और ३" मोटा लण्ड उसके कौमार्य को चीरता हुआ उसकी कुँवारी चूत में समा गया।

इस पर वो चिल्लाने लगी "आहह्ह, मर गई। ओह प्लीज़ रिशु इसे बाहर निकालिये, रिशु मर जाउंगी।" उसकी चूत से खून टपकने लगा था।

रिशु रुक गया और रश्मि से बोला "प्लीज़ ! रश्मि, मेरी जान, अब और दर्द नहीं होगा।"

रश्मि का यह पहला सैक्सपिरियन्स था। इसलिऐ रिशु वही रुक गया और उसे प्यार से सहलाने लगा और उसके माथे को और आँखो को चूमने लगा । उसकी आंख से आंसू निकल आये थे और वो सिस्कारियां भरने लगी थी। यह देख कर रिशु ने रश्मि को अपनी बाँहो में भर लिया।

फिर रिशु ने अपने जलते हुऐ होंठ रश्मि के होंठों पर रख दिए और रिशु उसके नरम-नरम होंठों को अपने होंठों में भर कर चूसने लगा, ताकि वो अपना सारा दर्द भूल जाये। कुछ देर बाद उसका दर्द भी कम हो गया और उसने मुझे अपनी बाँहों में से कस लिया। रिशु ने भी रश्मि को अपनी बाँहों में भर लिया। रिशु का पूरा लण्ड रश्मि की चूत के अन्दर तक समाया हुआ था। फिर रिशु अपने होंठों से उसके नरम-नरम होंठों को चूसने लगा। कुछ देर तक दोनो ऐसे ही एक-दूसरे से चिपके रहे और एक-दूसरे के होंठों को चूसते रहे।

फिर रिशु अपने लण्ड को उसकी चूत में धीरे-धीरे अन्दर बाहर करने लगा। रश्मि ने कोई विरोध नहीं किया। अब शायद उसका दर्द भी खत्म होने लगा था और वो जोश में आ रही थी और अपनी कमर को भी हिलाने लगी थी। उसकी चूत में से थोडा सा खून बाहर आ रहा था जो इस बात का सबूत था कि उसकी चूत अभी तक कुंवारी थी और आज ही रिशु ने उसकी सील तोड़ी है।

उसकी चूत बहुत टाइट थी और रिशु का लण्ड बहुत मोटा था, इसलिए रश्मि को चोदने में बहुत मजा आ रहा था। रिशु अपने लण्ड को धीरे-धीरे से रश्मि की चूत के अन्दर-बाहर कर रहा था। फिर कुछ देर बाद रश्मि ने अपनी टांगें उपर की तरफ मोड़ ली और रिशु की कमर के दोनों तरफ लपेट ली। रिशु अपने लण्ड को लगातार धीरे-धीरे रश्मि की चूत के अन्दर-बाहर कर रहा था। धीरे-धीरे रिशु की रफ़्तार बढ़ने लगी। अब रिशु का लण्ड रश्मि की चूत में तेजी से अन्दर-बाहर हो रहा था। रिशु रश्मि की चूत में अपने लण्ड के तेज-तेज धक्के मारने लगा था।

थोड़ी देर में रश्मि भी नीचे से अपनी कमर उचका कर रिशु के धक्कों का ज़वाब देने लगी और मज़े में बोलने लगी " सी ... सी... और जोररर से....... येसस्स्स्स्सअरररऽऽ बहुत मज़ा आ रहा है और अन्दर डालो और रिशु और अन्दर येस्स्स्स्सऽऽ जोर से करो। प्लीज़ ! रिशु तेज-तेज करो ना। आज मुझे बहुत मज़ा आ रहा है।"

रश्मि को सचमुच में मजा आने लगा था। वो जोर जोर से अपने कूल्हे हिला रही थी और रिशु तेज़-तेज़ धक्के मार रहा था। वो रिशु के हर धक्के का स्वागत कर रही थी। उसने रिशु के कूल्हों को अपने हाथों में थाम लिया। जब रिशु लण्ड उसकी चूत के अन्दर घुसाता तो वो अपने कूल्हे पीछे खींच लेती। जब रिशु लण्ड उसकी चूत में से बाहर खींचता तो वो अपनी जांघें उपर उठा देती। रिशु तेज-तेज धक्के मार कर रश्मि को चोदने लगा। फिर रिशु बैड पर हाथ रख कर रश्मि के ऊपर झुक कर तेजी से उसकी चूत मारने लगा। अब रिशु का लण्ड रश्मि की चिकनी चूत में आसानी और तेजी से आ-जा रहा था। रश्मि भी अब चुदाई का भरपूर मजा ले रही थी। वो मदहोश हो रही थी।

रिशु ने रुक कर रश्मि से कहा, "रश्मि अच्छा लग रहा है ?"

रश्मि बोली,"हाँ रिशु बहुत अच्छा लग रहा है। प्लीज़ ! रुको मत। तेज-तेज करते रहो। हाँ प्लीज़ ! तेज-तेज करो। रिशु में डिस्चार्ज होने वाली हूँ। प्लीज़ ! चलो करो। अब रुको मत। तेज-तेज करते रहो।"

रश्मि के मुहँ से ये सुन कर रिशु ने फिर से रश्मि को चोदने शुरु कर दिया और अपनी रफ्तार को और बढ़ा दिया। रिशु ने रश्मि के बड़े-बड़े हिप्स को अपने हाथों से जकड़ लिया और छोटे-छोटे मगर तेज-तेज शॉट मार कर रश्मि को चोदने लगा। रश्मि के मुँह से मस्ती में "ओह्ह्ह्ह्ह्होहोहोह सिस्स्स्स्स्स्सह्ह्ह्ह्ह्ह्ह हाहाह्ह्हआआआआ हा-हा करो-करो ऽअआह हाहअआ प्लीज़ ! रिशु तेज-तेज करो।"

करीब 15 मिनट की चुदाई के बाद वो झड़ने वाली थी तभी दोनों एक साथ अकड़ गये और एक साथ जोर-जोर से धक्के मारने लगे। फिर अचानक रश्मि ने रिशु को कस कर अपनी बाँहो में भर लिया और बोली "रिशु रिशु का काम होने वाला है। प्लीज़ ! जोर-जोर से करो येस-येस अररर् और जोर से य...य...यस यससस रिशु हो गईईईईईईई...! इसके साथ ही रश्मि की चूत ने अपना पानी छोड़ दिया। उसने एक जोर से आह भरी और फिर वो ढीली पड़ गई।

रिशु समझ गया कि रश्मि डिस्चार्ज हो गई है। लेकिन रिशु का काम अभी नहीं हुआ था इसलिए रिशु जोर-जोर से अपने लण्ड से रश्मि की चूत को पेलने लगा। रिशु भी डिस्चार्ज होने वाला था, इसलिये रिशु तेज-तेज धक्के मारने लगा। रश्मि रोने सी लगी और रिशु के लण्ड को अपनी चूत में से बाहर निकालने के लिए बोलने लगी। लेकिन रिशु ने उसकी बातों को अनसुना कर धक्के लगाना जारी रखा।

करीब 2-3 मिनट तक रश्मि को तेज-तेज चोदने के बाद जब रिशु डिस्चार्ज होने लगा तो रिशु ने अपना लण्ड रश्मि की चूत से बाहर खींच लिया और उसकी चूत के झांटों उपर डिस्चार्ज हो गया और उसके ऊपर गिर गया। फिर रिशु उसके उपर लेट कर अपनी तेज-तेज चलती हुई सांसों को नार्मल होने का इन्तज़ार करता रहा। फिर रिशु रश्मि की बगल में लेट गया। रश्मि भी रिशु के साथ लेटी हुई अपनी सांसों को काबू में आने का इंतजार कर रही थी।

रश्मि की चूत के काले घने घुंघराले बालों में रिशु के वीर्य की सफेद बून्दे चमक रही थी। मैंने कैमरा ऑफ कर के रख दिया और कामिनी से कहा क्यों आंटी कैसा लगा शो. कामिनी बोली अरे रिशु तो पहले ही बार में इतनी देर टिका रहा कमाल है. मैंने कहा अरे इसको भी दवाई खिलाई थी अरे आखिर मेरी बेहेन की पहली चुदाई थी तो धमाकेदार तो होनी ही चाहिए थी. कामिनी बोली अब जब इसको होश आयेगा तब यह बवाल करेगी. मैंने कहा अभी तो यह नशे में सो गयी है. १ घंटे में इसको होश आयेगा तब तक मैं यहाँ से निकल जाऊँगा आप इसको दो दिन यही रखो और बोलो की किसी को कुछ बोला तो विडियो इन्टरनेट पर लोड कर देंगे. यह डर कर किसी को कुछ नहीं बोलेगी और अब इसको होश में चुदवाना. एक बार चुदाई की आदत हो जाये बस खुद ही दौड दौड कर आयेगी रिशु से चुदवाने. चलो अब इसको होश ए उससे पहले अपन एक राउंड खेल लेते है. फिर में कामिनी को चोद कर घर चला आया. रात को मैंने फोन पर कामिनी से पुछा की रश्मि के क्या हाल है तो कामिनी ने बताया की होश में आने के बाद रश्मि ने बहुत बवाल किया और जब उसको विडियो दिखा कर धमकाया तो वो शांत हुई और अब तो रिशु उसको तीसरी बार चोद रहा है और वो बहुत मज़े ले ले कर चुदवा रही है. मैंने कहा स्वामी जी ने तो एक हफ्ते का टाइम दिया था और रिशु ने तो एक दिन में ही तीन बार चोद डाला मेरी प्यारी दीदी को.

कामिनी हसने लगी और बोली अब रिशु की तबियत ठीक हो जाये बस. मैंने मन में कहा की ठीक तो हो ही जायेगा और अगले दिन सुबह पापा का फोन आया और उन्होंने बोला की वोह ४ दिन और वोही रहेंगे फिर मैं आराम से तैयार हो कर जब रिशु के घर पंहुचा तो कामिनी ने बताया की रिशु और रश्मि एक साथ नहा रहे हैं. मैंने रश्मि से कहा की घर नहीं चलना तो वोह बोली की मम्मी पापा तो परसों वापस आएंगे तब तक मैं यही रह जाती हूँ. यह सुन कर रिशु ने रश्मि को एक प्यारा सा किस किया और कामिनी बोली ये तो बन गयी पूरी चुदासी. मैंने झूठ बोल दिया की सुबह पापा का फोन आया था वो कल सुबह आ रहे हैं. ये सुन कर रश्मि थोडा उदास हो गयी तो मैंने कहा अच्छा चलो शाम तक करो खूब प्यार, आओ आंटी इनको प्यार करने दो हम आपके बेडरूम में चलते हैं. और मैं फिर से कामिनी को एक बार और छोड़ने चल पड़ा और उधर रिशु रश्मि को बाथटब में लिटा कर चोदने लगा. असल में मैंने सोचा की जब रश्मि रिशु से चुद ही गयी है तो क्यों न मैं भी उसको चोदू. ये सोच कर ही मैंने उसको झूठ बोला की पापा कल आ रहे है ताकि उसे घर ले जा कर मैं खूब चोदू और उसकी गांड भी मारूं.

शाम तक रिशु ने रश्मि की तबियत से चुदाई की और फिर मैं उसे ले कर घर वापस आ गया.
 
अब मैं ये सोच रहा था की कैसे रश्मि को चोदा जाये. क्योंकि हो सकता है की रिशु से एक बार चुदने के बाद से वोह उसके सामने खुल गयी हो पर जब से उसका नशा उतरा है मेरे सामने आने से पहले वो अपना बदन ढक ले रही थी. मैंने उसको बातों से गरम करने की सोची क्योंकि मैं रेप नहीं करना चाहता था अपनी प्यारी बेहेन का. मैंने उससे पुछा की कैसा लगा पहली बार सेक्स करके. वो बोली देखो भैया, सभी लड़कियों को शरीर की भूख होती है और सबको सेक्स करना बहुत अच्छा लगता है पर एक तो बदनामी का डर और कभी कोई अनुभव न होने से कोई भी लड़की शादी से पहले सेक्स करने से डरती हैं, मैं भी शादी से पहले ये काम नहीं करना चाहती थी पर जब तुमने नशा पिला कर जब मुझको चुदवा ही डाला तो पहले तो मुझे बहुत गुस्सा आया पर मेरा डर भी दूर हो गया और सच कहूँ जब पूरे होशो हवास में मैं चुदी तो लगा की जन्नत में पहुच गयी और लगा की मैं फालतू ही डरती थी और फिर तो लगा की बस रिशु मुझे चोदता ही जाये. मैंने कहा की बस रिशु ही या और किसी से भी चुदने का इरादा है. वो बोली बात तो वोही बदनामी की है और मेरा काम तो अब रिशु से हो ही जायेगा क्योंकि उसने बोला है की जब भी जरूरत हो बुला लेना मैं चोदने आ जाऊँगा. मैंने कहा की बदनामी का कोई डर न हो तो. वो बोली मतलब. मैंने कहा रश्मि जब से मैने कल से तुम्हे नंगा देखा मेरे बुरा हाल है और जब तक तुम मुझे नहीं मिल जाती मुझे चैन नहीं आयेगा. अचानक रश्मि भड़क गयी और बोली की अपनी सगी बेहेन को पहले तो अपने दोस्त से चुदवाया और अब खुद भी चोदना चाहता है बेहेन चोद. उसके मुह से गाली सुन कर मुझे बड़ा अजीब लगा क्योंकि हम सबको लगता था की ये बहुत शरीफ है और कुछ नहीं जानती. मैं साफ़ साफ़ बोला की देखो तुम्हारी अगर मर्ज़ी न हो तो कोई बात नहीं पर मम्मी पापा कल नहीं चार दिन बाद आएंगे और मैं तुम्हे झूठ बोल कर वापस इसिलए लाया था की तुम्हे चोद सकू. वो चिल्लाने लगी चोद सकू चोद सकू , अरे हाथ भी मत लगाना वरना देख लेना भोसड़ी के, अरे मैं वहा आराम से रिशु से चुद रही थी तब तो झूट बोल कर मुझे वापस ले आया और खुद चोदना चाहता है, गांड मार दूँगी अगर हाथ भी लगाया तो. मैंने सोचा के इस वक्त काम टेढ़ी ऊँगली से निकलना होगा.

मैंने कहा बस इतनी सी बात अभी मैं रिशु को यही ले आता हूँ और मैं रिशु को लेने चल पड़ा. रिशु के घर पहुच कर मैंने कामिनी से कहा की आज रात को रिशु मेरे घर पर ही रुकेगा और उसको ले कर वापस आ गया. रस्ते में रिशु बोला यार मोनू, रश्मि बहुत मस्त चीज़ है और मैं उससे शादी करना चाहता हूँ अभी मम्मी से मैं येही बात कर रहा था. कुछ चक्कर चलो और मेरे साले बन जाओ. मुझे पता था की रश्मि रिशु के लंड की दीवानी हो चुकी है पर मैं बोला की यार इसमें मेरा क्या फायदा, तुम्हे तो करारा माल मिलेगा जिंदगी भर चोदने के लिए और मुझे कुछ नहीं. वो बोला यार मम्मी को चुदवा दिया तुमसे और क्या चाहते हो. मैं बोला की मैंने भी तो रश्मि चुदवा दिया तुमसे, हिसाब बराबर.

रिशु: ऐसा मत बोल, तू मेरा दोस्त नहीं है. कुछ कर न यार.

मैं: देख कर तो सकता हूँ पर तू कुछ ऐसा कर की रश्मि मुझसे चुदवा ले बस एक बार.

रिशु: साले अपनी सगी बेहेन को चोदेगा. मैं उससे शादी करना चाहता हूँ और तू बोल रहा है की उसको तुझसे चुदवाऊ.

मैं: अबे जाने दे, मुझे अच्छी तरह से पता है की तू भी कामिनी आंटी चोदता है, जब तू अपनी सगी माँ को चोद सकता है तो मैं अपनी बेहेन को नहीं और सबसे बड़ा रिश्ता तो आदमी और औरत का होता है. बोल क्योंकि मेरे मनाये बिना मम्मी पापा नहीं मानेगे.

रिशु: चल यार, तू आखिर दोस्त है, आज ही ग्रुप सेक्स करते है रश्मि के साथ. चल एक बोतल वोदका ले ले.

मैं: हाँ खाना भी तो लेना है.

रिशु के कहने से मैंने सिर्फ नानवेज खाना लिया. खाना और वोदका खरीद कर हम जैसे ही घर पहुचे की रश्मि रिशु से लिपट गयी और पेंट के ऊपर से ही उसका लंड पकड़ कर हिलाने लगी. मैंने कहा अरे पहले खाने पीने का इंतज़ाम करो, इसके लिए तो पूरी रात पड़ी है. रश्मि बोली लाओ पैकेट मुझे दे दो मैं खाना लगाती हूँ. खाना देख कर रश्मि बोली की अरे तुम लोग सिर्फ नानवेज ले कर आये हो अब मैं क्या करूंगी. रिशु बोला मेरी जान पहले सिर्फ कबाब और ३ गिलास ले कर आओ. रश्मि कबाब और गिलास ले कर आई तो रिशु ने कहा ये सब टेबल पर रख दो और मेरी गोद में बैठ जाओ. मोनू तुम पेग बनाओ. रश्मि रिशु की गोद में बैठ गयी और रिशु उसकी चुचियो से खेलने लगा. मैंने ३ मोटे पेग बना दिए और रिशु ने एक पेग उठा कर रश्मि के मुह से लगा दिया. रश्मि बोली अरे मैं नहीं पीती पर रिशु ने एक ना सुनी और पूरा गिलास जबरदस्ती रश्मि के गले में उड़ेल दिया. रश्मि का गला बुरी तरह से जलने लगा पर रिशु ने कहा एक और पेग बनाओ इसके लिए. इस बार मैंने वोदका थोडा कम और कोल्ड ड्रिंक ज्यादा दाल कर पेग बनाया तो रश्मि धीरे धीरे पीने लगी तब तक रिशु ने एक कबाब का टुकड़ा उठाया और उसके मुह में डालने लगा, रश्मि ने कहा नहीं रिशु मैंने तुम्हारे कहने से शराब पी ली है पर ये नहीं खा सकती उलटी हो जायेगी, रिशु बोला मेरी जान एक बार टेस्ट तो करो. रश्मि ना ना करती रही और रिशु ने सिर्फ एक सिर्फ एक मेरे लिए करते करते उसके मुह में कबाब डाल ही दिया. बोनलेस होने की वजह से रश्मि को कुछ पता ही नही चला और वोह कबाब खा गयी. जैसा की हमारा प्लान था हमने रश्मि को ४ पेग पिला दिए और खुद सिर्फ दो ही पेग पिए थे और रश्मि का पहला पेग तो ३ पेग के बराबर था. अब रश्मि नशे में धुत हो चुकी थी और मज़े ले ले कर तंदूरी चिकन फाड रही थी. खा पी कर हम रश्मि को गोद में उठा कर बेडरूम में ले गए. तब तक तो नशे से बेहोश हो चुकी थी. रिशु बोला इतनी पि ली है इसने की कल सुबह तक नशा नहीं उतरेगा इसका, १/२ घंटा सोने दे इसे तब तक कोई ब्लू फिल्म लगा दो. १/२ घंटे में हम दोनों के लुंड कुतुबमीनार बन चुके थे. हमने तब जा कर रश्मि को जगाया. मैंने उसकी दोनों चूचियों को मसल दिया पर उस पर नशा बहुत था तो उसने कोई विरोध नहीं किया और फ़िर वहीं सोफ़े पर रश्मि के बिल्कुल सामने बैठ गया। रिशु ने रश्मि को अपने ऊपर खींच लिया और रश्मि को अपने पूरे बदन पर फ़ैला कर उसके होंठ चूसने शुरु कर दिये। रश्मि अब भी अपने दोनों टाँगों को सटाए हुइ थी, उन दोनों के सर मेरी ओर थे। रश्मि की छाती रिशु के सीने पे दबी हुई थी। रिशु अब रश्मि को वैसे ही चिपटाये हुए पलट गया और रश्मि अब उसके नीचे हो गई।वो अब उसके चुम्मे का जवाब देने लगी थी। रिशु २-३ मिनट के बाद हटा और फ़िर उसकी दाहिनी चूची को चूसने लगा। वह अपने एक हाथ से उसकी बाँई चूची को हल्के से मसल भी रहा था। रश्मि की आँखें बन्द थी और उसकी साँस गहरी हो चली थी। जल्द ही रश्मि अपने पैर को हल्के हल्के हिलाने, आपसे में रगड़ने लगी। उसकी चूत गीली होने लगी थी। जैसे ही उसने एक सिसकारी भरी, रिशु उसके ऊपर से पूरी तरह हट गया और मुझे उसके पैरों की तरफ़ जाने का इशारा किया। मैं अब रश्मि की सर की तरफ़ से हट कर उसके पैरों की तरफ़ हो गया।

रिशु अब उसकी चूत पर झुका। होठों के बीच उसकी झाँटों को ले कर दो-चार बार हलके से खींचा और फ़िर उसकी जाँघ खोल दी। उसकी चूत की फ़ाँक खुद के पानी से गीली हो कर चमक रही थी। रिशु अपने स्टाईल में जल्द ही चूत चूसने लगा और रश्मि के मुँह से आआअह आआअह ऊऊऊऊऊओह जैसी आवाज ही निकल रही थी।

रिशु चूसता रहा और रश्मि चरम सुख पा सिसक सिसक कर, काँप काँप कर हम लोगों को बता रही थी कि उसको आज पूरी मस्ती का मजा मिल रहा है।

जल्द ही वो निढ़ाल हो कर थोड़ा शान्त हो गई। तब रिशु ने उसको कहा कि अब वो उसके लण्ड को चूस कर उसको एक पानी झाड़े। रश्मि शान्त पड़ी रही, पर रिशु उसके बदन को हलके हलके सहला कर होश में लाया और फ़िर उसको लण्ड चूसने को कहा।

रश्मि एक प्यारी से अदा के साथ उठी और फ़िर रिशु के लण्ड को अपने मुँह में ले लिया। वो अब मुझसे बिना शर्म किए खूब मजे लेने के मूड में थी। कभी हाथ से वो मुठ मारती, कभी चूसती और जल्द ही रिशु का लण्ड फ़ुफ़कारने लगा, फ़िर झड़ भी गया।

पर रश्मि ने ना में सर हिला दिया, तब रिशु तुरंत उठा और सारा माल रश्मि की चूची पर निकाल दिया। झड़ने के बाद भी रिशु का लण्ड हल्का सा ही ढीला हुआ था, जिसको उसने अपने हथेली से पौंछ दिया और फ़िर रश्मि को कहा- अब इसको चूस कर फ़िर से तैयार कर !

जब रश्मि ने चूस कर उसका खड़ा कर दिया तब उसने रश्मि को नीचे लिटा दिया। फ़िर उसकी टाँगों को पेट की तरफ़ मोड़ दिया, खुद अपने फ़नफ़नाए लण्ड के साथ बिल्कुल उसकी खुली हुई बुर के पास घुटने पर बैठ गया। हल्के हल्के से लण्ड अब उसकी बुर के मुहाने पे दस्तक देने लगा था। रश्मि अपनी आँख बन्द करके अपने बुर के भीतर घुसने वाले लण्ड का इन्तजार कर रही थी। रिशु ने अपने लण्ड को अपने बाँए हाथ से उसकी बुर पर टिकाया और फ़िर उसको धीरे धीरे भीतर पेलने लगा। रश्मि के मुँह से सिसकारी निकल गई और जब लण्ड आधा भीतर घुस गया, तब रिशु ने अपने वजन को बैंलेन्स करके एक जोर का धक्का लगाया और पूरा ७" भीतर पेल दिया।

रश्मि हल्के से चीखी- उई ई ईईई ईईईए स्स्स्स्स् स माँ आआआह !

और रश्मि की चुदाई शुरु हो गई। जल्द ही वह भी अपनी बुर को रिशु के लण्ड के साथ "ताल से ताल मिला" के अन्दाज में हिला हिला कर मस्त आवाज निकाल निकाल कर चुद रही थी। साथ ही बोले जा रही थी- आह चोदो ! वाह, मजा आ रहा है, और चोदो, जोर से चोदो, लूटो मजा मेरी बुर का, मेरी चूत का, बहुत मजा आ रहा है, खूब चोदो ! खूब चोदो !

फ़िर जब रिशु ने चुदाई की रफ़्तार बढ़ाई, रश्मि के मुँह से गालियाँ भी निकलने लगी- आआह मादरचोद ! ऊऊ ऊ ऊओह बहनचोद ! साले चोद जोर से चोदो रे साले मादरचोद।

रिशु भी मस्त हो रहा था, यह सब सुन सुन कर मस्ती में चोदे जा रहा था और रश्मि की गाली का जवाब गाली से दे रहा था- ले चुद साली, बहुत फ़ड़क रही थी, देख आज कैसे बुर फ़ाड़ता हूँ। साली कुतिया, आज लण्ड से तेरी बच्चादानी हिला के चोद दूँगा। साली बेटी पैदा करके उसको भी तेरे सामने चोदूँगा इसी लण्ड से ! देखना तू !

दोनों एक दूसरे को खूब गन्दी गन्दी गाली दे रहे थे और चुदाई चालू थी।

थोड़ी देर बाद रिशु ने लण्ड बाहर निकाल लिया। तब रश्मि ने उसको लिटा दिया और उसके ऊपर चढ़ गई। वो अब ऊपर से उसके लण्ड पर कुद रही थी और मैं उसके सामने होकर देख रहा था कि कैसे लण्ड को उसकी बुर लील रही थी।

५ मिनट बाद रिशु फ़िर उठने लगा और फ़िर रश्मि को पलट कर उसको घुटनों और हाथों पर कर दिया फ़िर पीछे से उसकी बुर में पेल दिया, बोला- अब बन गई ना रश्मि तू कुतिया ! साली चुद और चुद साली ! यहाँ लण्ड खा गपागप गपागप गपागप। मादरचोद ! बोल रन्डी, बोल साली कुतिया.

और वो भी नशे में बोल पड़ी- रन्डी रन्डी, साले बहनचोद तुम लोगों ने मुझे रन्डी बना दिया।

रिशु अब एक बार फ़िर लण्ड बाहर निकाल लिया और फ़िर उसको सीधा लिटा दिया। ऊपर से एक बार फ़िर चुदाई शुरु कर दी।

और करीब ३० मिनट के बाद रश्मि एक बार फ़िर काँपने लगी, वो फ़िर एक बार झर रही थी। तभी रिशु भी झरा- एक जोर का आआआआह और फ़िर पिचकारी रश्मि की झाँट पे चोद दी। अब रिशु उठा और मुझे इशारा किया और अब मैं आगे बड़ा. रश्मि नशे में पड़ी हुई एकदम कच्ची कली जैसी, फ़कत कुँवारी, कोरी रसमलाई जैसी. मैंने सोचा अब देर करना ठीक नहीं क्योंकि इसका नशा अब थोडा कम तो होगा ही. मैंने अपने लंड को उसकी चूत के मुहाने पर रखा और उसकी कमर के नीचे एक हाथ डाला। उसके होंठों को अपने मुँह में भर लिया और फिर एक ही झटके में ३ इंच लंड अन्दर ठोंक दिया। रश्मि की घुटी-घुटी चीख निकल गई. कोई २-३ मिनट के बाद जब उसकी चूत कुछ आराम में आई तब मैंने हौले-हौले धक्के लगाने शुरु किए पर अभी लंड पूरा नहीं घुसाया। आखिर वो मेरी सगी बेहेन थी मैं उसे खूब मजे दे कर चोदना चाहता था. मैंने उसके नितम्बों पर हाथ फेरना चालू रखा।

उसकी गाँड के छेद से जैसे ही मेरी उँगलियाँ टकराईं तो मैं तो रोमांच से भर उठा. बालों की कंघी के दाँत जैसी गाँड की तीख़ी नोकदार सिलवटों वाला छेद। आहहहह… क्या मस्त क़यामत है साली की गाँड की छेद. कुँवारी गाँड की पहचान तो उसके उभरे हुए सिलवटों से होती है। मुझे तो इस गाँड के छेद में अपना रस भर कर स्वर्ग के इस दूसरे दरवाज़े का लुत्फ हर क़ीमत पर उठाना ही है। पर पहले तो चूत चोदनी है, गाँड की बात बाद में. मैंने रिशु से उसकी गांड के नीचे एक तकिया लगाने को कहा और अपना एक हाथ उसकी पतली कमर के नीचे डाल कर पकड़ लिया। अपने होंठ उसके होंठों पर रख करक उन्हें चूमा और फिर दोनों होंठ अपने मुँह में भर लिए। वो फिर से पूरी गरम और मस्त हो चुकी थी। उसने तो अब नीचे से हल्के-हल्के धक्के भी लगाने शुरु कर दिए थे। मैंने अपना लंड थोड़ा सा बाहर निकाला और एक ज़ोरदार धक्का लगा दिया। धक्का इतना ज़बर्दस्त था कि गच्च से जड़ तक उसकी चूत में समा गया। मेरा लंड रिशु से बड़ा था, रश्मि दर्द के मारे छटपटाने लगी। उसने मेरी पीठ पर अपने नाखून इतने ज़ोर से गड़ाए कि मेरी पीठ पर भी ख़ून छलक आया. रश्मि ज़ोर से चीख़ी “ओईईईईई… माँ…. मर… गईईईईईईईई…” और उसकी आँखों से आँसू निकलने लगे।

मैंने उससे कहा “बस मेरी जान” मैंने उसके नमकीन स्वाद वाले आँसूओं पर अपनी जीभ रख दी। “मोनू मुझे मार ही डाला… ओओईईईईई… निकाल बाहर.. मैं मर जाऊँगी… उईईईईई माँआआआआ….” वो रोए जा रही थी। मैं जानता ता ये दर्द ३-४ मिनट का है बाद में तो बस मज़े ही मज़े। मेरा लंड तो जैसे निहाल ही हो गया। इतनी कसी हुई चूत कहा मिलेगी फिर इसीलिए रिशु शादी करना चाहता है इससे. कोई ५ मिनट के बाद रश्मि कुछ संयत हुई। उसकी चूत ने भी फिर से रस छोड़ना चालू कर दिया। मैंने उसकी कपोलों, होंठों और माथे पर चुम्बन लेने शुरु कर दिए। और अपने धक्को की स्पीड बड़ा दी फिर मैंने उससे पूछा “क्यों मेरी रंडी, कैसा है तेर भाई का लंड?” तो वह नशे में बोली “मोनू तुने तो मेरी जान ही निकाल दी, ओईईई… आआहह… या… ओह अब रूको मत ऐसे ही धक्के लगाओ… आहहह… या.. ओई… मैं तो गईईईईईईई….” और उसके साथ ही वो एक बार फिर झड़ गई। मैं तो जैसे स्वर्ग में था। मैंने लगातार ८-१० धक्के और लगा दिए। अब तो उसकी चूत से फच्च-फच्च का मधुर संगीत बजने लगा था।

ये सिलसिला कोई २० मिनट तो ज़रूर चला होगा। मेरा लंड बेचारा कब तक लड़ता। मैंने दनादन ५-७ धक्के और लगा दिए। रश्मि भी फिर से झड़ने के कगार पर ही तो थी। और फिर… एक.. दो… तीन चार… पाँछ.. पता नहीं कितनी पिचकारियाँ मेरे लंड ने छोड़ दीं… रश्मि ने मुझे कस कर पकड़ लिया और उसकी चूत ने भी काम-रज छोड़ दिया। उसकी बाँहों में लिपटा मैं कोई १० मिनट उसके ऊपर ही पड़ा रहा। १० मिनट के बाद रश्मि जैसे नींद से जागी। मैं उठ कर बैठ गया। रश्मि भी मेरी ओर सरक आई। उसने मेरे होंठों पर दो-तीन चुम्बन ले लिए। मैंने उस से थैंक यू कहा तो उसने कहा “आखिर चोद हो डाला अपनी बेहेन को तुने कुत्ते…” मैंने रिशु की तरफ देखा वो तो सोफे पर ह सो गया था तब मैं रश्मि को गोद में उठा कर बाथरूम की ओर ले जाने लगा। उसने अपनी बाँहें मेरे गले में डाल दी और आँखें बन्द कर लीं। मैंने देखा पूरा तकिया मेरे वीर्य और काम-रज़ से भीगा हुआ था. रश्मि पॉट पर बैठकर पेशाब करने लगी। आहहहह… फिच्च… स्स्स्सीईईई… का वो सिसकारा और मूत की पतली धार तो कयामत ही थी। मैं तो मन्त्र-मुग्ध सा बस उस नज़ारे को देखता ही रह गया। पॉट पर बैठी रश्मि की चूत ऐसी लग रही थी जैसे एक छोटा करेला किसी ने छील कर बीच में से चीर दिया हो। रिशु और मेरी जबरदस्त चुदाई से उसकी चूत के होंठ सूजकर पकौड़े जैसे हो गए थे। बिल्कुल लाल गुलाबी। उसकी गाँड का भूरा और कत्थई रंग का छोटा सा छेद खुल और बन्द हो रहा था। मैंने उससे कहा “एक मिनट रूको, मूतना बन्द करो और उठो… प्लीज़ जल्दी”

“क्या हुआ?” रश्मि ने मूतना बन्द कर दिया और घबरा कर बीच में ही खड़ी हो गई। मैंने उसे अपनी ओर खींचा। मैं घुटनों के बल बैठ गया और उसकी चूत को दोनों हाथों से खोल करक उसकी मदन-मणि के दाने को चूसने लगा। वो तो आहहह… उहह्हह करती ही रह गई। उसने कहा “ओह… क्या कर रहे हो भैया ओफ्फ्फ.. इसे साफ तो करने दो। ओह गन्दे ओईईईई.. माँ…”

“अरे प्यार में कुछ गन्दा नहीं होता” मैंने कहा। और फिर उसके किशमिश के दाने को चूसने लगा।

रश्मि कितनी देर तक बर्दाश्त करती। उसकी चूत के मूत्र-छिद्र से हल्की सी पेशाब की धार फिर चालू हो गई जो मेरी ठोड़ी से होती हुई गले के नीचे गिर सीने से होती मेरे लंड को जैसे धोती जा रही थी। उसने मेरे सिर के बाल पकड़ लिए कसकर। मैं तो मस्त हो गया। जब उसका पेशाब बन्द हुआ तो उसने नीचे झुक कर मेरे होंठ चूम लिए और अपने होठों पर जीभ फिराने लगी। उसे भी अपनी मूत का थोड़ा सा नमकीन स्वाद ज़रूर मिल ही गया। हम साफ़-सफाई के बाद फिर बिस्तर पर आ गए।

“रश्मि एक बताना तो मैं भूल ही गया” मैंने कहा।

“ऊँहह… अब कुछ मत बोलो बस मुझे प्यार करने दो अपने मोनू को।” उसने फिर मेरे होठों को चूम लिया।

मैंने उससे कहा “मेरी बहना मैं एक बार तुम्हारी चूत को चूसना चाहता हूँ।” उसका नशा कम भले ही हो गया था पर पूरी तरह नहीं उतरा था इसीलिए कोई ऐतराज़ नहीं हो सकता था। मैं लेट गया और उसके पैर अपने सिर के दोनों ओर कर दिए जिससे उसकी चूत मेरे मुँह के ठीक ऊपर आ गई। हम दोनों अब 69 की मुद्रा में थे। रश्मि मेरे ऊपर जो थी। मेरा लंड ठीक उसके मुँह के सामने था। मैंने झट से चूत की पंखुड़ियों को चौड़ा किया और गप्प से अपनी जीभ उस गुलाबी खाई में उतार दी। उत्तेजना में उसका शरीर काँपने लगा। मैंने उसकी चूत को ज़ोर-ज़ोर से चूसना चालू कर दिया, अब उसके पास मेरे लंड को चूसने के अलावा क्या रास्ता बचा था। उसने पहले मेरे लंड के सुपाड़े को चूमा और उसपर आए वीर्य की कुछ बूँदों चखा और फिर गप्प से उसे मुँह में भर कर चूसने लगी। मेरा लंड मेरी बेहेन के मुह में जा कर तो निहाल ही हो गया। मैंने अपनी जीभ उसकी गाँड के भूरे छेद पर भी फिरानी चालू कर दी। मैंने ४-५ बार अपनी जीभ उसकी गाँड पर फिराई तो वो एक किलकारी मारते हुए फिर झड़ गई। मैं अपना वीर्य उसके मुँह में अभी नहीं छोड़ना चाहता था। मुझे तो पहले उसकी गाँड का उदघाटन करना था। और फिर जैसा मैंने सोचा था वही हुआ।

रश्मि ज़ोर-ज़ोर की साँसे लेती हुई एक ओर लुढ़क गई। उसके उरोज साँसों के साथ ऊपर-नीचे हो रहे थे। आँखें बन्द थीं। अचानक वह उठी और मेरे ऊपर आ कर मुझे कस कर अपनी बाँहों में जकड़ लिया। मैंने अपनी ऊँगली उसकी गाँड की छेद पर फिरानी शुरु कर दी। उफ्फ… क्या खुरदरा एहसास था। वो तो बस आँखें बन्द किए मुझसे चिपकी पड़ी थी। मैंने हौले से उसके होंठों पर एक चुम्मा लिया और कहा “मेरी जान, मेरी बहना क्या हुआ?”

“बस अब कुछ मत बोलो, एक बार मुझे फिर से…” और उसने मुझे चूम लिया।

“रश्मि एक और मज़ा लोगी जो अभी रिशु ने नहीं दिया?”

“क्या मतलब… वो… वो.. ओह… नो… नहीं…” वो तो ऐसे बिदकी जैसे किसी काली छतरी को देख कर भैंस बिदकती है “ओह भैया तुम्हारा दिमाग तो ठीक है ना… क्या बात कर रहे हो?”

“अरे मेरी रश्मि रानी औरत के तीन छेद होते हैं और तीनों में ही चुदाई की जाती है। चुदाई का असली आनन्द तो इस द्वार में ही है। एक बार मज़ा लेकर ते देखो, फिर तो रोज़ यही कहोगी कि पिछले छेद में ही डालो।”

“पर वो… वो.. इतना मोटा मेरे छोटे से छेद में… ओह नो… मुझे डर लगता है।” वो कुछ सोच नहीं पा रही थी। “नहीं मुझे बहुत डर लग रहा है। सुना है इसमें करने पर बहुत दर्द होता है।”

“अच्छा चलो तुम्हें दर्द होगा तो नहीं करेंगे। एक बार करने में क्या हर्ज़ है?”

“पर वो… वो ज़्यादा दर्द तो नहीं होगा ना कहीं…?” वो कुछ हिचकिचा रही थी।

मैंने उसे करवट लेकर सो जाने को कहा। वो बाईं करवट के बल लेट गई औऱ अपनी दाईं टाँग को सिकोड़ कर अपने सीने की ओर कर लिया। अब मैं घुटने मोड़कर उसकी बाईं जाँघ पर बैठ गया। ताकि जब मैं उसकी गाँड में लंड डालूँगा तो वह आगे की ओर नहीं खिसक पाएगी। अब मैंने बोरोलीन की ट्यूब निकाली और टोपी खोल कर उसका मुँह उसकी गाँड की सुनहरी छेद पर लगा कर थोड़ा सा अन्दर किया। पहले से थोड़ी बोरोलीन लगी होने से ट्यूब की नॉब अन्दर चली गई। अब मैंने उस ट्यूब को ज़ोर से भींच दिया। “उईईईई… भैयाऊऊऊ गुदगुदी हो रही है” रश्मि नशे में चिहुँकी। वो आगे को सरक ही नहीं सकती थी। मैंने आधी से ज़्यादा ट्यूब उसकी गाँड में खाली कर दी। अब धीरे-धीरे मैंने उसकी गाँड के छेद पर मालिश करनी शुरु कर दी। बोरोलीन अन्दर पिघलने लगी थी। और मेरी उँगली उसकी गाँड की कसी हुई छेद के बावज़ूद भी आराम से अन्दर जाने लगी थी, प्यार से धीरे-धीरे। रश्मि आआआहहह… उउउऊऊऊहहहह करने लगी। कोई ४-५ मिनट की घिसाई और उँगलीबाज़ी से उसकी गाँड तैयार हो गई थी। “ओह… भैया अब डाल दो”

शाबास मेरी रश्मि यही तो मैं चाहता था। अब मैंने वैसलीन की डिब्बी उठाई और लगभग आधी शीशी क्रीम अपने लंड पर लगा दी। मैंने सुपाड़े को उसकी गाँड पर लगा दिया। आह… क्या मस्त छेद था। दो गोल पहाड़ियों के बीच एक छोटी सी गुफ़ा जिसका दरवाज़ा कभी बन्द कभी खुल रहा था। रश्मि आआहहहह… उँहहहह… ओह… उउउऊऊईई.. किए जा रही थी। मैंने एक उँगली उसकी चूत में डाल कर अन्दर-बाहर करनी शुरु कर दी औऱ एक हाथ से उसकी घुण्डियाँ मसलनी शुरु कर दी। उसका एक बार और झड़ना ज़रूरी था ताकि गाँड के छेद को पार करवाने में उसे कम से कम दर्द हो। ३-४ मिनट की उँगलीबाज़ी और चुचियों को मसलने से वह उत्तेजित हो गई। उसका शरीर थोड़ा सा अकड़ने लगा और वो ऊईईई.. माँ.आआ…. ओओओहहह ययाआआआआ… करने लगी। उसकी चूत ने पानी छोड़ दिया। मैंने अपनी उँगली निकाली और अपने मुँह में डाल कर एक चटकारा लिया। फिर मैंने दुबारा उँगली उसकी चूत में डाली और उसे भी चूत-रस चटाया। रश्मि तो मस्त ही हो गई। उसकी गाँड का छेद जल्दी-जल्दी खुलने और बन्द होने लगा था। यही समय था जन्नत के दूसरे द्वार को पार करने का। जैसी उसकी गाँड खुलती मेरा सुपाड़ा थोड़ा सा अन्दर सरक जाता। अब तक उसकी गाँड का छेद ५ रुपए के सिक्के जितना खुल चुका था और लगभग पौना इंच सुपाड़ा अन्दर जा चुका था, सफलतापूर्वक बिना किसी दर्द के। मैंने उसकी कमर को पकड़ा और ज़ोर का दबाव डालना चालू किया। गाँड अन्दर से चिकनी थी और रश्मि मस्त थी। गच्च से ३ इंच लण्ड घुस गया और इससे पहले कि रश्मि की चीख हवा में गूँजे मैंने उसका मुँह अपने दाएँ हाथ से ढँक दिया। वो थोड़ा सा कसमसाई और गूँ-गूँ करने लगी। मैं शान्त रहा। मेरा ३ इंच लण्ड अन्दर जा चुका था। अब फिसल कर बाहर नहीं आ सकता था। मुझे डर था कि रिशु ने जा इसकी चूत मारी थी तब काफी खून निकला था उसी तरह गाँड से भी ख़ून ना निकल जाए। लेकिन बोरोलीन और वैसलीन की चिकनाई की वज़ह से उसकी गाँड फटने से बच गई थी। इसका एक कारण और भी था मैंने लण्ड अन्दर डालते समय केवल दबाव ही दिया था धक्का नहीं मारा था।

२-३ मिनट आह… ऊहह… करने के बाद वह शान्त हो गई। मैंने अपना हाथ हटा लिया तो वह बोली “मुझे तो मार ही डाला”

“अरे मेरी बहना अब देखना तुम अपने मुँह से कहोगी और ज़ोर से ठोंको और ज़ोर से” तब तक रिशु भी जग गया था और उसके मम्मो से खेलने आ गया था.

अब धीरे-धीरे धक्के लगाने का समय आ गया था। मैंने अपना लण्ड अन्दर-बाहर करना शुरु कर दिया। रश्मि ने अपने गाँड का छेद सिकोड़ने की कोशिश की तो मैंने उसे समझाया कि वो कतई ऐसा न करे। मैंने उसे बताया कि अगर उसने गाँड को सिकोड़ तो अन्दर लंड और सुपाड़ा दोनों फूल जाएँगे और उसे अधिक तक़लीफ होगी। मैंने अपना लंड जड़ तक अन्दर कर दिया. रश्मि तो मस्त हो गई। वो तो बस उईई… माँ…. ही करती जा रही थी, मीठी सी सीत्कार। मैं अपना लण्ड अन्दर-बाहर ही करता जा रहा था। रश्मि अब पेट के बल हो गई थी, उसने अपने दोनों पैर चौड़े कर दिए और चूतड़ ऊपर उठा दिए। मेरा लंड उसकी गाँड में कस गया पर चिकनाई के कारण अन्दर-बाहर होने में कोई दिक्क़त नहीं थी। हर धक्के के साथ रश्मि की सीत्कार निकल जाती और वह अपने चूतड़ और ऊपर कर लेती. साली पहली गाँड चुदाई में ही इतनी मस्त हो गई, मैंने तो सपने में भी नहीं सोचा था कि इतनी ज़बर्दस्त गाँड होगी। ऐसा नहीं था कि मैं बस धक्के ही लगा रहा था, मैं तो उसकी चूत में भी उँगली कर रहा था, कभी उसकी पीठ चूमता, कभी उसके कान काटता। वो तकिए से सिर लगाए आराम से अपना चूतड़ ऊपर-नीचे करती हुई ओओईईई… आआआहहह… ययाआआआ… कर रही थी। कोई २०-२५ मिनट की गाँड चुदाई के बाद मुझे लगा कि अब मंज़िल नज़दीक आने वाली है तो मैंने रश्मि से कहा “मेरी बहना, अब मैं आने वाला हूँ”

रश्मि हँसने लगी “अभी नहीं, एक बार मुझे कुतिया बनाकर भी करो।”

और फिर वो अपने घुटनों के बल हो गई। मैं समझ गया साली ब्लू-फिल्म की तरह चुदवाना चाहती है। मैंने उसकी कमर पकड़ी और लंड अन्दर डाल कर धक्के लगाने शुरु कर दिए। उसकी गाँड का छल्ला ऐसे लग रहा था जैसे किसी बच्ची के हाथ में पहनने वाली लाल रंग की चूड़ी हो या एक पतली सी गोल लाल रंग की ट्यूब-लाईट हो जो जल और बुझ रही हो। उसकी गाँड का छल्ला ऐसे ही अन्दर-बाहर हो रहा था। उसने अपना सिर तकिए से लगा लिया और मेरे आँडों को ज़ोर से अपनी मुट्ठी में लेकर दबाने लगी। मेरे ८-१० धक्कों और चूत में उँगलीबाज़ी करने के कारण रश्मि की चूत ने पानी छोड़ दिया और उसने एक मीठी सी सीत्कार लेकर अपनी गाँड सिकोड़ी। इसके साथ ही मेरे लंड ने भी ७-८ पिचकारियाँ उसकी गाँड में छोड़ दीं। उसकी गाँड मेरे गरम और गाढ़े वीर्य से लबालब भर गई। जैसे-जैसे मेरे धक्कों की रफ़्तार कम होती गई वो नीचे होती गई और फिर मैं उसके ऊपर लेटता चला गया। मैंने उसे बाँहों में भर रखा था। उसके दोनों उरोज मेरे हाथों में थे।

कोई १० मिनट तक आँखें बन्द किए हम लोग ऐसे ही पड़े रहे और रिशु उसके मम्मे दबाता रहा। फिर रश्मि उठ खड़ी हुई। वो लंगड़ाती सी बाथरूम की ओर जाने लगी तो रिशु ने उसका हाथ पकड़ कर फिर अपनी गोद में बैठा लिया। “ओह सारा पानी मेरी जाँघों पर फैलता जा रहा है, मुझे गुदगुदी हो रही है.. ओह… छोड़ो साफ़ तो करने दो।”

पर रिशु ने उसे नहीं जाने दिया। मैंने तकिए के नीचे से नैपकीन निकाली और रश्मि की रिसती हुई गाँड को साफ कर दिया। उसकी गाँड का छेद अब बिल्कुल लाल होकर ५ रुपए के सिक्के जितना छोटा हो गया था। मैंने उसके होंठों का एक चुम्बन ले लिया। “थैंक यू मेरी बहना”

“ओह… थैंक यू मेरे मोनू” उसने भी मुझे चूम लिया। वो बिस्तर पर उँकड़ू बैठी अपनी चूत और गाँड के छेदों को देख रही थी। उसने कहा, “देखो मेरी चूत और उसकी सौतन का क्या हाल कर दिया है तुम दोनों ने”

उसकी चूत सूज कर लाल हो गई थी और गाँड का रंग भी भूरे से लाल हो गया ता। उसकी चूत तो ऐसे लग रही थी जैसे किसी ने छोटी सी परवल को बीच में से चीर कर चौड़ा कर दिया हो। रिशु बोला अरे मैंने तो सिर्फ चूत चोदी थी तुम्हारा गांड का बाजा तो तुम्हारे भाई ने बजाया है. अब एक बार ज़रा हमे भी तो ये दूसरी जन्नत दिखाओ. यह बोल कर रिशु ने अपना खड़ा हुआ लंड रश्मि की गांड में डाल दिया पर अब रश्मि को कोई तकलीफ नहीं हुई. उन ४ दिनों में हमने रश्मि को कई बार चोदा और उसकी खूब गांड मारी. फिर मम्मी और पापा आ गए और मैंने उन्हें बोला की रश्मि और रिशु एक दुसरे से प्यार करते है और शादी करना चाहते है. मेरे मम्मी पापा बहुत नाराज़ हुए पर जब मैंने उनको डराया की रिशु के पास कुछ ऐसे फोटो है जिनसे रश्मि की बहुत बदनामी हो सकती है और कहीं भी उसकी शादी नहीं होगी तब वो तैयार हो गए और २ साल बाद रश्मि और रिशु की शादी हो गयी. पर हमारे रिश्ते आज भी वैसे ही हैं और मैं आज भी कामिनी और रश्मि को चोदता हूँ.
 
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