अब मैं ये सोच रहा था की कैसे रश्मि को चोदा जाये. क्योंकि हो सकता है की रिशु से एक बार चुदने के बाद से वोह उसके सामने खुल गयी हो पर जब से उसका नशा उतरा है मेरे सामने आने से पहले वो अपना बदन ढक ले रही थी. मैंने उसको बातों से गरम करने की सोची क्योंकि मैं रेप नहीं करना चाहता था अपनी प्यारी बेहेन का. मैंने उससे पुछा की कैसा लगा पहली बार सेक्स करके. वो बोली देखो भैया, सभी लड़कियों को शरीर की भूख होती है और सबको सेक्स करना बहुत अच्छा लगता है पर एक तो बदनामी का डर और कभी कोई अनुभव न होने से कोई भी लड़की शादी से पहले सेक्स करने से डरती हैं, मैं भी शादी से पहले ये काम नहीं करना चाहती थी पर जब तुमने नशा पिला कर जब मुझको चुदवा ही डाला तो पहले तो मुझे बहुत गुस्सा आया पर मेरा डर भी दूर हो गया और सच कहूँ जब पूरे होशो हवास में मैं चुदी तो लगा की जन्नत में पहुच गयी और लगा की मैं फालतू ही डरती थी और फिर तो लगा की बस रिशु मुझे चोदता ही जाये. मैंने कहा की बस रिशु ही या और किसी से भी चुदने का इरादा है. वो बोली बात तो वोही बदनामी की है और मेरा काम तो अब रिशु से हो ही जायेगा क्योंकि उसने बोला है की जब भी जरूरत हो बुला लेना मैं चोदने आ जाऊँगा. मैंने कहा की बदनामी का कोई डर न हो तो. वो बोली मतलब. मैंने कहा रश्मि जब से मैने कल से तुम्हे नंगा देखा मेरे बुरा हाल है और जब तक तुम मुझे नहीं मिल जाती मुझे चैन नहीं आयेगा. अचानक रश्मि भड़क गयी और बोली की अपनी सगी बेहेन को पहले तो अपने दोस्त से चुदवाया और अब खुद भी चोदना चाहता है बेहेन चोद. उसके मुह से गाली सुन कर मुझे बड़ा अजीब लगा क्योंकि हम सबको लगता था की ये बहुत शरीफ है और कुछ नहीं जानती. मैं साफ़ साफ़ बोला की देखो तुम्हारी अगर मर्ज़ी न हो तो कोई बात नहीं पर मम्मी पापा कल नहीं चार दिन बाद आएंगे और मैं तुम्हे झूठ बोल कर वापस इसिलए लाया था की तुम्हे चोद सकू. वो चिल्लाने लगी चोद सकू चोद सकू , अरे हाथ भी मत लगाना वरना देख लेना भोसड़ी के, अरे मैं वहा आराम से रिशु से चुद रही थी तब तो झूट बोल कर मुझे वापस ले आया और खुद चोदना चाहता है, गांड मार दूँगी अगर हाथ भी लगाया तो. मैंने सोचा के इस वक्त काम टेढ़ी ऊँगली से निकलना होगा.
मैंने कहा बस इतनी सी बात अभी मैं रिशु को यही ले आता हूँ और मैं रिशु को लेने चल पड़ा. रिशु के घर पहुच कर मैंने कामिनी से कहा की आज रात को रिशु मेरे घर पर ही रुकेगा और उसको ले कर वापस आ गया. रस्ते में रिशु बोला यार मोनू, रश्मि बहुत मस्त चीज़ है और मैं उससे शादी करना चाहता हूँ अभी मम्मी से मैं येही बात कर रहा था. कुछ चक्कर चलो और मेरे साले बन जाओ. मुझे पता था की रश्मि रिशु के लंड की दीवानी हो चुकी है पर मैं बोला की यार इसमें मेरा क्या फायदा, तुम्हे तो करारा माल मिलेगा जिंदगी भर चोदने के लिए और मुझे कुछ नहीं. वो बोला यार मम्मी को चुदवा दिया तुमसे और क्या चाहते हो. मैं बोला की मैंने भी तो रश्मि चुदवा दिया तुमसे, हिसाब बराबर.
रिशु: ऐसा मत बोल, तू मेरा दोस्त नहीं है. कुछ कर न यार.
मैं: देख कर तो सकता हूँ पर तू कुछ ऐसा कर की रश्मि मुझसे चुदवा ले बस एक बार.
रिशु: साले अपनी सगी बेहेन को चोदेगा. मैं उससे शादी करना चाहता हूँ और तू बोल रहा है की उसको तुझसे चुदवाऊ.
मैं: अबे जाने दे, मुझे अच्छी तरह से पता है की तू भी कामिनी आंटी चोदता है, जब तू अपनी सगी माँ को चोद सकता है तो मैं अपनी बेहेन को नहीं और सबसे बड़ा रिश्ता तो आदमी और औरत का होता है. बोल क्योंकि मेरे मनाये बिना मम्मी पापा नहीं मानेगे.
रिशु: चल यार, तू आखिर दोस्त है, आज ही ग्रुप सेक्स करते है रश्मि के साथ. चल एक बोतल वोदका ले ले.
मैं: हाँ खाना भी तो लेना है.
रिशु के कहने से मैंने सिर्फ नानवेज खाना लिया. खाना और वोदका खरीद कर हम जैसे ही घर पहुचे की रश्मि रिशु से लिपट गयी और पेंट के ऊपर से ही उसका लंड पकड़ कर हिलाने लगी. मैंने कहा अरे पहले खाने पीने का इंतज़ाम करो, इसके लिए तो पूरी रात पड़ी है. रश्मि बोली लाओ पैकेट मुझे दे दो मैं खाना लगाती हूँ. खाना देख कर रश्मि बोली की अरे तुम लोग सिर्फ नानवेज ले कर आये हो अब मैं क्या करूंगी. रिशु बोला मेरी जान पहले सिर्फ कबाब और ३ गिलास ले कर आओ. रश्मि कबाब और गिलास ले कर आई तो रिशु ने कहा ये सब टेबल पर रख दो और मेरी गोद में बैठ जाओ. मोनू तुम पेग बनाओ. रश्मि रिशु की गोद में बैठ गयी और रिशु उसकी चुचियो से खेलने लगा. मैंने ३ मोटे पेग बना दिए और रिशु ने एक पेग उठा कर रश्मि के मुह से लगा दिया. रश्मि बोली अरे मैं नहीं पीती पर रिशु ने एक ना सुनी और पूरा गिलास जबरदस्ती रश्मि के गले में उड़ेल दिया. रश्मि का गला बुरी तरह से जलने लगा पर रिशु ने कहा एक और पेग बनाओ इसके लिए. इस बार मैंने वोदका थोडा कम और कोल्ड ड्रिंक ज्यादा दाल कर पेग बनाया तो रश्मि धीरे धीरे पीने लगी तब तक रिशु ने एक कबाब का टुकड़ा उठाया और उसके मुह में डालने लगा, रश्मि ने कहा नहीं रिशु मैंने तुम्हारे कहने से शराब पी ली है पर ये नहीं खा सकती उलटी हो जायेगी, रिशु बोला मेरी जान एक बार टेस्ट तो करो. रश्मि ना ना करती रही और रिशु ने सिर्फ एक सिर्फ एक मेरे लिए करते करते उसके मुह में कबाब डाल ही दिया. बोनलेस होने की वजह से रश्मि को कुछ पता ही नही चला और वोह कबाब खा गयी. जैसा की हमारा प्लान था हमने रश्मि को ४ पेग पिला दिए और खुद सिर्फ दो ही पेग पिए थे और रश्मि का पहला पेग तो ३ पेग के बराबर था. अब रश्मि नशे में धुत हो चुकी थी और मज़े ले ले कर तंदूरी चिकन फाड रही थी. खा पी कर हम रश्मि को गोद में उठा कर बेडरूम में ले गए. तब तक तो नशे से बेहोश हो चुकी थी. रिशु बोला इतनी पि ली है इसने की कल सुबह तक नशा नहीं उतरेगा इसका, १/२ घंटा सोने दे इसे तब तक कोई ब्लू फिल्म लगा दो. १/२ घंटे में हम दोनों के लुंड कुतुबमीनार बन चुके थे. हमने तब जा कर रश्मि को जगाया. मैंने उसकी दोनों चूचियों को मसल दिया पर उस पर नशा बहुत था तो उसने कोई विरोध नहीं किया और फ़िर वहीं सोफ़े पर रश्मि के बिल्कुल सामने बैठ गया। रिशु ने रश्मि को अपने ऊपर खींच लिया और रश्मि को अपने पूरे बदन पर फ़ैला कर उसके होंठ चूसने शुरु कर दिये। रश्मि अब भी अपने दोनों टाँगों को सटाए हुइ थी, उन दोनों के सर मेरी ओर थे। रश्मि की छाती रिशु के सीने पे दबी हुई थी। रिशु अब रश्मि को वैसे ही चिपटाये हुए पलट गया और रश्मि अब उसके नीचे हो गई।वो अब उसके चुम्मे का जवाब देने लगी थी। रिशु २-३ मिनट के बाद हटा और फ़िर उसकी दाहिनी चूची को चूसने लगा। वह अपने एक हाथ से उसकी बाँई चूची को हल्के से मसल भी रहा था। रश्मि की आँखें बन्द थी और उसकी साँस गहरी हो चली थी। जल्द ही रश्मि अपने पैर को हल्के हल्के हिलाने, आपसे में रगड़ने लगी। उसकी चूत गीली होने लगी थी। जैसे ही उसने एक सिसकारी भरी, रिशु उसके ऊपर से पूरी तरह हट गया और मुझे उसके पैरों की तरफ़ जाने का इशारा किया। मैं अब रश्मि की सर की तरफ़ से हट कर उसके पैरों की तरफ़ हो गया।
रिशु अब उसकी चूत पर झुका। होठों के बीच उसकी झाँटों को ले कर दो-चार बार हलके से खींचा और फ़िर उसकी जाँघ खोल दी। उसकी चूत की फ़ाँक खुद के पानी से गीली हो कर चमक रही थी। रिशु अपने स्टाईल में जल्द ही चूत चूसने लगा और रश्मि के मुँह से आआअह आआअह ऊऊऊऊऊओह जैसी आवाज ही निकल रही थी।
रिशु चूसता रहा और रश्मि चरम सुख पा सिसक सिसक कर, काँप काँप कर हम लोगों को बता रही थी कि उसको आज पूरी मस्ती का मजा मिल रहा है।
जल्द ही वो निढ़ाल हो कर थोड़ा शान्त हो गई। तब रिशु ने उसको कहा कि अब वो उसके लण्ड को चूस कर उसको एक पानी झाड़े। रश्मि शान्त पड़ी रही, पर रिशु उसके बदन को हलके हलके सहला कर होश में लाया और फ़िर उसको लण्ड चूसने को कहा।
रश्मि एक प्यारी से अदा के साथ उठी और फ़िर रिशु के लण्ड को अपने मुँह में ले लिया। वो अब मुझसे बिना शर्म किए खूब मजे लेने के मूड में थी। कभी हाथ से वो मुठ मारती, कभी चूसती और जल्द ही रिशु का लण्ड फ़ुफ़कारने लगा, फ़िर झड़ भी गया।
पर रश्मि ने ना में सर हिला दिया, तब रिशु तुरंत उठा और सारा माल रश्मि की चूची पर निकाल दिया। झड़ने के बाद भी रिशु का लण्ड हल्का सा ही ढीला हुआ था, जिसको उसने अपने हथेली से पौंछ दिया और फ़िर रश्मि को कहा- अब इसको चूस कर फ़िर से तैयार कर !
जब रश्मि ने चूस कर उसका खड़ा कर दिया तब उसने रश्मि को नीचे लिटा दिया। फ़िर उसकी टाँगों को पेट की तरफ़ मोड़ दिया, खुद अपने फ़नफ़नाए लण्ड के साथ बिल्कुल उसकी खुली हुई बुर के पास घुटने पर बैठ गया। हल्के हल्के से लण्ड अब उसकी बुर के मुहाने पे दस्तक देने लगा था। रश्मि अपनी आँख बन्द करके अपने बुर के भीतर घुसने वाले लण्ड का इन्तजार कर रही थी। रिशु ने अपने लण्ड को अपने बाँए हाथ से उसकी बुर पर टिकाया और फ़िर उसको धीरे धीरे भीतर पेलने लगा। रश्मि के मुँह से सिसकारी निकल गई और जब लण्ड आधा भीतर घुस गया, तब रिशु ने अपने वजन को बैंलेन्स करके एक जोर का धक्का लगाया और पूरा ७" भीतर पेल दिया।
रश्मि हल्के से चीखी- उई ई ईईई ईईईए स्स्स्स्स् स माँ आआआह !
और रश्मि की चुदाई शुरु हो गई। जल्द ही वह भी अपनी बुर को रिशु के लण्ड के साथ "ताल से ताल मिला" के अन्दाज में हिला हिला कर मस्त आवाज निकाल निकाल कर चुद रही थी। साथ ही बोले जा रही थी- आह चोदो ! वाह, मजा आ रहा है, और चोदो, जोर से चोदो, लूटो मजा मेरी बुर का, मेरी चूत का, बहुत मजा आ रहा है, खूब चोदो ! खूब चोदो !
फ़िर जब रिशु ने चुदाई की रफ़्तार बढ़ाई, रश्मि के मुँह से गालियाँ भी निकलने लगी- आआह मादरचोद ! ऊऊ ऊ ऊओह बहनचोद ! साले चोद जोर से चोदो रे साले मादरचोद।
रिशु भी मस्त हो रहा था, यह सब सुन सुन कर मस्ती में चोदे जा रहा था और रश्मि की गाली का जवाब गाली से दे रहा था- ले चुद साली, बहुत फ़ड़क रही थी, देख आज कैसे बुर फ़ाड़ता हूँ। साली कुतिया, आज लण्ड से तेरी बच्चादानी हिला के चोद दूँगा। साली बेटी पैदा करके उसको भी तेरे सामने चोदूँगा इसी लण्ड से ! देखना तू !
दोनों एक दूसरे को खूब गन्दी गन्दी गाली दे रहे थे और चुदाई चालू थी।
थोड़ी देर बाद रिशु ने लण्ड बाहर निकाल लिया। तब रश्मि ने उसको लिटा दिया और उसके ऊपर चढ़ गई। वो अब ऊपर से उसके लण्ड पर कुद रही थी और मैं उसके सामने होकर देख रहा था कि कैसे लण्ड को उसकी बुर लील रही थी।
५ मिनट बाद रिशु फ़िर उठने लगा और फ़िर रश्मि को पलट कर उसको घुटनों और हाथों पर कर दिया फ़िर पीछे से उसकी बुर में पेल दिया, बोला- अब बन गई ना रश्मि तू कुतिया ! साली चुद और चुद साली ! यहाँ लण्ड खा गपागप गपागप गपागप। मादरचोद ! बोल रन्डी, बोल साली कुतिया.
और वो भी नशे में बोल पड़ी- रन्डी रन्डी, साले बहनचोद तुम लोगों ने मुझे रन्डी बना दिया।
रिशु अब एक बार फ़िर लण्ड बाहर निकाल लिया और फ़िर उसको सीधा लिटा दिया। ऊपर से एक बार फ़िर चुदाई शुरु कर दी।
और करीब ३० मिनट के बाद रश्मि एक बार फ़िर काँपने लगी, वो फ़िर एक बार झर रही थी। तभी रिशु भी झरा- एक जोर का आआआआह और फ़िर पिचकारी रश्मि की झाँट पे चोद दी। अब रिशु उठा और मुझे इशारा किया और अब मैं आगे बड़ा. रश्मि नशे में पड़ी हुई एकदम कच्ची कली जैसी, फ़कत कुँवारी, कोरी रसमलाई जैसी. मैंने सोचा अब देर करना ठीक नहीं क्योंकि इसका नशा अब थोडा कम तो होगा ही. मैंने अपने लंड को उसकी चूत के मुहाने पर रखा और उसकी कमर के नीचे एक हाथ डाला। उसके होंठों को अपने मुँह में भर लिया और फिर एक ही झटके में ३ इंच लंड अन्दर ठोंक दिया। रश्मि की घुटी-घुटी चीख निकल गई. कोई २-३ मिनट के बाद जब उसकी चूत कुछ आराम में आई तब मैंने हौले-हौले धक्के लगाने शुरु किए पर अभी लंड पूरा नहीं घुसाया। आखिर वो मेरी सगी बेहेन थी मैं उसे खूब मजे दे कर चोदना चाहता था. मैंने उसके नितम्बों पर हाथ फेरना चालू रखा।
उसकी गाँड के छेद से जैसे ही मेरी उँगलियाँ टकराईं तो मैं तो रोमांच से भर उठा. बालों की कंघी के दाँत जैसी गाँड की तीख़ी नोकदार सिलवटों वाला छेद। आहहहह… क्या मस्त क़यामत है साली की गाँड की छेद. कुँवारी गाँड की पहचान तो उसके उभरे हुए सिलवटों से होती है। मुझे तो इस गाँड के छेद में अपना रस भर कर स्वर्ग के इस दूसरे दरवाज़े का लुत्फ हर क़ीमत पर उठाना ही है। पर पहले तो चूत चोदनी है, गाँड की बात बाद में. मैंने रिशु से उसकी गांड के नीचे एक तकिया लगाने को कहा और अपना एक हाथ उसकी पतली कमर के नीचे डाल कर पकड़ लिया। अपने होंठ उसके होंठों पर रख करक उन्हें चूमा और फिर दोनों होंठ अपने मुँह में भर लिए। वो फिर से पूरी गरम और मस्त हो चुकी थी। उसने तो अब नीचे से हल्के-हल्के धक्के भी लगाने शुरु कर दिए थे। मैंने अपना लंड थोड़ा सा बाहर निकाला और एक ज़ोरदार धक्का लगा दिया। धक्का इतना ज़बर्दस्त था कि गच्च से जड़ तक उसकी चूत में समा गया। मेरा लंड रिशु से बड़ा था, रश्मि दर्द के मारे छटपटाने लगी। उसने मेरी पीठ पर अपने नाखून इतने ज़ोर से गड़ाए कि मेरी पीठ पर भी ख़ून छलक आया. रश्मि ज़ोर से चीख़ी “ओईईईईई… माँ…. मर… गईईईईईईईई…” और उसकी आँखों से आँसू निकलने लगे।
मैंने उससे कहा “बस मेरी जान” मैंने उसके नमकीन स्वाद वाले आँसूओं पर अपनी जीभ रख दी। “मोनू मुझे मार ही डाला… ओओईईईईई… निकाल बाहर.. मैं मर जाऊँगी… उईईईईई माँआआआआ….” वो रोए जा रही थी। मैं जानता ता ये दर्द ३-४ मिनट का है बाद में तो बस मज़े ही मज़े। मेरा लंड तो जैसे निहाल ही हो गया। इतनी कसी हुई चूत कहा मिलेगी फिर इसीलिए रिशु शादी करना चाहता है इससे. कोई ५ मिनट के बाद रश्मि कुछ संयत हुई। उसकी चूत ने भी फिर से रस छोड़ना चालू कर दिया। मैंने उसकी कपोलों, होंठों और माथे पर चुम्बन लेने शुरु कर दिए। और अपने धक्को की स्पीड बड़ा दी फिर मैंने उससे पूछा “क्यों मेरी रंडी, कैसा है तेर भाई का लंड?” तो वह नशे में बोली “मोनू तुने तो मेरी जान ही निकाल दी, ओईईई… आआहह… या… ओह अब रूको मत ऐसे ही धक्के लगाओ… आहहह… या.. ओई… मैं तो गईईईईईईई….” और उसके साथ ही वो एक बार फिर झड़ गई। मैं तो जैसे स्वर्ग में था। मैंने लगातार ८-१० धक्के और लगा दिए। अब तो उसकी चूत से फच्च-फच्च का मधुर संगीत बजने लगा था।
ये सिलसिला कोई २० मिनट तो ज़रूर चला होगा। मेरा लंड बेचारा कब तक लड़ता। मैंने दनादन ५-७ धक्के और लगा दिए। रश्मि भी फिर से झड़ने के कगार पर ही तो थी। और फिर… एक.. दो… तीन चार… पाँछ.. पता नहीं कितनी पिचकारियाँ मेरे लंड ने छोड़ दीं… रश्मि ने मुझे कस कर पकड़ लिया और उसकी चूत ने भी काम-रज छोड़ दिया। उसकी बाँहों में लिपटा मैं कोई १० मिनट उसके ऊपर ही पड़ा रहा। १० मिनट के बाद रश्मि जैसे नींद से जागी। मैं उठ कर बैठ गया। रश्मि भी मेरी ओर सरक आई। उसने मेरे होंठों पर दो-तीन चुम्बन ले लिए। मैंने उस से थैंक यू कहा तो उसने कहा “आखिर चोद हो डाला अपनी बेहेन को तुने कुत्ते…” मैंने रिशु की तरफ देखा वो तो सोफे पर ह सो गया था तब मैं रश्मि को गोद में उठा कर बाथरूम की ओर ले जाने लगा। उसने अपनी बाँहें मेरे गले में डाल दी और आँखें बन्द कर लीं। मैंने देखा पूरा तकिया मेरे वीर्य और काम-रज़ से भीगा हुआ था. रश्मि पॉट पर बैठकर पेशाब करने लगी। आहहहह… फिच्च… स्स्स्सीईईई… का वो सिसकारा और मूत की पतली धार तो कयामत ही थी। मैं तो मन्त्र-मुग्ध सा बस उस नज़ारे को देखता ही रह गया। पॉट पर बैठी रश्मि की चूत ऐसी लग रही थी जैसे एक छोटा करेला किसी ने छील कर बीच में से चीर दिया हो। रिशु और मेरी जबरदस्त चुदाई से उसकी चूत के होंठ सूजकर पकौड़े जैसे हो गए थे। बिल्कुल लाल गुलाबी। उसकी गाँड का भूरा और कत्थई रंग का छोटा सा छेद खुल और बन्द हो रहा था। मैंने उससे कहा “एक मिनट रूको, मूतना बन्द करो और उठो… प्लीज़ जल्दी”
“क्या हुआ?” रश्मि ने मूतना बन्द कर दिया और घबरा कर बीच में ही खड़ी हो गई। मैंने उसे अपनी ओर खींचा। मैं घुटनों के बल बैठ गया और उसकी चूत को दोनों हाथों से खोल करक उसकी मदन-मणि के दाने को चूसने लगा। वो तो आहहह… उहह्हह करती ही रह गई। उसने कहा “ओह… क्या कर रहे हो भैया ओफ्फ्फ.. इसे साफ तो करने दो। ओह गन्दे ओईईईई.. माँ…”
“अरे प्यार में कुछ गन्दा नहीं होता” मैंने कहा। और फिर उसके किशमिश के दाने को चूसने लगा।
रश्मि कितनी देर तक बर्दाश्त करती। उसकी चूत के मूत्र-छिद्र से हल्की सी पेशाब की धार फिर चालू हो गई जो मेरी ठोड़ी से होती हुई गले के नीचे गिर सीने से होती मेरे लंड को जैसे धोती जा रही थी। उसने मेरे सिर के बाल पकड़ लिए कसकर। मैं तो मस्त हो गया। जब उसका पेशाब बन्द हुआ तो उसने नीचे झुक कर मेरे होंठ चूम लिए और अपने होठों पर जीभ फिराने लगी। उसे भी अपनी मूत का थोड़ा सा नमकीन स्वाद ज़रूर मिल ही गया। हम साफ़-सफाई के बाद फिर बिस्तर पर आ गए।
“रश्मि एक बताना तो मैं भूल ही गया” मैंने कहा।
“ऊँहह… अब कुछ मत बोलो बस मुझे प्यार करने दो अपने मोनू को।” उसने फिर मेरे होठों को चूम लिया।
मैंने उससे कहा “मेरी बहना मैं एक बार तुम्हारी चूत को चूसना चाहता हूँ।” उसका नशा कम भले ही हो गया था पर पूरी तरह नहीं उतरा था इसीलिए कोई ऐतराज़ नहीं हो सकता था। मैं लेट गया और उसके पैर अपने सिर के दोनों ओर कर दिए जिससे उसकी चूत मेरे मुँह के ठीक ऊपर आ गई। हम दोनों अब 69 की मुद्रा में थे। रश्मि मेरे ऊपर जो थी। मेरा लंड ठीक उसके मुँह के सामने था। मैंने झट से चूत की पंखुड़ियों को चौड़ा किया और गप्प से अपनी जीभ उस गुलाबी खाई में उतार दी। उत्तेजना में उसका शरीर काँपने लगा। मैंने उसकी चूत को ज़ोर-ज़ोर से चूसना चालू कर दिया, अब उसके पास मेरे लंड को चूसने के अलावा क्या रास्ता बचा था। उसने पहले मेरे लंड के सुपाड़े को चूमा और उसपर आए वीर्य की कुछ बूँदों चखा और फिर गप्प से उसे मुँह में भर कर चूसने लगी। मेरा लंड मेरी बेहेन के मुह में जा कर तो निहाल ही हो गया। मैंने अपनी जीभ उसकी गाँड के भूरे छेद पर भी फिरानी चालू कर दी। मैंने ४-५ बार अपनी जीभ उसकी गाँड पर फिराई तो वो एक किलकारी मारते हुए फिर झड़ गई। मैं अपना वीर्य उसके मुँह में अभी नहीं छोड़ना चाहता था। मुझे तो पहले उसकी गाँड का उदघाटन करना था। और फिर जैसा मैंने सोचा था वही हुआ।
रश्मि ज़ोर-ज़ोर की साँसे लेती हुई एक ओर लुढ़क गई। उसके उरोज साँसों के साथ ऊपर-नीचे हो रहे थे। आँखें बन्द थीं। अचानक वह उठी और मेरे ऊपर आ कर मुझे कस कर अपनी बाँहों में जकड़ लिया। मैंने अपनी ऊँगली उसकी गाँड की छेद पर फिरानी शुरु कर दी। उफ्फ… क्या खुरदरा एहसास था। वो तो बस आँखें बन्द किए मुझसे चिपकी पड़ी थी। मैंने हौले से उसके होंठों पर एक चुम्मा लिया और कहा “मेरी जान, मेरी बहना क्या हुआ?”
“बस अब कुछ मत बोलो, एक बार मुझे फिर से…” और उसने मुझे चूम लिया।
“रश्मि एक और मज़ा लोगी जो अभी रिशु ने नहीं दिया?”
“क्या मतलब… वो… वो.. ओह… नो… नहीं…” वो तो ऐसे बिदकी जैसे किसी काली छतरी को देख कर भैंस बिदकती है “ओह भैया तुम्हारा दिमाग तो ठीक है ना… क्या बात कर रहे हो?”
“अरे मेरी रश्मि रानी औरत के तीन छेद होते हैं और तीनों में ही चुदाई की जाती है। चुदाई का असली आनन्द तो इस द्वार में ही है। एक बार मज़ा लेकर ते देखो, फिर तो रोज़ यही कहोगी कि पिछले छेद में ही डालो।”
“पर वो… वो.. इतना मोटा मेरे छोटे से छेद में… ओह नो… मुझे डर लगता है।” वो कुछ सोच नहीं पा रही थी। “नहीं मुझे बहुत डर लग रहा है। सुना है इसमें करने पर बहुत दर्द होता है।”
“अच्छा चलो तुम्हें दर्द होगा तो नहीं करेंगे। एक बार करने में क्या हर्ज़ है?”
“पर वो… वो ज़्यादा दर्द तो नहीं होगा ना कहीं…?” वो कुछ हिचकिचा रही थी।
मैंने उसे करवट लेकर सो जाने को कहा। वो बाईं करवट के बल लेट गई औऱ अपनी दाईं टाँग को सिकोड़ कर अपने सीने की ओर कर लिया। अब मैं घुटने मोड़कर उसकी बाईं जाँघ पर बैठ गया। ताकि जब मैं उसकी गाँड में लंड डालूँगा तो वह आगे की ओर नहीं खिसक पाएगी। अब मैंने बोरोलीन की ट्यूब निकाली और टोपी खोल कर उसका मुँह उसकी गाँड की सुनहरी छेद पर लगा कर थोड़ा सा अन्दर किया। पहले से थोड़ी बोरोलीन लगी होने से ट्यूब की नॉब अन्दर चली गई। अब मैंने उस ट्यूब को ज़ोर से भींच दिया। “उईईईई… भैयाऊऊऊ गुदगुदी हो रही है” रश्मि नशे में चिहुँकी। वो आगे को सरक ही नहीं सकती थी। मैंने आधी से ज़्यादा ट्यूब उसकी गाँड में खाली कर दी। अब धीरे-धीरे मैंने उसकी गाँड के छेद पर मालिश करनी शुरु कर दी। बोरोलीन अन्दर पिघलने लगी थी। और मेरी उँगली उसकी गाँड की कसी हुई छेद के बावज़ूद भी आराम से अन्दर जाने लगी थी, प्यार से धीरे-धीरे। रश्मि आआआहहह… उउउऊऊऊहहहह करने लगी। कोई ४-५ मिनट की घिसाई और उँगलीबाज़ी से उसकी गाँड तैयार हो गई थी। “ओह… भैया अब डाल दो”
शाबास मेरी रश्मि यही तो मैं चाहता था। अब मैंने वैसलीन की डिब्बी उठाई और लगभग आधी शीशी क्रीम अपने लंड पर लगा दी। मैंने सुपाड़े को उसकी गाँड पर लगा दिया। आह… क्या मस्त छेद था। दो गोल पहाड़ियों के बीच एक छोटी सी गुफ़ा जिसका दरवाज़ा कभी बन्द कभी खुल रहा था। रश्मि आआहहहह… उँहहहह… ओह… उउउऊऊईई.. किए जा रही थी। मैंने एक उँगली उसकी चूत में डाल कर अन्दर-बाहर करनी शुरु कर दी औऱ एक हाथ से उसकी घुण्डियाँ मसलनी शुरु कर दी। उसका एक बार और झड़ना ज़रूरी था ताकि गाँड के छेद को पार करवाने में उसे कम से कम दर्द हो। ३-४ मिनट की उँगलीबाज़ी और चुचियों को मसलने से वह उत्तेजित हो गई। उसका शरीर थोड़ा सा अकड़ने लगा और वो ऊईईई.. माँ.आआ…. ओओओहहह ययाआआआआ… करने लगी। उसकी चूत ने पानी छोड़ दिया। मैंने अपनी उँगली निकाली और अपने मुँह में डाल कर एक चटकारा लिया। फिर मैंने दुबारा उँगली उसकी चूत में डाली और उसे भी चूत-रस चटाया। रश्मि तो मस्त ही हो गई। उसकी गाँड का छेद जल्दी-जल्दी खुलने और बन्द होने लगा था। यही समय था जन्नत के दूसरे द्वार को पार करने का। जैसी उसकी गाँड खुलती मेरा सुपाड़ा थोड़ा सा अन्दर सरक जाता। अब तक उसकी गाँड का छेद ५ रुपए के सिक्के जितना खुल चुका था और लगभग पौना इंच सुपाड़ा अन्दर जा चुका था, सफलतापूर्वक बिना किसी दर्द के। मैंने उसकी कमर को पकड़ा और ज़ोर का दबाव डालना चालू किया। गाँड अन्दर से चिकनी थी और रश्मि मस्त थी। गच्च से ३ इंच लण्ड घुस गया और इससे पहले कि रश्मि की चीख हवा में गूँजे मैंने उसका मुँह अपने दाएँ हाथ से ढँक दिया। वो थोड़ा सा कसमसाई और गूँ-गूँ करने लगी। मैं शान्त रहा। मेरा ३ इंच लण्ड अन्दर जा चुका था। अब फिसल कर बाहर नहीं आ सकता था। मुझे डर था कि रिशु ने जा इसकी चूत मारी थी तब काफी खून निकला था उसी तरह गाँड से भी ख़ून ना निकल जाए। लेकिन बोरोलीन और वैसलीन की चिकनाई की वज़ह से उसकी गाँड फटने से बच गई थी। इसका एक कारण और भी था मैंने लण्ड अन्दर डालते समय केवल दबाव ही दिया था धक्का नहीं मारा था।
२-३ मिनट आह… ऊहह… करने के बाद वह शान्त हो गई। मैंने अपना हाथ हटा लिया तो वह बोली “मुझे तो मार ही डाला”
“अरे मेरी बहना अब देखना तुम अपने मुँह से कहोगी और ज़ोर से ठोंको और ज़ोर से” तब तक रिशु भी जग गया था और उसके मम्मो से खेलने आ गया था.
अब धीरे-धीरे धक्के लगाने का समय आ गया था। मैंने अपना लण्ड अन्दर-बाहर करना शुरु कर दिया। रश्मि ने अपने गाँड का छेद सिकोड़ने की कोशिश की तो मैंने उसे समझाया कि वो कतई ऐसा न करे। मैंने उसे बताया कि अगर उसने गाँड को सिकोड़ तो अन्दर लंड और सुपाड़ा दोनों फूल जाएँगे और उसे अधिक तक़लीफ होगी। मैंने अपना लंड जड़ तक अन्दर कर दिया. रश्मि तो मस्त हो गई। वो तो बस उईई… माँ…. ही करती जा रही थी, मीठी सी सीत्कार। मैं अपना लण्ड अन्दर-बाहर ही करता जा रहा था। रश्मि अब पेट के बल हो गई थी, उसने अपने दोनों पैर चौड़े कर दिए और चूतड़ ऊपर उठा दिए। मेरा लंड उसकी गाँड में कस गया पर चिकनाई के कारण अन्दर-बाहर होने में कोई दिक्क़त नहीं थी। हर धक्के के साथ रश्मि की सीत्कार निकल जाती और वह अपने चूतड़ और ऊपर कर लेती. साली पहली गाँड चुदाई में ही इतनी मस्त हो गई, मैंने तो सपने में भी नहीं सोचा था कि इतनी ज़बर्दस्त गाँड होगी। ऐसा नहीं था कि मैं बस धक्के ही लगा रहा था, मैं तो उसकी चूत में भी उँगली कर रहा था, कभी उसकी पीठ चूमता, कभी उसके कान काटता। वो तकिए से सिर लगाए आराम से अपना चूतड़ ऊपर-नीचे करती हुई ओओईईई… आआआहहह… ययाआआआ… कर रही थी। कोई २०-२५ मिनट की गाँड चुदाई के बाद मुझे लगा कि अब मंज़िल नज़दीक आने वाली है तो मैंने रश्मि से कहा “मेरी बहना, अब मैं आने वाला हूँ”
रश्मि हँसने लगी “अभी नहीं, एक बार मुझे कुतिया बनाकर भी करो।”
और फिर वो अपने घुटनों के बल हो गई। मैं समझ गया साली ब्लू-फिल्म की तरह चुदवाना चाहती है। मैंने उसकी कमर पकड़ी और लंड अन्दर डाल कर धक्के लगाने शुरु कर दिए। उसकी गाँड का छल्ला ऐसे लग रहा था जैसे किसी बच्ची के हाथ में पहनने वाली लाल रंग की चूड़ी हो या एक पतली सी गोल लाल रंग की ट्यूब-लाईट हो जो जल और बुझ रही हो। उसकी गाँड का छल्ला ऐसे ही अन्दर-बाहर हो रहा था। उसने अपना सिर तकिए से लगा लिया और मेरे आँडों को ज़ोर से अपनी मुट्ठी में लेकर दबाने लगी। मेरे ८-१० धक्कों और चूत में उँगलीबाज़ी करने के कारण रश्मि की चूत ने पानी छोड़ दिया और उसने एक मीठी सी सीत्कार लेकर अपनी गाँड सिकोड़ी। इसके साथ ही मेरे लंड ने भी ७-८ पिचकारियाँ उसकी गाँड में छोड़ दीं। उसकी गाँड मेरे गरम और गाढ़े वीर्य से लबालब भर गई। जैसे-जैसे मेरे धक्कों की रफ़्तार कम होती गई वो नीचे होती गई और फिर मैं उसके ऊपर लेटता चला गया। मैंने उसे बाँहों में भर रखा था। उसके दोनों उरोज मेरे हाथों में थे।
कोई १० मिनट तक आँखें बन्द किए हम लोग ऐसे ही पड़े रहे और रिशु उसके मम्मे दबाता रहा। फिर रश्मि उठ खड़ी हुई। वो लंगड़ाती सी बाथरूम की ओर जाने लगी तो रिशु ने उसका हाथ पकड़ कर फिर अपनी गोद में बैठा लिया। “ओह सारा पानी मेरी जाँघों पर फैलता जा रहा है, मुझे गुदगुदी हो रही है.. ओह… छोड़ो साफ़ तो करने दो।”
पर रिशु ने उसे नहीं जाने दिया। मैंने तकिए के नीचे से नैपकीन निकाली और रश्मि की रिसती हुई गाँड को साफ कर दिया। उसकी गाँड का छेद अब बिल्कुल लाल होकर ५ रुपए के सिक्के जितना छोटा हो गया था। मैंने उसके होंठों का एक चुम्बन ले लिया। “थैंक यू मेरी बहना”
“ओह… थैंक यू मेरे मोनू” उसने भी मुझे चूम लिया। वो बिस्तर पर उँकड़ू बैठी अपनी चूत और गाँड के छेदों को देख रही थी। उसने कहा, “देखो मेरी चूत और उसकी सौतन का क्या हाल कर दिया है तुम दोनों ने”
उसकी चूत सूज कर लाल हो गई थी और गाँड का रंग भी भूरे से लाल हो गया ता। उसकी चूत तो ऐसे लग रही थी जैसे किसी ने छोटी सी परवल को बीच में से चीर कर चौड़ा कर दिया हो। रिशु बोला अरे मैंने तो सिर्फ चूत चोदी थी तुम्हारा गांड का बाजा तो तुम्हारे भाई ने बजाया है. अब एक बार ज़रा हमे भी तो ये दूसरी जन्नत दिखाओ. यह बोल कर रिशु ने अपना खड़ा हुआ लंड रश्मि की गांड में डाल दिया पर अब रश्मि को कोई तकलीफ नहीं हुई. उन ४ दिनों में हमने रश्मि को कई बार चोदा और उसकी खूब गांड मारी. फिर मम्मी और पापा आ गए और मैंने उन्हें बोला की रश्मि और रिशु एक दुसरे से प्यार करते है और शादी करना चाहते है. मेरे मम्मी पापा बहुत नाराज़ हुए पर जब मैंने उनको डराया की रिशु के पास कुछ ऐसे फोटो है जिनसे रश्मि की बहुत बदनामी हो सकती है और कहीं भी उसकी शादी नहीं होगी तब वो तैयार हो गए और २ साल बाद रश्मि और रिशु की शादी हो गयी. पर हमारे रिश्ते आज भी वैसे ही हैं और मैं आज भी कामिनी और रश्मि को चोदता हूँ.