मैंने चैन की साँस ली। मैंने तो सोचा था की देवर घोड़े बेचकरके सोता है और कमरे में अंधेरा करके ही मैं ये काम करती थी। पति के मूंगफली जैसे नूनी से थोड़ी फुद्दी की खुजली मिटती है। और वो भी सट दिन में एक बार... मैंने कई दिन पहले से ये प्लान सोचकर देवर के मन में ये बात गहरी बैठा दी थी की रात को एक साया आता है तो लाइट नहीं जलानी चाहिए... चिल्लाना नहीं चाहिए... वरना वो साया तुमरी जान भी ले सकता है। और फिर मैंने उसके कमरे में अंधेरा करके मौके का फायदा उठाना चालू किया था। और आज... आज मैं पकड़ी ही जाती।
मैंने अपनी पीठ खुद थपथपाई- वाह... चम्पारानी, मन गए तुमको... क्या कशम खाई है की देवर को भी बिश्वास हो गया की वो साया तुम नहीं थी। वो दूसरी दुनियां से आई कोई परीजात थी। वाह... मन गये तेरे दिमाग को।
देवर- तो भाभीजी, आपने मुझे माफ कर दिया ना?
मैं (चम्पारानी)- एक ही शर्त पर माफी मिल सकती है।
देवर- मुझे आपकी हर शर्त मंजूर है। बोलिए?
मैं- चलिए आप मुझे अपना सारा सामान दिखाईए और मेरा सब सामान आप देख लीजिए।
देवर- बस... इतनी से बात। चलिए, फिर मेरे कमरे में चलिए, आपको मेरा सब सामान दिखा देता हूँ।
मैं- अरे बुद्धू... कमरे का सामान नहीं... अपना सामान।
देवर- मेरा सामान? मतलब क्या है आपका?
मैं- इतने भी बुद्धू ना बनो मेरे देवरजी। वही सामान जो रविवार को छोड़कर हर रात को कोई परीजात आकर आपका सहलाती है और फिर चूसती भी है।
देवर- छीः छीः भाभी, आप मेरी नूनी देखेंगी। आपको शर्म नहीं आएगी?
मैं- शर्म कैसी देवरजी? अगर वो पराई परीजात आपके लण्ड को सहला सकती है, चूस सकती है तो फिर मैं क्यों नहीं।
देवर- पर... उस समय तो अंधेरा रहता है।
मैं- अरे, वो दूसरी दुनियां की परीजात है, उसे अंधेरे में दिखता होगा। पर मैं थोड़े ही परीजात हूँ। मुझे तो उजाले में ही दिखाई देगा ना।
देवर- ठीक है भाभीजी... पर मैं भी आपका सामान देखना चाहता हूँ।
मैं- पर देवरजी... मेरे पास तो आपके जैसे नूनी याने की लण्ड नहीं है, उसकी जगह एक छेद है।
देवर- आप भी ना... भाभीजी, मुझे शर्मिंदा किए जा रही हैं।
मैं- चलो ठीक है। मैं अपने कमरे में हूँ। जब आपको आवाज दें तभी आना।
देवर- क्यों भाभीजी? मुझसे शर्म आ रही है?
मैं- नहीं... नहीं... अच्छा चलो साथ में ही चलते हैं, पर जरा मेन-गेट को तो बंद कर दो। कहीं हम एक-दूसरे का सामान देख रहे हों और बाहर से कोई पड़ोसी टपक गया तो बड़ी बदनामी होगी।
देवर- “हाँ भाभी, मैं अभी मेन-गेट बंद करके आता हूँ..” और उसने मेन-गेट को ठीक से बंद किया और मेरे बेडरूम में आ गया।
मैं- चलो देवरजी, अपना खोलो।
देवर- क्या बात करती हैं भाभीजी? मेरी नूनी में कोई नट बोल्ट थोड़ी लगा रखा है की खोल के दिखाऊँ। आपको मेरे पास आकर ही देखना पड़ेगा।
मैं- अरे देवरजी, मैं नूनी खोलने की बात नहीं कर रही हूँ... कपड़े खोलने की बात कर रही हैं। हाँ नहीं तो।
देवर- अच्छा... अच्छा तो ये लो। उसने सबसे पहले अपनी कमीज उतारी।