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बहन को पत्नी बनाकर ही दम लिया
नमस्कार दोस्तो, मेरा नाम अनुभव त्रिवेदी है. मैं सहारनपुर का रहने वाला हूँ. मैं इस टाइम बॅंगलॉर मे एक आइटी फर्म मे जॉब करता हूँ. मेरे घर मे मेरी माँ और मेरी एक बहन है. मेरे पिता जी का देहांत बहुत पहले हो गया था. मैं सेक्स स्टोरी हमेशा पढ़ता हूँ. दोस्तो मैने सोचा क्यूँ ना आज मैं आप सबके साथ अपनी स्टोरी शेयर करू. ये कहानी बहुत ही हॉट हैं. मुझे पता है इसे पढ़ कर लड़के अपना लंड और लड़किया अपनी चूत को शांत ज़रूर करेंगे. बहन का पति बना मैं.
मेरी बेहन नादानी भी जवान हो चुकी है और उसके रिश्ते की बात चल रही है. नादानी की उमर कोई 20 साल की हो चुकी है. मेरी बेहन बहुत सुंदर और सेक्सी है. पढ़ाई पूरी नहीं कर सकी क्यों कि उसका चक्कर उसके एक टीचर के साथ चल रहा था और दोनो शादी भी करने वाले थे लेकिन उसका आशिक उसको धोखा दे कर भाग गया. नादानी मेरी माँ का जवानी का रूप है, गोरी चिटी, मस्त जवानी है उसकी. बस स्लिम है और बहुत ही कसा हुआ बदन है उसका. मेरा प्लान बॅंगलॉर में जा कर एक घर लेना है और वहीं पर बिज़्नेस करना है. वहाँ फोटोग्राफर का काम बहुत है. नादानी बेशक मेरी सग़ी बेहन है, लेकिन उसके हुश्न ने मुझ पर जादू कर रखा है.
एक दिन मैने अपनी बेहन को नहाते हुए देखा था. क्या ज़ालिम हुश्न है मेरी बेहन का! गोरे बदन पर जब वो साबुन मल कर नहा रही थी तो मेरा लंड काबू में नहीं रहा. उसके हाथ कभी उसकी मस्त चुचि पर और कभी उसकी मस्त गोरी गोल गान्ड पर चलते और मेरे दिल की धड़कन तेज़ होती रही. मैं बाथरूम के दरवाज़े के छेद से सारा नज़ारा देख रहा था और अपनी पॅंट की ज़िप खोल कर लंड की मूठ मार रहा था. मेरा हाल बुरा हो रहा था. उधर मेरा लंड छूट जाने के नज़दीक था. मैं अपने हाथ से लंड को उपर नीचे करता हुआ झड गया. लेकिन मेरी बेहन नादानी के नंगे जिस्म की तस्वीर मेरी आँखों से ओझल ना हो पाई. उस दिन मैने फ़ैसला कर लिया कि नादानी को अपनी पत्नी बना कर ही दम लूँगा.
नादानी के लिए जो भी रिश्ता आता मैं उसको ना में बदल देता. जो लड़का भी शादी के लिए होता मैं उसको बदचलन और निकम्मा कह कर रिश्ता तोड़ देता.” हे भगवान, सभी लड़के किसी काम के नहीं हैं! ना जाने कब कोई अच्छा लड़का मिलेगा मेरी बेटी को! अब सारी उमर तो अपनी बेटी को घर में बिठा कर तो नहीं रख सकती, अनुभव” मेरी माँ ने एक दिन तंग आ कर मुझ से कहा. लेकिन मेरी आँखें तो अपनी बेहन के नंगे जिस्म की तस्वीर देख कर उसको चोद रही थी.” मैने कहा माँ मैं बॅंगलॉर जा कर कोई लड़का देखता हूँ. तुम कोई फिकर मत करो.”
मैं बॅंगलॉर चला गया और मेरा कम चल पड़ा. दो महीने के बाद माँ का फोन आया,” अनुभव बेटा, कोई लड़का मिला क्या? मुझे चिंता सता रही है कि तेरी बेहन जवान हो चुकी है और अगर किसी लड़के के साथ कुच्छ कर बैठी तो हमारी बहुत बदनामी हो जाएगी. मैं जानती हूँ कि जवानी का एक एक दिन कितना व्याकुल करता है लड़की को. नादानी जैसी लड़की को कोई भी लूट लेना चाहेगा. तुम जल्दी कुच्छ करो” मैं तो खुद कुच्छ करना चाहता था कि मैं नादानी को अपना बना सकूँ.”
मैने कहा माँ तुम उसको मेरे पास भेज दो. उसका मन भी लग जाएगा और शायद कोई लड़का भी उसको पसंद कर ले,’ मैने लंड मसल्ते हुए कहा”
ठीक है मैं कल तेरी बेहन को भेज रही हूँ, अपना ख्याल रखना” माँ ने कहा. मेरा दिल बाग बाग हो गया.
अपने घर में मेरे दो कमरे हैं. एक को मैने अपनी नादानी के लिए तैयार किया. कमरा सजाया, और उसमे वेब कॅम फिट किया जो कि उसके कमरे की सारी फिल्म बना कर रेकॉर्डिंग करे. उस कॅमरा का कनेक्षन अपने स्टूडियो से जोड़ दिया. मुझे पता तो चले कि मेरी बहना रानी कितनी उतावली हो रही है बिना किसी मर्द के लंड के? अपने रूम में मैने वी सी आर और कुच्छ ब्लू फिल्म्स रख डाली और कुच्छ मस्तराम की किताबें अलमारी में रखी. मैं अपनी बेहन को पटा कर चोद देने की ताक में था.
अगले दिन शनिवार को नादानी को मैं स्टेशन से लेने गया. नादानी ने ब्लॅक जीन्स और येल्लो टीशर्ट पहनी हुई थी और उसके बाल छोटे कटे हुए थे. उसके सीने का उभार देख कर मेरे दिल की धड़कन तेज़ हो गयी. नादानी बिल्कुल उर्मिला मातोंडकर दिख रही थी. उसकी चुचि किसी पहाड़ी की चोटी की माफिक खड़ी थी. लोग उसको घूर रहे थे. जब नादानी ने मुझे देखा तो दौड़ कर मेरी बाहों में आ गयी. आलिंगन में लेते ही मुझे उसके जिस्म की मादक सुगंध महसूस हुई और उसकी चुचि मेरे सीने के अंदर घुसने को व्याकुल थी.” कैसी हो, नादानी? कब से तेरी रह देख रहा था. वाह, मेरी बहना तू तो और भी सुंदर हो गयी है!बहुत प्यारी लग रही है मेरी बहना!” मैने कहा तो नादानी बोल उठी,” सच भैया? मैं तो सोच रही थी कि तुम मेरी राह कम देख रहे थे और कुच्छ और अधिक देख रहे थे. भैया लड़कियाँ मर्दों की नज़र पहचान लेती है. वैसे तुम भी बहुत सेक्सी दिख रहे हो! लगता है बॅंगलॉर का असर है”
मुझे लगा कि नादानी ने मुझे उसकी चुचि को घूरते हुए देख लिया था. मैं शरम के मारे चुप रहा. रास्ते में मोटरसाइकल पर जब मैं ब्रेक मारता तो नादानी का सीना मेरी पीठ से जा टकराता और मेरी पॅंट में तंबू बन जाता. मुझे महसूस हो रहा था कि नादानी शरारती ढंग से मुस्कुरा रही थी.
“मुझे अच्छी तरह से पकड़ कर रखो, कहीं गिर ना जाना!” मैने कहा तो नादानी ने मुझे कमर से कस के पकड़ लिया और उसका हाथ मेरे लंड से कोई अधिक दूर नहीं था. उसकी साँस मेरी गर्दन से टकरा रही थी. उत्तेजना की हालत में हम घर पहुँच गये.
” भैया रसोई कहाँ है? मैं कुच्छ खाना बना देती हूँ’ घर जा कर नादानी ने कहा. रसोई तो मैने खोली भी नहीं थी.” रसोई तो बंद है, मेरी बहना, खाना तो बाज़ार से लाता हूँ. मैं खाना बनाना नहीं जानता, यह तो तुम जानती ही हो” मैने कहा तो नादानी मुझ से लिपट कर बोली,’ भैया, बिना औरत के घर घर नहीं होता. अब मैं आ गयी हूँ तो आपके मकान को घर में बदल दूँगी. आप जा कर सब्ज़ी वग़ैरा ले आएँ फिर देखना मेरा कमाल”
मैं अपनी बेहन को आलिंगन में ले कर खड़ा रहा और प्यार से उसकी गान्ड पर हाथ फेरने लगा और वो भी मेरे लंड पर अपनी चूत को रगड़ने लगी. मुझे पता ही नहीं चला जब मेरे होंठ नादानी के होंठों से जा टकराए तो वो अलग होती हुई बोली,” भैया, बस करो अब. अपनी बेहन को प्यार दिखाने का बहुत वक्त है, आप बाज़ार जाएँ और समान ले आएँ”
खड़े लंड को ज़बरदस्ती बिठाते हुए मैं बाज़ार चला गया. समान खरीदा और वापिस आने ही वाला था कि सेल फोन बज उठा. फोन नादानी का था,” भैया मेरे लिए एक ओडमोस लेते आना, यहाँ मच्छर बहुत हैं” मैं केमिस्ट की दुकान पर चला गया. वहाँ मुझे एक बॉटल ऐसी मेडिसिन की भी मिली जिसको पिलाने से औरत पर वो असर होता है जो मर्द पर वियाग्रा का होता है. घर आया तो नादानी मेरे कमरे में बैठी मस्तराम की किताब पढ़ रही थी. मेरा अंदाज़ा ठीक निकला. ऐसी किताब पढ़ने से मेरी बेहन के बदन में बिजली ज़रूर भड़के गी. मुझे देख कर उसने किताब छुपा ली और मैं उसको समान दे कर बोला,” अब मैं दुकान पर जा रहा हूँ. शाम को खाना खाएँगे, तुम डोर बंद रखना”
स्टूडियो में जा कर मैने अपनी बेहन की फिल्म देखनी शुरू कर दी. वेब कॅम ठीक काम कर रहा था. नादानी अपने कपड़े बदल रही थी. मुझे उसकी तस्वीर के साथ आवाज़ भी सुनाई पड़ रही थी. नादानी ने अपनी टीशर्ट उतारी और उसकी चुचि चमक उठी. वो मस्तराम की किताब ले कर अपने बिस्तर में बैठी हुई थी और एक हाथ से अपनी चुचि मसल रही थी.” वा भैया, किताब तो बहुत मस्त रखी हुई है घर में! साले बेह्न्चोद अनुभव, स्टेशन पर तो बहुत घूर रहे थे अपनी नादानी बेहन की चुचि को. क्या बात है अपनी बेहन को पत्नी बनाने का प्लान तो नहीं है? मेरे बेह्न्चोद भाई, मैं जानती हूँ तुम मुझे नहाते हुए देख रहे थे. अब कितनी देर लगाओगे मुझे अपनाने में? नादानी की चूत बेकाबू हो जाती है भैया आपके लंड को याद कर के”
मैं हैरान रह गया. मैं तो मैं, मेरी नादानी खुद मेरी पत्नी बन जाना चाहती थी! मैने पॅंट की ज़िप खोली और घर फोन लगाया. नादानी ने उठाया तो मैने पुछा,” नादानी, मेरी बेहन क्या कर रही हो?” मेरा हाथ मेरे लंड को सहला रहा था. वेब कॅम में अब मेरी बहना अपनी चूत को मसल रही थी.” कुच्छ नहीं भैया कुच्छ ज़रूरी काम कर रही थी. क्या बात है भैया?”
मैने कहा,” कुच्छ नहीं, बस तेरी याद आ रही थी. खैर मैं जल्दी ही आ जाउन्गा” तभी मेरा दोस्त हफ़ीज़ आ गया. मैने उसको कुच्छ उधार दे चुका था. वो वापिस करने आया था लेकिन मैं उसको घर आ आकर पैसे वापिस करने को कहा,” यार और साथ में अपनी भाबी को भी देख लेना” हफ़ीज़ हंस कर बोला,” साले बेह्न्चोद, भाबी भी ले आया और बताया भी नहीं?”
शाम को हफ़ीज़ पैसे देने आया तो मैने नादानी को डोर खोलने को बोला,” भाबी जी नमस्ते, ये पैसे अनुभव भाई को देने थे. क्यों भाबी, ये साला आपको कहाँ छुपा कर रखता है? इतनी सुंदर बीवी अपने यारों से छुपा कर रखता है साला. अच्छा भाबी मैं चलता हूँ फिर आउन्गा” मैने सुना तो मुझे यकीन हो गया कि मेरा प्लान कामयाब होने वाला है. नादानी हंसते हुए मेरे पास आई,’ भैया आपका दोस्त तो मुझे भाबी बोल कर बुला रहा था. लेकिन मुझे बुरा नहीं लगा” मैं हंस कर बोला” उस को कुच्छ पता नहीं है साला जो चाहे बोल देता है. मुझे खुशी है तुमने बुरा नहीं माना उसकी बात का”
खाना खाकर मैने अपनी बेहन को कहा,” वाह भाई,ऐसा खाना कितने दिन के बाद नसीब हुआ है. तुम जिसकी पत्नी बनोगी, खुश नसीब होगा, नादानी. बाज़ार का खाना खा कर तो मैं तंग आ चुका हूँ.”
नमस्कार दोस्तो, मेरा नाम अनुभव त्रिवेदी है. मैं सहारनपुर का रहने वाला हूँ. मैं इस टाइम बॅंगलॉर मे एक आइटी फर्म मे जॉब करता हूँ. मेरे घर मे मेरी माँ और मेरी एक बहन है. मेरे पिता जी का देहांत बहुत पहले हो गया था. मैं सेक्स स्टोरी हमेशा पढ़ता हूँ. दोस्तो मैने सोचा क्यूँ ना आज मैं आप सबके साथ अपनी स्टोरी शेयर करू. ये कहानी बहुत ही हॉट हैं. मुझे पता है इसे पढ़ कर लड़के अपना लंड और लड़किया अपनी चूत को शांत ज़रूर करेंगे. बहन का पति बना मैं.
मेरी बेहन नादानी भी जवान हो चुकी है और उसके रिश्ते की बात चल रही है. नादानी की उमर कोई 20 साल की हो चुकी है. मेरी बेहन बहुत सुंदर और सेक्सी है. पढ़ाई पूरी नहीं कर सकी क्यों कि उसका चक्कर उसके एक टीचर के साथ चल रहा था और दोनो शादी भी करने वाले थे लेकिन उसका आशिक उसको धोखा दे कर भाग गया. नादानी मेरी माँ का जवानी का रूप है, गोरी चिटी, मस्त जवानी है उसकी. बस स्लिम है और बहुत ही कसा हुआ बदन है उसका. मेरा प्लान बॅंगलॉर में जा कर एक घर लेना है और वहीं पर बिज़्नेस करना है. वहाँ फोटोग्राफर का काम बहुत है. नादानी बेशक मेरी सग़ी बेहन है, लेकिन उसके हुश्न ने मुझ पर जादू कर रखा है.
एक दिन मैने अपनी बेहन को नहाते हुए देखा था. क्या ज़ालिम हुश्न है मेरी बेहन का! गोरे बदन पर जब वो साबुन मल कर नहा रही थी तो मेरा लंड काबू में नहीं रहा. उसके हाथ कभी उसकी मस्त चुचि पर और कभी उसकी मस्त गोरी गोल गान्ड पर चलते और मेरे दिल की धड़कन तेज़ होती रही. मैं बाथरूम के दरवाज़े के छेद से सारा नज़ारा देख रहा था और अपनी पॅंट की ज़िप खोल कर लंड की मूठ मार रहा था. मेरा हाल बुरा हो रहा था. उधर मेरा लंड छूट जाने के नज़दीक था. मैं अपने हाथ से लंड को उपर नीचे करता हुआ झड गया. लेकिन मेरी बेहन नादानी के नंगे जिस्म की तस्वीर मेरी आँखों से ओझल ना हो पाई. उस दिन मैने फ़ैसला कर लिया कि नादानी को अपनी पत्नी बना कर ही दम लूँगा.
नादानी के लिए जो भी रिश्ता आता मैं उसको ना में बदल देता. जो लड़का भी शादी के लिए होता मैं उसको बदचलन और निकम्मा कह कर रिश्ता तोड़ देता.” हे भगवान, सभी लड़के किसी काम के नहीं हैं! ना जाने कब कोई अच्छा लड़का मिलेगा मेरी बेटी को! अब सारी उमर तो अपनी बेटी को घर में बिठा कर तो नहीं रख सकती, अनुभव” मेरी माँ ने एक दिन तंग आ कर मुझ से कहा. लेकिन मेरी आँखें तो अपनी बेहन के नंगे जिस्म की तस्वीर देख कर उसको चोद रही थी.” मैने कहा माँ मैं बॅंगलॉर जा कर कोई लड़का देखता हूँ. तुम कोई फिकर मत करो.”
मैं बॅंगलॉर चला गया और मेरा कम चल पड़ा. दो महीने के बाद माँ का फोन आया,” अनुभव बेटा, कोई लड़का मिला क्या? मुझे चिंता सता रही है कि तेरी बेहन जवान हो चुकी है और अगर किसी लड़के के साथ कुच्छ कर बैठी तो हमारी बहुत बदनामी हो जाएगी. मैं जानती हूँ कि जवानी का एक एक दिन कितना व्याकुल करता है लड़की को. नादानी जैसी लड़की को कोई भी लूट लेना चाहेगा. तुम जल्दी कुच्छ करो” मैं तो खुद कुच्छ करना चाहता था कि मैं नादानी को अपना बना सकूँ.”
मैने कहा माँ तुम उसको मेरे पास भेज दो. उसका मन भी लग जाएगा और शायद कोई लड़का भी उसको पसंद कर ले,’ मैने लंड मसल्ते हुए कहा”
ठीक है मैं कल तेरी बेहन को भेज रही हूँ, अपना ख्याल रखना” माँ ने कहा. मेरा दिल बाग बाग हो गया.
अपने घर में मेरे दो कमरे हैं. एक को मैने अपनी नादानी के लिए तैयार किया. कमरा सजाया, और उसमे वेब कॅम फिट किया जो कि उसके कमरे की सारी फिल्म बना कर रेकॉर्डिंग करे. उस कॅमरा का कनेक्षन अपने स्टूडियो से जोड़ दिया. मुझे पता तो चले कि मेरी बहना रानी कितनी उतावली हो रही है बिना किसी मर्द के लंड के? अपने रूम में मैने वी सी आर और कुच्छ ब्लू फिल्म्स रख डाली और कुच्छ मस्तराम की किताबें अलमारी में रखी. मैं अपनी बेहन को पटा कर चोद देने की ताक में था.
अगले दिन शनिवार को नादानी को मैं स्टेशन से लेने गया. नादानी ने ब्लॅक जीन्स और येल्लो टीशर्ट पहनी हुई थी और उसके बाल छोटे कटे हुए थे. उसके सीने का उभार देख कर मेरे दिल की धड़कन तेज़ हो गयी. नादानी बिल्कुल उर्मिला मातोंडकर दिख रही थी. उसकी चुचि किसी पहाड़ी की चोटी की माफिक खड़ी थी. लोग उसको घूर रहे थे. जब नादानी ने मुझे देखा तो दौड़ कर मेरी बाहों में आ गयी. आलिंगन में लेते ही मुझे उसके जिस्म की मादक सुगंध महसूस हुई और उसकी चुचि मेरे सीने के अंदर घुसने को व्याकुल थी.” कैसी हो, नादानी? कब से तेरी रह देख रहा था. वाह, मेरी बहना तू तो और भी सुंदर हो गयी है!बहुत प्यारी लग रही है मेरी बहना!” मैने कहा तो नादानी बोल उठी,” सच भैया? मैं तो सोच रही थी कि तुम मेरी राह कम देख रहे थे और कुच्छ और अधिक देख रहे थे. भैया लड़कियाँ मर्दों की नज़र पहचान लेती है. वैसे तुम भी बहुत सेक्सी दिख रहे हो! लगता है बॅंगलॉर का असर है”
मुझे लगा कि नादानी ने मुझे उसकी चुचि को घूरते हुए देख लिया था. मैं शरम के मारे चुप रहा. रास्ते में मोटरसाइकल पर जब मैं ब्रेक मारता तो नादानी का सीना मेरी पीठ से जा टकराता और मेरी पॅंट में तंबू बन जाता. मुझे महसूस हो रहा था कि नादानी शरारती ढंग से मुस्कुरा रही थी.
“मुझे अच्छी तरह से पकड़ कर रखो, कहीं गिर ना जाना!” मैने कहा तो नादानी ने मुझे कमर से कस के पकड़ लिया और उसका हाथ मेरे लंड से कोई अधिक दूर नहीं था. उसकी साँस मेरी गर्दन से टकरा रही थी. उत्तेजना की हालत में हम घर पहुँच गये.
” भैया रसोई कहाँ है? मैं कुच्छ खाना बना देती हूँ’ घर जा कर नादानी ने कहा. रसोई तो मैने खोली भी नहीं थी.” रसोई तो बंद है, मेरी बहना, खाना तो बाज़ार से लाता हूँ. मैं खाना बनाना नहीं जानता, यह तो तुम जानती ही हो” मैने कहा तो नादानी मुझ से लिपट कर बोली,’ भैया, बिना औरत के घर घर नहीं होता. अब मैं आ गयी हूँ तो आपके मकान को घर में बदल दूँगी. आप जा कर सब्ज़ी वग़ैरा ले आएँ फिर देखना मेरा कमाल”
मैं अपनी बेहन को आलिंगन में ले कर खड़ा रहा और प्यार से उसकी गान्ड पर हाथ फेरने लगा और वो भी मेरे लंड पर अपनी चूत को रगड़ने लगी. मुझे पता ही नहीं चला जब मेरे होंठ नादानी के होंठों से जा टकराए तो वो अलग होती हुई बोली,” भैया, बस करो अब. अपनी बेहन को प्यार दिखाने का बहुत वक्त है, आप बाज़ार जाएँ और समान ले आएँ”
खड़े लंड को ज़बरदस्ती बिठाते हुए मैं बाज़ार चला गया. समान खरीदा और वापिस आने ही वाला था कि सेल फोन बज उठा. फोन नादानी का था,” भैया मेरे लिए एक ओडमोस लेते आना, यहाँ मच्छर बहुत हैं” मैं केमिस्ट की दुकान पर चला गया. वहाँ मुझे एक बॉटल ऐसी मेडिसिन की भी मिली जिसको पिलाने से औरत पर वो असर होता है जो मर्द पर वियाग्रा का होता है. घर आया तो नादानी मेरे कमरे में बैठी मस्तराम की किताब पढ़ रही थी. मेरा अंदाज़ा ठीक निकला. ऐसी किताब पढ़ने से मेरी बेहन के बदन में बिजली ज़रूर भड़के गी. मुझे देख कर उसने किताब छुपा ली और मैं उसको समान दे कर बोला,” अब मैं दुकान पर जा रहा हूँ. शाम को खाना खाएँगे, तुम डोर बंद रखना”
स्टूडियो में जा कर मैने अपनी बेहन की फिल्म देखनी शुरू कर दी. वेब कॅम ठीक काम कर रहा था. नादानी अपने कपड़े बदल रही थी. मुझे उसकी तस्वीर के साथ आवाज़ भी सुनाई पड़ रही थी. नादानी ने अपनी टीशर्ट उतारी और उसकी चुचि चमक उठी. वो मस्तराम की किताब ले कर अपने बिस्तर में बैठी हुई थी और एक हाथ से अपनी चुचि मसल रही थी.” वा भैया, किताब तो बहुत मस्त रखी हुई है घर में! साले बेह्न्चोद अनुभव, स्टेशन पर तो बहुत घूर रहे थे अपनी नादानी बेहन की चुचि को. क्या बात है अपनी बेहन को पत्नी बनाने का प्लान तो नहीं है? मेरे बेह्न्चोद भाई, मैं जानती हूँ तुम मुझे नहाते हुए देख रहे थे. अब कितनी देर लगाओगे मुझे अपनाने में? नादानी की चूत बेकाबू हो जाती है भैया आपके लंड को याद कर के”
मैं हैरान रह गया. मैं तो मैं, मेरी नादानी खुद मेरी पत्नी बन जाना चाहती थी! मैने पॅंट की ज़िप खोली और घर फोन लगाया. नादानी ने उठाया तो मैने पुछा,” नादानी, मेरी बेहन क्या कर रही हो?” मेरा हाथ मेरे लंड को सहला रहा था. वेब कॅम में अब मेरी बहना अपनी चूत को मसल रही थी.” कुच्छ नहीं भैया कुच्छ ज़रूरी काम कर रही थी. क्या बात है भैया?”
मैने कहा,” कुच्छ नहीं, बस तेरी याद आ रही थी. खैर मैं जल्दी ही आ जाउन्गा” तभी मेरा दोस्त हफ़ीज़ आ गया. मैने उसको कुच्छ उधार दे चुका था. वो वापिस करने आया था लेकिन मैं उसको घर आ आकर पैसे वापिस करने को कहा,” यार और साथ में अपनी भाबी को भी देख लेना” हफ़ीज़ हंस कर बोला,” साले बेह्न्चोद, भाबी भी ले आया और बताया भी नहीं?”
शाम को हफ़ीज़ पैसे देने आया तो मैने नादानी को डोर खोलने को बोला,” भाबी जी नमस्ते, ये पैसे अनुभव भाई को देने थे. क्यों भाबी, ये साला आपको कहाँ छुपा कर रखता है? इतनी सुंदर बीवी अपने यारों से छुपा कर रखता है साला. अच्छा भाबी मैं चलता हूँ फिर आउन्गा” मैने सुना तो मुझे यकीन हो गया कि मेरा प्लान कामयाब होने वाला है. नादानी हंसते हुए मेरे पास आई,’ भैया आपका दोस्त तो मुझे भाबी बोल कर बुला रहा था. लेकिन मुझे बुरा नहीं लगा” मैं हंस कर बोला” उस को कुच्छ पता नहीं है साला जो चाहे बोल देता है. मुझे खुशी है तुमने बुरा नहीं माना उसकी बात का”
खाना खाकर मैने अपनी बेहन को कहा,” वाह भाई,ऐसा खाना कितने दिन के बाद नसीब हुआ है. तुम जिसकी पत्नी बनोगी, खुश नसीब होगा, नादानी. बाज़ार का खाना खा कर तो मैं तंग आ चुका हूँ.”